महाकाल की नगरी उज्जैन में भक्ति का उत्सव: लगातार 16 घंटे नृत्यांजलि, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

उज्जैन। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में गंगा दशहरा के अवसर पर भक्ति और कला का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। मंगलवार सुबह 6:30 बजे से यहां अखंड नृत्य आराधना का आयोजन शुरू हुआ, जो लगातार 16 घंटे तक बिना रुके चलेगा और भगवान महाकाल की शयन आरती तक भक्तिमय प्रस्तुतियों का सिलसिला जारी रहेगा। इस विशेष आयोजन में विभिन्न आयु वर्ग के कलाकार भाग ले रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि 4 वर्ष की छोटी बच्चियों से लेकर 40 वर्ष तक की महिला कलाकार इस नृत्यांजलि में अपनी प्रस्तुतियां दे रही हैं। सभी कलाकार भगवान शिव, गणेश वंदना, माता की आराधना, भजन और लोकगीतों पर आधारित नृत्य प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया है। कार्यक्रम में 50 से अधिक कलाकारों की भागीदारी है। प्रत्येक समूह को 15 से 20 मिनट का समय निर्धारित किया गया है, ताकि लगातार चलने वाली इस नृत्य आराधना में भक्ति की धारा निर्बाध रूप से बहती रहे। इसके साथ ही विद्यार्थियों द्वारा किया जा रहा तबला वादन भी कार्यक्रम का विशेष आकर्षण बना हुआ है। महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित यह नृत्य आराधना केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भक्ति और परंपरा का जीवंत रूप है। मंदिर परिसर में गूंजते भजनों और नृत्य की लय ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया है। दूर-दूर से आए भक्त इस अद्भुत दृश्य को देखकर भावविभोर हो रहे हैं। इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निरंतरता और अनुशासन है, जिसमें कलाकार बिना किसी विराम के अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं। पूरा वातावरण शिव भक्ति में डूबा हुआ नजर आ रहा है। यह परंपरा रसराज प्रभात नृत्य संस्थान द्वारा पिछले 38 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। संस्थान द्वारा इस आयोजन की तैयारी लगभग एक महीने पहले से शुरू कर दी जाती है। कलाकारों ने शहर के विभिन्न स्थानों पर अभ्यास कर इस भव्य प्रस्तुति के लिए खुद को तैयार किया है। कार्यक्रम में संस्थापक राज कुमुद ठोलिया सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि अर्पण भारद्वाज और गोविंद गंधे ने भी आयोजन की सराहना की। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में संजय मिश्रा, पंडित विशाल शुक्ला और भारती सिंह राजपूत की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया। महाकाल मंदिर का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय संस्कृति, नृत्य और संगीत की समृद्ध परंपरा को भी जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
भारत के डेट मार्केट में नई क्रांति की आहट: कॉरपोरेट बॉन्ड सेक्टर को मजबूत करने के लिए बन रही नई रणनीति

नई दिल्ली । भारत के वित्तीय बाजार को अधिक मजबूत, आधुनिक और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी तेज होती दिखाई दे रही है। देश में कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट को नई मजबूती देने के लिए कई सुधारों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें टोकनाइजेशन मॉडल और नियामकीय ढांचे में बदलाव प्रमुख माने जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य न केवल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना है, बल्कि लंबे समय के लिए पूंजी जुटाने के विकल्पों को भी अधिक प्रभावी बनाना है।बॉन्ड बाजार को नई तकनीक से जोड़ने की तैयारी वित्तीय क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में पारंपरिक निवेश प्रणालियों के साथ तकनीकी ढांचे का जुड़ना बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है। इसी सोच के तहत कॉरपोरेट बॉन्ड्स के टोकनाइजेशन मॉडल पर विचार किया जा रहा है। इस व्यवस्था के माध्यम से बॉन्ड निवेश प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया जा सकता है। माना जा रहा है कि इससे छोटे निवेशकों की पहुंच भी बॉन्ड बाजार तक आसानी से बढ़ सकेगी। भारत की अर्थव्यवस्था लगातार विस्तार की ओर बढ़ रही है और ऐसे समय में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, औद्योगिक निवेश और दीर्घकालिक योजनाओं के लिए पर्याप्त पूंजी की आवश्यकता बनी रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बैंकिंग व्यवस्था पर निर्भर रहना भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। ऐसे में कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में उभर सकता है। रिटेल निवेशकों पर विशेष फोकस बाजार से जुड़े जानकारों का मानना है कि रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ाए बिना बॉन्ड बाजार को व्यापक स्तर पर मजबूत करना आसान नहीं होगा। हालांकि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में निवेशक इक्विटी और अन्य पारंपरिक विकल्पों की ओर आकर्षित रहते हैं, जबकि बॉन्ड बाजार को समझने और उसमें निवेश करने वालों की संख्या अपेक्षाकृत कम है। ऐसे में नई योजनाओं और तकनीकी सुधारों के माध्यम से निवेशकों को सरल और सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि निवेशकों को बॉन्ड उत्पादों की बेहतर जानकारी और आसान निवेश प्रक्रिया उपलब्ध होती है तो भविष्य में इस क्षेत्र में बड़ी भागीदारी देखने को मिल सकती है। इससे पूंजी बाजार का दायरा बढ़ेगा और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। नियमों की समीक्षा से बढ़ सकती है पारदर्शिता कॉरपोरेट बॉन्ड क्षेत्र को अधिक संगठित और पारदर्शी बनाने के लिए नियामकीय ढांचे में भी कई बदलावों पर विचार किया जा रहा है। म्युनिसिपल बॉन्ड्स से जुड़े नियमों की समीक्षा के साथ-साथ डेट ब्रोकर्स के लिए अलग व्यवस्था बनाने की संभावना भी देखी जा रही है। इसका उद्देश्य बाजार में स्पष्टता और निवेशकों का भरोसा बढ़ाना माना जा रहा है। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार यदि इन सुधारों को प्रभावी तरीके से लागू किया गया तो आने वाले समय में भारत का बॉन्ड बाजार अधिक गहरा और मजबूत बन सकता है। इससे कंपनियों को फंड जुटाने के नए विकल्प मिलेंगे, निवेशकों को विविध अवसर प्राप्त होंगे और देश के पूंजी बाजार को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
शिप्रा शुद्धिकरण की मांग को लेकर अनशन: प्रशासन ने कराया समाप्त, आंदोलनकारियों ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम

इंदौर। इंदौर में मंगलवार को शिप्रा नदी के शुद्धिकरण और संरक्षण की मांग को लेकर एक बड़ा आंदोलन शुरू होते-होते टल गया। मालवा रक्षा अनुष्ठान के संयोजक और अधिवक्ता आचार्य सत्यम सत्यनारायण पुरोहित ने नृसिंह घाट पर आमरण अनशन की घोषणा की थी, लेकिन प्रशासनिक हस्तक्षेप और बातचीत के बाद उन्होंने फिलहाल अपना अनशन स्थगित कर दिया। आचार्य सत्यम मंगलवार सुबह 10 बजे नृसिंह घाट पर अनशन शुरू करने पहुंचे थे। उनकी मांग थी कि शिप्रा नदी के संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं। जैसे ही इसकी जानकारी प्रशासन और पुलिस को मिली, महाकाल थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। थाना प्रभारी गगन बादल और एसआई चंद्रभान सिंह ने आचार्य से बातचीत कर उन्हें शांत करने का प्रयास किया। कुछ ही देर बाद एसडीएम एलेन गर्ग भी मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारी की सभी मांगों को गंभीरता से सुना। नगर निगम के उपायुक्त संतोष टैगोर ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और बातचीत की। लगभग एक घंटे तक चली समझाइश और चर्चा के बाद प्रशासन ने आश्वासन दिया कि आचार्य की मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद आचार्य सत्यम ने अपना अनशन फिलहाल स्थगित करने का निर्णय लिया, लेकिन उन्होंने प्रशासन को 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। आचार्य ने आरोप लगाया कि शिप्रा नदी के किनारे अब तक पर्याप्त पौधारोपण नहीं किया गया है, जबकि यह कार्य पर्यावरण संतुलन के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि 29 किलोमीटर घाट निर्माण के दौरान निकली मिट्टी को सीधे नदी में डाल दिया गया, जिससे नदी की स्थिति और खराब हुई है। इसके अलावा उन्होंने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों के पालन पर भी सवाल उठाए और कहा कि कई निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। उनके अनुसार, यदि प्रशासन ने सात दिन के भीतर ठोस कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा। प्रशासन ने इस मामले में ज्ञापन लेकर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है और कहा है कि सभी बिंदुओं पर जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल मौके पर शांति बनी हुई है, लेकिन शिप्रा नदी संरक्षण को लेकर उठे सवाल एक बार फिर चर्चा में हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की लहर से निवेशकों की बल्ले-बल्ले, ताइवान बाजार ने भारत को पीछे छोड़ा

नई दिल्ली । वैश्विक शेयर बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर सेक्टर का बढ़ता प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। तकनीकी बदलाव और चिप उद्योग की बढ़ती मांग ने एशियाई बाजारों को नई दिशा दी है। इसी क्रम में ताइवान का शेयर बाजार तेजी से उभरते हुए दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा बाजार बन गया है। इस उपलब्धि के पीछे सेमीकंडक्टर कंपनियों की मजबूत रैली और AI आधारित निवेश का बड़ा योगदान माना जा रहा है। AI क्रांति ने बदली बाजार की तस्वीरबीते कुछ समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक को लेकर दुनिया भर में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। AI आधारित सेवाओं, डाटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और स्मार्ट तकनीकों की बढ़ती मांग ने चिप निर्माण कंपनियों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। इसका सीधा असर उन देशों के शेयर बाजारों पर पड़ा है जो तकनीकी निर्माण और सेमीकंडक्टर उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। ताइवान इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ उठाने वाले देशों में शामिल हो गया है। बाजार पूंजीकरण के लिहाज से उसका शेयर बाजार अब लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका है। इस उपलब्धि के साथ वैश्विक स्तर पर केवल अमेरिका, चीन, जापान और हांगकांग उससे आगे बने हुए हैं। एक कंपनी ने खींचा पूरे बाजार को ऊपरविशेषज्ञों का मानना है कि इस तेज रफ्तार के पीछे सबसे महत्वपूर्ण भूमिका देश की अग्रणी सेमीकंडक्टर कंपनी की रही है। इस कंपनी का बाजार पर इतना प्रभाव बढ़ चुका है कि प्रमुख इंडेक्स में इसका भार 40 प्रतिशत से अधिक तक पहुंच गया है। इसका अर्थ यह है कि कंपनी के प्रदर्शन का असर पूरे बाजार की दिशा पर दिखाई देता है। वर्ष 2026 में कंपनी के शेयरों ने करीब 50 प्रतिशत तक रिटर्न दिया है। AI आधारित तकनीकों के विस्तार के कारण चिप्स की मांग तेजी से बढ़ी है और इसका सीधा फायदा कंपनी को मिला है। निवेशकों ने भविष्य की संभावनाओं को देखते हुए इस क्षेत्र में भारी निवेश करना शुरू किया है। सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ा वैश्विक भरोसाताइवान के साथ दक्षिण कोरिया जैसे मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों को भी AI रैली का बड़ा फायदा मिला है। तकनीकी उद्योग से जुड़े बाजारों में निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। दक्षिण कोरिया का प्रमुख बाजार सूचकांक भी इस वर्ष उल्लेखनीय बढ़त दर्ज कर चुका है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि वैश्विक पूंजी अब तकनीकी निर्माण से जुड़े बाजारों की ओर तेजी से आकर्षित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में AI आधारित तकनीकों की मांग और बढ़ सकती है। इसके चलते सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश और विस्तार की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं। कई बड़े फंड और संस्थागत निवेशक भी इस क्षेत्र को दीर्घकालिक विकास के अवसर के रूप में देख रहे हैं। नए नियमों से निवेश को मिला सहाराबाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश से जुड़े नए नियमों ने भी तेजी को अतिरिक्त समर्थन दिया है। निवेश सीमा बढ़ने से घरेलू फंड्स के लिए बड़े तकनीकी शेयरों में निवेश का रास्ता और आसान हुआ है। माना जा रहा है कि इससे बाजार में अतिरिक्त पूंजी आने की संभावना और मजबूत हुई है। आने वाले समय में तकनीकी कंपनियां वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बन सकती हैं।
भारत के खतरे को लेकर पाकिस्तान में चिंता: विशेषज्ञों ने डिफेंस मजबूत करने की दी सलाह

नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच पाकिस्तान में एक बार फिर भारत की सैन्य क्षमता को लेकर चिंता बढ़ गई है। “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद से वहां के सुरक्षा विशेषज्ञ और रणनीतिक विश्लेषक भारत से संभावित भविष्य के सैन्य अभियानों को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। पाकिस्तान के रक्षा और रणनीतिक मामलों से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की बदलती सैन्य रणनीति और तकनीकी बढ़त को देखते हुए देश को अपनी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने की जरूरत है। उनका मानना है कि आधुनिक युद्ध तकनीक और नई रणनीतियां क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर रही हैं। भारत की सैन्य रणनीति पर पाकिस्तान की नजरकायदे-आज़म विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों के विशेषज्ञों ने कहा कि दक्षिण एशिया में रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद जरूरी है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत के सैन्य सिद्धांतों में बदलाव आ रहा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत की ओर से सर्जिकल स्ट्राइक और अन्य सीमित सैन्य कार्रवाइयों की रणनीति ने पाकिस्तान की सुरक्षा सोच को प्रभावित किया है। आधुनिक युद्ध तकनीक पर जोरपाकिस्तानी रक्षा विश्लेषकों ने कहा कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइपरसोनिक मिसाइलें और उन्नत निगरानी प्रणाली अहम भूमिका निभाएंगी। ऐसे में पाकिस्तान को भी अपनी सैन्य तकनीक को आधुनिक बनाने की जरूरत है। एयर कमोडोर (सेवानिवृत्त) खालिद बनूरी के अनुसार, युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और निर्णय लेने की गति अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। निष्कर्षकुल मिलाकर, पाकिस्तान में सुरक्षा विशेषज्ञ भारत की बढ़ती सैन्य क्षमता को एक रणनीतिक चुनौती के रूप में देख रहे हैं और सरकार को रक्षा सुधारों की सलाह दे रहे हैं। हालांकि, साथ ही यह भी माना जा रहा है कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए दोनों देशों के बीच संवाद और कूटनीति जरूरी है। टैग्सभारत पाकिस्तान, ऑपरेशन सिंदूर, पाकिस्तान डिफेंस, भारत सेना, दक्षिण एशिया तनाव, सैन्य विशेषज्ञ, ड्रोन वारफेयर, AI युद्ध तकनीक, हाइपरसोनिक मिसाइल, इस्लामाबाद, रणनीतिक स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय संबंध
सऊदी-इजरायल संबंध: MBS के रुख को लेकर दावे तेज, अब्राहम अकॉर्ड पर फिर बढ़ी हलचल

नई दिल्ली। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) को लेकर इजरायल को मान्यता देने के दावों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी माइक इवांस के बयान के बाद यह मुद्दा चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि MBS निजी बातचीत में इजरायल को मान्यता देने की इच्छा जता चुके हैं। इवांस के अनुसार, क्राउन प्रिंस ने कहा था कि वह इजरायल को मान्यता देने के पक्ष में हैं, लेकिन उनके पिता यानी सऊदी किंग सलमान के कारण यह निर्णय आगे नहीं बढ़ पा रहा है। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अब्राहम अकॉर्ड पर ट्रंप की सक्रियतापूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अब्राहम अकॉर्ड को विस्तार देने की कोशिशों में जुटे हैं। उन्होंने सऊदी अरब समेत कई मुस्लिम देशों पर इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने का दबाव बढ़ाया है। ट्रंप का कहना है कि इससे मध्य-पूर्व में शांति की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है। अब्राहम अकॉर्ड की शुरुआत 2020 में हुई थी, जब यूएई और बहरीन ने इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने पर सहमति जताई थी। बाद में मोरक्को, सूडान और कुछ अन्य देश भी इसमें शामिल हुए। सऊदी अरब का आधिकारिक रुखहालांकि सऊदी अरब की ओर से अब तक साफ कर दिया गया है कि जब तक फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता नहीं मिलती, तब तक वह इजरायल को मान्यता नहीं देगा। रियाद का कहना है कि फिलिस्तीन मुद्दे का समाधान ही किसी भी सामान्यीकरण की पहली शर्त है। राजनीतिक बयान और कूटनीतिक दबावमाइक इवांस ने दावा किया कि उन्होंने क्राउन प्रिंस के साथ लंबी बातचीत की थी, जिसमें इजरायल को लेकर सकारात्मक संकेत मिले थे। हालांकि इन दावों को लेकर कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है।दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन और उनके सहयोगी लगातार यह तर्क दे रहे हैं कि अब्राहम अकॉर्ड का विस्तार क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक सहयोग के लिए जरूरी है।
बरगी क्रूज हादसा मामला गरमाया: न्यायिक आयोग ने शुरू की जांच, उपभोक्ता मंच ने लगाए गंभीर आरोप

जबलपुर । जबलपुर के बरगी डैम में 30 अप्रैल को हुए भीषण क्रूज हादसे की न्यायिक जांच अब औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। इस हादसे में 13 पर्यटकों की मौत के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने रिटायर्ड हाईकोर्ट जज जस्टिस संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में जांच आयोग गठित किया है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट के कमरा नंबर-43 में आयोग के समक्ष इस मामले की पहली सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने हादसे से जुड़े कई तकनीकी और कानूनी पहलुओं को आयोग के सामने रखा। मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे और अधिवक्ता वेदप्रकाश अधौलिया ने दलील दी कि इंडियन वेसेल्स एक्ट 2021 के तहत ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो किसी दुर्घटनाग्रस्त जलयान (क्रूज) को जांच पूरी होने से पहले नष्ट करने की अनुमति देता हो। याचिका में यह भी कहा गया कि जिला प्रशासन ने जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही क्रूज को नष्ट कर दिया, जो नियमों और न्यायिक प्रक्रिया के विपरीत है। मंच ने इसे गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि इससे महत्वपूर्ण साक्ष्य भी नष्ट हो गए, जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 12 सितंबर 2023 के आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जलाशयों में चलने वाले क्रूज में केवल फोर स्ट्रोक इंजन का उपयोग किया जाए। इसके बावजूद दुर्घटनाग्रस्त क्रूज में तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया था और उसमें लगाया गया 100 हॉर्सपावर का इंजन कमजोर बताया जा रहा है। हादसे के समय उसका दूसरा इंजन भी कथित रूप से फेल हो गया था। याचिका में यह आरोप भी लगाया गया कि क्रूज संचालन के लिए आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति और तकनीकी फिटनेस प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं थे। यदि यह सच है, तो यह सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की ओर इशारा करता है। सबसे बड़ा सवाल यह उठाया गया कि जब क्रूज को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है, तो अब उसकी तकनीकी जांच किस आधार पर की जाएगी। आयोग के समक्ष यह भी कहा गया कि इससे दुर्घटना के कारणों की वैज्ञानिक जांच लगभग असंभव हो गई है। आयोग ने इन सभी बिंदुओं को गंभीरता से लेते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए वैधानिक और तकनीकी पहलुओं को जांच में शामिल किया जाएगा। साथ ही आयोग ने निर्देश दिया कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएं, ताकि निष्पक्ष जांच की जा सके। फिलहाल आयोग ने स्पष्ट किया है कि आगामी सुनवाई में सभी पक्षों को पूरा अवसर दिया जाएगा और मामले की गहराई से जांच की जाएगी। यह हादसा अब केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी लापरवाही के गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है।
भारत-इजरायल रक्षा संबंध: रिपोर्ट्स में बढ़ते दावों के बीच हकीकत क्या है?

नई दिल्ली। इजरायल को भारत द्वारा सबसे ज्यादा सैन्य साजो-सामान सप्लाई करने के दावों को लेकर हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बहस तेज हुई है, जिसमें कुछ रिपोर्ट्स भारत-इजरायल रक्षा व्यापार को गाजा युद्ध से जोड़कर प्रस्तुत कर रही हैं। इन रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भारत इजरायल को हथियार और रक्षा सामग्री सप्लाई करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है, लेकिन सरकारी आंकड़ों और रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भारत का कुल रक्षा निर्यात वैश्विक स्तर पर कई देशों में बंटा हुआ है और इजरायल उसका केवल एक छोटा हिस्सा है। भारत का रक्षा निर्यात और इजरायल की हिस्सेदारीआधिकारिक और वैश्विक रक्षा आंकड़ों के मुताबिक भारत का कुल रक्षा निर्यात अरबों डॉलर का है, जिसमें इजरायल को होने वाला निर्यात सीमित प्रतिशत में आता है। भारत के प्रमुख रक्षा साझेदारों में अमेरिका, फ्रांस, आर्मेनिया और कई एशियाई-अफ्रीकी देश शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और इजरायल के बीच रक्षा संबंध गाजा संघर्ष से काफी पहले से चले आ रहे हैं और यह एक सामान्य द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है, न कि किसी एक युद्ध से जुड़ा हुआ समझौता। रिपोर्ट्स और राजनीतिक बहसकुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि भारत की आपूर्ति इजरायल के सैन्य अभियानों से जुड़ी हो सकती है, लेकिन इन दावों को लेकर अलग-अलग विश्लेषण सामने आते हैं और कई विशेषज्ञ इसे सीमित और संदर्भ से बाहर बताया गया नैरेटिव मानते हैं।भारत सरकार की ओर से हमेशा यह रुख रहा है कि उसका रक्षा निर्यात अंतरराष्ट्रीय नियमों और वैध व्यापार समझौतों के तहत होता है और किसी भी संघर्ष में सीधी भागीदारी का आधार नहीं माना जा सकता। कुल मिलाकर भारत-इजरायल रक्षा संबंध लंबे समय से रणनीतिक और तकनीकी सहयोग पर आधारित हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में इसे लेकर अलग-अलग व्याख्याएं और राजनीतिक दृष्टिकोण देखने को मिलते हैं।
जबलपुर में बड़ा हादसा टला: प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच फंसा होमगार्ड, RPF ने दिखाया साहस

जबलपुर । जबलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-5 पर सोमवार शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवानों की तत्परता से एक होमगार्ड सैनिक की जान बचा ली गई। यह घटना 25 मई की बताई जा रही है, जिसका वीडियो अब सामने आया है और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारी के अनुसार, शाम करीब 5 बजे गाड़ी संख्या 22189 जबलपुर-रीवा इंटरसिटी एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म से रवाना हो रही थी। इसी दौरान एक यात्री चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश कर रहा था। ट्रेन की गति बढ़ने और संतुलन बिगड़ने के कारण उसका पैर फिसल गया और वह सीधे प्लेटफॉर्म और ट्रेन के बीच खतरनाक जगह पर गिर गया। जैसे ही यह घटना हुई, मौके पर मौजूद RPF जवानों ने तुरंत स्थिति को भांप लिया। ड्यूटी पर तैनात सहायक उप निरीक्षक धीरज कुमार और प्रधान आरक्षक भाग सिंह ने बिना देर किए यात्री की ओर दौड़ लगाई और उसे पकड़कर सुरक्षित बाहर खींच लिया। उनकी तेज प्रतिक्रिया और सूझबूझ के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। गिरने वाले यात्री की पहचान गुनागार तिवारी (56) के रूप में हुई है, जो वार्ड नंबर-16, खितोला बाजार, सिहोरा, जिला जबलपुर के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि वे होमगार्ड मुख्यालय, जबलपुर में पदस्थ हैं और उसी दौरान सिहोरा की ओर यात्रा कर रहे थे। घटना के दौरान यात्री को किसी प्रकार की गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन वह कुछ देर तक घबराया हुआ था। RPF जवानों ने तुरंत उसे सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर लाकर प्राथमिक सहायता दी और उसकी स्थिति सामान्य की। पूरी घटना स्टेशन पर लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि कैसे यात्री ट्रेन में चढ़ते समय फिसलता है और RPF जवान तुरंत उसे बचाने के लिए दौड़ पड़ते हैं। स्टेशन पर मौजूद अन्य यात्रियों ने भी RPF जवानों की त्वरित कार्रवाई और बहादुरी की सराहना की। लोगों का कहना है कि यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती तो यह हादसा जानलेवा साबित हो सकता था। फिलहाल रेलवे प्रशासन ने भी जवानों की इस सतर्कता की प्रशंसा की है और यात्रियों से अपील की है कि चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने की कोशिश न करें, क्योंकि यह जानलेवा हो सकता है।
जबलपुर में दिल दहला देने वाली वारदात: बेटे ने मां की हत्या की, टेबल फैन से सिर कुचला

जबलपुर। जबलपुर जिले के सिहोरा थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर-7 स्थित गढ़िया मोहल्ले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां घरेलू विवाद के दौरान एक बेटे ने अपनी ही मां की हत्या कर दी। यह पूरी वारदात सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 3 बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, आरोपी करण कोल देर रात शराब के नशे में घर लौटा था। घर पहुंचते ही उसने अपनी पत्नी कांति बाई कोल से खाना बनाने को कहा। पत्नी ने देर रात होने के कारण खाना बनाने से मना कर दिया, जिस पर वह गुस्से में आ गया और पत्नी के साथ मारपीट करने लगा। इस दौरान घर के दूसरे कमरे में सो रही उसकी मां गिरानी बाई कोल (65) ने आवाज सुनकर बीच-बचाव करने की कोशिश की। वह मौके पर पहुंचीं और बेटे को डांटते हुए शांत रहने और सोने को कहा। लेकिन स्थिति और बिगड़ गई। बताया जाता है कि मां ने जब उसे बार-बार समझाने की कोशिश की, तो आरोपी और अधिक आक्रोशित हो गया। दोनों के बीच कहासुनी बढ़ती गई और देखते ही देखते विवाद हिंसक रूप ले लिया। इसी दौरान गुस्से में आरोपी ने पास में रखा टेबल फैन उठाया और अपनी मां के सिर पर जोरदार वार कर दिया। हमले के बाद भी आरोपी लगातार मां पर हमला करता रहा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ीं। इस बीच पत्नी ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने उसके साथ भी मारपीट की। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलने पर मृतका के बड़े बेटे दशरथ को सूचना दी गई। वह तुरंत मौके पर पहुंचा और अपनी मां को खून से लथपथ हालत में पाया। परिजन उन्हें तत्काल सिहोरा स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी करण कोल की तलाश शुरू कर दी है। एएसपी सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि पति-पत्नी के बीच विवाद के दौरान मां बीच-बचाव करने आई थीं, जिसके चलते आरोपी ने गुस्से में आकर हमला कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर दी गई है। फिलहाल पूरा मामला घरेलू हिंसा और नशे के कारण हुई त्रासदी के रूप में सामने आ रहा है।