जब एक्टर की भविष्यवाणी सच निकली, बॉलीवुड में मच गया था सनसनी

नई दिल्ली । बॉलीवुड में कई कलाकार अपनी दमदार एक्टिंग और यादगार किरदारों के लिए हमेशा याद किए जाते हैं, लेकिन कुछ सितारों की जिंदगी से जुड़े किस्से उन्हें और भी खास बना देते हैं। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता संजीव कुमार भी ऐसे ही कलाकारों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी शानदार अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। खास बात यह है कि उन्होंने अपनी मौत को लेकर जो भविष्यवाणी की थी, वह बाद में सच साबित हुई। 1960 के दशक में फिल्मी करियर की शुरुआत करने वाले संजीव कुमार ने अपने अभिनय के दम पर इंडस्ट्री में अलग पहचान बनाई। एक समय ऐसा था जब वे अमिताभ बच्चन और शशि कपूर जैसे बड़े सितारों को कड़ी टक्कर देते थे। उनकी फिल्मों और किरदारों को दर्शकों ने खूब पसंद किया। उन्होंने गंभीर, कॉमिक और भावनात्मक हर तरह के रोल निभाकर खुद को बहुमुखी अभिनेता साबित किया। संजीव कुमार की जिंदगी से जुड़ा सबसे चर्चित किस्सा उनकी मौत की भविष्यवाणी से जुड़ा है। बताया जाता है कि एक इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया था कि कम उम्र में भी वे फिल्मों में बुजुर्गों के किरदार इतनी सहजता से कैसे निभा लेते हैं। इस पर अभिनेता ने बेहद चौंकाने वाला जवाब दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि वे कभी बूढ़े हो पाएंगे, क्योंकि उनके परिवार के ज्यादातर पुरुष 50 साल की उम्र से पहले ही दुनिया छोड़ चुके हैं। संजीव कुमार का मानना था कि वे भी 50 साल की उम्र तक जीवित नहीं रह पाएंगे। यही वजह थी कि वे कम उम्र में ही बड़े पर्दे पर बुजुर्ग किरदार निभाने में सहज महसूस करते थे। बाद में उनकी यह बात सच साबित हुई। 6 नवंबर 1985 को हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 47 साल थी। बताया जाता है कि उनके दादा, पिता और छोटे भाई का निधन भी कम उम्र में ही हो गया था। परिवार के इस इतिहास का असर संजीव कुमार की सोच पर भी पड़ा था और उन्हें अपनी उम्र को लेकर हमेशा आशंका बनी रहती थी। अपने करियर में संजीव कुमार ने कई यादगार फिल्मों में काम किया। शोले, त्रिशूल, अंगूर, पति पत्नी और वो और हीरो जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को आज भी सराहा जाता है। उनकी मौत के बाद भी उनकी कई फिल्में रिलीज हुईं, जो दर्शकों के बीच चर्चा में रहीं। संजीव कुमार भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी अदाकारी और उनसे जुड़े किस्से आज भी बॉलीवुड प्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं।
बकरा मंडियों में दिखी त्योहार की चमक, लाखों के बकरों ने खींचा ध्यान, खरीदारों के सामने बढ़ी नई चुनौतियां

नई दिल्ली। बकरीद के त्योहार से पहले देशभर की बकरा मंडियों में रौनक अपने चरम पर पहुंच गई है। उत्तर भारत से लेकर मध्य और पश्चिम भारत तक मंडियों में बड़ी संख्या में खरीदारों और व्यापारियों की भीड़ दिखाई दे रही है। त्योहार के करीब आते ही बाजारों में खरीदारी की रफ्तार बढ़ गई है और खास नस्ल के बकरों की मांग तेजी से बढ़ती नजर आ रही है। इस बार कई ऐसे बकरे लोगों का ध्यान खींच रहे हैं जिनकी कीमत लाखों रुपये तक पहुंच गई है।विशेष बकरों ने बढ़ाया आकर्षणदेश के कई शहरों की मंडियों में दूर-दराज इलाकों से व्यापारी अपने खास बकरे लेकर पहुंचे हैं। कई बकरे अपने भारी वजन, अलग पहचान और विशेष नस्ल के कारण चर्चा में बने हुए हैं। कुछ स्थानों पर ऐसे बकरे भी पहुंचे हैं जिनकी कीमत 11 लाख रुपये तक बताई जा रही है। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मंडियों का रुख कर रहे हैं। कई खरीदार इन बकरों के साथ तस्वीरें लेते भी दिखाई दे रहे हैं। त्योहारी बाजार में बढ़ी हलचलत्योहार नजदीक आने के साथ बाजारों में खरीदारी का माहौल और अधिक सक्रिय हो गया है। सुबह से देर रात तक मंडियों में भीड़ बनी हुई है। कई लोग अपनी पसंद और बजट के अनुसार बकरों का चयन कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ी है और आने वाले दिनों में इसमें और तेजी आने की उम्मीद है। महंगाई बनी बड़ी चुनौतीइस बार व्यापारियों और खरीदारों दोनों के सामने बढ़ती लागत एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। चारा, परिवहन और देखभाल का खर्च बढ़ने का असर बकरों की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई व्यापारियों का कहना है कि पहले की तुलना में खर्च काफी बढ़ चुका है, जिसके कारण कीमतों में भी अंतर दिखाई दे रहा है। दूसरी ओर ग्राहक भी बजट के हिसाब से खरीदारी करने की कोशिश कर रहे हैं। भीषण गर्मी ने बढ़ाई परेशानीत्योहार की तैयारियों के बीच तेज गर्मी ने भी चिंता बढ़ाई है। लगातार बढ़ते तापमान का असर व्यापारियों और पशुओं दोनों पर देखा जा रहा है। कई जगह व्यापारी बकरों को गर्मी से बचाने के लिए विशेष इंतजाम कर रहे हैं। छाया, पानी और देखभाल पर अतिरिक्त ध्यान दिया जा रहा है ताकि पशुओं की सेहत प्रभावित न हो। मंडियों में बढ़ी उम्मीदेंव्यापारियों को उम्मीद है कि त्योहार से पहले के अंतिम दिनों में बिक्री और बढ़ेगी। खरीदार भी अपने परिवार और परंपराओं के अनुसार तैयारी में जुटे हुए हैं। हर साल की तरह इस बार भी बकरीद की तैयारियों ने बाजारों में अलग उत्साह पैदा किया है और देशभर की मंडियां इस उत्साह का केंद्र बन गई हैं।
700 फिल्मों वाला बॉलीवुड स्टार: सलमान-शाहरुख भी रह गए पीछे

नई दिल्ली । हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपने दमदार अभिनय और लगातार मेहनत के बल पर लंबा और सफल करियर बनाया। कुछ सितारे अपने स्टारडम के लिए जाने गए, तो कुछ कलाकारों ने फिल्मों की संख्या के मामले में रिकॉर्ड कायम कर दिए। दिलचस्प बात यह है कि सबसे ज्यादा फिल्में करने की सूची में सिर्फ सुपरस्टार ही नहीं, बल्कि एक ऐसे अभिनेता का नाम सबसे ऊपर है जिसने विलेन, कॉमेडियन और कैरेक्टर रोल्स से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। सबसे ज्यादा फिल्में करने वाले कलाकारों की बात करें तो शक्ति कपूर इस सूची में सबसे आगे नजर आते हैं। शक्ति कपूर ने अपने करियर में 700 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। 80 और 90 के दशक में उन्होंने खलनायक और कॉमिक किरदारों से जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की। उनकी खास डायलॉग डिलीवरी और अलग अंदाज ने उन्हें बॉलीवुड का यादगार कलाकार बना दिया। इस सूची में दूसरा बड़ा नाम अनुपम खेर का है। अनुपम खेर ने 500 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है। उन्होंने गंभीर, कॉमिक और भावनात्मक हर तरह के किरदार निभाकर अपनी अलग पहचान बनाई। खास बात यह है कि लंबे समय से इंडस्ट्री में सक्रिय रहने के बावजूद आज भी वे लगातार फिल्मों और वेब सीरीज में नजर आते हैं। वहीं धर्मेंद्र भी बॉलीवुड के सबसे व्यस्त कलाकारों में शामिल रहे हैं। उन्होंने अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। एक्शन, रोमांस और पारिवारिक फिल्मों में उनकी लोकप्रियता दशकों तक बनी रही। उनका नाम हिंदी सिनेमा के सबसे सफल अभिनेताओं में गिना जाता है। कॉमेडी की दुनिया के मशहूर कलाकार जॉनी लीवर ने भी 280 से ज्यादा फिल्मों में काम कर दर्शकों को खूब हंसाया। उनकी कॉमिक टाइमिंग और अलग अंदाज ने उन्हें बॉलीवुड का सबसे लोकप्रिय कॉमेडियन बना दिया। इसके अलावा परेश रावल ने 250 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया है। कॉमेडी से लेकर निगेटिव और गंभीर किरदारों तक, उन्होंने हर भूमिका में अपनी छाप छोड़ी। उनकी कई फिल्में आज भी दर्शकों की पसंदीदा मानी जाती हैं। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन भी इस सूची में शामिल हैं। उन्होंने 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है और उम्र के इस पड़ाव पर भी लगातार सक्रिय हैं। वहीं अक्षय कुमार ने 150 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय कर खुद को इंडस्ट्री के सबसे व्यस्त सितारों में शामिल किया है। इन कलाकारों ने साबित किया कि मेहनत, निरंतरता और दर्शकों का प्यार किसी भी अभिनेता को इतिहास में खास जगह दिला सकता है।
बैन विवाद पर रणवीर सिंह की टीम की सफाई, बोले- सोच-समझकर रखी चुप्पी

नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह और फरहान अख्तर के बीच फिल्म डॉन 3 को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। Federation of Western India Cine Employees यानी FWICE द्वारा रणवीर सिंह को बैन किए जाने के बाद अब पहली बार उनकी टीम की तरफ से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। रणवीर के प्रवक्ता ने साफ किया है कि अभिनेता ने इस पूरे विवाद पर जानबूझकर चुप्पी बनाए रखी थी, क्योंकि वे निजी और पेशेवर मामलों को सार्वजनिक बहस का हिस्सा नहीं बनाना चाहते थे। रणवीर सिंह की टीम की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अभिनेता फिल्म इंडस्ट्री और डॉन 3 फ्रैंचाइजी से जुड़े सभी लोगों का सम्मान करते हैं। बयान के मुताबिक, रणवीर का मानना है कि प्रोफेशनल बातचीत और व्यक्तिगत रिश्तों को गरिमा, परिपक्वता और आपसी सम्मान के साथ संभाला जाना चाहिए। इसी वजह से उन्होंने विवाद के दौरान सामने आई अटकलों और चर्चाओं पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं समझा। टीम ने यह भी कहा कि रणवीर का पूरा ध्यान फिलहाल अपने काम और आने वाले प्रोजेक्ट्स पर है। उन्होंने कभी भी विवाद को हवा देने या किसी पर सार्वजनिक टिप्पणी करने की कोशिश नहीं की। बयान में यह भी जोड़ा गया कि अभिनेता डॉन 3 से जुड़े सभी कलाकारों और निर्माताओं की सफलता की कामना करते हैं और आगे भी धैर्य और शांति बनाए रखेंगे। दरअसल, विवाद की शुरुआत तब हुई जब अप्रैल 2026 में फरहान अख्तर की प्रोडक्शन कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट ने रणवीर सिंह के खिलाफ FWICE में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रणवीर ने कंपनी के साथ तीन फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था और उनमें से एक फिल्म प्री-प्रोडक्शन स्टेज में पहुंच चुकी थी। लेकिन शूटिंग शुरू होने से करीब तीन सप्ताह पहले अभिनेता ने अचानक फिल्म छोड़ दी, जिससे प्रोडक्शन हाउस को लगभग 45 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। FWICE के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद रणवीर सिंह को हर 10 दिन के अंतराल पर तीन नोटिस भेजे गए थे। इसके बावजूद संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संगठन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अभिनेता को बैन करने का फैसला लिया। संगठन ने फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों से अपील की है कि जब तक नुकसान की भरपाई नहीं होती, तब तक रणवीर के साथ काम न किया जाए। इस पूरे घटनाक्रम ने बॉलीवुड इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच समझौता होता है या विवाद और बढ़ता है।
Gwalior family dispue: मां बेटी के बिच बिस्तर को लेकर हुई लड़ाई, समझते वक्त पिता को आया हार्ट अटैक

HIGHLIGHTS: ग्वालियर में मां-बेटी के विवाद के बीच पिता की मौत बिस्तर को लेकर शुरू हुआ था पारिवारिक झगड़ा समझाने पहुंचे अनिल कपूर को आया हार्ट अटैक अस्पताल पहुंचने से पहले ही हुई मौत परिवार के रिश्तों की कहानी भी चर्चा में आई Gwalior family dispue: ग्वालियर। कोतवाली थाना क्षेत्र के वैकुंठ अपार्टमेंट से एक खतरनाक मामला सामने आया है जहां पारिवारिक विवाद में पिता को अचानक हार्ट अटैक आ गया जिसके बाद उनकी मौत हो गयी। बता दें कि रविवार रात बिस्तर को लेकर अनिल कपूर की पत्नी रितु कपूर और बेटी मानसी कपूर के बीच विवाद शुरू हुआ था, इस दौरान समझते वक्त अनिल की तबियत ख़राब हो गयी। LPG उपभोक्ताओं को बड़ी राहत…. PNG कनेक्शन लेने पर सरेंडर नहीं होगा सिलेंडर, बदला नियम! समझाते वक्त ज़्यादा बिगड़ी तबियत परिवार में बढ़ते विवाद को देखकर अनिल कपूर दोनों को समझाने पहुंचे। इसी दौरान अचानक उनके सीने में तेज दर्द उठा और वह जमीन पर गिर पड़े। जिसके बाद परिवार के लोग तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि डॉक्टरों ने हार्ट अटैक से मौत की आशंका जताई है। चारधाम यात्रा : अब तक 22 लाख तीर्थयात्री कर चुके हैं दर्शन…. 5 हफ्तों में 92 श्रद्धालुओं की मौत अनिल कपूर की पहली शादी चर्चा में जांच के दौरान पता चला कि अनिल कपूर की पहली पत्नी कंचन की साल 2019 में मौत हो गई थी जिसके बाद में साल 2023 में उन्होंने अपनी साली रितु कपूर से शादी की थी। रितु की बेटी मानसी को बचपन में ही कंचन और अनिल ने गोद लिया था, शादी के बाद मानसी कुछ दिनों के लिए मायके आई हुई थी इसी दौरान घर में यह विवाद हुआ।
LPG उपभोक्ताओं को बड़ी राहत…. PNG कनेक्शन लेने पर सरेंडर नहीं होगा सिलेंडर, बदला नियम!

नई दिल्ली। केंद्र सरकार (Central Government) ने घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं (Domestic LPG consumers) को राहत देने के लिए एलपीजी सप्लाई और वितरण नियमों में बड़ा बदलाव किया है. केंद्र सरकार ने 25 मई 2026 को ‘लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन) संशोधन आदेश 2026’ को अधिसूचित किया. इस संशोधन का उद्देश्य उन उपभोक्ताओं को अधिक सुविधा देना है, जिन्होंने PNG कनेक्शन ले लिया है। ऐसे में नए नियमों के तहत पीएनजी लेने पर अब उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन हमेशा के लिए सरेंडर करने की मजबूरी नहीं होगी। दरअसल, मिडिल ईस्ट संकट के चलते एलपीजी सिलेंडरों को लेकर चल रही वेटिंग को कम करने के लिए सरकार लोगों को लगातार पीएनजी कनेक्शन लेने की सलाह दे रही है. इसको लेकर हाल ही में सरकार ने पीएनजी कनेक्शन के आवेदन पर 7 दिनों के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे. इस बीच सरकार पीएनजी कनेक्शन लेने वालों को और सुविधा देने जा रही है। पेट्रोल-डीजल के स्टॉक पर सरकार का बड़ा बयानअब नए नियमों के तहत एलपीजी उपभोक्ताओं के पास दो विकल्प होंगे. पहला, यदि किसी उपभोक्ता ने PNG कनेक्शन ले लिया है तो वह 30 दिनों के भीतर अपने एलपीजी कनेक्शन को बंद कराने के लिए आवेदन कर सकता है. दूसरा, उपभोक्ता चाहें तो भविष्य में एलपीजी कनेक्शन दोबारा शुरू कराने के लिए ट्रांसफर वाउचर प्राप्त कर सकते हैं. सरकार के अनुसार यह ट्रांसफर वाउचर उन लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा जो नौकरी, पढ़ाई या अन्य कारणों से ऐसे क्षेत्रों में स्थानांतरित होते रहते हैं जहां PNG की सुविधा उपलब्ध नहीं है. ऐसे मामलों में उपभोक्ता भविष्य में गैर-PNG क्षेत्र में जाने पर आसानी से अपना एलपीजी कनेक्शन फिर से बहाल करा सकेंगे। यह नई व्यवस्था विशेष रूप से ट्रांसफरेबल नौकरी करने वाले कर्मचारियों, प्रवासी परिवारों, किराएदारों, छात्रों और उन परिवारों के लिए लाभकारी मानी जा रही है जो समय-समय पर शहर बदलते रहते हैं। सरकार का कहना है कि इस संशोधन से उपभोक्ताओं को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी और उन्हें बार-बार नए एलपीजी कनेक्शन लेने की प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा. साथ ही PNG और LPG दोनों सुविधाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।
ट्विशा शर्मा मौत मामला….. पति समर्थ में पूछताछ में उगले राज…. जानिए क्या हुआ था उस रात?

भोपाल। भोपाल (Bhopal) में मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की संदिग्ध मौत के मामले में देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) ने कमान संभाल ली है. सोमवार को सीबीआई ने भोपाल पुलिस से केस डायरी और तमाम दस्तावेज अपने कब्जे में लेकर नए सिरे से एफआईआर दर्ज की है. इस बड़े घटनाक्रम के बीच, भोपाल की कटारा हिल्स पुलिस की 7 दिन की रिमांड में मौजूद ट्विशा के पति समर्थ सिंह (Samarth Singh) से हुई पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, समर्थ पूछताछ में ज्यादातर वही जवाब दे रहा है, जो शुरुआत से उसकी मां गिरीबाला सिंह कहती आई हैं. उसने पूरी घटना के पीछे ट्विशा के बदले हुए व्यवहार और उनके ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़े होने को वजह बताया है. समर्थ ने बताया कि शादी के बाद शुरुआती दिनों में उसके और ट्विशा के बीच रिश्ते पूरी तरह सामान्य थे. विवाद की शुरुआत 17 अप्रैल से हुई, जब ट्विशा को पता चला कि वह प्रेग्नेंट है. इसके बाद उसका व्यवहार अचानक बदल गया। समर्थ ने पुलिस के सामने दावा किया कि ट्विशा अक्सर खुद के ग्लैमर वर्ल्ड (मॉडलिंग और एक्टिंग) से जुड़े होने की दुहाई देती थी. वह कहती थी कि वह एक साधारण घरेलू महिला वाली जिंदगी नहीं जी सकती और यह उसके लिए बेहद मुश्किल है. समर्थ के अनुसार, इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर कहासुनी होने लगी थी। पूछताछ में समर्थ ने अप्रैल महीने की एक घटना का जिक्र करते हुए दोनों के बीच बढ़ती दूरियों की बात कही. समर्थ ने बताया, ‘अप्रैल में हमें एक साथ बेंगलुरु जाना था. लेकिन ऐन वक्त पर ट्विशा ने जाने से मना कर दिया और कहा कि उसे अपने भाई के पास अजमेर जाना है। समर्थ के मुताबिक, वह अकेले बेंगलुरु चला गया और ट्विशा अजमेर के लिए निकल गई. लेकिन बाद में उसे पता चला कि ट्विशा अजमेर में सिर्फ एक दिन रुकी और उसे बिना बताए दिल्ली चली गई. इस बात को लेकर जब समर्थ ने आपत्ति जताई, तो दोनों के बीच विवाद और ज्यादा बढ़ गया। 12 मई की रात को क्या हुआ था?ट्विशा की मौत वाली रात यानी 12 मई की कहानी बयां करते हुए समर्थ ने पुलिस को बताया कि उस दिन सब कुछ सामान्य दिख रहा था. उसने दावा किया कि रात को खाना खाने के बाद दोनों कुछ देर सोसाइटी के पार्क में टहले और फिर घर लौटकर टीवी देखने लगे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक समर्थ ने दावा करते हुए कहा, ‘कुछ देर बाद मैं सोने चला गया, जबकि ट्विशा नीचे जाकर अपने परिजनों से फोन पर बात करने लगी. देर रात मेरी मां गिरिबाला सिंह ने मुझे जगाया और कहा कि ट्विशा की मां का फोन आया था कि वह फोन नहीं उठा रही है। समर्थ के मुताबिक, जब दोनों ने घर में ट्विशा को ढूंढना शुरू किया, तो वह छत पर फंदे से लटकी मिली. समर्थ का दावा है कि उसने और उसकी मां ने मिलकर ट्विशा को फंदे से नीचे उतारा, CPR दिया और तुरंत भोपाल AIIMS लेकर भागे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद कहां छिप गया था समर्थ?घटना के बाद फरार हुए समर्थ ने पुलिस को बताया कि वह एक हफ्ते से ज्यादा समय तक जबलपुर में छिपा रहा. पकड़े जाने के डर से उसने अपने मोबाइल फोन का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया था ताकि पुलिस उसकी लोकेशन ट्रेस न कर सके. समर्थ के इस कबूलनामे के बाद अब भोपाल पुलिस और सीबीआई के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि फरारी के दौरान जबलपुर में समर्थ को किसने पनाह दी और उसकी मदद की? हालांकि, समर्थ ने अपने मददगारों के नाम उगलने से इनकार कर दिया है। गौरतलब है कि 33 वर्षीय मॉडल-अभिनेत्री ट्विशा शर्मा के परिवार ने आरोप लगाया है कि ससुराल वालों ने उनकी बेटी को मानसिक और शारीरिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया कि उसे जान देनी पड़ी. भोपाल पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2) (दहेज मृत्यु), 85 (क्रूरता) और 3(5) (साझा इरादा) के साथ दहेज निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है. दूसरी तरफ, ससुराल पक्ष का दावा है कि ट्विशा को ड्रग्स की लत थी. हाईकोर्ट के आदेश के बाद द्विशा का दिल्ली एम्स के जरिए दूसरी बार पोस्टमार्टम कराया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी लिया संज्ञानइस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सोमवार को सुनवाई की. अदालत ने कहा कि एक महिला की असामयिक मौत बेहद गंभीर विषय है और इसकी सच्चाई सामने आना जरूरी है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले में अफवाहों और अटकलों से बचना चाहता है. अदालत ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि बेटी को खोने का दर्द असहनीय होता है और अदालत परिवार की पीड़ा को समझती है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं पर भी चिंता जताई और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. अदालत ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में जांच एजेंसियों को अत्यंत जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ काम करना चाहिए।
चारधाम यात्रा : अब तक 22 लाख तीर्थयात्री कर चुके हैं दर्शन…. 5 हफ्तों में 92 श्रद्धालुओं की मौत

देहरादून। उत्तराखंड (Uttarakhand) में चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) के शुरुआती 5 हफ्तों में विभिन्न स्वास्थ्य कारणों की वजह से 92 तीर्थयात्रियों की मौत हो चुकी है। आंकड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा 45 मौतें केदारनाथ (Kedarnath) में हुईं, जबकि बदरीनाथ (Badrinath) में 24, यमुनोत्री में 13 और गंगोत्री (Gangotri) में 10 तीर्थयात्रियों ने अपनी जान गंवाई। इनत तमाम चुनौतियों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, सोमवार शाम तक 22 लाख से अधिक श्रद्धालु चारों धामों के दर्शन कर चुके हैं। केदारनाथ में सबसे अधिक 44 मौतेंउत्तराखंड के राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, केदारनाथ में सबसे अधिक 44 मौतें दर्ज की गई हैं। बदरीनाथ में 24 , मुनात्री और गंगोत्री में क्रमशः 13 और 10 श्रद्धालुओं की मौतें हुई हैं। ये मौतें विभिन्न स्वास्थ्य कारणों से हुई हें। इनमें ऊंचाई से संबंधित बीमारियां और हृदय गति रुकना शामिल हैं। एक अन्य व्यक्ति की मौत केदारनाथ में प्राकृतिक आपदा के कारण हुई है। चारधाम यात्रा में 92 पहुंचा मौतों का आंकड़ाइस साल चारधाम यात्रा में मौतों का आंकड़ा 92 पर पहुंच गया है। आंकड़े बतलाते हैं कि सोमवार शाम सात बजे तक 22 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधामों के दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं। केदारनाथ में सबसे अधिक 8.72 लाख श्रद्धालु पहुंचे। इसके बाद बदरीनाथ में 6.13 लाख, गंगोत्री और यमुनोत्री में क्रमश: 3.85 एवं 3.87 लाख श्रद्धालु पहुंचे। अलर्ट मोड पर आपदा प्रबंधन विभागउच्च हिमालयी क्षेत्र की इस यात्रा को लेकर आपदा प्रबंधन विभाग अलर्ट मोड पर है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शीर्ष अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मौसम प्रतिकूल होने पर हर एक श्रद्धालु की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाए। इतना ही नहीं सिक्खों के विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल श्री हेमकुंड साहिब भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। गंगा दशहरा के मौके पर लगाई आस्था की डुबकीइस बीच गंगा दशहरा के मौके पर सोमवार को हरिद्वार में गंगा किनारे बहुत से श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। लोगों ने नियम-कानून के साथ गंगा जी में स्नान किया। माना जाता है कि इस पवित्र मौके पर गंगा में नहाने से सारे पाप धुल जाते हैं। गंगा दशहरा पर्व उस घटना का प्रतीक है जब गंगा नदी धरती पर अवतरित हुई थीं। इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर आई थीं। शास्त्रों के मुताबिक गंगा दशहरा गंगा नदी के धरती पर आगमन की याद में मनाया जाता है।
अफ्रीका में इबोला के प्रकोप के बाद भारत सरकार अलर्ट मोड पर … कोविड जैसे प्रोटोकॉल लागू

नई दिल्ली। अफ्रीका (Africa) के कुछ हिस्सों में इबोला (Ebola) के प्रकोप के मद्देनजर भारत सरकार (Government of India) अलर्ट मोड पर नजर आ रही है। खबर है कि विमानन नियामक डीजीसीए ने एयरलाइनों से विभिन्न उपायों को लागू करने के लिए कहा है। इनमें उड़ान के दौरान उद्घोषणाएं करना और प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों से अनिवार्य रूप से स्व-घोषणा प्रपत्र या सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरवाना शामिल है। भारत में क्या है स्थितिसरकार ने सोमवार को कहा कि देश में अब तक इबोला वायरस (Ebola Virus) के संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा (JP Nadda) ने भारत में बीमारी के किसी भी प्रसार को रोकने के लिए तैयारियों और निगरानी के उपायों की समीक्षा की। नड्डा ने अधिकारियों को देश भर में हवाई अड्डों, बंदरगाहों और भूमि सीमा पार करने सहित देश के सभी प्रवेश बिंदुओं पर इबोला स्क्रीनिंग व्यवस्था को पूरी तरह से सतर्क और मजबूत रखने का निर्देश दिया। WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इबोला के प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता वाला सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित किया है जिसके बाद केंद्र सरकार ने एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। यहां के यात्रियों को भरने होंगे फॉर्मनागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने इबोला रोग के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों को लेकर SOP जारी की है। युगांडा और कांगो के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संपर्क रखने वाली एयरलाइनों को यात्रियों को विमान से उतारने से पहले स्व-घोषणा प्रपत्रों को अनिवार्य रूप से भरवाना और एकत्र करना होगा। सूची में ये एयरलाइन्सएअर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, एमिरेट्स, एयर फ्रांस, एतिहाद एयरवेज और इजिप्टएयर उन 13 एयरलाइनों में शामिल हैं, जो कांगो से यात्रियों को ले जाने वाली एयरलाइनों की सूची में हैं। युगांडा से यात्रियों को ले जाने वाली 17 एयरलाइनों की सूची में एअर इंडिया, इंडिगो और केएलएम शामिल हैं। ये लक्षण दिखने पर तुरंत करना होगा सूचितएयरलाइनों को उड़ान के दौरान यह उद्घोषणा करना भी अनिवार्य किया गया है कि इबोला रोग के वर्तमान खतरे को देखते हुए, बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, चकत्ते, रक्तस्राव जैसे लक्षण वाले किसी भी यात्री को आगमन पर तुरंत चालक दल और आव्रजन/चिकित्सा इकाई को सूचित करना चाहिए। विमान में संदिग्ध मामलों के लिए, डीजीसीए ने कहा कि अन्य उपायों के अलावा, यात्री को विमान के पिछले हिस्से में भेजा जाना चाहिए और यदि संभव हो तो संबंधित यात्री के आगे और बगल की तीन पंक्तियां खाली रखी जानी चाहिए। एयरलाइनों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि उनके पास तीन तह वाले मास्क, एक बार उपयोग में लाये जाने वाले दस्ताने, पीपीई किट, सैनिटाइजर के पर्याप्त भंडार हो। शुरू हुई जांचगुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने सोमवार को कहा कि अफ्रीका के कुछ हिस्सों में इबोला के प्रकोप के मद्देनजर अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर युगांडा, कांगो और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों की जांच की जा रही है। पानसेरिया ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग प्रभावित अफ्रीकी देशों से आने वाले यात्रियों की कड़ी निगरानी कर रहा है। अहमदाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शाम छह बजे से सुबह 10 बजे के बीच युगांडा, कांगो और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों की गहन जांच की जा रही है।
पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम का असर…. अब दवाओं से लेकर खाने-पीने तक, हर चीज होगी महंगी!

नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Petrol-Diesel Price) में दनादन बढ़ोतरी (Hike) हो रही है. महज 10 दिन में ही तेल कंपनियों (Oil Companies) ने चार बार इनमें बढ़ोतरी की है और इस दौरान फ्यूल प्राइस 7 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा बढ़ चुका है. लगातार पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel Price) महंगा होने से देश में महंगाई का बड़ा खतरा खड़ा हो रहा है, ऐसा इसलिए क्योंकि इसका असर जल्द ही उन जगहों पर दिखना शुरू हो सकता है, जहां देश के आम लोगों को सबसे ज्यादा तकलीफ होगी. इसकी वजह है ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो जाएगा और ऐसा होने से खाने-पीने की चीजों से लेकर किराने का सामान, दवाएं, ट्रैवलिंग समेत रोजमर्रा की जरूरत के सामानों के दाम बढ़ सकते हैं। 10 दिन 4 बार महंगा हुआ पेट्रोल-डीजलदेश में तेल कंपनियों ने 15 मई को चार साल बाद पहली बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया था और इनकी कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था. इसके बाद 19 मई को फिर फ्यूल बम फूटा और ईंधन की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया. बात यहीं नहीं रुकी और 23 मई को 97 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़ाए गए. इसके बाद 25 मई को तेल कंपनियों ने चौथी बढ़ोतरी करते हुए पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया. इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल 100 रुपये के पार निकल गया और 1 लीटर के लिए 102.12 रुपये खर्च करने पड़ेंगे, जबकि डीजल बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है। ट्रांसपोर्टेशन लागत के साथ बढ़ेगी महंगाईपेट्रोल-डीजल का महंगा होना, महंगाई के जोखिम को बढ़ाने वाला साबित होता है. इसका उदाहरण बीते 15 मई को ही मिल गया, जबकि Petrol-Diesel-CNG Hike की खबर के बाद अचानक अमूल और मदर डेयरी जैसी कंपनियों ने अपने पैकेज्ड दूध को महंगा कर दिया. यही नहीं मुंबई में ब्रेड महंगी हो गई और टैक्सी यूनियनों ने यात्री किराए में बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी. देश में पेट्रोल-डीजल बम फूटने के बाद परिवहन उद्योग ने भी अब औपचारिक रूप से ईंधन की बढ़ती लागत को दूसरे व्यवसायों पर डालना शुरू कर दिया है, जो इस बात का संकेत है कि महंगे डीजल का प्रभाव पेट्रोल पंपों पर ही नहीं, बल्कि तमाम दूसरी चीजों से होते हुए इकोनॉमी तक असर डालेगा. ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (AITWU) ने चेतावनी दी है कि डीजल की बढ़ती कीमतों (Diesel Price Hike) के कारण देश भर में ट्रांसपोर्टेशन संचालन प्रभावित होता जा रहा है. रिपोर्ट की मानें, तो एसोसिएशन ने बीते 20 मई से राष्ट्रव्यापी फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर (FAF) लागू किया है, जिससे ट्रांसपोर्टरों को डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर माल ढुलाई दरों को बढ़ाने की अनुमति होगी. आम ग्राहकों पर होगा सीधा असर Petrol-Diesel महंगा होने और ट्रांसपोर्टरों को माल ढुलाई रेट्स बढ़ाने की अनुमति से FMCG कंपनियों, मैन्युफैक्चरर्स, रिटेल विक्रेताओं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और फूड सप्लायर्स के लिए लॉजिस्टिक्स लागत में सीधी बढ़ोतरी हो सकती है और इसकी भरपाई के लिए कंपनियां बोझ आखिर में सीधे ग्राहकों पर ही डालेंगी, यानी उनके लिए तमाम सामान महंगे हो जाएंगे. FAF से कैसे महंगी होगी माल ढुलाईAITWU के मुताबिक, सिर्फ डीजल ही ट्रक के परिचालन लागत का लगभग 65% हिस्सा है. इसी को लेकर एसोसिएशन के फैसले पर नजर डालें, तो साफ किया गया था कि 15 मई के प्राइस हाइक से ऊपर डीजल की कीमतों में हर 1 रुपये की वृद्धि के लिए माल ढुलाई रेट ऑटोमैटिक 0.65% बढ़ जाएगा. यानी अगर डीजल की कीमत 10 रुपये बढ़ती है, तो माल ढुलाई की लागत 6.5 फीसदी बढ़ जाएगी. बता दें कि अब तक डीजल 7 रुपये से ज्यादा महंगा हो चुका है. संगठन ने ये भी साफ किया कि इसका उद्देश्य डीजल की बढ़ती लागत की भरपाई करना है। क्या कुछ महंगा होने वाला है!Diesel Price Hike के चलते माल ढुलाई की लागत बढ़ने से ग्राहकों द्वारा यूज की जाने वाली रोजमर्रा की चीजों के दाम पर सबसे ज्यादा और पहले असर दिखेगा. इनमें सब्जियां, फल, दूध, डेयरी प्रोडक्ट्स, दवाएं, एफएमसीजी वस्तुओं शामिल हैं. इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से निर्माण सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और ई-कॉमर्स डिलीवरी भी लागत की भरपाई ग्राहकों की जेब से करेंगी. क्योंकि ये सभी सामान, दुकानों और गोदामों तक पहुंचने से पहले ट्रकों के माध्यम से ले जाए जाते हैं। पहले रुपया अब पेट्रोल-डीजल ने रुलायापहले से ही देश में डॉलर के मुकाबले लगातार टूटते जा रहे भारतीय रुपये ने महंगाई के जोखिम को बढ़ा दिया था, क्योंकि विदेशों से आयात किए जाने वाले सामनों का पेमेंट डॉलर में ही किया जाता है और रुपया कमजोर होने से ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. वहीं अब पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ने से महंगाई का खतरा और भी बढ़ गया है। साफ तौर पर कहें, ये मामला सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं है, बल्कि आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का तगड़ा बम फूटने के संकेत हैं, जिसकी शुरुआत दूध समेत कई चीजों से पहले ही हो चुकी है।