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पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम का असर…. अब दवाओं से लेकर खाने-पीने तक, हर चीज होगी महंगी!

नई दिल्ली। पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Petrol-Diesel Price) में दनादन बढ़ोतरी (Hike) हो रही है. महज 10 दिन में ही तेल कंपनियों (Oil Companies) ने चार बार इनमें बढ़ोतरी की है और इस दौरान फ्यूल प्राइस 7 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा बढ़ चुका है. लगातार पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel Price) महंगा होने से देश में महंगाई का बड़ा खतरा खड़ा हो रहा है, ऐसा इसलिए क्योंकि इसका असर जल्द ही उन जगहों पर दिखना शुरू हो सकता है, जहां देश के आम लोगों को सबसे ज्यादा तकलीफ होगी. इसकी वजह है ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो जाएगा और ऐसा होने से खाने-पीने की चीजों से लेकर किराने का सामान, दवाएं, ट्रैवलिंग समेत रोजमर्रा की जरूरत के सामानों के दाम बढ़ सकते हैं। 10 दिन 4 बार महंगा हुआ पेट्रोल-डीजलदेश में तेल कंपनियों ने 15 मई को चार साल बाद पहली बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया था और इनकी कीमत में 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया था. इसके बाद 19 मई को फिर फ्यूल बम फूटा और ईंधन की कीमत में 87 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया. बात यहीं नहीं रुकी और 23 मई को 97 पैसे प्रति लीटर दाम बढ़ाए गए. इसके बाद 25 मई को तेल कंपनियों ने चौथी बढ़ोतरी करते हुए पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया. इसके बाद दिल्ली में पेट्रोल 100 रुपये के पार निकल गया और 1 लीटर के लिए 102.12 रुपये खर्च करने पड़ेंगे, जबकि डीजल बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया है। ट्रांसपोर्टेशन लागत के साथ बढ़ेगी महंगाईपेट्रोल-डीजल का महंगा होना, महंगाई के जोखिम को बढ़ाने वाला साबित होता है. इसका उदाहरण बीते 15 मई को ही मिल गया, जबकि Petrol-Diesel-CNG Hike की खबर के बाद अचानक अमूल और मदर डेयरी जैसी कंपनियों ने अपने पैकेज्ड दूध को महंगा कर दिया. यही नहीं मुंबई में ब्रेड महंगी हो गई और टैक्सी यूनियनों ने यात्री किराए में बढ़ोतरी की मांग शुरू कर दी. देश में पेट्रोल-डीजल बम फूटने के बाद परिवहन उद्योग ने भी अब औपचारिक रूप से ईंधन की बढ़ती लागत को दूसरे व्यवसायों पर डालना शुरू कर दिया है, जो इस बात का संकेत है कि महंगे डीजल का प्रभाव पेट्रोल पंपों पर ही नहीं, बल्कि तमाम दूसरी चीजों से होते हुए इकोनॉमी तक असर डालेगा. ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (AITWU) ने चेतावनी दी है कि डीजल की बढ़ती कीमतों (Diesel Price Hike) के कारण देश भर में ट्रांसपोर्टेशन संचालन प्रभावित होता जा रहा है. रिपोर्ट की मानें, तो एसोसिएशन ने बीते 20 मई से राष्ट्रव्यापी फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर (FAF) लागू किया है, जिससे ट्रांसपोर्टरों को डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी पर माल ढुलाई दरों को बढ़ाने की अनुमति होगी. आम ग्राहकों पर होगा सीधा असर Petrol-Diesel महंगा होने और ट्रांसपोर्टरों को माल ढुलाई रेट्स बढ़ाने की अनुमति से FMCG कंपनियों, मैन्युफैक्चरर्स, रिटेल विक्रेताओं, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और फूड सप्लायर्स के लिए लॉजिस्टिक्स लागत में सीधी बढ़ोतरी हो सकती है और इसकी भरपाई के लिए कंपनियां बोझ आखिर में सीधे ग्राहकों पर ही डालेंगी, यानी उनके लिए तमाम सामान महंगे हो जाएंगे. FAF से कैसे महंगी होगी माल ढुलाईAITWU के मुताबिक, सिर्फ डीजल ही ट्रक के परिचालन लागत का लगभग 65% हिस्सा है. इसी को लेकर एसोसिएशन के फैसले पर नजर डालें, तो साफ किया गया था कि 15 मई के प्राइस हाइक से ऊपर डीजल की कीमतों में हर 1 रुपये की वृद्धि के लिए माल ढुलाई रेट ऑटोमैटिक 0.65% बढ़ जाएगा. यानी अगर डीजल की कीमत 10 रुपये बढ़ती है, तो माल ढुलाई की लागत 6.5 फीसदी बढ़ जाएगी. बता दें कि अब तक डीजल 7 रुपये से ज्यादा महंगा हो चुका है. संगठन ने ये भी साफ किया कि इसका उद्देश्य डीजल की बढ़ती लागत की भरपाई करना है। क्या कुछ महंगा होने वाला है!Diesel Price Hike के चलते माल ढुलाई की लागत बढ़ने से ग्राहकों द्वारा यूज की जाने वाली रोजमर्रा की चीजों के दाम पर सबसे ज्यादा और पहले असर दिखेगा. इनमें सब्जियां, फल, दूध, डेयरी प्रोडक्ट्स, दवाएं, एफएमसीजी वस्तुओं शामिल हैं. इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से निर्माण सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स और ई-कॉमर्स डिलीवरी भी लागत की भरपाई ग्राहकों की जेब से करेंगी. क्योंकि ये सभी सामान, दुकानों और गोदामों तक पहुंचने से पहले ट्रकों के माध्यम से ले जाए जाते हैं। पहले रुपया अब पेट्रोल-डीजल ने रुलायापहले से ही देश में डॉलर के मुकाबले लगातार टूटते जा रहे भारतीय रुपये ने महंगाई के जोखिम को बढ़ा दिया था, क्योंकि विदेशों से आयात किए जाने वाले सामनों का पेमेंट डॉलर में ही किया जाता है और रुपया कमजोर होने से ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. वहीं अब पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ने से महंगाई का खतरा और भी बढ़ गया है। साफ तौर पर कहें, ये मामला सिर्फ पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं है, बल्कि आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का तगड़ा बम फूटने के संकेत हैं, जिसकी शुरुआत दूध समेत कई चीजों से पहले ही हो चुकी है।

एशिया से लेकर यूरोप तक…. रिकॉर्डतोड़ गर्मी से लोग परेशान….ब्रिटेन, फ्रांस और स्पेन में भी लू का कहर

नई दिल्ली। दुनिया इस समय भीषण गर्मी (Extreme heat) और लगातार बढ़ते तापमान की चुनौती का सामना कर रही है। भारत (India) में जहां कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है, वहीं यूरोप, एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में भी रिकॉर्डतोड़ गर्मी (Record Breaking Heat) ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो (El Niño) और जलवायु परिवर्तन (Climate change) के कारण हीटवेव (Heatwaves) अब पहले से ज्यादा खतरनाक, लंबी और जल्दी आने लगी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जो गर्मी पहले जून-जुलाई में देखने को मिलती थी, अब वह मई महीने में ही रिकॉर्ड तोड़ रही है। कई देशों में स्कूलों, खेल आयोजनों और सार्वजनिक गतिविधियों पर असर पड़ा है। कुछ जगहों पर मौतों और स्वास्थ्य संकट की घटनाएं भी सामने आई हैं। ब्रिटेन में गर्मी ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड ब्रिटेन में मई महीने का अब तक का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड किया गया। देश के मौसम विभाग के अनुसार लंदन के क्यू गार्डन्स में तापमान 34.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने 1922 और 1944 के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी गर्मी आमतौर पर जुलाई या अगस्त में देखने को मिलती है, लेकिन इस बार मई में ही लोगों को झुलसा देने वाली गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी से बचने के लिए लोग पार्कों, फव्वारों और स्विमिंग पूल का सहारा लेते नजर आए। फ्रांस में 350 से ज्यादा शहरों में तापमान का रिकॉर्ड टूटाफ्रांस में भी स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। देश के 350 से ज्यादा शहरों में मई महीने के तापमान के रिकॉर्ड टूट गए हैं। कई इलाकों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। सरकार ने कई क्षेत्रों में हाई टेम्परेचर अलर्ट जारी किया है और लोगों को दोपहर के समय घरों में रहने की सलाह दी गई है। पेरिस में एक रनिंग इवेंट के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। अधिकारियों का मानना है कि तेज गर्मी इसका एक बड़ा कारण हो सकती है। स्पेन में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पहुंचने का अनुमानस्पेन भी इस समय भीषण हीटवेव का सामना कर रहा है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। हालात ऐसे हैं कि रात में भी तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं जा रहा, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल रही। विशेषज्ञों के मुताबिक यह स्थिति स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है, खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए। वियतनाम में हाल बेहालएशिया में वियतनाम भी गर्मी की मार झेल रहा है। कई इलाकों में तापमान 39 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी है। लोगों को दोपहर 10 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। इन देशों में भी गर्मी का कहरथाईलैंड – बैंकॉक और अन्य इलाकों में अत्यधिक गर्मी के कारण स्वास्थ्य अलर्ट जारी किए गए हैं।फिलीपींस – स्कूलों को ऑनलाइन मोड में चलाने तक की नौबत आई क्योंकि तापमान बेहद ज्यादा बढ़ गया।मेक्सिको – लगातार हीटवेव के कारण कई राज्यों में लोगों की मौत की खबरें सामने आई हैं।चीन – उत्तरी और मध्य चीन के कई हिस्सों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी दर्ज की गई है।पाकिस्तान – सिंध और पंजाब के कई इलाकों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। क्या है भारत का हाल?देश में नौतपा के पहले दिन सोमवार को उत्तर-पश्चिम से लेकर मध्य भारत तक प्रचंड गर्मी के साथ उमस से लोग बेहाल रहे। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में चिलचिलाती धूप के साथ गर्म लू चलती रही। दिन के साथ रातें भी गर्म रहीं। अभी 4-5 दिन झुलसा देने वाली गर्मी के आसार हैं। वहीं तमिलनाडु में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। चेन्नई स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (RMC) ने मंगलवार को राज्य के आठ जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई है। मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से दक्षिण-पूर्व अरब सागर तक बने वायुमंडलीय परिसंचरण तंत्र का असर राज्य के कई हिस्सों में देखने को मिलेगा।

ट्रंप ने फिर दी धमकी…. बोले- डील नहीं हुई तो पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में होगा अमेरिका

वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) के साथ जारी शांति वार्ता (Peace talks) के बीच डील को लेकर बड़ी धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि ईरान (Iran) के साथ या तो बड़ी और बेहतर परिणामों वाली डील होगी या फिर कोई भी डील नहीं होगी। इतना ही नहीं ट्रंप ने डील न होने की स्थिति में फिर से युद्ध शुरू करने की भी धमकी दी। उन्होंने कहा कि अब अगर डील नहीं होती है, तो अमेरिका पूरी ताकत के साथ युद्ध के मैदान में होगा। इसके साथ ही ट्रंप ने अरब देशों से अब्राहम अकॉर्ड में शामिल होने की अपील की, जिसमें कुछ देश पहले से शामिल हैं। बता दें, ट्रंप की यह धमकी ऐसे समय में सामने आई है, जब ईरान और अमेरिका के बीच हो रही शांति वार्ता लगातार लंबी खिंचती जा रही है। ईरान और अमेरिका दोनों ही तरफ से अच्छे संकेत दिए जा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। ईरान के साथ लंबी खिंचती बातचीत के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कोई भी नहीं चाहता कि पश्चिम एशिया का युद्ध फिर से शुरू हो। इसलिए बेहतर है कि डील हो जाए। सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने शनिवार को मध्य-पूर्व के राष्ट्राध्यक्षों के साथ हुई अपनी बातचीतों का ब्यौरा भी साझा किया। उन्होंने बताया खाड़ी देशों के नेताओं, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगान के साथ मिलकर इस संकट को सुलझाने के लिए बातचीत की है। उम्मीद है कि यह जल्दी ही सुलझ जाएगा, लेकिन इसके साथ ही ट्रंप ने अपील की यह सभी देश अब्राहम अकॉर्ड पर भी हस्ताक्षर करें। इतना ही नहीं ट्रंप ने कहा कि अगर ऐसा होता है, तो ईरान भी अब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर कर सकता है। एक-दो देशों को छोड़कर बाकी देशों को समस्या नहीं होनी चाहिए: ट्रंपसोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने इस्लामिक देशों के अब्राहम अकॉर्ड को स्वीकार न करने के डर को भी महत्व दिया। उन्होंने कहा, “संभव है कि एक या दो देशों के बाद ऐसा न करने का कारण हो, हम उसे स्वीकार भी करेंगे। लेकिन अधिकांश देशों को इसके लिए तैयार होना होगा। इससे ईरान के साथ होने वाला समझौता और भी ज्यादा ऐतिहासिक हो जाएगा। यह समझौता संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मोरक्को, सूडान और कजाकस्तान के लिए वित्तीय, आर्थिक और सामाजिक बूम साबित हुआ है। इस संघर्ष के दौर में भी इन देशों को इसका फायदा मिला है।” क्या हैं अब्राहम अकॉर्ड्स?अब्राहम अकॉर्ड्स अमेरिका द्वारा बनाए गए समझौतों की एक लिस्ट है। इसका प्रमुख उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच के राजनयिक संबंधों को सामान्य बनाना है। डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान शुरू हुए इस समझौते पर सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन और मोरक्को ने हस्ताक्षर किए थे। सूडान ने भी इसको सहमति दी है, लेकिन अभी तक उसकी संसद ने इस पर हामी नहीं भरी है। वहीं, अमेरिका का करीबी माने जाने वाला सऊदी अरब भी अभी तक इस समझौते से दूरी बनाए हुए है। हालांकि, सऊदी क्राउन प्रिंस ने इस समझौते में शामिल होने के लिए एक शर्त रखी थी। उन्होंने कहा था कि वह इसमें शामिल होने के लिए तैयार हैं, बशर्ते इसमें दो-राष्ट्र समाधान को लेकर स्पष्टता हो। दरअसल, अरब देशों और इस्लामिक देशों की दुनिया में अब्राहम अकॉर्ड्स को फिलिस्तीन के साथ धोखे के तौर पर देखा जाता है। इसलिए ज्यादातर देश इससे कन्नी काटते हुए नजर आते हैं। इस समझौते के बाद देशों को इजरायल के साथ सामान्य संबंधों पर राजी होना पड़ता है, जिससे उनकी जनता इस पर नाराज हो सकती है। पाकिस्तान जैसे देश के लिए तो यह समझौता और भी ज्यादा परेशानी पैदा करने वाला है, क्योंकि वह तो इजरायल को देश के रूप में मान्यता ही नहीं देते हैं।

Gwalior BJP leader attack: भाजपा नेता को दी जान से मरने की धमकी, राजीनामे के दबाव में मारपीट

BJP leader attack

HIGHLIGHTS: डबरा तहसील परिसर में भाजपा नेता अमरीश शर्मा पर हमला पुराने जमीन विवाद में राजीनामे का दबाव बनाने का आरोप मारपीट में घायल नेता को ग्वालियर रेफर किया गया दूसरे पक्ष ने भी भाजपा नेता पर हमला करने का आरोप लगाया पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत लेकर जांच शुरू की   Gwalior BJP leader attack: ग्वालियर। डबरा तहसील से एक चौकाने वाला मामला सामने आया है जहां भाजपा नेता अमरीश र्शमा के लाथ गाली-गलौच और मारपीट करने को मामलो सामने आया है। बता दें की अमरीश कुछ काम के सिलसिले में तहसील पहुंचे थे, इसी दौरान राशिद अली और मुकेश जाट ने उन्हें पुराने जमीन विवाद के मामले में राजीनामा करने का दबाव बनाया। लेकिन जब भाजपा नेता ने समझौता करने से मना कर दिया तो विवाद बढ़ गया औक मारपीट शुरु हो गई। नौतपा का प्रचंड असर शुरू: इन बीमारियों से जूझ रहे लोग रहें अलर्ट, लापरवाही पड़ सकती है भारी हमले में आई गंभीर चोट हमले में भाजपा नेता अमरीश शर्मा को सिर पर गंभीर चोट आई मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज के बाद डॉक्टरों ने उन्हें ग्वालियर रेफर कर दिया। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें एक युवक भाजपा नेता को थप्पड़ मारता दिखाई दे रहा है। घटना के बाद समर्थकों में नाराजगी देखी गई और पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी। ओवर-स्किनकेयर सिंड्रोम क्या है? जानिए कैसे बिगड़ सकती है आपकी स्किन पुलिस के किया मामला दर्ज पुलिस ने आरोपी राशिद अली और मुकेश जाट के खिलाफ मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। वहीं दूसरे पक्ष से राशिद अली भी थाने पहुंचा और भाजपा नेता पर हमला कर सिर फोड़ने का आरोप लगाया। पुलिस ने उसका मेडिकल परीक्षण कराकर शिकायत जांच में शामिल कर ली है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बयान और वीडियो फुटेज के आधार पर जांच कर रही है। आज शेयर बाजार में दिख सकती है उतार-चढ़ाव भरी चाल, आईटी और बैंकिंग शेयरों पर रहेगी नजर जमीन विवाद से जुड़ा बताया जा रहा मामला पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों पक्षों के बीच पुराना जमीन विवाद चल रहा था। एक सप्ताह पहले भी पिछोर थाना क्षेत्र में भाजपा नेता पर गोलीबारी की घटना हुई थी, जिसमें पुलिस ने चार आरोपियों पर मामला दर्ज कर तीन को गिरफ्तार किया था। माना जा रहा है कि मौजूदा विवाद भी उसी जमीन मामले से जुड़ा हो सकता है। फ़िलहाल पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

सीने की बेचैनी नहीं मामूली बात: दिल की चेतावनी को समय पर समझना बन सकता है जीवनरक्षक कदम

नई दिल्ली । बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और बढ़ते तनाव के दौर में हृदय संबंधी बीमारियां तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। पहले जहां दिल की बीमारियां बढ़ती उम्र के साथ जुड़ी मानी जाती थीं, वहीं अब कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। हार्ट अटैक एक ऐसी गंभीर स्थिति है जो कई बार अचानक सामने आती है और मरीज तथा परिवार दोनों को संभलने का मौका तक नहीं देती। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर कई बार पहले ही कुछ संकेत देने लगता है, जिन्हें समय रहते पहचान लिया जाए तो गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार हार्ट अटैक के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग दिखाई दे सकते हैं। कई मामलों में यह संकेत सामान्य शारीरिक परेशानी की तरह लगते हैं, जिसके कारण लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। सबसे सामान्य और गंभीर संकेत सीने में दर्द, दबाव या जकड़न महसूस होना माना जाता है। कई बार यह दर्द धीरे-धीरे शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने लगता है। दर्द बाएं हाथ, कंधे, गर्दन, जबड़े, कोहनी और पीठ तक पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति को सामान्य दर्द समझकर टालना खतरनाक साबित हो सकता है। इसके अलावा अचानक सांस लेने में कठिनाई होना या बिना ज्यादा मेहनत के सांस फूलना भी दिल से जुड़ी परेशानी का संकेत हो सकता है। कई लोगों को अचानक चक्कर आने लगते हैं या शरीर में कमजोरी महसूस होने लगती है। कुछ मामलों में मतली, उल्टी या पेट में असहजता भी देखने को मिलती है, जिसके कारण लोग इसे गैस या पाचन से जुड़ी समस्या मान लेते हैं। अचानक ठंडा पसीना आना और चेहरे की रंगत फीकी पड़ जाना भी ऐसे संकेत हैं जिन्हें गंभीरता से लेना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं और बुजुर्गों में कई बार हार्ट अटैक के लक्षण स्पष्ट रूप से सामने नहीं आते। यही कारण है कि इन वर्गों में अधिक सतर्कता की आवश्यकता होती है। अगर किसी व्यक्ति में ये लक्षण लगातार कुछ मिनटों तक बने रहें या तेजी से बढ़ने लगें, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी हो जाता है। देरी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है। हृदय रोगों से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव सबसे अहम कदम माना जाता है। रोजाना नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और तनाव से दूरी हृदय को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। फलों, हरी सब्जियों, साबुत अनाज और पौष्टिक भोजन को दैनिक जीवन में शामिल करना चाहिए। तला-भुना और अत्यधिक नमक या चीनी वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर रखना फायदेमंद हो सकता है। धूम्रपान और अत्यधिक शराब सेवन हृदय के लिए गंभीर जोखिम बढ़ाते हैं, इसलिए इन आदतों से बचना जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच कराना अब आवश्यकता बन चुका है। समय पर जांच और सतर्कता न केवल बीमारियों की पहचान आसान बनाती है, बल्कि एक स्वस्थ और सुरक्षित जीवन की दिशा भी तय करती है।

नौतपा का प्रचंड असर शुरू: इन बीमारियों से जूझ रहे लोग रहें अलर्ट, लापरवाही पड़ सकती है भारी

नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में नौतपा की शुरुआत के साथ भीषण गर्मी ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। तापमान लगातार बढ़ रहा है और तेज धूप लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। डॉक्टरों का कहना है कि सामान्य लोगों की तुलना में पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को इस दौरान अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। बढ़ती गर्मी शरीर के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करती है, जिससे कई स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। ऐसे में लापरवाही कई बार बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक नौतपा के दौरान शरीर पर हीट स्ट्रेस तेजी से बढ़ता है। अत्यधिक पसीना निकलने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है। इसका सीधा असर शरीर की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। खासतौर पर डायबिटीज, हार्ट, किडनी, अस्थमा और मोटापे से पीड़ित लोगों में जोखिम ज्यादा बढ़ जाता है। यही वजह है कि डॉक्टर इन मरीजों को समय रहते सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। डायबिटीज के मरीजों में गर्मी का असर कई तरह से दिखाई देता है। शरीर में पानी की कमी होने पर ब्लड शुगर का स्तर प्रभावित हो सकता है। कई बार डिहाइड्रेशन के कारण शुगर अचानक बढ़ या घट सकती है, जिससे मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। इसके अलावा इंसुलिन की कार्यक्षमता पर भी अधिक तापमान असर डाल सकता है। इसलिए ऐसे मरीजों को समय-समय पर पानी पीने और शुगर की नियमित जांच करते रहने की सलाह दी जा रही है। किडनी रोगियों के लिए भी नौतपा का समय चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अधिक पसीना निकलने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और पहले से मौजूद समस्या गंभीर हो सकती है। डॉक्टरों का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेना ऐसे मरीजों के लिए बेहद जरूरी है। हार्ट मरीजों के लिए भी बढ़ती गर्मी चिंता का विषय है। अत्यधिक तापमान शरीर के तापमान नियंत्रण तंत्र पर दबाव डालता है। कई मामलों में हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉशन की स्थिति बन सकती है, जिससे दिल पर अतिरिक्त भार पड़ता है। इसी तरह अस्थमा और सांस संबंधी मरीजों में गर्म हवा और वातावरणीय बदलाव सांस लेने में परेशानी बढ़ा सकते हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि नौतपा के दौरान दोपहर में अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। हल्के और सूती कपड़े पहनने, पर्याप्त पानी पीने, तला-भुना भोजन कम खाने और शरीर को ठंडा रखने जैसे छोटे उपाय बड़ी समस्याओं से बचा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही सावधानी और संतुलित दिनचर्या अपनाकर भीषण गर्मी के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

आज शेयर बाजार में दिख सकती है उतार-चढ़ाव भरी चाल, आईटी और बैंकिंग शेयरों पर रहेगी नजर

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में आज कारोबार की शुरुआत सतर्क माहौल के साथ होने के संकेत हैं। घरेलू आर्थिक गतिविधियों, विदेशी बाजारों के रुझान और निवेशकों की रणनीति के बीच बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आज के कारोबार में बैंकिंग, आईटी, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर के शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पिछले कारोबारी सत्र में बाजार ने मिश्रित प्रदर्शन किया था। निवेशकों की नजर अब वैश्विक बाजारों से आने वाले संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। अमेरिकी और एशियाई बाजारों से मिले कमजोर और मजबूत संकेतों के मिश्रित प्रभाव का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में फिलहाल “स्टॉक स्पेसिफिक” गतिविधियां ज्यादा देखने को मिल रही हैं। यानी जिन कंपनियों के अच्छे नतीजे या सकारात्मक खबरें सामने आ रही हैं, उनके शेयरों में खरीदारी का रुझान बना हुआ है। वहीं कमजोर प्रदर्शन वाली कंपनियों में दबाव देखने को मिल सकता है। बैंकिंग सेक्टर पर आज खास नजर रहेगी। निजी और सरकारी बैंकों के शेयरों में हलचल बनी रह सकती है। इसके अलावा आईटी कंपनियों के शेयर भी निवेशकों के फोकस में रहेंगे, क्योंकि डॉलर की चाल और वैश्विक टेक बाजार का असर इस सेक्टर पर सीधे तौर पर पड़ता है। ऑटो और रियल एस्टेट सेक्टर में भी निवेशकों की रुचि बनी रह सकती है। बाजार जानकारों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ध्यान देना चाहिए और जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। विश्लेषकों के मुताबिक, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में शुरुआती कारोबार के दौरान हल्की तेजी या मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी बनी रहती है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है, जबकि वैश्विक दबाव बढ़ने पर गिरावट भी संभव है। कमोडिटी बाजार में सोना और चांदी की कीमतों पर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है। वहीं कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर तेल एवं गैस कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दे सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा समय में निवेशकों को सतर्क और संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए। छोटे निवेशकों को अफवाहों के आधार पर निवेश करने से बचने और विशेषज्ञ सलाह के साथ आगे बढ़ने की सलाह दी गई है।

किसानों के लिए राहत की खबर: उर्वरकों की कमी का संकट टला, सरकार ने जारी किए बड़े आंकड़े

नई दिल्ली। खरीफ सीजन से पहले किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देशभर में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर चल रही आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में खाद की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति पूरी तरह स्थिर बनी हुई है। सरकार का कहना है कि मौजूदा समय में उर्वरकों का भंडार सामान्य जरूरत से काफी अधिक है, जिससे आने वाले महीनों में किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार देश में इस वर्ष उर्वरकों की कुल आवश्यकता लगभग 390 लाख मीट्रिक टन से अधिक रहने का अनुमान है। इसके मुकाबले मौजूदा समय में 200 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है। यह मात्रा सामान्य मानकों से काफी ज्यादा मानी जा रही है। इससे संकेत मिलते हैं कि खेती के महत्वपूर्ण सीजन में मांग बढ़ने के बावजूद सप्लाई चेन पर किसी प्रकार का दबाव नहीं पड़ेगा। अधिकारियों ने बताया कि वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय तनावों के बावजूद भारत ने घरेलू उत्पादन और आयात दोनों मोर्चों पर मजबूत स्थिति बनाए रखी है। हाल के समय में कई देशों में आपूर्ति संबंधी चुनौतियां सामने आईं, लेकिन भारत ने पहले से रणनीतिक तैयारी करके संभावित संकट को काफी हद तक नियंत्रित रखा। इसी का परिणाम है कि उर्वरकों की उपलब्धता लगातार बनी हुई है। देश में यूरिया, डीएपी, एनपीके और अन्य मिश्रित उर्वरकों का उत्पादन भी संतोषजनक स्तर पर रहा है। साथ ही आयात के जरिए भी आपूर्ति को मजबूत किया गया है। सरकार ने आगामी खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए बड़ी मात्रा में आवश्यक उर्वरकों का स्टॉक पहले ही सुरक्षित कर लिया है। इससे किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने में आसानी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि खेती के मौसम में उर्वरकों की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक होती है। यदि समय पर खाद नहीं मिले तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। ऐसे में पर्याप्त स्टॉक का होना कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। सरकार का यह भी कहना है कि उर्वरक उत्पादन में उपयोग होने वाले कच्चे माल की उपलब्धता की लगातार समीक्षा की जा रही है। इससे भविष्य में किसी तरह की आपूर्ति बाधा से बचा जा सकेगा। आने वाले महीनों में मांग बढ़ने की संभावना के बीच प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। फिलहाल उपलब्ध आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि देश में खाद संकट जैसी स्थिति बनने की आशंका बेहद कम है और किसानों को इस बार पर्याप्त आपूर्ति मिलने की उम्मीद है।

एमपी में भीषण गर्मी का कहर जारी, कई जिलों में लू का रेड अलर्ट; कहीं राहत की बारिश के संकेत

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में नौतपा के दौरान गर्मी ने अपने तेवर और तीखे कर दिए हैं। प्रदेश के अधिकांश जिलों में भीषण गर्मी और लू का असर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने कई जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। तेज धूप और गर्म हवाओं ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आने लगी हैं और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड, रीवा, सागर और उज्जैन संभाग के कई जिलों में लू का असर सबसे ज्यादा रहेगा। इन इलाकों में तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। गर्म हवाओं के थपेड़ों और उमस ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और नर्मदापुरम जैसे शहरों में भी दिनभर तेज गर्मी बनी रहेगी, हालांकि शाम के समय कुछ स्थानों पर हल्के बादल, तेज हवाएं और बूंदाबांदी होने की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय मौसमीय गतिविधियों के कारण कुछ इलाकों में हल्का बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे लोगों को आंशिक राहत मिल सकती है। भीषण गर्मी का असर बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर साफ दिखाई दे रहा है। दोपहर के समय प्रमुख बाजारों और सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में काफी कम भीड़ नजर आ रही है। कई जिलों में दोपहर के दौरान अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात बन गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी गर्मी और लू को लेकर एडवाइजरी जारी की है। डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, ओआरएस, नींबू पानी और छाछ जैसे तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। यदि किसी व्यक्ति को चक्कर आना, तेज बुखार, उल्टी या सिरदर्द जैसी समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में गर्मी का असर बना रहेगा, हालांकि कुछ जिलों में प्री-मानसून गतिविधियां शुरू होने से तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है।

मंगलवार की पूजा विधि: ऐसे करें हनुमान जी की आराधना, मिलेगी संकटों से मुक्ति

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और साहस, शक्ति तथा सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यही वजह है कि मंगलवार को देशभर के हनुमान मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। धर्माचार्यों के अनुसार मंगलवार की शुरुआत सुबह जल्दी उठकर स्नान और स्वच्छ वस्त्र धारण करने से करनी चाहिए। इस दिन लाल या केसरिया रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान सबसे पहले भगवान श्रीराम और माता सीता का स्मरण किया जाता है, क्योंकि हनुमान जी श्रीराम के परम भक्त माने जाते हैं। इसके बाद हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक और धूप जलाकर पूजा शुरू की जाती है। पूजा में सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल, गुड़ और चने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। श्रद्धालु इस दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ भी करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इन पाठों से भय, शत्रु बाधा और मानसिक तनाव दूर होता है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक मंगलवार का व्रत करने से मंगल ग्रह मजबूत होता है और कुंडली के दोषों में कमी आती है। जिन लोगों की कुंडली में मंगल दोष होता है या जिन्हें बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ता है, उन्हें मंगलवार का व्रत और हनुमान पूजा करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक परंपराओं में इस दिन दान का भी विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को गुड़, मसूर दाल, लाल वस्त्र या भोजन का दान शुभ माना गया है। इससे पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं। मंगलवार को कई लोग व्रत रखते हैं और केवल एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। इस दिन मांसाहार और तामसिक भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि संयम और श्रद्धा के साथ किया गया व्रत व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्मबल प्रदान करता है। धर्म विशेषज्ञों का कहना है कि मंगलवार केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सेवा भावना को मजबूत करने का अवसर भी है। बजरंगबली की भक्ति व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति देती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।