वैश्विक संसाधनों की नई जंग में बड़ा कदम: भारत-अमेरिका समझौते से तकनीक और उद्योग क्षेत्र को मिलेगा नया आधार

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी अब एक नए और महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की माइनिंग, प्रोसेसिंग और सुरक्षित सप्लाई को लेकर एक व्यापक समझौते पर सहमति जताई है। वैश्विक स्तर पर इस समझौते को भविष्य की अर्थव्यवस्था, तकनीकी विकास और रणनीतिक संसाधनों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच यह कदम केवल आर्थिक नहीं बल्कि भू-राजनीतिक नजरिए से भी विशेष महत्व रखता है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की मांग लगातार बढ़ी है। आधुनिक तकनीक, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण, सेमीकंडक्टर उद्योग और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ इन संसाधनों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में जिन देशों के पास इन संसाधनों की मजबूत उपलब्धता और सप्लाई चेन होगी, वे वैश्विक तकनीकी और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में आगे रहेंगे। भारत और अमेरिका के बीच हुआ यह समझौता इसी व्यापक सोच का हिस्सा माना जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि एक ऐसी आपूर्ति व्यवस्था तैयार करना भी है जो किसी एक क्षेत्र या सीमित स्रोत पर अत्यधिक निर्भर न हो। वैश्विक बाजार में सप्लाई चेन से जुड़े जोखिमों को देखते हुए यह पहल दोनों देशों के लिए रणनीतिक सुरक्षा का आधार बन सकती है। इस समझौते से भारत को विशेष लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। आर्थिक मामलों के जानकारों के अनुसार इससे भारत माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसाइक्लिंग और निवेश जैसे क्षेत्रों में अपनी भूमिका को मजबूत कर सकता है। इसके साथ ही घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को भी नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से भारत उत्पादन और तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है और यह समझौता उस प्रयास को गति देने वाला कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा तकनीक और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भविष्य की प्रतिस्पर्धा काफी हद तक रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर आधारित होगी। ऐसे में इन संसाधनों तक सुरक्षित और स्थिर पहुंच किसी भी देश की औद्योगिक शक्ति को प्रभावित कर सकती है। इसी कारण यह समझौता केवल व्यापारिक नहीं बल्कि तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक भी बनकर सामने आया है। इसी दौरान हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर भी कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्गों की सुरक्षा, व्यापारिक गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन को लेकर सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में ऐसी साझेदारियां भविष्य के आर्थिक और रणनीतिक संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं। फिलहाल यह समझौता भारत और अमेरिका के संबंधों में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में इसके प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वैश्विक रणनीति और तकनीकी विकास के क्षेत्र में भी इसके दूरगामी परिणाम दिखाई दे सकते हैं।
सड़क सुरक्षा पर सख्ती: बसों में सुरक्षा उपकरणों की जांच, नियम तोड़ने पर 8 वाहन चालकों पर कार्रवाई

झाबुआ । झाबुआ जिले के पेटलावद क्षेत्र में यातायात पुलिस ने सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर सघन चेकिंग अभियान चलाया। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर शुरू किए गए इस अभियान का उद्देश्य शहर में यातायात व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाना और सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित करना रहा। अभियान के दौरान पुलिस टीम ने बस स्टैंड, शंकर मंदिर क्षेत्र सहित कई प्रमुख स्थानों पर सघन जांच की और वाहन चालकों को नियमों के प्रति जागरूक भी किया। बसों में सुरक्षा उपकरणों की हुई बारीकी से जांचअभियान के तहत सबसे पहले यात्री बसों की जांच की गई। यातायात प्रभारी विवेक शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बस स्टैंड पर खड़ी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र और आपातकालीन द्वार की उपलब्धता को गंभीरता से परखा। इस दौरान अधिकांश बसों में आवश्यक सुरक्षा उपकरण मौजूद पाए गए, जिससे यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत मिले। पुलिस ने बस चालकों और परिचालकों को निर्देश दिए कि सभी सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। दोपहिया वाहनों पर नाकाबंदी, दस्तावेजों की गहन जांचबस स्टैंड के बाद पुलिस टीम ने शंकर मंदिर क्षेत्र में नाकाबंदी कर दोपहिया वाहनों की जांच शुरू की। इस दौरान वाहन चालकों के दस्तावेज, हेलमेट और अन्य अनिवार्य कागजात की बारीकी से जांच की गई। पुलिस जवान विकास यादव और राहुल वसुनिया भी अभियान में शामिल रहे। कई वाहन चालकों को हेलमेट और दस्तावेजों के बिना वाहन चलाते हुए पाया गया, जिस पर तत्काल कार्रवाई की गई। 8 वाहन चालकों पर चालानी कार्रवाई, 2400 रुपये जुर्मानायातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले कुल 8 दोपहिया वाहन चालकों पर पुलिस ने चालानी कार्रवाई की। इनसे कुल 2400 रुपये का जुर्माना वसूला गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है, ताकि लोग यातायात नियमों के प्रति अधिक गंभीर हों और लापरवाही से होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके। अभियान आगे भी जारी रहेगायातायात प्रभारी विवेक शर्मा ने बताया कि यह अभियान एक दिन की कार्रवाई नहीं है, बल्कि इसे लगातार जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि जो भी वाहन चालक यातायात नियमों का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि नागरिकों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। स्थानीय लोगों ने भी इस अभियान का समर्थन किया और कहा कि इस तरह की कार्रवाई से शहर में यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी।
नेपाल में अमेरिका की बढ़ती सक्रियता, चीन की बढ़ी चिंता क्या बन रहा नया भू-राजनीतिक मोर्चा?

नई दिल्ली। नेपाल में हाल के राजनीतिक बदलावों के बाद United States की सक्रियता तेजी से बढ़ती दिख रही है। अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों के लगातार दौरे और कूटनीतिक संपर्कों ने क्षेत्रीय राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। खासकर चीन और भारत के बीच स्थित नेपाल अब बड़ी भू-रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनता जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका की अंडर सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर पब्लिक डिप्लोमेसी सराह बी. रोजर्स के नेपाल दौरे की तैयारी ने इस गतिविधि को और तेज कर दिया है। इससे पहले भी कई वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी काठमांडू का दौरा कर चुके हैं। इस बढ़ती कूटनीतिक हलचल को लेकर China ने भी सतर्क रुख अपनाया है और अपनी रणनीतिक निगरानी बढ़ा दी है। विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल में बढ़ती अमेरिकी रुचि का एक कारण क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा रणनीति हो सकता है। वहीं चीन का फोकस तिब्बती मुद्दों और अपने क्षेत्रीय हितों की सुरक्षा पर है। इसी वजह से नेपाल में दोनों देशों की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। नेपाल सरकार फिलहाल सभी पक्षों के साथ संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में यह देश अमेरिका और चीन के बीच कूटनीतिक प्रतिस्पर्धा का अहम केंद्र बन सकता है।
राजनीति गरमाई: राहुल गांधी ने फिर दोहराया मोदी सरकार पर दावा, SP-BSP-RJD को लेकर भी की टिप्पणी

नई दिल्ली । दिल्ली में कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग की एक बड़ी रणनीतिक बैठक आयोजित की गई, जिसमें देशभर से सैकड़ों प्रतिनिधि शामिल हुए। इस बैठक में Rahul Gandhi मुख्य रूप से मौजूद रहे। बैठक का एजेंडा दलित समाज में कांग्रेस की पकड़ मजबूत करना और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर रणनीति तैयार करना था। इसी दौरान Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि “मोदी जी एक साल में जाने वाले हैं।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। बीजेपी ने इस टिप्पणी को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है। बैठक में कांग्रेस नेताओं ने यह भी चर्चा की कि अगर 1980 और 1990 के दशक में दलित समुदाय पर अधिक ध्यान दिया गया होता, तो क्षेत्रीय दल इतने मजबूत नहीं बनते। इस संदर्भ में समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल जैसे दलों की राजनीति पर भी अप्रत्यक्ष टिप्पणी सामने आई। कांग्रेस की इस बैठक में सामाजिक न्याय, दलित भागीदारी और संगठन विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। पार्टी नेताओं ने कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहां दलित समुदाय की भागीदारी को और मजबूत किया जाएगा। Rajendra Pal Gautam ने भी बैठक में कहा कि दलितों पर अत्याचार, सामाजिक न्याय और कांग्रेस की विचारधारा को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। वहीं, Bharatiya Janata Party ने राहुल गांधी के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि केंद्र सरकार पूरी तरह स्थिर और मजबूत है। बीजेपी नेताओं ने इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दिया और कहा कि सरकार को कोई चुनौती नहीं दे सकता। इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश की राजनीति एक बार फिर बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के केंद्र में आ गई है, जहां सत्ता और विपक्ष दोनों अपने-अपने दावे मजबूत करने में जुटे हैं।
बंगाल में अवैध प्रवासियों पर सख्ती का असर, बॉर्डर चेकपोस्टों पर बढ़ी हलचल और लौटने की बढ़ी कोशिशें

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इन दिनों असामान्य गतिविधियों की खबरें चर्चा में हैं। राज्य में अवैध प्रवास और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर प्रशासनिक सक्रियता बढ़ने के बाद सीमावर्ती जिलों में हालात तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। उत्तर 24 परगना और मालदा जैसे सीमा क्षेत्रों से सामने आ रही जानकारियां यह संकेत दे रही हैं कि प्रशासन अब इस मुद्दे को अधिक गंभीरता से ले रहा है और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। हाल के दिनों में राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान और जांच को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कई नए प्रयास शुरू किए गए हैं। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। इसके साथ ही सीमा पार से जुड़े मामलों की निगरानी और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित बनाया जा रहा है। इससे सीमा क्षेत्रों में गतिविधियों का स्वरूप बदलता दिखाई दे रहा है। राज्य में हाल ही में सामने आई ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति ने इस पूरे विषय को नई दिशा दी है। इस नीति का उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान करना बताया जा रहा है, जो निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के बाहर देश में रह रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर यह भी स्पष्ट किया गया है कि वैध दस्तावेजों और कानूनी मानकों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। इस नीति के लागू होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों के बीच चर्चा और सतर्कता बढ़ी है। इसके साथ ही सीमावर्ती जिलों में होल्डिंग सेंटरों की स्थापना को भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन केंद्रों का उद्देश्य कानूनी स्थिति और दस्तावेजों की जांच से जुड़ी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करना बताया जा रहा है। मालदा जिले में इस दिशा में शुरुआत होने की जानकारी सामने आई है, जहां निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को मजबूत बनाया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे संबंधित मामलों की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो सकेगी। सुरक्षा और प्रवास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्य स्तर पर लगातार चर्चा होती रही है। इसी क्रम में नागरिकता और सीमा सुरक्षा से संबंधित नियमों को लेकर भी अलग-अलग स्तर पर विचार और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। कुछ पक्ष इस कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ समूह इसके सामाजिक और मानवीय पहलुओं पर भी चर्चा कर रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ी गतिविधियों के बीच सुरक्षा एजेंसियां तकनीक आधारित निगरानी प्रणालियों का भी उपयोग कर रही हैं। बायोमेट्रिक पहचान, डेटा सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड जैसे उपायों को प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा रहा है। इससे जांच व्यवस्था अधिक संगठित और प्रभावी होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल सीमा सुरक्षा, नागरिकता और प्रवास से जुड़ा यह मुद्दा प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। आने वाले समय में इन नीतियों और व्यवस्थाओं का असर किस रूप में सामने आता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
Mouni Roy का बोल्ड फोटोशूट वायरल, सोशल मीडिया पर मचा धमाल

नई दिल्ली । टीवी इंडस्ट्री से अपने करियर की शुरुआत करने वाली Mouni Roy आज ग्लैमर वर्ल्ड का बड़ा नाम बन चुकी हैं। खासकर Naagin से मिली लोकप्रियता ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई। अभिनय के साथ-साथ मौनी अपने फैशन सेंस और स्टाइलिश अंदाज को लेकर भी लगातार सुर्खियों में बनी रहती हैं। एक बार फिर उनका लेटेस्ट फोटोशूट इंटरनेट पर तहलका मचा रहा है। हाल ही में शेयर की गई तस्वीरों में मौनी रॉय गोल्डन और ब्लैक शिमरी आउटफिट में बेहद ग्लैमरस नजर आ रही हैं। हर तस्वीर में उनका कॉन्फिडेंस और स्टाइल अलग ही आकर्षण पैदा कर रहा है। खुले बाल, बोल्ड मेकअप और कातिलाना एक्सप्रेशन ने उनके लुक को और भी खास बना दिया है। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार उनकी तस्वीरों पर कमेंट कर तारीफों के पुल बांध रहे हैं। तस्वीरों में मौनी कभी शीशे के सामने स्टाइलिश पोज देती नजर आ रही हैं तो कभी कैमरे के सामने अपनी अदाओं से फैंस को दीवाना बना रही हैं। उनका हर पोज इतना आकर्षक है कि तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं। फैंस का कहना है कि मौनी का फैशन और एटीट्यूड उन्हें बाकी अभिनेत्रियों से अलग बनाता है। Mouni Roy सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपने फैशन फोटोशूट की झलक फैंस के साथ शेयर करती रहती हैं। यही वजह है कि उनकी तस्वीरें पोस्ट होते ही वायरल होने लगती हैं। इस बार भी उनका बोल्ड और एलिगेंट अवतार इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मौनी रॉय का यह नया फोटोशूट साबित करता है कि वह सिर्फ शानदार अभिनेत्री ही नहीं, बल्कि फैशन आइकन भी हैं। उनका हर नया लुक फैंस के बीच ट्रेंड करने लगता है। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर उनकी फैन फॉलोइंग लगातार बढ़ती जा रही है।
सिर्फ बिजली बिल नहीं बचाते Solar Panels, पर्यावरण से लेकर कमाई तक देते हैं कई बड़े फायदे

नई दिल्ली। आज के समय में बढ़ते बिजली बिल और ऊर्जा संकट के बीच Solar Energy लोगों के लिए सबसे भरोसेमंद विकल्प बनती जा रही है। घरों, ऑफिसों और फैक्ट्रियों में तेजी से सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। वजह सिर्फ बिजली बिल में बचत नहीं, बल्कि इसके कई ऐसे फायदे हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। एक बार इंस्टॉल होने के बाद सोलर पैनल सालों तक कम खर्च में बिजली देते हैं और लंबे समय तक राहत पहुंचाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, सोलर पैनल लगने के बाद बिजली के लिए सरकारी ग्रिड पर निर्भरता काफी कम हो जाती है। खासकर ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम में बैटरी के जरिए बिजली स्टोर की जा सकती है, जिससे रात के समय भी बिजली का इस्तेमाल आसानी से किया जा सकता है। इससे बार-बार बिजली कटौती या बढ़ते बिजली बिल की चिंता कम हो जाती है। सोलर सिस्टम का एक बड़ा फायदा इसकी कम मेंटेनेंस लागत भी है। शुरुआती इंस्टॉलेशन खर्च थोड़ा ज्यादा जरूर होता है, लेकिन सरकारी सब्सिडी के कारण यह लागत काफी घट जाती है। एक बार पैनल लगाने के बाद सिर्फ साल में एक-दो बार सफाई या सामान्य देखभाल की जरूरत पड़ती है। अच्छी क्वालिटी के सोलर पैनल 20 से 25 साल तक आसानी से काम कर सकते हैं। पर्यावरण के लिहाज से भी सोलर एनर्जी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। इससे बिजली बनाने के दौरान कोई धुआं, जहरीली गैस या प्रदूषण पैदा नहीं होता। यही कारण है कि इसे क्लीन और ग्रीन एनर्जी कहा जाता है। सोलर पावर का इस्तेमाल कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। सरकार भी लोगों को सोलर एनर्जी अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है। केंद्र और कई राज्य सरकारें सोलर पैनल लगाने पर सब्सिडी और आसान लोन सुविधा दे रही हैं। इससे आम लोगों के लिए सोलर सिस्टम लगाना पहले के मुकाबले काफी आसान हो गया है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोलर एनर्जी घरेलू और व्यावसायिक बिजली जरूरतों का बड़ा स्रोत बन सकती है। कम खर्च, लंबी लाइफ और पर्यावरण सुरक्षा जैसे फायदे इसे भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा तकनीकों में शामिल कर रहे हैं।
फोन की बैटरी जल्दी हो रही खराब? ये छोटी गलतियां बन सकती हैं बड़ा कारण

नई दिल्ली। आजकल स्मार्टफोन लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन कई यूजर्स एक आम समस्या से परेशान रहते हैंफोन की बैटरी जल्दी खराब होना। ज्यादातर स्मार्टफोन्स में लिथियम-आयन बैटरी दी जाती है, जो बेहतर बैकअप और लंबी लाइफ के लिए जानी जाती है। हालांकि, गलत इस्तेमाल और कुछ छोटी लापरवाहियां बैटरी की हेल्थ तेजी से खराब कर सकती हैं। टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कई लोग अनजाने में ऐसी गलतियां करते हैं जिनका सीधा असर फोन की बैटरी लाइफ पर पड़ता है। सबसे बड़ी गलती खराब क्वालिटी वाले चार्जर का इस्तेमाल करना मानी जाती है। कई कंपनियां अब फोन के साथ चार्जर नहीं देतीं, ऐसे में लोग सस्ते या लोकल चार्जर खरीद लेते हैं। ऐसे चार्जर सही तरीके से वोल्टेज कंट्रोल नहीं कर पाते, जिससे बैटरी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उसकी क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसलिए हमेशा ओरिजिनल या सर्टिफाइड चार्जर का ही इस्तेमाल करना चाहिए। फोन को जरूरत से ज्यादा गर्म होने देना भी बैटरी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। धूप में फोन इस्तेमाल करना, गेमिंग के दौरान चार्जिंग करना या लंबे समय तक लगातार भारी ऐप्स चलाना बैटरी को ओवरहीट कर सकता है। अधिक तापमान के कारण बैटरी के अंदर केमिकल रिएक्शन तेज हो जाते हैं, जिससे बैटरी जल्दी डैमेज होने लगती है। कई यूजर्स की आदत होती है कि वे फोन को पूरी तरह डिस्चार्ज होने के बाद ही चार्ज करते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बार-बार बैटरी को 0 प्रतिशत तक गिराना उसकी लाइफ कम कर सकता है। बेहतर होगा कि फोन को 20 से 30 प्रतिशत बैटरी बचने पर ही चार्ज कर लिया जाए। बहुत ज्यादा ठंड में फोन चार्ज करना भी नुकसानदेह हो सकता है। अत्यधिक ठंडे तापमान में बैटरी की क्षमता प्रभावित होती है और चार्जिंग प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर बैटरी के अंदर तकनीकी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। इसके अलावा स्मार्ट चार्जिंग फीचर को नजरअंदाज करना भी गलत माना जाता है। आजकल कई स्मार्टफोन्स में बैटरी प्रोटेक्शन या स्मार्ट चार्जिंग फीचर दिया जाता है, जो बैटरी को लंबे समय तक 100 प्रतिशत चार्ज रहने से बचाता है। इससे बैटरी की हेल्थ लंबे समय तक बेहतर बनी रहती है। टेक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यूजर्स इन छोटी लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रखें तो स्मार्टफोन की बैटरी कई साल तक बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
108MP कैमरा और 6520mAh बैटरी के साथ लॉन्च हुआ Honor 600e, 8GB RAM ने बढ़ाई ताकत

नई दिल्ली। Honor ने अपनी नई E-सीरीज के तहत Honor 600e स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने इस फोन को दमदार कैमरा, बड़ी बैटरी और प्रीमियम फीचर्स के साथ पेश किया है। खास बात यह है कि फोन में 108 मेगापिक्सल का हाई-रिजॉल्यूशन कैमरा और 6520mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो इसे मिड-प्रीमियम सेगमेंट में मजबूत दावेदार बनाती है। Honor 600e में 6.6 इंच का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है, जिसमें 2000 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस मिलती है। इससे तेज धूप में भी स्क्रीन साफ दिखाई देती है। फोन को धूल और पानी से बचाने के लिए IP66 रेटिंग भी दी गई है। परफॉर्मेंस के लिए स्मार्टफोन में MediaTek Dimensity 7100 प्रोसेसर दिया गया है। इसके साथ Mali G610 MC2 GPU मिलता है, जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग को बेहतर बनाता है। डिवाइस में 8GB RAM और 512GB इंटरनल स्टोरेज दी गई है, जिससे यूजर्स को स्टोरेज की कमी महसूस नहीं होगी। फोटोग्राफी के लिए फोन में डुअल रियर कैमरा सेटअप मिलता है। इसका प्राइमरी कैमरा 108MP का है, जो 10x डिजिटल जूम सपोर्ट करता है। इसके अलावा 5MP का अल्ट्रा-वाइड एंगल लेंस भी दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 16MP का फ्रंट कैमरा मौजूद है। बैटरी की बात करें तो Honor 600e में 6520mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो लंबे समय तक बैकअप देने का दावा करती है। इसके साथ 45W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट भी मिलता है, जिससे फोन कम समय में चार्ज हो सकता है। कंपनी ने इस स्मार्टफोन को Desert Gold, Velvet Gray और Vital Green कलर ऑप्शन में पेश किया है। इसकी कीमत PEN 1,999 यानी करीब 56 हजार रुपये रखी गई है। फिलहाल यह स्मार्टफोन पेरू में कंपनी के ऑनलाइन स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध है।
नलों से नहीं टपकी एक बूंद: भीषण गर्मी में राजस्थान के कुएं पर निर्भर MP का गांव, पानी के लिए रोज जंग

राजगढ़ मध्यप्रदेश सरकार की “हर घर नल से जल” योजना के दावों के बीच राजगढ़ जिले का फतेहपुर गांव आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहा है। भीषण गर्मी और 45 डिग्री तापमान के बीच गांव की महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे सिर पर मटके और बैलगाड़ियों में ड्रम रखकर राजस्थान सीमा तक पानी लेने जाने को मजबूर हैं। गांव में नल लगे हैं, पाइपलाइन भी बिछाई गई है, लेकिन दो साल बाद भी नलों में एक बूंद पानी नहीं पहुंची। राजगढ़ जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित फतेहपुर गांव ग्राम पंचायत बावड़ीखेड़ा के अंतर्गत आता है। करीब 200 आबादी वाले इस गांव में पानी का संकट इतना गहरा चुका है कि लोगों का बड़ा हिस्सा रोजाना पानी जुटाने में ही निकल जाता है। गांव के तीनों हैंडपंप बंद पड़े हैं, जबकि गांव का कुआं भी पीने योग्य नहीं बचा। ऐसे में ग्रामीणों का एकमात्र सहारा राजस्थान के झालावाड़ जिले की सीमा पर स्थित कुआं है। गांव के गजराज सिंह गुर्जर बैलगाड़ी में खाली ड्रम लेकर राजस्थान की ओर जाते दिखाई देते हैं। वे बताते हैं कि गांव से करीब आधा किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी लाना पड़ता है। महिलाएं सिर पर मटके रखकर कई चक्कर लगाती हैं, जबकि बच्चे भी इस काम में हाथ बंटाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह की शुरुआत पानी भरने से होती है और उसके बाद ही खेत या मजदूरी पर जा पाते हैं। कई बार दिन में दो-दो बार पानी लाने जाना पड़ता है। तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच यह संघर्ष रोज का हिस्सा बन चुका है। पाइपलाइन बिछी, लेकिन पानी नहीं आयाग्रामीण कालू सिंह गांव में जमीन से बाहर निकली पाइपलाइन दिखाते हुए कहते हैं कि दो साल पहले नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन डाली गई थी और घरों के बाहर नल लगाए गए थे। लोगों को उम्मीद थी कि अब पानी की समस्या खत्म हो जाएगी, लेकिन आज तक पाइपलाइन पूरी तरह जोड़ी ही नहीं गई। गांव में जगह-जगह टूटी और बाहर निकली पाइपलाइनें सरकारी योजनाओं की अधूरी तस्वीर पेश कर रही हैं। सूखे नल अब ग्रामीणों के लिए सिर्फ एक प्रतीक बनकर रह गए हैं। बच्चों की पढ़ाई और जिंदगी प्रभावितपानी की समस्या का असर सिर्फ दैनिक जीवन पर नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। कई बच्चे स्कूल जाने से पहले पानी भरने में परिवार का साथ देते हैं। महिलाएं बताती हैं कि घर में पानी खत्म होने का डर हमेशा बना रहता है। भीषण गर्मी में पीने के पानी के लिए रोज संघर्ष करना उनकी मजबूरी बन गया है। हर गर्मी में बढ़ जाती है मुश्किलमध्यप्रदेश-राजस्थान सीमा पर बसे इस गांव में गर्मी बढ़ते ही हालात और खराब हो जाते हैं। राजस्थान के कुएं पर भीड़ बढ़ जाती है और पानी भरने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सिर्फ आश्वासन मिलते आए हैं, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हुआ। प्रशासन ने माना संकटखिलचीपुर जनपद सीईओ गोविंद सिंह सोलंकी ने गांव में पानी संकट की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र होने और पथरीली जमीन के कारण पाइपलाइन कार्य में तकनीकी दिक्कतें आईं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि जल्द ही योजना का काम पूरा कर गांव में पानी पहुंचाया जाएगा। फिलहाल फतेहपुर गांव के लोगों के लिए हर दिन पानी की तलाश में शुरू होता है और उसी चिंता में खत्म होता है। सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत के बीच यह गांव आज भी प्यासा खड़ा है।