रीवा में जान जोखिम में डालकर बचाई जिंदगी, तेज बहाव से निकाला व्यक्ति

नई दिल्ली। Rewa के अतरैला थाना क्षेत्र में गुरुवार को इटमा पुल के नीचे एक बड़ा हादसा टल गया। यहां नदी के तेज बहाव में फंसे एक अधेड़ व्यक्ति को ग्रामीणों ने रस्सियों के सहारे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। रेस्क्यू का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें लोग जान जोखिम में डालकर मदद करते दिखाई दे रहे हैं। जानकारी के मुताबिक घायल की पहचान रामउजागर प्रजापति (45) निवासी इटमा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि वह किसी काम से नदी किनारे गए थे। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वे नदी के गहरे हिस्से में जा गिरे। वहां मौजूद लोहे की सरिया उनके पैर में घुस गई, जिससे वह दर्द से तड़पते हुए पानी के बीच फंस गए। घटना की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंचते ही हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीआरएफ की पांच सदस्यीय टीम को मौके के लिए रवाना किया गया। टीम का नेतृत्व उपनिरीक्षक विकास कुमार पाण्डेय कर रहे थे। हालांकि, एसडीआरएफ के पहुंचने से पहले ही स्थानीय ग्रामीणों ने साहस और सूझबूझ दिखाते हुए रेस्क्यू शुरू कर दिया। लोगों ने रस्सियों के सहारे नदी में उतरकर घायल तक पहुंच बनाई और काफी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घायल को प्राथमिक उपचार के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि समय रहते रेस्क्यू हो जाने से बड़ा हादसा टल गया। वहीं, स्थानीय लोगों की बहादुरी और तत्परता की इलाके में जमकर सराहना हो रही है।
HDFC बैंक का बड़ा बयान, 45 करोड़ की गड़बड़ी के आरोपों से किया इनकार

नई दिल्ली। HDFC Bank ने 45 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि बैंक में मजबूत निगरानी, ऑडिट और कंट्रोल सिस्टम मौजूद हैं तथा सभी मामलों को तय प्रक्रियाओं के तहत ही संभाला जाता है। बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया कि चुनिंदा तथ्यों के आधार पर लगाए जा रहे आरोप भ्रामक हैं और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की अटकलों को पूरी तरह अस्वीकार किया जाता है। बैंक ने स्पष्ट किया कि आंतरिक समीक्षा और जांच की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई अंतिम निष्कर्ष निकाला जाता है। दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि बैंक की ऑडिट कमेटी ऑफ द बोर्ड (एसीबी) ने वित्त वर्ष 2024 और 2025 के दौरान Maharashtra State Road Development Corporation को किए गए करीब 45 करोड़ रुपए के भुगतान की आंतरिक सतर्कता जांच के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला एमएसआरडीसी द्वारा बैंक में जमा राशि पर दिए जाने वाले ब्याज भुगतान से जुड़ा बताया गया। आरोप लगाया गया कि राशि सीधे ब्याज भुगतान के तौर पर जारी करने के बजाय मार्केटिंग विभाग के जरिए चार स्थानीय विक्रेताओं को सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान के नाम पर भेजी गई। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन स्तर पर इस व्यवस्था को लेकर चर्चा हुई थी, जिसमें बैंक के एमडी और सीईओ Sashidhar Jagdishan की मौजूदगी का भी जिक्र किया गया। हालांकि बैंक ने इन आरोपों पर सीधे तौर पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उसकी सभी प्रक्रियाएं तय नियामकीय मानकों और आंतरिक नियमों के अनुसार संचालित होती हैं। इन खबरों के बाद शेयर बाजार में भी असर देखने को मिला। NSE: HDFCBANK के शेयर में गिरावट दर्ज की गई और कारोबार के दौरान यह करीब 2.69 प्रतिशत टूटकर 757.90 रुपए तक पहुंच गया।
दिल्ली से पटना तक पेट्रोल 110 के पार, गोल्ड-सिल्वर खरीदने वालों को मिली राहत

नई दिल्ली। देशभर में आम जनता इस समय भीषण महंगाई के चक्रव्यूह में फंस चुकी है। एक तरफ जहां पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है, वहीं दूसरी तरफ सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के दाम सर्वकालिक उच्च स्तर के आसपास बने हुए हैं। आज यानी 28 मई 2026 को भी देश के अधिकांश हिस्सों में ईंधन की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे ट्रांसपोर्टेशन से लेकर रोजमर्रा की जरूरी चीजों के महंगे होने का खतरा बढ़ गया है। दूसरी ओर, रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छूने के बाद आज सोने और चांदी की कीमतों में बेहद मामूली नरमी देखी गई है, लेकिन यह गिरावट इतनी कम है कि इससे उपभोक्ताओं को कोई खास राहत मिलती नहीं दिख रही है। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर अब सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में गहराते तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण घरेलू तेल कंपनियों ने पिछले 13 दिनों में चार बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। इस अल्पावधि में पेट्रोल और डीजल करीब 7 से 8 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। इसका सबसे बड़ा असर दिल्ली-NCR और मुंबई जैसे महानगरों में देखा जा रहा है। दिल्ली में जो पेट्रोल कुछ समय पहले तक 95 रुपये के आसपास था, वह अब 102 रुपये के पार चला गया है। वहीं मुंबई और पटना जैसे शहरों में तो पेट्रोल की कीमतें 110 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को भी पार कर चुकी हैं। इस बढ़ोतरी ने न केवल निजी वाहन चालकों बल्कि ऑटो, कैब और माल ढुलाई करने वाले कमर्शियल वाहनों की कमर तोड़ दी है। ईंधन की इस चौतरफा मार के बीच सर्राफा बाजार से आज हल्की गिरावट की खबर आई है। पिछले काफी समय से आसमान छू रहे सोने के भाव में आज थोड़ी सुस्ती रही, जिसके बाद 24 कैरेट सोना बाजार में ₹1,59,000 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,46,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह चांदी की कीमतों में भी मामूली गिरावट आई है और यह ₹2,84,900 प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। हालांकि, इस मामूली गिरावट के बावजूद मई के महीने में चांदी अब तक 11 प्रतिशत से ज्यादा महंगी हो चुकी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता और रुपये की कमजोरी के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी को तरजीह दे रहे हैं, जिससे लंबी अवधि में इनमें तेजी का रुख बना रहेगा। ऐसे में जानकारों की सलाह है कि इस उच्च स्तर पर एकमुश्त निवेश करने के बजाय छोटी-छोटी किश्तों में खरीदारी करना ही समझदारी होगी।
कितने किलोमीटर चलती है हाइब्रिड कार की बैटरी? खरीदने से पहले जरूर पढ़ें

नई दिल्ली। भारत में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों और बेहतर माइलेज की मांग के बीच Hybrid Cars तेजी से लोगों की पसंद बनती जा रही हैं। हालांकि नई Hybrid Car खरीदने से पहले ज्यादातर लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि इसकी बैटरी आखिर कितने समय या कितने किलोमीटर तक साथ देती है। हाल ही में सामने आए आंकड़ों और हजारों Hybrid Cars के डेटा ने इस चिंता को काफी हद तक कम कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, सही इस्तेमाल और नियमित सर्विसिंग के साथ Hybrid कारों की बैटरी 2 लाख से 3 लाख किलोमीटर तक आराम से चल सकती है। करीब 28,500 से ज्यादा Hybrid Cars के डेटा और टेस्ट में यह बात सामने आई कि ज्यादातर बैटरियां उम्मीद से कहीं ज्यादा लंबा प्रदर्शन दे रही हैं। खासतौर पर टोयोटा और होंडा जैसी कंपनियों की Hybrid तकनीक को काफी भरोसेमंद माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार Hybrid Cars में बैटरी पर लगातार पूरा दबाव नहीं पड़ता, क्योंकि इसमें पेट्रोल इंजन और बैटरी दोनों मिलकर काम करते हैं। शहर के ट्रैफिक में यह सिस्टम बैटरी और इंजन के बीच बेहतर संतुलन बनाता है, जिससे बैटरी की लाइफ लंबी होती है। ऑटो एक्सपर्ट्स का कहना है कि Hybrid बैटरी को लंबे समय तक बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए। नियमित सर्विसिंग और बैटरी हेल्थ चेकअप बेहद जरूरी है। इसके अलावा कार को लंबे समय तक तेज धूप और अत्यधिक गर्मी में पार्क करने से बचना चाहिए क्योंकि गर्म तापमान बैटरी पर असर डाल सकता है। कंपनी के ओरिजिनल पार्ट्स और अपडेटेड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल भी बैटरी की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाए रखता है। वहीं बहुत ज्यादा हार्ड ड्राइविंग और अचानक तेज एक्सीलरेशन बैटरी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। आजकल कई ऑटो कंपनियां Hybrid बैटरी पर 8 साल तक की वारंटी दे रही हैं, जिससे ग्राहकों का भरोसा और मजबूत हुआ है। इससे बैटरी बदलने को लेकर लोगों की चिंता भी काफी कम हो गई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि Hybrid Cars अब सिर्फ बेहतर माइलेज ही नहीं बल्कि लंबी बैटरी लाइफ और कम मेंटेनेंस लागत की वजह से भी लोकप्रिय हो रही हैं। ऐसे में अगर आप नई Hybrid Car खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो बैटरी लाइफ को लेकर ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है।
नितिन गडकरी ने पेश की नई कुकिंग तकनीक, इथेनॉल स्टोव से घटेगा गैस खर्च

नई दिल्ली। देश में लगातार बढ़ती एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों के बीच अब एक नई तकनीक चर्चा का केंद्र बन गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इथेनॉल आधारित स्टोव की तकनीक पेश की, जिसे भविष्य में एलपीजी का सस्ता और पर्यावरण अनुकूल विकल्प माना जा रहा है। इस नई तकनीक की सबसे खास बात यह है कि यह चूल्हा इथेनॉल और पानी के मिश्रण से चलता है। दावा किया गया है कि इससे निकलने वाली फ्लेम गैस चूल्हे की तरह साफ और स्थिर होती है, जबकि धुआं बेहद कम निकलता है। इथेनॉल एक अल्कोहल आधारित ईंधन है, जिसे गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। सरकार का कहना है कि यह तकनीक पूरी तरह भारतीय है और इसे घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। जानकारी के मुताबिक इस स्टोव में करीब 7 प्रतिशत पानी मिलाकर इथेनॉल का मिश्रण तैयार किया जाता है। यह मिश्रण स्टोव के फ्यूल टैंक में डाला जाता है और स्टार्ट होते ही यह साफ लौ पैदा कर खाना पकाने में इस्तेमाल होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक बड़े स्तर पर सफल होती है, तो भविष्य में एलपीजी सिलेंडर पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है। इससे घरेलू रसोई के खर्च में कमी आने के साथ-साथ पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि यह तकनीक न केवल खाना पकाने का खर्च कम करेगी बल्कि विदेशी गैस आयात पर निर्भरता भी घटाएगी। उन्होंने कहा कि इथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा क्योंकि यह ईंधन कृषि आधारित उत्पादों से तैयार होता है। इथेनॉल स्टोव को लेकर सरकार का दावा है कि यह लकड़ी, कोयला और मिट्टी के तेल जैसे पारंपरिक ईंधनों की तुलना में ज्यादा स्वच्छ विकल्प है। इससे घर के अंदर होने वाला धुआं और प्रदूषण भी कम होगा। फिलहाल यह तकनीक परीक्षण और मंजूरी के चरण में है। अभी इसकी कीमत और बाजार में लॉन्चिंग की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि सुरक्षा परीक्षण पूरे होने के बाद इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मॉडल सफल रहा तो आने वाले वर्षों में यह घरेलू और व्यावसायिक रसोई दोनों के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
मंगल पर एपीएक्सएस का कमाल, 1761 नमूनों की जांच कर भेजीं 3943 वैज्ञानिक रिपोर्ट

नई दिल्ली। मंगल ग्रह की सतह पर लगातार वैज्ञानिक खोजों में जुटा नासा का क्यूरियोसिटी रोवर एक बार फिर चर्चा में है। इस रोवर पर लगा कनाडा का अत्याधुनिक अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (APXS) अब तक 1761 नमूनों की जांच कर 3943 वैज्ञानिक रिपोर्ट पृथ्वी तक भेज चुका है। यह हाईटेक उपकरण मंगल की मिट्टी और चट्टानों के रहस्यों को समझने में वैज्ञानिकों की बड़ी मदद कर रहा है। कनाडाई स्पेस एजेंसी के अनुसार, APXS का मुख्य उद्देश्य मंगल ग्रह की सतह पर मौजूद रासायनिक तत्वों की पहचान करना और यह पता लगाना है कि क्या कभी वहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद थीं। आकार में रूबिक क्यूब जैसा दिखने वाला यह उपकरण क्यूरियोसिटी रोवर की रोबोटिक भुजा के सिरे पर लगा है। जब रोवर किसी चट्टान या मिट्टी के नमूने के करीब पहुंचता है, तब APXS उस पर एक्स-रे और अल्फा कणों की बौछार करता है। इसके बाद नमूने से निकलने वाली ऊर्जा का विश्लेषण कर उसकी रासायनिक संरचना का पता लगाया जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह उपकरण बेहद सूक्ष्म तत्वों की भी पहचान करने में सक्षम है। किसी नमूने की विस्तृत जांच में लगभग दो से तीन घंटे का समय लगता है, जबकि त्वरित विश्लेषण करीब 10 मिनट में पूरा हो जाता है। APXS ने साल 2024 में एक अहम खोज में भी बड़ी भूमिका निभाई थी। क्यूरियोसिटी रोवर के गुजरने के दौरान एक चट्टान टूट गई थी, जिसके अंदर शुद्ध सल्फर के क्रिस्टल मिले थे। मंगल ग्रह पर पहली बार इस तरह के क्रिस्टल मिलने से वैज्ञानिकों में उत्साह बढ़ गया था। माना जा रहा है कि इससे मंगल के प्राचीन वातावरण और वहां की प्राकृतिक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी। कनाडाई स्पेस एजेंसी ने बताया कि APXS दिन और रात दोनों समय काम कर सकता है। यह उपकरण थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर से संचालित होता है, जिससे रोवर को सौर ऊर्जा पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। यही वजह है कि क्यूरियोसिटी रोवर मंगल की कड़ाके की सर्दी में भी सक्रिय बना रहता है। 1 फरवरी 2026 तक क्यूरियोसिटी रोवर मंगल ग्रह पर 36.2 किलोमीटर की दूरी तय कर चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि APXS से मिलने वाले आंकड़े भविष्य में मानव मिशनों और मंगल पर जीवन की संभावनाओं को समझने में बेहद अहम साबित होंगे।
भारत के इंजीनियरिंग निर्यात ने पकड़ी रफ्तार, अप्रैल में 10.4 अरब डॉलर का कारोबार

नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में लॉजिस्टिक चुनौतियों के बावजूद भारत के इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात ने वित्त वर्ष 2026-27 की मजबूत शुरुआत की है। अप्रैल 2026 में देश का इंजीनियरिंग निर्यात सालाना आधार पर करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 10.35 अरब डॉलर पहुंच गया। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) इंडिया द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष अप्रैल में यह निर्यात 9.52 अरब डॉलर था। इस बार कई प्रमुख सेक्टर्स में मजबूत मांग और बेहतर प्रदर्शन के कारण निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। डेटा के मुताबिक एल्युमीनियम और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि तांबा और उससे संबंधित उत्पादों में 80 प्रतिशत का बड़ा उछाल दर्ज किया गया। इसके अलावा इलेक्ट्रिकल मशीनरी और उपकरणों के निर्यात में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ऑटोमोबाइल सेक्टर ने भी निर्यात वृद्धि में अहम योगदान दिया। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के निर्यात में 36 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि ऑटो कंपोनेंट्स और पार्ट्स के निर्यात में 7.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। EEPC इंडिया के अनुसार, इंजीनियरिंग गुड्स के कुल 34 पैनलों में से 28 ने अप्रैल महीने में सकारात्मक निर्यात वृद्धि दर्ज की, जो सेक्टर की व्यापक मजबूती को दर्शाता है। ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी तनाव और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बावजूद अधिकांश क्षेत्रों और बाजारों में भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत-ओमान व्यापार समझौते के कारण ओमान को निर्यात में बढ़ोतरी देखने को मिली है। हालांकि पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका (WANA) क्षेत्र में संघर्ष के कारण निर्यात पर दबाव बना हुआ है। वहीं आसियान देशों में भी मांग कमजोर रहने और ऑटोमोबाइल शिपमेंट में गिरावट के चलते निर्यात अपेक्षाकृत धीमा रहा। अप्रैल में अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के प्रमुख बाजार रहे। वहीं चीन को होने वाला निर्यात 81.7 प्रतिशत बढ़कर 301 मिलियन डॉलर से अधिक पहुंच गया। क्षेत्रीय स्तर पर उत्तरी अमेरिका में 7.1 प्रतिशत और यूरोपीय संघ में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि यूएई, सिंगापुर और सऊदी अरब को होने वाले निर्यात में गिरावट देखने को मिली। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में देश के कुल व्यापारिक निर्यात में इंजीनियरिंग गुड्स की हिस्सेदारी 23.8 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 24.9 प्रतिशत थी।
DATIYA CYBER CRIME: सोशल मीडिया पर महिला के अश्लील फोटो वायरल,फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर किया गलत काम

HIGHLIGHTS: दतिया में महिला के अश्लील फोटो वायरल फर्जी Facebook ID बनाकर भेजीं तस्वीरें भिंड के एक युवक पर लगाया आरोप रिश्तेदारों को भी भेजे गए फोटो IT Act के तहत पुलिस जांच शुरू DATIYA CYBER CRIME: मध्यप्रदेश। दतिया में सोशल मीडिया के जरिए एक महिला को बदनाम करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बता दें कि थरेट थाना क्षेत्र की रहने वाली 33 वर्षीय एक महिला ने आरोप लगाया है कि भिंड के एक युवक ने फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर उसके अश्लील फोटो वायरल कर दिए। इतना ही नहीं, बल्कि तस्वीरें उसके रिश्तेदारों को भी शेयरकी गई। अमेरिका-इजरायल एकजुटता पर ईरान का सवाल, युद्धविराम को लेकर नई बहस तेज पति के मोबाइल नंबर से बनाई ID महिला अपने पति के साथ थाने पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता का कहना है कि उसके पति के मोबाइल नंबर से फर्जी फेसबुक आईडी बनाई गई थी। इसी आईडी पर अली असलम नाम की फर्जी मैसेंजर ID से लगातार अश्लील तस्वीरें भेजी जा रही थीं, इसके स्क्रीनशॉट महिला ने खुद पुलिस को बताए। MP BJP Leader Assault: BJP जिला कोषाध्यक्ष समेत 4 पर केस दर्ज, मारपीट करने का आरोप आंध्रप्रदेश में हुई थी आरोपी से पहचान महिला का कहना है कि साल 2018 से 2023 तक वह आंध्रप्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में पानीपुरी का ठेला लगाती थी। वहीं उसकी पहचान भिंड में रहने वाले महावीर उर्फ करी बघेल से हुई थी। महिला को शक है कि उसी दौरान आरोपी ने उसके निजी फोटो अपने मोबाइल में सेव कर लिए और अब वही तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल की जा रही हैं। SAI Recruitment 2026: 100 असिस्टेंट कोच पदों पर वैकेंसी, जानें योग्यता और आवेदन प्रक्रिया व्हाट्सएप पर भी आए संदिग्ध मैसेज पीड़िता ने यह भी बताया कि 25 मई को व्हाट्सएप पर भी संदिग्ध नंबर से अश्लील फोटो भेजे गए थे। जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए थरेट थाना पुलिस ने IT Act के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
अमेरिका-इजरायल एकजुटता पर ईरान का सवाल, युद्धविराम को लेकर नई बहस तेज

नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्धविराम की चर्चाओं के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल के संबंधों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहमति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि व्हाइट हाउस और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेत सामने आ रहे हैं, जबकि इसी दौरान हजारों अमेरिकी सैनिक मध्य-पूर्व की ओर तैनात किए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी युद्धविराम को सफल बनाने में कामयाब भी हो जाते हैं, तो क्या अमेरिका और इजरायल संघर्ष के अंतिम परिणाम पर सहमत होंगे? एक अन्य पोस्ट में ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका-इजरायल संघर्ष को एक महीना बीत चुका है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि दुनिया की सरकारें इस टकराव के दीर्घकालिक परिणामों का आकलन कर रही हैं। अराघची के अनुसार, स्थिति का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि संघर्ष कितने समय तक चलता है और ईरान होर्मुज स्ट्रेट से ईंधन और अन्य मालवाहक जहाजों की आवाजाही पर कितनी देर तक नियंत्रण बनाए रखता है। इस बीच ईरान ने अमेरिका पर संघर्षविराम नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इसे दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताया है। तेहरान ने कहा है कि यह कदम संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन है और इसका जवाब दिया जाएगा। उधर अमेरिका की ओर से 26 मई को होर्मुज क्षेत्र में की गई सैन्य कार्रवाई को आत्मरक्षा बताया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों और युद्धपोतों की सुरक्षा के लिए की गई थी, जिसमें कथित तौर पर बारूदी सुरंग बिछा रही बोट्स और एक मिसाइल साइट को निशाना बनाया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट और मध्य-पूर्व में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा टकराव, होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमलों और जवाबी कार्रवाई का दावा

होर्मुज। होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया है कि उसने ईरान के चार ड्रोन को मार गिराया है और एक सैन्य ठिकाने पर भी कार्रवाई की है, जहां ड्रोन लॉन्च की तैयारी की जा रही थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई उस समय की गई जब ड्रोन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों और अमेरिकी वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। बताया जा रहा है कि निशाना बनाया गया ठिकाना दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र में एक ड्रोन नियंत्रण केंद्र था। यह एक सप्ताह के भीतर ईरान पर अमेरिका की दूसरी बड़ी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है। सेंटकॉम ने इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की रक्षा करना है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के इन दावों की कड़ी निंदा की है और इसे संघर्षविराम का उल्लंघन बताया है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका जानबूझकर क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है और उसकी सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बंदर अब्बास के पास मंगलवार सुबह कई धमाकों की आवाज सुनी गई, जिसके बाद अस्थायी रूप से एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। इसके साथ ही ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी एयरबेस पर जवाबी हमला किया है। IRGC के मुताबिक यह कार्रवाई बंदर अब्बास एयरपोर्ट के पास हुए अमेरिकी हमले के जवाब में की गई। हालांकि ईरान ने उस एयरबेस की लोकेशन स्पष्ट नहीं की है, लेकिन इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता भी गहरा दी है।