सरदारपुर अस्पताल में सुधार की शुरुआत, बंद व्यवस्थाएं हुईं शुरू, मरीजों को मिली बड़ी राहत

धार । धार जिले के सरदारपुर सिविल अस्पताल की पहचान लंबे समय से अव्यवस्थाओं, संसाधनों की कमी और बंद पड़ी स्वास्थ्य सेवाओं के कारण बनी हुई थी। मरीजों और उनके परिजनों को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ता था। लेकिन अब अस्पताल में बदलाव की एक नई तस्वीर सामने आने लगी है। प्रभारी बीएमओ डॉ. सचिन द्विवेदी के पदभार संभालने के बाद महज 9 दिनों के भीतर अस्पताल की कई महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में सुधार किया गया है, जिससे मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों दोनों को राहत मिली है। गर्मी के इस मौसम में अस्पताल के वार्डों में भर्ती मरीजों को सबसे अधिक परेशानी बंद पड़े कूलर और एयर कंडीशनर के कारण हो रही थी। तेज गर्मी और उमस के बीच मरीजों को इलाज के साथ-साथ असहनीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा था। अस्पताल प्रबंधन ने इस समस्या को प्राथमिकता देते हुए लंबे समय से बंद पड़े कूलर और एसी की मरम्मत करवाई और उन्हें दोबारा चालू कराया। इसके बाद वार्डों का माहौल पहले की तुलना में काफी बेहतर हुआ है और मरीजों को गर्मी से राहत मिलने लगी है। अस्पताल में एक और महत्वपूर्ण सुधार पॉयजन वॉश रूम के रूप में सामने आया है। अब तक पॉयजन सेवन के मामलों में चिकित्सकों को पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। ऐसे मामलों में समय पर और प्रभावी उपचार बेहद जरूरी होता है। इस आवश्यकता को देखते हुए अस्पताल परिसर में पॉयजन वॉश रूम तैयार किया गया है। चिकित्सकों का मानना है कि इससे विषाक्त पदार्थों के सेवन से जुड़े मरीजों के उपचार में तेजी आएगी और उपचार की गुणवत्ता भी बेहतर होगी। इसके साथ ही लंबे समय से बंद पड़ी रक्त संग्रहण व्यवस्था को भी फिर से शुरू कर दिया गया है। अस्पताल में रक्त संग्रहण के लिए उपयोग होने वाला फ्रिज तकनीकी खराबी के कारण लंबे समय से बंद था, जिससे रक्त संरक्षण और आपूर्ति की प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी। अस्पताल प्रशासन ने इस तकनीकी समस्या को दूर कर फ्रिज को फिर से चालू कराया है। इससे अब जरूरतमंद और गंभीर मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में आसानी होगी। अस्पताल प्रबंधन को उम्मीद है कि आगामी दिनों में आयोजित होने वाले रक्तदान शिविरों से रक्त संग्रहण व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी। इससे आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी और उन्हें अन्य स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा। प्रभारी बीएमओ डॉ. सचिन द्विवेदी ने बताया कि अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का प्रयास किया जा रहा है। उनका कहना है कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले समय में अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं में भी लगातार सुधार किए जाएंगे। अस्पताल प्रशासन का लक्ष्य है कि क्षेत्र के लोगों को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें। सरदारपुर सिविल अस्पताल में हुए इन बदलावों ने यह संकेत दिया है कि इच्छाशक्ति और प्रभावी प्रबंधन के जरिए सीमित संसाधनों में भी स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जा सकता है। स्थानीय लोगों और मरीजों ने भी इन सुधारों का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अस्पताल में सुधार का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
100 फीट तक बेकाबू दौड़ी कार, सामने से आ रही बाइक को रौंदा; दो की मौके पर मौत

देवास । देवास जिले के शिप्रा बायपास स्थित रूपाखेड़ी रेलवे ब्रिज पर शनिवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। तेज रफ्तार कार के अनियंत्रित होकर दूसरी लेन में पहुंच जाने से बाइक सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया और ग्रामीणों ने सड़क की खामियों तथा राहत कार्य में देरी का आरोप लगाते हुए करीब दो घंटे तक चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। जानकारी के अनुसार नायता पुवाल्डा निवासी हैदर, अंसार और इमरान शनिवार सुबह रोज की तरह इंदौर काम पर जाने के लिए बाइक से निकले थे। तीनों मोटर निकालने का काम करते हैं और रोजगार के सिलसिले में इंदौर जा रहे थे। सुबह करीब साढ़े आठ बजे जब वे रूपाखेड़ी रेलवे ब्रिज से गुजर रहे थे, तभी इंदौर की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार कार अचानक अनियंत्रित हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रेलवे ब्रिज पर सड़क की सतह कई जगह ऊंची-नीची है। इसी वजह से कार चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। कार करीब 100 फीट तक बेकाबू हालत में दौड़ती रही और फिर डिवाइडर पार कर दूसरी लेन में पहुंच गई। सामने से आ रही बाइक को कार ने इतनी जोरदार टक्कर मारी कि हादसे की भयावहता देखकर मौके पर मौजूद लोग सन्न रह गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार हैदर उछलकर रेलवे ब्रिज से लगभग 50 फीट नीचे जा गिरा। अंसार और इमरान भी गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में दोनों के शरीर पर गंभीर चोटें आईं और एक-एक पैर तक कटकर नीचे जा गिरा। हैदर और अंसार ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि गंभीर रूप से घायल इमरान को प्राथमिक उपचार के बाद इंदौर रेफर किया गया, जहां उसका इलाज जारी है। घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। लोगों का आरोप था कि दुर्घटना के काफी समय बाद तक एंबुलेंस और राहत दल नहीं पहुंचे। मजबूरी में घायलों और मृतकों को निजी वाहनों तथा ट्रैक्टर-ट्रॉली की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाना पड़ा। इसी बात को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने सड़क पर चक्काजाम कर दिया। चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। सूचना मिलने पर एसडीएम अभिषेक शर्मा, ट्रैफिक डीएसपी, सीएसपी सुमित अग्रवाल सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे। बाद में स्थानीय विधायक मनोज चौधरी ने भी ग्रामीणों से चर्चा की और उनकी मांगों को सुनते हुए सड़क की तकनीकी खामियों की जांच कराने तथा आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद ग्रामीणों ने जाम समाप्त कर दिया। हादसे के बाद एक बार फिर रूपाखेड़ी रेलवे ब्रिज की सड़क गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सड़क की ऊंची-नीची सतह के कारण यहां पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। उनका आरोप है कि जिम्मेदार एजेंसियों ने समस्या को गंभीरता से नहीं लिया, जिसका खामियाजा अब लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है। पुलिस ने दुर्घटना का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं प्रशासन ने सड़क की स्थिति की समीक्षा कर आवश्यक सुधार कार्य कराने का भरोसा दिया है। लेकिन दो परिवारों के लिए यह हादसा ऐसा जख्म बन गया है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।
बार-बार ट्रांसफार्मर फॉल्ट से परेशान जनता का विरोध, सड़क पर बैठकर किया हनुमान चालीसा पाठ

देवास । देवास के जमुना नगर और आवास नगर क्षेत्र में लगातार हो रही बिजली कटौती ने आखिरकार लोगों के सब्र का बांध तोड़ दिया। शुक्रवार रात क्षेत्र के सैकड़ों महिला-पुरुष सड़क पर उतर आए और मक्सी रोड पर चक्काजाम कर बिजली विभाग और प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। करीब आधे घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने सड़क पर बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ किया और बिजली समस्या के स्थायी समाधान की मांग उठाई। रहवासियों का कहना है कि क्षेत्र में बिजली आपूर्ति लंबे समय से अव्यवस्थित बनी हुई है। इलाके में लगे ट्रांसफार्मर में बार-बार फॉल्ट आने के कारण घंटों बिजली गुल रहती है। भीषण गर्मी के बीच लगातार बिजली कटौती ने लोगों का जीवन प्रभावित कर दिया है। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घरेलू कामकाज तक प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान करने के बजाय केवल अस्थायी मरम्मत कर काम चलाया जा रहा है। शुक्रवार रात जब एक बार फिर बिजली आपूर्ति बाधित हुई तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा मक्सी रोड पर पहुंच गए और सड़क पर बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने धार्मिक तरीके से अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। इससे पूरे क्षेत्र का माहौल अनोखा लेकिन विरोधपूर्ण नजर आया। चक्काजाम के कारण मक्सी रोड पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हो गया। सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हुआ। नायब तहसीलदार कपिल गुर्जर सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से चर्चा की। अधिकारियों ने लोगों की समस्याएं सुनीं और जल्द ही स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया। स्थानीय रहवासी कविता बाई ने बताया कि ट्रांसफार्मर की समस्या कोई नई नहीं है। कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग केवल अस्थायी मरम्मत करता है, जिससे कुछ समय बाद फिर वही स्थिति बन जाती है। उनका कहना है कि क्षेत्र के लोगों को अब स्थायी समाधान चाहिए, क्योंकि बार-बार बिजली गुल होने से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। इधर बिजली कंपनी के कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे और ट्रांसफार्मर को सुधारने का प्रयास किया। लेकिन मरम्मत कार्य के दौरान ही दोबारा फॉल्ट आने से समस्या की गंभीरता उजागर हो गई। इससे लोगों का आक्रोश और बढ़ गया। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों के समझाने और समाधान के भरोसे के बाद लोगों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया और यातायात फिर से सामान्य हो सका। रहवासियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ट्रांसफार्मर और बिजली आपूर्ति की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे दोबारा बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। फिलहाल प्रशासन के आश्वासन के बाद स्थिति सामान्य है, लेकिन क्षेत्रवासियों की नजर अब वादों के अमल पर टिकी हुई है।
CM MOHAN YADAV KATRA VISIT: CM मोहन यादव बोले- महाकाल और भोजशाला में लागू करेंगे वैष्णो देवी जैसा मॉडल

CM MOHAN YADAV KATRA VISIT: भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जम्मू-कश्मीर के कटरा पहुंचे, जहां उन्होंने माता वैष्णो देवी के दर्शन किए और मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए अधिकारीयों द्वारा वैष्णो देवी मॉडल का अध्ययन किया जा रहा है। MP HIGH COURT ACTION: कागजों में दो बार किया रिटायर, कोर्ट पहुंचा चौकीदार तो खुली विभाग की पोल महाकाल, ओंकारेश्वर और भोजशाला पर रहेगा फोकस मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन के महाकाल मंदिर, ओंकारेश्वर देवस्थान और धार की भोजशाला में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए बेहतर प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है। हाल ही में भोजशाला को मां वाग्देवी मंदिर की मान्यता मिलने के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में भीड़ नियंत्रण और सुविधाओं को मजबूत करने पर सरकार का विशेष ध्यान है । MP INDUSTRIAL HUB: CM मोहन यादव के विजन से मध्यप्रदेश बना इंडस्ट्रियल हब, 48 नए औद्योगिक पार्क बनाने पर फोकस श्राइन बोर्ड की भीड़ प्रबंधन प्रणाली का अध्ययन कटरा दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की भीड़ प्रबंधन प्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था, यात्री सुविधाओं और डिजिटल प्रबंधन मॉडल का अध्ययन कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका उद्देश्य यह समझना है कि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक दर्शन कैसे करवाया जाए। आंधी-बारिश के असर से विदिशा का मौसम सुहाना, तापमान में आई गिरावट धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देने की तैयारी मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। सरकार चाहती है कि महाकाल, ओंकारेश्वर और भोजशाला देश के सबसे व्यवस्थित और आकर्षक धार्मिक स्थलों में शामिल हों।
चालान से लेकर अनुभव तक होगी पूरी जांच, ट्रक ड्राइवरों के लिए रेटिंग सिस्टम पर सरकार का विचार

नई दिल्ली । देश में वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र में लगातार बढ़ रही कुशल चालकों की कमी को दूर करने के लिए केंद्र सरकार एक नई पहल पर काम कर रही है। इस योजना के तहत ट्रक और अन्य वाणिज्यिक वाहन चलाने वाले चालकों के लिए एक विशेष रेटिंग आधारित ‘ड्राइवर इंडेक्स’ विकसित करने पर विचार किया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य चालकों के कौशल, अनुभव और सड़क सुरक्षा रिकॉर्ड के आधार पर उनकी रैंकिंग तय करना है, जिससे परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भर्ती प्रक्रिया अधिक प्रभावी और भरोसेमंद बन सके। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय इस दिशा में प्रारंभिक स्तर पर कार्य कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस रेटिंग प्रणाली में चालक के पेशेवर रिकॉर्ड से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया जा सकता है। इनमें ड्राइविंग अनुभव, लाइसेंस की वैधता अवधि, यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े चालान, बीमा संबंधी जानकारी और सड़क सुरक्षा मानकों के पालन जैसे बिंदु प्रमुख होंगे। इन सभी मापदंडों के आधार पर प्रत्येक चालक का एक समग्र मूल्यांकन तैयार किया जाएगा, जिससे उसके कौशल और विश्वसनीयता का आकलन किया जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की प्रणाली लागू होने से परिवहन कंपनियों को योग्य और अनुभवी चालकों की पहचान करने में आसानी होगी। वर्तमान में कई कंपनियां चालक चयन के दौरान सीमित सूचनाओं के आधार पर निर्णय लेती हैं, जिसके कारण कई बार अपेक्षित स्तर के चालक उपलब्ध नहीं हो पाते। नई व्यवस्था इस चुनौती को काफी हद तक कम कर सकती है और उद्योग को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने में मददगार साबित हो सकती है। सरकार इस परियोजना के तकनीकी और विश्लेषणात्मक पहलुओं पर भी काम कर रही है। इसके लिए शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों की सहायता ली जा रही है ताकि एक वैज्ञानिक और निष्पक्ष रेटिंग मॉडल तैयार किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इस सूचकांक की सफलता उसके मापदंडों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर निर्भर करेगी। यदि यह मॉडल प्रभावी साबित होता है तो भविष्य में यह वाणिज्यिक परिवहन क्षेत्र में भर्ती का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। देश में कुशल चालकों की कमी लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। माल परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों के बावजूद प्रशिक्षित चालकों की उपलब्धता अपेक्षाकृत कम है। इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार पहले भी चालक प्रशिक्षण संस्थानों के विस्तार और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास पर जोर दे चुकी है। इसके तहत देशभर में बड़ी संख्या में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई गई थी ताकि पेशेवर और सुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा दिया जा सके। विशेष रूप से भारी और आधुनिक वाणिज्यिक वाहनों के संचालन के लिए प्रशिक्षित चालकों की मांग लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक ट्रकों और उन्नत परिवहन प्रणालियों के विस्तार को देखते हुए चालक प्रशिक्षण और मूल्यांकन की आवश्यकता और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगी। सरकार का मानना है कि रेटिंग आधारित ड्राइवर इंडेक्स न केवल योग्य चालकों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराएगा, बल्कि सड़क सुरक्षा, परिवहन दक्षता और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
IIP का नया ढांचा: 2022-23 आधार वर्ष से औद्योगिक आंकड़ों को मिलेगी नई दिशा

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय देश की अर्थव्यवस्था का आकलन करने के लिहाज से महत्त्वपूर्ण संकेतकों की समीक्षा कर रहा है। उसने राष्ट्रीय लेखा और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के लिए नई श्रृंखला मुहैया करा दी हैं। अगले सप्ताह वह औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के लिए नई श्रृंखला जारी करने वाला है। ये महत्त्वपूर्ण बदलाव हैं क्योंकि नए सूचकांक अर्थव्यवस्था में हुए बदलावों को दर्शाते हैं। आईआईपी के आधार वर्ष को 2011-12 से हटाकर 2022-23 किया जा रहा है। पिछले एक दशक में देश में औद्योगिक गतिविधियां बहुत अधिक बदली हैं और नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, डिजिटल तकनीक और अहम खनिजों के क्षेत्र में काफी विस्तार हुआ है।मंत्रालय के मुताबिक नई श्रृंखला में दुर्लभ खनिज, लघु खनिज, गैस और बिजली आपूर्ति, गंदे जल और कचरे का प्रबंधन आदि शामिल हैं। केरोसिन, सिलाई मशीन,फ्लूरोसेंट ट्यूब्स आदि को इससे बाहर कर दिया गया है। कुल वस्तुओं की संख्या 407 से बढ़ाकर 463 कर दी गई है। विनिर्माण में ही संख्या 405 से बढ़कर 455 कर दी गई है। 64 वस्तु समूह हटाए गए हैं और 120 नए शामिल कर दिए गए हैं। बढ़ी हुई बास्केट सूचकांक को नीति निर्माताओं, कारोबारों और निवेशकों के लिए अधिक प्रासांगिक बनाएगी। इस कवायद के लिए गठित तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) ने औद्योगिक मापन को आधुनिक बनाने का प्रयास भी किया। इसमें पद्धतियों में सुधार और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाएं शामिल की गईं। उन्नत अर्थव्यवस्थाएं तेजी से ऐसी गतिशील औद्योगिक मापन प्रणालियों का उपयोग कर रही हैं, जिनमें भार और उत्पादन के पैटर्न लगातार अपडेट होते रहते हैं।टीएसी की रिपोर्ट में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) तथा संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी प्रभाग की औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, 2010 से संबंधित अंतरराष्ट्रीय सिफारिशों का उल्लेख किया गया है जो कठोर तयशुदा आधार प्रणालियों के बजाय श्रृंखला से जुड़े सूचकांकों का समर्थन करती हैं। ऐसी प्रणालियों में प्रतिस्थापन पर पक्षपात कम होता है और औद्योगिक भार को पुराना नहीं होने पाता, विशेषकर तब जब पुराने उद्योगों का पतन होता है और नए उद्योग तेजी से उभरते हैं। फिर भी इस बड़े बदलाव ने कुछ खामियों को उजागर किया है। भारत की सांख्यिकीय प्रणाली अब भी विलंबित सर्वेक्षणों, राज्यों से असमान सूचना, पुरानी प्रशासनिक प्रणालियों और कमजोर डिजिटल डेटा प्रणालियों पर निर्भर हैं। विनिर्माण का बड़ा हिस्सा अब भी असंगठित क्षेत्र में है, जहां उत्पादन छोटे पैमाने पर तथा अनौपचारिक होता है और जिसकी निगरानी करना कठिन होता है। हालांकि टीएसी ने असंगठित क्षेत्र के लिए सूचकांक बनाने की दूरदर्शी सिफारिश की है लेकिन देखना होगा कि यह लागू कैसे किया जाए। इसके अलावा मशीनरी और उपकरणों की मरम्मत तथा स्थापना जैसी गतिविधियां अब भी कठिन हैं क्योंकि वे मुख्यतः सेवा उन्मुख हैं और विश्वसनीय मापदंड विकसित करने की आवश्यकता होती है जो फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। इसी तरह दुर्लभ पृथ्वी खनिजों का समावेश उभरती प्रौद्योगिकियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में भारत की महत्त्वाकांक्षाओं को दर्शाता है। यद्यपि भारत के पास विश्व के तीसरे सबसे बड़े दुर्लभ पृथ्वी खनिज भंडार हैं, लेकिन देश में प्रसंस्करण क्षमता अब भी सीमित है। मूल्य अपस्फीतक मूल्य-आधारित उत्पादन आंकड़ों को मात्रा आधारित उत्पादन अनुमान में बदलने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस संदर्भ में उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) की अनुपस्थिति एक बड़ी कमी बनी हुई है। यही वजह है कि संशोधित आईआईपी श्रृंखला को अधिक आधुनिक औद्योगिक मापन प्रणाली की ओर बढ़ना माना जा सकता है। हमारी फौरी प्राथमिकता डेटा की गुणवत्ता में सुधार करना, डिजिटल रिपोर्टिंग प्रणालियों को मजबूत करना, अपस्फीतकों को परिष्कृत करना और असंगठित तथा खंडित क्षेत्रों को पकड़ने के लिए बेहतर तरीकों का विकास करना होना चाहिए। निरंतर संस्थागत सुधारों और पद्धतिगत सुधारों के साथ आईआईपी भारत के औद्योगिक और आर्थिक परिवर्तन का अधिक भरोसेमंद संकेतक बन सकता है।
देश के बड़े जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से गिर रहा है, और अधिकांश नदी घाटियाँ गंभीर जल संकट की स्थिति के करीब पहुँचती जा रही हैं।

भीषण गर्मी और लू की वजह से पूरे भारत में जल आपूर्ति की समस्या तेजी से बढ़ रही है। उत्तर भारत के कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है और रात में भी तापमान लगातार ऊंचा रहने से पानी तथा बिजली की मांग बढ़ रही है। सुपर अल नीनो के कारण बारिश में व्यवधान की आशंका से समस्या और गंभीर हो सकती है। केंद्रीय जल आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार जिन 166 जलाशयों पर नजर रखी जा रही है, उनमें 30 अप्रैल को मौजूद 71.08 अरब घन मीटर पानी 14 मई तक घटकर 63.23 अरब घन मीटर ही रह गया है। यानी सिर्फ दो हफ्तों में लगभग 8 अरब घन मीटर की गिरावट आई है। तेरह प्रमुख जलाशयों में जल स्तर अपने सामान्य भंडारण स्तर के आधे से भी कम रह गया है। यह समस्या तब आ रही है, जब भारत में पानी का बहुत अधिक इस्तेमाल करने वाले क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ी हैं। इनमें एथनॉल मिश्रण, डेटा सेंटर, आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का ढांचा और विनिर्माण शामिल हैं। इनमें से कई निवेश पानी के संकट वाले क्षेत्रों में हो रहे हैं। महाराष्ट्र और कर्नाटक बार-बार सूखे और भूजल स्तर में गिरावट की समस्या से जूझते रहे हैं मगर गन्ने की खेती और एथनॉल उत्पादन बढ़ता जा रहा है, जबकि गन्ने की खेती में पानी की सबसे ज्यादा खपत होती है। इसी तरह अक्सर शहरी जल संकट से जूझने वाले महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना और कर्नाटक डेटा सेंटर के बड़े अड्डे बनते जा रहे हैं। हाइपरस्केल डेटा सेंटरों को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। मुद्दा यह नहीं है कि इन क्षेत्रों का विस्तार होना चाहिए या नहीं, मुद्दा यह है कि औद्योगिक और ऊर्जा नीतियां जल विज्ञान संबंधी हकीकत के मुताबिक हैं या नहीं। औद्योगिक स्थलों के चयन, शहरी नियोजन और कृषि प्रोत्साहन में जल की उपलब्धता प्रमुख मानदंड होना चाहिए। इस व्यापक संकट के परिणाम भारत के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्पष्ट दिख रहे हैं। उदाहरण के लिए, राजस्थान के बाड़मेर जिले में एक लिफ्ट नहर के बंद होने से कई गांव इकलौते हैंडपंप पर निर्भर हो गए हैं। दिल्ली में यमुना में पानी कम होने और प्रदूषण बढ़ने से जल शोधन क्षमता कम हो गई है, जबकि गर्मियों के महीनों में पानी की मांग बढ़ जाती है, इसलिए शहर को पड़ोसी राज्यों से मदद मांगनी पड़ रही है। वर्ष 2024 के बेंगलूरु जल संकट ने यह दिखाया कि भूजल भंडार कम होने, झीलों पर अतिक्रमण होने और वर्षा जल संचयन नियमों का ठीक से पालन न होने पर शहरी जल व्यवस्था कितनी तेजी से चरमरा सकती है। यह संकट अब केवल वर्षा की कमी तक सीमित नहीं है। तापमान बढ़ने से ज्यादा पानी भाप बनकर उड़ रहा है और भूजल स्तर गिरता जा रहा है। भारत लगभग 251 अरब घन मीटर सालाना भूजल दोहन पहले से करता आ रहा है, जो विश्व में कुल दोहन का लगभग एक चौथाई है। 1950 में यहां हर व्यक्ति के लिए लगभग 5,000 घन मीटर पानी उपलब्ध था, जो 2021 में घटकर 1,486 घन मीटर रह गई है, जिसमें और भी कमी आने का अनुमान है। ऊर्जा, पर्यावरण एवं जल परिषद के शोध से पता चलता है कि भारत के 15 प्रमुख नदी बेसिनों में से 11 गंभीर जल संकट के कगार पर हैं। जल की कमी और संकट के व्यापक आर्थिक परिणाम भी हो सकते हैं। खाद्य उत्पादन पर इसका असर पड़ा तो महंगाई तेजी से बढ़ सकती है, जिसके व्यापक नीतिगत प्रभाव हो सकते हैं। दुर्भाग्यवश स्थानीय निकाय पेयजल संबंधी आपात स्थितियों से निपटने के लिए ठीक से तैयार नहीं हैं। तेजी से शहरीकरण होने के बाद भी अधिकतर शहरों में अभी व्यापक जल सुरक्षा योजनाएं नहीं हैं। नगरपालिकाएं भूजल दोहन, आपात स्थितियों के दौरान टैंकरों द्वारा आपूर्ति और संकट में अस्थायी प्रतिक्रियाओं पर ज्यादा निर्भर हैं। संपादकीय
15 साल के वैभव की धमाकेदार पारी पर बिग बी हुए इम्प्रेस, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 में अपने शानदार प्रदर्शन से सुर्खियां बटोर रहे युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी ने न सिर्फ क्रिकेट फैंस को प्रभावित किया है, बल्कि बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन भी उनके खेल के कायल हो गए हैं। वैभव की धमाकेदार पारियों के बाद सोशल मीडिया पर उनकी चर्चा लगातार तेज होती जा रही है। जानकारी के अनुसार, अमिताभ बच्चन ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक पोस्ट साझा करते हुए वैभव सूर्यवंशी की जमकर सराहना की। उन्होंने 15 वर्षीय इस युवा खिलाड़ी की प्रतिभा को “अद्भुत” बताया और उनकी बल्लेबाजी की तुलना करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में लिखा कि इस उम्र में तो लोग सामान्य खेल भी ठीक से नहीं खेल पाते, जबकि वैभव बड़े मंच पर शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। बिग बी के इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। जहां कई फैंस ने अमिताभ बच्चन की तारीफ की, वहीं कुछ लोगों ने इस पोस्ट पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी दीं। हालांकि अमिताभ बच्चन अक्सर अपने विचारों और ट्वीट्स को लेकर चर्चा में रहते हैं, और एक बार फिर उन्होंने सुर्खियां बटोर ली हैं। दूसरी ओर, वैभव सूर्यवंशी का प्रदर्शन IPL 2026 में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। उन्होंने हाल ही में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मात्र 37 गेंदों में 103 रनों की विस्फोटक पारी खेली थी। इसके बाद गुजरात टाइटन्स के खिलाफ क्वालिफायर मुकाबले में भी उन्होंने 47 गेंदों में 96 रन बनाकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। भले ही उनकी टीम को गुजरात के खिलाफ जीत नहीं मिली, लेकिन वैभव की बल्लेबाजी ने सभी का दिल जीत लिया। कम उम्र में इतने बड़े मंच पर इस तरह का प्रदर्शन उन्हें भविष्य का बड़ा सितारा साबित कर रहा है। अमिताभ बच्चन का यह रिएक्शन भी इस बात का संकेत है कि वैभव सूर्यवंशी अब सिर्फ क्रिकेट जगत ही नहीं, बल्कि फिल्म और मनोरंजन जगत में भी अपनी पहचान बना रहे हैं।
Vastu Shastra Tips: घर की इन दिशाओं में करें बदलाव, जीवन में आ सकती है खुशहाली

नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र को भारतीय परंपरा में जीवन और घर-परिवार की ऊर्जा को संतुलित करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। माना जाता है कि सही दिशा और सही व्यवस्था से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, जबकि गलत दिशा में रखी वस्तुएं जीवन में बाधाएं पैदा कर सकती हैं। ऐसे में कुछ सरल वास्तु उपाय अपनाकर घर के वातावरण को बेहतर बनाया जा सकता है और जीवन में तरक्की के अवसर बढ़ सकते हैं। वास्तु के अनुसार, घर में धन और समृद्धि से जुड़ी वस्तुओं की दिशा का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि धन रखने के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इस दिशा में तिजोरी, अलमारी या कीमती वस्तुएं रखने से आर्थिक स्थिरता और समृद्धि बढ़ने की संभावना बताई जाती है। वहीं धन को पश्चिम या दक्षिण दिशा में रखने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसे असंतुलन का कारण माना जाता है। इसके अलावा, घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए कुछ प्रतीकों और वस्तुओं का भी महत्व बताया गया है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, उत्तर दिशा में कुबेर का प्रतीक रखने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, जबकि दक्षिण दिशा में लाल घोड़े की जोड़ी को शक्ति और सफलता का प्रतीक माना जाता है। ये उपाय विशेष रूप से करियर और व्यापार में प्रगति के संकेत से जोड़े जाते हैं। वास्तु शास्त्र में रंगों का भी महत्वपूर्ण स्थान बताया गया है। माना जाता है कि यदि घर की दक्षिण-पूर्व दिशा में नीले रंग का अधिक उपयोग हो रहा है, तो यह आर्थिक प्रवाह को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में हल्के नारंगी या गुलाबी रंग का उपयोग सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माना जाता है। इसके अलावा, घर में पौधों का भी विशेष महत्व बताया गया है। तुलसी के पौधे को अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है, वहां सकारात्मकता और खुशहाली बनी रहती है। रोज शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है, जिससे घर में शांति और समृद्धि का वातावरण बना रहता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार ये उपाय जीवन में छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव ला सकते हैं। हालांकि, इन्हें आस्था और परंपरा के रूप में देखा जाता है, और किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय में व्यक्तिगत विवेक और व्यावहारिकता का ध्यान रखना जरूरी होता है।
झुर्रियों और पिगमेंटेशन से राहत के लिए अपनाएं ये नेचुरल नाइट स्किन केयर

नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और बढ़ते प्रदूषण का सीधा असर हमारी त्वचा पर देखने को मिलता है। धूल, मिट्टी और धूप के कारण चेहरे पर दाग-धब्बे, झुर्रियां और पिगमेंटेशन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में महंगे कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स हर किसी के लिए असरदार साबित नहीं होते। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ प्राकृतिक उपायों को रात के समय अपनाकर त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाया जा सकता है। रात का समय त्वचा की मरम्मत (स्किन रिपेयर) के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दौरान त्वचा खुद को रिपेयर करने की प्रक्रिया में होती है। ऐसे में अगर सही प्राकृतिक तत्वों का उपयोग किया जाए तो इसका असर और भी बेहतर हो सकता है। एलोवेरा: त्वचा के लिए प्राकृतिक वरदानएलोवेरा को त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन A, C और E त्वचा को गहराई से पोषण देते हैं और उसे स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके नियमित इस्तेमाल से त्वचा में नमी बनी रहती है और चेहरा अधिक फ्रेश और ग्लोइंग दिखने लगता है। एलोवेरा में मौजूद एलोइन और एलोसिन जैसे तत्व त्वचा में मेलेनिन के अत्यधिक उत्पादन को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं। यही कारण है कि यह पिगमेंटेशन, झाइयों और मुंहासों के निशानों को हल्का करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा यह नई स्किन सेल्स के निर्माण को भी बढ़ावा देता है, जिससे त्वचा समय के साथ अधिक साफ और निखरी हुई नजर आती है। झुर्रियों और दाग-धब्बों पर असरनियमित रूप से एलोवेरा लगाने से त्वचा की लोच (elasticity) बेहतर हो सकती है, जिससे झुर्रियों की समस्या में राहत मिल सकती है। यह त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करता है और ड्राईनेस को कम करता है, जो झुर्रियों का एक प्रमुख कारण होता है। सन डैमेज और टैनिंग में राहततेज धूप और प्रदूषण के कारण होने वाली टैनिंग, रेडनेस और जलन में भी एलोवेरा काफी असरदार माना जाता है। इसकी ठंडी तासीर त्वचा को राहत देती है और जलन को कम करने में मदद करती है। नियमित उपयोग से टैनिंग धीरे-धीरे हल्की पड़ सकती है और स्किन टोन बेहतर हो सकता है। अगर रोजाना सोने से पहले एलोवेरा जैसे प्राकृतिक उपायों को स्किन केयर रूटीन में शामिल किया जाए, तो त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसी भी गंभीर त्वचा समस्या के लिए विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी होता है।