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PSG की जीत के बाद पेरिस में हिंसा भड़की, फुटबॉल फैंस और पुलिस के बीच झड़प में 79 लोग गिरफ्तार

नई दिल्ली । फ्रांस की राजधानी पेरिस में फुटबॉल क्लब की खिताबी जीत के बाद जश्न का माहौल अचानक हिंसा और तनाव में बदल गया, जब हजारों की संख्या में जुटे प्रशंसकों के बीच स्थिति अनियंत्रित हो गई और देखते ही देखते कई इलाकों में भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आने लगीं। जीत की खुशी में सड़कों पर उमड़ी भीड़ ने कई जगह सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और कुछ स्थानों पर आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी दर्ज की गईं, जिसके बाद पुलिस को स्थिति नियंत्रित करने के लिए कड़ा रुख अपनाना पड़ा। घटनाक्रम के अनुसार, जीत के बाद जैसे ही जश्न का दायरा शहर के प्रमुख क्षेत्रों तक फैला, कुछ समूहों ने उत्सव को हिंसक रूप दे दिया और भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास में सुरक्षा बलों को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। कई जगहों पर फैंस और पुलिस के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिससे हालात और अधिक तनावपूर्ण हो गए। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया और भीड़ को तितर-बितर करने के प्रयास किए गए। अधिकारियों के अनुसार, पूरे घटनाक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखने के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई और उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया गया। अब तक कुल 79 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने और हिंसा फैलाने जैसे आरोप लगाए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शहर में शांति व्यवस्था को किसी भी स्थिति में बिगड़ने नहीं दिया जाएगा और आगे भी सख्त निगरानी जारी रहेगी। इस घटना ने एक बार फिर बड़े खेल आयोजनों के बाद होने वाले भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अवसरों पर उत्साह और भीड़ के संयोजन को नियंत्रित करने के लिए अधिक मजबूत योजना की आवश्यकता होती है, ताकि जीत का जश्न हिंसा में न बदल सके। पेरिस के विभिन्न हिस्सों में हुई घटनाओं के बाद स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है और अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है ताकि किसी भी तरह की नई अप्रिय घटना को रोका जा सके। फिलहाल शहर में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन कई क्षेत्रों में अभी भी सुरक्षा बलों की तैनाती बनी हुई है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि बड़े खेल आयोजनों के बाद भीड़ नियंत्रण एक बड़ी चुनौती बना रहता है, जिसे गंभीरता से संभालना आवश्यक है।

देशभर में LPG उपभोक्ताओं को राहत जारी, घरेलू गैस सिलेंडर के दाम मार्च स्तर पर बरकरार, कल हो सकता है बड़ा फैसला

नई दिल्ली । देशभर में घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए 31 मई को जारी ताजा अपडेट में 14.2 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को लेकर कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों की मासिक समीक्षा के बाद यह स्थिति सामने आई है कि फिलहाल घरेलू गैस की दरें मार्च माह के स्तर पर ही स्थिर बनी हुई हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं को किसी अतिरिक्त बोझ का सामना नहीं करना पड़ रहा है। हालांकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बदलाव को देखते हुए आने वाले दिनों में कीमतों पर असर पड़ने की आशंका भी बनी हुई है। देश की राजधानी दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 913 रुपये दर्ज की गई है, जबकि मुंबई में यह 912.50 रुपये पर उपलब्ध है। कोलकाता में उपभोक्ताओं को 939 रुपये और चेन्नई में 928.50 रुपये की दर पर सिलेंडर मिल रहा है। इसी तरह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में घरेलू सिलेंडर की कीमत 918.50 रुपये पर स्थिर बनी हुई है, जो राज्य के उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की स्थिति को दर्शाती है। लखनऊ, पटना और अन्य प्रमुख शहरों में भी दरों में स्थिरता देखी गई है, हालांकि कुछ शहरों में कीमतें 950 रुपये से अधिक के स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे क्षेत्रीय अंतर साफ नजर आता है। कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में हाल के दिनों में अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन घरेलू उपयोग वाले सिलेंडर में स्थिरता बनाए रखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में संभावित बाधाएं भविष्य में LPG कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। तेल कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को दरों की समीक्षा करती हैं, और इसी क्रम में कल यानी 1 जून को एक नई समीक्षा की संभावना है, जो उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। पिछले कुछ महीनों में घरेलू LPG की कीमतों में सीमित बदलाव ही देखने को मिला है, जिसमें मार्च में 60 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसके बाद से अब तक दरें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, जिससे आने वाले समय में घरेलू गैस की कीमतों पर दबाव बन सकता है। उपभोक्ताओं की नजर अब 1 जून की समीक्षा पर टिकी हुई है, क्योंकि हर महीने की पहली तारीख को तेल विपणन कंपनियां नए रेट जारी करती हैं। यदि वैश्विक बाजार में अस्थिरता जारी रहती है तो घरेलू LPG कीमतों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल स्थिति यह है कि देशभर में रसोई गैस की कीमतें स्थिर हैं और उपभोक्ताओं को किसी तात्कालिक बढ़ोतरी से राहत मिली हुई है।

शहरों के लिए कौन सी EV बेहतर सौदा? Tata Tiago EV और MG Comet EV की कीमत, EMI और ऑन-रोड खर्च की पूरी तुलना

नई दिल्ली । भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है, जहां बढ़ती ईंधन कीमतों और शहरों में ट्रैफिक के दबाव के कारण लोग अब किफायती और पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। इसी बदलते बाजार में Tata Tiago EV और MG Comet EV दो ऐसी कारें हैं जो बजट सेगमेंट में सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। दोनों ही मॉडल कीमत, फीचर्स और फाइनेंस विकल्पों के आधार पर ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन EMI और डाउन पेमेंट के लिहाज से किस कार को खरीदना ज्यादा समझदारी भरा सौदा साबित होगा, यह सवाल खरीदारों के बीच लगातार बना हुआ है। Tata Tiago EV की एक्स-शोरूम कीमत लगभग 6.99 लाख रुपये से शुरू होती है और RTO, इंश्योरेंस व अन्य चार्ज जोड़ने के बाद इसकी ऑन-रोड कीमत करीब 7.41 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। यदि ग्राहक 2 लाख रुपये का डाउन पेमेंट करता है और शेष राशि को 9 प्रतिशत ब्याज दर पर 4 साल के लिए फाइनेंस कराता है तो उसकी मासिक EMI लगभग 13,464 रुपये बनती है। वहीं 5 साल की अवधि चुनने पर यह EMI घटकर करीब 11,231 रुपये प्रति माह हो जाती है, जिससे मासिक बजट पर दबाव कुछ कम हो जाता है। दूसरी ओर MG Comet EV की एक्स-शोरूम कीमत लगभग 7.62 लाख रुपये है और ऑन-रोड कीमत करीब 8.07 लाख रुपये तक पहुंचती है। समान 2 लाख रुपये के डाउन पेमेंट और 9 प्रतिशत ब्याज दर पर 4 साल के लोन विकल्प में इसकी मासिक EMI लगभग 15,118 रुपये बनती है। अगर यही लोन 5 साल के लिए लिया जाए तो EMI घटकर करीब 12,611 रुपये प्रति माह के आसपास आ जाती है, लेकिन फिर भी यह Tiago EV की तुलना में अधिक रहती है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि EMI और कुल फाइनेंसिंग बोझ के मामले में Tata Tiago EV, MG Comet EV की तुलना में ज्यादा किफायती विकल्प साबित होती है। हालांकि, खरीद का निर्णय केवल EMI पर आधारित नहीं होना चाहिए क्योंकि दोनों गाड़ियों की उपयोगिता अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की गई है। MG Comet EV एक कॉम्पैक्ट सिटी कार है, जो भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों और सीमित पार्किंग स्पेस के लिए उपयुक्त मानी जाती है। इसका छोटा आकार इसे आसान ड्राइविंग और पार्किंग का फायदा देता है, लेकिन इसमें जगह सीमित होने के कारण यह मुख्य रूप से छोटे परिवार या व्यक्तिगत उपयोग के लिए बेहतर विकल्प है। वहीं Tata Tiago EV एक हैचबैक कार के रूप में अधिक स्पेस, आराम और लंबी दूरी की यात्रा के लिए बेहतर संतुलन प्रदान करती है, जिससे यह फैमिली यूजर्स के बीच ज्यादा लोकप्रिय विकल्प बन जाती है।

होर्मुज संकट के बीच भारत का बड़ा आर्थिक कदम, पेट्रोल-डीजल निर्यात शुल्क में बदलाव से वैश्विक तेल बाजार पर असर की उम्मीद

नई दिल्ली । वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते दबाव और होर्मुज क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति के बीच भारत सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े नियमों में अहम बदलाव करते हुए निर्यात शुल्क में संशोधन का निर्णय लिया है। इस कदम को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों के उतार-चढ़ाव और घरेलू आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल, डीजल और विमानन टरबाइन ईंधन पर नई दरें 1 जून से प्रभावी होंगी, जिससे ऊर्जा व्यापार और निर्यात नीति पर सीधा असर पड़ेगा। इस निर्णय के बाद पेट्रोल पर निर्यात शुल्क घटकर 1.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है, जबकि डीजल पर यह 13.5 रुपये प्रति लीटर रहेगा। विमानन टरबाइन ईंधन पर 9.5 रुपये प्रति लीटर का शुल्क लागू किया गया है। यह बदलाव विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क के रूप में लागू होगा और इसके तहत रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे कर ढांचे में आंशिक सरलता देखने को मिलेगी। सरकार का कहना है कि निर्यात शुल्क की समीक्षा हर पखवाड़े की जाती है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति स्थिति का आकलन शामिल होता है। पिछले संशोधन के बाद अब नई दरों की घोषणा मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखकर की गई है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों पर अनिश्चितता के चलते सरकार का फोकस इस बात पर है कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे और किसी भी प्रकार का घरेलू संकट उत्पन्न न हो। इसी उद्देश्य से निर्यात नीति में समय-समय पर संशोधन किया जाता है ताकि घरेलू जरूरतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बीच संतुलन बना रहे। इससे पहले भी इसी वर्ष मार्च में निर्यात शुल्क प्रणाली को लागू किया गया था, जिसका उद्देश्य निर्यात प्रवाह को नियंत्रित करना और घरेलू खपत के लिए पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करना था। मई में हुए पिछले संशोधन के बाद अब एक बार फिर नई दरों की घोषणा की गई है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नीतिगत निर्णय भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति को मजबूत करते हैं और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं। आने वाले समय में तेल कीमतों और अंतरराष्ट्रीय हालात के आधार पर इस नीति में और बदलाव संभव हैं, क्योंकि सरकार हर पखवाड़े समीक्षा प्रक्रिया के जरिए स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखती है।

क्रेडिट कार्ड लंबे समय तक इस्तेमाल न करने पर हो सकता है बंद, बैंक नियमों को लेकर जानें अहम अपडेट

नई दिल्ली । आज के समय में क्रेडिट कार्ड वित्तीय लेन-देन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका सही तरीके से उपयोग न करना ग्राहकों के लिए नुकसान का कारण बन सकता है। कई लोग सुविधा के तौर पर क्रेडिट कार्ड लेते हैं, लेकिन लंबे समय तक उसका उपयोग नहीं करते। ऐसी स्थिति में बैंक और वित्तीय संस्थान इसे निष्क्रिय मानकर बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार यदि किसी क्रेडिट कार्ड का उपयोग लगातार कई महीनों तक नहीं किया जाता है तो उसे “डेड कार्ड” की श्रेणी में रखा जा सकता है और बैंक उसे बंद भी कर सकते हैं। बैंकिंग नियमों के अनुसार आमतौर पर तीन से बारह महीने तक यदि किसी कार्ड पर कोई लेन-देन नहीं होता है तो उसे निष्क्रिय माना जाता है। इस दौरान यदि कार्ड से कोई खरीदारी, भुगतान, स्टेटमेंट जनरेशन या अन्य गतिविधि नहीं होती है तो बैंक उसे बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। कई मामलों में ग्राहक को सूचना दिए बिना भी कार्ड को निष्क्रिय किया जा सकता है, हालांकि अधिकांश बैंक पहले नोटिस जारी करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार क्रेडिट कार्ड को सक्रिय बनाए रखना आवश्यक है क्योंकि यह सीधे व्यक्ति के क्रेडिट इतिहास और क्रेडिट स्कोर से जुड़ा होता है। यदि कार्ड लंबे समय तक उपयोग में नहीं रहता है तो इसका असर क्रेडिट प्रोफाइल पर पड़ सकता है। इससे भविष्य में लोन या अन्य वित्तीय सेवाएं लेने में कठिनाई आ सकती है। क्रेडिट स्कोर को मजबूत बनाए रखने के लिए समय-समय पर कार्ड का उपयोग करना और उसका भुगतान समय पर करना जरूरी माना जाता है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई ग्राहक बारह महीने तक अपने क्रेडिट कार्ड का उपयोग नहीं करता है तो बैंक उसे निष्क्रिय मान सकता है। इसके अलावा कुछ बैंक छोटी गतिविधियों जैसे पिन परिवर्तन या स्टेटमेंट चेक करने को भी सक्रियता में शामिल करते हैं, लेकिन मुख्य रूप से लेन-देन ही आधार माना जाता है। ऐसे में ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे समय-समय पर छोटे लेन-देन कर अपने कार्ड को सक्रिय रखें। क्रेडिट कार्ड बंद होने का एक और बड़ा प्रभाव यह होता है कि इससे व्यक्ति की कुल उपलब्ध क्रेडिट लिमिट भी कम हो जाती है। इसका सीधा असर क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो पर पड़ता है, जो क्रेडिट स्कोर निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि यह अनुपात बिगड़ता है तो स्कोर में गिरावट आ सकती है। इसके अलावा बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता और जोखिम प्रबंधन के लिए भी निष्क्रिय खातों और कार्डों की निगरानी की जाती है। बैंक यह सुनिश्चित करते हैं कि उनके सिस्टम में केवल सक्रिय और उपयोग में आने वाले खाते ही बने रहें, जिससे धोखाधड़ी और अनावश्यक जोखिम को कम किया जा सके। अंततः यह स्पष्ट है कि क्रेडिट कार्ड केवल एक सुविधा नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी भी है। इसका समझदारी से उपयोग न केवल वित्तीय सुविधा देता है बल्कि आपके क्रेडिट इतिहास को भी मजबूत बनाता है। लंबे समय तक इसे निष्क्रिय छोड़ना भविष्य में वित्तीय समस्याओं का कारण बन सकता है, इसलिए समय-समय पर इसका उपयोग आवश्यक माना जाता है।

भीमताल, नौकुचियाताल और कमलताल के विकास से बदलेगा पर्यटन नक्शा, धामी सरकार ने तेज किए सौंदर्यीकरण कार्य

नई दिल्ली । उत्तराखंड में पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और प्राकृतिक धरोहरों को संरक्षित करते हुए आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के उद्देश्य से धामी सरकार ने नैनीताल जिले की प्रमुख झीलों के व्यापक सौंदर्यीकरण और विकास की दिशा में बड़ी पहल शुरू की है। भीमताल, नौकुचियाताल और कमलताल जैसी प्रमुख झीलों के पुनर्विकास और आसपास के क्षेत्रों के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 46 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य न केवल पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करना है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देना है। भीमताल झील के लिए लगभग 25.67 करोड़ रुपये की विस्तृत योजना तैयार की गई है, जिसके तहत झील के आसपास के पार्कों का पुनर्विकास, दीनदयाल पार्क के पास आधुनिक बोटिंग डॉक का निर्माण, झील किनारे लंबा पैदल मार्ग, उद्यानों का सौंदर्यीकरण और पार्किंग व्यवस्था में सुधार जैसे कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही सोलर स्ट्रीट लाइटिंग और स्ट्रीट फर्नीचर की स्थापना भी प्रस्तावित है, जिससे क्षेत्र को पर्यावरण अनुकूल और पर्यटक-अनुकूल बनाया जा सके। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप और तय समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं। नौकुचियाताल झील के लिए लगभग 20.97 करोड़ रुपये की योजना के तहत पर्यटन सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया जा रहा है। इसमें बोटिंग स्टैंड, प्रतीक्षालय, टिकट काउंटर, फ्लोटिंग जेट्टी, पार्किंग सुविधा, लंबा पैदल मार्ग, गज़ीबो, व्यूपॉइंट्स, लैंडस्केपिंग और सोलर लाइटिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इस परियोजना का उद्देश्य झील क्षेत्र को एक संगठित और आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना है, जहां आने वाले पर्यटकों को सभी बुनियादी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें। कमलताल क्षेत्र को भी भविष्य के प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। यहां ओपन शॉपिंग सेंटर, पैदल पुल, पैदल मार्ग, पार्किंग व्यवस्था और लैंडस्केपिंग जैसे कार्यों को शामिल किया गया है। यह क्षेत्र आने वाले समय में पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण केंद्र बन सकता है, जिससे स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही भवाली क्षेत्र में मल्टीलेवल पार्किंग और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य लगभग पूर्णता की ओर है। इस परियोजना के तहत 124 वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा और लगभग 40 दुकानों का निर्माण किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में पार्किंग की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। नैनीताल शहर में भी दो बड़ी पार्किंग परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जिनसे सैकड़ों वाहनों के लिए पार्किंग सुविधा उपलब्ध होगी और पर्यटन सीजन के दौरान यातायात दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। सरकार का फोकस केवल पर्यटन विकास पर ही नहीं, बल्कि यातायात व्यवस्था को भी मजबूत करने पर है। नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ते पर्यटक दबाव को देखते हुए पार्किंग और सड़क प्रबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों दोनों को बेहतर सुविधा मिल सके। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी निर्माण कार्य गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरे किए जाएं और जहां कार्य शुरू नहीं हुए हैं, उन्हें तुरंत प्रारंभ किया जाए। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद नैनीताल जिले की झीलें न केवल अधिक आकर्षक और सुव्यवस्थित होंगी, बल्कि राज्य के पर्यटन मानचित्र पर भी एक नई पहचान स्थापित करेंगी। इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

वीकेंड पर कीमती धातुओं में नहीं दिखा बदलाव, सोमवार से फिर तय होगी बाजार की दिशा

नई दिल्ली । देश के सर्राफा बाजार में रविवार को सोने और चांदी की कीमतों में किसी प्रकार का बदलाव दर्ज नहीं किया गया। वीकेंड के चलते घरेलू बाजार और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज दोनों ही बंद रहे, जिसके कारण कीमतें पिछले कारोबारी सत्र के स्तर पर स्थिर बनी रहीं। हालांकि, चेन्नई जैसे कुछ प्रमुख शहरों में सोने की कीमतें पहले से ही ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जहां 24 कैरेट सोना 1,59,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच चुका है। अन्य महानगरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु में भी कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई के आसपास बनी हुई हैं, लेकिन उनमें हल्का अंतर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक बाजारों में जारी अस्थिरता और भू-राजनीतिक तनाव के चलते सोने की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। निवेशकों द्वारा सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में सोने को प्राथमिकता दिए जाने के कारण इसकी कीमतों में दीर्घकालिक मजबूती देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की नीतिगत अनिश्चितताओं का भी असर सोने की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। चांदी की कीमतों में भी इस समय स्थिरता बनी हुई है। देश के प्रमुख बाजारों में चांदी का औसत भाव लगभग 2,75,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बना हुआ है, जबकि कुछ औद्योगिक केंद्रों में यह 2,80,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक दर्ज किया जा रहा है। औद्योगिक मांग और वैश्विक बाजार संकेतों के आधार पर चांदी की कीमतों में समय-समय पर उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है, लेकिन फिलहाल बाजार में कोई बड़ा बदलाव नहीं है। जानकारों का मानना है कि वीकेंड पर कारोबार बंद रहने के कारण कीमतों में स्थिरता स्वाभाविक है। असली दिशा अब सोमवार को बाजार खुलने के बाद ही स्पष्ट होगी, जब अंतरराष्ट्रीय संकेतों के साथ घरेलू मांग और निवेश प्रवाह का प्रभाव सामने आएगा। खासकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था से आने वाले रोजगार और विकास संबंधी आंकड़े तथा वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियां कीमती धातुओं की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। निवेश विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा समय में सोने में दीर्घकालिक निवेश को लेकर सकारात्मक रुख बना हुआ है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोना एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में मजबूत स्थिति में है। हालांकि अल्पकालिक निवेशकों के लिए बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है, जिससे उन्हें सावधानी के साथ निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है। बाजार विश्लेषकों का यह भी कहना है कि आने वाले दिनों में यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने और चांदी दोनों की कीमतों में और तेजी देखी जा सकती है। वहीं यदि वैश्विक परिस्थितियों में स्थिरता आती है, तो कीमतों में हल्का दबाव भी संभव है। ऐसे में निवेशकों की नजर अब अगले कारोबारी सप्ताह पर टिकी हुई है, जो कीमती धातुओं की दिशा के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

बड़वानी में बड़ा खुलासा: नर्मदा किनारे अवैध भट्टों से बढ़ रहा प्रदूषण और स्वास्थ्य संकट

मध्यप्रदेश। बड़वानी जिले के राजघाट क्षेत्र में नर्मदा नदी के किनारे पर्यावरण नियमों की खुलेआम अनदेखी सामने आई है। सावरिया हॉस्पिटल से लेकर राजघाट के पहले पुल तक महज 500 मीटर के दायरे में सड़क के दोनों ओर लगभग 140 अवैध ईंट भट्टे धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। यहां बड़े पैमाने पर व्यावसायिक ईंट उत्पादन किया जा रहा है, जिससे प्रतिवर्ष करोड़ों ईंटें तैयार हो रही हैं और आसपास के जिलों तक सप्लाई की जा रही हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार हो रही ये ईंटें 6500 रुपए प्रति हजार के भाव से बिक रही हैं और ट्रैक्टर, आयसर व ट्रकों के जरिए धार, इंदौर, खरगोन सहित महाराष्ट्र के शाहदा तक पहुंचाई जा रही हैं। हालांकि इस व्यावसायिक गतिविधि का सबसे गंभीर असर पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर पड़ रहा है। ग्रामीणों और चिकित्सकों का कहना है कि भट्टों से निकलने वाला धुआं आसपास के वातावरण को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। अस्पतालों में सांस संबंधी मरीजों की संख्या बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खेतों पर गिरने वाली राख से फसल उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। नियमों के अनुसार मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 और एनजीटी के प्रावधानों के तहत नदी किनारे 800 मीटर के दायरे में किसी भी ईंट भट्टे का संचालन प्रतिबंधित है। इसके अलावा जल संरचनाओं के 100 मीटर दायरे में भी खनन कार्य की अनुमति नहीं है। इसके बावजूद कई भट्टे बैकवाटर से मात्र 200 मीटर की दूरी पर संचालित हो रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि लगातार बढ़ता प्रदूषण न केवल नर्मदा के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रहा है, बल्कि क्षेत्रीय स्वास्थ्य और कृषि व्यवस्था पर भी दीर्घकालिक असर डाल सकता है। प्रशासनिक कार्रवाई की मांग लगातार तेज हो रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

मध्य प्रदेश में सत्ता वापसी की कोशिश: कांग्रेस ने बनाया नया ट्राइबल वोट रणनीति फॉर्मूला

मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश में ‘मसाला गुटखा’ पर 2012 में लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद जमीनी हकीकत चिंताजनक बनी हुई है। सरकार ने उस समय तंबाकू और सुपारी के खतरनाक मिश्रण को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का दावा किया था, लेकिन 14 साल बाद भी ओरल कैंसर के मामलों में कमी के बजाय बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार प्रतिबंध के बाद से ओरल कैंसर के मरीजों में लगभग 42.37 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिबंध का वास्तविक असर इसलिए नहीं दिखा क्योंकि गुटखा कंपनियों ने अपने उत्पाद बेचने का तरीका बदल दिया। प्रतिबंध के बाद कंपनियों ने ‘ट्विन-पाउच’ सिस्टम शुरू किया, जिसमें पान मसाला और तंबाकू को अलग-अलग पैकेट में बेचा जाने लगा। उपभोक्ता दोनों को मिलाकर उपयोग करते हैं, जिससे अंतिम उत्पाद वही खतरनाक मिश्रण बन जाता है जिसे रोकने के लिए बैन लगाया गया था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह व्यवस्था कानून की एक तकनीकी खामी का फायदा उठाती है, क्योंकि नियम केवल मिश्रित उत्पाद पर रोक लगाते हैं, जबकि अलग-अलग पैकेट में बिक्री वैध मानी जाती है। परिणामस्वरूप बाजार में तंबाकू की उपलब्धता और उसका सेवन लगभग पहले जैसा ही बना हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि ओरल कैंसर के शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। यदि किसी व्यक्ति को मुंह खोलने में दिक्कत, लंबे समय तक घाव या सफेद-लाल धब्बे जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। शुरुआती चरण में इलाज से बीमारी को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय है कि जब तक तंबाकू उत्पादों पर सख्त और व्यावहारिक नियंत्रण नहीं होगा, तब तक ओरल कैंसर के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाना मुश्किल रहेगा।

मन की बात में चोल ताम्र-पत्रों की वापसी पर पीएम मोदी का जिक्र, बोले- यह हर भारतीय के लिए गर्व और खुशी का क्षण

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत से जुड़े एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए नीदरलैंड से 11वीं सदी के चोल काल के ताम्र-पत्रों की वापसी को हर भारतीय के लिए गर्व और खुशी का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल ऐतिहासिक दस्तावेजों की वापसी नहीं है, बल्कि भारत की समृद्ध सभ्यता और सांस्कृतिक पहचान को पुनः प्राप्त करने जैसा है, जो देशवासियों के लिए अत्यंत भावनात्मक और प्रेरणादायक क्षण है। प्रधानमंत्री ने बताया कि हाल ही में अपनी नीदरलैंड यात्रा के दौरान उन्हें एक विशेष समारोह में इन प्राचीन ताम्र-पत्रों को भारत को सौंपे जाने का अवसर मिला। इस दौरान नीदरलैंड के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यह क्षण इसलिए भी विशेष था क्योंकि देश-विदेश से लगातार लोगों के संदेश प्राप्त हो रहे हैं, जिसमें भारतीय समुदाय और विशेष रूप से तमिल समाज ने इस ऐतिहासिक वापसी पर गहरा उत्साह और गर्व व्यक्त किया है। इन ताम्र-पत्रों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि यह कुल 24 पट्टिकाएं हैं, जिनमें 21 बड़ी और 3 छोटी पट्टिकाएं शामिल हैं। ये मुख्य रूप से चोल शासक राजराजा चोला प्रथम और उनके पुत्र राजेंद्र चोला प्रथम से जुड़े ऐतिहासिक विवरणों को दर्शाती हैं। इनमें एक महत्वपूर्ण घटना का उल्लेख है जिसमें आनइमंगलम गांव को एक बौद्ध विहार को दान देने की जानकारी मिलती है, जो उस समय की धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक संरचना को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन ताम्र-पत्रों में चोल साम्राज्य की समुद्री शक्ति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का भी विस्तृत उल्लेख मिलता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि चोल वंश का प्रभाव केवल भारतीय उपमहाद्वीप तक सीमित नहीं था, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों के साथ भी उनके व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध मजबूत थे। यह भारत के प्राचीन समुद्री इतिहास और वैश्विक संपर्कों का महत्वपूर्ण प्रमाण है। उन्होंने कहा कि चोल साम्राज्य की यह ऐतिहासिक धरोहर भारत की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है और इसे संरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। सरकार की ओर से देश की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों को सुरक्षित रखने और उन्हें वापस लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में ‘ज्ञान भारतम् अभियान’ के तहत भी प्राचीन ऐतिहासिक दस्तावेजों और शिलालेखों की खोज और संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ के मल्हार क्षेत्र में हाल ही में हुई एक महत्वपूर्ण खोज का भी उल्लेख किया, जहां तीन दुर्लभ ताम्र-पत्र प्राप्त हुए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये शिलालेख छठी और सातवीं शताब्दी के बीच के हैं और पांडुवंशी शासक महर्षि बालार्जुन के शासनकाल से संबंधित माने जाते हैं। इनमें प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा का उपयोग किया गया है, जो उस समय की शासन व्यवस्था, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक जीवन को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक खोजें न केवल भारत की प्राचीन सभ्यता को समझने में मदद करती हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि हमारा इतिहास कितना समृद्ध और व्यापक रहा है। उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और उसके प्रति जागरूकता बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।