भारत का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मई में बढ़कर 55 पर, नए ऑर्डर और उत्पादन में तेज़ी से उद्योग गतिविधियों में मजबूती

नई दिल्ली । मई में भारत के विनिर्माण क्षेत्र ने मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है, जिसमें एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 55.0 के स्तर पर पहुंच गया है। यह अप्रैल के 54.7 और शुरुआती अनुमान 54.3 से अधिक है, जो औद्योगिक गतिविधियों में लगातार सुधार का संकेत देता है। नए ऑर्डरों, उत्पादन गतिविधियों और खरीद में आई तेज़ वृद्धि ने इस सुधार को प्रमुख रूप से समर्थन दिया है, जिसके चलते कंपनियों ने भविष्य की मांग को देखते हुए स्टॉक जमा करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार मई का प्रदर्शन पिछले तीन महीनों में सबसे मजबूत माना जा रहा है, जो भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में स्थिर और व्यापक रिकवरी की ओर इशारा करता है। देश के कई हिस्सों, जिनमें मध्य प्रदेश सहित विभिन्न औद्योगिक केंद्र शामिल हैं, वहां भी उत्पादन गतिविधियों में सुधार का रुझान देखा गया है। सर्वेक्षण के अनुसार इंटरमीडिएट और कैपिटल गुड्स सेगमेंट में वृद्धि उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र की तुलना में अधिक तेज रही, जिससे औद्योगिक उत्पादन के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू मांग इस वृद्धि का मुख्य आधार बनी हुई है, जबकि निर्यात ऑर्डरों की वृद्धि दर कुछ धीमी जरूर हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजारों से नए ऑर्डरों की लगातार प्राप्ति ने संतुलन बनाए रखा है। एशिया, यूरोप और अफ्रीका के कुछ देशों से भी भारतीय उत्पादों की मांग बनी हुई है, जिससे निर्यात आधारित गतिविधियों को समर्थन मिला है। लागत के मोर्चे पर कच्चे माल, ऊर्जा, ईंधन और परिवहन खर्चों में वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले कई महीनों की तुलना में अधिक है। यह वृद्धि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और विशेष रूप से पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव का परिणाम मानी जा रही है। हालांकि तैयार उत्पादों की कीमतों में वृद्धि की गति अपेक्षाकृत धीमी रही है, जिससे कंपनियों के लाभ मार्जिन पर कुछ दबाव बनने की संभावना जताई जा रही है। उत्पादन और नए ऑर्डरों में आई तेज़ी फरवरी के बाद सबसे अधिक दर्ज की गई है, जो यह दर्शाती है कि उद्योगों में मांग का स्तर मजबूत बना हुआ है। उद्योग जगत के अनुसार यह रुझान आने वाले महीनों में भी जारी रह सकता है, क्योंकि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश और निर्माण गतिविधियों में वृद्धि से औद्योगिक मांग को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत कंपनियों का विश्वास स्तर भी मजबूत बना हुआ है, जो उत्पादन क्षमता विस्तार और नई भर्तियों की संभावनाओं को बढ़ा रहा है। हालांकि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण लागत दबाव बना रह सकता है, लेकिन घरेलू मांग इस दबाव को काफी हद तक संतुलित कर रही है। कुल मिलाकर मई के पीएमआई आंकड़े संकेत देते हैं कि भारत का विनिर्माण क्षेत्र स्थिर गति से विस्तार कर रहा है और आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, जिससे निवेश और उत्पादन दोनों को सकारात्मक दिशा मिल रही है।
BJP MLA PANNALAL CONTROVERSY: अपनी ही पार्टी के मंत्रियों को घेरना पड़ा भरी; भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य की बढ़ सकती हैं मुश्किलें!

BJP MLA PANNALAL CONTROVERSY: गुना। गुना में बिजली कटौती को लेकर अपनी ही सरकार के मंत्रियों के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलने वाले भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य अब बड़ी परेशानी में पड़ने वाले हैं। उनके इस बर्ताव के चलते वह पार्टी संगठन के निशाने पर आ गए हैं। उनके बयानों को लेकर भाजपा ने सख्त रुख अपनाया है और मामले की रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को भेज दी गई है। ऐसे में विधायक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। दरअसल गुना में लगातार हो रही बिजली कटौती और बिजली व्यवस्था को लेकर भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने हाल ही में अपनी ही सरकार के दो मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर खुलकर निशाना साधा था। सीएम के तीखे हमले के बाद कांग्रेस आक्रामक, पटवारी ने कहा- घृणा का जवाब घृणा नहीं पार्टी अनुशासन के खिलाफ बयानबाजी स्वीकार नहीं भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह सिकरवार ने विधायक के बयानों को पार्टी अनुशासन के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी मंत्री, विधायक या पदाधिकारी को सार्वजनिक रूप से अपनी ही सरकार पर टिप्पणी करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि को कोई शिकायत है तो उसके लिए पार्टी के भीतर उचित व्यवस्था मौजूद है। अपनी ही सरकार के मंत्रियों को नाकारा बताना उचित नहीं है और संगठन इस मामले को गंभीरता से देख रहा है। महंगी हुई रसोई की आग: भोपाल में ₹3116 और ग्वालियर में ₹3338 पहुंचा कमर्शियल LPG सिलेंडर आप नेता ममता मीना ने किया समर्थन इसी बीच आम आदमी पार्टी की नेता और पूर्व विधायक ममता मीना पन्नालाल शाक्य के समर्थन में सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि विधायक ने जनता और किसानों की समस्याओं को उठाने का काम किया है। प्रदेश में भीषण गर्मी के दौरान लंबे समय तक बिजली कटौती हो रही है और ऐसे में जनप्रतिनिधियों का जनता की आवाज बनना जरुरी है। ममता मीना ने ऊर्जा मंत्री की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और कहा की खंबे पर चढ़ना और नालियों में उतरना केवल एक दिखावा है। साथ ही उन्होंने भाजपा के भीतर नई भाजपा बनाम पुरानी भाजपा की बहस को भी हवा दी। उनका आरोप है कि पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा।
खेत बचाने की लड़ाई सड़क पर, खाने का सामान लेकर धरने पर बैठे किसान

मध्य प्रदेश । इंदौर में भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों का विरोध आंदोलन तेज हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के पूर्वी बायपास प्रोजेक्ट और इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन परियोजना के लिए प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण के खिलाफ सोमवार से किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। कलेक्टर कार्यालय के बाहर गंजी कंपाउंड में शुरू हुए इस आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए हैं। धरने में मुख्य रूप से सिमरोल, तिल्लौर खुर्द, फरसपुर, खुड़ैल और आसपास के गांवों के किसान शामिल हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दोनों परियोजनाओं के कारण उनकी उपजाऊ कृषि भूमि प्रभावित होगी, जिससे उनकी आजीविका पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। किसानों ने मांग की है कि सरकार भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करे और इन परियोजनाओं को वर्तमान स्वरूप में लागू न किया जाए। आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसान अपने परिवारों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे हैं। कई महिलाएं और बच्चे भी प्रदर्शन में शामिल हैं। आंदोलनकारियों ने अपने साथ भोजन बनाने का सामान भी लाया है। किसानों का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो वे धरना स्थल पर ही भोजन बनाकर आंदोलन जारी रखेंगे। किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में उनकी चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उनका कहना है कि जिन जमीनों का अधिग्रहण प्रस्तावित है, वे वर्षों से उनकी जीविका का प्रमुख आधार रही हैं। ऐसे में बिना संतोषजनक समाधान और उचित सहमति के भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस मुद्दे को लेकर कानूनी लड़ाई भी जारी है। पिछले महीने हाई कोर्ट ने इस परियोजना से जुड़ी एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए थे। यह याचिका भारतीय किसान यूनियन की ओर से दायर की गई थी। अदालत ने मामले में एनएचएआई और प्रशासन को नोटिस जारी कर उनका पक्ष भी मांगा है। किसान नेताओं का कहना है कि अदालत के आदेश के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टता नहीं है, जिससे किसानों में चिंता बनी हुई है। इसी वजह से उन्होंने सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करने का फैसला किया है। आंदोलनकारी चाहते हैं कि सरकार और प्रशासन किसानों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी आशंकाओं का समाधान करें। धरना स्थल पर लगातार किसानों की संख्या बढ़ रही है और विभिन्न गांवों से लोग समर्थन देने पहुंच रहे हैं। किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। इंदौर में शुरू हुआ यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। प्रशासन की ओर से फिलहाल स्थिति पर नजर रखी जा रही है, जबकि किसान अपने अधिकारों और जमीन की सुरक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने के मूड में दिखाई दे रहे हैं।
आसमान में आस्था का अद्भुत नजारा: पैराग्लाइडिंग के दौरान पढ़ी हनुमान चालीसा

मध्य प्रदेश । आस्था और रोमांच का एक अनोखा दृश्य हिमाचल प्रदेश के मनाली की वादियों में देखने को मिला, जब इंदौर हाई कोर्ट के एडवोकेट दिलीप नागर ने पैराग्लाइडिंग करते हुए करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई पर हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और हजारों लोग इसे देख रहे हैं। वायरल वीडियो में दिलीप नागर खुले आसमान में पैराग्लाइडिंग का आनंद लेते दिखाई दे रहे हैं। ऊंचे पहाड़ों, बादलों और तेज हवाओं के बीच वे पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं। वीडियो देखने वाले लोग इसे आस्था, आत्मविश्वास और साहस का अद्भुत संगम बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनकी भक्ति भावना की सराहना की है, वहीं कुछ लोगों ने इसे एक प्रेरणादायक अनुभव करार दिया है। दिलीप नागर पिछले चार वर्षों से इंदौर हाई कोर्ट में वकालत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मनाली में पैराग्लाइडिंग के दौरान जब वे हजारों फीट की ऊंचाई पर पहुंचे तो उन्हें एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभूति हुई। उनके अनुसार उस क्षण उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वे प्रकृति और ईश्वर के बेहद करीब हों। इसी भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव के दौरान उनके मन में हनुमानजी का स्मरण आया और उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ शुरू कर दिया। नागर का कहना है कि वे लंबे समय से भगवान हनुमान के भक्त हैं और नियमित रूप से उनका स्मरण तथा पूजा-पाठ करते हैं। यही कारण था कि जीवन के इस रोमांचक क्षण में भी उनके मन में सबसे पहले हनुमानजी का ध्यान आया। उन्होंने बताया कि पैराग्लाइडिंग के दौरान उनके साथ मौजूद टीम के सदस्यों ने ही इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड किया था। वीडियो के सोशल मीडिया पर आने के बाद यह तेजी से वायरल हो गया। विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर लोग इसे साझा कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोगों ने इसे भक्ति और साहस का अनूठा उदाहरण बताया है, जबकि कुछ ने कहा कि जीवन के रोमांचक पलों में भी अपनी आस्था से जुड़े रहना एक सकारात्मक संदेश देता है। हालांकि इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि यह अपने प्रकार की पहली घटना है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जरूर है कि संभवतः किसी अधिवक्ता द्वारा पैराग्लाइडिंग करते हुए इतनी ऊंचाई पर हनुमान चालीसा का पाठ करने का यह दुर्लभ उदाहरण हो सकता है। रविवार को रिकॉर्ड किया गया यह वीडियो अब केवल एक वायरल क्लिप नहीं रह गया है, बल्कि लोगों के लिए साहस, विश्वास और आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक बन गया है। मनाली की खूबसूरत वादियों के बीच आसमान में गूंजती हनुमान चालीसा ने इस अनुभव को और भी यादगार बना दिया है।
दतिया में चुनावी शतरंज बिछी, बीजेपी-कांग्रेस की तैयारी तेज; दामोदर यादव बन सकते हैं गेमचेंजर

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने प्रदेश की राजनीति को नई ऊर्जा दे दी है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद खाली हुई इस सीट पर भाजपा, कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी ने अपनी-अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। चुनाव आयोग को 2 अक्टूबर 2026 तक उपचुनाव कराना है, ऐसे में राजनीतिक दलों की सक्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा पूरी तरह चुनावी मोर्चा संभाले हुए हैं। पिछले दो महीनों से वे दतिया क्षेत्र में सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने के प्रयासों में जुटे हैं। यादव, पाल, क्षत्रिय सहित विभिन्न समाजों के लोगों को भाजपा से जोड़ने के लिए लगातार सदस्यता अभियान चलाया जा रहा है। मई महीने के दौरान कई चरणों में अलग-अलग वर्गों के लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा उपचुनाव से पहले अपने पारंपरिक और नए सामाजिक आधार को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। डॉ. मिश्रा ने विभिन्न कार्यक्रमों में भाजपा की विकासवादी नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को जनता का विश्वास मिलने का दावा किया है। लगातार हो रही सदस्यता गतिविधियों को भाजपा की चुनावी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यदि उपचुनाव होता है तो पार्टी की ओर से डॉ. नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार बनाए जाने की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है। वहीं कांग्रेस की रणनीति संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने पर केंद्रित है। पार्टी ने दतिया विधानसभा क्षेत्र में ब्लॉक, मंडलम और बूथ स्तर तक बैठकों का सिलसिला शुरू कर दिया है। कार्यकर्ताओं को चुनावी प्रबंधन और बूथ स्तर की तैयारियों के निर्देश दिए जा रहे हैं। 2 जून को प्रस्तावित बड़ा कार्यकर्ता सम्मेलन कांग्रेस के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट चयन को लेकर है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती अपने बेटे को टिकट दिलाने की कोशिशों में लगे हैं। दूसरी ओर पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष अवधेश नायक भी मजबूत दावेदार के रूप में सामने आए हैं। नायक का तर्क है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने पार्टी हित में त्याग किया था, इसलिए इस बार उन्हें मौका मिलना चाहिए। इसके अलावा कई अन्य नेता भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं, जिससे पार्टी के भीतर प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। कांग्रेस नेतृत्व फिलहाल संगठनात्मक एकता बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चुनावी रणनीति तैयार की जा रही है ताकि उपचुनाव में भाजपा को कड़ी चुनौती दी जा सके। इधर आजाद समाज पार्टी भी दतिया में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगी है। पार्टी नेता दामोदर यादव लगातार किसान सम्मेलनों, जनसंपर्क अभियानों और कार्यकर्ता बैठकों के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। उनका दावा है कि बसपा और कांग्रेस के कई कार्यकर्ता उनकी पार्टी से जुड़ रहे हैं। पार्टी ने उन्हें संभावित उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाने के संकेत भी दिए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुकाबला भले ही भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा दिखाई दे रहा हो, लेकिन आजाद समाज पार्टी की सक्रियता चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है। खासकर यदि दामोदर यादव कुछ खास सामाजिक वर्गों और असंतुष्ट मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में सफल रहते हैं तो मुकाबला त्रिकोणीय रंग ले सकता है। उधर निर्वाचन आयोग ने भी उपचुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। दतिया में ईवीएम की फर्स्ट लेवल चेकिंग की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे स्पष्ट है कि प्रशासनिक स्तर पर भी चुनावी तैयारियां गति पकड़ रही हैं। दतिया उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति में प्रभाव और संगठनात्मक ताकत की परीक्षा भी माना जा रहा है। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा, सामाजिक समीकरण और स्थानीय मुद्दे इस चुनाव की दिशा तय करेंगे।
मई में 56% ज्यादा बारिश, मध्य प्रदेश में गर्मी पर ब्रेक; कई जिलों में बारिश और तेज हवाएं

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में लगातार सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण गर्मी का असर काफी हद तक कम हो गया है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आंधी, बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है, जिससे दिन और रात दोनों के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग के अनुसार बीते 24 घंटों के दौरान कई जिलों में अच्छी बारिश हुई, जबकि श्योपुर जिले में आकाशीय बिजली गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। रविवार और सोमवार की दरमियानी रात प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम सुहावना बना रहा। खंडवा प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं पचमढ़ी में तापमान 19.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। राजधानी भोपाल में रात का तापमान 24.5 डिग्री, इंदौर में 26.4 डिग्री, ग्वालियर में 24.7 डिग्री, उज्जैन में 26 डिग्री और जबलपुर में 24.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के अन्य जिलों में भी तापमान सामान्य से नीचे रहा। दमोह में 21.8 डिग्री, रीवा में 22 डिग्री, खरगोन और छिंदवाड़ा में 23.4 डिग्री, उमरिया में 23.5 डिग्री तथा दतिया में 23.7 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बादल, नमी और वर्षा गतिविधियों के कारण लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। बारिश की बात करें तो सतना जिले में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई, जहां 24 घंटे के दौरान सवा इंच से ज्यादा पानी बरसा। दतिया में आधा इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा शिवपुरी, गुना, ग्वालियर, श्योपुर, रीवा, सिवनी, बैतूल, सिंगरौली, मैहर और उमरिया समेत कई जिलों में बारिश हुई। राजधानी भोपाल में भी सोमवार सुबह से तेज हवाओं के साथ मौसम खुशनुमा बना रहा। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मई महीने में प्रदेश में सामान्य से लगभग 56 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि इस बार प्री-मानसून गतिविधियां सामान्य से कहीं अधिक सक्रिय रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ, चक्रवाती परिसंचरण और अरब सागर-बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के संयुक्त प्रभाव के कारण प्रदेश में बार-बार मौसम बदल रहा है। हालांकि बारिश और ठंडक के बीच आकाशीय बिजली का खतरा भी बढ़ गया है। श्योपुर में बिजली गिरने की घटना ने मौसम विभाग की चेतावनियों की गंभीरता को एक बार फिर उजागर किया है। विशेषज्ञों ने लोगों से खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचने की सलाह दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का सिलसिला जारी रह सकता है। इससे तापमान में और गिरावट आने की संभावना है। किसानों के लिए यह मौसम फायदेमंद माना जा रहा है, लेकिन तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। गर्मी से परेशान लोगों के लिए यह बदलाव राहत लेकर आया है, लेकिन मौसम के लगातार बदलते मिजाज को देखते हुए प्रशासन और नागरिकों दोनों को सावधानी बरतनी होगी।
आत्महत्या या हत्या? ट्विशा केस में CBI जोड़ रही हर कड़ी, समर्थ से हो रही लंबी पूछताछ

मध्य प्रदेश । भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। मामले में आरोपी समर्थ की फरारी को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जांच एजेंसी को मिले शुरुआती तथ्यों के अनुसार एफआईआर दर्ज होने के बाद समर्थ तत्काल शहर नहीं छोड़ पाया था और करीब तीन दिनों तक भोपाल में ही अलग-अलग स्थानों पर रुका रहा। इसके बाद वह जबलपुर पहुंचा, जहां उसने लगभग पांच दिनों तक अपनी मौजूदगी छिपाए रखी। अब सीबीआई इस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसी का मुख्य फोकस यह जानने पर है कि फरारी के दौरान समर्थ कहां-कहां रुका, किन लोगों के संपर्क में रहा और उसे किस-किस व्यक्ति ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता पहुंचाई। इसके लिए उसके मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन हिस्ट्री, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और डिजिटल चैट्स की विस्तृत जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से फरारी के दौरान की गतिविधियों की पूरी तस्वीर सामने आ सकती है। मामले में एक नया पहलू ट्विशा की कथित प्रेग्नेंसी और गर्भपात से भी जुड़ा हुआ है। इसी क्रम में सीबीआई ने उस डॉक्टर को भी पूछताछ के लिए तलब किया है, जिसने कथित तौर पर ट्विशा को मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी यानी गर्भपात की सलाह दी थी। जांच एजेंसी यह समझना चाहती है कि प्रेग्नेंसी और गर्भपात को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, उनमें कितनी सच्चाई है और उनका इस पूरे मामले से क्या संबंध हो सकता है। सूत्रों के अनुसार पूछताछ के दौरान समर्थ लगातार यह दावा कर रहा है कि ट्विशा की मौत आत्महत्या का मामला है। उसका कहना है कि गर्भपात के बाद ट्विशा मानसिक तनाव और अवसाद से गुजर रही थी, जिसके कारण उसने यह कदम उठाया। हालांकि जांच एजेंसी केवल उसके बयानों पर निर्भर नहीं है और हर दावे को वैज्ञानिक तथा फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर परख रही है। सीबीआई इस मामले को आत्महत्या और हत्या दोनों संभावनाओं के दृष्टिकोण से देख रही है। जांचकर्ता यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि घटना से पहले दोनों के संबंधों की स्थिति क्या थी, क्या किसी प्रकार का विवाद या मारपीट हुई थी और घटनास्थल से मिले साक्ष्य क्या संकेत देते हैं। यदि यह आत्महत्या थी तो उसके पीछे तत्काल कारण क्या था और यदि नहीं, तो फिर वास्तविक घटनाक्रम क्या रहा। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा घटनास्थल से लेकर अस्पताल तक की पूरी टाइमलाइन तैयार करना भी है। सीबीआई समर्थ से लगातार पूछताछ कर रही है कि उसने सबसे पहले ट्विशा को किस अवस्था में देखा, उसे फंदे से किसने उतारा, उस समय घर में कौन-कौन मौजूद था और अस्पताल ले जाने तक क्या-क्या घटनाएं हुईं। इन सभी बयानों का मिलान फोरेंसिक रिपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों से किया जा रहा है। इसके अलावा जांच एजेंसी उन लोगों की भी पहचान करने में जुटी है जिन्होंने एफआईआर दर्ज होने के बाद समर्थ को फरार रहने में मदद की हो सकती है। यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ट्विशा शर्मा मौत मामला शुरुआत से ही कई सवालों और विवादों के घेरे में रहा है। अब सीबीआई हर एंगल से जांच कर रही है ताकि घटनाओं की वास्तविक श्रृंखला सामने लाई जा सके और यह स्पष्ट हो सके कि यह मामला आत्महत्या का था या इसके पीछे कोई और सच्चाई छिपी हुई है।
JITU PATWARI STATEMENT: सीएम के तीखे हमले के बाद कांग्रेस आक्रामक, पटवारी ने कहा- घृणा का जवाब घृणा नहीं

JITU PATWARI STATEMENT: मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के बीच जुबानी जंग ने नया मोड़ ले लिया है। शाजापुर जिले के शुजालपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पटवारी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें ‘दो कौड़ी का प्रदेशाध्यक्ष’ तक कह दिया। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया और कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में विकास की गति तेज है, लेकिन कांग्रेस लगातार उसका विरोध कर रही है। उन्होंने कांग्रेस संगठन की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा प्रदेशाध्यक्ष पहले कभी नहीं देखा गया जिसके कार्यकाल में इंदौर लोकसभा सीट का उम्मीदवार चुनाव मैदान छोड़कर चला जाए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को उम्मीदवार तक नहीं मिल रहे हैं और पार्टी अपने राजनीतिक कर्मों का परिणाम भुगत रही है। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस नेताओं में नाराजगी बढ़ गई। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें रद्दी और दो कौड़ी का कहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसान का बेटा होना दो कौड़ी का होना है। पटवारी ने यह भी कहा कि चुनाव हारना कोई अपराध नहीं है और देश के कई बड़े नेताओं को भी चुनावी हार का सामना करना पड़ा है। इंदौर में देर रात खूनी संघर्ष, सड़क पर शराब पीने को लेकर दो गुटों में चाकूबाजी विवाद बढ़ने के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। कुछ स्थानों पर पुतला दहन की घटनाएं भी सामने आईं। हालांकि जीतू पटवारी ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि कांग्रेस गांधीवादी विचारधारा में विश्वास रखती है और किसी भी प्रकार की घृणा या आक्रामक विरोध उसकी संस्कृति का हिस्सा नहीं है। पटवारी ने कहा कि मुख्यमंत्री के बयान का जवाब पुतला जलाकर नहीं बल्कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से दिया जाना चाहिए। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे किसी भी स्थान पर पुतला दहन न करें और विरोध दर्ज कराने के लिए फूल और माला जैसे प्रतीकात्मक माध्यमों का उपयोग करें। उनका कहना था कि घृणा का जवाब घृणा नहीं हो सकता और कांग्रेस प्रेम, संवाद तथा लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास करती है। इस पूरे विवाद पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि मुख्यमंत्री को अपने पद की गरिमा और भाषा की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारें विकास की बजाय विभिन्न घोटालों के कारण अधिक चर्चित रही हैं। वहीं अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी मुख्यमंत्री की टिप्पणी को अनुचित बताते हुए इसकी आलोचना की है। दूसरी ओर भाजपा ने मुख्यमंत्री का बचाव किया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन लगातार कांग्रेस की ओर से किया जाता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जीतू पटवारी स्वयं कई बार विवादित टिप्पणियां कर चुके हैं और अब अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहे हैं। BJP MLA PANNALAL CONTROVERSY: अपनी ही पार्टी के मंत्रियों को घेरना पड़ा भरी; भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य की बढ़ सकती हैं मुश्किलें! दरअसल इस पूरे विवाद की शुरुआत उस समय हुई थी जब सतना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर कटाक्ष करते हुए उन्हें ‘मोहन लाल अभिनंदन यादव’ कहा था। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी का सिलसिला शुरू हुआ जो अब प्रदेश की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित रहता है या फिर प्रदेश की राजनीति में और अधिक गर्माहट पैदा करता है। फिलहाल कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपने-अपने नेताओं के समर्थन में खुलकर मैदान में उतर चुकी हैं।
महंगी हुई रसोई की आग: भोपाल में ₹3116 और ग्वालियर में ₹3338 पहुंचा कमर्शियल LPG सिलेंडर

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में एक बार फिर कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी ने होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग कारोबार की चिंता बढ़ा दी है। जून महीने की शुरुआत के साथ ही 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर के दामों में 44 रुपये तक की वृद्धि की गई है। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण खाद्य पदार्थों की लागत में इजाफा हो रहा है और इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने लगा है। नई दरों के अनुसार राजधानी भोपाल में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत 3116.50 रुपये पहुंच गई है। वहीं इंदौर में यह 3222.50 रुपये, जबलपुर में 3290 रुपये, उज्जैन में 3250 रुपये और ग्वालियर में 3338.50 रुपये में उपलब्ध होगा। प्रदेश के कई शहरों में सिलेंडर की कीमतें लगातार नए रिकॉर्ड बना रही हैं। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि बीते तीन महीनों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में लगभग 1300 रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है। हर महीने हो रही बढ़ोतरी ने होटल उद्योग, रेस्टोरेंट व्यवसाय और कैटरिंग सेक्टर की लागत को काफी बढ़ा दिया है। इसका असर अब ग्राहकों को मिलने वाले खाने-पीने के सामान की कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है। भोपाल होटल एवं रेस्टोरेंट संघ के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली के अनुसार कमर्शियल गैस सिलेंडर पहले की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है। उन्होंने बताया कि बढ़ती गैस कीमतों के कारण होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को भोजन की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करनी पड़ी है। यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में खाद्य पदार्थ और अधिक महंगे हो सकते हैं। मध्य प्रदेश टेंट कैटर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों का भी कहना है कि गैस कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर शादी और सामाजिक आयोजनों के बजट पर पड़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार 500 लोगों के लिए तैयार किए जाने वाले लगभग पांच लाख रुपये के भोजन बजट में अब 45 से 50 हजार रुपये तक की अतिरिक्त लागत जुड़ चुकी है। ऐसे में आयोजकों और ग्राहकों दोनों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मध्य प्रदेश प्रमुख अभिषेक बहेती का कहना है कि पिछले तीन महीनों में कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में चार बार वृद्धि हो चुकी है। इससे रेस्टोरेंट उद्योग की संचालन लागत लगातार बढ़ रही है और व्यवसायियों के लिए पुराने रेट पर सेवाएं देना मुश्किल होता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई तक प्रदेश में 20 हजार से अधिक शादियां और बड़े आयोजन प्रस्तावित हैं। ऐसे समय में गैस कीमतों में लगातार वृद्धि कैटरिंग, होटल और बैंक्वेट कारोबार के लिए चुनौती बन सकती है। बढ़ती लागत का असर अंततः ग्राहकों तक पहुंचेगा और आयोजनों का बजट पहले की तुलना में अधिक महंगा हो सकता है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में यह नई बढ़ोतरी ऐसे समय आई है जब महंगाई पहले से ही आम लोगों की चिंता का कारण बनी हुई है। आने वाले महीनों में यदि कीमतों में राहत नहीं मिली तो खानपान और आयोजन उद्योग पर इसका प्रभाव और गहरा हो सकता है।
भीषण गर्मी में पानी का संकट, भोपाल की मांडवा बस्ती में गंदे पानी की सप्लाई से लोग परेशान

मध्य प्रदेश । राजधानी भोपाल में एक ओर नगर निगम द्वारा शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वार्ड-27 की मांडवा बस्ती के हजारों लोग गंदे और मटमैले पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में जब पानी की जरूरत सबसे ज्यादा होती है, तब दूषित पानी की सप्लाई ने लोगों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि करीब पांच हजार की आबादी को पीने योग्य पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। मांडवा बस्ती में नियमित पाइपलाइन कनेक्शन नहीं होने के कारण लोगों की पानी की जरूरत टैंकरों के माध्यम से पूरी की जाती है। लेकिन पिछले कई दिनों से टैंकरों में आने वाला पानी साफ नहीं है। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि पानी मटमैला और गंदगी से भरा हुआ आ रहा है, जिससे उसे पीना तो दूर घरेलू उपयोग में लेना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय निवासी शेर सिंह सोलंकी के अनुसार बस्ती में टैंकरों से मिलने वाला पानी लगातार खराब गुणवत्ता का आ रहा है। उन्होंने बताया कि पानी का रंग बदला हुआ रहता है और उसमें गंदगी साफ दिखाई देती है। ऐसी स्थिति में लोग पीने के लिए आसपास के क्षेत्रों से पानी लाने को मजबूर हैं। कई परिवार अतिरिक्त खर्च कर बाजार से पानी खरीद रहे हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह भी आसान नहीं है। रहवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और निगम अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। लोगों की मांग है कि टैंकरों के जरिए साफ और फिल्टर किया हुआ पानी उपलब्ध कराया जाए ताकि गर्मी के मौसम में स्वास्थ्य संबंधी खतरे न बढ़ें। गंदे पानी की सप्लाई केवल मांडवा बस्ती तक सीमित नहीं है। शहर के अन्य इलाकों से भी ऐसी शिकायतें सामने आती रही हैं। भानपुर क्षेत्र के समीप स्थित बिहारी बस्ती में भी नर्मदा लाइन से मटमैला पानी आने की शिकायतें मिल रही हैं। इससे नगर निगम की जलापूर्ति व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले ही महापौर मालती राय ने विधानसभा परिसर के सामने स्थित नगर निगम के फिल्टर प्लांट का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने दावा किया था कि बड़े तालाब से जुड़े जल शोधन संयंत्रों के माध्यम से नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है और ऐसे क्षेत्रों में लोगों को आरओ लगाने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि जमीनी स्थिति कई इलाकों में अलग दिखाई दे रही है, जहां नागरिकों को साफ पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दूषित पानी के सेवन से डायरिया, टायफाइड, पीलिया और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में गर्मी के मौसम में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बन जाती है। अब स्थानीय लोगों की नजर नगर निगम प्रशासन पर टिकी है। रहवासियों को उम्मीद है कि जल्द ही जल गुणवत्ता की जांच कर समस्या का समाधान किया जाएगा ताकि हजारों लोगों को राहत मिल सके और उन्हें सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके।