ढीली हो गई है जींस? बिना टेलर के घर पर ऐसे पाएं फिर से परफेक्ट फिटिंग

नई दिल्ली । जींस आज के दौर में लगभग हर व्यक्ति की वॉर्डरोब का अहम हिस्सा बन चुकी है। चाहे ऑफिस जाना हो, कॉलेज की क्लास अटेंड करनी हो, दोस्तों के साथ घूमने का प्लान हो या फिर किसी छोटी यात्रा पर निकलना हो, जींस हर अवसर पर आराम और स्टाइल का बेहतरीन मेल प्रदान करती है। इसकी खासियत यही है कि यह लंबे समय तक इस्तेमाल की जा सकती है, लेकिन लगातार पहनने और बार-बार धोने के कारण इसकी फिटिंग धीरे-धीरे प्रभावित होने लगती है। कई बार पसंदीदा जींस इतनी ढीली हो जाती है कि उसे पहनने का मन नहीं करता, जबकि वह अभी भी अच्छी स्थिति में होती है। विशेषज्ञों के अनुसार डेनिम फैब्रिक समय के साथ अपने मूल आकार में बदलाव महसूस कर सकता है। शरीर की गतिविधियों, लगातार खिंचाव और नियमित उपयोग के कारण कपड़े के रेशे थोड़े फैल जाते हैं। यही वजह है कि नई जींस कुछ महीनों बाद पहले जैसी फिट महसूस नहीं होती। कई लोग इस समस्या का समाधान टेलरिंग के जरिए ढूंढ़ते हैं, लेकिन हर बार कपड़े में बदलाव करवाना जरूरी नहीं होता। कुछ आसान घरेलू उपायों की मदद से भी फिटिंग में सुधार लाया जा सकता है। ऐसा ही एक तरीका ठंडे पानी का उपयोग है, जिसे कई लोग डेनिम केयर के लिए अपनाते हैं। माना जाता है कि बहुत ठंडा पानी कुछ प्रकार के फैब्रिक को अपनी मूल संरचना के करीब लौटने में मदद कर सकता है। इसके लिए किसी बड़ी बाल्टी या टब में पर्याप्त मात्रा में पानी भरकर उसमें बर्फ के टुकड़े डाल दिए जाते हैं। जब पानी पूरी तरह ठंडा हो जाए तो जींस को उसमें अच्छी तरह डुबोकर कुछ समय के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद जींस को निकालकर अतिरिक्त पानी हल्के हाथों से निचोड़ा जाता है और सीधी धूप की बजाय छांव में सुखाया जाता है। जींस पूरी तरह सूखने के बाद कई लोगों को उसकी फिटिंग में हल्का बदलाव महसूस हो सकता है। हालांकि यह तरीका हर प्रकार के डेनिम या हर ब्रांड की जींस पर एक जैसा असर नहीं दिखाता, क्योंकि कपड़े की गुणवत्ता और उसमें इस्तेमाल किए गए फैब्रिक मिश्रण का प्रभाव भी महत्वपूर्ण होता है। फिर भी यह एक ऐसा उपाय है जिसे बिना किसी अतिरिक्त खर्च के घर पर आजमाया जा सकता है। खास बात यह है कि इसमें जींस को काटने, सिलने या स्थायी बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ती। फैशन विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि जींस की फिटिंग लंबे समय तक बनाए रखने के लिए उसे जरूरत से ज्यादा बार न धोएं और हमेशा देखभाल संबंधी निर्देशों का पालन करें। सही तरीके से धुलाई और सुखाने की आदतें डेनिम की उम्र बढ़ाने में मदद करती हैं। इसके अलावा अत्यधिक गर्म पानी और तेज ड्रायर का उपयोग करने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे कपड़े की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। अगर आपकी पसंदीदा जींस ढीली हो गई है और आप उसकी फिटिंग सुधारना चाहते हैं, तो यह आसान घरेलू तरीका उपयोगी साबित हो सकता है। सही देखभाल के साथ आपकी जींस लंबे समय तक बेहतर फिटिंग और आकर्षक लुक बनाए रख सकती है।
फिटनेस का नया फॉर्मूला: बिना बाहर निकले रोजाना 10,000 कदम चलने का आसान रूटीन

नई दिल्ली । आधुनिक जीवनशैली में व्यस्तता इतनी बढ़ गई है कि लोगों के लिए नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालना चुनौती बनता जा रहा है। लंबे समय तक बैठकर काम करना, सीमित शारीरिक गतिविधि और अनियमित दिनचर्या कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ और फिटनेस प्रशिक्षक अक्सर लोगों को रोजाना अधिक चलने-फिरने की सलाह देते हैं। इसी क्रम में प्रतिदिन 10,000 कदम चलने का लक्ष्य लंबे समय से फिटनेस जगत में लोकप्रिय माना जाता रहा है। माना जाता है कि यह आदत शरीर को सक्रिय रखने और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित रूप से पर्याप्त कदम चलना हृदय स्वास्थ्य को मजबूत बनाने में सहायक होता है। इसके अलावा यह शरीर में रक्त संचार को बेहतर करता है और अतिरिक्त कैलोरी खर्च करने में मदद करता है। रोजाना सक्रिय रहने से वजन नियंत्रित रखने, मांसपेशियों को मजबूत बनाने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में भी सहायता मिल सकती है। यही कारण है कि कई लोग अपने दैनिक कदमों की संख्या को ट्रैक करने के लिए स्मार्टवॉच या फिटनेस बैंड का उपयोग करते हैं। हालांकि व्यस्त दिनचर्या, खराब मौसम, प्रदूषण या अन्य कारणों से कई लोगों के लिए बाहर जाकर नियमित वॉक करना संभव नहीं हो पाता। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए फिटनेस कोच रीत कौर ने एक ऐसा इनडोर रूटीन साझा किया है, जिसके जरिए घर के अंदर ही 10,000 कदम पूरे किए जा सकते हैं। उनके अनुसार यदि कोई व्यक्ति लगभग 65 मिनट तक लगातार सक्रिय रहते हुए हर मिनट करीब 167 कदम की औसत गति बनाए रखता है, तो वह अपना दैनिक लक्ष्य हासिल कर सकता है। इस तरह का इनडोर वॉकिंग रूटीन उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है जो घर से काम करते हैं, जिनके पास पार्क या खुली जगह उपलब्ध नहीं है या जो मौसम की वजह से बाहर नहीं जा पाते। घर के अंदर चलने को अधिक रोचक बनाने के लिए लोग अलग-अलग गतिविधियों को भी शामिल कर सकते हैं। जैसे संगीत सुनते हुए चलना, टीवी देखते समय वॉक करना या घर के विभिन्न हिस्सों में निर्धारित समय तक लगातार घूमना। इससे एक ही स्थान पर चलने से होने वाली बोरियत कम हो सकती है और नियमितता बनाए रखना आसान हो सकता है। साथ ही छोटे-छोटे अंतराल में दिनभर चलने की आदत भी कुल कदमों की संख्या बढ़ाने में मदद करती है। फिटनेस विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल कदमों की संख्या ही स्वास्थ्य का एकमात्र पैमाना नहीं है। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन भी स्वस्थ जीवनशैली के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। फिर भी नियमित रूप से अधिक चलना एक ऐसी आदत है जिसे लगभग हर आयु वर्ग का व्यक्ति अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकता है। यही कारण है कि दैनिक वॉकिंग को फिटनेस बनाए रखने के सबसे सरल और प्रभावी उपायों में गिना जाता है। रोजाना 10,000 कदम चलने का लक्ष्य लोगों को अधिक सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है। चाहे बाहर खुली हवा में वॉक हो या घर के भीतर किया गया इनडोर रूटीन, नियमित शारीरिक गतिविधि लंबे समय में बेहतर स्वास्थ्य और फिटनेस की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
गर्मी से मिलेगी राहत, अगले 2-3 दिन में केरल पहुंचेगा मानसून; दिल्ली-UP समेत कई राज्यों में अलर्ट

नई दिल्ली । देशभर में लंबे समय से पड़ रही भीषण गर्मी के बीच राहत की खबर सामने आई है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले दो से तीन दिनों के भीतर केरल में प्रवेश कर सकता है। मानसून की यह प्रगति देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के स्वरूप को तेजी से बदलने वाली है। मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत और पूर्वोत्तर क्षेत्र तक व्यापक स्तर पर वर्षा गतिविधियों में वृद्धि हो सकती है। इसके साथ ही कई राज्यों में तेज हवाएं, गरज-चमक और आंधी का दौर भी देखने को मिल सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बन रही अनुकूल परिस्थितियों के कारण मानसून को आगे बढ़ने में सहायता मिल रही है। इसी वजह से केरल तट पर मानसून की दस्तक अब बेहद करीब मानी जा रही है। मानसून के सक्रिय होने के बाद दक्षिण भारत के राज्यों में अच्छी बारिश की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज हो सकती है। कृषि गतिविधियों के लिए भी यह समय महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि खरीफ फसलों की बुवाई काफी हद तक मानसून की प्रगति पर निर्भर करती है। किसानों की नजरें भी मानसून की आधिकारिक शुरुआत पर टिकी हुई हैं। उत्तर भारत के कई राज्यों में भी मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। कुछ स्थानों पर आंधी की रफ्तार 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में भी गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। राजस्थान, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के कई हिस्सों में भी मौसम का मिजाज बदल सकता है और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आ सकती हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भी वर्षा गतिविधियां तेज होने की संभावना है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आगामी दिनों में व्यापक बारिश दर्ज की जा सकती है। वहीं असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में लगातार भारी बारिश का अनुमान व्यक्त किया गया है। इन क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर और भूस्खलन जैसी संभावित परिस्थितियों पर भी निगरानी रखी जा रही है। मौसम विभाग का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत में मानसूनी गतिविधियां सामान्य से अधिक सक्रिय रह सकती हैं। हालांकि शुरुआती संकेतों के अनुसार इस वर्ष मानसून की कुल वर्षा सामान्य से थोड़ी कम रहने की आशंका जताई गई है। इसके बावजूद फिलहाल देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान में गिरावट और गर्मी से राहत देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की आगामी प्रगति कृषि, जल संसाधनों और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसलिए आने वाले दिनों में मौसम विभाग के अपडेट पर लगातार नजर रखना आवश्यक होगा। मानसून की संभावित एंट्री ने देशभर में राहत की उम्मीद बढ़ा दी है। यदि वर्षा का क्रम अपेक्षित रूप से आगे बढ़ता है तो किसानों, जलाशयों और आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है, जबकि मौसम संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारी भी अहम रहेगी।
ईरान को कड़ा संदेश देने निकला अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल, कई देशों में सुरक्षा सहयोग पर जोर

नई दिल्ली । वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच अमेरिकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात, थाईलैंड और फिलीपींस का दौरा कर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अमेरिकी सांसद जोश गॉटहाइमर ने किया। यात्रा का उद्देश्य सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर समन्वय बढ़ाना था। इस दौरान विभिन्न देशों के शीर्ष नेताओं और अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें आयोजित की गईं। संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े वरिष्ठ नेताओं के साथ विस्तृत बातचीत की। चर्चाओं में क्षेत्रीय सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सहयोग और मध्य पूर्व की मौजूदा चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया गया। अमेरिकी पक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोगी देशों के बीच मजबूत साझेदारी आवश्यक है। बातचीत के दौरान ईरान की गतिविधियों और उसके पड़ोसी देशों पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। अमेरिकी प्रतिनिधियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। अमेरिकी सांसद जोश गॉटहाइमर ने संयुक्त अरब अमीरात की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। उन्होंने क्षेत्रीय तनावों के बीच यूएई की स्थिरता और सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही उन्होंने इजरायल और यूएई के बीच विकसित हो रहे संबंधों को क्षेत्रीय सहयोग का सकारात्मक उदाहरण बताया। उनका कहना था कि सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए साझेदारी का विस्तार समय की आवश्यकता है। इसी क्रम में ऊर्जा और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग पर चर्चा हुई। यात्रा के दूसरे चरण में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल थाईलैंड और फिलीपींस पहुंचा, जहां हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर विचार-विमर्श किया गया। बैठकों में समुद्री सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति पर चर्चा हुई। अमेरिकी पक्ष ने इस क्षेत्र में सहयोगी देशों के साथ रक्षा और खुफिया समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई। साथ ही नई तकनीकों, साइबर सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी को भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। अमेरिका का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता वैश्विक आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस यात्रा ने यह संकेत दिया है कि अमेरिका एक साथ कई क्षेत्रों में अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की नीति पर आगे बढ़ रहा है। मध्य पूर्व और हिंद-प्रशांत दोनों क्षेत्रों में सहयोगी देशों के साथ सुरक्षा, ऊर्जा और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में अमेरिका अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यह दौरा भविष्य में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच सुरक्षा तथा रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने और उभरती वैश्विक चुनौतियों का सामूहिक समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अदाणी समूह का बड़ा दांव: FY26 में सबसे अधिक कैपेक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

नई दिल्ली । देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटी समूहों में शामिल अदाणी पोर्टफोलियो ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पूंजीगत निवेश के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। समूह ने इस अवधि में करीब 1.53 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स किया, जिसे किसी भी भारतीय कॉर्पोरेट समूह द्वारा एक वित्तीय वर्ष में किया गया सबसे बड़ा निवेश बताया जा रहा है। इस निवेश के साथ समूह का कुल परिसंपत्ति आधार भी उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब देश में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और ऊर्जा परिवर्तन परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। समूह के वित्तीय प्रदर्शन में भी मजबूती देखने को मिली। वित्त वर्ष 2025-26 में ईबीआईटीडीए बढ़कर लगभग 94,834 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। इस आय में ऊर्जा, यूटिलिटी, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही। समूह का मानना है कि मजबूत परिचालन प्रदर्शन और दीर्घकालिक निवेश रणनीति भविष्य में भी विकास की गति बनाए रखने में मदद करेगी। कैपेक्स का बड़ा हिस्सा ऊर्जा और यूटिलिटी सेक्टर में लगाया गया, जहां नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया। वित्त वर्ष के दौरान 5 गीगावाट से अधिक नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी गई, जिससे समूह की कुल परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इसके साथ ही बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को भी विस्तार दिया गया है, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और ग्रीन ट्रांजिशन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में यह निवेश आने वाले वर्षों में समूह के राजस्व और नकदी प्रवाह को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है। परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आगे बढ़ीं। नए एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विकास से समूह ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो को और व्यापक बनाया है। एयरपोर्ट कारोबार में यात्रियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बंदरगाह कारोबार में कार्गो हैंडलिंग वॉल्यूम ने भी नया स्तर हासिल किया। वैश्विक विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाते हुए समूह ने विदेशों में रणनीतिक परिसंपत्तियों के अधिग्रहण और विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया है। वित्तीय मोर्चे पर समूह ने नकदी स्थिति और ऋण प्रबंधन को भी मजबूत बनाए रखा है। बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल और वित्तीय अनुशासन के कारण उधारी लागत में कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा इक्विटी आधारित वित्तपोषण पर जोर देकर समूह ने अपनी बैलेंस शीट को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े निवेश चक्र के बावजूद ऋण और नकदी के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर समूह के लिए महत्वपूर्ण होता है और यही पहलू निवेशकों का भरोसा बढ़ाता है। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के पूरी तरह परिचालन में आने के बाद समूह की आय, लाभ और नकदी प्रवाह में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। भारत में तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग, शहरीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की जरूरतों के बीच इस तरह के बड़े निवेश देश की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भारत-जर्मनी तकनीकी साझेदारी को नई उड़ान, क्वांटम और डीप-टेक सहयोग पर बड़ा फोकस

नई दिल्ली । भारत और जर्मनी के बीच विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देने की पहल तेज हो गई है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह और जर्मनी के थुरिंगिया राज्य के मंत्री-प्रेसिडेंट मारियो वोग्ट के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक में भविष्य की उन्नत तकनीकों को लेकर व्यापक चर्चा हुई। इस बैठक में क्वांटम कम्युनिकेशन, फोटोनिक्स, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, डीप-टेक नवाचार और उद्योग आधारित अनुसंधान को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों के वैज्ञानिक, शोध संस्थान, उद्योग जगत और सरकारी प्रतिनिधियों ने भी इस संवाद में भाग लिया, जिससे सहयोग के नए आयामों की संभावनाएं और मजबूत हुईं। बैठक के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत और जर्मनी के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में दशकों पुरानी साझेदारी रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों ने वर्षों से अनुसंधान और तकनीकी विकास के क्षेत्र में एक-दूसरे के साथ मिलकर महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2024 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहयोग के 50 वर्ष पूरे होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह संबंध आज रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। तेजी से बदलती वैश्विक तकनीकी आवश्यकताओं के बीच दोनों देशों के बीच सहयोग को और विस्तार देने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। चर्चा में जर्मनी के थुरिंगिया क्षेत्र की विशेष भूमिका भी सामने आई, जिसे यूरोप में फोटोनिक्स, ऑप्टिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग का प्रमुख केंद्र माना जाता है। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत की नवाचार क्षमता और जर्मनी की तकनीकी विशेषज्ञता एक-दूसरे की पूरक हैं। इसी आधार पर क्वांटम कम्युनिकेशन नेटवर्क, क्वांटम सैटेलाइट संचार, ऑप्टिकल ग्राउंड स्टेशन और उन्नत फोटोनिक्स तकनीकों के विकास में संयुक्त प्रयासों की संभावनाओं पर विस्तार से विचार किया गया। जर्मनी ने यूरोप में चल रही क्वांटम संचार परियोजनाओं और ऑप्टिकल नेटवर्क से जुड़े अनुभव भी साझा किए। डॉ. सिंह ने बैठक में भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के तहत हुई प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि देश सुरक्षित और अत्याधुनिक क्वांटम संचार प्रणाली विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही क्वांटम कंप्यूटिंग, मानक निर्माण, तकनीकी साझेदारी और विशेषज्ञों के आदान-प्रदान को लेकर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई विभिन्न पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है और यहां वैश्विक तकनीकी निवेश के लिए व्यापक अवसर मौजूद हैं। बैठक में अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया गया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर के बीच लंबे समय से चल रहे सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने सैटेलाइट संचार, ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, मानव अंतरिक्ष मिशन, माइक्रोग्रैविटी रिसर्च, पृथ्वी अवलोकन और ड्रोन तकनीक जैसे क्षेत्रों में नए सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया। साथ ही शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और स्टार्टअप उद्यमियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने तथा संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रम विकसित करने पर भी सकारात्मक रुख दिखाया गया। भारत और जर्मनी के बीच बढ़ता तकनीकी सहयोग आने वाले वर्षों में नवाचार और अनुसंधान को नई गति दे सकता है। क्वांटम तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान और डीप-टेक जैसे क्षेत्रों में साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि वैश्विक तकनीकी विकास के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
वैश्विक विकास में भारत की भूमिका अहम, फिनलैंड के महावाणिज्यदूत ने सराहा सहयोग

नई दिल्ली । भारत और फिनलैंड के बीच आर्थिक, तकनीकी और सतत विकास से जुड़े सहयोग को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। फिनलैंड के महावाणिज्यदूत एरिक अफ हॉलस्ट्रॉम ने भारत को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण देशों में से एक बताते हुए कहा कि वैश्विक विकास और आर्थिक प्रगति में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। उन्होंने माना कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच भारत न केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है, बल्कि टिकाऊ विकास और नवाचार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। मुंबई में बातचीत के दौरान हॉलस्ट्रॉम ने कहा कि सर्कुलर इकोनॉमी यानी संसाधनों के पुनः उपयोग और टिकाऊ उत्पादन की अवधारणा आने वाले वर्षों में दुनिया की प्रमुख जरूरत बनने जा रही है। उनके अनुसार भारत और फिनलैंड दोनों ऐसे देश हैं जो पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और संसाधनों की सीमित उपलब्धता जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बेहद आवश्यक है। भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते पर बोलते हुए उन्होंने इसे दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनका कहना था कि समझौते से जुड़ी बातचीत पूरी हो चुकी है और अब इसके क्रियान्वयन की प्रक्रियाएं आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि समझौता लागू होने के बाद भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों में तेज वृद्धि होगी। विशेष रूप से फिनलैंड और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों को इससे नई ऊर्जा मिलेगी और द्विपक्षीय व्यापार वर्तमान स्तर से दोगुना तक पहुंच सकता है। इससे निवेश, तकनीक हस्तांतरण और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। महाराष्ट्र की आर्थिक भूमिका पर चर्चा करते हुए हॉलस्ट्रॉम ने कहा कि यह राज्य भारत की अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र है और देश के औद्योगिक तथा निवेश परिदृश्य में इसकी विशेष पहचान है। उन्होंने बताया कि फिनलैंड और महाराष्ट्र के बीच कई परियोजनाओं पर सहयोग जारी है। मुंबई के ससून डॉक के विकास से संबंधित परियोजना में फिनिश कंपनियां सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनका मानना है कि ऐसे संयुक्त प्रयास दोनों देशों के बीच व्यावसायिक संबंधों को और मजबूत बनाने में सहायक साबित होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और फिनलैंड के विदेश व्यापार मंत्री विले टावियो के बीच अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार मुलाकात हो चुकी है। इन बैठकों में हरित अर्थव्यवस्था, सतत विकास और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। इसके अलावा विज्ञान, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी दोनों पक्ष नए अवसर तलाश रहे हैं। हाल ही में फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक पहुंचाने का निर्णय लिया था, जिसे भविष्य के सहयोग के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत और फिनलैंड के बीच बढ़ता सहयोग आने वाले समय में व्यापार, तकनीक और हरित विकास के क्षेत्रों में नए अवसर पैदा कर सकता है। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलने की संभावना है, जिससे निवेश और कारोबार का दायरा भी व्यापक होगा।
GUJRAT BUS ACCIDENT: गुजरात के सूरत में भीषण सड़क दुर्घटना, दो बसों की भिड़ंत में 5 यात्रियों की जान गई

GUJRAT BUS ACCIDENT: नई दिल्ली । गुजरात के सूरत जिले में मंगलवार को एक भीषण सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। जिले के बारडोली क्षेत्र में उवा गांव के पास महाराष्ट्र नंबर की दो यात्री बसों के बीच आमने-सामने जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि एक बस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि दूसरी बस सड़क पर पलट गई। हादसे के कुछ ही देर बाद पलटी हुई बस में आग लग गई, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस दुर्घटना में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोनों बसें विपरीत दिशा से आ रही थीं। अचानक हुए टकराव के बाद यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। दुर्घटना का प्रभाव इतना गंभीर था कि बसों के अगले हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। पलटी हुई बस में आग लगने के कारण स्थिति और भयावह हो गई। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू करने का प्रयास किया और कई यात्रियों को बाहर निकालने में मदद की। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और दमकल विभाग की टीमें घटनास्थल के लिए रवाना हो गईं। ASHOKNAGAR FARMERS PROTEST: खाद के लिए धरने पर बैठे किसान नेता अस्पताल पहुंचे, बिच आंदोलन में हुए बेहोश फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का अभियान शुरू किया। आग की लपटें तेजी से फैल रही थीं, जिसके कारण राहत कार्य में शुरुआती मुश्किलों का सामना करना पड़ा। हालांकि दमकलकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास किए और आग पर काबू पाने की दिशा में कार्रवाई तेज की। दुर्घटना स्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी जुट गए, जिससे बचाव अभियान को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। बारडोली शहर पुलिस ने क्षेत्र को घेरकर यातायात को अस्थायी रूप से प्रभावित मार्गों से डायवर्ट किया। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाने की व्यवस्था की गई। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों की पहचान और घायलों की वास्तविक संख्या का पता लगाने की प्रक्रिया जारी है। हादसे के कारणों की भी जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक स्तर पर माना जा रहा है कि तेज रफ्तार या वाहन नियंत्रण में चूक दुर्घटना की वजह हो सकती है, हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण स्पष्ट हो पाएगा। पन्ना में NHM स्वास्थ्यकर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल: नियमितीकरण की मांग पर स्वास्थ्य सेवाएं ठप, मरीज परेशान गुजरात में हाल के समय में सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है और यह दुर्घटना एक बार फिर सुरक्षित परिवहन व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। बड़ी संख्या में यात्रियों को लेकर चलने वाले वाहनों में सुरक्षा मानकों का पालन और सड़क पर सतर्क ड्राइविंग की आवश्यकता इस घटना के बाद और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। साथ ही मृतकों के परिजनों तक सूचना पहुंचाने और घायलों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के प्रयास जारी हैं। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता को सामने ला दिया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दुर्घटना के वास्तविक कारण स्पष्ट होंगे और आगे ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर भी विचार किया जा सकता है।
ASHOKNAGAR FARMERS PROTEST: खाद के लिए धरने पर बैठे किसान नेता अस्पताल पहुंचे, बिच आंदोलन में हुए बेहोश

HIGHLIGHTS: खाद संकट के बिच आंदोलन पर बैठे किसान खाद न मिलने पर हो रहा प्रदर्शन बिच आंदोलन में किसान नेता बेहोश पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने की मांग ASHOKNAGAR FARMERS PROTEST: मध्यप्रदेश। अशोकनगर जिले में खाद न मिलने पर आंदोलन में बैठे किसानों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ती जा रही हैं। बता दें कि भीषण गर्मी के बिच लगातार जारी इस आंदोलन में मंगलवार दोपहर एक किसान नेता बेहोश होकर गिर पड़े। यह घटना अशोकनगर के डबल लॉक केंद्र की बताई जा रही है, जहां बड़ी संख्या में लोग खाद मिलने का इंतजार कर रहे थे। ग्वालियर में भाभी की गोली लगने से मौत का मामला उलझा: देवर बोला ‘मजाक में चला ट्रिगर’, मायके पक्ष ने लगाया हत्या का आरोप 10 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ आंदोलन पर पहुंचे ईसागढ़ ब्लॉक के किसान संघ मंत्री देवेंद्र सिंह लोधी आंदोलन के बिच में ही बेहोश हो गए। बताया जा रहा है कि वह अपने क्षेत्र के किसानों को खाद दिलवाने आए थे, देवेंद्र सिंह करीब 10 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ इस आंदोलन में शामिल हुए थे। दो दिनों से खाद न माइन वह बहुत ज्यादा परेशान थे। 26 लाख की स्मैक के साथ तस्कर गिरफ्तार, बड़े नेटवर्क का खुलासा सूचना पर पहुंचे SDM शुभ्रता त्रिपाठी सूचना मिलते ही एसडीएम शुभ्रता त्रिपाठी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।जिसके बाद किसान को एम्बुलेंस में बैठाकर जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका इलाज किया जा रहा है। गौरतलब है कि खाद की कमी को लेकर जिले में किसानों का आंदोलन लगातार दूसरे दिन भी जारी है। साथ ही बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर डबल लॉक केंद्र पर डटे हुए हैं। किसानों की मांग है कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराया जाए। साथ ही किसानों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने से खरीफ सीजन की तैयारियां खराब हो रही हैं।
पन्ना-अजयगढ़ मार्ग पर ट्राला ने बाइक को मारी टक्कर: 14 वर्षीय नाबालिग की मौत, बड़ा भाई गंभीर घायल

मध्य प्रदेश । पन्ना जिले के पन्ना-अजयगढ़ मुख्य मार्ग पर मंगलवार को दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। दहलान चौकी के पास तेज रफ्तार ट्राला ने बाइक सवार दो सगे भाइयों को जोरदार टक्कर मार दी, जिसमें 14 वर्षीय नाबालिग की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में बड़ा भाई गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। इलाज के लिए जा रहे थे पन्ना, रास्ते में हुआ हादसाजानकारी के अनुसार, केवट पुरवा (दहलान चौकी क्षेत्र) निवासी राम प्रताप केवट के पुत्र अनिल केवट (14) और राम सजीवन केवट (23) बाइक से पन्ना जा रहे थे। बताया गया कि बड़े भाई को कान में दर्द की समस्या थी, जिसके इलाज के लिए वे अस्पताल जा रहे थे। इसी दौरान दहलान चौकी के पास सामने से आ रहे तेज रफ्तार ट्राला ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। मौके पर मौत, अस्पताल में घायल का इलाज जारीटक्कर इतनी भीषण थी कि 14 वर्षीय अनिल केवट ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। घायल राम सजीवन को स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। ट्राला चालक फरार, वाहन जब्तदुर्घटना के बाद ट्राला चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और ट्राला को जब्त कर लिया। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। गांव में मातम, पुलिस जांच जारइस दर्दनाक हादसे के बाद केवट पुरवा गांव में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस का कहना है कि आरोपी चालक की तलाश तेज कर दी गई है और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।