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पेट्रोल की कीमतों का रहस्य: अंतरराष्ट्रीय गिरावट का फायदा क्यों नहीं मिल रहा?

नई दिल्ली । दुनिया भर के बाजारों में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है, लेकिन इसका फायदा भारतीय उपभोक्ताओं को तुरंत नहीं मिल रहा है। यही कारण है कि आम लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब ब्रेंट क्रूड सस्ता हो रहा है तो देश में पेट्रोल और डीजल महंगा क्यों हो रहा है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल 98 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ चुका है, जिससे यह उम्मीद थी कि भारत में ईंधन सस्ता होगा। लेकिन इसके उलट हाल के हफ्तों में पेट्रोल और डीजल के दामों में कई बार बढ़ोतरी देखने को मिली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर कई रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस स्थिति की एक बड़ी वजह तेल कंपनियों की मूल्य नीति और उनका वित्तीय संतुलन है। भारत की प्रमुख तेल कंपनियां जैसे Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited पहले वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद कीमतें तुरंत नहीं बढ़ा पाईं थीं। उस समय कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए खुद घाटा सहा था। अब माना जा रहा है कि वे उसी पुराने नुकसान की भरपाई कर रही हैं। इसके अलावा भारत की तेल आयात पर भारी निर्भरता भी कीमतों को प्रभावित करती है। देश अपनी जरूरत का लगभग 85 से 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिससे वैश्विक बाजार में मामूली उतार-चढ़ाव भी घरेलू कीमतों पर सीधा असर डालता है। एक और अहम कारण है डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी। भारत कच्चे तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर में करता है, इसलिए जब रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगा हो जाता है। इसका असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है, भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता क्यों न हो रहा हो। कीमतों में टैक्स का भी बड़ा योगदान होता है। पेट्रोल और डीजल के दाम सिर्फ कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करते, बल्कि इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के एक्साइज ड्यूटी और वैट जैसे टैक्स भी शामिल होते हैं। यही टैक्स अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचने वाली कीमत को काफी बढ़ा देते हैं। इसके अलावा ट्रांसपोर्टेशन खर्च, डीलर कमीशन और लॉजिस्टिक्स लागत भी अंतिम कीमत में जुड़ते हैं। इन सभी कारकों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गिरावट का असर तुरंत भारतीय बाजार में नहीं दिखता। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और नीचे नहीं आतीं, रुपया मजबूत नहीं होता और टैक्स संरचना में राहत नहीं मिलती, तब तक पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ी कमी की उम्मीद करना मुश्किल है।

शाहरुख खान से लेकर अक्षय कुमार तक, जब भारतीय सिनेमा के इन दिग्गज कलाकारों ने बनाए वैश्विक कीर्तिमान

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा ने न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी एक खास और अमिट पहचान बनाई है। बॉलीवुड के सितारों की लोकप्रियता और उनका काम अक्सर दुनिया भर में सुर्खियां बटोरता रहता है। इसी कड़ी में एक-दो नहीं बल्कि कई बार भारतीय फिल्म जगत के कलाकारों ने अपने असाधारण और अनोखे प्रयासों से प्रतिष्ठित गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया है। इन कलाकारों ने अपनी फिल्मों के प्रचार के अनोखे तरीकों, सबसे लंबे अभिनय करियर, अनोखे किरदारों और अपनी बेमिसाल वैश्विक लोकप्रियता के दम पर ऐसे कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जिन्हें तोड़ पाना किसी भी अन्य वैश्विक कलाकार के लिए एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य साबित हो रहा है। बॉलीवुड के ‘खिलाड़ी’ यानी अक्षय कुमार अपने प्रशंसकों को खुश करने और नए प्रयोग करने के मामले में हमेशा आगे रहते हैं। उन्होंने साल 2023 में अपनी फिल्म ‘सेल्फी’ के प्रमोशन के दौरान एक अद्भुत रिकॉर्ड अपने नाम किया था। अक्षय ने अपने फैंस के साथ महज 3 मिनट के बेहद संक्षिप्त समय में कुल 184 परफेक्ट सेल्फी खींचकर एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला था। वहीं दूसरी तरफ, बच्चन परिवार के नाम भी एक बेहद अनोखा सिनेमाई रिकॉर्ड दर्ज है। फिल्म ‘पा’ में असल जिंदगी के पिता अमिताभ बच्चन ने एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित बेटे का किरदार निभाया था, जबकि उनके वास्तविक बेटे अभिषेक बच्चन ने फिल्म में उनके पिता की भूमिका अदा की थी। गिनीज बुक ने इस अनोखे प्रदर्शन को दुनिया का इकलौता ऐसा रिवर्सल रोल माना, जहां असल जिंदगी के पारिवारिक रिश्ते पर्दे पर पूरी तरह से उलट गए थे। अभिषेक बच्चन के नाम इस पारिवारिक रिकॉर्ड के अलावा एक और व्यक्तिगत वैश्विक कीर्तिमान भी दर्ज है। साल 2009 में अपनी फिल्म ‘दिल्ली-6’ के अनोखे प्रमोशन के दौरान अभिषेक ने 12 घंटे के भीतर देश के विभिन्न शहरों में कुल 13 पब्लिक अपीयरेंस यानी सार्वजनिक प्रस्तुतियां दी थीं। इस दौरान उन्होंने अपने निजी विमान और कार की मदद से लगभग 1800 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया था और हॉलीवुड के मशहूर स्टार विल स्मिथ के पुराने रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया था। लोकप्रियता की बात करें तो बॉलीवुड के ‘किंग खान’ यानी शाहरुख खान को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा दुनिया का सबसे लोकप्रिय और मांग वाला अभिनेता घोषित किया जा चुका है। एक वैश्विक विश्लेषण के अनुसार, शाहरुख खान की ग्लोबल डिमांड दुनिया के किसी भी अन्य औसत अभिनेता की तुलना में 53.2 गुना ज्यादा आंकी गई थी, जो उनकी बेमिसाल वैश्विक बादशाहत को साबित करती है। सिनेमा के शुरुआती दौर के कलाकारों की बात करें तो दिग्गज अभिनेता अशोक कुमार के नाम भी एक बेहद सम्मानित और ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने साल 1936 में फिल्म ‘जीवन नैया’ से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी और इसके बाद वे लगातार 63 वर्षों तक मुख्य और सहायक भूमिकाओं में बड़े पर्दे पर सक्रिय रूप से नजर आते रहे। सबसे लंबे समय तक बतौर मुख्य अभिनेता सक्रिय रहने का यह रिकॉर्ड आज भी ‘दादा मुनी’ के नाम से मशहूर अशोक कुमार के ही पास है। इसी तरह मशहूर कैरेक्टर आर्टिस्ट जगदीश राज खुराना ने सिनेमाई इतिहास में एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया है जिसे तोड़ना लगभग असंभव माना जाता है। उन्होंने अपने पूरे करियर में 144 से भी अधिक फिल्मों में सिर्फ ‘पुलिस इंस्पेक्टर’ का किरदार निभाया था, जिसके चलते उनका नाम गिनीज बुक में हमेशा के लिए दर्ज हो गया। अभिनेत्रियों में कैटरीना कैफ ने साल 2013 में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए उस दौर के हिसाब से रिकॉर्ड 63.75 करोड़ रुपये की अनुमानित सालाना कमाई के साथ बॉलीवुड की सबसे महंगी और कमाई करने वाली अभिनेत्री के रूप में अपना नाम इस वैश्विक सूची में दर्ज कराया था। ये वैश्विक रिकॉर्ड्स इस बात का साफ संकेत हैं कि बॉलीवुड के कलाकार न केवल कला के क्षेत्र में बल्कि कूटनीति, विपणन और लोकप्रियता के हर पैमाने पर दुनिया के किसी भी सिनेमा से पीछे नहीं हैं। आने वाले समय में तकनीक और सिनेमा के बदलते स्वरूप के साथ भारतीय कलाकारों द्वारा ऐसे कई और नए कीर्तिमान स्थापित किए जाने की पूरी संभावना दिखाई देती है।

CM Mohan Yadav Instruction: नक्सलवाद की तरह कुपोषण का करें सफाया, CM ने दिए महिला बाल विकास को निर्देश

cm mohan yadav

CM Mohan Yadav Instruction:भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि जिस तरह नक्सलवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति बनाकर कार्रवाई की गई थी। उसी तरह कुपोषण को खत्म करने के लिए भी सभी विभागों को मिलकर काम करना चाहिए। इसी कड़ी में उन्होंने महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य और आयुष विभाग को समन्वय के साथ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। 4 विकेट और 102 का औसत, IPL 2026 में नहीं चला बुमराह का जादू जनभागीदारी और जवाबदेही पर जोर समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं और बच्चों के लिए चल रही योजनाओं की जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचनी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि पोषण सुधार के काम में स्कूल, पंचायत, स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संस्थाओं को भी जोड़ा जाए।   अच्छा काम करने वालों को मिलेगा सम्मान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जो कर्मचारी और अधिकारी अच्छा काम कर रहे हैं, उन्हें सम्मानित किया जायेगा। वहीं काम में लापरवाही करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। कर्मचारियों को सही से काम करने पर जोर दिया गया ताकि योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंच सके। विदेशी सितारों का दबदबा, IPL 2026 में इन खिलाड़ियों ने मचाया धमाल 66 हजार से ज्यादा बच्चों को मिली मदद बैठक में बताया गया कि प्रदेश के कई जिलों में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा वन स्टॉप सेंटर और चाइल्ड हेल्पलाइन के जरिए महिलाओं और बच्चों को मदद दी जा रही है। बताया जा रहा है कि चाइल्ड हेल्पलाइन के माध्यम से अब तक 66 हजार से अधिक बच्चों को मदद पहुंचाई गई है। सूरत नवजात केस: तीसरी बार प्रेग्नेंट होने पर महिला ने नवजात को फेंका, CCTV से पहुंची पुलिस तक सच्चाई कई योजनाओं में मध्यप्रदेश आगे प्रदेश में 12 हजार 670 मिनी आंगनवाड़ियों को मुख्य आंगनवाड़ी में बदला गया है। वहीं लाड़ली बहना, लाड़ली लक्ष्मी और प्रधानमंत्री मातृ वंदना जैसी योजनाओं के जरिए करोड़ों महिलाओं और बालिकाओं को आर्थिक सहायता के साथ साथ कई लाभ पहुँचाए जा रहे हैं।

ललित मोदी ने सुष्मिता सेन संग ब्रेकअप की असली वजह का किया खुलासा, बताया क्यों अलग हुए दोनों के रास्ते

नई दिल्ली । मशहूर बिजनेसमैन ललित मोदी ने बॉलीवुड अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन के साथ अपने चर्चित रिश्ते और फिर उसके बाद हुए अलगाव पर पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने सोशल मीडिया पर सुष्मिता सेन के साथ साझा की गई तस्वीरों के पीछे की पूरी कहानी बयां की और साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि दोनों के बीच ब्रेकअप क्यों हुआ था। ललित मोदी ने अपने रिश्ते के दिनों को याद करते हुए सुष्मिता सेन की जमकर तारीफ की और उन तमाम आलोचकों को करारा जवाब दिया जो अभिनेत्री को सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सुष्मिता आज भी उनकी जिंदगी में एक बेहद खास स्थान रखती हैं और दोनों के बीच वर्तमान में भी एक बेहद खूबसूरत और प्यारी दोस्ती का रिश्ता कायम है। ललित मोदी ने ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे को दिए अपने विशेष इंटरव्यू में ब्रेकअप की मुख्य वजह भौगोलिक दूरियों को बताया। उन्होंने साझा किया कि सुष्मिता सेन उनके लिए हमेशा से बेहद खास रही हैं और उन्होंने सुष्मिता से अपने जीवन में बहुत कुछ सीखा है। जब उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर सुष्मिता के साथ अपनी तस्वीरें पोस्ट की थीं, तब वे दोनों एक गंभीर रिश्ते में थे और भविष्य में भी साथ रह सकते थे, लेकिन दोनों के काम और जीवन के ठिकाने अलग होने के कारण दूरियां बढ़ती चली गईं। सुष्मिता सेन का पूरा करियर और काम भारत में केंद्रित है, जबकि ललित मोदी का पूरा जीवन और व्यवसाय लंदन में स्थापित है। इस लंबी दूरी के कारण रिश्ते को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया था, हालांकि ललित मोदी का मानना है कि दूरियों के बावजूद सुष्मिता के साथ बिताया गया समय उनके जीवन का एक बेहद खूबसूरत अनुभव था, जिसकी यादें हमेशा उनके पास रहेंगी। इस इंटरव्यू के दौरान ललित मोदी ने उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जिन्होंने इस रिश्ते की घोषणा के बाद सुष्मिता सेन को सोशल मीडिया पर ‘गोल्ड डिगर’ यानी पैसों के लिए रिश्ता बनाने वाली महिला कहकर ट्रोल किया था। ललित मोदी ने मजाकिया और बेबाक अंदाज में इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि सुष्मिता बहुत स्वाभिमानी और बेहद अमीर महिला हैं, जिनके पास खुद के कमाए हुए ढेर सारे डायमंड्स हैं। उन्होंने बताया कि सुष्मिता का अपना डायमंड स्टोर भी है और उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। ललित मोदी ने एक दिलचस्प वाकया साझा करते हुए कहा कि जब भी वे दोनों बाहर जाते थे, तो सुष्मिता कभी उन्हें पैसे खर्च नहीं करने देती थीं और हर चीज का भुगतान खुद करती थीं। ऐसे में वे गोल्ड डिगर बिल्कुल नहीं थीं, बल्कि मजाक में कहा जाए तो वे खुद ‘डायमंड डिगर’ साबित हुए थे। साल 2022 में इंटरनेट पर तहलका मचाने वाली उस इंस्टाग्राम पोस्ट के पीछे की कहानी बताते हुए ललित मोदी ने कहा कि वह पोस्ट एक मजेदार बहस का नतीजा थी। दोनों के बीच किसी बात पर हल्की नोंकझोंक हो रही था और ललित मोदी ने मजाक में कहा कि वे इस रिश्ते को सार्वजनिक करने जा रहे हैं, जिस पर सुष्मिता हंस पड़ीं। इसके बाद जब ललित मोदी लंदन से सार्डिनिया की यात्रा पर थे, तब उन्होंने तस्वीरें पोस्ट कर दीं और सार्डिनिया पहुंचते-पहुंचते यह खबर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सबसे बड़ी सुर्खी बन चुकी थी। खास बात यह रही कि सुष्मिता ने कभी भी उनसे उस पोस्ट को हटाने के लिए नहीं कहा और न ही ललित मोदी ने कभी उसे डिलीट करने के बारे में सोचा। दोनों अपनी उस स्थिति को लेकर पूरी तरह सहज थे और उन्हें आज भी अपने उस फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ होता है कि भले ही समय और परिस्थितियों के कारण ललित मोदी और सुष्मिता सेन का प्रेम संबंध आगे नहीं बढ़ सका, लेकिन दोनों के मन में एक-दूसरे के प्रति सम्मान आज भी बरकरार है। यह इंटरव्यू दर्शाता है कि आधुनिक दौर में परिपक्वता के साथ रिश्तों को कैसे निभाया और खत्म किया जा सकता है, जहां आपसी समझ और दोस्ती ब्रेकअप के बाद भी कायम रहती है।

कारगिल युद्ध के समय अटल बिहारी वाजपेयी ने क्यों कराई थी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की दिलीप कुमार से बात

नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1999 में लड़ा गया कारगिल युद्ध न केवल सैन्य शौर्य बल्कि कूटनीतिक रणनीतियों के लिए भी जाना जाता है। इस युद्ध के दौरान पर्दे के पीछे का एक ऐसा ऐतिहासिक और बेहद चौंकाने वाला किस्सा सामने आया था, जब हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार ने देश के प्रति अपनी वफादारी निभाते हुए पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को फोन पर खरी-खरी सुना दी थी। पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी ने अपनी किताब ‘नाइदर ए हॉक नॉर ए डव’ में इस पूरे घटनाक्रम का विस्तार से जिक्र किया है। यह वाकया उस समय का है जब पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा पार कर भारतीय चौकियों पर चुपके से कब्जा कर लिया था और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी पाकिस्तान के इस धोखे से बेहद आहत थे, क्योंकि कुछ ही समय पहले वे शांति का पैगाम लेकर खुद बस से लाहौर गए थे। किताब के अनुसार, एक दिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ अपने कार्यालय में बैठे थे, तभी उनके एडीसी ने आकर सूचना दी कि भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी उनसे बेहद जरूरी बात करना चाहते हैं। फोन लाइन कनेक्ट होते ही वाजपेयी जी ने बेहद तल्ख और निराश आवाज में नवाज शरीफ से सीधे सवाल किया कि मियाां साहब, एक तरफ आप लाहौर में मुझसे गर्मजोशी से गले मिल रहे थे और दूसरी तरफ आपकी सेना ने हमारे कारगिल पर कब्जा कर लिया, यह कैसी दोस्ती है। इस अचानक हुए सीधे हमले से नवाज शरीफ पूरी तरह सकपका गए और उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उन्हें कारगिल की इस सैन्य कार्रवाई के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं थी और यह सब उनकी मर्जी के बिना हुआ है। अटल बिहारी वाजपेयी ने नवाज शरीफ की इस सफाई पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया और अपनी कूटनीतिक रणनीति के तहत उनसे कहा कि अगर आपको मेरी बात पर यकीन नहीं हो रहा है, तो जरा उस शख्स से बात कीजिए जो इस वक्त मेरे पास ही बैठा है। इसके बाद वाजपेयी जी ने फोन की कमान बॉलीवुड के ‘ट्रैजेडी किंग’ कहे जाने वाले अभिनेता दिलीप कुमार के हाथों में सौंप दी। जैसे ही फोन के दूसरी तरफ से दिलीप कुमार की आवाज गूंजी, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ पूरी तरह दंग रह गए। चूंकि दिलीप कुमार का जन्म विभाजन से पहले पेशावर में हुआ था, इसलिए पाकिस्तान की आवाम और वहां के हुक्मरानों के बीच भी उनके प्रति बेहद सम्मान और गहरी दीवानगी थी। फोन हाथ में लेते ही दिलीप कुमार ने बिना किसी संकोच के नवाज शरीफ को एक कड़ा और भावुक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मियाां साहब, हमें आपसे इस तरह के कदम की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी क्योंकि आपने हमेशा भारत और पाकिस्तान के बीच शांति व्यवस्था बनाए रखने का दावा किया है। उन्होंने आगे एक हिंदुस्तानी मुस्लिम के दर्द को बयां करते हुए कहा कि जब भी दोनों देशों के बीच सरहद पर तनाव बढ़ता है, तो भारत के मुस्लिम खुद को असुरक्षित महसूस करने लगते हैं और उनके लिए घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है। दिलीप कुमार ने नवाज शरीफ से खुदा के वास्ते इस गंभीर स्थिति को संभालने और तुरंत कुछ ठोस कदम उठाने की अपील की। हालांकि, इस ऐतिहासिक फोन कॉल के तुरंत बाद जमीनी स्तर पर युद्ध पूरी तरह तो नहीं रुका, लेकिन माना जाता है कि इससे कुछ समय के लिए कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हुई और सीमा पर तनाव को समझने में मदद मिली। यह युद्ध पूरे तीन महीने तक जारी रहा, जिसमें भारतीय सेना ने अपने वीर जवानों की शहादत और अदम्य साहस की बदौलत कारगिल की चोटियों से दुश्मनों को खदेड़कर दोबारा तिरंगा फहराया था। देश के प्रति दिलीप कुमार का यह जज्बा हमेशा से अटूट था, जिसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि साल 1947 में विभाजन के समय जब उनके परिवार को किसी ने पाकिस्तान लौटने की सलाह दी थी, तो उन्होंने दोटूक जवाब दिया था कि उनका वतन हिंदुस्तान ही है और वे यहीं जिएंगे और यहीं मरेंगे।

राजेंद्र कुमार की आंखों में आ गए थे आंसू, जब बेटी की विदाई में गूंजा नील कमल फिल्म का यह सदाबहार गाना

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में साठ का दशक संगीत और अभिनय के लिहाज से स्वर्णिम युग माना जाता है। इस दौर में जहां एक तरफ राजेश खन्ना और राजेंद्र कुमार जैसे दिग्गज अभिनेताओं ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए, वहीं दूसरी ओर संगीत की दुनिया में भी कई ऐसे अमर गीतों का निर्माण हुआ जो आज भी लोगों के दिलों को छू जाते हैं। ऐसा ही एक बेहद भावुक और यादगार किस्सा साठ के दशक के आखिरी सालों से जुड़ा हुआ है, जब फिल्म ‘नील कमल’ का एक प्रसिद्ध गाना अभी रिलीज भी नहीं हुआ था और उसने एक शादी समारोह में मौजूद सभी लोगों की आंखों को नम कर दिया था। इस गाने के बोल इतने मार्मिक थे कि हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता राजेंद्र कुमार खुद को रोने से रोक नहीं पाए थे और उन्होंने बेहद भावुक होकर संगीतकार से इस फिल्म और गाने के बारे में पूछताछ की थी। यह पूरा घटनाक्रम फिल्म नील कमल के निर्माण के समय का है, जिसमें बलराज साहनी, राजकुमार और मनोज कुमार जैसे बड़े कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले थे। फिल्म के लिए एक विशेष विदाई गीत की आवश्यकता थी, जिसे संगीतकार रवि तैयार कर रहे थे। रवि ने इस खास गीत के लिए मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी से संपर्क किया, जिन्होंने अपनी कलम से बेहद दर्द भरे और दिल को छू लेने वाले बोल लिखे। इसके बाद इस गाने को अमर बनाने की जिम्मेदारी महान गायक मोहम्मद रफी को सौंपी गई, जिन्होंने ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ नामक इस विदाई गीत को अपनी जादुई आवाज से सजाया। गाना पूरी तरह से रिकॉर्ड हो चुका था, लेकिन फिल्म की रिलीज में अभी काफी समय बाकी था, जिसके कारण आम जनता और फिल्म इंडस्ट्री के कई लोग इस शानदार रचना से पूरी तरह अनजान थे। इसी दौरान फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर गीतकार राजेंद्र कृष्णन की बेटी की शादी का आयोजन हुआ, जिसमें बॉलीवुड के तमाम दिग्गज कलाकारों और संगीतकारों को आमंत्रित किया गया था। इस भव्य शादी समारोह में अभिनेता राजेंद्र कुमार भी शामिल हुए थे। शादी की रस्मों के बीच राजेंद्र कृष्णन ने संगीतकार रवि से अनुरोध किया कि वे अपनी सुरीली आवाज में महफिल में कोई गाना गाएं। रवि ने इस अनुरोध को स्वीकार तो कर लिया, लेकिन उन्होंने एक अनूठी शर्त रखी कि वे यह गाना केवल बेटी की विदाई के समय ही गाएंगे। जैसे ही विदाई की रस्म शुरू हुई और माहौल में उदासी छाने लगी, रवि ने हाथ में माइक संभाला और पूरी शिद्दत व गहरे भावों के साथ अपनी ही धुन पर तैयार किया हुआ अनरिलीज्ड गाना ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ गाना शुरू कर दिया। रवि की मखमली और भावुक आवाज में इस गाने के बोल जैसे ही गूंजे, वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। बेटी की विदाई का वह दृश्य इस गाने के प्रभाव से इतना गमगीन हो गया कि शादी में मौजूद राजेंद्र कुमार अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सके और फूट-फूट कर रोने लगे। गाना खत्म होने के बाद राजेंद्र कुमार तुरंत संगीतकार रवि के पास पहुंचे और अत्यंत भावुक होकर उनसे पूछा कि आखिर यह दिल को झकझोर देने वाला गाना किस फिल्म का है। चूंकि उस समय तक फिल्म नील कमल सिनेमाघरों में नहीं आई थी, इसलिए रवि ने उन्हें विस्तार से बताया कि यह उनकी आगामी फिल्म का एक विशेष विदाई गीत है, जिसे मोहम्मद रफी ने गाया है। इस कालजयी गाने से जुड़ा एक और बेहद दिलचस्प और भावनात्मक पहलू गायक मोहम्मद रफी से भी जुड़ा हुआ है। जब रफी साहब स्टूडियो में इस गाने की रिकॉर्डिंग कर रहे थे, तब वे खुद भी अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए थे। दरअसल, उन दिनों रफी साहब ने अपनी खुद की बेटी की सगाई की थी, और रिकॉर्डिंग के समय उनके जेहन में अपनी बेटी की विदाई का ख्याल आ गया था। इस वजह से गाते-गाते उनकी आवाज भारी हो गई और वे रो पड़े। संगीतकार रवि ने मोहम्मद रफी की उस भारी और दर्द भरी आवाज को तकनीकी रूप से सुधारने के बजाय वैसे ही रहने दिया, क्योंकि उन्हें लगा कि एक पिता का यह वास्तविक दर्द गाने की आत्मा को और अधिक गहरा और जीवंत बना देगा, जो आज भी इस गाने में साफ महसूस होता है। इस प्रकार, यह गाना न केवल फिल्म नील कमल की पहचान बना, बल्कि भारतीय शादियों में बेटी की विदाई का एक अनिवार्य हिस्सा भी बन गया। इतने दशक बीत जाने के बाद भी जब यह गाना कहीं बजता है, तो आज भी लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। यह गीत इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब सच्चे भाव, बेहतरीन लेखन और बेहतरीन संगीत का मिलन होता है, तो ऐसी अमर कलाकृतियों का जन्म होता है जो पीढ़ियों तक इंसानी भावनाओं को झकझोरती रहती हैं।

IPL 2026: चोपड़ा की नजर में सबसे खास खिलाड़ी, ओपनर और गेंदबाज दोनों तय

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 का सीजन रोमांच, रिकॉर्ड और व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिहाज से बेहद यादगार रहा। इसी बीच पूर्व भारतीय क्रिकेटर Aakash Chopra ने इस सीजन के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों की अपनी पसंद साझा की है, जिसमें युवा बल्लेबाजों से लेकर अनुभवी गेंदबाजों तक को जगह मिली है। आकाश चोपड़ा ने सबसे पहले इस सीजन की सर्वश्रेष्ठ पारी के रूप में KL Rahul की धमाकेदार 152 रनों की नाबाद पारी को चुना। यह पारी Delhi Capitals की ओर से खेलते हुए आई थी, जिसमें राहुल ने 67 गेंदों पर 16 चौके और 9 छक्के लगाए थे। इस शानदार प्रदर्शन के दम पर दिल्ली ने 20 ओवर में 264 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था, जो सीजन के सबसे बड़े स्कोरों में से एक रहा। सर्वश्रेष्ठ ओपनर के तौर पर आकाश चोपड़ा ने 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज Vaibhav Suryavanshi को चुना, जिन्होंने Rajasthan Royals के लिए शानदार प्रदर्शन किया। वैभव ने 16 मैचों में 776 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 237 रहा। इस सीजन उन्होंने 72 छक्के लगाकर कई बड़े रिकॉर्ड तोड़ दिए और सबसे युवा ऑरेंज कैप विजेता बनने का गौरव हासिल किया। मिडिल ऑर्डर में आकाश चोपड़ा ने Heinrich Klaasen को सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज चुना। Sunrisers Hyderabad की ओर से खेलते हुए क्लासेन ने 15 मैचों में 624 रन बनाए और पूरे सीजन में 160 के स्ट्राइक रेट से आक्रामक बल्लेबाजी की। वह इस सीजन टॉप रन स्कोरर्स में भी शामिल रहे। फिनिशर की भूमिका में आकाश चोपड़ा ने Donovan Ferreira को सबसे प्रभावशाली खिलाड़ी माना, जिन्होंने दबाव की परिस्थितियों में अपनी टीम के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। गेंदबाजी में सबसे बड़ा नाम Bhuvneshwar Kumar का रहा, जिन्हें आकाश चोपड़ा ने आईपीएल 2026 का सर्वश्रेष्ठ तेज गेंदबाज चुना। Royal Challengers Bengaluru के लिए खेलते हुए भुवनेश्वर ने 16 मैचों में 28 विकेट हासिल किए और 17.89 की शानदार इकॉनमी से रन रोके। वह इस सीजन दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों में शामिल रहे। आईपीएल 2026 में आकाश चोपड़ा की यह टीम चयन इस बात को दिखाता है कि इस सीजन युवा प्रतिभा और अनुभवी खिलाड़ियों दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया। वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा सितारे जहां भविष्य की झलक देते हैं, वहीं भुवनेश्वर कुमार जैसे अनुभवी गेंदबाज आज भी अपनी उपयोगिता साबित करते हैं।

फीफा वर्ल्ड कप में सबसे ज्यादा गोल करने वाले 5 दिग्गज खिलाड़ी

नई दिल्ली । फुटबॉल का सबसे बड़ा मंच FIFA World Cup हमेशा से दिग्गज खिलाड़ियों के लिए अपनी प्रतिभा साबित करने का मंच रहा है। इस टूर्नामेंट में कई ऐसे खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने अपने गोलों से इतिहास रच दिया। जैसे-जैसे FIFA World Cup 2026 करीब आ रहा है, वैसे-वैसे पुराने रिकॉर्ड और दिग्गज खिलाड़ियों की चर्चा भी तेज हो गई है। इस सूची में सबसे ऊपर नाम आता है जर्मनी के दिग्गज स्ट्राइकर Miroslav Klose का। क्लोस ने चार विश्व कप (2002, 2006, 2010 और 2014) में खेलते हुए कुल 16 गोल किए और वह अब तक टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। उनकी सबसे बड़ी खासियत बड़े मुकाबलों में लगातार गोल करने की क्षमता रही। दूसरे स्थान पर ब्राजील के महान स्ट्राइकर Ronaldo Nazário हैं, जिन्हें ‘द फेनोमेनन’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 1994 से 2006 के बीच खेले गए विश्व कप में कुल 15 गोल किए। खास तौर पर 2002 के विश्व कप में उनके 8 गोल ने ब्राजील को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी। तीसरे स्थान पर फ्रांस के दिग्गज स्ट्राइकर Just Fontaine हैं, जिन्होंने 1958 के विश्व कप में इतिहास रच दिया था। उन्होंने सिर्फ 6 मैचों में 13 गोल दागकर एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जो आज तक कायम है। एक ही टूर्नामेंट में इतने गोल करना फुटबॉल इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है। चौथे स्थान पर अर्जेंटीना के कप्तान और विश्व कप विजेता Lionel Messi हैं। 2006 से 2022 के बीच उन्होंने विश्व कप में 13 गोल किए। 2022 का कतर विश्व कप उनके करियर का सबसे यादगार टूर्नामेंट रहा, जहां उन्होंने 7 गोल करते हुए अर्जेंटीना को विश्व चैंपियन बनाया। पांचवें स्थान पर फ्रांस के सुपरस्टार Kylian Mbappé हैं। उन्होंने अब तक खेले गए विश्व कप मुकाबलों में 12 गोल किए हैं। 2022 के फाइनल में उनकी हैट्रिक ने उन्हें पूरी दुनिया में सुर्खियों में ला दिया था और वह गोल्डन बूट भी जीतने में सफल रहे थे। फीफा वर्ल्ड कप में इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन यह साबित करता है कि यह टूर्नामेंट केवल टीम की नहीं बल्कि व्यक्तिगत प्रतिभा को भी इतिहास में अमर कर देता है। आने वाले विश्व कप में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई नया खिलाड़ी इन रिकॉर्ड्स को चुनौती दे पाता है या नहीं।

4 विकेट और 102 का औसत, IPL 2026 में नहीं चला बुमराह का जादू

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 का सीजन कई खिलाड़ियों के लिए यादगार रहा, लेकिन Jasprit Bumrah के लिए यह टूर्नामेंट किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा। अपनी सटीक यॉर्कर, घातक डेथ बॉलिंग और मैच जिताने वाली क्षमता के लिए मशहूर बुमराह पूरे सीजन संघर्ष करते नजर आए। नतीजा यह रहा कि 13 मुकाबलों में वह सिर्फ 4 विकेट ही अपने नाम कर सके, जो उनके कद और अनुभव के हिसाब से बेहद निराशाजनक आंकड़ा है। टी20 क्रिकेट में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों में शुमार बुमराह से इस सीजन भी बड़ी उम्मीदें थीं। खासकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद माना जा रहा था कि वह आईपीएल में भी अपनी टीम के लिए तुरुप का इक्का साबित होंगे। लेकिन पूरे टूर्नामेंट में उनकी लय नजर नहीं आई। बल्लेबाजों पर दबाव बनाने और विकेट निकालने में माहिर बुमराह कई मैचों में पूरी तरह बेअसर दिखाई दिए। आंकड़े उनकी मुश्किलों की कहानी खुद बयां करते हैं। पूरे सीजन में उनका गेंदबाजी औसत 102.50 रहा, जो 30 से अधिक ओवर फेंकने वाले गेंदबाजों में सबसे खराब रिकॉर्ड माना जा रहा है। इतना ही नहीं, 13 में से 9 मुकाबलों में वह एक भी विकेट हासिल नहीं कर सके। पूरे सीजन में कोई भी ऐसा मैच नहीं रहा, जिसमें उन्होंने एक से अधिक विकेट लिए हों। अगर बुमराह के आईपीएल करियर पर नजर डालें तो यह उनका सबसे खराब सीजन माना जा रहा है। हालांकि 2013 और 2015 में भी उन्होंने सिर्फ 3-3 विकेट लिए थे, लेकिन उन वर्षों में उन्होंने बेहद कम मैच खेले थे। इसके विपरीत आईपीएल 2026 में उन्हें लगातार मौके मिले, फिर भी वह अपनी छाप छोड़ने में असफल रहे। बुमराह की खराब फॉर्म का असर सीधे तौर पर Mumbai Indians के प्रदर्शन पर भी पड़ा। मुंबई इंडियंस की गेंदबाजी लंबे समय से बुमराह के इर्द-गिर्द घूमती रही है। जब टीम का सबसे भरोसेमंद गेंदबाज विकेट लेने में नाकाम रहा तो अन्य गेंदबाजों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया। विपक्षी बल्लेबाजों ने इसका भरपूर फायदा उठाया और मुंबई की गेंदबाजी को लगातार निशाना बनाया। मुंबई इंडियंस के लिए यह सीजन कुल मिलाकर बेहद निराशाजनक रहा। टीम 14 मुकाबलों में सिर्फ 4 जीत दर्ज कर सकी, जबकि 10 मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा। अंक तालिका में नौवें स्थान पर रहकर पांच बार की चैंपियन टीम ने अपना अभियान समाप्त किया। टीम की असफलता के पीछे बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों की कमजोरियां जिम्मेदार रहीं, लेकिन बुमराह की फीकी फॉर्म सबसे बड़ा झटका साबित हुई। अब भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों पर टिकी हैं। फैंस को उम्मीद होगी कि आईपीएल 2026 का यह खराब दौर यहीं समाप्त हो और बुमराह एक बार फिर टीम इंडिया के लिए अपनी पुरानी धार और लय हासिल करें।

करोड़ों की कीमत, लेकिन प्रदर्शन रहा फीका; IPL 2026 के 5 सबसे बड़े फ्लॉप खिलाड़ी

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 में जहां कई खिलाड़ियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से सुर्खियां बटोरीं, वहीं कुछ बड़े नाम उम्मीदों पर खरे नहीं उतर सके। करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन टीमों के लिए निराशा का कारण बना। आईपीएल 2026 में कई युवा खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और कुछ अनुभवी सितारों ने भी शानदार प्रदर्शन कर अपनी टीमों को सफलता दिलाई। लेकिन दूसरी तरफ ऐसे खिलाड़ी भी रहे, जिन पर फ्रेंचाइजियों ने भारी-भरकम रकम खर्च की, मगर वे पूरे सीजन में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। इन खिलाड़ियों की खराब फॉर्म का असर उनकी टीमों के अभियान पर भी साफ दिखाई दिया। सबसे ज्यादा निराश करने वाले खिलाड़ियों में नाम आता है Cameron Green का। Kolkata Knight Riders ने उन्हें 25.20 करोड़ रुपये में अपनी टीम में शामिल किया था। ग्रीन से बल्ले और गेंद दोनों से योगदान की उम्मीद थी, लेकिन वह 14 मैचों में केवल 322 रन ही बना सके। उनके बल्ले से सिर्फ दो अर्धशतक निकले और गेंदबाजी में भी वह कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए। इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद यह प्रदर्शन केकेआर के लिए निराशाजनक रहा। दूसरे बड़े नाम हैं Rishabh Pant। 27 करोड़ रुपये की कीमत के साथ आईपीएल इतिहास के सबसे महंगे खिलाड़ियों में शामिल पंत का सीजन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। Lucknow Super Giants के लिए खेलते हुए उन्होंने 14 मैचों में केवल 312 रन बनाए और पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ एक अर्धशतक लगा सके। उनकी बल्लेबाजी में निरंतरता की कमी टीम को भारी पड़ी। Suryakumar Yadav भी इस सीजन संघर्ष करते नजर आए। Mumbai Indians ने उन्हें 16.35 करोड़ रुपये में रिटेन किया था, लेकिन वह 13 पारियों में सिर्फ 270 रन ही बना सके। दो अर्धशतकों के अलावा उनका प्रदर्शन फीका रहा और मध्यक्रम में उनकी नाकामी का असर टीम के नतीजों पर पड़ा। वेस्टइंडीज के विस्फोटक बल्लेबाज Nicholas Pooran से भी काफी उम्मीदें थीं। Lucknow Super Giants ने उन्हें 21 करोड़ रुपये में रिटेन किया था, लेकिन पूरन 14 मैचों में केवल 234 रन बना सके। पूरे सीजन में उनके बल्ले से सिर्फ एक अर्धशतक निकला और वह अपनी आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचानी जाने वाली छाप छोड़ने में नाकाम रहे। सूची में पांचवां नाम Hardik Pandya का है। Mumbai Indians के कप्तान के रूप में हार्दिक का प्रदर्शन बल्ले और गेंद दोनों से साधारण रहा। 10 मैचों में उन्होंने केवल 206 रन बनाए और एक भी अर्धशतक नहीं लगा सके। गेंदबाजी में भी उनके खाते में सिर्फ चार विकेट आए। कप्तान और ऑलराउंडर दोनों भूमिकाओं में उनका योगदान अपेक्षाओं से काफी कम रहा। आईपीएल जैसे बड़े टूर्नामेंट में खिलाड़ियों की कीमत और प्रदर्शन की तुलना हमेशा चर्चा का विषय रहती है। आईपीएल 2026 में इन खिलाड़ियों से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन उनका प्रदर्शन उनकी फ्रेंचाइजियों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सका। यही वजह रही कि करोड़ों रुपये की निवेश के बावजूद ये सितारे सीजन के सबसे बड़े निराशाजनक खिलाड़ियों में गिने जा रहे हैं।