डीके शिवकुमार का शपथ ग्रहण आज, बीजेपी नेता येदियुरप्पा से मुलाकात के बाद सियासी संदेशों पर तेज हुई बहस

नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां डीके शिवकुमार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। बेंगलुरु स्थित लोक भवन के ग्लास हाउस में शाम 4 बजकर 5 मिनट पर होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह को लेकर पूरे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्यपाल थावरचंद गहलोत उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे, जबकि उनके साथ नई कैबिनेट के 10 से 12 मंत्रियों के भी शपथ लेने की संभावना है। समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भी अपेक्षित है, जिससे यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण बन गया है। शपथ ग्रहण से पहले डीके शिवकुमार की लगातार हो रही मुलाकातों ने सियासी हलचल को और बढ़ा दिया है। उन्होंने पहले पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात की और उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा से भी भेंट की। इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसे केवल औपचारिक मुलाकात के बजाय एक बड़े सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम राज्य में संतुलन और संवाद की नीति को दर्शाने का प्रयास हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक व्याख्या सामने नहीं आई है। शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं और बेंगलुरु शहर को विशेष रूप से सजाया गया है। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें दिहाड़ी मजदूर, किसान प्रतिनिधि, दलित संगठन, महिला समूह, युवा नेता और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके साथ ही मीडिया, फिल्म, खेल, न्यायपालिका, उद्योग और कला जगत से जुड़े लोगों की भी उपस्थिति तय मानी जा रही है, जिससे यह आयोजन व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व का प्रतीक बनता दिखाई दे रहा है। नई कैबिनेट को लेकर अभी आधिकारिक रूप से पूरी सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन संकेत हैं कि पुराने और नए चेहरों का मिश्रण देखने को मिल सकता है। पार्टी के भीतर संतुलन साधने और विभिन्न गुटों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम चल रहा है। इस बीच डिप्टी सीएम और अन्य प्रमुख मंत्रालयों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, हालांकि अंतिम फैसला शपथ ग्रहण के बाद ही स्पष्ट होगा। डीके शिवकुमार ने पहले ही संकेत दिए हैं कि उनके नेतृत्व में कर्नाटक में एक नए युग की शुरुआत होगी, विशेष रूप से युवाओं के लिए अवसरों को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि जिम्मेदारियां आसान नहीं होंगी और सरकार के सामने कई चुनौतियां रहेंगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में नई सरकार की नीतियां और कैबिनेट संरचना राज्य की दिशा तय करेगी। इस बीच शपथ ग्रहण से पहले उनके आवास पर सुरक्षा व्यवस्था को भी सख्त कर दिया गया है। समर्थकों में उत्साह का माहौल है और पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार अपने पहले फैसलों के साथ किस दिशा में आगे बढ़ती है और राज्य की राजनीति में क्या नया संतुलन स्थापित होता है।
एक ही सीढ़ी, धुएं से भरा होटल और मौत का मंजर: दिल्ली आग हादसे में 21 की मौत, रेस्क्यू पर उठे सवाल

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया है, जहां एक होटल में लगी भीषण आग में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हादसे में दर्जनों लोग घायल हुए हैं, जबकि बचाव दल ने कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की कार्रवाई तेज कर दी गई है, लेकिन शुरुआती जांच में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही के संकेत सामने आए हैं। यह आग मालवीय नगर स्थित एक बहुमंजिला इमारत के ‘लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट’ में सुबह करीब 8.50 से 9 बजे के बीच लगी। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया और ऊपरी मंजिलों तक धुआं फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत में केवल एक ही सीढ़ी होने के कारण लोग फंस गए और बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा। हादसे के दौरान कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए खतरनाक कदम उठाए और तीसरी मंजिल से नीचे बिछाए गए गद्दों पर छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और गली में गद्दे बिछाकर फंसे हुए लोगों को बचाने की कोशिश की। कई लोग इस दौरान गंभीर रूप से घायल भी हो गए, जिनमें कुछ के पैर टूटने की भी जानकारी सामने आई है। स्थानीय नागरिकों और चश्मदीदों के अनुसार, आग लगने के बाद पूरी इमारत धुएं से भर गई थी, जिससे लोगों को सांस लेने और बाहर निकलने में भारी दिक्कत हुई। कई लोग बेसमेंट में भी फंस गए थे, जिन्हें स्थानीय लोगों ने शटर तोड़कर बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों ने यह भी बताया कि इमारत में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था और एक ही एग्जिट होने के कारण हालात और बिगड़ गए। घटना पर बयान देते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा कि शुरुआती जानकारी के अनुसार होटल में सुरक्षा व्यवस्थाएं बेहद कमजोर थीं। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन प्रारंभिक आशंका है कि आग रेस्टोरेंट के किचन या इलेक्ट्रिक उपकरण से शुरू हुई हो सकती है। दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उन्हें सुबह 8.50 बजे सूचना मिली जिसके बाद सात फायर टेंडर तुरंत मौके पर भेजे गए। राहत और बचाव अभियान में कुल 37 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इमारत में बेसमेंट सहित कुल छह मंजिलें थीं, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। अधिकारियों ने यह भी बताया कि इमारत में कई विदेशी नागरिक भी ठहरे हुए थे, जो पास के अस्पताल में इलाज के लिए आए थे। हादसे के बाद बिजली आपूर्ति तुरंत काट दी गई और बचाव कार्य तेजी से पूरा किया गया। इस दुखद घटना पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली का यह अग्निकांड एक बार फिर शहरी भवन सुरक्षा मानकों और आपातकालीन निकास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर सुरक्षित निकास और पर्याप्त सीढ़ियों की व्यवस्था होती, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।
14 साल बाद मांगी गई ₹3.33 लाख की वसूली, ट्रिब्यूनल ने मांगा जवाब

जबलपुर। जबलपुर की 91 वर्षीय श्यामा देवी झा को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) से बड़ी राहत मिली है। अधिकरण ने उनकी पारिवारिक पेंशन से की जा रही 3.33 लाख रुपए की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। आयुध निर्माणी विभाग ने कथित अधिक पेंशन भुगतान का हवाला देते हुए यह राशि वापस लेने का आदेश जारी किया था, लेकिन बुजुर्ग महिला ने इसे न्यायिक चुनौती देते हुए अधिकरण का दरवाजा खटखटाया। प्रारंभिक सुनवाई में अधिकरण ने मामले को गंभीर मानते हुए विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। श्यामा देवी झा के पति शंभू दयाल झा आयुध निर्माणी में कार्यरत थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे नियमित पेंशन प्राप्त कर रहे थे। वर्ष 2012 में उनके निधन के बाद पारिवारिक पेंशन का लाभ उनकी पत्नी श्यामा देवी को मिलने लगा। पिछले 14 वर्षों से उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत पेंशन मिल रही थी, लेकिन हाल ही में विभाग ने आदेश जारी कर दावा किया कि उन्हें अधिक भुगतान किया गया है और करीब 3 लाख 33 हजार रुपए की राशि की वसूली की जाएगी। विभाग के इस फैसले ने बुजुर्ग महिला के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया। याचिका में कहा गया कि 91 वर्ष की उम्र में पेंशन ही उनका एकमात्र सहारा है और इसी राशि से उनका जीवन-यापन चलता है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि यदि किसी प्रकार का अधिक भुगतान हुआ भी है तो उसमें उनका कोई दोष नहीं है। उन्होंने न तो कोई गलत जानकारी दी और न ही किसी प्रकार की तथ्यात्मक जानकारी छिपाई। ऐसे में 14 साल बाद वसूली की कार्रवाई न केवल अनुचित है बल्कि मानवीय दृष्टि से भी न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती। मामले में श्यामा देवी की ओर से अधिवक्ता आकाश सिंघई ने पक्ष रखा। उन्होंने अधिकरण के समक्ष दलील दी कि विभागीय त्रुटि का भार एक वृद्ध पेंशनभोगी पर नहीं डाला जा सकता। सुनवाई के दौरान अधिकरण ने प्रथम दृष्टया इन तर्कों को उचित माना और वसूली आदेश के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। CAT के आदेश के बाद फिलहाल श्यामा देवी की पारिवारिक पेंशन से किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। अधिकरण ने संबंधित विभाग को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब अगली सुनवाई में विभाग का पक्ष सामने आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी। यह मामला उन हजारों पेंशनभोगियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके खिलाफ वर्षों बाद अधिक भुगतान के नाम पर रिकवरी की कार्रवाई की जाती है। फिलहाल बुजुर्ग महिला को राहत मिलने से उनके परिवार ने संतोष जताया है और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा व्यक्त किया है।
फर्जी बैंक खाता और किसान सदस्य दिखाकर लाखों की सरकारी राशि हड़पी

जबलपुर । जबलपुर में सरकारी योजनाओं में सेंध लगाकर लाखों रुपए की राशि हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कृषि विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि रायसेन जिले की बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी ने फर्जी बैंक खाता, नकली किसान सदस्य और नियम विरुद्ध नियुक्तियों के जरिए सरकारी खजाने से 39.67 लाख रुपए हासिल कर लिए। मामले का खुलासा होते ही प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई है तथा कंपनी के 6 डायरेक्टरों और 3 कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया गया है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2022-23 में अनाज उपार्जन कार्यों के लिए पात्रता हासिल करने के उद्देश्य से कंपनी ने कई फर्जी दस्तावेज तैयार किए। सरकारी नियमों के मुताबिक ऐसी संस्थाओं के पास कम से कम 50 लाख रुपए की नकद राशि या क्रेडिट लिमिट होना अनिवार्य है, लेकिन जांच में पाया गया कि कंपनी ने अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत दिखाने के लिए आईसीआईसीआई बैंक का एक ऐसा खाता प्रस्तुत किया, जो वास्तव में उसके नाम पर था ही नहीं। बैंक सत्यापन के दौरान यह फर्जीवाड़ा सामने आ गया। जांच का दायरा बढ़ा तो किसान सदस्यों की सूची भी संदेह के घेरे में आ गई। अधिकारियों ने सूची में दर्ज मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया तो कई ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि वे न तो कंपनी को जानते हैं और न ही उसके सदस्य हैं। कई नामों के साथ पते, शेयर राशि और अन्य जरूरी जानकारियां भी दर्ज नहीं मिलीं। इससे स्पष्ट हुआ कि कागजों में फर्जी सदस्य जोड़कर संस्था को पात्र साबित किया गया और सरकारी लाभ हासिल किया गया। मामले में एक और बड़ा खुलासा कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर हुआ। कंपनी के प्रबंधक मनीष चौरसिया, लेखापाल कमलेश साहू और कंप्यूटर ऑपरेटर नीलेश विश्वकर्मा की नियुक्ति बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के की गई। रिकॉर्ड में न तो बैठक का कोई प्रस्ताव मिला और न ही नियुक्ति की स्वीकृति संबंधी दस्तावेज। कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षरों में भी अंतर पाया गया, जिससे जालसाजी की आशंका और गहरा गई। मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, जबलपुर की रिपोर्ट में सामने आया कि कंपनी ने प्रासंगिक व्यय, हैंडलिंग चार्ज और कमीशन के नाम पर 39 लाख 67 हजार 781 रुपए की सरकारी सहायता राशि प्राप्त की थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह राशि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल की गई। पूरे मामले की शुरुआत किसान मजदूर महासंघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ठाकुर की शिकायत से हुई थी। कलेक्टर के निर्देश पर हुई उच्च स्तरीय जांच ने फर्जीवाड़े की परतें खोल दीं। इसके बाद किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सहायक संचालक रवि कुमार आम्रवंशी ने पाटन थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कंपनी के डायरेक्टर सचिन दुबे, रंजना पाण्डे, संदीप दुबे, अंशुल बर्मन, नेहा पाण्डे और उमा सिंह के साथ प्रबंधक मनीष चौरसिया, लेखापाल कमलेश साहू और कंप्यूटर ऑपरेटर नीलेश विश्वकर्मा को आरोपी बनाया है। फिलहाल आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि सरकारी राशि का उपयोग कहां और कैसे किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
आरबीआई एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक शुरू, ब्याज दरों पर फैसले को लेकर बाजार की निगाहें टिकीं, महंगाई और वैश्विक तनाव बना मुख्य फोकस

नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो गई है, जिसमें देश की मौद्रिक नीति की दिशा तय करने को लेकर गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई प्रकार की चुनौतियों से गुजर रही है और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर दिया है। ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था पर महंगाई और विकास दर दोनों को संतुलित रखने का दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार आरबीआई रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और मौजूदा दरों को यथावत बनाए रखेगा, हालांकि नीति वक्तव्य में अधिक सतर्क रुख देखने को मिल सकता है। इस बैठक पर बाजार और निवेशकों की खास नजर बनी हुई है क्योंकि इससे आने वाले महीनों में ऋण, निवेश और आर्थिक गतिविधियों की दिशा तय होगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को बैठक के बाद नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिसका सीधा असर भारत की महंगाई दर पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें स्थिर नहीं रहती हैं तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर दबाव बढ़ सकता है और महंगाई अनुमान में वृद्धि संभव है। एचएसबीसी और अन्य वैश्विक वित्तीय संस्थानों के विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में आरबीआई ब्याज दरों को स्थिर रखने की रणनीति अपनाएगा, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार आगे चलकर सख्ती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं कुछ रिपोर्टों में यह भी संकेत दिए गए हैं कि बाजार 2026 के अंत तक दरों में हल्की कटौती की संभावना को देख रहा है, हालांकि यह पूरी तरह वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। अर्थशास्त्रियों का यह भी कहना है कि महंगाई का मौजूदा दबाव मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष से जुड़ा हुआ है, न कि मांग में तेजी के कारण। ऐसे में आरबीआई के लिए चुनौती यह होगी कि वह विकास दर को प्रभावित किए बिना मूल्य स्थिरता बनाए रखे। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर लगभग 6.6 से 6.7 प्रतिशत के बीच रह सकती है, बशर्ते वैश्विक तेल कीमतें नियंत्रित रहें।
Engineering Student Thief: ग्वालियर में ‘इंजीनियर चोर गिरोह’ का पर्दाफाश, 94 लाख का माल बरामद

Engineering Student Thief: ग्वालियर। सूने मकानों में चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले एक हाईटेक गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। बता दें कि ग्वालियर के इंदरगंज थाना पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए करीब 94 लाख 25 हजार रुपए का चोरी किया हुआ माल बरामद किया है। इंजीनियरिंग छात्र ने बनाया गिरोह पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह का मास्टरमाइंड विवेक प्रजापति कंप्यूटर इंजीनियरिंग का छात्र रहा है। कम समय में ज्यादा पैसा कमाने की चाह में उसने अपराध का रास्ता चुना और एक संगठित गिरोह तैयार कर लिया। बताया जा रहा है कि गिरोह के सदस्य तकनीक का इस्तेमाल कर चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। भगवान के चित्र वाले दुपट्टे को लेकर विवाद, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज इंस्टाग्राम कॉल पर की प्लानिंग पुलिस का कहना है कि आरोपी सामान्य मोबाइल कॉल और मैसेजिंग एप के बजाय इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट फीचर का उपयोग करते थे, जिससे उनकी एक्टिविटी को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था। गिरफ्तारी के बाद भी मुख्य आरोपी विवेक करीब 48 घंटे तक पुलिस को गुमराह करता रहा, लेकिन सख्त पूछताछ में आखिरकार पूरा नेटवर्क सामने आ गया। बीहड़ में छिपा रखा था चोरी का माल 5 मई 2026 को इंदरगंज क्षेत्र में रहने वाले अजय शंकर मित्तल के सूने मकान में चोरी की घटना के बाद पुलिस जांच में जुटी थी। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस पनिहार टोल प्लाजा के आगे बीहड़ क्षेत्र में पहुंची, जहां चोरी का माल जमीन में गाड़कर और पत्थरों के नीचे छिपाकर रखा गया था। दिनेश मकवाना आत्महत्या केस में CBI की एंट्री: परिवार से 3 घंटे पूछताछ, दस्तावेजों की जांच शुरू 300 ग्राम सोना और 14.5 किलो चांदी जब्त सीएसपी रोबिन जैन ने बताया कि आरोपियों के कब्जे से 300 ग्राम सोना, साढ़े 14 किलो चांदी, नकदी और चोरी के पैसों से खरीदी गई आई-20 कार बरामद गई है। मामले में नाबालिग आरोपी सहित चोरी का माल खरीदने वाले सुनार और अन्य सहयोगियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है।
अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के बावजूद कीमती धातुओं में गिरावट, MCX पर चांदी 1,300 रुपए तक फिसली

नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद कीमती धातुओं के बाजार में बुधवार को कमजोरी का रुख देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता जरूर बढ़ाई है, लेकिन इसका सीधा फायदा सोने और चांदी को नहीं मिल सका। इसके विपरीत घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में दोनों धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव और गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच सतर्कता का माहौल बन गया है। सोने की कीमतों में शुरुआत में मामूली मजबूती देखी गई, लेकिन कारोबार आगे बढ़ने के साथ इसमें दबाव बढ़ता गया। अगस्त डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद स्तर की तुलना में हल्की बढ़त के साथ खुला, लेकिन जल्द ही इसमें गिरावट दर्ज की गई और यह नीचे फिसल गया। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई बढ़ने की आशंका ने ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावना को मजबूत किया है, जिससे सोने में निवेश की मांग सीमित हो गई है। चांदी के बाजार में अधिक अस्थिरता देखने को मिली। जुलाई वायदा चांदी की कीमतों में करीब 1,300 रुपए प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई, जो बाजार में कमजोर धारणा को दर्शाती है। कारोबार के दौरान चांदी ने शुरुआती स्तर पर स्थिरता दिखाई, लेकिन बाद में बिकवाली दबाव बढ़ने से यह नीचे आ गई। विश्लेषकों का कहना है कि चांदी की चाल फिलहाल सीमित दायरे में बनी हुई है, लेकिन वैश्विक संकेतों के कारण इसमें तेज उतार-चढ़ाव की संभावना बनी रह सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना और चांदी दोनों में कमजोरी का रुख देखने को मिला। स्पॉट गोल्ड और फ्यूचर्स दोनों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी की कीमतें भी दबाव में रहीं। पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने वैश्विक महंगाई की चिंता को बढ़ा दिया है, लेकिन इसके बावजूद निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर अपेक्षित रूप से आकर्षित नहीं हो पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक संकेतों में अनिश्चितता और ब्याज दरों की दिशा को लेकर असमंजस माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है तो कीमतों में सुधार देखने को मिल सकता है, अन्यथा दबाव बना रह सकता है। निवेशकों के लिए फिलहाल बाजार में सतर्कता बनाए रखना ही बेहतर रणनीति मानी जा रही है क्योंकि किसी भी दिशा में तेज उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।
बुधवार को महाकाल मंदिर में दिव्यता का अद्भुत नजारा, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

उज्जैन । धार्मिक नगरी उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में प्रातःकालीन भस्म आरती के लिए मंदिर के कपाट खुलते ही सबसे पहले वीरभद्र जी का पूजन किया गया। स्वस्तिवाचन और विधिवत अनुमति के बाद गर्भगृह के द्वार खोले गए। पुजारियों ने बाबा महाकाल का पूर्व शृंगार उतारकर वैदिक परंपरा के अनुसार पूजन-अर्चन की प्रक्रिया प्रारंभ की। पंचामृत अभिषेक के बाद हुआ विशेष शृंगारभगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके पश्चात कर्पूर आरती संपन्न हुई। भांग, चंदन, सिंदूर और दिव्य आभूषणों से बाबा महाकाल का भगवान गणेश के स्वरूप में मनोहारी शृंगार किया गया, जिसने भक्तों को विशेष आध्यात्मिक अनुभूति कराई। रजत मुकुट और पुष्पमालाओं से अलंकृत हुए महाकालशृंगार के दौरान बाबा महाकाल को शेषनाग युक्त रजत मुकुट, रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं तथा सुगंधित पुष्पों से निर्मित विशेष मालाएं धारण कराई गईं। गर्भगृह का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। नंदी महाराज का भी हुआ पूजनभस्म आरती से पूर्व नंदी मंडप में नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल को फल, मिठाई और ड्रायफ्रूट का भोग अर्पित किया गया। महा निर्वाणी अखाड़े ने अर्पित की भस्मपरंपरा के अनुसार महा निर्वाणी अखाड़ा की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के पश्चात भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। श्रद्धालुओं ने प्राप्त किया आशीर्वादभस्म आरती में देश-विदेश से आए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और बाबा महाकाल के दिव्य गणेश स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर सुबह से ही भक्तिमय वातावरण से गुंजायमान रहा।
भारतीय अर्थव्यवस्था को मिला बूस्ट: मई में सेवा क्षेत्र में मजबूत विस्तार, विदेशी मांग और नए कारोबार ने बढ़ाई रफ्तार

नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सेवा क्षेत्र से एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। नए कारोबार में लगातार बढ़ोतरी और डिजिटल, आईटी, ई-कॉमर्स तथा लॉजिस्टिक्स सेक्टर में बढ़ती मांग के चलते मई में भारत के सेवा क्षेत्र का परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) बढ़कर 59.8 पर पहुंच गया है, जो अप्रैल में 58.8 था। यह वृद्धि देश के सेवा आधारित उद्योगों में मजबूत विस्तार और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को दर्शाती है। एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई के ताजा आंकड़ों के अनुसार, माल ढुलाई, डिजिटल सेवाओं, मनोरंजन, ई-कॉमर्स और आईटी सेवाओं की मांग में लगातार वृद्धि दर्ज की गई, जिसके कारण कंपनियों के नए ऑर्डरों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। इस बढ़त के चलते सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने अपनी कारोबारी गतिविधियों को तेज किया और उत्पादन क्षमता में विस्तार किया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि नए कारोबार में वृद्धि के साथ-साथ रोजगार के अवसरों में भी सुधार हुआ है। सेवा क्षेत्र की कंपनियों ने मई में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का सिलसिला जारी रखा, जिससे यह संकेत मिलता है कि मांग में बढ़ोतरी के चलते कंपनियां विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। हालांकि, सर्वे में शामिल अधिकांश कंपनियों ने अपने स्टाफ स्तर में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया, लेकिन एक छोटे हिस्से ने नई भर्तियां की हैं। अर्थशास्त्रियों के अनुसार, भारत के सेवा क्षेत्र में लागत का दबाव अभी भी बना हुआ है, लेकिन मई में इसमें हल्की कमी देखी गई है। यह पिछले चार महीनों में सबसे निचला स्तर है। लागत दबाव में कमी आने से कंपनियों पर सेवाओं की कीमत बढ़ाने का दबाव भी कम हुआ है। इसी कारण मई में सेवाओं की कीमतों में वृद्धि की गति भी जनवरी के बाद सबसे धीमी रही। एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी के अनुसार, मई में सेवा क्षेत्र में विस्तार का मुख्य कारण नए ऑर्डरों की लगातार बढ़ती संख्या रही। उन्होंने कहा कि घरेलू मांग के साथ-साथ विदेशी बाजारों से भी सेवाओं की मांग में सुधार देखने को मिला है। अप्रैल में आई गिरावट के बाद निर्यात आधारित सेवाओं में अच्छी रिकवरी दर्ज की गई, जिससे कुल कारोबार को मजबूती मिली। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि भारत की सेवाओं की मांग कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मजबूत रही, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, हांगकांग, मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। हालांकि, विदेशी मांग की वृद्धि दर कुल घरेलू बिक्री की तुलना में थोड़ी कम रही और यह 2025 के औसत से नीचे रही, फिर भी इसमें स्थिरता बनी रही। कुल मिलाकर, सेवा क्षेत्र में इस तेजी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। आईटी और डिजिटल सेवाओं की मजबूत मांग, ई-कॉमर्स का विस्तार और वैश्विक स्तर पर बढ़ती सेवाओं की जरूरत भारत के सेवा उद्योग को नई ऊंचाइयों की ओर ले जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले महीनों में रोजगार और निवेश दोनों में और अधिक सुधार देखने को मिल सकता है।
भगवान के चित्र वाले दुपट्टे को लेकर विवाद, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

उज्जैन । जीतू पटवारी मंगलवार को इंदौर से मंदसौर जाते समय उज्जैन जिले के उन्हेल क्षेत्र में आयोजित किसान कांग्रेस के सम्मान कार्यक्रम में रुके थे। इसी कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक किसान उन्हें भगवान श्री राधा-कृष्ण की तस्वीर वाला दुपट्टा भेंट करता दिखाई देता है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि पटवारी ने दुपट्टा लेने के बाद पहले से गले में मौजूद एक अन्य धार्मिक दुपट्टा भी उतार दिया और दोनों दुपट्टों को नीचे रख या फेंक दिया। बीजेपी ने साधा निशानावीडियो सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। बीजेपी के प्रदेश मीडिया प्रभारी विवेक गुप्ता ने आरोप लगाया कि यह व्यवहार किसानों और सनातन परंपराओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं को धार्मिक प्रतीकों और लोगों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। किसानों और धार्मिक भावनाओं के अपमान का आरोपबीजेपी नेताओं का कहना है कि जिस किसान ने सम्मान स्वरूप धार्मिक दुपट्टा भेंट किया था, उसके साथ ऐसा व्यवहार अनुचित है। पार्टी ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से स्पष्टीकरण की मांग की है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पर भी बोले थे पटवारीवायरल वीडियो में पटवारी किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव पर भी टिप्पणी करते नजर आते हैं। इसी दौरान दुपट्टे से जुड़ा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हुआ, जिसे लेकर अब राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजारफिलहाल कांग्रेस की ओर से इस वीडियो और लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे मामलों में वीडियो की पूरी परिस्थितियों और संदर्भ को समझना महत्वपूर्ण होता है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि दुपट्टे को जानबूझकर फेंका गया या कार्यक्रम की भीड़भाड़ के दौरान उसे किसी सहयोगी को देने का प्रयास किया गया। इस संबंध में अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। राजनीतिक विवाद हुआ तेजमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेतृत्व के बीच पहले से चल रही बयानबाजी के बीच यह नया विवाद प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस की प्रतिक्रिया और वीडियो की विस्तृत जांच के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।