RBI MPC बैठक के बीच SBI चेयरमैन का बड़ा बयान, कहा- फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव न होना अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बीच भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने ब्याज दरों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में ब्याज दरों में किसी प्रकार का बदलाव न होना अर्थव्यवस्था के लिए अधिक लाभदायक रहेगा। उनके अनुसार इस समय नीतिगत दरों में स्थिरता बनाए रखने से आर्थिक गतिविधियों को संतुलित समर्थन मिलेगा और विकास की रफ्तार भी बनी रहेगी। बाजार की सामान्य धारणा भी यही संकेत देती है कि आरबीआई फिलहाल रेपो रेट में किसी बड़े बदलाव से बच सकता है। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएस शेट्टी ने कहा कि महंगाई और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाए रखना केंद्रीय बैंक की प्रमुख जिम्मेदारी होती है। ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों में ब्याज दरों को स्थिर रखना एक व्यावहारिक कदम माना जा सकता है। उनका मानना है कि स्थिर ब्याज दरें उद्योग, कारोबार और उपभोक्ताओं को स्पष्ट संकेत देती हैं, जिससे निवेश और ऋण गतिविधियों को निरंतरता मिलती है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था इस समय सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और इसे स्थिर नीतिगत समर्थन की आवश्यकता है। एसबीआई चेयरमैन ने निवेशकों को सलाह देते हुए कहा कि शेयर बाजार में होने वाले रोजाना उतार-चढ़ाव को लेकर अधिक चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक ताकत उसकी दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता में निहित है। बैंकिंग क्षेत्र में सुधार, डिजिटल क्रांति, वित्तीय समावेशन और तेजी से विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की क्षमता रखता है। उनका कहना है कि निवेशकों को अल्पकालिक बाजार गतिविधियों के बजाय दीर्घकालिक आर्थिक संभावनाओं पर ध्यान देना चाहिए। सीएस शेट्टी ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी समस्याएं और तकनीकी परिवर्तन जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत एक स्थिर और भरोसेमंद अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक सुधारों और निवेश के अनुकूल वातावरण ने भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बना दिया है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने भारत की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) आज देश की सबसे बड़ी तकनीकी सफलताओं में शामिल है। हर महीने अरबों डिजिटल लेनदेन यूपीआई के माध्यम से किए जा रहे हैं, जिससे नकदी पर निर्भरता कम हुई है और भुगतान प्रणाली अधिक तेज, सुरक्षित तथा पारदर्शी बनी है। उन्होंने बताया कि एसबीआई की डिजिटल सेवाओं की सफलता उसकी मजबूत तकनीकी संरचना और ग्राहकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती है। उन्होंने वित्तीय समावेशन में जनधन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार ‘जेएएम ट्रिनिटी’ ने करोड़ों लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने में अहम योगदान दिया है। इसके साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली ने सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र लोगों तक पहुंचाने में मदद की है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और विभिन्न योजनाओं में होने वाली संभावित अनियमितताओं में कमी आई है। भारत की भविष्य की विकास यात्रा पर बात करते हुए सीएस शेट्टी ने कहा कि आने वाले वर्षों में देश को बड़े पैमाने पर निवेश की आवश्यकता होगी। उन्होंने बताया कि बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, ऊर्जा परिवर्तन, शहरी विकास, एमएसएमई और नवाचार जैसे क्षेत्रों में विशाल निवेश अवसर मौजूद हैं। उनके अनुसार ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और प्रतिस्पर्धी विनिर्माण क्षेत्र भारत की आर्थिक प्रगति के प्रमुख आधार बनेंगे। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर भी उन्होंने सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। उनका मानना है कि भारत एआई तकनीक के उपयोग और विस्तार के मामले में दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक बन सकता है। उन्होंने बताया कि एसबीआई पहले से कई बैंकिंग सेवाओं में एआई आधारित प्रणालियों का उपयोग कर रहा है और इसके लिए जिम्मेदार तथा सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित करने हेतु विशेष ढांचा भी विकसित किया गया है। कर्ज की मांग के संबंध में उन्होंने कहा कि छोटे और मध्यम उद्योगों सहित विभिन्न क्षेत्रों में ऋण की मांग मजबूत बनी हुई है। बैंक लगातार उद्यमियों और व्यवसायों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही बैंक विलय एवं अधिग्रहण से जुड़े वित्तपोषण के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत की मजबूत आर्थिक नींव, डिजिटल प्रगति और निवेश क्षमता देश को वैश्विक अर्थव्यवस्था में और अधिक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने में मदद करेगी।
CYBER TEHSIL 2.0: अब सरकारी सेवाएं होंगी और आसान, CM बोले -साइबर तहसील 2.0 से मजबूत हो रहा ई-गवर्नेंस

CYBER TEHSIL 2.0: भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी सेवाओं को आसान और पारदर्शी बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में शुरू की गई साइबर तहसील 2.0 पहल इसी बदलाव की एक अहम कड़ी बनकर उभर रही है। इसका उद्देश्य लोगों को राजस्व विभाग से जुड़ी सेवाएं घर बैठे उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें छोटे-छोटे कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें। EPFO Update: मार्च खत्म हुए दो महीने बीते, पीएफ खाते में कब आएगा 8.25% ब्याज? जानिए ताजा अपडेट अब राजस्व संबंधी प्रक्रिया होंगी ऑनलाइन सायबर तहसील 2.0 के तहत कई राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन किया जा रहा है जिनमें नामांतरण और बंटवारा भी शामिल है। बताया जा रहा है कि इससे केवल कामकाज की रातफ्तार ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि लोगों को भी समय पर सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। 90% से कम ई-अटेंडेंस तो नहीं होगा तबादला: नई नीति के तहत वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश डिजिटल व्यवस्था से बचेगा का पैसा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कहना है कि प्रदेश में तकनीक का उपयोग केवल सुविधाएं बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच भरोसा मजबूत करने के लिए भी किया जा रहा है। साथ ही इस डिजिटल व्यवस्था से लोगों का समय और पैसा दोनों बचेंगे। जन्मदिन पार्टी में खाने के ऑर्डर को लेकर मारपीट: शिवपुरी के होटल में दो गुट भिड़े, मैनेजर घायल MP में डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक सेवाओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए। साइबर तहसील 2.0 इसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है, जो मध्य प्रदेश को डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के साथ-साथ सुशासन को भी नई मजबूती देगा।
MP ALCOHOL DISPUTE: शराब के लिए विवाद ने लिया हिंसक रूप, एक आरोपी पुलिस की गिरफ्त में

MP ALCOHOL DISPUTE: मध्यप्रदेश । सागर जिले के गोपालगंज थाना क्षेत्र में खेल परिसर के सामने एक युवक पर चाकू से जानलेवा हमला करने वाले आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी से पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया, जबकि मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। घटना 1 जून की रात की है, जब फरियादी अतुल मिश्रा अपने साथियों के साथ मेला ग्राउंड स्थित खेल परिसर के पास मौजूद था। इसी दौरान आरोपी अंकित दक्ष और उसका साथी बिट्टू प्रजापति वहां पहुंचे और शराब पीने के लिए पैसे मांगने लगे। जब पीड़ित ने पैसे देने से इनकार किया, तो दोनों आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी। CYBER TEHSIL 2.0: अब सरकारी सेवाएं होंगी और आसान, CM बोले -साइबर तहसील 2.0 से मजबूत हो रहा ई-गवर्नेंस विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने धारदार हथियार से युवक पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल युवक को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार किया गया। घटना की शिकायत मिलने के बाद गोपालगंज पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित की और लगातार तलाश जारी रखी। इसी कार्रवाई के तहत मंगलवार को मुख्य आरोपी अंकित दक्ष को गिरफ्तार कर लिया गया। EPFO Update: मार्च खत्म हुए दो महीने बीते, पीएफ खाते में कब आएगा 8.25% ब्याज? जानिए ताजा अपडेट थाना प्रभारी घनश्याम शर्मा ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई है और न्यायालय में पेश किया गया है। घटना में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश भी तेज कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
अमेरिका की शुल्क नीति पर उठे सवाल, विशेषज्ञों ने भारत-चीन-रूस समीकरण को बताया उभरती चुनौती

नई दिल्ली। वैश्विक राजनीति और व्यापारिक संबंधों में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की टैरिफ नीति एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रशासन द्वारा अपनाई गई संरक्षणवादी आर्थिक नीतियों को लेकर दुनिया भर में बहस जारी है। इसी क्रम में यह तर्क सामने आ रहा है कि अमेरिका द्वारा भारत और चीन जैसे बड़े एशियाई देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की रणनीति अनजाने में उन देशों को एक-दूसरे के करीब ला सकती है, जिन्हें अब तक कई मुद्दों पर प्रतिस्पर्धी या विरोधी माना जाता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक शक्ति संतुलन के इस दौर में आर्थिक दबाव की नीतियां कभी-कभी ऐसे परिणाम भी पैदा कर देती हैं, जिनकी पहले कल्पना नहीं की गई होती। अमेरिका की ओर से विभिन्न देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणाओं ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में नई चिंताएं पैदा की हैं। भारत और चीन दोनों दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में यदि दोनों देशों को समान प्रकार के आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है, तो उनके बीच व्यापारिक सहयोग और संवाद बढ़ने की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सहित कई जटिल मुद्दे मौजूद हैं, फिर भी आर्थिक हितों के आधार पर सहयोग की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। पिछले कुछ समय में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत, चीन और रूस की सक्रिय भागीदारी ने भी वैश्विक रणनीतिक समीकरणों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। कई विश्लेषकों का मानना है कि बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ती दुनिया में क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियां अपने-अपने हितों के आधार पर नए साझेदारी मॉडल तलाश रही हैं। इसी संदर्भ में रूस-भारत-चीन (RIC) समूह को लेकर भी चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यह मंच किसी बड़े रणनीतिक गठबंधन का रूप ले लेगा, लेकिन तीनों देशों के बीच संवाद और सहयोग के कुछ क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ी हैं। दूसरी ओर, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सक्रिय क्वाड (QUAD) समूह को लेकर भी विभिन्न प्रकार के आकलन सामने आते रहते हैं। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के इस समूह का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना बताया जाता है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भारत अपनी विदेश नीति में रणनीतिक स्वायत्तता को प्राथमिकता देता है और वह किसी भी मंच को किसी एक देश के खिलाफ गठबंधन के रूप में नहीं देखना चाहता। यही कारण है कि भारत एक तरफ क्वाड में सक्रिय रहता है, वहीं दूसरी ओर ब्रिक्स, एससीओ और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भी अपनी भूमिका निभाता है। सितंबर में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर भी वैश्विक स्तर पर नजरें टिकी हुई हैं। ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, वित्तीय सहयोग और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों जैसे विषयों पर चर्चा लंबे समय से होती रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सदस्य देश आपसी आर्थिक सहयोग को और मजबूत करते हैं तो इससे डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में कुछ कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि डॉलर अभी भी वैश्विक वित्तीय प्रणाली की प्रमुख मुद्रा बना हुआ है और निकट भविष्य में उसकी स्थिति में किसी बड़े बदलाव की संभावना सीमित मानी जाती है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का कहना है कि वर्तमान दौर में किसी भी वैश्विक शक्ति के लिए केवल आर्थिक दबाव के जरिए अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को लागू करना आसान नहीं रह गया है। दुनिया तेजी से बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां देश अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर अलग-अलग मंचों पर सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों करते हैं। भारत भी इसी संतुलित दृष्टिकोण का पालन करता रहा है, जिसमें अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान और अन्य देशों के साथ संबंधों को समान महत्व दिया जाता है। फिलहाल यह स्पष्ट है कि वैश्विक व्यापार युद्ध, टैरिफ नीतियां और बदलते भू-राजनीतिक समीकरण आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करते रहेंगे। भारत, चीन और रूस के बीच बढ़ता संवाद, ब्रिक्स की सक्रियता और क्वाड की भूमिका जैसे विषय भविष्य की वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण बने रहेंगे। हालांकि इन सभी संभावनाओं का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में देशों के ठोस कदमों और नीतिगत निर्णयों पर निर्भर करेगा।
सागर में रेलवे ट्रैक पर मिला महिला का क्षत-विक्षत शव, ट्रेन की चपेट में आने की आशंका

मध्यप्रदेश । सागर जिले में मंगलवार को उस समय सनसनी फैल गई जब सागर-बीना रेलवे ट्रैक पर 25 नंबर फाटक के पास एक महिला का शव दो टुकड़ों में पड़ा मिला। घटना की जानकारी सबसे पहले गैंगमैन को हुई, जिसके बाद तुरंत जीआरपी को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही जीआरपी मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान पाया गया कि महिला का शव ट्रेन की चपेट में आने से गंभीर रूप से क्षत-विक्षत हो गया था और उसका सिर धड़ से अलग हो गया था। शव को देखकर यह आशंका जताई जा रही है कि मौत ट्रेन हादसे में हुई है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। घटनास्थल पर किसी भी प्रकार का पहचान दस्तावेज या मोबाइल फोन नहीं मिला, जिससे मृतका की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है। जीआरपी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्टों से मिलान कर महिला की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। जीआरपी थाना प्रभारी एचएल चौधरी के अनुसार, प्राथमिक जांच में मामला ट्रेन से दुर्घटनावश मौत का प्रतीत हो रहा है, लेकिन वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस ने कहा है कि सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच जारी है।
EPFO Update: मार्च खत्म हुए दो महीने बीते, पीएफ खाते में कब आएगा 8.25% ब्याज? जानिए ताजा अपडेट

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों खाताधारकों को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घोषित ब्याज राशि का इंतजार है। मार्च में ब्याज दर तय किए जाने के बावजूद जून की शुरुआत तक खातों में ब्याज जमा नहीं होने से कई कर्मचारियों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पीएफ खाते में ब्याज कब आएगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें चिंता की कोई बात नहीं है, क्योंकि ब्याज दर घोषित होने और उसे खातों में जमा किए जाने के बीच कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। ईपीएफओ ने मार्च 2026 की शुरुआत में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर बनाए रखने का फैसला किया था। यह निर्णय केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक के बाद लिया गया था। इसके बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से इस संबंध में जानकारी भी साझा की गई थी। हालांकि ब्याज दर की घोषणा के बाद इसे लागू करने के लिए केंद्र सरकार की औपचारिक अधिसूचना जारी होना आवश्यक होता है। इसी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ईपीएफओ अपने करोड़ों सदस्यों के खातों में ब्याज की राशि जमा करता है। देशभर में लगभग सात करोड़ से अधिक पीएफ खाताधारक हैं, जिनकी नजर हर साल अपने खाते में जमा होने वाले ब्याज पर रहती है। वित्त वर्ष समाप्त होने के दो महीने बाद भी ब्याज राशि जमा नहीं होने से कर्मचारियों के बीच चर्चा बढ़ गई है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि जब ब्याज दर मार्च में ही तय हो चुकी है तो राशि अब तक खातों में क्यों नहीं पहुंची। विशेषज्ञों के अनुसार ब्याज क्रेडिट करने से पहले सरकार की मंजूरी, तकनीकी अपडेट और खातों का सत्यापन जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं, जिनमें कुछ समय लगना सामान्य बात है। वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों के अनुभव को देखें तो ईपीएफओ आमतौर पर जून या जुलाई के दौरान खातों में ब्याज की राशि जमा करता है। पहले यह प्रक्रिया सितंबर या अक्टूबर तक चलती थी, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें तेजी आई है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि इस वर्ष भी सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद जून या जुलाई के दौरान करोड़ों खाताधारकों के खातों में ब्याज की राशि दिखाई देने लगेगी। हालांकि अंतिम समयसीमा को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ईपीएफओ सदस्य अपने खाते में ब्याज जमा हुआ है या नहीं, इसकी जानकारी घर बैठे मोबाइल फोन के जरिए भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उमंग ऐप एक आसान विकल्प माना जाता है। उपयोगकर्ता सबसे पहले अपने मोबाइल फोन में उमंग ऐप डाउनलोड कर सकते हैं और मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। इसके बाद ईपीएफओ सेवाओं के विकल्प में जाकर ‘व्यू पासबुक’ पर क्लिक करना होगा। ओटीपी सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सदस्य अपने खाते का बैलेंस और ब्याज से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। इसके अलावा ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी पीएफ खाते का विवरण देखा जा सकता है। सदस्य पोर्टल पर लॉग इन करने के बाद ‘मेंबर पासबुक’ विकल्प पर क्लिक करके अपने खाते में जमा राशि, मासिक योगदान और ब्याज संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यदि ब्याज की राशि खाते में जमा कर दी गई होगी तो वह पासबुक में दिखाई देने लगेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएफ खाताधारकों को फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है। ब्याज राशि में किसी प्रकार की कटौती या देरी की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद ईपीएफओ निर्धारित प्रक्रिया के तहत सभी पात्र खातों में ब्याज जमा करेगा। ऐसे में कर्मचारियों को समय-समय पर अपनी पासबुक जांचते रहना चाहिए और किसी भी अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
90% से कम ई-अटेंडेंस तो नहीं होगा तबादला: नई नीति के तहत वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश

मध्यप्रदेश । नई तबादला नीति के तहत शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी क्रम में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि केवल उन्हीं शिक्षकों को ट्रांसफर का लाभ मिलेगा, जिनकी ऑनलाइन ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत या उससे अधिक होगी। विभाग ने इस बार पात्रता तय करने के लिए अप्रैल 2026 तक के ई-अटेंडेंस आंकड़ों को आधार बनाया है। मई और जून में ग्रीष्मकालीन अवकाश होने के कारण इन महीनों की उपस्थिति को शामिल नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य उपस्थिति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। नई व्यवस्था के तहत यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन शिक्षकों की संविलियन सेवा अवधि तीन वर्ष पूर्ण नहीं हुई है, उन्हें भी स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि केवल पात्र और निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले शिक्षक ही ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकें। शिवपुरी जिला शिक्षा अधिकारी विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि 90 प्रतिशत से कम ई-अटेंडेंस वाले शिक्षकों की सूची तैयार कर पोर्टल पर अपडेट की जा रही है। विभाग द्वारा सभी आंकड़ों का मिलान किया जा रहा है ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न रहे। अधिकारियों का कहना है कि नई नीति का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और उपस्थिति को मजबूत करना है। इससे स्कूलों में शिक्षण कार्य की निरंतरता बनी रहेगी और अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी।
शूटिंग के दौरान गई जान: केरल की खदान में डूबे दिल्ली के मॉडल दिव्यांशु जोशी, दोस्तों के सामने हुआ हादसा

नई दिल्ली। दिल्ली के युवा मॉडल दिव्यांशु जोशी की केरल में एक दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। जानकारी के अनुसार वह एक विज्ञापन शूट के सिलसिले में केरल गए हुए थे, जहां एक बंद पड़ी खदान में फोटो और वीडियो शूटिंग के दौरान पानी में डूबने से उनकी जान चली गई। इस घटना के बाद मॉडलिंग और फैशन जगत में शोक की लहर फैल गई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की और मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसे के समय दिव्यांशु के साथ उनकी शूटिंग टीम और एक करीबी दोस्त भी मौजूद थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार दिव्यांशु जोशी एक कपड़ों के ब्रांड के कमर्शियल शूट के लिए कोच्चि पहुंचे थे। शूटिंग का एक हिस्सा एर्नाकुलम जिले के शांत पेट्टमाला क्षेत्र में स्थित एक पुरानी और बंद पड़ी खदान के आसपास होना था। बताया जा रहा है कि शूटिंग पूरी करने के बाद टीम वहां लोकेशन का निरीक्षण कर रही थी। इसी दौरान दिव्यांशु पानी से भरी खदान के भीतर उतरे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहले वह सुरक्षित बाहर आ गए थे, लेकिन कुछ समय बाद दोबारा पानी में उतर गए। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गहरे पानी में चले गए। हादसे के वक्त उनका एक दोस्त वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था। जब दिव्यांशु पानी में डूबने लगे तो उसने तुरंत आसपास मौजूद लोगों को मदद के लिए आवाज लगाई। स्थानीय लोगों ने बिना देर किए प्रशासन और बचाव दल को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही अग्निशमन एवं बचाव विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया। काफी प्रयासों के बाद बचावकर्मियों ने लगभग 30 फीट की गहराई से दिव्यांशु को बाहर निकाला। उन्हें तत्काल पेरुम्बावूर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिस खदान में यह हादसा हुआ, वह करीब दो दशक से अधिक समय से बंद पड़ी हुई है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक यह इलाका पहले भी कई हादसों के कारण संवेदनशील और खतरनाक माना जाता रहा है। खदान के कुछ हिस्सों में पानी की गहराई लगभग 100 फीट तक बताई जाती है। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों पहले यहां दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा गेट लगाया गया था, लेकिन इसके बावजूद लोग समय-समय पर वहां पहुंच जाते हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि शूटिंग के लिए संबंधित स्थान पर किसी प्रकार की औपचारिक अनुमति लिए जाने की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। जांच के दौरान सामने आया है कि दिव्यांशु और उनकी टीम विज्ञापन शूट से जुड़े कार्य के सिलसिले में उस स्थान पर पहुंचे थे। प्राथमिकी में दर्ज विवरण के अनुसार टीम ने पहले लोकेशन का निरीक्षण किया और इसके बाद कुछ दृश्य रिकॉर्ड करने की तैयारी की जा रही थी। बताया गया कि टीम के सदस्यों ने यह भी सुनिश्चित किया था कि दिव्यांशु को तैरना आता है। हालांकि पानी की वास्तविक गहराई और वहां मौजूद जोखिम का सही आकलन नहीं हो सका, जिसके कारण यह दुखद घटना घट गई। पुलिस ने मृतक के साथ मौजूद लोगों के बयान दर्ज कर लिए हैं और घटनास्थल से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा केवल दुर्घटना था या सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी इसमें शामिल रही। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस दुखद हादसे ने एक बार फिर खतरनाक और असुरक्षित स्थानों पर होने वाली शूटिंग को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक सावधानियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अन्नपूर्णा योजना की पहली किस्त आज से जारी, लाखों महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचेंगे 3 हजार रुपये

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद चुनावी वादों को पूरा करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई अन्नपूर्णा योजना की पहली किस्त बुधवार से जारी की जा रही है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि योजना के तहत पात्र महिलाओं के आधार से जुड़े बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से 3,000 रुपये की राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सरकार का दावा है कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। सरकारी अधिकारियों के अनुसार अन्नपूर्णा योजना का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है, जिन्हें घरेलू खर्च, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहयोग की आवश्यकता होती है। सरकार का मानना है कि नियमित आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं की वित्तीय भागीदारी बढ़ेगी और वे अपने परिवार के आर्थिक निर्णयों में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी। योजना के तहत राशि सीधे बैंक खातों में भेजे जाने से पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता या बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाएगी। योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। संबंधित विभागों को लाभार्थियों के दस्तावेजों की जांच, सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी व्यवस्था को मजबूत किया गया है ताकि लाभार्थियों के खातों में राशि समय पर और बिना किसी बाधा के पहुंच सके। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी, जिससे योजना का लाभ सीधे पात्र महिलाओं तक पहुंचेगा। अन्नपूर्णा योजना के लिए पात्रता के स्पष्ट मानदंड निर्धारित किए गए हैं। इस योजना का लाभ 25 से 60 वर्ष आयु वर्ग की उन महिलाओं को मिलेगा जो आयकर दाता नहीं हैं। इसके अलावा स्थायी सरकारी नौकरी करने वाली महिलाएं, केंद्र या राज्य सरकार से नियमित वेतन प्राप्त करने वाली महिलाएं तथा पेंशनधारक महिलाएं इस योजना के दायरे में शामिल नहीं होंगी। सरकार का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं तक सहायता पहुंचाना है, ताकि सीमित आय वाले परिवारों को कुछ राहत मिल सके। योजना के क्रियान्वयन को आसान बनाने के लिए पहले से संचालित लक्ष्मी भंडार योजना के लाभार्थियों को स्वतः अन्नपूर्णा योजना में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। इससे लाखों महिलाओं को दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और वे सीधे नई योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगी। वहीं जिन महिलाओं का नाम पहले की किसी योजना में शामिल नहीं है, उनके लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। आवेदन जमा होने के बाद अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों की जांच और पात्रता सत्यापन किया जाएगा, जिसके बाद लाभार्थियों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजनाएं परिवारों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसी योजनाओं से महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ती है और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहन मिलता है। नियमित नकद सहायता से घरेलू खर्चों को संतुलित करने में मदद मिलती है और महिलाओं के आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। उल्लेखनीय है कि देश में पहले से अन्नपूर्णा नाम की एक योजना वरिष्ठ नागरिकों को खाद्यान्न सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित होती रही है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों में भी इसी नाम से अलग-अलग कल्याणकारी योजनाएं लागू हैं। पश्चिम बंगाल की अन्नपूर्णा योजना का स्वरूप अलग है और इसका मुख्य लक्ष्य महिलाओं को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता प्रदान करना है। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से लाखों महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा का नया आधार मिलेगा और उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में इस योजना के प्रभाव का आकलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इसमें और सुधार भी किए जा सकते हैं।
पिपरसमा मंडी के बाहर सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली से जाम, प्याज की भारी आवक से 3 घंटे ठप रहा रास्ता

मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले की पिपरसमा अनाज मंडी के बाहर बुधवार को प्याज की भारी आवक के चलते सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मुख्य मार्ग पर करीब तीन से चार किलोमीटर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। इस कारण किसान, राहगीर और अन्य वाहन चालक घंटों तक फंसे रहे। जानकारी के अनुसार, मंडी में प्याज की आवक सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रही। बड़ी संख्या में किसान अपनी फसल लेकर पहुंचे, लेकिन पर्याप्त व्यवस्थाओं की कमी के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को सड़क पर ही खड़ा करना पड़ा। इससे मंडी के बाहर मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह रुक गया और स्थिति धीरे-धीरे गंभीर जाम में बदल गई। जाम के कारण मंडी में होने वाली प्याज की नीलामी (डाक) भी प्रभावित हुई। कई किसानों ने मंडी प्रशासन की अव्यवस्था पर नाराजगी जताई और कहा कि हर साल आवक बढ़ने पर इसी तरह की स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया जाता। करीब तीन घंटे तक चले इस जाम में सैकड़ों वाहन फंसे रहे और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गर्मी और भीड़भाड़ के बीच लोग लंबे समय तक सड़क पर ही फंसे रहे। मंडी सचिव बालेश शुक्ला ने बताया कि प्याज की आवक असामान्य रूप से अधिक होने के कारण यह स्थिति बनी। कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के सड़क पर खड़े होने से जाम बढ़ गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मंडी का दूसरा गेट खोलकर वाहनों को अंदर प्रवेश दिलाया गया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हो सका। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने इसके लिए अतिरिक्त व्यवस्था पर विचार किया जाएगा।