जन्मदिन पार्टी में खाने के ऑर्डर को लेकर मारपीट: शिवपुरी के होटल में दो गुट भिड़े, मैनेजर घायल

मध्यप्रदेश । शिवपुरी शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित होटल ग्रीन व्यू में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब जन्मदिन की पार्टी के दौरान खाने के ऑर्डर को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला मारपीट तक पहुंच गया। इस घटना में दोनों गुटों के कई लोग घायल हुए, जबकि बीच-बचाव करने आए होटल मैनेजर को भी चोटें आईं। जानकारी के अनुसार, शक्तिपुरम खुड़ा निवासी फैजल खान अपने साथियों के साथ ट्रैक्टर एजेंसी संचालक सतीश धाकड़ का जन्मदिन मनाने होटल पहुंचे थे। इसी दौरान होटल संचालक अनुज अग्रवाल के बेटे कार्तिक अग्रवाल भी अपने दोस्तों के साथ अलग जन्मदिन पार्टी मना रहे थे। दोनों समूहों की मौजूदगी के बीच खाने के ऑर्डर को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो जल्द ही तीखी बहस और फिर हिंसक झड़प में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच लात-घूंसे चले और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। झगड़े के दौरान होटल स्टाफ ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन होटल मैनेजर जाहिद खान भी इस मारपीट की चपेट में आ गए और उन्हें चोट लगी। घटना के दौरान होटल परिसर में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी बीच चर्चा यह भी रही कि एक बैग में करीब 2 लाख 20 हजार रुपए नकद रखे थे, हालांकि बाद में यह राशि सुरक्षित रूप से उसके मालिक सतीश धाकड़ को लौटा दी गई। सूचना मिलने पर मामला कोतवाली थाने पहुंचा, जहां दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी। पुलिस की मौजूदगी में हुई बातचीत के बाद दोनों गुटों ने आपसी सहमति से विवाद समाप्त कर लिया और किसी भी पक्ष ने लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई। होटल संचालक ने भी नुकसान को लेकर कोई औपचारिक शिकायत नहीं दी। फिलहाल पुलिस ने मामले को राजीनामे के आधार पर निपटा दिया है, लेकिन घटना ने होटल में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
पटना में खान सर कोचिंग सेंटर पर हमला: फायरिंग और तोड़फोड़ के बाद 3 आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

नई दिल्ली। बिहार की राजधानी पटना में स्थित चर्चित शिक्षक खान सर के कोचिंग संस्थान पर हुए हमले और कथित फायरिंग की घटना ने पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना दिया है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक कोचिंग संस्थान का संचालक भी शामिल बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच कई स्तरों पर की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का दावा है कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जानकारी के अनुसार, यह घटना मंगलवार रात पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में हुई, जहां खान सर का कोचिंग संस्थान स्थित है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, देर शाम कुछ लोग समूह बनाकर कोचिंग परिसर के बाहर पहुंचे और वहां हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि हमलावरों ने संस्थान के बाहर और अंदर तोड़फोड़ की, पोस्टर और प्रचार सामग्री को नुकसान पहुंचाया तथा कार्यालय परिसर में भी अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की। घटना के दौरान ईंट-पत्थर चलने की भी सूचना सामने आई है। इस हमले में संस्थान में तैनात एक सुरक्षा गार्ड घायल हो गया, जिसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया। क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई। पुलिस ने आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ा दी है और कोचिंग संस्थान के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की अवांछित गतिविधि को रोकने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। घटना के बाद इलाके में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा और बड़ी संख्या में छात्र तथा स्थानीय लोग वहां एकत्रित हो गए। इस मामले में खान सर ने कुछ प्रतिस्पर्धी कोचिंग संस्थानों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कम फीस और बेहतर शैक्षणिक परिणामों के कारण उनका संस्थान छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है, जिससे कुछ लोग असहज महसूस कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि उन्हें पहले भी कई बार धमकियां मिल चुकी थीं और हाल के दिनों में संस्थान को नुकसान पहुंचाने की चेतावनी भी दी गई थी। हालांकि पुलिस ने अभी तक इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है और जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी दावों और आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पोस्टर और प्रचार सामग्री को लेकर विवाद की बात सामने आई है। अधिकारियों ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब्त कर ली है और उसकी गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना पूर्व नियोजित थी या किसी विवाद के बाद अचानक हुई। कथित फायरिंग की बात को लेकर भी जांच जारी है और पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर तथ्य जुटा रही है। फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल देखने को मिला। कई छात्रों ने शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं और प्रशासन से सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं संस्थान प्रबंधन ने स्थिति सामान्य होने तक कुछ दिनों के लिए कक्षाएं स्थगित रखने का निर्णय लिया है। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और दोषियों को जल्द से जल्द न्याय के दायरे में लाया जाएगा। पूरे मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल पटना का यह मामला शिक्षा जगत और राजनीतिक हलकों दोनों में चर्चा का विषय बना हुआ है। Google Search Image Keywords: खान सर कोचिंग पटना, मुसल्लहपुर हाट घटना, खान सर संस्थान हमला, पटना कोचिंग सेंटर विवाद, कोचिंग सेंटर सुरक्षा
शिवपुरी में साइबर सेल की बड़ी सफलता, 30 लाख के 120 गुम और चोरी मोबाइल बरामद

मध्यप्रदेश । शिवपुरी पुलिस की साइबर सेल ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए गुम और चोरी हुए 120 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 30 लाख रुपए आंकी गई है। बुधवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव मुले और साइबर सेल प्रभारी धर्मेंद्र सिंह जाट ने इन मोबाइलों को उनके वास्तविक मालिकों को सौंपा। पुलिस के अनुसार, साइबर सेल टीम को प्राप्त शिकायतों के आधार पर लगातार तकनीकी जांच और ट्रैकिंग की जा रही थी। आधुनिक तकनीक और डिजिटल सर्विलांस की मदद से इन मोबाइलों को मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जैसे विभिन्न राज्यों से ट्रेस किया गया। मोबाइल वापस मिलने के बाद लोगों ने पुलिस की इस पहल की सराहना की और राहत की भावना व्यक्त की। अधिकारियों ने बताया कि बरामद किए गए मोबाइलों में एक लाख रुपए कीमत का एप्पल आईफोन भी शामिल है, जिसे शिकायत मिलने के मात्र 24 घंटे के भीतर ट्रेस कर लिया गया और उसके मालिक को सौंप दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर सेल लगातार गुम और चोरी हुए मोबाइलों की रिकवरी के लिए काम कर रही है। इससे पहले वर्ष 2025 में भी टीम ने करीब 700 मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को वापस लौटाए थे। इस पूरी कार्रवाई में साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक धर्मेंद्र सिंह जाट सहित टीम के अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि तकनीकी निगरानी और डेटा एनालिसिस के जरिए आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।
सतना में वन्यजीव शिकार का खुलासा, डॉग स्क्वॉड की निशानदेही पर घर से खून लगे हथियार बरामद

सतना । सतना जिले के सगमनिया क्षेत्र में वन विभाग ने वन्यजीव शिकार से जुड़े एक संदिग्ध मामले का बड़ा खुलासा किया है। बीट खम्हरिया के अंतर्गत ग्राम पंचायत नैना सगमनिया में पानी की टंकी के पास किसी वन्य प्राणी के शिकार की सूचना मिलने के बाद वन अमला सक्रिय हो गया और मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की गई। प्रारंभिक निरीक्षण के दौरान घटनास्थल पर खून के नमूने मिलने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई। इसके बाद वन विभाग ने डॉग स्क्वॉड की मदद ली। प्रशिक्षित डॉग “स्पार्टन” को मौके पर सर्चिंग के लिए लगाया गया, जिसने जांच के दौरान पास में स्थित रामाधार बंसल के घर की ओर स्पष्ट संकेत दिया। घर पर ताला लगा होने के कारण अधिकारियों को आशंका हुई कि अंदर वन्यजीव शिकार से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। इस पर वन परिक्षेत्राधिकारी शुभम दुबे की अनुशंसा पर उप वन मंडल अधिकारी बहादुर सिंह द्वारा सर्च वारंट जारी किया गया। वारंट मिलने के बाद टीम ने घर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान घर के भीतर से खून से सने हथियार, एक तराजू और वन्य प्राणी के बाल बरामद किए गए। वन विभाग ने सभी सामान को जब्त कर लिया है और मामले की जांच तेज कर दी है। वन विभाग ने इस मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि शिकार किस वन्य प्राणी का किया गया था। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को सुरक्षित रख लिया गया है। बरामद किए गए बाल और खून के नमूनों को डीएनए जांच के लिए जबलपुर स्थित फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस वन्यजीव का शिकार किया गया था और मामले में किन लोगों की संलिप्तता है। वन विभाग ने कहा है कि जांच के आधार पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल: बागी विधायकों ने विधानसभा में ठोका दावा, खुद को बताया असली तृणमूल कांग्रेस, बहुमत समर्थन का किया दावा

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को उस समय बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला जब तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक विधानसभा पहुंचे और पार्टी के भीतर अपने समर्थन को लेकर बड़ा दावा किया। बागी नेताओं ने कहा कि उनके साथ बड़ी संख्या में विधायक खड़े हैं और वे ही पार्टी की मूल विचारधारा तथा संगठनात्मक भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दावे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। विधानसभा परिसर में पहुंचे बागी विधायकों ने संकेत दिया कि वे अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के साथ-साथ संवैधानिक और संगठनात्मक स्तर पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं। बागी खेमे के नेताओं ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपने की तैयारी करते हुए दावा किया कि उन्हें पर्याप्त संख्या में विधायकों का समर्थन प्राप्त है। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष का माहौल बना हुआ था, लेकिन नेतृत्व स्तर पर उसकी अनदेखी की गई। बागी विधायकों के अनुसार संगठन में निर्णय लेने की प्रक्रिया सीमित दायरे में सिमटती जा रही थी, जिससे कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ी। उनका दावा है कि वे केवल अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था और कार्यकर्ताओं की आवाज को मजबूत करने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। इस दौरान बागी नेताओं ने विधानसभा में विपक्ष के नेता पद को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उनका कहना है कि यदि संख्या बल और विधायकों के समर्थन को आधार बनाया जाए तो उनका दावा मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा में उनकी उपस्थिति केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि अपने राजनीतिक अधिकारों और समर्थन के प्रमाण को सामने रखने की कोशिश है। बागी खेमे का मानना है कि पार्टी के भीतर मौजूद बहुसंख्यक असंतोष अब राजनीतिक रूप से संगठित स्वरूप ले चुका है और इसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। पार्टी लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रमुख शक्ति रही है, लेकिन हाल के महीनों में संगठन के भीतर मतभेदों की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। बागी विधायकों का आरोप है कि वरिष्ठ नेताओं की राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा और संगठनात्मक फैसलों में पारदर्शिता की कमी है। उनका कहना है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की भावनाओं को भी लगातार नजरअंदाज किया गया, जिससे असंतोष बढ़ता गया। इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में विधानसभा से जुड़ा एक हस्ताक्षर विवाद भी अहम माना जा रहा है। कुछ विधायकों ने आरोप लगाया था कि उनके नाम और हस्ताक्षर का उपयोग उनकी जानकारी के बिना किया गया। इस आरोप के बाद पार्टी के भीतर विवाद और गहरा गया तथा कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद संगठन में बदलाव और जवाबदेही की मांग भी उठने लगी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यही विवाद बाद में व्यापक असहमति का कारण बना और अब वह खुलकर राजनीतिक संघर्ष के रूप में दिखाई दे रहा है। हालांकि बागी खेमे द्वारा किए जा रहे दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उनके बयानों ने राजनीतिक अटकलों को तेज कर दिया है। दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने के प्रयास कर रहा है। आने वाले दिनों में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका, विधायकों के वास्तविक समर्थन की स्थिति और पार्टी नेतृत्व की रणनीति काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है। फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम चर्चा का केंद्र बना हुआ है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह विवाद केवल दबाव की राजनीति साबित होता है या फिर राज्य की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत देता है।
सतना में स्कॉर्पियो सवारों का हंगामा, पत्थरबाजी के बाद चलाई गोली; 7 पर FIR, एक हिरासत में

सतना । सतना जिले के कोलगवां थाना क्षेत्र अंतर्गत टिकुरिया टोला-बाइपास के पास मंगलवार देर शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई जब स्कॉर्पियो सवार युवकों ने मजदूरों के एक समूह पर हमला कर दिया। विवाद इतना बढ़ा कि पहले पत्थरबाजी हुई और फिर पिस्टल से फायरिंग तक की नौबत आ गई। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर एक आरोपी को हिरासत में ले लिया है, जबकि वाहन को जब्त कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार, ईंट-भट्टे के पास बैठे मजदूरों के बीच उस समय तनाव पैदा हो गया जब स्कॉर्पियो (एमपी 19 सीबी 1665) वहां आकर रुकी। वाहन से एक युवक नीचे उतरा और कथित रूप से सार्वजनिक स्थान पर अनुचित हरकत करने लगा। इस पर मजदूरों में शामिल एक महिला गुड़िया प्रजापति ने आपत्ति जताई, जिससे विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि आपत्ति जताने पर युवक ने गाली-गलौज करते हुए महिला पर पत्थर फेंक दिया, जिससे वह घायल हो गई। इसके बाद स्कॉर्पियो में सवार अन्य 5-6 युवक भी मौके पर उतर आए और मजदूरों से मारपीट शुरू कर दी। कुछ ही देर में स्थिति और बिगड़ गई। इसी दौरान आरोपियों में शामिल प्रभु सिंह परिहार ने विनोद प्रजापति को जान से मारने की धमकी देते हुए पिस्टल से फायर कर दिया। हालांकि, विनोद प्रजापति समय रहते झुक गए, जिससे गोली उन्हें नहीं लगी और एक बड़ा हादसा टल गया। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए, जिससे अफरा-तफरी मच गई। भीड़ को बढ़ता देख आरोपी अपनी स्कॉर्पियो छोड़कर भागने लगे। स्थानीय लोगों ने भाग रहे आरोपियों में से एक युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। सूचना मिलने पर कोलगवां थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने स्कॉर्पियो को क्रेन की मदद से जब्त कर थाने भेज दिया है। साथ ही घटना में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस ने इस मामले में कुल 7 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और जल्द ही सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।सतना जिले के कोलगवां थाना क्षेत्र अंतर्गत टिकुरिया टोला-बाइपास के पास मंगलवार देर शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई जब स्कॉर्पियो सवार युवकों ने मजदूरों के एक समूह पर हमला कर दिया। विवाद इतना बढ़ा कि पहले पत्थरबाजी हुई और फिर पिस्टल से फायरिंग तक की नौबत आ गई। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर एक आरोपी को हिरासत में ले लिया है, जबकि वाहन को जब्त कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार, ईंट-भट्टे के पास बैठे मजदूरों के बीच उस समय तनाव पैदा हो गया जब स्कॉर्पियो (एमपी 19 सीबी 1665) वहां आकर रुकी। वाहन से एक युवक नीचे उतरा और कथित रूप से सार्वजनिक स्थान पर अनुचित हरकत करने लगा। इस पर मजदूरों में शामिल एक महिला गुड़िया प्रजापति ने आपत्ति जताई, जिससे विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि आपत्ति जताने पर युवक ने गाली-गलौज करते हुए महिला पर पत्थर फेंक दिया, जिससे वह घायल हो गई। इसके बाद स्कॉर्पियो में सवार अन्य 5-6 युवक भी मौके पर उतर आए और मजदूरों से मारपीट शुरू कर दी। कुछ ही देर में स्थिति और बिगड़ गई। इसी दौरान आरोपियों में शामिल प्रभु सिंह परिहार ने विनोद प्रजापति को जान से मारने की धमकी देते हुए पिस्टल से फायर कर दिया। हालांकि, विनोद प्रजापति समय रहते झुक गए, जिससे गोली उन्हें नहीं लगी और एक बड़ा हादसा टल गया। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए, जिससे अफरा-तफरी मच गई। भीड़ को बढ़ता देख आरोपी अपनी स्कॉर्पियो छोड़कर भागने लगे। स्थानीय लोगों ने भाग रहे आरोपियों में से एक युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। सूचना मिलने पर कोलगवां थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने स्कॉर्पियो को क्रेन की मदद से जब्त कर थाने भेज दिया है। साथ ही घटना में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस ने इस मामले में कुल 7 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और जल्द ही सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।
चार साल के बच्चे की संदिग्ध मौत का खुलासा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद हत्या के आरोप में प्रेमी गिरफ्तार

नई दिल्ली । महाराष्ट्र के ठाणे जिले में चार वर्षीय बच्चे की कथित हत्या का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। शुरुआती जांच में जिस मौत को सामान्य माना जा रहा था, वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद एक गंभीर आपराधिक मामले में बदल गई। पुलिस ने बच्चे की मौत के संबंध में उसकी मां के साथ रह रहे व्यक्ति को गिरफ्तार कर हत्या का मामला दर्ज किया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियों को समझने का प्रयास कर रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह घटना ठाणे जिले के काशीमीरा क्षेत्र की है, जहां एक महिला अपने चार वर्षीय बेटे के साथ आरोपी शंभू शर्मा के साथ रह रही थी। प्रारंभिक जानकारी में बच्चे की मौत को स्वाभाविक बताया गया था, लेकिन मौके पर की गई औपचारिक जांच और पंचनामे के दौरान अधिकारियों को बच्चे के शरीर पर चोटों के कई निशान दिखाई दिए। इन परिस्थितियों ने पुलिस को संदेह पैदा करने पर मजबूर किया, जिसके बाद शव को विस्तृत पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि बच्चे की मौत गंभीर अंदरूनी चोटों के कारण हुई थी। रिपोर्ट में स्पष्ट संकेत मिले कि शरीर पर मौजूद चोटें सामान्य नहीं थीं और हिंसक मारपीट का परिणाम हो सकती हैं। मेडिकल निष्कर्ष सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को हत्या के रूप में दर्ज करते हुए जांच का दायरा बढ़ाया। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। जांच एजेंसियों के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी ने बच्चे के साथ मारपीट करने की बात स्वीकार की। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मारपीट के पीछे तत्काल कारण क्या था। पुलिस अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि घटना अचानक हुई या इसके पीछे कोई पुराना विवाद या तनाव मौजूद था। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि घटना के समय बच्चे की मां की क्या भूमिका थी और क्या उसे कथित हिंसा की जानकारी थी। इस मामले ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और घरेलू परिवेश में होने वाली हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार या निकट संबंधों के दायरे में होने वाली हिंसा कई बार लंबे समय तक सामने नहीं आ पाती, जिसके कारण मासूम बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। ऐसे मामलों में समय पर हस्तक्षेप और संवेदनशील निगरानी की आवश्यकता महसूस की जाती है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की जा रही है। आरोपी के खिलाफ हत्या से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। जांच टीम पड़ोसियों, परिचितों और परिवार से जुड़े अन्य लोगों के बयान भी दर्ज कर रही है ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों का सही आकलन किया जा सके। फिलहाल इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। एक मासूम बच्चे की असमय मौत ने लोगों को स्तब्ध कर दिया है और सभी की नजरें अब जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। पुलिस का कहना है कि मामले के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
धमकी देकर नाबालिग से दुष्कर्म, रीवा में आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया

मध्यप्रदेश । रीवा शहर के अमहिया थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक युवक लंबे समय तक जान से मारने की धमकी देकर पीड़िता का शोषण करता रहा। लगातार डर और दबाव में रहने के बाद पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने 1 जून को अमहिया थाने में पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उसने बताया कि क्षेत्र निवासी सरताज अंसारी उसे लगातार धमकाता था और इसी डर का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की और संभावित ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए पूरे मामले की जांच पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों के तहत की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पीड़िता लंबे समय से आरोपी की धमकियों के कारण चुप रही। बाद में परिवार को जानकारी मिलने पर मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस अब घटना से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों में त्वरित कार्रवाई की जा रही है और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
रीवा के सिलपरा डैम में सेना का जवान डूबा, SDERF का सर्च ऑपरेशन जारी

मध्यप्रदेश । रीवा जिले के बिछिया थाना क्षेत्र स्थित सिलपरा डैम में बुधवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां भारतीय सेना का एक जवान डूब गया। घटना के बाद से इलाके में हड़कंप मच गया है और SDRF की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। जानकारी के अनुसार, 28 वर्षीय जवान गौरव द्विवेदी अपने भाई और बहन के साथ डैम घूमने के लिए पहुंचे थे। बघवार गांव निवासी गौरव सुबह करीब 6 बजे सिलपरा डैम पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि नहाने के दौरान जब वह पानी के किनारे आगे बढ़े, तभी उनका संतुलन बिगड़ गया और वे अचानक गहरे पानी में चले गए। इसके बाद वे लापता हो गए, जिससे मौके पर मौजूद परिजनों में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और SDRF की टीम मौके पर पहुंची और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। गोताखोरों की मदद से डैम में लगातार सर्चिंग की जा रही है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक जवान का कोई सुराग नहीं मिल सका है। बताया जा रहा है कि गौरव द्विवेदी भारतीय सेना में पदस्थ हैं और कुछ दिन पहले ही छुट्टी लेकर अपने घर आए थे। परिवार के साथ समय बिताने के दौरान यह हादसा हो गया। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। SDRF टीम के प्रभारी विकास पांडेय ने बताया कि सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है और जब तक जवान को ढूंढ नहीं लिया जाता, तब तक रेस्क्यू अभियान बंद नहीं किया जाएगा। टीम हर संभव तरीके से डैम में तलाश कर रही है। फिलहाल पूरे इलाके में माहौल गमगीन है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के दृष्टिकोण से डैम क्षेत्र में लोगों की आवाजाही पर भी नजर रखी जा रही है।
हरित परिवहन की ओर कदम, 500 किमी रेंज वाली इलेक्ट्रिक कार काफिले में शामिल

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब मुख्यमंत्री अपने आधिकारिक दौरे और आवागमन के लिए इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग करेंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री के काफिले में पहली बार एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक कार को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री के लिए खरीदी गई नई इलेक्ट्रिक कार Mahindra XEV 9e बुधवार से आधिकारिक तौर पर उनके काफिले का हिस्सा बन जाएगी। मुख्यमंत्री आज शाम भोपाल से दिल्ली रवाना होते समय मुख्यमंत्री निवास से स्टेट हैंगर तक इसी इलेक्ट्रिक वाहन से यात्रा करेंगे। इस पहल को हरित परिवहन और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक कदम माना जा रहा है। इस नई कार को विशेष वीआईपी नंबर MP 02 VB 2047 आवंटित किया गया है। यहां ‘VB’ का अर्थ ‘विकसित भारत’ है, जबकि ‘2047’ भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर संकेत करता है। इस नंबर के माध्यम से सरकार ने विकसित भारत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री इससे पहले भी ईंधन की खपत कम करने के लिए अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या घटा चुके हैं। जहां पहले उनके काफिले में 13 वाहन शामिल रहते थे, वहीं बाद में इसे घटाकर 7 वाहन कर दिया गया। उनकी इस पहल के बाद कई मंत्रियों और अधिकारियों ने भी कम वाहनों के उपयोग और कार पूलिंग को अपनाया। नई इलेक्ट्रिक कार आधुनिक तकनीक और उन्नत सुरक्षा सुविधाओं से लैस है। इसमें 79kWh क्षमता का बैटरी पैक दिया गया है, जो एक बार चार्ज होने पर 500 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम बताया गया है। वाहन में 286 हॉर्सपावर की इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो बेहतरीन प्रदर्शन और तेज रफ्तार प्रदान करती है। कंपनी के अनुसार यह कार महज 7.45 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है। इंटीरियर की बात करें तो वाहन में 16-स्पीकर प्रीमियम ऑडियो सिस्टम, ऑगमेंटेड रियलिटी हेड-अप डिस्प्ले, पैनोरमिक ग्लास रूफ, वायरलेस चार्जिंग और मल्टीकलर एम्बिएंट लाइटिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा ‘पेट मोड’ और ‘कैंपिंग मोड’ जैसे विशेष फीचर भी दिए गए हैं। सुरक्षा के लिहाज से कार में 360 डिग्री कैमरा, सर्विलांस मोड, मल्टीपल एयरबैग्स, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और अन्य आधुनिक सुरक्षा तकनीकें मौजूद हैं। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा वाहन की जांच पूरी कर ली गई है और ड्राइवरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। मुख्यमंत्री के काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन की एंट्री को सरकारी स्तर पर ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई शुरुआत माना जा रहा है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश भी जाएगा।