MP State Administrative Tribunal: 23 साल पहले बंद हुआ स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल फिर होगा शुरू, मोहन सरकार तैयार कर रही ड्राफ्ट

HIGHLIGHTS: 23 साल बाद SAT की वापसी की तैयारी 4.5 लाख लंबित मामलों के निपटारे पर फोकस भर्ती, पदोन्नति और पेंशन विवाद होंगे हल हाईकोर्ट पर कम होगा मामलों का बोझ लाखों कर्मचारियों को मिल सकती है राहत MP State Administrative Tribunal: भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार 23 साल बाद फिर राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल की तैयारी में हैं। बता दें कि अधिकारी-कर्मचारियों की तरफ से हाईकोर्ट में दायर साढ़े चार लाख केस के निपटारे को लेकर ये फैसल लिया गया है। इस फैसले को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच गहन चर्चा के बाद सहमति हुई। अब सामान्य प्रशासन विभाग इसके गठन की रूपरेखा तैयार करने में जुट गया है। 7 महीने तक किराए के कमरे में रखने का आरोप, आरोपी की तलाश जारी हाईकोर्ट पर बढ़ते बोझ को कम करने की कोशिश सरकार का मानना है कि ट्रिब्यूनल के बनने से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और उसकी इंदौर- ग्वालियर खंडपीठों पर लंबित मामलों का दबाव कम होगा। वर्तमान में कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों जैसे कई मामले अदालतों में लंबित हैं। इन मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल में होने से न्यायालयों को अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर अधिक समय मिल सकेगा। कार की टक्कर से युवक की मौत, बेहट रोड पर छात्र भी हादसे का शिकार दिग्विजय सरकार ने किया था बंद मध्यप्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण (MPAT) को राज्य सरकार ने 2001 में ही बंद कर दिया था। जहां दिग्विजय सिंह सरकार ने एमपी का पुनर्गठन का हवाला देते हुए बंद करने का निर्णय लिया था। इसके बाद राज्य सरकार के आग्रह पर भारत सरकार द्वारा एक अधिसूचना के माध्यम से 17 अप्रैल 2003 को आधिकारिक रूप से ट्रिब्यूनल को समाप्त कर दिया गया था, जिसे अब दोबारा करने का प्लान बनाया जा रहा है।
साइबर ठगों का नया जाल, कार्ड एक्टिवेशन के नाम पर धोखाधड़ी

ग्वालियर । ग्वालियर में साइबर अपराधियों ने एक युवती को निशाना बनाते हुए उसके क्रेडिट कार्ड से करीब 1.48 लाख रुपए की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को बैंक प्रतिनिधि बताकर पहले क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट कराने का झांसा दिया और बाद में राशि वापस दिलाने के नाम पर ओटीपी हासिल कर खाते से रकम निकाल ली। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, 24 वर्षीय अक्षिता बांगड़ के पास एक निजी बैंक का क्रेडिट कार्ड था, जो उन्हें फरवरी 2026 में प्राप्त हुआ था। हालांकि उन्होंने उस कार्ड को सक्रिय नहीं कराया था। 6 अप्रैल को उनके पास एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने स्वयं को बैंक का प्रतिनिधि बताया और क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट कराने की प्रक्रिया समझाने लगा। कॉल करने वाले व्यक्ति ने अक्षिता को एक मोबाइल एप डाउनलोड करने के लिए कहा। युवती ने उसकी बातों पर भरोसा कर निर्देशों का पालन किया। इसके कुछ समय बाद उनके क्रेडिट कार्ड से करीब 99 हजार 861 रुपए का ट्रांजेक्शन हो गया। पीड़िता को इस लेनदेन की जानकारी तत्काल नहीं मिल सकी, जिससे उन्हें धोखाधड़ी का पता नहीं चला। करीब एक महीने बाद 4 मई को अक्षिता को फिर एक अन्य नंबर से कॉल आया। इस बार कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मददगार बताते हुए पिछले ट्रांजेक्शन की जानकारी दी और कहा कि यदि वह चाहें तो निकाली गई राशि वापस दिलाई जा सकती है। बातचीत के दौरान आरोपी ने प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उनसे ओटीपी साझा करने को कहा। पीड़िता ने जब ओटीपी बताया तो ठगों ने कुछ ही मिनटों में उनके क्रेडिट कार्ड से दो और ट्रांजेक्शन कर दिए। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 1 लाख 48 हजार रुपए की राशि निकाल ली गई। इसके बाद जब युवती को ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर मामला कोतवाली थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। जांच के दौरान संबंधित मोबाइल नंबरों, बैंक ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्यों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर ओटीपी, कार्ड विवरण, सीवीवी नंबर या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। बैंक या वित्तीय संस्थान कभी भी फोन पर ग्राहकों से ओटीपी नहीं मांगते। थोड़ी सी सावधानी साइबर ठगी जैसी घटनाओं से बचा सकती है।
आरबीआई का बड़ा बयान: सोना बेचने की खबरें फर्जी, भारत के पास अब भी 880.52 टन गोल्ड रिजर्व सुरक्षित

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश के स्वर्ण भंडार को लेकर फैल रही अटकलों और मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास मौजूद भौतिक सोने के भंडार में किसी प्रकार की बिक्री या कमी नहीं हुई है और यह पहले की तरह 880.52 टन पर स्थिर है। आरबीआई ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि केंद्रीय बैंक ने अपने गोल्ड रिजर्व का एक हिस्सा बेच दिया है, जो पूरी तरह गलत और भ्रामक है। बैंक ने दोहराया कि उसके पास मौजूद भौतिक सोने का भंडार सुरक्षित है और इसमें कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया है। केंद्रीय बैंक ने यह भी बताया कि स्वर्ण भंडार से संबंधित सभी आधिकारिक आंकड़े नियमित रूप से मासिक बुलेटिन में प्रकाशित किए जाते हैं, जिन्हें आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर देखा जा सकता है। बैंक ने लोगों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी जानकारी पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें। इस मामले में प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए इन खबरों को फर्जी बताया है। पीआईबी ने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि आरबीआई ने लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया है, लेकिन यह जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत है। पीआईबी के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। सितंबर 2025 के अंत में यह हिस्सेदारी 13.92 प्रतिशत थी, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 16.70 प्रतिशत हो गई। इसके बाद 22 मई 2026 तक यह और बढ़कर 16.85 प्रतिशत तक पहुंच गई। ये आंकड़े यह संकेत देते हैं कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की भूमिका मजबूत हो रही है। इससे पहले एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ब्लूमबर्ग के हवाले से आरबीआई ने हाल के दो हफ्तों में लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेचकर विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां खरीदी हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद वित्तीय बाजारों और निवेशकों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि आरबीआई और पीआईबी दोनों ने इन दावों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं है। केंद्रीय बैंक ने दोहराया कि भारत का स्वर्ण भंडार पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें किसी तरह की बिक्री या गिरावट नहीं हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की बढ़ती हिस्सेदारी देश की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक सुरक्षा कवच के रूप में देखी जाती है। सोने को हमेशा से एक सुरक्षित निवेश माना जाता है और केंद्रीय बैंक भी इसे अपने रिजर्व पोर्टफोलियो का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए रखते हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद अब बाजार में फैली अटकलों पर विराम लगने की उम्मीद है और निवेशकों के बीच स्थिति को लेकर स्पष्टता आई है। आरबीआई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि देश की वित्तीय स्थिति मजबूत है और स्वर्ण भंडार पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर बना हुआ है।
सुख-समृद्धि के लिए वास्तु सम्मत होना चाहिए नए आशियाने का कोना-कोना, उत्तर-पूर्व दिशा में भूलकर भी न करें यह निर्माण

नई दिल्ली। जीवन भर की जमापूंजी लगाकर जब कोई व्यक्ति अपने सपनों का आशियाना तैयार करता है, तो उसकी सबसे बड़ी कामना यही होती है कि नए घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो। इसके लिए गृह निर्माण के समय वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। कई बार जानकारी के अभाव में लोग मकान का निर्माण तो करा लेते हैं, लेकिन अनजाने में की गई छोटी-छोटी गलतियां आगे चलकर गंभीर मानसिक तनाव और भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन जाती हैं। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, नए घर के निर्माण के दौरान कुछ खास हिस्सों की दिशा और स्थान को लेकर बेहद सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि इन जगहों से ही घर के भीतर सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह तय होता है। यदि शुरुआत में ही इन बातों का ध्यान रख लिया जाए, तो भविष्य में आने वाली तमाम तरह की परेशानियों और वास्तु दोषों से आसानी से बचा जा सकता है। वास्तु विज्ञान में घर के मुख्य प्रवेश द्वार को ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है, जहां से खुशियां और समृद्धि घर के भीतर प्रवेश करती हैं। नया मकान बनवाते समय मुख्य द्वार की दिशा का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है। इसके लिए सबसे उपयुक्त और शुभ दिशा उत्तर, पूर्व या फिर उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण को माना जाता है। इसके विपरीत दिशा में बना मुख्य द्वार घर में नकारात्मकता को निमंत्रण देता है। इसके साथ ही इस बात का भी विशेष ख्याल रखना चाहिए कि मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने की जगह हमेशा साफ-सुथरी और खाली हो, ताकि सकारात्मक ऊर्जा बिना किसी अवरोध के घर में आ सके। मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में प्रचलित वास्तु मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार के सामने किसी भी प्रकार का खंभा, गड्ढा या भारी अवरोध होना परिवार के मुखिया की उन्नति में बाधा उत्पन्न करता है। घर का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रसोईघर होता है, जिसे मां अन्नपूर्णा और देवी लक्ष्मी का वास स्थान माना जाता है। नए घर में किचन की सही दिशा पूरे परिवार के स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति को सीधे प्रभावित करती है। वास्तु के स्थापित सिद्धांतों के मुताबिक, रसोईघर के लिए सबसे शुभ और उत्तम दिशा दक्षिण-पूर्व अर्थात आग्नेय कोण को माना गया है। यदि किसी कारणवश इस दिशा में निर्माण संभव न हो, तो विकल्प के रूप में उत्तर-पश्चिम दिशा का चुनाव किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे कि उत्तर-पूर्व दिशा में कभी भी भूलकर भी रसोईघर नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि इससे घर के सदस्यों के बीच आपसी कलह और बीमारियां बढ़ती हैं। इसके अलावा, उत्तर-पूर्व दिशा को देवताओं का स्थान माना जाता है, इसलिए इस बेहद पवित्र कोने में सीढ़ियां, स्टोर रूम, भारी कबाड़ या शौचालय का निर्माण करने से सबसे गंभीर वास्तु दोष उत्पन्न होता है, जो मनुष्य को हमेशा अशांत और चिंतित रखता है।
सचिन तेंदुलकर का 37 साल पुराना कीर्तिमान दांव पर, 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय डेब्यू की मांग तेज

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के गलियारों में इस समय केवल एक ही नाम की गूंज सुनाई दे रही है और वह नाम है 15 वर्षीय युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी का। अपनी असाधारण प्रतिभा और मैदान के हर कोने में शॉट लगाने की काबिलियत से चयनकर्ताओं को प्रभावित करने वाले वैभव अब इतिहास रचने की दहलीज पर खड़े हैं। इस महीने के अंत में भारतीय क्रिकेट टीम को दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज के लिए आयरलैंड का दौरा करना है और इसके ठीक बाद टीम पांच मैचों की सीरीज के लिए इंग्लैंड रवाना होगी। इस व्यस्त शेड्यूल को देखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के शीर्ष अधिकारी सीनियर खिलाड़ियों को आराम देकर युवाओं को आजमाने की रणनीति पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इस दौड़ में वैभव सूर्यवंशी का नाम सबसे आगे चल रहा है क्योंकि आईपीएल के हालिया सीजन में उनके बल्ले से जो रनों का तूफान निकला है, उसने क्रिकेट पंडितों को हैरान कर दिया है। अगर चयन समिति उन्हें आयरलैंड के खिलाफ होने वाली सीरीज के लिए टीम इंडिया की जर्सी सौंप देती है, तो वह भारतीय क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का करीब 37 साल पुराना एक महाकीर्तिमान ध्वस्त कर देंगे। सचिन तेंदुलकर ने साल 1989 में जब पाकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा था, तब उनकी उम्र महज 16 साल थी और वह भारत के लिए डेब्यू करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। अब ठीक 37 साल बाद 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी इस चमत्कार को दोहराने के बेहद करीब नजर आ रहे हैं। अगर वह मैदान पर उतरते हैं, तो वह भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाले इतिहास के सबसे युवा क्रिकेटर बन जाएंगे। हालांकि सचिन तेंदुलकर के नाम टेस्ट और वनडे क्रिकेट में सबसे कम उम्र में पदार्पण करने का रिकॉर्ड दर्ज है, लेकिन टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में यह गौरव ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर के नाम है। सुंदर ने साल 2017 में श्रीलंका के खिलाफ 18 साल और 80 दिन की उम्र में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच खेला था। ऐसे में यदि वैभव सूर्यवंशी आगामी सीरीज में भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बनते हैं, तो वह वॉशिंगटन सुंदर के इस 9 साल पुराने रिकॉर्ड को भी बेहद आसानी से पीछे छोड़ देंगे। वैभव सूर्यवंशी की इस दावेदारी को उनके आईपीएल 2026 के अविश्वसनीय प्रदर्शन से सबसे ज्यादा मजबूती मिली है। उन्होंने इस सीजन के 16 मुकाबलों में लगभग 48.50 की बेहतरीन औसत और 237.30 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट के साथ कुल 776 रन कूटे हैं। इस दौरान उनके बल्ले से एक शानदार शतक और पांच अर्धशतक निकले हैं, जिसमें उनका सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर 103 रन रहा है। इतना ही नहीं, अपनी आक्रामक शैली का मुजाहिरा पेश करते हुए उन्होंने पूरे सीजन में रिकॉर्डतोड़ 72 छक्के भी जड़े हैं। उनके इसी गैरमामूली टैलेंट को देखते हुए उन्हें पहले ही इंडिया ए टीम में शामिल किया जा चुका है, जहां वह श्रीलंका ए और अफगानिस्तान ए के खिलाफ होने वाली त्रिकोणीय सीरीज में हिस्सा लेने जा रहे हैं। इंडिया ए की इस टीम में वह कप्तान तिलक वर्मा के नेतृत्व में खेलेंगे, जबकि सीनियर खिलाड़ी ऋतुराज गायकवाड़ भी मार्गदर्शन के लिए टीम में मौजूद रहेंगे। मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों के क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव की यह टाइमिंग और खेल की समझ उन्हें लंबी रेस का घोड़ा बनाती है। उपकप्तान रियान पराग के चोटिल होने के बाद वैभव के लिए मुख्य राष्ट्रीय टीम के दरवाजे और तेजी से खुल गए हैं और अब खेल प्रेमियों की नजरें चयनकर्ताओं के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
7 महीने तक किराए के कमरे में रखने का आरोप, आरोपी की तलाश जारी

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से रिश्तों और भरोसे को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के महाराजपुरा थाना क्षेत्र में एक युवक द्वारा शादी का झांसा देकर नाबालिग लड़की के साथ लगातार दुष्कर्म किए जाने का मामला उजागर हुआ है। आरोपी ने न केवल नाबालिग को शादी का झूंठा दिलासा दिया, बल्कि समाज की नजरों से बचने के लिए उसे सात महीने तक एक किराए के कमरे में अपनी पत्नी बताकर रखा। जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया, तो आरोपी अचानक उसे बेसहारा छोड़कर गायब हो गया और अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसकी सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी है। घटनाक्रम की शुरुआत करीब दो साल पहले हुई थी। पीड़ित 17 वर्षीय नाबालिग लड़की ने हजीरा थाने में अपनी आपबीती सुनाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता के मुताबिक, उसका भाई डीजे (DJ) संचालन का काम करता है। इसी काम के सिलसिले में हजीरा थाना क्षेत्र के यादव धर्मकांटा का रहने वाला राहुल राठौर नाम का युवक उसके भाई के साथ काम करता था। भाई के साथ दोस्ती होने के कारण राहुल का पीड़िता के घर पर अक्सर आना-जाना होने लगा। इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे गहरी पहचान और फिर दोस्ती में बदल गई। समय बीतने के साथ ही यह दोस्ती प्रेम संबंधों में तब्दील हो गई, जिसका फायदा उठाने की साजिश आरोपी ने पहले ही रच ली थी। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी राहुल राठौर ने उसे अपने प्रेम जाल में फंसाकर शादी करने का पक्का वादा किया। इसके बाद वह उसे बहला-फुसलाकर धर्मकांटा इलाके के पास एक किराए के मकान में ले गया। बीते 2 अक्टूबर 2025 से वह नाबालिग को उसी कमरे में रखकर उसका शारीरिक शोषण कर रहा था। शातिर आरोपी ने मकान मालिक को शक न हो, इसलिए नाबालिग का परिचय अपनी ‘पत्नी’ के रूप में कराया था। इस दौरान जब भी नाबालिग उस पर सामाजिक रीति-रिवाज से शादी करने का दबाव बनाती या शारीरिक संबंध बनाने का विरोध करती, तो आरोपी राहुल जल्द ही शादी का मंडप सजाने की बात कहकर उसे चुप करा देता था। इसी बीच आरोपी ने डीजे का काम छोड़कर टमटम (ई-रिक्शा) चलाना भी शुरू कर दिया था ताकि वह गुजारा कर सके। विश्वासघात की पराकाष्ठा तब हुई जब बीते दिनों आरोपी राहुल अचानक नाबालिग को कमरे पर ही छोड़कर लापता हो गया। पीड़िता ने जब उससे संपर्क करने की कोशिश की, तो आरोपी का मोबाइल फोन लगातार बंद आने लगा। खुद को ठगा और अकेला पाकर पीड़िता न्याय की गुहार लेकर पुलिस स्टेशन पहुंची। महाराजपुरा थाना पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता और पीड़िता के नाबालिग होने के कारण तुरंत ऐक्शन लिया। पुलिस ने आरोपी राहुल राठौर के खिलाफ बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
बाबर आजम के फ्लॉप शो से हारा पाकिस्तान, शादाब खान की जुझारू पारी भी नहीं आई काम, सीरीज 1-1 की बराबरी पर पहुंची

नई दिल्ली। पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे इंटरनेशनल सीरीज के दूसरे मुकाबले में मेजबान पाकिस्तान को करारी हार का सामना करना पड़ा है। लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए इस बेहद रोमांचक मुकाबले में मेहमान टीम ऑस्ट्रेलिया ने शानदार पलटवार करते हुए पाकिस्तान को 41 रनों के अंतर से शिकस्त दी। इस धमाकेदार जीत के साथ ही ऑस्ट्रेलियाई टीम ने सीरीज में 1-1 की बराबरी हासिल कर ली है, जिससे अब इस सीरीज का तीसरा और अंतिम मुकाबला बेहद दिलचस्प और निर्णायक हो गया है। इस मैच में पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज बाबर आजम, सलमान अली आगा और साहिबजादा फरहान जैसे धुरंधर पूरी तरह फ्लॉप साबित हुए, जिसके चलते मेजबान टीम 232 रनों के आसान दिख रहे लक्ष्य का पीछा करते हुए महज 190 रनों पर ही ढेर हो गई। ऑस्ट्रेलिया की ओर से तेज गेंदबाज नैथन एलिस ने अपनी कातिलाना गेंदबाजी से पाकिस्तानी बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी और उन्हें बेहतरीन प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच के पुरस्कार से नवाजा गया। इस मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत बेहद खराब रही थी। मैच की पहली ही गेंद पर पाकिस्तान के कप्तान शाहीन शाह अफरीदी ने खतरनाक बल्लेबाज एलेक्स कैरी को बोल्ड कर मेजबान टीम को बड़ी सफलता दिलाई थी। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने नियमित अंतराल पर दो और विकेट गंवा दिए, जिससे टीम संकट में नजर आ रही थी। ऐसी स्थिति में मध्यक्रम के बल्लेबाज कैमरोन ग्रीन ने 53 रनों की शानदार पारी खेली और कप्तान जोश इंग्लिस ने भी 51 रनों का बहुमूल्य योगदान दिया। अंत में ओलिवर पीक के 31 रनों की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने निर्धारित 50 ओवरों में 9 विकेट खोकर 231 रनों का एक सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया। पाकिस्तान की ओर से गेंदबाजी में कप्तान शाहीन अफरीदी ने सबसे ज्यादा तीन विकेट चटकाए, जबकि हारिस राउफ, अराफात मिन्हास और माज सदाकत को दो-दो सफलताएं मिलीं। लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तानी टीम की शुरुआत बेहद निराशाजनक और भयावह रही। मेजबान टीम ने महज 4 रन के कुल स्कोर पर अपना पहला और 6 रन पर दूसरा विकेट गंवा दिया था। इसके बाद भी बल्लेबाजों के तू चल मैं आया का सिलसिला थमा नहीं और पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। पाकिस्तान ने 33 रन तक पहुंचते-पहुंचते अपना तीसरा और 44 रन पर चौथा बड़ा विकेट खो दिया, जिससे टीम पूरी तरह बैकफुट पर आ गई। इस बेहद नाजुक मोड़ पर ऑलराउंडर शादाब खान ने एक छोर संभालते हुए 71 रनों की बेहद साहसिक और जुझारू पारी खेली, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें किसी भी शीर्ष बल्लेबाज का साथ नहीं मिला। विकेटकीपर गाजी घोरी ने 37 रन और अराफात मिन्हास ने 33 रन बनाकर शादाब का साथ देने की कोशिश जरूर की, लेकिन वे टीम को जीत की दहलीज पार कराने में नाकाम रहे। पूरी पाकिस्तानी टीम 44 ओवरों में सिर्फ 190 रनों के स्कोर पर ऑलआउट हो गई और ऑस्ट्रेलिया ने इस मैच को जीतकर पिछले मैच की हार का हिसाब चुकता कर लिया। ऑस्ट्रेलिया की इस ऐतिहासिक जीत के सबसे बड़े हीरो नैथन एलिस रहे जिन्होंने अपने कोटे के ओवरों में कहर बरपाते हुए 4 महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। उनके अलावा स्पिनर मैथ्यू शॉर्ट ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट अपने नाम किए, जबकि मैथ्यू कुहनेमन, एडम जैम्पा और तनवीर संघा को एक-एक विकेट मिला। अब दोनों टीमों के बीच इस वनडे सीरीज का तीसरा और अंतिम डिसाइडर मुकाबला 4 जून को लाहौर के ऐतिहासिक गद्दाफी स्टेडियम में ही खेला जाएगा, जहां ट्रॉफी पर कब्जा जमाने के लिए दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर होने की उम्मीद है।
जब सरकारी फरमान के आगे नहीं झुके संगीत के सरताज किशोर कुमार, 'आंधी' फिल्म के गानों पर प्रतिबंध से लेकर राजनीतिक टकराव की पूरी कहानी

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा और संगीत के इतिहास में सत्तर का दशक अपनी बेहतरीन कलात्मकता के साथ-साथ राजनीतिक उथल-पुथल के लिए भी जाना जाता है। इस दौर में जहां एक तरफ आरडी बर्मन, गुलजार और किशोर कुमार जैसे दिग्गज मिलकर संगीत के नए कीर्तिमान रच रहे थे, वहीं दूसरी तरफ देश में लागू आपातकाल का साया कला जगत पर भी पड़ने लगा था। इसी दौर की एक बेहद चर्चित और विवादित कहानी फिल्म ‘आंधी’ और उसके सदाबहार गाने ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं’ से जुड़ी हुई है। किशोर कुमार और लता मंगेशकर की जादुई आवाज से सजे इस दर्दभरे और रूहानी गाने को एक समय पर सरकारी कोपभाजन का शिकार होना पड़ा था और इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। संजीव कुमार और सुचित्रा सेन की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म और इसके गानों को प्रतिबंधित किए जाने के पीछे राजनीतिक गलियारों में उठी एक बड़ी अफवाह थी। उस समय देश के राजनीतिक हालातों को देखते हुए यह बात तेजी से फैली कि फिल्म ‘आंधी’ की कहानी और सुचित्रा सेन का किरदार पूरी तरह से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जीवन और उनके व्यक्तित्व पर आधारित है। इस अफवाह के सामने आते ही तत्कालीन सरकार ने फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी और इसके चलते ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन जैसे सरकारी माध्यमों पर इस फिल्म के गानों के प्रसारण को पूरी तरह बंद कर दिया गया। हालांकि यह प्रतिबंध बहुत लंबा नहीं चला और कुछ महीनों के बाद जब फिल्म से बैन हटा, तो यह सिनेमाघरों में रिलीज हुई और इसके गाने एक बार फिर दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गए। लेकिन इस प्रतिबंध के पीछे सिर्फ फिल्म की कहानी ही एकमात्र वजह नहीं थी, बल्कि इसके पीछे किशोर कुमार और तत्कालीन सरकार के बीच का सीधा टकराव भी था। कई मीडिया रिपोर्ट्स और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के प्रचारक और तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री वीसी शुक्ला ने किशोर कुमार तक एक सरकारी संदेश भिजवाया था। इस संदेश में किशोर कुमार से सरकार और इंदिरा गांधी के नीतियों के समर्थन में एक विशेष गाना गाने के लिए कहा गया था। अपनी मर्जी के मालिक और बेहद स्वाभिमानी स्वभाव के धनी किशोर कुमार ने इस सरकारी फरमान को मानने से साफ इनकार कर दिया। किशोर कुमार का यह कड़ा रुख सरकार को नागवार गुजरा और इसके बाद उनके गानों को सरकारी रेडियो और दूरदर्शन चैनलों पर बजाने से पूरी तरह रोक दिया गया। इस विवाद पर किशोर कुमार ने बेहद बेबाकी से कहा था कि कोई भी ताकत उनसे वह काम नहीं करवा सकती जो वह खुद अपनी मर्जी से न करना चाहें और वह किसी और के इशारों पर काम नहीं करेंगे। इस ऐतिहासिक गाने के बनने की कहानी भी अपने आप में बेहद दिलचस्प है। संगीत निर्देशक आरडी बर्मन यानी पंचम दा ने इस गाने की मूल धुन असल में एक बंगाली दुर्गा पूजा एल्बम के लिए तैयार की थी, जिसके बोल ‘जेते जेते पथे होलो देरी’ थे। इस बंगाली गाने को खुद पंचम दा ने अपनी आवाज दी थी, जो मशहूर गीतकार गुलजार को बेहद पसंद आई थी। इसके बाद गुलजार के कहने पर इस धुन को फिल्म ‘आंधी’ में शामिल करने का फैसला किया गया और उन्होंने इस पर ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं’ जैसे कालजयी बोल लिखे। किशोर कुमार भले ही तेरह अक्टूबर उन्नीस सौ सतासी को इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन सरकारी पाबंदियों के आगे न झुकने का उनका यह हौसला और उनकी जादुई आवाज आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा के लिए अमर है।
कार की टक्कर से युवक की मौत, बेहट रोड पर छात्र भी हादसे का शिकार

ग्वालियर । ग्वालियर जिले के उटीला थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम कुछ घंटों के भीतर हुए दो अलग-अलग सड़क हादसों ने इलाके में सनसनी फैला दी। एक हादसे में शोक सभा में शामिल होने जा रहे युवक की तेज रफ्तार कार की टक्कर से मौत हो गई, जबकि दूसरे हादसे में कोचिंग के लिए जा रहे एक छात्र को एम्बुलेंस ने टक्कर मार दी। दोनों घटनाओं के बाद पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पहला हादसा टांकोली गांव के पास हुआ, जहां गोल पहाड़िया निवासी प्रीतम सिंह सोलंकी रिश्तेदारी में आयोजित शोक सभा में शामिल होने पहुंचे थे। वह बस से उतरने के बाद सड़क पार कर रहे थे, तभी सामने से तेज गति से आ रही एक सफेद वैगनआर कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि प्रीतम सिंह कई फीट दूर जा गिरे और उनके सिर तथा सीने में गंभीर चोटें आईं। घटना की सूचना मिलते ही उटीला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। मामले में अज्ञात वैगनआर चालक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी गई है। इसी क्षेत्र में दूसरा हादसा मुरार-भेहट रोड पर सामने आया। टिहोली गांव निवासी छात्र संदीप पाल अपनी साइकिल से कोचिंग जाने के लिए निकला था। मुख्य सड़क पार करते समय ग्वालियर की ओर से आ रही 108 एम्बुलेंस ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया और सड़क किनारे जा गिरा। स्थानीय लोगों और राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल छात्र को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल एम्बुलेंस को जब्त कर लिया है और चालक के खिलाफ लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने का मामला दर्ज किया है। दोनों घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों के खतरे को उजागर किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों मामलों की गंभीरता से जांच की जा रही है। टांकोली हादसे में फरार कार चालक की पहचान कर उसे जल्द गिरफ्तार किया जाएगा, जबकि एम्बुलेंस चालक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। लगातार सामने आ रहे सड़क हादसों के बीच प्रशासन और पुलिस लोगों से यातायात नियमों का पालन करने तथा वाहन चालकों से सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की अपील कर रही है।
कुमार सानू का वो ऐतिहासिक रिकॉर्ड जिसे आज तक कोई सिंगर नहीं तोड़ पाया, जानिए आखिर क्यों एक ही दिन में रिकॉर्ड करने पड़े थे इतने सारे गाने

नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत में नव्वै का दशक एक ऐसा स्वर्णिम काल माना जाता है जिसने बॉलीवुड को कई सदाबहार और यादगार गाने दिए। इस दौर में अपनी मखमली आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले दिग्गज पाशर्व गायक कुमार सानू ने सफलता के कई नए आयाम स्थापित किए। आज के समय में जहां आधुनिक तकनीक के बावजूद सिंगर्स के लिए एक दिन में एक गाना पूरी तरह रिकॉर्ड करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है, वहीं कुमार सानू ने करीब तैंतीस साल पहले एक ऐसा ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया था जिसे आज तक कोई भी छू नहीं सका है। उन्होंने महज एक दिन के भीतर रिकॉर्ड अठाइस गाने गाकर अपना नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में हमेशा के लिए दर्ज करा लिया था। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने यह रिकॉर्ड किसी पुरस्कार या प्रसिद्धि की चाह में नहीं बनाया था, बल्कि इसके पीछे एक बेहद व्यावहारिक वजह थी। कुमार सानू को उन दिनों करीब चालीस दिनों के लंबे अमेरिकी दौरे पर जाना था और वह नहीं चाहते थे कि उनके विदेश जाने की वजह से किसी भी संगीतकार का काम रुके या फिल्म की शूटिंग प्रभावित हो, इसलिए उन्होंने जाने से पहले अपना सारा लंबित काम खत्म करने का फैसला किया और मैराथन रिकॉर्डिंग करते हुए यह अद्भुत मुकाम हासिल कर लिया। कोलकाता के एक बंगाली परिवार में जन्मे इस महान गायक का असली नाम सानू भट्टाचार्य है, लेकिन उनके संगीत के सफर में एक बड़ा मोड़ तब आया जब उस दौर की मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने जब पहली बार सानू की आवाज सुनी, तो उन्हें उसमें महान गायक किशोर कुमार की झलक दिखाई दी। इसके बाद उन्होंने सानू भट्टाचार्य को अपना नाम बदलकर कुमार सानू रखने की सलाह दी ताकि फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें एक नई पहचान मिल सके। कुमार सानू के करियर को सबसे बड़ी उड़ान साल उन्नीस सौ नब्बे में आई फिल्म आशिकी से मिली। इस फिल्म के गानों ने भारतीय संगीत उद्योग के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और इसकी ब्लॉकबस्टर कामयाबी ने कुमार सानू को रातों-रात देश का सबसे बड़ा सुपरस्टार सिंगर बना दिया। इसके बाद तो जैसे हिंदी सिनेमा में उनके नाम की आंधी चल पड़ी और वह हर बड़े अभिनेता और निर्माता-निर्देशक की पहली पसंद बन गए। कुमार सानू की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने साल उन्नीस सौ इक्यानवे से लेकर उन्नीस सौ पंचानवे तक लगातार पांच सालों तक फिल्मफेयर बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का पुरस्कार जीतकर एक नया इतिहास रच दिया था। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान साजन, दीवाना, बाजीगर और नाइन्टीन फोर्टी टू ए लव स्टोरी जैसी सुपरहिट फिल्मों के गानों के लिए मिला था। कामयाबी के शिखर पर पहुंचने के बाद जब छठे साल भी उन्हें फिल्मफेयर के लिए नामांकित किया गया, तो उन्होंने अपनी दरियादिली और बड़प्पन का परिचय देते हुए इस अवॉर्ड को लेने से साफ मना कर दिया। उनका मानना था कि अब उन्हें लगातार मिलने वाले इस सम्मान की जगह किसी नए, प्रतिभावान और उभरते हुए कलाकार को मौका मिलना चाहिए ताकि फिल्म इंडस्ट्री में नए चेहरों को प्रोत्साहन मिल सके। अपने पूरे करियर में कुमार सानू ने न सिर्फ हिंदी और अपनी मातृभाषा बंगाली में गाने गाए, बल्कि उन्होंने देश की पंद्रह से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं में सैकड़ों सुपरहिट गानों को अपनी सुरीली आवाज से सजाया। भारतीय संगीत जगत और संस्कृति में उनके इस बेमिसाल और अभूतपूर्व योगदान को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने साल दो हजार नौ में उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा था। आज भी उनके गाए रोमांटिक गाने युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं और उनका यह सफर संगीत के नए साधकों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।