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MP State Administrative Tribunal: 23 साल पहले बंद हुआ स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल फिर होगा शुरू, मोहन सरकार तैयार कर रही ड्राफ्ट

CM MOHAN YADAV

HIGHLIGHTS:

  • 23 साल बाद SAT की वापसी की तैयारी
  • 4.5 लाख लंबित मामलों के निपटारे पर फोकस
  • भर्ती, पदोन्नति और पेंशन विवाद होंगे हल
  • हाईकोर्ट पर कम होगा मामलों का बोझ
  • लाखों कर्मचारियों को मिल सकती है राहत

 

MOHAN YADAV AND ANURAG JAIN
MOHAN YADAV AND ANURAG JAIN

MP State Administrative Tribunal: भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार 23 साल बाद फिर राज्य प्रशासनिक ट्रिब्यूनल स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल की तैयारी में हैं। बता दें कि अधिकारी-कर्मचारियों की तरफ से हाईकोर्ट में दायर साढ़े चार लाख केस के निपटारे को लेकर ये फैसल लिया गया है।

इस फैसले को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन के बीच गहन चर्चा के बाद सहमति हुई। अब सामान्य प्रशासन विभाग इसके गठन की रूपरेखा तैयार करने में जुट गया है।

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हाईकोर्ट पर बढ़ते बोझ को कम करने की कोशिश

सरकार का मानना है कि ट्रिब्यूनल के बनने से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट और उसकी इंदौर- ग्वालियर खंडपीठों पर लंबित मामलों का दबाव कम होगा।

वर्तमान में कर्मचारियों की भर्ती, वेतन, पदोन्नति, पेंशन और सेवा शर्तों जैसे कई मामले अदालतों में लंबित हैं। इन मामलों की सुनवाई ट्रिब्यूनल में होने से न्यायालयों को अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर अधिक समय मिल सकेगा।

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दिग्विजय सरकार ने किया था बंद

मध्यप्रदेश राज्य प्रशासनिक अधिकरण (MPAT) को राज्य सरकार ने 2001 में ही बंद कर दिया था। जहां दिग्विजय सिंह सरकार ने एमपी का पुनर्गठन का हवाला देते हुए बंद करने का निर्णय लिया था।

इसके बाद राज्य सरकार के आग्रह पर भारत सरकार द्वारा एक अधिसूचना के माध्यम से 17 अप्रैल 2003 को आधिकारिक रूप से ट्रिब्यूनल को समाप्त कर दिया गया था, जिसे अब दोबारा करने का प्लान बनाया जा रहा है।

 

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