समुद्र की 7,000 मीटर गहराई में छिपा है रहस्य, जहां लाखों व्हेलों के अवशेषों ने बसाई नई दुनिया

नई दिल्ली । हिंद महासागर की अथाह गहराइयों में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है जिसने समुद्री जीवन और पृथ्वी के जैविक इतिहास को लेकर नई जिज्ञासाएं पैदा कर दी हैं। शोधकर्ताओं को समुद्र की तलहटी में एक विशाल क्षेत्र मिला है, जहां लाखों वर्षों से व्हेल मछलियों के अवशेष जमा होते रहे हैं। वैज्ञानिक इसे दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी व्हेल-फॉल साइट या व्हेल कब्रिस्तान मान रहे हैं। यह खोज समुद्री विज्ञान के क्षेत्र में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। शोधकर्ताओं के अनुसार यह क्षेत्र न केवल प्राचीन व्हेल प्रजातियों के जीवाश्मों का विशाल भंडार है, बल्कि यहां एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र भी विकसित हो चुका है जो पूरी तरह व्हेलों के अवशेषों पर निर्भर है। समुद्र की अत्यधिक गहराई में मौजूद यह दुनिया जीवन और मृत्यु के अनोखे संबंध को दर्शाती है। वैज्ञानिकों ने समुद्र की लगभग 7,000 मीटर गहराई तक जाकर अध्ययन किया। इस दौरान उन्हें सैकड़ों ऐसे स्थान मिले जहां व्हेलों के कंकाल, जीवाश्म और अन्य अवशेष मौजूद थे। जांच में कई प्राचीन प्रजातियों के प्रमाण मिले, जिनमें कुछ जीवाश्म लाखों वर्ष पुराने बताए जा रहे हैं। शोधकर्ताओं को एक ऐसी विलुप्त व्हेल प्रजाति के अवशेष भी मिले, जिसके बारे में पहले कोई वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध नहीं थी। सबसे बड़ा सवाल यह था कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में व्हेलों के अवशेष इसी क्षेत्र में क्यों जमा हुए। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे दो प्रमुख कारण हो सकते हैं। पहला, यह इलाका अतीत में व्हेलों के लिए भोजन का समृद्ध स्रोत रहा होगा, जिससे बड़ी संख्या में व्हेल यहां आती रही होंगी। दूसरा, समुद्र की तलहटी की विशेष भौगोलिक संरचना मृत व्हेलों के अवशेषों को इसी क्षेत्र में इकट्ठा होने के लिए अनुकूल बनाती है। शोध के दौरान यह भी सामने आया कि व्हेलों के सड़ते हुए शरीर समुद्र की गहराइयों में जीवन का नया आधार बन जाते हैं। सामान्य तौर पर इतनी गहराई वाले क्षेत्रों में भोजन की भारी कमी होती है, लेकिन यहां व्हेलों के अवशेषों से निकलने वाले पोषक तत्व अनेक समुद्री जीवों के लिए ऊर्जा का स्रोत बन गए हैं। कंकालों के आसपास विभिन्न प्रकार के समुद्री जीव, कीड़े, झींगे, केकड़े और अन्य सूक्ष्म जीव बड़ी संख्या में पाए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से कई जीव प्रजातियां विज्ञान के लिए पूरी तरह नई हो सकती हैं। इस कारण यह क्षेत्र केवल जीवाश्म अध्ययन तक सीमित नहीं है, बल्कि जैव विविधता और समुद्री विकासक्रम को समझने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है। वैज्ञानिक अब यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि इस तरह के पारिस्थितिकी तंत्र समुद्र की गहराइयों में जीवन को कैसे बनाए रखते हैं। पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह खोज काफी अहम मानी जा रही है। व्हेलों के अवशेषों में बड़ी मात्रा में कार्बन लंबे समय तक सुरक्षित रहता है, जिससे समुद्री कार्बन चक्र और वैश्विक जलवायु संतुलन पर प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र का विस्तृत अध्ययन भविष्य में समुद्री संरक्षण और जलवायु अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध करा सकता है। यह खोज एक बार फिर साबित करती है कि पृथ्वी के महासागरों की गहराइयों में अभी भी ऐसे अनेक रहस्य छिपे हुए हैं, जिनके बारे में मानव ज्ञान बेहद सीमित है। समुद्र की अंधेरी दुनिया में मिला यह विशाल व्हेल कब्रिस्तान वैज्ञानिकों के लिए आने वाले वर्षों तक शोध का महत्वपूर्ण केंद्र बना रहेगा।
250 क्विंटल सरसों गबन मामले में बड़ा खुलासा: 29 लाख का ट्रक और माल बरामद, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

मध्य प्रदेश । शिवपुरी जिले के कोलारस क्षेत्र में सरसों गबन के चर्चित मामले में पुलिस ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। तेंदुआ थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करोड़ों के कृषि व्यापार से जुड़े इस मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही पुलिस ने लगभग 29 लाख रुपए मूल्य का ट्रक और बची हुई सरसों भी बरामद की है। मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। पुलिस के अनुसार मामला उस समय सामने आया जब कोलारस निवासी व्यापारी Anita Gupta ने शिकायत दर्ज कराई कि उनकी फर्म ‘बुलबुल इंटरप्राइजेज’ से आगरा भेजी गई सरसों निर्धारित गंतव्य तक नहीं पहुंची। शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ अमानत में खयानत का प्रकरण दर्ज किया। जानकारी के मुताबिक 21 मार्च 2026 को बुलबुल इंटरप्राइजेज से 250 क्विंटल सरसों आगरा स्थित Mahesh Edible Oil Mills के लिए भेजी गई थी। लेकिन माल लेकर रवाना हुआ ट्रक निर्धारित स्थान तक नहीं पहुंचा। इसके बाद व्यापारी की शिकायत पर ट्रक मालिक रामब्रज गुर्जर और उसके भाई श्रीकेश गुर्जर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। तेंदुआ थाना प्रभारी नीतू सिंह धाकड़ के अनुसार पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आरोपी बची हुई सरसों को बेचने की तैयारी में हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर खरई और कस्बाथाना के बीच घेराबंदी कर कार्रवाई की। इस दौरान ट्रक को रोककर उसकी तलाशी ली गई और मुख्य आरोपी रामब्रज गुर्जर निवासी Dholpur को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने ट्रक (आरजे 11 जीए 9297) को भी जब्त कर लिया। अधिकारियों के अनुसार ट्रक की अनुमानित कीमत करीब 22 लाख रुपए है। वहीं वाहन में लगभग 100 क्विंटल सरसों बरामद हुई, जिसकी बाजार कीमत करीब 7 लाख रुपए आंकी गई है। इस प्रकार पुलिस ने कुल 29 लाख रुपए का मशरूका बरामद किया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि 250 क्विंटल में से बड़ी मात्रा में सरसों पहले ही बेची जा चुकी है। अब पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शेष माल कहां और किसे बेचा गया तथा उससे प्राप्त राशि का क्या हुआ। आरोपी से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। मामले की जांच के दौरान एक और नया नाम सामने आया है। पुलिस के अनुसार रामकेश गुर्जर, जो मुख्य आरोपी रामब्रज का रिश्तेदार बताया जा रहा है, इस पूरे मामले में सहयोगी भूमिका में हो सकता है। पुलिस उसकी भूमिका की भी जांच कर रही है। हालांकि उसके खिलाफ आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। वहीं, मामले में नामजद आरोपी श्रीकेश गुर्जर अभी फरार है। पुलिस उसकी तलाश के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर मामले के सभी पहलुओं का खुलासा किया जाएगा।
शिवपुरी छात्रावास विवाद में बड़ी कार्रवाई: शिकायतों के बाद अधीक्षिका हटाई गईं, जांच में मिलीं गंभीर खामियां

मध्य प्रदेश । शिवपुरी में छात्राओं की लगातार शिकायतों के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए शासकीय अनुसूचित जाति कन्या पोस्ट मैट्रिक छात्रावास की अधीक्षिका प्रीति सूर्येश को उनके पदभार से हटा दिया है। छात्रावास में व्याप्त अव्यवस्थाओं और अधीक्षिका की कार्यप्रणाली को लेकर छात्राओं द्वारा की गई शिकायतों की जांच के बाद यह निर्णय लिया गया। जानकारी के अनुसार छात्रावास में रहने वाली छात्राओं ने 9 जून को आयोजित जनसुनवाई में कलेक्टर के समक्ष अपनी समस्याएं रखी थीं। छात्राओं ने आरोप लगाया था कि छात्रावास में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। इसके बाद 11 जून को भी छात्राएं कलेक्ट्रेट पहुंचीं और अपनी समस्याओं को विस्तार से प्रशासन के सामने रखा। छात्राओं के अनुसार छात्रावास में परोसे जा रहे भोजन में कई बार कीड़े निकल रहे थे। इसके अलावा पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, शौचालयों की संख्या कम थी तथा साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं थी। छात्राओं ने अधीक्षिका के व्यवहार को लेकर भी शिकायत दर्ज कराई थी। कुछ छात्राओं ने यह आरोप भी लगाया था कि शिकायत करने के बाद उन्हें दबाव में लेने और धमकाने का प्रयास किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए थे। कलेक्टर के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया, जिसने छात्रावास का निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। जांच दल ने छात्राओं, कर्मचारियों और संबंधित अभिलेखों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन को सौंपी। जांच रिपोर्ट में छात्रावास की व्यवस्थाओं में कई खामियां और अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई। साथ ही यह भी पाया गया कि अधीक्षिका प्रीति सूर्येश अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में अपेक्षित स्तर की जिम्मेदारी नहीं निभा पाईं। रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई का निर्णय लिया। इसके बाद जिला स्तर पर जारी आदेश में प्रीति सूर्येश को शासकीय अनुसूचित जाति कन्या पोस्ट मैट्रिक छात्रावास, शिवपुरी के अधीक्षकीय प्रभार से तत्काल प्रभाव से मुक्त कर दिया गया। उन्हें अब शासकीय अनुसूचित जनजाति बालक आश्रम शाला, कोटा में शिक्षकीय कार्य के लिए पदस्थ किया गया है। वहीं छात्रावास की व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए नई जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। शासकीय अनुसूचित जाति कन्या सीनियर छात्रावास, फतेहपुर में पदस्थ प्राथमिक शिक्षिका अनीता तिग्गा को छात्रावास का नया प्रभार सौंपा गया है। प्रशासन का कहना है कि छात्राओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है और छात्रावासों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कार्रवाई छात्राओं द्वारा उठाई गई समस्याओं पर प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया के रूप में देखी जा रही है। अब छात्राओं को उम्मीद है कि नई व्यवस्था के तहत छात्रावास की मूलभूत सुविधाओं और व्यवस्थाओं में सुधार होगा।
CM MOHAN YADAV STATEMENT: मीनाक्षी नटराजन मामले पर CM मोहन यादव का कांग्रेस पर निशाना, बोले- हार का ठीकरा दूसरों पर फोड़ना बंद करे पार्टी

CM MOHAN YADAV STATEMENT: भोपाल। कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन निरस्त होने के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपनी हार और कमजोरियों के लिए चुनाव आयोग, अधिकारियों और न्यायपालिका को जिम्मेदार ठहराने की आदत पड़ गई है। CM MOHAN YADAV STATEMENT: ATS एक्शन पर गरजे CM मोहन यादव, बोले- देश विरोधी तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा असफलताओं का दोष दूसरे पर मढ़ती है कांग्रेस मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के नेता लगातार अपनी असफलताओं का दोष दूसरों पर मढ़ने का प्रयास करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी को आत्ममंथन करने की जरूरत है और यह समझना चाहिए कि आखिर उसकी गलतियां कहां हो रही हैं। डॉ. मोहन यादव – कांग्रेस को क्या हो गया है? वे अपनी हार का दोष कभी चुनाव आयोग पर, कभी अधिकारियों पर और कभी सुप्रीम कोर्ट पर डालते रहते हैं। बेहतर होगा कि वे अपने अंदर झांककर देखें कि वे कहां गलत हो रहे हैं और लगातार कमजोर क्यों होते जा रहे हैं। प्रेम विवाह के बाद बढ़े पारिवारिक विवाद का खूनी अंजाम, यूट्यूबर शेख महबूब की चाकुओं से गोदकर हत्या लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाना बंद करो मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय कांग्रेस को अपनी कार्यशैली और संगठनात्मक कमजोरियों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी इस पूरे घटनाक्रम से सबक लेगी और भविष्य में सकारात्मक राजनीति की दिशा में आगे बढ़ेगी। गौरतलब है कि कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा चुनाव से जुड़े नामांकन को लेकर दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है।
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ होंगे देश के नए थल सेनाध्यक्ष, 30 जून को संभालेंगे भारतीय सेना की कमान

नई दिल्ली । भारतीय सेना के नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव के तहत लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ को देश का अगला थल सेनाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, वह 30 जून 2026 को वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्थान लेंगे और भारतीय सेना की कमान संभालेंगे। इस नियुक्ति को राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त हो चुकी है तथा संबंधित विभागों को इसकी सूचना भी भेज दी गई है। भारतीय सेना दुनिया की सबसे बड़ी और पेशेवर सैन्य शक्तियों में शामिल है। ऐसे में थल सेनाध्यक्ष का पद राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति और रक्षा तैयारियों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। नए सेना प्रमुख की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी सैन्य क्षमताओं के आधुनिकीकरण, सीमाओं की सुरक्षा और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रहा है। रक्षा मंत्रालय के आदेश के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ जनरल के पद पर पदोन्नत होकर थल सेनाध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण करेंगे। उनका कार्यकाल 31 अगस्त 2028 तक निर्धारित किया गया है। इस अवधि में वह सेना की परिचालन तैयारियों, आधुनिकीकरण कार्यक्रमों और सामरिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाएंगे। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय सेना के अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते हैं। अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण कमानों और जिम्मेदार पदों पर कार्य किया है। सैन्य नेतृत्व, रणनीतिक योजना और परिचालन अनुभव के कारण उन्हें सेना के शीर्ष पद के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय सेना के सामने तकनीकी आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के बढ़ते उपयोग और बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी। ऐसे में नए सेना प्रमुख का नेतृत्व इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के कार्यकाल में सेना ने कई महत्वपूर्ण पहलें आगे बढ़ाईं। सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नई तकनीकों को अपनाने और युद्धक तैयारियों को बेहतर बनाने की दिशा में कई कदम उठाए गए। अब यह जिम्मेदारी नए नेतृत्व के हाथों में जाएगी, जो इन प्रयासों को आगे बढ़ाने का कार्य करेगा। रक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि नेतृत्व परिवर्तन भारतीय सेना की संस्थागत परंपरा का हिस्सा है, जिससे संगठनात्मक निरंतरता और पेशेवर दक्षता बनी रहती है। नए सेना प्रमुख के नेतृत्व में सेना की दीर्घकालिक रणनीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े लक्ष्यों को नई गति मिलने की उम्मीद की जा रही है। देश की सुरक्षा व्यवस्था में भारतीय सेना की केंद्रीय भूमिका को देखते हुए यह नियुक्ति रक्षा और रणनीतिक क्षेत्र की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मानी जा रही है। अब सभी की नजर 30 जून पर होगी, जब लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ औपचारिक रूप से देश के नए थल सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण करेंगे।
दो साल से फरार ब्राउन शुगर तस्कर इंदौर में गिरफ्तार, पुलिस ने घेराबंदी कर दबोचा

मध्य प्रदेश । इंदौर में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने दो साल से फरार चल रहे एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो ब्राउन शुगर तस्करी के मामले में वांछित था। आरोपी लंबे समय से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था, लेकिन मुखबिर से मिली सटीक सूचना के आधार पर उसे दबोच लिया गया। पुलिस के अनुसार, वर्ष 2024 में भंडारी ब्रिज के पास एमआर-4 रोड पर कार्रवाई के दौरान शादाब खान नामक आरोपी को 105.16 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया गया था। मामले की जांच के दौरान इमरान पिता शमशेर साकरिया निवासी Pratapgarh का नाम सह-आरोपी के रूप में सामने आया था। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी, लेकिन वह लगातार फरार चल रहा था। क्राइम ब्रांच को शुक्रवार को सूचना मिली कि फरार आरोपी इमरान साकरिया पटेल प्रतिमा चौराहे के आसपास मौजूद है और वहां से भागने की तैयारी कर रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने तत्काल रणनीति बनाकर इलाके में घेराबंदी की। बताया गया कि आरोपी नीली जींस और नीली चौकड़ीदार शर्ट पहने हुए था, जिससे उसकी पहचान करने में पुलिस को आसानी हुई। जैसे ही पुलिस टीम ने उसे पकड़ने का प्रयास किया, आरोपी मौके से भागने लगा। हालांकि क्राइम ब्रांच की टीम ने उसका पीछा किया और कुछ ही दूरी पर उसे पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। मामले की जानकारी देते हुए Rajesh Kumar Tripathi ने बताया कि आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और पुलिस को उसकी तलाश थी। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने मामले से जुड़े तथ्यों को स्वीकार किया है। इसके बाद उसकी विधिवत गिरफ्तारी कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी का आपराधिक इतिहास भी रहा है। उसके खिलाफ पहले से एनडीपीएस एक्ट के तीन मामले दर्ज हैं, जबकि एक अन्य मामला मारपीट से संबंधित बताया गया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि फरारी के दौरान आरोपी किन लोगों के संपर्क में था और कहीं वह मादक पदार्थों की तस्करी के अन्य मामलों में भी शामिल तो नहीं था। क्राइम ब्रांच का कहना है कि शहर में नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। फरार और वांछित आरोपियों की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है, ताकि मादक पदार्थों की अवैध तस्करी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
MPL में आज ‘सुपर सैटरडे’, तीन बड़े मुकाबलों से तय होगी सेमीफाइनल की दिशा; मालवा, ग्वालियर और उज्जैन पर दबाव

मध्य प्रदेश । इंदौर में जारी मध्य प्रदेश प्रीमियर लीग (MPL) अब अपने सबसे रोमांचक और निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। लीग मुकाबलों के अंतिम दौर में हर मैच का महत्व बढ़ गया है और शनिवार को आयोजित ‘सुपर सैटरडे’ को पूरे टूर्नामेंट का सबसे अहम दिन माना जा रहा है। दिनभर खेले जाने वाले तीन मुकाबलों के नतीजे से सेमीफाइनल की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी और कई टीमों की किस्मत तय होगी। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें इंदौर के डेली कॉलेज ग्राउंड और Holkar Stadium पर टिकी हुई हैं, जहां दिनभर रोमांचक मुकाबले खेले जा रहे हैं। अंक तालिका में प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी होने के कारण हर टीम के लिए यह मुकाबले ‘करो या मरो’ जैसे बन गए हैं। दिन का पहला मुकाबला डेली कॉलेज ग्राउंड पर मालवा स्टैलियंस और Jabalpur Royal Lions के बीच खेला गया। जबलपुर की टीम अपने प्रमुख बल्लेबाज रितिक ताडा की शानदार फॉर्म के भरोसे मैदान में उतरी, जबकि मालवा स्टैलियंस के लिए यह मुकाबला टूर्नामेंट में अपनी उम्मीदें जिंदा रखने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहा। टीम प्रबंधन और समर्थकों की नजरें इस मैच पर विशेष रूप से बनी रहीं क्योंकि हार की स्थिति में मालवा के लिए आगे की राह कठिन हो सकती है। दूसरा मुकाबला भी डेली कॉलेज ग्राउंड पर खेला जा रहा है, जहां Bundelkhand Bulls और Gwalior Cheetahs आमने-सामने हैं। ग्वालियर टीम की कमान भारतीय क्रिकेटर Rajat Patidar के हाथों में है। पिछली हार के बाद टीम पर दबाव है और वह जीत के साथ जोरदार वापसी करना चाहेगी। दूसरी ओर बुंदेलखंड बुल्स अंक तालिका में अपनी स्थिति मजबूत करने के इरादे से मैदान में उतरी है। इस मुकाबले का परिणाम भी सेमीफाइनल की दौड़ को प्रभावित कर सकता है। दिन का सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल मुकाबला दोपहर बाद होलकर स्टेडियम में खेला जाएगा, जहां Ujjain Falcons का सामना Rewa Jaguars से होगा। उज्जैन फाल्कन्स की टीम इस समय अच्छे लय में दिखाई दे रही है। टीम के बल्लेबाज माधव तिवारी और सोहम पटवर्धन लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं रीवा जगुआर्स अपनी पिछली गलतियों को सुधारते हुए जीत दर्ज करने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेगी। टूर्नामेंट अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है जहां एक जीत या हार पूरी अंक तालिका का समीकरण बदल सकती है। कई टीमों के अंक बेहद करीब हैं, इसलिए नेट रन रेट भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे में कप्तानों और टीम प्रबंधन के सामने सिर्फ जीत ही नहीं बल्कि बड़े अंतर से जीत हासिल करने की चुनौती भी होगी। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि शनिवार के मुकाबलों के बाद सेमीफाइनल में पहुंचने वाली टीमों की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी। यही वजह है कि खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रशंसकों की उत्सुकता भी चरम पर है। इंदौर में खेला जा रहा यह ‘सुपर सैटरडे’ MPL के इतिहास के सबसे रोमांचक दिनों में से एक साबित हो सकता है।
जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन में AN-32 क्रैश से मचा हड़कंप, लैंडिंग के बाद लगी भीषण आग, हादसे की जांच शुरू

नई दिल्ली । असम के जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर भारतीय वायुसेना के AN-32 परिवहन विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटना ने सैन्य और सुरक्षा तंत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। शनिवार को हुई इस घटना में विमान लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गया। दुर्घटना के तुरंत बाद विमान में आग लग गई, जिससे एयरबेस परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। घटना की जानकारी मिलते ही वायुसेना की आपातकालीन टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, AN-32 विमान नियमित परिचालन उड़ान पर था और जोरहाट एयरफील्ड पर उतरने की प्रक्रिया में था। इसी दौरान विमान निर्धारित रनवे पर सुरक्षित लैंडिंग नहीं कर सका और एयरबेस के भीतर स्थित घास एवं उबड़-खाबड़ क्षेत्र में जा पहुंचा। टकराव के बाद विमान को गंभीर क्षति पहुंची और उसमें आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद तेज विस्फोट जैसी आवाज भी सुनाई दी। हादसे की तस्वीरों और शुरुआती रिपोर्टों से संकेत मिले हैं कि विमान दो हिस्सों में टूट गया। हालांकि दुर्घटना के कारणों को लेकर अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। वायुसेना ने कहा है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम दुर्घटना के कारणों का विस्तृत आकलन करेगी। जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पूर्वोत्तर भारत में भारतीय वायुसेना की रणनीतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यह एयरबेस सीमावर्ती क्षेत्रों तक सैन्य रसद पहुंचाने, अभियान संचालन और आपातकालीन सहायता मिशनों में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे पर हुए विमान हादसे को गंभीरता से लिया जा रहा है। AN-32 भारतीय वायुसेना के प्रमुख परिवहन विमानों में शामिल है। सोवियत मूल के इस दो इंजन वाले टर्बोप्रॉप विमान का उपयोग सैनिकों, सैन्य उपकरणों और आवश्यक सामग्री के परिवहन के लिए व्यापक स्तर पर किया जाता है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में संचालन की क्षमता के कारण यह विमान लंबे समय से वायुसेना के बेड़े का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। हादसे के बाद एयरबेस पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। बचाव दलों ने आग पर नियंत्रण पाने के साथ-साथ विमान के मलबे की जांच भी शुरू कर दी है। फिलहाल किसी के हताहत होने या घायल होने को लेकर स्पष्ट और आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। वायुसेना ने कहा है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यक सूचनाएं उपलब्ध होते ही साझा की जाएंगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विमान दुर्घटनाओं की जांच में तकनीकी खामियों, मौसम की स्थिति, पायलट इनपुट तथा लैंडिंग प्रक्रिया से जुड़े सभी पहलुओं का गहन परीक्षण किया जाता है। इसी क्रम में इस मामले में भी विस्तृत जांच की संभावना है। दुर्घटना का वास्तविक कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर वायुसेना और रक्षा अधिकारियों की नजर बनी हुई है। राहत एवं सुरक्षा संबंधी सभी उपायों को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि जांच एजेंसियां हादसे की वजहों का पता लगाने में जुटी हैं। इस घटना ने एक बार फिर सैन्य विमानन सुरक्षा और परिचालन मानकों की समीक्षा की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
छह दिन की विदेश यात्रा पर निकले प्रधानमंत्री मोदी, G7 बैठक से लेकर रणनीतिक साझेदारी तक कई अहम एजेंडे पर होगी चर्चा

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को छह दिवसीय विदेश यात्रा पर रवाना हो गए, जिसके तहत वह फ्रांस और स्लोवाकिया का दौरा करेंगे। इस यात्रा को भारत की विदेश नीति और वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के साथ-साथ कई देशों के शीर्ष नेताओं से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर बातचीत करेंगे। यह अवसर भारत को वैश्विक आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी मुद्दों पर अपनी भूमिका और दृष्टिकोण को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का मंच प्रदान करेगा। प्रधानमंत्री मोदी का यह फ्रांस दौरा विशेष महत्व रखता है। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी सातवीं फ्रांस यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों को दर्शाती है। यात्रा से पहले प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की रणनीतिक सोच में फ्रांस का विशेष स्थान है और दोनों देशों के बीच रक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार, ऊर्जा तथा वैश्विक सहयोग के क्षेत्रों में निरंतर प्रगति हुई है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह दौरा द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने में सहायक सिद्ध होगा। फ्रांस प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात करेंगे। दोनों नेता इस वर्ष फरवरी में हुई चर्चाओं के बाद विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग, रक्षा साझेदारी, उभरती तकनीकों और वैश्विक चुनौतियों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श होने की संभावना है। इस मुलाकात को भारत-फ्रांस संबंधों के अगले चरण की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण बैठक माना जा रहा है। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम में भी भाग लेंगे। यह पहल भारत और फ्रांस के बीच नवाचार सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। कार्यक्रम में भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप, निवेशक, नवप्रवर्तक और वेंचर कैपिटल प्रतिनिधि एक मंच पर आएंगे। माना जा रहा है कि इससे भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और अवसर प्राप्त होंगे। नवाचार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर दोनों देशों का विशेष फोकस रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी 17 जून को होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे। यह सातवां अवसर होगा जब वह इस प्रतिष्ठित वैश्विक मंच का हिस्सा बनेंगे। इसके साथ ही वह लगातार सात बार जी-7 बैठक में शामिल होने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन जाएंगे। सम्मेलन के दौरान वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जलवायु परिवर्तन और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। जी-7 बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई प्रमुख विश्व नेताओं से मुलाकात हो सकती है। इनमें अमेरिका सहित अन्य प्रमुख देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख शामिल हो सकते हैं। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, व्यापार एवं निवेश बढ़ाने और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा होने की उम्मीद है। यात्रा का दूसरा महत्वपूर्ण पड़ाव स्लोवाकिया होगा। वर्ष 1993 में स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली स्लोवाकिया यात्रा है। इस दौरे से दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह संपूर्ण यात्रा भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, रणनीतिक साझेदारियों के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी सक्रिय उपस्थिति को और मजबूत करेगी।
इंदौर में मल्टी के नीचे हार्डवेयर दुकान में भीषण आग, समय रहते खाली कराए गए फ्लैट; बड़ा हादसा टला

मध्य प्रदेश । इंदौर के वीर सावरकर नगर क्षेत्र में शनिवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब माया भवन मल्टी के भूतल पर स्थित एक हार्डवेयर दुकान में अचानक आग लग गई। आग लगते ही दुकान से धुएं का घना गुबार उठने लगा और देखते ही देखते लपटें तेज हो गईं। घटना के समय मल्टी में रहने वाले परिवारों में दहशत फैल गई और लोग तुरंत अपने फ्लैट छोड़कर नीचे सड़क पर आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों ने बिना समय गंवाए आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया। स्थानीय निवासी बाल्टियों और प्लास्टिक के केनों में पानी भरकर आग पर डालने लगे। हालांकि दुकान में मौजूद ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैलती रही और लोगों के प्रयास पर्याप्त साबित नहीं हुए। मल्टी में रहने वाले निवासी सुभाष चौधरी ने बताया कि आग लगने के कुछ ही मिनटों में धुआं ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गया था। स्थिति को देखते हुए सभी परिवारों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। उन्होंने बताया कि बिल्डिंग में मौजूद सभी फ्लैटों के लोग समय रहते बाहर निकल आए, जिससे किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय पार्षद Prashant Badwe भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने तत्काल पानी का टैंकर बुलवाने की व्यवस्था की और यह सुनिश्चित किया कि बिल्डिंग में कोई व्यक्ति अंदर फंसा न हो। इसी दौरान इंदौर फायर ब्रिगेड की दो दमकल गाड़ियां भी घटनास्थल पर पहुंच गईं। दमकलकर्मियों ने मोर्चा संभालते हुए आग बुझाने का अभियान शुरू किया। फायर ब्रिगेड अधिकारियों के अनुसार आग पर नियंत्रण पाने के लिए करीब 20 हजार लीटर पानी का इस्तेमाल करना पड़ा। काफी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। अधिकारियों का कहना है कि यदि आग पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया जाता तो यह ऊपरी मंजिलों तक फैल सकती थी और बड़ा हादसा हो सकता था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग शुभम इंटरप्राइजेज नामक हार्डवेयर दुकान में लगी थी, जो जी प्लस थ्री भवन के भूतल पर किराए से संचालित की जा रही थी। फायर ब्रिगेड अधिकारियों के मुताबिक दुकान में बड़ी मात्रा में पीवीसी फिटिंग सामग्री, पेंट, थिनर, हार्डवेयर का सामान और लकड़ी का फर्नीचर रखा हुआ था। इन ज्वलनशील वस्तुओं के कारण आग तेजी से फैल गई और दुकान के भीतर रखा काफी सामान जलकर नष्ट हो गया। आग की तीव्रता का असर ऊपरी मंजिल पर स्थित एक फ्लैट तक भी पहुंचा। आग और गर्मी के कारण फ्लैट में लगे पर्दे, पलंग और एलईडी टीवी को नुकसान पहुंचा है। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी भी व्यक्ति के घायल होने या जनहानि की सूचना नहीं है। फायर ब्रिगेड और स्थानीय प्रशासन ने घटना के बाद आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। प्रारंभिक स्तर पर शॉर्ट सर्किट या ज्वलनशील सामग्री में किसी तकनीकी कारण से आग लगने की आशंका जताई जा रही है, लेकिन वास्तविक कारण जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।