स्लोवाकिया में प्रधानमंत्री मोदी का पारंपरिक ‘ब्रेड और नमक’ से स्वागत, सांस्कृतिक सम्मान की अनोखी परंपरा बनी आकर्षण का केंद्र

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्लोवाकिया दौरे ने भारत और यूरोप के बीच कूटनीतिक संबंधों को नई चर्चा दी है। स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का जिस पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया, उसने न केवल राजनीतिक बल्कि सांस्कृतिक स्तर पर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। स्लोवाक परंपरा के अनुसार उन्हें ‘ब्रेड और नमक’ भेंट कर सम्मानित किया गया, जिसे वहां अतिथि सत्कार, मित्रता और सद्भावना का सर्वोच्च प्रतीक माना जाता है। स्लोवाकिया की स्वतंत्रता के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक यात्रा मानी जा रही है। ऐसे में इस दौरे को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री के आगमन पर स्लोवाकिया के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुरूप सम्मान प्रदान किया। ब्रातिस्लावा पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी का भारतीय समुदाय के लोगों ने भी उत्साहपूर्वक स्वागत किया। बड़ी संख्या में मौजूद भारतीय मूल के लोगों ने उनका अभिनंदन किया और भारत तथा स्लोवाकिया के बीच बढ़ती मित्रता पर खुशी व्यक्त की। इस दौरान दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों की झलक भी देखने को मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने स्वागत को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि ‘ब्रेड और नमक’ की यह परंपरा स्लोवाकिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का सुंदर प्रतीक है। उन्होंने इसे मित्रता, सम्मान और सद्भावना के उन मूल्यों का प्रतिनिधि बताया जिन्हें दोनों देश महत्व देते हैं। उनके अनुसार ऐसी परंपराएं देशों के बीच लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पूर्वी और मध्य यूरोप के कई देशों में ‘ब्रेड और नमक’ से स्वागत करने की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार ब्रेड समृद्धि, जीवन और खुशहाली का प्रतीक है, जबकि नमक सम्मान, सुरक्षा और स्थायी संबंधों का प्रतिनिधित्व करता है। किसी विशिष्ट अतिथि को इन दोनों वस्तुओं का उपहार देना अत्यंत सम्मानजनक माना जाता है। स्लोवाकिया के अलावा रूस, पोलैंड, यूक्रेन, सर्बिया और अन्य कई स्लाव देशों में भी यह परंपरा आज तक जीवित है। महत्वपूर्ण राष्ट्रीय नेताओं, राजनयिकों और विशिष्ट मेहमानों के स्वागत में इस रीति का उपयोग किया जाता है। इसे केवल औपचारिक स्वागत नहीं बल्कि विश्वास और मित्रता का प्रतीकात्मक संदेश माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक यात्राओं में सांस्कृतिक प्रतीकों का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे अवसर देशों के बीच केवल राजनीतिक संवाद तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और आपसी सम्मान को भी सामने लाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत में अपनाई गई यह परंपरा भी इसी व्यापक सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा मानी जा रही है। भारत और स्लोवाकिया के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, निवेश और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। स्वागत समारोह में दिखाई गई सांस्कृतिक आत्मीयता ने इस यात्रा को और अधिक विशेष बना दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की सांस्कृतिक परंपराएं देशों के बीच विश्वास और सौहार्द का वातावरण तैयार करती हैं। ब्रातिस्लावा में प्रधानमंत्री मोदी का ‘ब्रेड और नमक’ से हुआ स्वागत इसी संदेश को मजबूत करता है कि कूटनीति केवल समझौतों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह सांस्कृतिक सम्मान और मानवीय जुड़ाव से भी संचालित होती है।
तिरुपति में केश दान का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, 283 टन मानव बाल की नीलामी से 176 करोड़ रुपये की आय का अनुमान

नई दिल्ली । आंध्र प्रदेश स्थित भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के प्रसिद्ध तिरुमला मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा किए जाने वाले केश दान ने इस वर्ष नया इतिहास रच दिया है। धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़ी इस प्रथा ने न केवल श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी दर्ज की है, बल्कि मंदिर प्रशासन के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी साबित हुई है। मई 2026 के दौरान रिकॉर्ड संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा केश दान किए जाने के बाद तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को मानव बालों की नीलामी से अब तक की सबसे अधिक आय मिलने की संभावना जताई जा रही है। मंदिर प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार मई माह के पहले 27 दिनों में 12 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अपना मुंडन कराया। यह संख्या पिछले दो वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि मंदिर में केश दान की धार्मिक परंपरा के प्रति लोगों की आस्था पहले की तुलना में और मजबूत हुई है। इस रिकॉर्ड केश दान का सीधा प्रभाव मंदिर की आर्थिक स्थिति पर भी दिखाई दे रहा है। प्रशासन ने चालू वित्त वर्ष में मानव बालों की ई-नीलामी से लगभग 176 करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया है। यह पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि मानी जा रही है। मंदिर प्रशासन के अनुसार संचित मानव बालों का भंडार अब कई लाख किलोग्राम तक पहुंच चुका है, जिसकी वैश्विक स्तर पर मांग बनी हुई है। मानव बालों की ई-नीलामी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। तिरुमला मंदिर में प्राप्त बालों को गुणवत्ता और लंबाई के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। लंबे और उच्च गुणवत्ता वाले बालों की बाजार में विशेष मांग होती है, जिनका उपयोग विग, हेयर एक्सटेंशन और विभिन्न सौंदर्य उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। यही कारण है कि मंदिर को इस माध्यम से हर वर्ष करोड़ों रुपये की आय प्राप्त होती है। धार्मिक दृष्टि से केश दान को समर्पण, त्याग और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के चरणों में बाल अर्पित करने से भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इसी विश्वास के कारण देश और विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु इस परंपरा में भाग लेते हैं। पौराणिक कथाओं में भी इस परंपरा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार भगवान वेंकटेश्वर से जुड़ी एक प्राचीन कथा के कारण भक्त अपने बाल अर्पित करते हैं। समय के साथ यह धार्मिक परंपरा मंदिर की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई और आज यह श्रद्धा तथा आर्थिक प्रबंधन दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व रखती है। पिछले कुछ वर्षों में मंदिर को मानव बालों की बिक्री से होने वाली आय में लगातार वृद्धि देखने को मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्राकृतिक मानव बालों की बढ़ती मांग और उच्च गुणवत्ता के कारण तिरुमला मंदिर की नीलामी को विशेष महत्व प्राप्त हुआ है। इससे मंदिर प्रशासन को अपनी धार्मिक, सामाजिक और जनकल्याणकारी गतिविधियों के संचालन के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होते हैं। केश दान की यह परंपरा आज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रह गई है, बल्कि आस्था और आर्थिक प्रबंधन का एक अनूठा उदाहरण बनकर उभरी है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और वैश्विक बाजार में मानव बालों की मांग को देखते हुए आने वाले वर्षों में भी इस आय स्रोत के और मजबूत होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
सीमा विवाद के बीच अवैध घुसपैठ पर सख्ती तेज, 57 बांग्लादेशी गिरफ्तार; रानीनगर सेक्टर में बढ़ी कूटनीतिक और सुरक्षा चुनौती

नई दिल्ली । भारत-बांग्लादेश सीमा पर एक बार फिर सुरक्षा और नागरिकता से जुड़ा विवाद चर्चा के केंद्र में आ गया है। पश्चिम बंगाल के रानीनगर सीमा क्षेत्र में 12 लोगों की नागरिकता को लेकर भारत की सीमा सुरक्षा बल और बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड के बीच मतभेद गहरा गया है। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के सीमा प्रबंधन और अवैध प्रवासन से जुड़े मुद्दों को एक बार फिर प्रमुखता से सामने ला दिया है। मामला उस समय गंभीर हो गया जब बांग्लादेश की ओर से आरोप लगाया गया कि भारतीय सुरक्षा बलों ने कुछ लोगों को सीमा पार भेजने का प्रयास किया। दूसरी ओर भारतीय पक्ष ने ऐसे किसी भी आरोप से स्पष्ट रूप से इनकार किया है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि संबंधित क्षेत्र से किसी व्यक्ति को सीमा पार नहीं भेजा गया और लगाए जा रहे आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। विवाद के केंद्र में मौजूद 12 लोगों में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल बताए जा रहे हैं। इनकी नागरिकता को लेकर दोनों देशों की सीमा सुरक्षा एजेंसियों के बीच अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। एक पक्ष इन्हें बांग्लादेशी नागरिक बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इनकी पहचान को लेकर अलग रुख अपना रहा है। इसी कारण मामला केवल सीमा सुरक्षा का नहीं बल्कि मानवीय और प्रशासनिक चुनौती का रूप भी ले चुका है। स्थिति को सुलझाने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच लगातार फ्लैग मीटिंग आयोजित की गई हैं। हालांकि अब तक किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी है। बातचीत के बावजूद नागरिकता निर्धारण और जिम्मेदारी तय करने को लेकर गतिरोध बना हुआ है। इससे सीमा क्षेत्र में संवेदनशीलता और सतर्कता दोनों बढ़ गई हैं। इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में भारत सरकार द्वारा चलाया जा रहा ऑपरेशन पुश बैक भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य अवैध रूप से भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों और घुसपैठियों की पहचान कर कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें वापस भेजना है। सुरक्षा एजेंसियां इस अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन की दृष्टि से आवश्यक मानती हैं। इसी बीच नदिया जिले में अवैध रूप से निवास करने के आरोप में 57 बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। विभिन्न पुलिस इकाइयों द्वारा की गई कार्रवाई में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को हिरासत में लिया गया है जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं पाए गए। प्रशासन अब उनकी पहचान और कानूनी स्थिति की जांच कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और बांग्लादेश के बीच लंबी और संवेदनशील सीमा होने के कारण अवैध प्रवासन, मानव तस्करी और दस्तावेज संबंधी विवाद समय-समय पर सामने आते रहते हैं। ऐसे मामलों में दोनों देशों की एजेंसियों के बीच समन्वय और तथ्यों का सत्यापन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। वर्तमान विवाद ऐसे समय सामने आया है जब सीमा सुरक्षा और अवैध प्रवासन का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के अधिकारियों के बीच होने वाली वार्ताओं पर सभी की नजर रहेगी। उम्मीद की जा रही है कि बातचीत और प्रशासनिक सहयोग के माध्यम से इस विवाद का समाधान निकाला जाएगा तथा सीमा क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल होगी।
2027 नगरीय निकाय चुनाव की तैयारी शुरू, महापौर-अध्यक्ष पदों के आरक्षण के लिए आयुक्त को मिली जिम्मेदारी

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में वर्ष 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर राज्य सरकार ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। विधानसभा चुनाव से लगभग एक वर्ष पहले होने वाले नगर निगम और नगरपालिका चुनावों को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इनके परिणाम प्रदेश की राजनीतिक दिशा और जनता के मूड का संकेत देने वाले माने जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं को समय रहते पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी एक अधिसूचना के अनुसार, नगरीय निकायों में महापौर और अध्यक्ष पदों के आरक्षण निर्धारण की पूरी प्रक्रिया के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के आयुक्त को अधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया है। यह प्रक्रिया मध्य प्रदेश नगरपालिका (महापौर तथा अध्यक्ष के पद का आरक्षण) नियम, 1999 के प्रावधानों के तहत संचालित की जाएगी। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब State Election Commission Madhya Pradesh ने भी आगामी नगरीय निकाय चुनावों के लिए मतदाता सूची को अद्यतन करने का कार्य शुरू कर दिया है। निर्वाचन आयोग द्वारा नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत एवं स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने तथा अन्य सुधार संबंधी प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नगरीय निकाय चुनावों के नतीजे अक्सर विधानसभा चुनावों से पहले जनता के रुझान का संकेत देते हैं। यही कारण है कि सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों इन चुनावों को बेहद गंभीरता से लेते हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले होने वाले निकाय चुनाव प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। पिछले चुनावों के अनुभव को देखते हुए सरकार इस बार किसी भी प्रकार की देरी या कानूनी विवाद से बचना चाहती है। गौरतलब है कि वर्ष 2019 में नगरीय निकाय चुनाव प्रस्तावित थे, लेकिन विभिन्न प्रशासनिक कारणों से प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हो सकी। इसके बाद वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण चुनावी गतिविधियां प्रभावित हुईं और चुनाव लगभग दो वर्षों तक टल गए। अंततः मई 2022 में नगरीय निकाय चुनाव संपन्न कराए गए थे। सरकार अब पिछली परिस्थितियों से सबक लेते हुए चुनाव से काफी पहले आरक्षण, मतदाता सूची और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरा करना चाहती है, ताकि किसी प्रकार की न्यायिक या प्रशासनिक बाधा उत्पन्न न हो। आरक्षण व्यवस्था की बात करें तो प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में कुल पदों में 50 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए निर्धारित रहेगा। अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षण संबंधित निकाय क्षेत्र की जनसंख्या के अनुपात के आधार पर तय किया जाएगा। वहीं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू रहेगा। आरक्षण की प्रक्रिया रोटेशन प्रणाली के आधार पर की जाएगी। इसके तहत पिछली बार आरक्षित रहे निकायों को छोड़कर नए निकायों को आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों में महापौर पदों की आरक्षण श्रेणी लॉटरी प्रणाली के माध्यम से तय की जाएगी। इन श्रेणियों में अनारक्षित, ओबीसी, एससी, एसटी और महिला आरक्षित वर्ग शामिल होंगे। सरकार की इस शुरुआती तैयारी को आगामी चुनावी रणनीति और प्रशासनिक सतर्कता के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में आरक्षण प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय सामने आने की संभावना है।
GUNA TRAIN THEFT: चलती ट्रैन से उड़ाए 16 लाख के गहने, भीड़ का फायदा उठाकर चोरों ने किया हाथ साफ

HIGHLIGHTS: चलती ट्रेन में 16 लाख के जेवर चोरी ट्रॉली बैग से गायब हुए गहने भीड़ का फायदा उठाकर वारदात गुना जीआरपी ने दर्ज किया केस CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस GUNA TRAIN THEFT: गुना। बीना-ग्वालियर पैसेंजर ट्रेन में सफर कर रहे एक परिवार के साथ बड़ी चोरी की वारदात सामने आई है। ट्रेन में यात्रा के दौरान अज्ञात चोरों ने ट्रॉली बैग से करीब 16 लाख रुपए के सोने-चांदी के आभूषण चोरी कर लिए। घटना गुना जीआरपी थाना क्षेत्र की है, जहां पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक अशोकनगर जिले के बरखेड़ा गांव निवासी आबिद खान अपने परिवार के साथ बीना-ग्वालियर पैसेंजर ट्रेन से मुंगावली से म्याना की ओर जा रहे थे। परिवार ने अपना ट्रॉली बैग कोच की ऊपरी सीट पर रखा था, और वह अपने परिवार के साथ निचे की बिर्थ पर बैठे थे। मानपुर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के रिश्तेदार पर जानलेवा हमले का आरोप, लाठी-तलवार से मारपीट के बाद थाने का घेराव रुठियाई-गुना स्टेशन के बीच की वारदात रुठियाई और गुना स्टेशन के बीच ट्रेन में काफी भीड़ हो गई। इसी दौरान कुछ यात्री ऊपरी सीटों पर भी जाकर बैठ गए। माना जा रहा है कि भीड़भाड़ का फायदा उठाकर अज्ञात चोरों ने ट्रॉली बैग की चेन खोलकर उसमें रखे कीमती जेवर पार कर दिए। गुना स्टेशन पहुंचने से कुछ देर पहले जब आबिद खान की नजर बैग पर पड़ी तो उसकी चेन खुली हुई थी। बैग की जांच करने पर उसमें रखे सोने और चांदी के सभी आभूषण गायब मिले। चोरी गए जेवरों में सोने के हार, कड़े, कंगन, चेन, अंगूठियां, टॉप्स और अन्य जेवर शामिल हैं। इसके अलावा बड़ी मात्रा में चांदी के गहने भी चोरी हुए हैं। पीड़ित का कहना है कि सभी जेवरों की कुल कीमत करीब 16 लाख रुपए है। BRICS कृषि एजेंडे में ब्राजील सबसे आगे, 88% वादों पर अमल; भारत 85% के साथ दूसरे स्थान पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई शिकायत मिलने के बाद जीआरपी गुना ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों की जानकारी जुटाने के साथ-साथ रुठियाई और गुना रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है।
ईरान-अमेरिका समझौते के बहाने कांग्रेस का मोदी सरकार पर प्रहार, जयराम रमेश ने विदेश नीति और पाकिस्तान पर उठाए सवाल
नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच संभावित समझौते की खबरों के बीच देश में राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए कांग्रेस ने एक ओर जहां क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार के लिए इसे सकारात्मक कदम बताया, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार की विदेश नीति और आर्थिक प्रबंधन को लेकर कई गंभीर सवाल भी उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और होर्मुज जलडमरूमध्य के सामान्य रूप से खुलने की संभावना भारत के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। उनका मानना है कि इस समुद्री मार्ग के सुचारु संचालन से ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ने वाले दबाव में कमी आ सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इससे देश की अर्थव्यवस्था के सामने पहले से मौजूद संरचनात्मक चुनौतियां स्वतः समाप्त नहीं हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था कई ऐसे मुद्दों का सामना कर रही है जो पश्चिम एशिया में हालिया तनाव शुरू होने से पहले से मौजूद थे। उनके अनुसार रुपये पर लंबे समय से दबाव बना हुआ है और विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग तथा उपलब्धता के बीच अंतर लगातार बढ़ता गया है। ऐसे हालात में केवल वैश्विक परिस्थितियों में सुधार से घरेलू आर्थिक चुनौतियों का समाधान संभव नहीं माना जा सकता। कांग्रेस नेता ने निवेश के मोर्चे पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में निवेश की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। उनके अनुसार वास्तविक मजदूरी वृद्धि में ठहराव, विनिर्माण क्षेत्र पर दबाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं ने आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन से होने वाले आयात पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने के कारण व्यापार घाटा बढ़ा है, जिसका असर घरेलू उद्योगों पर भी पड़ा है। जयराम रमेश ने कारोबारी माहौल को लेकर भी सरकार की आलोचना की। उनका कहना था कि नियामकीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी चुनौतियों ने निवेशकों के विश्वास को प्रभावित किया है। उन्होंने दावा किया कि उद्योग जगत को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद वातावरण की आवश्यकता है ताकि दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहन मिल सके। विदेश नीति के मुद्दे पर कांग्रेस ने पाकिस्तान और चीन के बढ़ते सामरिक संबंधों का उल्लेख किया। जयराम रमेश ने कहा कि पाकिस्तान, जिसे वर्षों पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की दिशा में भारत को सफलता मिली थी, अब क्षेत्रीय और वैश्विक मंचों पर पहले की तुलना में अधिक सक्रिय दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की रणनीतिक संरचना में चीन की गहरी भागीदारी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक चुनौती बनकर उभरी है। कांग्रेस नेता ने पश्चिम एशिया के संदर्भ में भारत की कूटनीतिक प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि भारत के दीर्घकालिक राष्ट्रीय हित संतुलित और बहुआयामी विदेश नीति की मांग करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार इस दिशा में अपेक्षित संतुलन प्रदर्शित नहीं कर सकी है। साथ ही उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय शांति, मानवीय सरोकारों और रणनीतिक हितों के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी बड़ी शक्ति के लिए आवश्यक होता है। ईरान-अमेरिका समझौते की संभावनाओं के बीच कांग्रेस की यह प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों पर दुनिया की नजर बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में इस समझौते के वास्तविक प्रभाव और क्षेत्रीय राजनीति पर इसके परिणामों को लेकर देश के भीतर भी बहस जारी रह सकती है।
एमएसएमई को मिला बड़ा प्रोत्साहन: ढाई साल में 3723 करोड़ रुपए का इंसेंटिव, अब अगले ढाई साल में 4500 करोड़ देने का लक्ष्य

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित ‘समृद्ध एमएसएमई-विकसित मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम में 900 उद्योग इकाइयों को सिंगल क्लिक के माध्यम से 360 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई। इसके साथ ही 31 मार्च 2026 तक लंबित सभी पात्र देनदारियों का भी निराकरण कर दिया गया। कुछ उद्योगों को विशेष सहायता के तहत मंडी शुल्क और बिजली अनुदान का लाभ भी दिया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले ढाई वर्षों में एमएसएमई क्षेत्र को 4500 करोड़ रुपए का इंसेंटिव उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एमएसएमई क्षेत्र रोजगार सृजन का सबसे बड़ा आधार बनकर उभरा है और सरकार इसकी क्षमता को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां संचालित हो रही हैं, जिनके माध्यम से सवा करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। इनमें 4 लाख 41 हजार से ज्यादा इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं, जो प्रदेश में महिला उद्यमिता की बढ़ती भागीदारी का संकेत है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार नई योजनाएं और अवसर उपलब्ध करा रही है। कार्यक्रम में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पिछले ढाई वर्षों के दौरान राज्य में 30 नए औद्योगिक क्षेत्रों और 14 औद्योगिक क्लस्टरों को स्वीकृति दी गई है। इसके अलावा 1063 औद्योगिक भूखंडों का आवंटन भी किया जा चुका है। राज्य सरकार का मानना है कि इन पहलों से निवेश बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश स्टार्टअप इकोसिस्टम में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 7400 से अधिक स्टार्टअप कार्यरत हैं, जिनमें से 3400 से अधिक का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। यह संख्या कुल स्टार्टअप्स का लगभग 50 प्रतिशत है, जो महिला नेतृत्व वाले उद्यमों की मजबूत उपस्थिति को दर्शाती है। एमएसएमई मंत्री Chaitanya Kashyap और प्रमुख सचिव Raghvendra Singh ने बताया कि वर्तमान सरकार के पिछले ढाई वर्षों में उद्योगों को 3723 करोड़ रुपए का इंसेंटिव दिया गया है। इसके मुकाबले इससे पहले के ढाई वर्षों में यह राशि केवल 1245 करोड़ रुपए थी। यानी प्रोत्साहन राशि में लगभग तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 तक प्रदेश में एक करोड़ एमएसएमई इकाइयों के लक्ष्य की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर जिले में उद्योग और हर परिवार में रोजगार सुनिश्चित करना है। इस दिशा में अगले ढाई से तीन वर्षों में 5000 नए औद्योगिक भूखंड आवंटित किए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार अब तक 76 विधानसभा क्षेत्रों में एमएसएमई सेंटर स्थापित करने के लिए स्थानों का चयन भी किया जा चुका है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सागर जिले के केसली में आयोजित लाडली बहना सम्मेलन का भी उल्लेख किया, जहां उन्होंने लाडली बहना योजना की 37वीं किस्त के रूप में 1.25 करोड़ हितग्राहियों के खातों में 1835 करोड़ रुपए की राशि हस्तांतरित की। साथ ही 190.85 करोड़ रुपए लागत के 53 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमि-पूजन भी किया गया।
मानपुर में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के रिश्तेदार पर जानलेवा हमले का आरोप, लाठी-तलवार से मारपीट के बाद थाने का घेराव

मध्यप्रदेश । महू के मानपुर थाना क्षेत्र में रविवार को एक विवादित घटना के बाद तनाव की स्थिति बन गई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष Jitu Patwari के रिश्तेदार बताए जा रहे संजय पटेल पर कथित रूप से जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पहले उनकी बाइक को कार से टक्कर मारी गई और उसके बाद उन पर लाठी तथा धारदार हथियारों से हमला किया गया। घटना में गंभीर रूप से घायल संजय पटेल को उपचार के लिए इंदौर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार विष्णुप्रसाद पटेल ने आरोप लगाया है कि रविवार सुबह संजय पटेल बाइक से कहीं जा रहे थे। इसी दौरान पंजाबी ढाबे के पास एक कार ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि टक्कर के बाद कार से उन्हें कुचलने का प्रयास किया गया। इसके बाद कार में सवार कुछ लोगों ने कथित रूप से उन्हें घेर लिया और मारपीट शुरू कर दी। शिकायतकर्ताओं के अनुसार मिथुन ठाकुर, धनसिंह ठाकुर, विरेन ठाकुर और उनके अन्य साथियों ने लाठी तथा तलवार जैसे हथियारों से हमला किया। घटना में संजय पटेल गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए इंदौर रेफर किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच जारी है और सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और समर्थक बड़ी संख्या में मानपुर थाने पहुंच गए। उन्होंने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर थाने का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों ने लोगों को कार्रवाई का आश्वासन देकर स्थिति को शांत कराया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस घटना की पृष्ठभूमि में दो पक्षों के बीच पहले से चला आ रहा विवाद भी सामने आया है। मानपुर पुलिस के मुताबिक 12 जून को नाली निर्माण को लेकर दोनों पक्षों में विवाद हुआ था। उस समय संजय पटेल की ओर से कुछ लोगों के खिलाफ घर में घुसकर तोड़फोड़ और मारपीट का मामला दर्ज कराया गया था। वहीं दूसरे पक्ष ने भी पत्थरबाजी और मारपीट के आरोप लगाते हुए प्रतिपक्ष के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस का कहना है कि दोनों मामलों की जांच की जा रही है और पुराने विवाद तथा ताजा घटना के बीच संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर विशेष टीमें गठित की हैं। इस संबंध में एसडीओपी Lalit Singh Sikarwar और टीआई Mahendra Makashre ने बताया कि आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस के अनुसार आरोप सिद्ध होने की स्थिति में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही कुछ आरोपियों को गुंडा सूची में शामिल करने और जिलाबदर की प्रक्रिया शुरू करने पर भी विचार किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस सभी पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद, अमेरिका-ईरान सहमति पर पीएम मोदी ने जताया भरोसा; स्थायी समाधान के लिए संवाद पर दिया जोर

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का भारत ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को क्षेत्रीय शांति और वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण कदम बताते हुए उम्मीद जताई कि इसके प्रभाव से न केवल संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री गतिविधियों को भी राहत मिलेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चले तनाव के कारण कई देशों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जबकि विभिन्न क्षेत्रों में जान-माल का भी नुकसान हुआ। भारत ने इस घटनाक्रम को सकारात्मक दृष्टि से देखते हुए उम्मीद व्यक्त की है कि समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि शांति और स्थिरता केवल क्षेत्रीय देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए आवश्यक है, क्योंकि पश्चिम एशिया वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। उन्होंने कहा कि समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की एक प्रमुख आवश्यकता है। हाल के वर्षों में क्षेत्रीय तनाव के कारण कई महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर अनिश्चितता का माहौल बना था, जिससे वैश्विक व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई थीं। ऐसे में यदि समझौते के माध्यम से स्थिरता स्थापित होती है तो इसका लाभ अनेक देशों को मिलेगा। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी जटिल अंतरराष्ट्रीय विवाद का स्थायी समाधान संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से ही संभव है। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष शेष मुद्दों पर भी बातचीत का रास्ता अपनाएंगे और भविष्य में ऐसे समाधान तक पहुंचेंगे जो दीर्घकालिक तथा टिकाऊ शांति सुनिश्चित कर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक संकेत जा सकते हैं। विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र, समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय निवेश पर इसका अनुकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देशों के लिए भी क्षेत्रीय स्थिरता महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इससे आपूर्ति व्यवस्था और व्यापारिक गतिविधियों में निरंतरता बनी रहती है। कूटनीतिक दृष्टि से भी भारत लगातार यह रुख अपनाता रहा है कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान शांतिपूर्ण वार्ता और आपसी समझ के माध्यम से किया जाना चाहिए। इसी नीति के अनुरूप भारत ने इस समझौते का स्वागत करते हुए क्षेत्र में स्थायी शांति और सहयोग की उम्मीद व्यक्त की है। विश्लेषकों के अनुसार, यदि दोनों पक्ष सहमति के प्रावधानों का प्रभावी पालन करते हैं और शेष विवादित मुद्दों पर भी रचनात्मक बातचीत जारी रखते हैं, तो पश्चिम एशिया में लंबे समय से बनी अस्थिरता को कम करने में मदद मिल सकती है। इससे न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि वैश्विक आर्थिक गतिविधियों को भी नया भरोसा मिलेगा। भारत ने इस पूरे घटनाक्रम को सकारात्मक अवसर के रूप में देखते हुए उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में संवाद, सहयोग और कूटनीतिक समझ के माध्यम से क्षेत्र में स्थायी शांति और विकास का नया वातावरण तैयार होगा।
BRICS कृषि एजेंडे में ब्राजील सबसे आगे, 88% वादों पर अमल; भारत 85% के साथ दूसरे स्थान पर

मध्यप्रदेश । इंदौर में संपन्न हुई BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक के बाद जारी इंदौर घोषणा-पत्र और विभिन्न सार्वजनिक रिपोर्टों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि कृषि क्षेत्र में किए गए वादों और संकल्पों को लागू करने की गति सभी सदस्य देशों में समान नहीं रही। खाद्य सुरक्षा, डिजिटल कृषि, महिला सशक्तिकरण, भूमि पुनरुद्धार और कृषि व्यापार जैसे प्रमुख मुद्दों पर बीते पांच वर्षों में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए, लेकिन उनके क्रियान्वयन में देशों के बीच उल्लेखनीय अंतर देखने को मिला। विश्लेषण के अनुसार कृषि प्रतिबद्धताओं को लागू करने के मामले में Brazil सबसे आगे रहा। रिपोर्ट में ब्राजील का अमल स्तर 88 प्रतिशत बताया गया है। ब्राजील ने भूमि पुनरुद्धार साझेदारी, पारिवारिक खेती को बढ़ावा देने और नए कृषि एक्शन प्लान को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाई। कृषि सुधारों और सतत विकास आधारित योजनाओं को लागू करने में उसकी सक्रियता अन्य सदस्य देशों की तुलना में अधिक रही। दूसरे स्थान पर India रहा, जहां कृषि क्षेत्र में 85 प्रतिशत प्रतिबद्धताओं पर अमल का दावा किया गया है। भारत में डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन, ड्रोन तकनीक का उपयोग, जलवायु अनुकूल गांवों का विकास, कृषि डिजिटलीकरण और महिला आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं को BRICS एजेंडे के अनुरूप माना गया। “लखपति दीदी” जैसी पहल और तकनीक आधारित खेती के प्रयासों ने भारत की स्थिति को मजबूत किया, हालांकि कुछ क्षेत्रों में प्रगति अपेक्षाकृत धीमी बताई गई है। तीसरे स्थान पर China रहा, जिसने खाद्य सुरक्षा, कृषि अनुसंधान और डिजिटल कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। खाद्य सुरक्षा सहयोग रणनीति और तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने में चीन की भूमिका प्रमुख रही। वहीं Russia 80 प्रतिशत अमल के साथ चौथे स्थान पर रहा। रूस ने BRICS ग्रेन एक्सचेंज और राष्ट्रीय मुद्राओं में कृषि व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की, हालांकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण कुछ सहयोगी कार्यक्रम प्रभावित हुए। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि South Africa और BRICS के नए सदस्य देशों की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही। दक्षिण अफ्रीका का अमल स्तर 65 प्रतिशत आंका गया, जबकि नए सदस्य देशों का औसत प्रदर्शन 45 प्रतिशत के आसपास रहा। नए सदस्य देशों में United Arab Emirates, Egypt, Iran, Ethiopia, Saudi Arabia और Indonesia शामिल हैं। इनके लिए वर्ष 2024 और 2025 की कृषि प्रतिबद्धताओं को आधार बनाकर आकलन किया गया। पिछले पांच वर्षों के दौरान BRICS देशों ने कई महत्वपूर्ण कृषि निर्णय लिए। वर्ष 2021 में भारत की अध्यक्षता के दौरान खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादकता और छोटे किसानों को सशक्त बनाने पर केंद्रित एक्शन प्लान को मंजूरी दी गई। 2022 में चीन की मेजबानी में खाद्य सुरक्षा सहयोग रणनीति और “डेक्कन प्रिंसिपल्स ऑन फूड सिक्योरिटी” को अपनाया गया। 2023 में दक्षिण अफ्रीका ने ग्रामीण विकास और जलवायु अनुकूल कृषि को प्राथमिकता दी। 2024 में रूस ने ग्रेन एक्सचेंज और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार का प्रस्ताव रखा, जबकि 2025 में ब्राजील ने भूमि पुनरुद्धार साझेदारी और डिजिटल प्रमाणन जैसे नए प्रस्तावों को आगे बढ़ाया। हालांकि रिपोर्ट में BRICS की एक प्रमुख कमजोरी भी उजागर हुई है। संगठन का ढांचा पूरी तरह स्वैच्छिक है और सदस्य देशों के लिए किसी भी निर्णय को लागू करना कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। इसके अलावा प्रगति की निगरानी के लिए कोई स्वतंत्र तंत्र भी मौजूद नहीं है। अधिकांश मूल्यांकन सदस्य देशों की स्वयं प्रस्तुत रिपोर्टों, संयुक्त घोषणाओं और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर किए जाते हैं। यही कारण है कि कई बार घोषित लक्ष्यों और वास्तविक क्रियान्वयन के बीच अंतर देखने को मिलता है।