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आरएसएस के शताब्दी वर्ष में वैश्विक पहुंच बढ़ाने की तैयारी, मोहन भागवत का अमेरिका और ब्रिटेन दौरा जल्द संभव

नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन अपने सामाजिक और वैचारिक संपर्क को राष्ट्रीय सीमाओं से आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका और ब्रिटेन के प्रस्तावित दौरे को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि अगले दो महीनों के भीतर होने वाली इस यात्रा के दौरान वे विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और भारतीय मूल के लोगों से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं। संघ इस समय अपने 100वें वर्ष के कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। संगठन देशभर के साथ-साथ विदेशों में भी विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अपने कार्य, विचार और सामाजिक अभियानों को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास कर रहा है। ऐसे समय में संघ प्रमुख की संभावित विदेश यात्रा को संगठन की वैश्विक पहुंच बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। जानकारी के अनुसार अमेरिका और ब्रिटेन में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी भागीदारी देखने को मिल सकती है। इन आयोजनों में भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों, सामुदायिक सहयोग और प्रवासी भारतीयों की भूमिका जैसे विषय प्रमुख रह सकते हैं। यात्रा का उद्देश्य विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के साथ प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करना और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार अमेरिका के प्रमुख शहरों में कई कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। विशेष रूप से न्यूयॉर्क में एक बड़े सामुदायिक कार्यक्रम की संभावना व्यक्त की जा रही है, जहां भारतीय समुदाय की उल्लेखनीय उपस्थिति हो सकती है। हालांकि कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा और आधिकारिक कार्यक्रम सूची अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस प्रस्तावित यात्रा में हिंदू स्वयंसेवक संघ की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहने की संभावना है। यह संगठन विभिन्न देशों में भारतीय संस्कृति, योग, सेवा कार्यों और पारिवारिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार से जुड़ी गतिविधियां संचालित करता है। विदेशों में भारतीय समुदाय के बीच सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने के लिए यह संगठन लंबे समय से सक्रिय है। मोहन भागवत इससे पहले भी विदेश यात्राएं कर चुके हैं। पूर्व में ब्रिटेन में आयोजित कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी रही है, जहां उन्होंने भारतीय मूल के लोगों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया था। ऐसे अनुभवों के आधार पर इस बार के प्रस्तावित दौरे को भी व्यापक जनसंपर्क और सांस्कृतिक संवाद के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में प्रवासी भारतीय समुदाय की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विभिन्न देशों में बसे भारतीय मूल के लोग आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में प्रभावशाली योगदान दे रहे हैं। ऐसे में भारत से जुड़े संगठनों द्वारा उनके साथ नियमित संवाद स्थापित करना रणनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है। संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित हो रहे कार्यक्रमों का उद्देश्य संगठन के कार्यों, सेवा गतिविधियों और सामाजिक योगदान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना भी है। इसी कारण विदेशों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय समुदाय के साथ संबंधों को मजबूत करने के एक अवसर के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह यात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होती है तो इससे प्रवासी भारतीयों के साथ संवाद को नई गति मिल सकती है। साथ ही भारत और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव तथा सामाजिक सहयोग को और अधिक मजबूती मिलने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।

अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बीच भारतीय नाविकों का मुद्दा उठा, एफएसयूआई बोली- मृतकों के परिवारों को मिले उचित मुआवजा

नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने होर्मुज क्षेत्र में जान गंवाने वाले चार भारतीय नाविकों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग उठाई है। संगठन का कहना है कि क्षेत्र में हुई सैन्य घटनाओं और सुरक्षा संकट के कारण भारतीय नागरिकों की जान गई, इसलिए प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकता होनी चाहिए। यूनियन ने अमेरिकी प्रशासन से अपील करते हुए कहा है कि मृतक भारतीय नाविकों के परिजनों को कम से कम 50 लाख डॉलर का मुआवजा दिया जाए। संगठन का तर्क है कि यह केवल आर्थिक सहायता का विषय नहीं बल्कि उन परिवारों के प्रति नैतिक और मानवीय दायित्व का मामला भी है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया। एफएसयूआई ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बनी नई समझ क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में सकारात्मक कदम है। हालांकि संगठन का मानना है कि स्थायी शांति तभी सार्थक होगी जब संघर्ष और सैन्य कार्रवाई से प्रभावित निर्दोष नागरिकों तथा समुद्री कर्मियों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए। इसी संदर्भ में भारतीय नाविकों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया है। यूनियन के अनुसार, चीफ इंजीनियर पतनाला सुरेश, डेक कैडेट आदित्य शर्मा और फिटर शिवानंद चौरेसिया की मौत मिसाइल हमले से जुड़ी घटना में हुई थी। वहीं दूसरे अधिकारी निशांत उर्थनाथन की मृत्यु के लिए संगठन ने समय पर चिकित्सीय सहायता नहीं मिल पाने और क्षेत्रीय नाकेबंदी से उत्पन्न परिस्थितियों को जिम्मेदार ठहराया है। संगठन का कहना है कि इन घटनाओं की निष्पक्ष समीक्षा होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके। घटना जून माह में ओमान तट के निकट होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हुई थी। उस समय एमटी सेटेबेलो नामक तेल टैंकर क्षेत्रीय तनाव और सैन्य गतिविधियों के बीच प्रभावित हुआ था। जहाज पर कुल 24 भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद थे। हादसे में चार भारतीय नाविकों की मौत हो गई, जबकि अन्य सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया था। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। समुद्री व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और वाणिज्यिक नौवहन पर भी देखा गया था। भारतीय समुद्री समुदाय ने उस समय चालक दल की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के पालन को लेकर चिंता व्यक्त की थी। घटना के बाद भारत सरकार ने भी संबंधित पक्षों के समक्ष अपनी चिंता दर्ज कराई थी और वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया था। भारत का मानना रहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर काम करने वाले नागरिक कर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। एफएसयूआई का कहना है कि मृतक नाविक किसी सैन्य अभियान का हिस्सा नहीं थे, बल्कि वे पेशेवर दायित्व निभाते हुए अपने परिवारों के लिए काम कर रहे थे। ऐसे में उनकी मृत्यु को केवल एक आकस्मिक घटना मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। संगठन ने मांग की है कि जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक सहायता और न्याय उपलब्ध कराया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा व्यवस्था, संघर्ष क्षेत्रों में नागरिक जहाजों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले समय में इस विषय पर होने वाली कूटनीतिक और कानूनी प्रक्रियाओं पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।

CM MOHAN SAGAR VISIT: विधायक की मांग पर CM बोले- आप प्रस्ताव लाओ हम स्वीकृति देंगे, सागर के देवरी को ‘देवपुरी’ बनाने के घोषणा

CM MOHAN YADAV NEWS

CM MOHAN SAGAR VISIT: सागर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 14 जून को पहली बार सागर जिले के देवरी विधानसभा क्षेत्र के केसली का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात देते हुए देवरी का नाम बदलकर ‘देवपुरी’ करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान देवरी विधायक बृजबिहारी पटेरिया ने मंच से क्षेत्र की विभिन्न मांगें मुख्यमंत्री के सामने रखीं। विधायक बृजबिहारी पटेरिया ने कहा – कि पंगत में सबसे पहले और सबसे आखिर में पहुंचने वालों को सारे व्यंजन मिलते हैं। देवरी में आप यहां आखिर में आए हैं, इसलिए हमें उम्मीद है कि हमें भरपूर मिलेगा। महू में सैन्य भूमि पर चला बुलडोजर, अवैध पशु बाड़े और अतिक्रमण हटाने की संयुक्त कार्रवाई क्षेत्र के विकास से जुड़ी मानगो को पूरा किया जायेगा मुख्यमंत्री ने भी विधायक की मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने मंच से कहा कि देवरी का नाम बदलकर देवपुरी करने का प्रस्ताव कलेक्टर के माध्यम से भेजा जाए, सरकार इस पर आवश्यक कार्रवाई करेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि क्षेत्र के विकास से जुड़ी अधिकांश मांगों को पूरा किया जाएगा। इंदौर में दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत, सड़क हादसे में ठेकेदार ने तोड़ा दम लाड़ली बहनों के खातों में 1,835 करोड़ रुपए ट्रांसफर केसली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख से अधिक लाड़ली बहनों के खातों में 1,835 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सिंगल क्लिक के जरिए ट्रांसफर की। इस अवसर पर महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। एक इंच बारिश के बाद फिर बढ़ी उमस, इंदौर में रात का तापमान 6 डिग्री उछला; आज फिर बारिश की संभावना 190 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए 190 करोड़ रुपए से अधिक लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन भी किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गांव, गरीब, किसान और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है और विकास की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है।

Vastu Tips: घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के 5 आसान उपाय, बढ़ेगी सुख-शांति और सकारात्मकता

नई दिल्ली । हर व्यक्ति चाहता है कि उसके घर में सुख, शांति और सकारात्मकता का माहौल बना रहे। वास्तु शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर का वातावरण हमारे मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक जीवन को प्रभावित करता है। जब घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है तो परिवार के सदस्यों के बीच तनाव, अनावश्यक विवाद, मानसिक अशांति और कार्यों में बाधाएं आने लगती हैं। ऐसी स्थिति में कुछ सरल और पारंपरिक उपाय अपनाकर घर के वातावरण को अधिक सकारात्मक और ऊर्जावान बनाया जा सकता है। समुद्री नमक से करें वातावरण शुद्धवास्तु मान्यताओं के अनुसार समुद्री नमक में नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करने की क्षमता होती है। कई वास्तु विशेषज्ञ घर के कोनों, बाथरूम या ऐसे स्थानों पर एक कटोरी में समुद्री नमक रखने की सलाह देते हैं, जहां ऊर्जा का प्रवाह कम महसूस होता हो। मान्यता है कि इससे आसपास की नकारात्मकता कम होती है और वातावरण अधिक संतुलित महसूस होता है। बेहतर परिणाम के लिए नमक को समय-समय पर बदलते रहना चाहिए। नियमित करें हनुमान चालीसा का पाठधार्मिक मान्यताओं में Hanuman Chalisa का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने से भय, चिंता और नकारात्मक विचारों में कमी आती है। भगवान Hanuman को शक्ति, साहस और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि उनके स्मरण और आराधना से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। टूटी-फूटी वस्तुओं को घर से हटाएंवास्तु शास्त्र में टूटी हुई घड़ियां, क्षतिग्रस्त शीशे और अनुपयोगी वस्तुओं को नकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। ऐसी चीजें घर में अव्यवस्था और मानसिक बोझ बढ़ाने का कारण बन सकती हैं। इसलिए घर की नियमित सफाई करें और लंबे समय से बेकार पड़ी वस्तुओं को हटाने की आदत डालें। स्वच्छ और व्यवस्थित घर सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है। घर में पर्याप्त प्रकाश बनाए रखेंवास्तु में प्रकाश को ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। जिन स्थानों पर हमेशा अंधेरा रहता है, वहां उदासी और नकारात्मकता का अनुभव अधिक हो सकता है। इसलिए घर में प्राकृतिक सूर्य प्रकाश आने दें और आवश्यकता अनुसार उचित रोशनी की व्यवस्था करें। उजाला न केवल वातावरण को बेहतर बनाता है बल्कि मानसिक प्रसन्नता और सक्रियता को भी बढ़ावा देता है। कपूर का धुआं करेंभारतीय परंपरा में कपूर को शुद्धिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि शाम के समय कपूर जलाकर उसका धुआं पूरे घर में फैलाने से वातावरण शुद्ध और सुगंधित बनता है। कई लोग इसे मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने का प्रभावी उपाय मानते हैं। कपूर की सुगंध घर के वातावरण को शांत और आध्यात्मिक बनाने में सहायक मानी जाती है। सकारात्मकता का आधार है नियमिततावास्तु विशेषज्ञों के अनुसार इन उपायों का प्रभाव तभी अधिक महसूस होता है जब इन्हें नियमित रूप से अपनाया जाए। घर की साफ-सफाई, धार्मिक वातावरण, पर्याप्त प्रकाश और सकारात्मक सोच मिलकर जीवन में संतुलन और शांति लाने में मदद कर सकते हैं।

सोमवार की भस्म आरती में जटाधारी स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, वैष्णव तिलक और दिव्य आभूषणों से हुआ राजाधिराज श्रृंगार

मध्यप्रदेश । धर्मनगरी उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध Shri Mahakaleshwar Jyotirlinga Temple में सोमवार तड़के भस्म आरती के दौरान आध्यात्मिक और भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। प्रातः चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा विभिन्न फलों के रस से निर्मित पंचामृत अर्पित कर विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। भस्म आरती की शुरुआत मंदिर परंपरा के अनुसार प्रथम घंटाल बजाने के साथ हुई। मंत्रोच्चार और वैदिक विधानों के बीच भगवान महाकाल का ध्यान कर उन्हें हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई और बाबा महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन तथा त्रिपुंड अर्पित कर उनका दिव्य श्रृंगार आरंभ हुआ। सोमवार के विशेष अवसर पर भगवान महाकाल को जटाधारी स्वरूप में सजाया गया। उनके मस्तक पर चंदन और वैष्णव तिलक लगाया गया तथा उन्हें राजाधिराज स्वरूप में अलंकृत किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव का यह स्वरूप वैराग्य, शक्ति और लोककल्याण का प्रतीक माना जाता है। श्रृंगार के दौरान विविध आभूषणों और पूजन सामग्रियों का उपयोग कर बाबा महाकाल की अलौकिक छवि प्रस्तुत की गई। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। Maha Nirvani Akhada की ओर से परंपरानुसार भगवान महाकाल को भस्म समर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और यही भस्म आरती की सबसे विशेष और दिव्य परंपरा मानी जाती है। भस्म अर्पण के उपरांत भगवान महाकाल को शेषनाग स्वरूप रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों से निर्मित विशेष हार अर्पित किए गए। मोगरा और गुलाब के पुष्पों से सुसज्जित बाबा महाकाल का मनोहारी स्वरूप भक्तों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। श्रृंगार के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया तथा आरती के माध्यम से समस्त श्रद्धालुओं ने उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। भस्म आरती में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया और बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए। मंदिर परिसर पूरे समय हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंजता रहा। धार्मिक मान्यता है कि भोर बेला में बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

‘रेडी वॉटर’ से ‘सरबरी’ तक: बोलचाल की भाषा में छिपी सृजनात्मकता को अमिताभ बच्चन ने बताया भारतीय समाज की बड़ी ताकत

नई दिल्ली । भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सोच, संस्कृति और रचनात्मकता का प्रतिबिंब भी होती है। यही संदेश वरिष्ठ अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपने हालिया ब्लॉग के माध्यम से साझा किया है। उन्होंने आम लोगों की बोलचाल में दिखाई देने वाली भाषाई सृजनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि लोग अक्सर विदेशी शब्दों को अपनी सुविधा, समझ और स्थानीय प्रभाव के अनुरूप नया रूप दे देते हैं, जिससे वे शब्द और भी आत्मीय तथा रोचक बन जाते हैं। अमिताभ बच्चन ने अपने प्रशंसकों को संबोधित करते हुए ब्लॉग की शुरुआत हल्के-फुल्के अंदाज में की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्लॉग लिखने में हुई देरी का कारण आलस्य नहीं, बल्कि कार्य व्यस्तता थी। उन्होंने कहा कि दिनभर के कार्यों के बाद अपने प्रशंसकों से संवाद करना उनके लिए एक विशेष अनुभव होता है और यही उनके दैनिक कार्यों की पूर्णता का एहसास भी कराता है। अपने विचारों को समझाने के लिए उन्होंने अपने आवास ‘जलसा’ से जुड़ा एक रोचक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके यहां काम करने वाले एक माली को अंग्रेजी शब्दों का उच्चारण करने में कठिनाई होती थी। विशेष रूप से एक शब्द को वह सही ढंग से नहीं बोल पाता था, इसलिए उसने उसे अपनी सुविधा के अनुसार बदलकर नया रूप दे दिया। अभिनेता के अनुसार, यह नया उच्चारण इतना सहज और आत्मीय लगा कि कई बार वह मूल शब्द की तुलना में अधिक प्रभावशाली प्रतीत हुआ। उन्होंने एक अन्य उदाहरण का उल्लेख करते हुए बताया कि कुछ लोग ‘रेडिएटर’ शब्द को अपने तरीके से ‘रेडी वॉटर’ कहने लगे। इसके पीछे उनका अपना तर्क भी था कि जिस उपकरण में पानी भरा जाता है, उसके लिए ऐसा नाम अधिक उपयुक्त लगता है। अमिताभ बच्चन ने कहा कि यद्यपि यह तकनीकी रूप से सही शब्द नहीं है, लेकिन यह लोगों की सोचने और भाषा को अपने अनुरूप ढालने की क्षमता को दर्शाता है। अभिनेता का मानना है कि भाषा का वास्तविक सौंदर्य उसकी लचीलापन और स्वीकार्यता में निहित होता है। समाज के विभिन्न वर्ग, क्षेत्र और भाषाई पृष्ठभूमि वाले लोग जब किसी शब्द को अपनाते हैं, तो उसमें अपनी संस्कृति और अनुभवों का रंग भी जोड़ देते हैं। यही प्रक्रिया भाषा को स्थिर नहीं रहने देती, बल्कि उसे समय के साथ विकसित और समृद्ध बनाती है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के लिए किसी विदेशी भाषा या उसके जटिल शब्दों का शुद्ध उच्चारण करना आसान नहीं होता। ऐसे में लोग अपनी समझ और सुविधा के अनुसार नए शब्द गढ़ लेते हैं। यह केवल उच्चारण की त्रुटि नहीं, बल्कि भाषा के प्रति मानवीय अनुकूलन क्षमता का उदाहरण है। इसी वजह से ऐसे शब्द लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों और दैनिक जीवन का हिस्सा बने रहते हैं। अमिताभ बच्चन ने यह भी कहा कि भाषा की यही सहजता उसे आम लोगों से जोड़ती है। जब कोई शब्द स्थानीय संदर्भों और बोलचाल में ढल जाता है तो वह केवल शब्द नहीं रह जाता, बल्कि सामाजिक अनुभव का हिस्सा बन जाता है। उन्होंने अपने प्रशंसकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों से मिलने वाला उनका स्नेह और समर्थन उनके जीवन को निरंतर ऊर्जा प्रदान करता है। भाषा और समाज के संबंध पर व्यक्त किए गए उनके विचार यह संकेत देते हैं कि रचनात्मकता केवल साहित्य या कला तक सीमित नहीं है, बल्कि सामान्य बातचीत और दैनिक जीवन में भी उतनी ही प्रभावशाली रूप से दिखाई देती है। यही विशेषता भाषा को जीवंत, प्रासंगिक और समय के साथ विकसित होने योग्य बनाती है।

महू में सैन्य भूमि पर चला बुलडोजर, अवैध पशु बाड़े और अतिक्रमण हटाने की संयुक्त कार्रवाई

मध्यप्रदेश । महू के बंडा बस्ती क्षेत्र में सोमवार को सैन्य भूमि पर किए गए कथित अतिक्रमणों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया गया। सेना, रक्षा संपदा विभाग, कैंटोनमेंट बोर्ड, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने सुबह करीब 11:30 बजे अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों के अनुसार संबंधित लोगों को दो दिन पहले नोटिस जारी किए गए थे और निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बाद यह कार्रवाई अमल में लाई गई। कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में बुलडोजर की मदद से पशु बाड़ों, टीन शेड और अन्य अस्थायी निर्माणों को हटाने का काम किया गया। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई और लोगों की आवाजाही पर भी नजर रखी गई। यह मामला पिछले महीने सामने आए एक विवाद के बाद चर्चा में आया था। पुलिस के अनुसार बंडा बस्ती क्षेत्र स्थित एक पशु बाड़े से गोवंश के अवशेष और कथित रूप से गोमांस बरामद किया गया था। उस दौरान कार्रवाई के समय पथराव की घटना भी सामने आई थी, जिससे इलाके में तनाव की स्थिति बन गई थी। पुलिस ने इस मामले में Imran Khatkhat समेत कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार मामले की विवेचना की गई और संबंधित कानूनी प्रक्रियाएं शुरू की गईं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकरण में दर्ज आरोपों की जांच जारी है और कानूनी कार्रवाई नियमानुसार की जा रही है। कुछ आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू किए जाने की जानकारी अधिकारियों द्वारा दी गई थी। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा लिया जाना है। घटना के बाद विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने सैन्य भूमि पर बने कथित अवैध बाड़ों और निर्माणों को हटाने की मांग उठाई थी। इसके बाद संबंधित विभागों ने भूमि अभिलेखों और सीमांकन की जांच की। अधिकारियों के अनुसार जांच में यह पाया गया कि संबंधित क्षेत्र में सैन्य भूमि पर कई स्थानों पर अतिक्रमण किया गया था। इसी आधार पर अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक लगभग एक एकड़ सैन्य भूमि पर 10 से अधिक लोगों द्वारा कब्जा किया गया था। इस भूमि पर बने 10 से ज्यादा पशु बाड़ों, शेड और अन्य अस्थायी ढांचों को हटाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि सैन्य क्षेत्र की अन्य भूमि पर भी संभावित अतिक्रमणों की पहचान की जा रही है और आवश्यकतानुसार आगे भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी और सैन्य भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखने के लिए अभियान जारी रहेगा। वहीं स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण न करें और नियमों का पालन करें। फिलहाल बंडा बस्ती क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से जारी है तथा स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है।

अमेरिका-ईरान शांति समझौते से बाजार में लौटा भरोसा, सेंसेक्स 1200 अंक उछला, निफ्टी 24 हजार के करीब पहुंचा

नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा का असर वैश्विक वित्तीय बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू बाजारों ने मजबूत शुरुआत की और प्रमुख सूचकांकों सेंसेक्स तथा निफ्टी में डेढ़ प्रतिशत के आसपास की तेजी दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव कम होने की संभावना ने निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल तैयार किया, जिसका लाभ भारतीय बाजार को भी मिला। कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों में खरीदारी का उत्साह देखने को मिला। बीएसई सेंसेक्स ने करीब 1,200 अंकों की मजबूती के साथ कारोबार शुरू किया, जबकि एनएसई निफ्टी भी लगभग 24 हजार अंकों के स्तर के करीब पहुंच गया। शुरुआती घंटों में दोनों प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ हरे निशान में कारोबार करते रहे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर जोखिम कम होने की धारणा ने निवेशकों को इक्विटी बाजारों की ओर आकर्षित किया है। विशेष रूप से व्यापक बाजार में भी मजबूती देखने को मिली। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अच्छी खरीदारी दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि तेजी केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। निवेशकों ने विभिन्न क्षेत्रों में सक्रियता दिखाई और बाजार का समग्र रुझान सकारात्मक बना रहा। सेक्टरवार प्रदर्शन पर नजर डालें तो धातु, रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं से जुड़े शेयरों में उल्लेखनीय तेजी रही। वित्तीय सेवाओं, तेल एवं गैस तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर, फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र में सीमित दबाव दर्ज किया गया, हालांकि इससे बाजार की कुल सकारात्मक धारणा पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा। बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबर रही। दोनों देशों के बीच शांति समझौते की दिशा में हुई प्रगति को वैश्विक निवेशकों ने सकारात्मक संकेत के रूप में लिया। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य के संचालन को लेकर बनी अनिश्चितता दूर होने से ऊर्जा आपूर्ति संबंधी चिंताएं भी कम हुई हैं। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके सुचारु संचालन से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता आने की उम्मीद बढ़ी है। इस सकारात्मक घटनाक्रम का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों में तेज गिरावट दर्ज की गई। तेल की कीमतों में कमी को भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राहत के रूप में देखा जा रहा है। इससे आयात बिल पर दबाव घट सकता है और महंगाई नियंत्रण में रखने के प्रयासों को भी समर्थन मिल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया आगे बढ़ती है और ऊर्जा आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए परिस्थितियां और अधिक अनुकूल हो सकती हैं। कम तेल कीमतों का लाभ उद्योगों, परिवहन क्षेत्र और उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। साथ ही आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति से जुड़े अनुमानों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल बाजार की दिशा वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर बनी हुई है, लेकिन सप्ताह की शुरुआत जिस मजबूती के साथ हुई है, उसने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान समझौते से जुड़े आगे के घटनाक्रम और वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति निवेशकों की नजर में प्रमुख कारक बने रहेंगे।

खजराना गणेश मंदिर में गर्भगृह का गेट होगा चौड़ा, ट्रांसपेरेंट ग्लास कवर के पीछे विराजे भगवान गणेश

मध्यप्रदेश । इंदौर का प्रसिद्ध Khajrana Ganesh Temple देशभर के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र माना जाता है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त भगवान गणेश के दर्शन करने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने गर्भगृह के मुख्य प्रवेश द्वार के चौड़ीकरण का कार्य शुरू कर दिया है। इस दौरान भगवान गणेश की प्रतिमा को सुरक्षित रखने के लिए विशेष स्टील और ट्रांसपेरेंट ग्लास से बने संरक्षित कवर में रखा गया है, जिससे निर्माण कार्य के दौरान धूल, मलबा या अन्य किसी प्रकार का प्रभाव प्रतिमा पर न पड़े। मंदिर प्रशासन के अनुसार यह कार्य खजराना गणेश मंदिर के मास्टर प्लान के तहत किया जा रहा है। गर्भगृह के प्रवेश द्वार की चौड़ाई बढ़ने से श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक सुगम होगी और एक समय में अधिक संख्या में भक्त भगवान के दर्शन कर सकेंगे। वर्तमान में भीड़ के दौरान दर्शन व्यवस्था प्रभावित होती है, जिसे सुधारने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले गर्भगृह के मुख्य द्वार और आसपास की दीवारों पर लगी लगभग 150 किलोग्राम चांदी को सावधानीपूर्वक हटाया गया था। मंदिर के पुजारी Ashok Bhatt के अनुसार निकाली गई चांदी को सुरक्षित रूप से ट्रेजरी में जमा कर दिया गया है। गेट चौड़ीकरण का काम पूरा होने के बाद इस चांदी को दोबारा उसी स्थान पर स्थापित किया जाएगा। पुजारी अशोक भट्ट ने बताया कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भवन की संरचनात्मक मजबूती की जांच कराई गई थी। इसके लिए SGSITS की विशेषज्ञ टीम ने निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की थी। रिपोर्ट के आधार पर ही चौड़ीकरण कार्य को मंजूरी दी गई। अनुमान है कि इस कार्य को पूरा होने में एक सप्ताह या उससे अधिक समय लग सकता है। मंदिर प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि निर्माण कार्य के कारण श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसी वजह से अधिकांश काम रात के समय किया जा रहा है, जबकि दिन में दर्शन व्यवस्था सामान्य रूप से संचालित की जा रही है। गर्भगृह के मुख्य द्वार के बाद मंदिर परिसर में स्थित सभा मंडप में भी बदलाव किए जाएंगे। मंदिर प्रशासन की योजना सभा मंडप को लगभग दो से ढाई फीट नीचे करने की है। वर्तमान में भीड़ बढ़ने पर पीछे खड़े श्रद्धालुओं को भगवान के दर्शन करने में कठिनाई होती है। मंडप को नीचे करने से दूर खड़े भक्त भी आसानी से भगवान गणेश के दर्शन कर सकेंगे। इसके अलावा भविष्य में दर्शन हॉल के विकास कार्य भी किए जाएंगे। मंदिर प्रशासन का मानना है कि आगामी Simhastha और अन्य बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु खजराना गणेश मंदिर पहुंच सकते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं।

इंदौर में दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत, सड़क हादसे में ठेकेदार ने तोड़ा दम

मध्यप्रदेश । इंदौर में रविवार को दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई। एक ओर तेजाजी नगर क्षेत्र में रहने वाले एक पेंटिंग ठेकेदार की सड़क दुर्घटना में जान चली गई, वहीं दूसरी ओर पलासिया इलाके में एक निजी बीमा कंपनी के कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। दोनों मामलों में पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पहला मामला तेजाजी नगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार शक्करखेड़ी निवासी Pappu Kewat को गंभीर हालत में एमवाय अस्पताल लाया गया था, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वह पेंटिंग ठेकेदारी का काम करते थे और रविवार को एक निर्माण स्थल का निरीक्षण करने निपानिया क्षेत्र गए थे। परिजनों के मुताबिक, रविवार को अवकाश होने के कारण वह अपने काम से संबंधित एक स्थान देखने गए थे। वहां से लौटते समय किसी अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे के बाद वे सड़क पर घायल अवस्था में पड़े रहे। बाद में राहगीरों की नजर उन पर पड़ी और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। परिवार के सदस्य अंकित ने बताया कि मृतक अपने परिवार के इकलौते बेटे थे। उनके तीन बच्चे हैं, जिनमें से दो की शादी हो चुकी है। माता-पिता गांव में रहते हैं। अचानक हुई इस घटना से परिवार गहरे सदमे में है। पुलिस आसपास के क्षेत्र के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की मदद से अज्ञात वाहन की पहचान करने का प्रयास कर रही है। उधर, दूसरी घटना पलासिया क्षेत्र से सामने आई है, जहां एक निजी बीमा कंपनी में कार्यरत कर्मचारी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, Ramchandra निवासी ओल्ड पलासिया को रविवार रात उनके परिचित एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने पुलिस को बताया कि रविवार शाम वह सामान्य रूप से घर पर थे। कुछ समय बाद वह बाथरूम गए और बाहर आने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। बताया गया कि उन्हें अचानक उल्टियां शुरू हो गईं। स्थिति गंभीर होने पर परिजन उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उपचार शुरू होने से पहले ही उनकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, मृतक एक निजी बीमा कंपनी में कार्यरत थे। उनका एक बेटा जबलपुर एयरपोर्ट पर नौकरी करता है, जबकि दूसरा बेटा इंदौर में रहता है। परिवार मूल रूप से छतरपुर का रहने वाला है। पलासिया पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। दोनों घटनाओं के बाद संबंधित थाना पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए जांच आगे बढ़ा दी है। एक मामले में सड़क हादसे के जिम्मेदार वाहन चालक की तलाश जारी है, जबकि दूसरे मामले में चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।