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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से शुरू हुई वाणिज्यिक उड़ानें, इंडिगो की पहली सेवा के साथ दिल्ली-एनसीआर को मिला नया एविएशन हब

नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने सोमवार को भारतीय विमानन क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ते हुए वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन शुरू कर दिया। लंबे समय से प्रतीक्षित इस परियोजना के परिचालन में आने के साथ ही दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को एक नया हवाई प्रवेश द्वार मिल गया है। एयरपोर्ट से पहली नियमित उड़ान सेवा शुरू करने का गौरव इंडिगो एयरलाइन को मिला, जिसने यहां से अपने वाणिज्यिक संचालन का औपचारिक शुभारंभ किया। एयरपोर्ट के संचालन की शुरुआत के साथ ही क्षेत्रीय और राष्ट्रीय हवाई संपर्क को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पहली उड़ान लखनऊ से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंची, जबकि इसके बाद यहां से पहली प्रस्थान उड़ान बेंगलुरु के लिए रवाना हुई। यह शुरुआत केवल एक नई सेवा का आरंभ नहीं बल्कि देश के तेजी से विकसित हो रहे विमानन बुनियादी ढांचे का भी प्रतीक मानी जा रही है। इंडिगो ने घोषणा की है कि वह इस नए एयरपोर्ट को देश के 16 से अधिक प्रमुख गंतव्यों से सीधे जोड़ेगी। इसके अतिरिक्त कई शहरों के बीच वन-स्टॉप कनेक्टिविटी की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे यात्रियों को अधिक विकल्प और बेहतर यात्रा अनुभव प्राप्त होगा। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ टियर-2 और टियर-3 शहरों के यात्रियों को मिलेगा, जिन्हें अब बड़े महानगरों तक पहुंचने के लिए कम समय और कम जटिल यात्रा करनी पड़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का संचालन शुरू होने से दिल्ली-एनसीआर के मौजूदा हवाई यातायात दबाव को कम करने में मदद मिलेगी। राजधानी क्षेत्र में बढ़ती यात्री संख्या और विमान सेवाओं की मांग को देखते हुए यह एयरपोर्ट एक महत्वपूर्ण पूरक भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही यह क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति देने में भी सहायक साबित हो सकता है। यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित यह एयरपोर्ट रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर सड़क संपर्क और औद्योगिक क्षेत्रों के निकट होने के कारण इसे भविष्य में एक प्रमुख एविएशन तथा लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने की योजना है। इससे व्यापार, निवेश, पर्यटन और माल परिवहन गतिविधियों को भी नई दिशा मिलने की संभावना है। विमानन क्षेत्र के जानकारों के अनुसार, किसी भी बड़े एयरपोर्ट का प्रभाव केवल हवाई सेवाओं तक सीमित नहीं रहता। इसके आसपास रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं, होटल, परिवहन और सेवा क्षेत्र का विस्तार होता है तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलता है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ भी इसी प्रकार के व्यापक आर्थिक प्रभावों की उम्मीद की जा रही है। एयरपोर्ट प्रबंधन ने कहा है कि यात्रियों को आधुनिक और सुविधाजनक यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रथम चरण में विकसित इस परियोजना की वार्षिक यात्री क्षमता लगभग 1.2 करोड़ रखी गई है। वर्तमान परिचालन ढांचे में एक रनवे, एकीकृत टर्मिनल भवन और अत्याधुनिक एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एयरपोर्ट के विस्तार के साथ इसकी क्षमता और कनेक्टिविटी दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। वाणिज्यिक उड़ानों की शुरुआत के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब केवल एक महत्वाकांक्षी परियोजना नहीं रहा, बल्कि उत्तर भारत के विमानन मानचित्र पर एक सक्रिय और महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर चुका है। इससे क्षेत्रीय विकास, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना और मजबूत हुई है।

एक इंच बारिश के बाद फिर बढ़ी उमस, इंदौर में रात का तापमान 6 डिग्री उछला; आज फिर बारिश की संभावना

मध्यप्रदेश । इंदौर में रविवार अलसुबह हुई करीब एक इंच बारिश ने लोगों को कुछ समय के लिए गर्मी से राहत जरूर दी, लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। बारिश के बाद दिन चढ़ते ही तेज धूप और बढ़ी हुई नमी ने मौसम को फिर से असहज बना दिया। पूरे दिन उमस भरी गर्मी के कारण लोग परेशान रहे, वहीं रात के तापमान में अचानक हुई बढ़ोतरी ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार रविवार को शहर का अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग एक डिग्री कम रहा। हालांकि तापमान में गिरावट के बावजूद वातावरण में मौजूद नमी के कारण उमस काफी अधिक महसूस हुई। वहीं न्यूनतम तापमान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 25.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। पिछले दिन की तुलना में रात के तापमान में करीब 6 डिग्री का उछाल देखा गया। सोमवार सुबह शहर का मौसम बदला-बदला नजर आया। आसमान में हल्के बादल छाए रहे और बीच-बीच में धूप भी निकलती रही। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दिन के दौरान इंदौर और आसपास के इलाकों में फिर से बारिश या हल्की बौछारें देखने को मिल सकती हैं। स्थानीय स्तर पर बन रहे बादल और वातावरण में मौजूद नमी के कारण प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। इस सीजन में अब तक इंदौर में लगभग 2 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि केवल जून महीने में औसतन करीब 5 इंच बारिश होती है। ऐसे में अभी भी सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अच्छी बारिश की जरूरत बनी हुई है। शहर के जलस्रोतों और भूजल स्तर को देखते हुए पर्याप्त वर्षा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मानसून की सुस्त चाल फिलहाल मौसम विशेषज्ञों और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। जून के शुरुआती दिनों में अपेक्षित वर्षा नहीं होने के कारण शहर के तालाबों और जलाशयों का जलस्तर लगातार घट रहा है। बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए इंदौर को हर साल अच्छी बारिश की आवश्यकता रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर को दीर्घकालिक जल संकट से बचाने के लिए सामान्य से बेहतर वर्षा जरूरी है। मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में मानसून की औपचारिक एंट्री 18 जून के बाद होने की संभावना है। फिलहाल अरब सागर और आसपास के क्षेत्रों में मजबूत मौसमी सिस्टम सक्रिय नहीं होने के कारण मानसून की गति धीमी बनी हुई है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं तो मानसून तेजी पकड़ सकता है और जून के अंत तक बारिश का आंकड़ा सामान्य स्तर के करीब पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी वर्षा केवल तालाबों को भरने के लिए ही नहीं, बल्कि भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। पर्याप्त बारिश होने पर बोरवेल, ट्यूबवेल और अन्य जलस्रोतों को भी राहत मिलेगी। ऐसे में शहरवासियों की निगाहें अब मानसून की जोरदार दस्तक पर टिकी हुई हैं।

स्लोवाकिया में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत, भारतीय समुदाय और स्थानीय कलाकारों ने बताया मुलाकात को गर्व और सम्मान का क्षण

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्लोवाकिया यात्रा ने भारत और मध्य यूरोप के इस महत्वपूर्ण देश के बीच संबंधों को नई ऊर्जा प्रदान की है। राजधानी ब्रातिस्लावा पहुंचने पर प्रधानमंत्री का भारतीय समुदाय और स्थानीय नागरिकों द्वारा उत्साहपूर्ण स्वागत किया गया। इस अवसर पर प्रवासी भारतीयों और स्लोवाक कलाकारों ने उनसे मुलाकात को विशेष सम्मान और गर्व का क्षण बताते हुए अपनी खुशी व्यक्त की। ब्रातिस्लावा के प्रमुख आयोजन स्थल पर प्रधानमंत्री के आगमन के दौरान भारतीय संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिली। भारतीय समुदाय के सदस्यों ने पूरे उत्साह के साथ उनका स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारंपरिक अभिनंदन ने आयोजन को विशेष बना दिया। स्थानीय परंपराओं के अनुरूप किए गए स्वागत ने दोनों देशों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को भी प्रदर्शित किया। प्रधानमंत्री के स्वागत समारोह में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय उपस्थित रहे। समुदाय के सदस्यों ने कहा कि विदेश में रहते हुए भारत के प्रधानमंत्री से सीधे मिलना उनके लिए भावनात्मक और गर्व का विषय है। कई लोगों ने इसे जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक बताया। उनके अनुसार प्रधानमंत्री की उपस्थिति ने उन्हें अपने देश से और अधिक जुड़ाव का अनुभव कराया। प्रवासी भारतीयों ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में भारत की वैश्विक पहचान मजबूत हुई है और इसका सकारात्मक प्रभाव विदेशों में बसे भारतीयों पर भी दिखाई देता है। समुदाय के सदस्यों ने उम्मीद जताई कि इस यात्रा से भारत और स्लोवाकिया के बीच आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग को और बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा मिलने की संभावना भी व्यक्त की। कार्यक्रम में स्थानीय स्लोवाक कलाकारों की भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कई कलाकारों ने भारतीय संस्कृति के प्रति अपने सम्मान और रुचि को प्रस्तुतियों के माध्यम से व्यक्त किया। सांस्कृतिक समूहों ने भारतीय संगीत और परंपराओं से प्रेरित कार्यक्रम पेश किए, जिन्हें उपस्थित लोगों ने सराहा। कलाकारों ने कहा कि भारतीय प्रधानमंत्री के स्वागत समारोह में शामिल होना उनके लिए एक अनूठा अवसर था। विशेष रूप से भारतीय राष्ट्रीय भावना से जुड़े सांस्कृतिक प्रस्तुतीकरण ने कार्यक्रम को अलग पहचान दी। कलाकारों ने भारतीय संगीत और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को प्रस्तुत करते हुए दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करने का प्रयास किया। प्रस्तुति के बाद कलाकारों ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उनके प्रयासों को सराहा गया और उन्हें इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनने का अवसर मिला। विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह यात्रा केवल राजनयिक महत्व तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ संवाद और स्थानीय सांस्कृतिक समूहों की भागीदारी ने इस यात्रा को विशेष आयाम प्रदान किया है। इससे दोनों देशों के बीच आपसी समझ और सहयोग को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। ब्रातिस्लावा में हुए इस स्वागत समारोह ने यह भी दिखाया कि विदेशों में बसे भारतीय समुदाय का अपने देश के साथ भावनात्मक संबंध कितना गहरा है। वहीं स्थानीय समाज की भागीदारी ने भारत के प्रति बढ़ती रुचि और सम्मान को भी रेखांकित किया। इस यात्रा को भारत-स्लोवाकिया संबंधों के लिए सकारात्मक और यादगार पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।

काशवी और डॉ. अमन केस में जांच पर उठे सवाल, रिपोर्ट और बयानों के बाद भी कार्रवाई नहीं

मध्यप्रदेश । इंदौर में हाल ही में सामने आए दो संवेदनशील मामलों ने पुलिस और संबंधित विभागों की जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर दो वर्षीय काशवी यादव की संदिग्ध मौत का मामला है, तो दूसरी ओर मेडिकल छात्र Aman Patel की आत्महत्या का प्रकरण। दोनों मामलों में परिजनों और संबंधित पक्षों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के बावजूद अब तक कोई स्पष्ट निष्कर्ष या कार्रवाई सामने नहीं आई है। दो वर्षीय काशवी यादव की मौत के मामले में उसके माता-पिता निशा और नितिन यादव ने पुलिस को दिए बयानों में आरोप लगाया है कि भोलाराम उस्ताद मार्ग स्थित एक निजी क्लिनिक में उपचार के दौरान लापरवाही हुई, जिसके कारण उनकी बेटी की हालत बिगड़ी। परिजनों के अनुसार, बच्ची को उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद क्लिनिक ले जाया गया था, जहां उपचार के बाद उसकी तबीयत लगातार खराब होती गई। बाद में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अनुमति के बाद बच्ची के शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया था। परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को सौंपे जाने और प्रमुख बयानों के दर्ज होने के बाद भी जांच की स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। उनका सवाल है कि यदि जांच में किसी प्रकार की चिकित्सकीय लापरवाही नहीं मिली है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही, और यदि लापरवाही के संकेत हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। परिजनों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि संबंधित क्लिनिक की कार्यप्रणाली, उपचार प्रक्रिया और चिकित्सा मानकों के पालन की जांच के संबंध में अब तक कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी बेटी वापस नहीं आ सकती, लेकिन यदि किसी स्तर पर गलती हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसी तरह मेडिकल छात्र Aman Patel की आत्महत्या का मामला भी चर्चा में बना हुआ है। 17 मई को उनका शव एमजीएम मेडिकल कॉलेज हॉस्टल परिसर में मिला था। जांच के दौरान पुलिस ने परिजनों, दोस्तों और अन्य संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए हैं। परिजनों ने पुलिस को बताया है कि छात्र हाल के दिनों में मानसिक तनाव से गुजर रहे थे। उन्होंने कुछ व्यक्तिगत और सामाजिक परिस्थितियों को भी जांच का हिस्सा बनाने की मांग की है। परिवार का कहना है कि घटना से पहले की बातचीत, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच के महत्वपूर्ण बिंदु हैं। हालांकि पुलिस द्वारा जांच जारी होने की बात कही जा रही है, लेकिन अब तक किसी निष्कर्ष या आगे की कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इससे परिवार और परिचितों में असंतोष बढ़ रहा है। दोनों मामलों में पुलिस का कहना है कि जांच प्रक्रिया जारी है और सभी उपलब्ध साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा बयानों का परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी होने के बाद ही किसी प्रकार के निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा। फिलहाल दोनों परिवार न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि समयबद्ध और पारदर्शी जांच ही इन मामलों की सच्चाई सामने ला सकती है तथा समाज में विश्वास कायम रख सकती है।

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद, पीएम मोदी बोले- अमेरिका-ईरान समझौता वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव और संघर्ष के बीच अमेरिका तथा ईरान के बीच हुए नए समझौते का भारत ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल को क्षेत्रीय शांति, वैश्विक आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए महत्वपूर्ण कदम बताते हुए उम्मीद जताई है कि इससे लंबे समय से चले आ रहे विवादों के समाधान की दिशा में सकारात्मक प्रगति होगी। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा प्रभावित हुई, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ा। कई देशों को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा और विभिन्न क्षेत्रों में अस्थिरता बढ़ी। ऐसे समय में अमेरिका और ईरान के बीच बनी नई समझ को उन्होंने एक रचनात्मक और स्वागतयोग्य पहल बताया। भारत का मानना है कि समझौते का प्रभावी क्रियान्वयन पूरे क्षेत्र में तनाव कम करने में सहायक साबित हो सकता है। इसके साथ ही समुद्री मार्गों पर सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होने से वैश्विक व्यापार गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। पश्चिम एशिया विश्व ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है और यहां स्थिरता का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है। हाल के महीनों में क्षेत्रीय तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता देखने को मिली थी। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और समुद्री परिवहन को लेकर बढ़ी चिंताओं ने कई देशों की आर्थिक योजनाओं को प्रभावित किया। ऐसे में समझौते को केवल राजनीतिक उपलब्धि नहीं बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी उम्मीद व्यक्त की कि दोनों देशों के बीच अभी शेष मुद्दों पर होने वाली वार्ताएं सकारात्मक वातावरण में आगे बढ़ेंगी। उनका मानना है कि संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही स्थायी समाधान संभव है। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवादों के समाधान के लिए बातचीत और शांतिपूर्ण प्रयासों का समर्थन करता रहा है। इस समझौते के बाद वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विभिन्न देशों ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति माना है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि यदि समझौते की शर्तों का सफलतापूर्वक पालन किया जाता है तो इससे पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति बेहतर हो सकती है और व्यापक संघर्ष की आशंकाओं को कम किया जा सकता है। समुद्री व्यापार के दृष्टिकोण से भी यह समझौता महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पश्चिम एशिया के रणनीतिक समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य के लिए बेहद अहम हैं। इन मार्गों पर सामान्य गतिविधियों की बहाली से ऊर्जा बाजारों में विश्वास बढ़ने और आपूर्ति तंत्र को मजबूती मिलने की संभावना है। भारत के लिए भी पश्चिम एशिया विशेष महत्व रखता है। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक संबंधों और बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी के कारण इस क्षेत्र की स्थिरता भारत के राष्ट्रीय हितों से सीधे जुड़ी हुई है। ऐसे में नई कूटनीतिक पहल का स्वागत भारत की उस नीति के अनुरूप है, जिसमें क्षेत्रीय शांति, संवाद और सहयोग को प्राथमिकता दी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौते के बाद दोनों पक्षों के बीच विश्वास निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो इससे पूरे क्षेत्र में विकास, निवेश और आर्थिक गतिविधियों को नया प्रोत्साहन मिल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि समझौते का क्रियान्वयन किस प्रकार आगे बढ़ता है और यह पश्चिम एशिया के भविष्य को किस दिशा में प्रभावित करता है।

बेटे का शव देखते ही थम गई मां की सांसें, इंदौर में कुछ ही मिनटों के अंतराल में मां-बेटे की मौत

मध्यप्रदेश । इंदौर के भंडारी मिल मार्ग स्थित श्रीनाथ विहार अपार्टमेंट में घटित एक मार्मिक घटना ने पूरे शहर को भावुक कर दिया। 55 वर्षीय राजुल शर्मा के निधन के कुछ ही मिनट बाद उनकी 75 वर्षीय मां किरण शर्मा ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। सोमवार को जब मां और बेटे की अर्थियां एक साथ घर से निकलीं तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। परिवार, रिश्तेदार और पड़ोसी इस दर्दनाक दृश्य को देखकर खुद को संभाल नहीं सके। परिजनों के अनुसार, राजुल शर्मा पेशे से कंप्यूटर डिजाइनर थे। रविवार को उनकी अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मृत्यु हो गई। परिवार इस दुखद घटना से उबर भी नहीं पाया था कि कुछ ही देर बाद एक और बड़ा सदमा सामने आ गया। परिवार के सदस्य राजेश शर्मा ने बताया कि राजुल और उनकी मां किरण शर्मा दोनों की पहले बायपास सर्जरी हो चुकी थी। परिवार के कई सदस्यों का भी हृदय संबंधी उपचार हो चुका है। उन्होंने कहा कि परिवार पर एक साथ आए इस दुख को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। जानकारी के अनुसार, राजुल शर्मा के निधन के समय उनकी मां किरण शर्मा अपनी बेटी के घर एरोड्रम रोड क्षेत्र में थीं। परिजन उन्हें अचानक सदमा न लगे, इसलिए उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई थी। बाद में उन्हें धीरे-धीरे घर लाया गया। लेकिन जैसे ही वे फ्लैट में पहुंचीं और बेटे का पार्थिव शरीर देखा, उनका धैर्य टूट गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, किरण शर्मा बेटे के शव के पास पहुंचीं, उसके सिर पर हाथ फेरा और फूट-फूटकर रोने लगीं। इसी दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और वे अचानक बेसुध होकर गिर पड़ीं। परिजन तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। कुछ ही घंटों के भीतर मां और बेटे के निधन की खबर पूरे परिवार और परिचितों के लिए गहरे सदमे का कारण बन गई। सोमवार सुबह से ही रिश्तेदार और परिचित अंतिम दर्शन के लिए घर पहुंचने लगे। जब दोनों की अर्थियां एक साथ सजाई गईं और अंतिम यात्रा निकली तो माहौल बेहद भावुक हो गया। हर किसी की जुबान पर यही सवाल था कि मां और बेटे का रिश्ता कितना गहरा रहा होगा कि बेटे के जाने का दुख मां सहन ही नहीं कर सकीं। गहरे शोक के इस माहौल के बीच परिवार ने एक ऐसा निर्णय लिया, जिसने इस दुखद घटना को मानवता के संदेश में बदल दिया। परिजनों ने मां और बेटे दोनों का नेत्रदान करने का फैसला किया। सामाजिक संस्था मुस्कान ग्रुप के सहयोग से नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की गई। परिवार का मानना है कि भले ही दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी आंखों की रोशनी चार जरूरतमंद लोगों के जीवन को नया उजाला देगी। इसी क्रम में शहर में अन्य परिवारों ने भी नेत्रदान की प्रेरणादायक पहल की है। धनवंती देवी लालवानी, सरदारनी नरेंद्र कौर और नंदलाल पुरणानी के निधन के बाद उनके परिजनों ने भी नेत्रदान कर समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है। राजुल और किरण शर्मा की यह कहानी जहां एक ओर मां-बेटे के अटूट प्रेम को दर्शाती है, वहीं दूसरी ओर नेत्रदान के माध्यम से मानवता और सेवा का संदेश भी देती है।

CM MOHAN YADAV: भीमनगर पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, लाभार्थियों से सीधे संवाद कर जाना योजनाओं का हाल

CM MOHAN YADAV

HIGHLIGHTS: भीमनगर पहुंचे सीएम मोहन यादव विकसित भारत अभियान में हुए शामिल लाभार्थियों से किया सीधा संवाद योजनाओं का लिया फीडबैक सरकारी योजनाओं की दी जानकारी   CM MOHAN YADAV: भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को राजधानी भोपाल के भीमनगर पहुंचे, जहां उन्होंने विकसित भारत अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और सुझाव जाने। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने आम लोगों से मुलाकात कर यह जानने की कोशिश की कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन्हें किस तरह मिल रहा है। उन्होंने लाभार्थियों से योजनाओं के क्रियान्वयन और सुविधाओं को लेकर फीडबैक भी लिया। एमपी में मानसून से पहले मौसम का यू-टर्न, भोपाल-जबलपुर समेत 28 जिलों में बारिश; सीहोर में 61 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी अधिकरोईयों को दिए निर्देश डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए लोगों को उनका अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है और इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों से बातचीत करते हुए उनकी समस्याएं भी सुनीं और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। BHIND MURDER CASE: प्रेमिका के लिए की पत्नी की हत्या, पहचान छिपाने के लिए चेहरे को फावड़े से रोंदा भीमनगर में मुख्यमंत्री ने बताया कि विकसित भारत अभियान के माध्यम से सरकार जनता तक सीधे पहुंचकर योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने का प्रयास कर रही है।

क्रिप्टो और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी, इंदौर से चला नेटवर्क चंडीगढ़, बेंगलुरु और दिल्ली तक फैला

मध्यप्रदेश । इंदौर में क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को निवेश का झांसा देकर करोड़ों रुपए की कथित ठगी करने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल इंदौर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका संचालन चंडीगढ़, बेंगलुरु, दिल्ली और अन्य शहरों तक फैला हुआ था। आरोप है कि गिरोह लोगों को कम समय में भारी मुनाफे और रकम दोगुनी होने का लालच देकर निवेश करवाता था, लेकिन बाद में न तो मुनाफा देता था और न ही मूल राशि लौटाता था। पुलिस के अनुसार, मामले में हरप्रीत कौर उर्फ मोना, जसवंत सिंह उर्फ जस्सी, अनिरुद्ध दलवी, मुकेश तायडे और जोसेफ सहित अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया गया है। फिलहाल हरप्रीत कौर को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। क्राइम ब्रांच को जिया वाधवानी, गुरजीत, अभिषेक, जसरथ, अमरजीत, हन्नी, साहिल, रोहित, पंकज, गुरमीत कौर समेत कई लोगों ने शिकायत दी थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि आरोपियों ने उन्हें क्रिप्टो करेंसी और फॉरेक्स ट्रेडिंग में निवेश करने पर शुरुआत में 2 प्रतिशत तक रिटर्न और 100 दिनों में रकम दोगुनी होने का दावा किया था। इसी भरोसे में लोगों ने लाखों रुपए निवेश किए। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपियों ने मिलकर “ए स्क्वेयर वर्ल्ड ग्लोबल कंसल्टेंसी” नाम से एक कथित यूएस बेस्ड कंपनी का प्रचार किया था। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कंपनी के नाम और विदेशी कारोबार के दावों का इस्तेमाल निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए किया गया। पुलिस के अनुसार, निवेशकों से प्राप्त राशि हरप्रीत कौर और कंपनी से जुड़े बैंक खातों में जमा करवाई गई थी। प्रारंभिक जांच में करीब ढाई करोड़ रुपए के लेन-देन की जानकारी सामने आई है। पीड़िता जिया वाधवानी ने पुलिस को बताया कि उसकी पहचान हरप्रीत कौर से एक किटी पार्टी के दौरान हुई थी। वहीं से उसे निवेश योजना की जानकारी दी गई। बाद में उसे भंवरकुआ क्षेत्र स्थित एक होटल में आयोजित बैठक में ले जाया गया, जहां अन्य आरोपियों ने कथित निवेश योजना प्रस्तुत की। इसके बाद शहर के एक बड़े होटल में सेमिनार आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों को बुलाया गया। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, सेमिनार में महंगे उपहार, आकर्षक प्रस्तुतियां और बड़े मुनाफे के वादों के जरिए लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया गया। पीड़ितों का आरोप है कि मार्च 2025 के बाद किसी भी निवेशक को भुगतान नहीं किया गया। जब लोगों ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो आरोपियों ने वेबसाइट अपडेट, तकनीकी समस्या और भुगतान प्रक्रिया में देरी जैसे कारण बताकर समय टालना शुरू कर दिया। बाद में ऑनलाइन बैठकों के माध्यम से भी निवेशकों को आश्वासन दिया गया, लेकिन भुगतान नहीं हुआ। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, लगातार दबाव बढ़ने पर आरोपियों ने कथित तौर पर यह कह दिया कि कंपनी का कारोबार बंद हो चुका है और अब किसी को कोई पैसा नहीं मिलेगा। इसके बाद कई आरोपियों ने फोन उठाना और संपर्क करना भी बंद कर दिया। क्राइम ब्रांच का कहना है कि मामले की जांच जारी है। बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजेक्शन, निवेश रिकॉर्ड और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित निवेश योजना से कुल कितने लोग प्रभावित हुए और ठगी की वास्तविक राशि कितनी है।

भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय, सह-नवाचार और तकनीकी सहयोग से वैश्विक समाधान विकसित करने पर जोर

नई दिल्ली । भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक संबंध लगातार नए आयाम प्राप्त कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर नवाचार, अनुसंधान, उभरती तकनीकों और औद्योगिक विकास जैसे भविष्य-केंद्रित क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। इसी क्रम में भारत ने स्पष्ट किया है कि विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में फ्रांस के साथ साझेदारी नई संभावनाओं और अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर रही है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने फ्रांस के नीस शहर में आयोजित विभिन्न बैठकों और संवाद कार्यक्रमों के बाद कहा कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग केवल आर्थिक या व्यापारिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सह-नवाचार और तकनीकी विकास के नए मॉडल तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका कहना था कि दोनों देशों की साझेदारी ऐसी तकनीकों और समाधानों को जन्म दे सकती है, जिनका लाभ वैश्विक स्तर पर विभिन्न समाजों और अर्थव्यवस्थाओं को मिल सके। नीस में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम के दौरान सरकार, उद्योग, निवेश और नवाचार क्षेत्र से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर व्यापार, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने माना कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में नवाचार आधारित साझेदारियां आर्थिक विकास और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही हैं। भारत का ‘विकसित भारत 2047’ विजन और फ्रांस का ‘फ्रांस 2030’ मिशन दोनों देशों को साझा लक्ष्यों की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं। इन पहलों का उद्देश्य भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई तकनीकों, अनुसंधान और औद्योगिक क्षमताओं का विकास करना है। यही कारण है कि दोनों देश तकनीकी सहयोग को रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में देख रहे हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए भारत और फ्रांस ने इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030 को अपनाने का निर्णय लिया है। यह रोडमैप महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों के सह-विकास, अनुसंधान सहयोग, शिक्षा क्षेत्र में गतिशीलता और भरोसेमंद तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए दिशा-निर्देशक दस्तावेज के रूप में कार्य करेगा। इसके माध्यम से दोनों देश साझा विकास, पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक प्रगति से जुड़े लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं। दोनों देशों का मानना है कि नवाचार आर्थिक मजबूती, सतत विकास, रणनीतिक स्वायत्तता और तकनीकी संप्रभुता का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे समय में जब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत विनिर्माण, हरित प्रौद्योगिकी और डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रही है, भारत और फ्रांस इन क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान भी दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने रक्षा, अंतरिक्ष, सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की। वार्ताओं में भविष्य की चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक सहयोग के नए ढांचे पर भी विचार किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और फ्रांस के बीच बढ़ती तकनीकी एवं नवाचार साझेदारी न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर नई तकनीकों के विकास और साझा चुनौतियों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में यह सहयोग आने वाले वर्षों में और अधिक प्रभावशाली रूप में सामने आने की संभावना रखता है।

तेल बाजार में लौटी स्थिरता, अमेरिका-ईरान समझौते के संकेत से कच्चा तेल टूटा, एशियाई और भारतीय शेयर बाजारों में जोरदार उछाल

नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक सहमति तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की घोषणा ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को बड़ी राहत दी है। इस घटनाक्रम के बाद सोमवार को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों में सकारात्मक संकेत देखने को मिले। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता कम होने से आने वाले समय में ऊर्जा बाजारों में स्थिरता बढ़ सकती है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार दबाव में दिखाई दिए। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में करीब पांच प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई और यह 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी तेज गिरावट के साथ 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि तेल की कीमतों में यह गिरावट मुख्य रूप से भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों से प्रेरित रही। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया था। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी रास्ते से विभिन्न देशों तक पहुंचता है। ऐसे में इसके संचालन को लेकर किसी भी प्रकार की अनिश्चितता का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति का संकेत दिए जाने के बाद निवेशकों के बीच भरोसा बढ़ा। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी अतिरिक्त प्रतिबंध के खोलने की घोषणा ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं को काफी हद तक कम कर दिया। बाजार ने इस खबर को सकारात्मक रूप से लिया और तेल की कीमतों में तत्काल प्रतिक्रिया देखने को मिली। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौता औपचारिक रूप लेता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और अधिक सुचारु हो सकती है। इससे न केवल ऊर्जा बाजारों को राहत मिलेगी बल्कि कई देशों में महंगाई के दबाव को भी कम करने में मदद मिल सकती है। तेल की कीमतें कम होने से परिवहन, विनिर्माण और अन्य ऊर्जा-आधारित क्षेत्रों की लागत पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। इस घटनाक्रम का असर केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा। एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों में भी उत्साह का माहौल दिखाई दिया। जापान, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया सहित कई बाजारों में निवेशकों ने खरीदारी बढ़ाई, जिससे प्रमुख सूचकांकों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों को उम्मीद है कि वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर दबाव कम होगा और व्यापारिक माहौल अधिक अनुकूल बनेगा। भारतीय शेयर बाजारों में भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिला। सप्ताह की शुरुआत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूती के साथ खुले। विश्लेषकों के अनुसार भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट विशेष रूप से लाभकारी होती है क्योंकि इससे आयात लागत कम होती है और महंगाई पर नियंत्रण रखने में मदद मिलती है। वैश्विक स्तर पर अब निवेशकों और नीति निर्माताओं की नजर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित औपचारिक समझौते पर टिकी हुई है। यदि वार्ताएं सफल रहती हैं तो ऊर्जा बाजारों में स्थिरता और वैश्विक आर्थिक विश्वास को अतिरिक्त मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।