“साहब, ये मुझे मार डालेगा…” ट्रस्टी की चेतावनी हुई सच, एक महीने बाद चौकीदार ने ली जान

मध्य प्रदेश । इंदौर के अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र स्थित 150 साल पुराने बारामत्था बगीची शिव-हनुमान मंदिर के ट्रस्टी कैलाश चंद्र मोदी की निर्मम हत्या ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। 70 वर्षीय कैलाश मोदी की मौत केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और अनदेखी का ऐसा मामला बन गई है, जिसमें पीड़ित ने अपनी जान को खतरा होने की आशंका पहले ही जाहिर कर दी थी। दुखद बात यह रही कि उनकी चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया और आखिरकार वही हुआ, जिसका डर उन्हें लगातार सता रहा था। परिजनों के अनुसार कैलाश मोदी पिछले कई महीनों से मंदिर परिसर के चौकीदार मुकेश शर्मा की गतिविधियों से परेशान थे। उन्होंने पुलिस कमिश्नर, कलेक्टर, एसीपी और थाना प्रभारी सहित कई अधिकारियों को लिखित शिकायतें देकर बताया था कि आरोपी मंदिर परिसर में अवैध कब्जा करने की कोशिश कर रहा है और विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां देता है। 13 मई को दिए गए आवेदन में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि आरोपी कभी भी उनकी हत्या कर सकता है। बताया जाता है कि मुकेश शर्मा पर पहले से ही मारपीट, धमकी, अवैध हथियार रखने और अवैध वसूली जैसे पांच आपराधिक मामले दर्ज थे। इसके बावजूद वह लगातार खुलेआम घूमता रहा। पुलिस ने उसके खिलाफ बाउंड ओवर और जिलाबदर की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन वह कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी। इसी बीच आरोपी की गुंडागर्दी और बढ़ती गई। कैलाश मोदी ने केवल एक-दो नहीं, बल्कि करीब 40 शिकायतें विभिन्न विभागों को सौंपी थीं। उन्होंने मंदिर परिसर में शराबखोरी, जुआ-सट्टा, अवैध गतिविधियों और कब्जे के प्रयासों की जानकारी भी प्रशासन को दी थी। दिसंबर 2025 में आरोपी ने मंदिर परिसर में ही कैलाश मोदी पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया था। उस समय भी मामला दर्ज हुआ, लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं हुई। यही कारण रहा कि आरोपी के हौसले लगातार बुलंद होते गए। मंगलवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे आरोपी मुकेश शर्मा कथित तौर पर नशे की हालत में मंदिर पहुंचा। वहां किसी बात को लेकर विवाद हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक जब कैलाश मोदी ने उसे समझाने का प्रयास किया तो वह आक्रामक हो गया और डंडा लेकर उनके पीछे दौड़ पड़ा। जान बचाने के लिए मोदी पास स्थित गुरुद्वारे की ओर भागे, लेकिन आरोपी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। उसने ताबड़तोड़ डंडों से हमला कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें आरोपी लगातार बुजुर्ग ट्रस्टी पर हमला करता दिखाई दे रहा है। गंभीर रूप से घायल कैलाश मोदी को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि पुलिस और प्रशासन ने समय रहते शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई की होती तो आज कैलाश मोदी जीवित होते। अब पुलिस हत्या के मामले की जांच कर रही है और मृतक द्वारा पहले की गई शिकायतों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है। लेकिन यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि जब कोई नागरिक अपनी जान को खतरा बताते हुए बार-बार गुहार लगाता है, तब उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।
इंदौर से यूएई के लिए नई सौगात: 17 जुलाई से शुरू होगी अबुधाबी की सीधी उड़ान

मध्य प्रदेश । इंदौर से यूएई की यात्रा करने वाले यात्रियों को जल्द ही एक नई सुविधा मिलने जा रही है। एयर इंडिया एक्सप्रेस ने इंदौर और अबुधाबी के बीच सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू करने का ऐलान किया है। यह नई सेवा 17 जुलाई से शुरू होगी और इसके लिए टिकट बुकिंग भी प्रारंभ कर दी गई है। इस घोषणा ने उन यात्रियों को बड़ी राहत दी है, जो पिछले कई महीनों से शारजाह उड़ान बंद होने के कारण परेशानी का सामना कर रहे थे। दरअसल, एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा संचालित इंदौर-शारजाह फ्लाइट प्रदेश की एकमात्र नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ान थी। लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षा कारणों के चलते यह उड़ान 28 फरवरी से बंद कर दी गई थी। कंपनी ने कई बार इसके दोबारा संचालन की संभावना जताई, लेकिन हर बार उड़ान शुरू होने की तारीख आगे बढ़ा दी गई। हाल ही में 1 जुलाई से इसे फिर शुरू करने की घोषणा की गई थी, लेकिन बाद में एयरलाइन ने इसे अपने बुकिंग सिस्टम से ही हटा दिया। शारजाह उड़ान के बंद होने से इंदौर और आसपास के क्षेत्रों के हजारों यात्रियों के सामने सीधी अंतरराष्ट्रीय यात्रा का विकल्प लगभग समाप्त हो गया था। विशेष रूप से यूएई में रहने वाले प्रवासी भारतीय, व्यवसायी और पारिवारिक यात्राएं करने वाले लोगों को दिल्ली, मुंबई या अन्य शहरों से कनेक्टिंग फ्लाइट लेने की मजबूरी थी। ऐसे में अबुधाबी के लिए नई सीधी उड़ान की घोषणा को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ट्रेवल एजेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष अमोल कटारिया के अनुसार शारजाह सेवा बंद होने से यात्रियों और ट्रेवल इंडस्ट्री दोनों में निराशा थी। नई उड़ान शुरू होने से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि इंदौर की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। इससे व्यापारिक गतिविधियों और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा शुरू की जा रही यह उड़ान सप्ताह में चार दिन संचालित होगी। रविवार, सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को यात्री इस सेवा का लाभ उठा सकेंगे। शुरुआती चरण में एकतरफा किराया लगभग 16 से 17 हजार रुपए के बीच रखा गया है, जिसे प्रतिस्पर्धी और यात्रियों के लिए सुविधाजनक माना जा रहा है। फ्लाइट शेड्यूल के अनुसार इंदौर से उड़ान शाम 7:50 बजे रवाना होगी और यूएई के स्थानीय समयानुसार रात 9:35 बजे अबुधाबी पहुंचेगी। कुल यात्रा समय लगभग सवा तीन घंटे रहेगा। वहीं वापसी में यह विमान अबुधाबी से रात 10:35 बजे उड़ान भरेगा और भारतीय समयानुसार तड़के 3:20 बजे इंदौर पहुंचेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अबुधाबी के लिए सीधी उड़ान शुरू होने से मध्य प्रदेश के यात्रियों को न केवल समय की बचत होगी, बल्कि यात्रा खर्च भी कम होगा। इसके अलावा यूएई में कार्यरत भारतीय समुदाय और व्यापारिक वर्ग को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। आने वाले समय में यदि यात्रियों की संख्या अच्छी रहती है तो अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। नई सेवा के साथ इंदौर एक बार फिर वैश्विक हवाई संपर्क के मानचित्र पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की ओर बढ़ रहा है।
MP Common Civil Code Bill: UCC पर मुख्यमंत्री का बड़ा बयान, CM बोले- मानसून सत्र 2026 में पारित होगा बिल

MP Common Civil Code Bill: भोपाल। समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार बड़ा फैसला लिया है। आगामी मानसून सत्र में इस प्रस्ताव को लाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार कई महत्वपूर्ण और समसामयिक विषयों के साथ सत्र में उतर रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि बाबा महाकाल की कृपा से UCC विधेयक इसी सत्र में पारित किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने इसे ‘एक देश, एक कानून’ की राष्ट्रीय भावना से जोड़ा और कहा कि प्रदेश तेजी से इस दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने नीट परीक्षा की तैयारी और परीक्षार्थियों को सही सुविधा देने के निर्देश भी दिए हैं। इंदौर में महिलाओं से छेड़छाड़ के तीन मामले: प्रेमी पर धमकी का आरोप, भतीजे और जीजा के खिलाफ भी FIR विधानसभा सत्र में UCC विधेयक होगा पेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि सरकार समान नागरिक संहिता को लेकर गंभीर रूप से सोच रही है और इसे मानसून सत्र में पेश भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश में एक समान कानून लागू करने की भावना में कुछ भी गलत नहीं है और यह समाज में समानता लाने का महत्वपूर्ण प्रयास है। UCC कमेटी का किया गठन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की संभावनाओं का अध्ययन करने और इसका मसौदा तैयार करने के लिए राज्य सरकार ने 6 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की है। अप्रैल में गठित इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। समिति में प्रशासन, कानून, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। ट्विशा शर्मा मौत मामला: रिटायर्ड जज गिरिबाला की मांगें कोर्ट ने ठुकराईं, न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ी गठित कमेटी ने राज्यभर से लिए सुझाव समान नागरिक संहिता को लेकर गठित समिति ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर आम लगों से उनकी राय ली यही नहीं, बल्कि इसके लिए एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरु किया गया था जिसके जरिये लोगों ने अपने विचार साझा किए। 60 दिनों के भीतर ड्राफ्ट बिल सौंपने की जिम्मेदारी समिति को गठन के 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और ड्राफ्ट बिल सरकार को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई थी। विभिन्न वर्गों से मिले सुझावों और चर्चाओं के आधार पर अब मसौदे को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला: 33 जिलों में आंधी-बारिश, जून में अब तक 35% कम वर्षा पहले ही तीन राज्यों में लागू सीएम ने बताया कि उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसे राज्यों में पहले से ही UCC लागू किया जा चुका है, और अब मध्यप्रदेश भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि एमपी जल्द ही इस कानून को लागू करने वाला अगला राज्य बन सकता है। नीट परीक्षा को लेकर भी दिए निर्देश नीट परीक्षा को लेकर भी मुख्यमंत्री ने प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में परीक्षार्थी को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए और यातायात व्यवस्था सुचारू रूप से सही किया जाए। NEET परीक्षा के सफल आयोजन के लिए मध्यप्रदेश सरकार पूरी तत्परता कार्य कर रही है। सभी परीक्षा केंद्रों पर विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाएं और बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। परीक्षा में शामिल होने जा रहे सभी विद्यार्थियों को अग्रिम शुभकामनाएं : CM@DrMohanYadav51… pic.twitter.com/c7i3OuKPqu — Chief Minister, MP (@CMMadhyaPradesh) June 17, 2026
बुधवार पूजा विधि: गणपति और बुध ग्रह की कृपा पाने के लिए करें ये सरल उपाय

नई दिल्ली -हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता का स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य, पूजा, यज्ञ, विवाह या नए कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी का स्मरण और पूजन करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और कार्य सफल होता है। इसलिए गणेश जी की पूजा में सही सामग्री और विधि का विशेष महत्व माना गया है। गणेश जी की पूजा के लिए सबसे पहले उनकी प्रतिमा या चित्र होना आवश्यक है। पूजा स्थान को स्वच्छ करके लाल या पीला वस्त्र बिछाएं और उस पर गणेश जी की स्थापना करें। इसके बाद गंगाजल या शुद्ध जल से पूजा स्थल को पवित्र करें। गणेश पूजा में दूर्वा घास का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। पूजा के दौरान 21 दूर्वा अर्पित करने से गणपति प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। इसके साथ ही लाल या पीले फूल भी अर्पित किए जाते हैं। भगवान गणेश को मोदक और लड्डू विशेष रूप से प्रिय हैं। इसलिए पूजा में मोदक, बेसन के लड्डू या बूंदी के लड्डू का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा फल, नारियल, सुपारी, पान के पत्ते और अक्षत (चावल) भी पूजा सामग्री में शामिल किए जाते हैं। पूजा के समय दीपक और धूप अवश्य जलाएं। घी का दीपक जलाकर गणेश जी की आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। रोली, कुमकुम, हल्दी, चंदन और मौली भी पूजा में उपयोग की जाती हैं। चंदन का तिलक लगाने से पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। गणेश पूजा के दौरान “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है। इस मंत्र का 21, 51 या 108 बार जाप करने से बुद्धि, ज्ञान और सफलता की प्राप्ति होती है। गणेश चालीसा, गणेश अथर्वशीर्ष या संकटनाशन स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी की पूजा में श्रद्धा और भक्ति सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि सभी सामग्री उपलब्ध न हो, तब भी सच्चे मन और विश्वास से की गई पूजा भगवान तक पहुंचती है। इसलिए पूजा करते समय मन को शांत रखें और पूर्ण श्रद्धा के साथ गणपति बप्पा का स्मरण करें। नियमित रूप से गणेश जी की आराधना करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, कार्यों में सफलता मिलती है और घर-परिवार में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है। यही कारण है कि गणेश जी को विघ्नहर्ता और मंगलकारी देवता कहा जाता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पांच दिवसीय मध्य प्रदेश दौरा कल से: सुरक्षा के कड़े इंतजाम, कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन

मध्य प्रदेश । राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 18 जून से मध्य प्रदेश के पांच दिवसीय आधिकारिक दौरे पर आ रही हैं। 22 जून तक चलने वाले इस दौरे के दौरान वे इंदौर, ओंकारेश्वर, ग्वालियर और श्योपुर सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों का भ्रमण करेंगी। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। साथ ही यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया गया है। राष्ट्रपति के दौरे की शुरुआत इंदौर से होगी। यहां पहुंचने के बाद वे सीधे ओंकारेश्वर जाएंगी, जहां भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगी। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस यात्रा को लेकर ओंकारेश्वर क्षेत्र में विशेष तैयारियां की गई हैं। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग पार्किंग और परिवहन व्यवस्था भी बनाई है। 19 जून को राष्ट्रपति अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम में शामिल होंगी। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य, जनजातीय कल्याण और सिकल सेल बीमारी के उन्मूलन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा होगी। इसके बाद राष्ट्रपति का कार्यक्रम ग्वालियर और श्योपुर में भी निर्धारित है, जहां वे विभिन्न सरकारी और सामाजिक आयोजनों में भाग लेंगी। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए इंदौर एयरपोर्ट और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। प्रशासन ने एयरपोर्ट क्षेत्र को अस्थायी रूप से ‘नो-फ्लाइंग जोन’ घोषित किया है। इस दौरान किसी भी प्रकार की अनधिकृत उड़ान गतिविधि पर प्रतिबंध रहेगा। सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए रखेंगी ताकि राष्ट्रपति के कार्यक्रमों में किसी प्रकार की बाधा न आए। यातायात व्यवस्था के तहत 17 से 19 जून तक कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया है। इंदौर-इच्छापुर मार्ग पर चलने वाले भारी मालवाहक वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए गए हैं। खंडवा, खरगोन, भीकनगांव, कसरावद, धामनोद और अन्य क्षेत्रों से होकर वाहनों को निकाला जाएगा ताकि वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान यातायात प्रभावित न हो। ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष योजना बनाई गई है। इंदौर, खंडवा और मूंदी की ओर से आने वाले वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों तक ही जाने की अनुमति होगी। वहां से श्रद्धालुओं को पैदल या प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए गए परिवहन साधनों के माध्यम से मंदिर क्षेत्र तक पहुंचना होगा। बसों के लिए भी अलग पार्किंग और शटल सेवा की व्यवस्था की गई है। राष्ट्रपति के काफिले के गुजरने के दौरान कुछ प्रमुख मार्गों को अस्थायी रूप से नो-व्हीकल जोन घोषित किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से इन मार्गों पर आम वाहनों की आवाजाही कुछ समय के लिए रोकी जा सकती है। राष्ट्रपति के गंतव्य तक पहुंचने के बाद यातायात को सामान्य रूप से बहाल कर दिया जाएगा। प्रशासन ने नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे ट्रैफिक डायवर्जन, पार्किंग व्यवस्था और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें। साथ ही यात्रा के दौरान अतिरिक्त समय लेकर निकलें ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके। राष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए पूरे प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है।
इंदौर में महिलाओं से छेड़छाड़ के तीन मामले: प्रेमी पर धमकी का आरोप, भतीजे और जीजा के खिलाफ भी FIR

मध्य प्रदेश । इंदौर शहर में महिलाओं और युवतियों के साथ छेड़छाड़ एवं उत्पीड़न के तीन अलग-अलग मामले सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। द्वारकापुरी और खजराना थाना क्षेत्रों में दर्ज इन मामलों ने एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा और पारिवारिक रिश्तों में बढ़ती संवेदनहीनता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। तीनों मामलों में पीड़िताओं की शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पहला मामला द्वारकापुरी क्षेत्र का है, जहां 20 वर्षीय युवती ने अपने पूर्व प्रेमी लक्की पंसोरिया के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। युवती के अनुसार दोनों के बीच करीब एक वर्ष से परिचय था और वे एक ही कार्यस्थल पर काम करते थे। आरोपी वहां ड्राइवर के रूप में कार्यरत था। युवती का आरोप है कि शराब की लत और व्यवहार से परेशान होकर उसने आरोपी से बातचीत बंद कर दी थी। इसके बाद आरोपी लगातार उस पर शादी करने का दबाव बनाने लगा। शिकायत में युवती ने आरोप लगाया है कि आरोपी ने उसके फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी। इतना ही नहीं, उसने आत्महत्या कर युवती को कानूनी मामले में फंसाने की बात भी कही। पीड़िता के मुताबिक आरोपी उसका पीछा करता था और लगातार मानसिक दबाव बनाने का प्रयास कर रहा था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। दूसरा मामला खजराना क्षेत्र का है, जहां एक विवाहिता ने अपने ही भतीजे राहुल के खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत दर्ज कराई है। महिला ने पुलिस को बताया कि आरोपी लंबे समय से उस पर गलत नजर रखता था। कुछ दिन पहले उसने बाथरूम में झांकने की कोशिश की थी, जिस पर परिवार द्वारा उसे फटकार भी लगाई गई थी। इसके बावजूद आरोपी के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। महिला का आरोप है कि मंगलवार रात आरोपी ने फिर अनुचित हरकत की और आपत्तिजनक व्यवहार किया। इसके बाद उसने परिवार के सदस्यों को पूरी जानकारी दी और पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। तीसरा मामला भी खजराना थाना क्षेत्र का है, जहां 17 वर्षीय नाबालिग किशोरी ने अपने जीजा सोहेल के खिलाफ छेड़छाड़ की शिकायत की है। पीड़िता के अनुसार आरोपी ने रास्ते में उसे रोककर जबरन बाइक पर बैठाने की कोशिश की। किशोरी ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसके साथ अनुचित व्यवहार भी किया। किसी तरह वहां से निकलकर वह घर पहुंची और परिजनों को घटना की जानकारी दी। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने नाबालिग की रिपोर्ट दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। चूंकि मामला नाबालिग से जुड़ा है, इसलिए पुलिस संवेदनशीलता के साथ जांच कर रही है और आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तीनों मामलों में शिकायतों के आधार पर संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आरोपों की पुष्टि के लिए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और आरोपियों की तलाश जारी है। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अपराधियों को मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी, कानून से खिलवाड़ करने वालों के लिए बिहार में नहीं बचेगी कोई जगह

नई दिल्ली । बिहार में कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपराधियों के खिलाफ सख्त रुख का संकेत देते हुए स्पष्ट कहा है कि राज्य में कानून से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार में अपराधियों के लिए कोई स्थान नहीं है और प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी दृढ़ता के साथ काम कर रहा है। पटना के फुलवारीशरीफ क्षेत्र में आयोजित एक जनकल्याण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने अपराध और सुरक्षा के मुद्दे पर अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य में आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और पुलिस तथा प्रशासन को चुनौती देने वाले तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के बयान को आगामी राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने हाल ही में सामने आए एक वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं, जिनमें कानून व्यवस्था को चुनौती देने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि संबंधित मामले में कार्रवाई की जा चुकी है और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसे मामलों को हल्के में नहीं लेती और कानून के दायरे में रहते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में पड़ोसी राज्यों का भी उल्लेख किया और कहा कि विभिन्न राज्यों में अपराध के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया जा रहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने अपने प्रशासनिक दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए कहा कि बिहार में भी अपराध नियंत्रण को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उनका कहना था कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले लोगों के लिए राज्य में कोई सुरक्षित स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व वर्षों में त्वरित न्याय प्रक्रिया और स्पीडी ट्रायल जैसे उपायों के माध्यम से अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए थे। वर्तमान सरकार भी उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए और अधिक प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री के अनुसार कानून का भय और न्याय व्यवस्था पर भरोसा दोनों एक मजबूत प्रशासन की पहचान हैं। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा को विशेष महत्व देते हुए कहा कि राज्य की बहनों और बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता का विश्वास बनाए रखना और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह बयान केवल प्रशासनिक संदेश नहीं बल्कि कानून व्यवस्था को लेकर सरकार की राजनीतिक प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। बिहार में आगामी चुनावी माहौल और बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों के बीच सुरक्षा और अपराध नियंत्रण का मुद्दा प्रमुख विषय बना हुआ है। ऐसे में मुख्यमंत्री के सख्त तेवरों को इसी व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। राज्य सरकार लगातार यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि अपराध और अवैध गतिविधियों के प्रति उसकी नीति पूरी तरह स्पष्ट है। प्रशासनिक स्तर पर निगरानी, त्वरित कार्रवाई और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के ताजा बयान ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार किसी प्रकार का समझौता करने के पक्ष में नहीं है और अपराध नियंत्रण को लेकर उसकी रणनीति आगे भी सख्त बनी रहेगी।
बात खरी है: छात्र नेता की ट्रांसफर चुनौती, पुलिस की फजीहत और नरोत्तम को मिला ‘सनातनी’ आशीर्वाद

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति, प्रशासन और सामाजिक घटनाओं में इन दिनों ऐसे कई घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कहीं धार्मिक मंच से राजनीतिक संकेत निकाले जा रहे हैं, कहीं छात्र राजनीति के तेवर प्रशासन को चुनौती देते दिखाई दे रहे हैं, तो कहीं घरेलू विवाद में पुलिस खुद विवाद का हिस्सा बन गई है। इन घटनाओं ने प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक माहौल को चर्चा का विषय बना दिया है। राजधानी भोपाल में चल रही प्रसिद्ध कथावाचक पंडित देवकीनंदन ठाकुर की कथा में उस समय दिलचस्प माहौल बन गया, जब पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा कथा स्थल पर पहुंचे। व्यासपीठ से देवकीनंदन ठाकुर ने नरोत्तम मिश्रा की खुलकर प्रशंसा की और उन्हें सनातन धर्म का सेवक तथा भगवान का सच्चा भक्त बताया। इतना ही नहीं, उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह शिकायत भी कर दी कि डबरा में सुंदर नवग्रह मंदिर बनवाने के बावजूद नरोत्तम मिश्रा ने उनकी कथा नहीं करवाई। इस टिप्पणी के बाद कथा पंडाल में मौजूद लोगों के चेहरे खिल उठे और माहौल हंसी-मजाक से भर गया। राजनीतिक जानकार इस घटना को सिर्फ एक धार्मिक टिप्पणी नहीं मान रहे हैं। दतिया में संभावित उपचुनाव की चर्चाओं के बीच इसे नरोत्तम मिश्रा के लिए एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा के भीतर भी उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा है और कथावाचक के मंच से मिली यह सार्वजनिक सराहना चर्चा का विषय बनी हुई है। उधर शिवपुरी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के एक नेता का बयान सुर्खियों में आ गया। अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं के बीच संगठन के विभाग संगठन मंत्री देशराज नरोलिया ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि वे चाहें तो कलेक्टर का ट्रांसफर करवा सकते हैं। दरअसल, प्रदर्शन के दौरान लंबे समय तक कलेक्टर के मौके पर नहीं पहुंचने से कार्यकर्ता नाराज थे। जब तहसीलदार बातचीत के लिए पहुंचे तो नाराजगी और बढ़ गई। इसके बाद दिया गया बयान प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। लोगों ने इसे सत्ता और संगठन की ताकत दिखाने वाले बयान के रूप में देखा। इसी बीच बैतूल जिले के मुलताई से एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। पति-पत्नी के विवाद की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी। पुलिस का उद्देश्य दोनों पक्षों को समझाकर विवाद समाप्त कराना था, लेकिन स्थिति उलट गई। बातचीत के दौरान माहौल इतना बिगड़ा कि कहासुनी हाथापाई में बदल गई। पुलिसकर्मियों और परिवार के सदस्यों के बीच धक्का-मुक्की और मारपीट हो गई। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जिसने पुलिस को बुलाया था, वही पत्नी बाद में अपने पति के बचाव में उतर आई। इस घटना में पुलिसकर्मी और पति दोनों घायल हुए। घटना के बाद लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि पति-पत्नी के झगड़े में तीसरे व्यक्ति का फंसना अक्सर भारी पड़ जाता है। राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री राज्यसभा जाने की कोशिशों में लगे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। बताया जा रहा है कि उनकी रणनीति विधानसभा सीट खाली कर अपने परिवार के सदस्य को राजनीतिक अवसर दिलाने की थी। हालांकि यह योजना साकार नहीं हो सकी। अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चाओं का दौर जारी है। प्रदेश की ये घटनाएं बताती हैं कि राजनीति, प्रशासन और समाज में हर दिन ऐसे प्रसंग सामने आते हैं, जो कभी गंभीर संदेश देते हैं तो कभी लोगों को मुस्कुराने का मौका भी दे जाते हैं।
नीट पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी रोक से मचा असर, 15 करोड़ से अधिक भारतीय यूजर्स प्रभावित होने का दावा

नई दिल्ली । नीट-यूजी 2026 पुनर्परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध को लेकर देश में डिजिटल प्लेटफॉर्म नियमन और परीक्षा सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल डुरोव ने दावा किया है कि इस प्रतिबंध के कारण भारत में 15 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों की कथित गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में सामान्य उपयोगकर्ताओं को भी असुविधा का सामना करना पड़ा। डुरोव ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि भारतीय अधिकारियों द्वारा परीक्षा से जुड़ी कथित लीक सामग्री को रोकने के उद्देश्य से प्लेटफॉर्म पर सीमित अवधि के लिए प्रतिबंध लगाया गया। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम ने पहले ही ऐसे सैकड़ों चैनलों और समूहों के खिलाफ कार्रवाई की है, जिन पर परीक्षा से संबंधित संदिग्ध सामग्री साझा करने और कथित धोखाधड़ी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप लगे थे। कंपनी का दावा है कि वह लगातार ऐसे कंटेंट की निगरानी और हटाने की प्रक्रिया को मजबूत बना रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर संवेदनशील माहौल बना हुआ है। नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है। इससे पहले प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए थे। इसी पृष्ठभूमि में परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित बनाने के लिए कई एहतियाती कदम उठाए गए हैं। सरकारी एजेंसियों और परीक्षा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर परीक्षा से संबंधित गलत जानकारी, भ्रामक दावे और कथित लीक सामग्री तेजी से प्रसारित की जा सकती है। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। अधिकारियों का उद्देश्य पुनर्परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था, अफवाह या अनुचित गतिविधि को रोकना बताया जा रहा है। मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू टेलीग्राम के मैसेज एडिटिंग फीचर से भी जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों का मानना है कि कुछ मामलों में संदेशों को बाद में संपादित कर पुराने समय का दिखाने या भ्रामक प्रमाण तैयार करने की कोशिश की गई थी। इसी कारण प्लेटफॉर्म को सीमित अवधि के लिए इस सुविधा को भी निष्क्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि यह कदम डिजिटल रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। डुरोव ने कहा है कि कंपनी इस चुनौती को गंभीरता से ले रही है और संदेशों पर दिखाई देने वाले एडिटेड लेबल को और अधिक स्पष्ट बनाने की दिशा में काम कर रही है। उनका मानना है कि इससे सामग्री में बदलाव को आसानी से पहचाना जा सकेगा और किसी भी प्रकार की डिजिटल हेरफेर की संभावना कम होगी। कंपनी तकनीकी स्तर पर ऐसे उपाय विकसित कर रही है जो पारदर्शिता बढ़ाने में मदद कर सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल एक मैसेजिंग एप्लीकेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, डेटा संचार की स्वतंत्रता और परीक्षा सुरक्षा जैसे व्यापक मुद्दों से भी जुड़ा हुआ है। एक ओर सरकारें संवेदनशील परीक्षाओं की निष्पक्षता सुनिश्चित करना चाहती हैं, वहीं दूसरी ओर करोड़ों उपयोगकर्ताओं की डिजिटल पहुंच और संचार सेवाओं की निरंतर उपलब्धता भी महत्वपूर्ण विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रतिबंध और तकनीकी नियंत्रणों को लेकर क्या निर्णय लिए जाते हैं। फिलहाल यह मामला देश में डिजिटल नियमन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की भूमिका पर गंभीर चर्चा का केंद्र बन गया है।
एमआईटी छोड़कर शुरू किया था स्टार्टअप, अब स्पेसएक्स अधिग्रहण के बाद अरबपतियों की सूची में चमके अमन सांगर

नई दिल्ली । कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकों के बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय मूल के युवा उद्यमी अमन सांगर वैश्विक कारोबारी जगत में चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। एआई कोडिंग प्लेटफॉर्म कर्सर की मूल कंपनी एनीस्फीयर के स्पेसएक्स द्वारा 60 अरब डॉलर के शेयर खरीद समझौते की घोषणा के बाद 25 वर्षीय अमन सांगर की अनुमानित संपत्ति लगभग 5.5 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। यह सौदा न केवल एआई उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि युवा उद्यमिता और तकनीकी नवाचार का भी एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। अमन सांगर एनीस्फीयर के सह-संस्थापक और मुख्य परिचालन अधिकारी हैं। उन्होंने वर्ष 2022 में अपने तीन साथियों के साथ प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की पढ़ाई बीच में छोड़कर स्टार्टअप की शुरुआत की थी। उस समय कंपनी का उद्देश्य इंजीनियरिंग क्षेत्र के लिए एआई आधारित समाधान तैयार करना था, लेकिन बाद में टीम ने अपनी रणनीति बदलते हुए सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के लिए उन्नत एआई कोडिंग प्लेटफॉर्म विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया। इसी रणनीतिक बदलाव ने कंपनी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। एनीस्फीयर द्वारा विकसित कर्सर प्लेटफॉर्म ने सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के काम करने के तरीके को काफी हद तक बदल दिया। यह प्लेटफॉर्म पूरे कोडबेस का विश्लेषण कर जटिल समस्याओं के समाधान सुझाने और कोड तैयार करने में सक्षम माना जाता है। तकनीकी कंपनियों के बीच इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और देखते ही देखते यह वैश्विक स्तर पर एआई-संचालित कोडिंग समाधानों की अग्रणी सेवाओं में शामिल हो गया। न्यूयॉर्क में जन्मे अमन सांगर ने किशोरावस्था में ही प्रोग्रामिंग की दुनिया में कदम रख दिया था। बताया जाता है कि उन्होंने मात्र 14 वर्ष की आयु में कोडिंग सीखना शुरू कर दिया था। बाद में एमआईटी में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात माइकल ट्रुएल, सुलेह आसिफ और आर्विड लुनेमार्क से हुई। यही टीम आगे चलकर एनीस्फीयर की नींव बनी। कंपनी के विकास में अमन सांगर ने उत्पाद रणनीति, व्यवसाय विस्तार और डेवलपर समुदाय के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कंपनी की वित्तीय प्रगति भी बेहद तेज रही है। कुछ वर्षों के भीतर ही कर्सर ने वैश्विक तकनीकी उद्योग में मजबूत पहचान बना ली। बड़ी संख्या में डेवलपर्स और कॉरपोरेट संस्थानों ने इसे अपने सॉफ्टवेयर विकास कार्यों में अपनाया। वर्तमान में दुनिया भर की हजारों कंपनियों के लाखों डेवलपर्स इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। इससे कंपनी की आय में भी लगातार वृद्धि दर्ज की गई, जिसने निवेशकों का विश्वास और मजबूत किया। स्पेसएक्स का यह अधिग्रहण एआई और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के बीच संभावित सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस सौदे के बाद उन्नत एआई मॉडल के विकास और बड़े पैमाने पर तकनीकी अनुसंधान को नई गति मिल सकती है। अधिग्रहण की घोषणा के बाद अमन सांगर ने भी भविष्य की संभावनाओं को लेकर उत्साह व्यक्त किया और अत्याधुनिक एआई मॉडलों के विकास पर काम करने की बात कही। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सौदा आने वाले वर्षों में एआई उद्योग की दिशा तय करने वाले प्रमुख घटनाक्रमों में शामिल हो सकता है। साथ ही, अमन सांगर की सफलता दुनिया भर के युवा उद्यमियों के लिए यह संदेश भी देती है कि नवाचार, तकनीकी दृष्टि और जोखिम लेने का साहस वैश्विक स्तर पर असाधारण उपलब्धियां दिला सकता है।