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वैश्विक तनाव घटा, घरेलू बाजार चमका; बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर से ऊपर, मिडकैप-स्मॉलकैप में भी जोरदार तेजी

नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र की मजबूती ने भारतीय पूंजी बाजार को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तक पहुंचा दिया है। निवेशकों के बढ़ते भरोसे, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण एक बार फिर 5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर गया। यह लगभग छह सप्ताह का सर्वोच्च स्तर माना जा रहा है और इससे बाजार की सकारात्मक धारणा को नई मजबूती मिली है। हाल के दिनों में वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में आए बदलावों का असर भारतीय बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। पश्चिम एशिया से जुड़े तनावों में नरमी और अमेरिका-ईरान संबंधों को लेकर सामने आए सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों की चिंताओं को कम किया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने भारत जैसे ऊर्जा आयातक देश के लिए राहत का माहौल बनाया है। इसका सीधा प्रभाव निवेशकों के विश्वास और बाजार की दिशा पर देखा गया। विश्लेषकों का मानना है कि तेल की कीमतों में कमी से महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। साथ ही चालू खाते के घाटे पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। इन परिस्थितियों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है, जिसके परिणामस्वरूप शेयर बाजार में खरीदारी का माहौल मजबूत हुआ है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान बाजार में आई तेजी ने कंपनियों के कुल मूल्यांकन को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। बाजार की यह मजबूती केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही है। व्यापक बाजार में भी उत्साह दिखाई दिया है। मिडकैप, स्मॉलकैप और माइक्रोकैप श्रेणी के शेयरों ने हाल के महीनों में बड़े शेयरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में तेजी केवल चुनिंदा कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेशकों की भागीदारी विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों में फैल रही है। व्यापक भागीदारी को किसी भी तेजी के टिकाऊ होने का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की ओर से बिकवाली का सिलसिला पूरी तरह थमा नहीं है, फिर भी घरेलू निवेशकों की लगातार सक्रियता बाजार को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। व्यवस्थित निवेश योजनाओं और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने बाजार को स्थिरता देने में अहम भूमिका निभाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले समय में विदेशी निवेश का प्रवाह भी सकारात्मक होता है तो बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाएं भी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। संरचनात्मक सुधारों, मजबूत कॉरपोरेट बैलेंस शीट, बढ़ते पूंजीगत निवेश और बेहतर नकदी प्रवाह जैसे कारक कंपनियों की विकास क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में कॉरपोरेट क्षेत्र ने कर्ज के स्तर को नियंत्रित करने और परिचालन क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया है, जिसका लाभ अब बाजार मूल्यांकन में दिखाई दे रहा है। बुधवार के कारोबार में भी प्रमुख सूचकांकों ने सकारात्मक रुख बनाए रखा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए, जिससे निवेशकों का उत्साह और मजबूत हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चरण में बैंकिंग, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र की कंपनियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। कुल मिलाकर, वैश्विक परिस्थितियों में सुधार और घरेलू आर्थिक मजबूती के संयुक्त प्रभाव ने भारतीय शेयर बाजार को नई ऊर्जा प्रदान की है। बीएसई का बाजार पूंजीकरण 5 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंचना न केवल निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत है, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को भी दर्शाता है।

तिब्बत में चीन का मेगा डैम प्रोजेक्ट: ब्रह्मपुत्र पर मंडराया संकट, भारत ने बढ़ाई निगरानी

तिब्बत  । तिब्बत  में यारलुंग त्सांगपो नदी पर चीन द्वारा दुनिया के सबसे बड़े जलविद्युत बांध के निर्माण को आगे बढ़ाए जाने से भारत की चिंताएं बढ़ गई हैं। यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारतीय सीमा के अपेक्षाकृत निकट स्थित है और इसका सीधा प्रभाव ब्रह्मपुत्र नदी के जल प्रवाह पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस परियोजना का संचालन पूरी तरह चीन के नियंत्रण में रहा, तो निचले बहाव वाले क्षेत्रों में जल प्रबंधन, पर्यावरण और कृषि से जुड़ी कई नई चुनौतियां सामने आ सकती हैं। यारलुंग त्सांगपो नदी तिब्बत से निकलकर भारत में अरुणाचल प्रदेश के रास्ते प्रवेश करती है, जहां इसे सियांग नदी के नाम से जाना जाता है। आगे चलकर यही नदी असम में ब्रह्मपुत्र का विशाल स्वरूप धारण करती है। करोड़ों लोगों की आजीविका, कृषि, मत्स्य पालन और पेयजल की जरूरतें इस नदी पर निर्भर हैं। ऐसे में ऊपरी धारा में किसी बड़े निर्माण का प्रभाव निचले क्षेत्रों तक महसूस किया जा सकता है। चीन का कहना है कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और जलविद्युत क्षमता का विस्तार है। बीजिंग का दावा है कि बांध से पर्यावरणीय नुकसान को न्यूनतम रखने का प्रयास किया जाएगा और इससे क्षेत्र के आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि भारत में कई विशेषज्ञ और नीति विश्लेषक इस दावे को सावधानी से देखने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि इतने बड़े स्तर की परियोजना नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकती है। विशेषज्ञों की सबसे बड़ी चिंता जल प्रवाह के नियंत्रण को लेकर है। यदि भविष्य में किसी कारणवश नदी के पानी के बहाव में बदलाव किया जाता है या जल संग्रहण की मात्रा बढ़ाई जाती है, तो इसका असर अरुणाचल प्रदेश और असम में दिखाई दे सकता है। इससे कृषि उत्पादन, नदी तटों की संरचना और स्थानीय जैव विविधता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा अचानक अधिक पानी छोड़े जाने की स्थिति में बाढ़ का खतरा भी बढ़ सकता है। भारत सरकार इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है। सरकार ने संसद में भी स्पष्ट किया है कि सीमा पार नदियों से जुड़ी सभी गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। भारत ने चीन के साथ विभिन्न कूटनीतिक माध्यमों से यह मुद्दा उठाया है और सीमा पार नदी परियोजनाओं में पारदर्शिता, डेटा साझाकरण तथा पूर्व सूचना व्यवस्था पर जोर दिया है। इसके साथ ही भारत पूर्वोत्तर राज्यों में अपनी तैयारियों को भी मजबूत कर रहा है। बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली, नदी निगरानी नेटवर्क, जल संसाधन प्रबंधन और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र को आधुनिक बनाया जा रहा है। उद्देश्य यह है कि किसी भी संभावित जोखिम की स्थिति में समय रहते प्रभावी कार्रवाई की जा सके। विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा केवल जल संसाधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से भी जुड़ा हुआ है। आने वाले वर्षों में भारत और चीन के बीच सीमा पार नदियों को लेकर संवाद और पारदर्शिता की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है। फिलहाल, चीन की इस विशाल परियोजना पर भारत की नजर बनी हुई है और सरकार संभावित प्रभावों का आकलन करने में जुटी हुई है।

मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला: 33 जिलों में आंधी-बारिश, जून में अब तक 35% कम वर्षा

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन से पहले मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। प्रदेश के 33 जिलों में पिछले 24 घंटों के दौरान तेज आंधी और बारिश ने लोगों को गर्मी से राहत दी है। राजधानी भोपाल, जबलपुर, रायसेन, सीहोर, ग्वालियर, सागर, श्योपुर, छिंदवाड़ा, बैतूल, रीवा और सतना समेत कई जिलों में मौसम ने अचानक करवट ली, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई और वातावरण सुहावना हो गया। भोपाल में बुधवार सुबह से ही बादलों की आवाजाही बनी रही। दोपहर के समय अचानक मौसम बदला और तेज बारिश शुरू हो गई। करीब 15 मिनट तक हुई बारिश ने शहर की सड़कों को तरबतर कर दिया। इसके बाद धूप और बादलों के बीच आंख-मिचौली का दौर जारी रहा। इसी तरह रायसेन, सागर और श्योपुर में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई, जबकि भिंड, बुरहानपुर और श्योपुर में धूलभरी आंधी चली। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार ग्वालियर में सबसे तेज 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। जबलपुर में 65 किलोमीटर, अशोकनगर में 52 किलोमीटर, भोपाल में 48 किलोमीटर और सीहोर में 46 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार दर्ज की गई। कई अन्य जिलों में भी तेज हवाओं के साथ बारिश हुई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली। बारिश के प्रभाव से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन के तापमान में गिरावट देखने को मिली। शिवपुरी में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। पचमढ़ी, सिवनी और बैतूल में भी तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया। हालांकि खजुराहो और नौगांव जैसे क्षेत्रों में अभी भी गर्मी का असर बना हुआ है, जहां तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों की बात करें तो भोपाल में अधिकतम तापमान 37 डिग्री, इंदौर में 37.3 डिग्री, उज्जैन में 38.5 डिग्री, ग्वालियर में 39.5 डिग्री और जबलपुर में 40.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आगामी कुछ दिनों तक प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहेंगी, जिससे कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर बना रह सकता है। हालांकि राहत की इस बारिश के बावजूद प्रदेश में जून माह की कुल वर्षा सामान्य से काफी कम बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से 16 जून तक मध्य प्रदेश में औसतन 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति और अधिक चिंताजनक है, जहां सामान्य वर्षा का आधा पानी भी नहीं गिर पाया है। कई जिलों में वर्षा का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे चल रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि इस बार मानसून सामान्य तिथि से लगभग एक सप्ताह की देरी से प्रदेश में प्रवेश करेगा। सामान्य रूप से मानसून 15 जून तक मध्य प्रदेश पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी रही है। इसके बावजूद विशेषज्ञों को उम्मीद है कि मानसून सक्रिय होने के बाद वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है। बुधवार के लिए मौसम विभाग ने 34 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदेश के मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। किसानों और आम लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

LPG उपभोक्ताओं को फिलहाल नहीं मिली राहत, जून में बढ़ी कीमतें बरकरार; सिलेंडर बुकिंग से पहले जानें ताजा रेट

नई दिल्ली । देशभर में एलपीजी गैस सिलेंडर का उपयोग करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए 17 जून को राहत और चिंता दोनों तरह की स्थिति बनी हुई है। राहत इस बात की है कि आज घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई नई वृद्धि नहीं की गई है, जबकि चिंता का कारण यह है कि जून महीने में लागू हुई बढ़ी हुई दरें अभी भी प्रभावी हैं। ऐसे में गैस सिलेंडर बुक कराने वाले उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। देश में एलपीजी की कीमतों की समीक्षा आमतौर पर प्रत्येक महीने की शुरुआत में की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत जून में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी। इस फैसले के बाद विभिन्न महानगरों और प्रमुख शहरों में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त भुगतान करना पड़ रहा है। वर्तमान में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें पिछले संशोधन के अनुसार ही लागू हैं और आज इनमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया गया है। राजधानी दिल्ली सहित देश के कई बड़े शहरों में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें पहले की तुलना में अधिक स्तर पर बनी हुई हैं। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, चंडीगढ़, भुवनेश्वर और पटना जैसे शहरों में भी उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई दरों का सामना करना पड़ रहा है। अलग-अलग राज्यों में करों और परिवहन लागत के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिलता है, लेकिन कुल मिलाकर अधिकांश क्षेत्रों में गैस उपभोक्ताओं की मासिक रसोई लागत बढ़ी है। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भी लागत का दबाव बढ़ा है। होटल, रेस्तरां, कैटरिंग सेवाएं और छोटे व्यावसायिक प्रतिष्ठान कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं। जून में कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में भी वृद्धि दर्ज की गई थी, जिसका सीधा प्रभाव व्यवसायिक संचालन लागत पर पड़ा है। कई क्षेत्रों में छोटे व्यापारियों ने बढ़ती ऊर्जा लागत को लेकर चिंता भी व्यक्त की है। ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। वैश्विक आपूर्ति शृंखला में व्यवधान, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा मांग में बदलाव जैसी परिस्थितियां एलपीजी मूल्य निर्धारण को प्रभावित करती हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ महीनों में गैस कीमतों में अस्थिरता देखने को मिली है। विशेषज्ञों के अनुसार एलपीजी केवल घरेलू ईंधन नहीं बल्कि व्यापक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्पाद है। इसकी कीमतों में बदलाव का असर परिवारों के मासिक बजट से लेकर छोटे व्यवसायों की लागत संरचना तक दिखाई देता है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में एलपीजी की बढ़ती खपत को देखते हुए उपभोक्ता मूल्य परिवर्तन पर लगातार नजर बनाए रखते हैं। वर्तमान स्थिति में उपभोक्ताओं को किसी नई बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ रहा है, लेकिन जून में लागू संशोधित दरें अभी भी प्रभावी हैं। ऐसे में गैस सिलेंडर बुक कराने से पहले अपने क्षेत्र की मौजूदा कीमतों की जानकारी प्राप्त करना उपयोगी माना जा रहा है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार की दिशा और घरेलू मूल्य समीक्षा के आधार पर एलपीजी दरों में आगे बदलाव संभव हो सकता है। फिलहाल 17 जून को एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि कीमतों में कोई नया संशोधन नहीं हुआ है, लेकिन हालिया बढ़ोतरी का असर अभी भी पूरी तरह बना हुआ है और इसका प्रभाव घरेलू बजट तथा व्यावसायिक खर्चों पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

अल नीनो और बदलते मौसम के बीच किसानों के लिए अलर्ट: तैयारी ही बनेगी सबसे बड़ी ताकत

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के किसानों के लिए खरीफ सीजन हमेशा उम्मीदों और चुनौतियों का संगम लेकर आता है। खेती की सफलता काफी हद तक मानसून पर निर्भर रहती है और यही वजह है कि भारतीय कृषि को अक्सर मानसून का जुआ कहा जाता है। इस वर्ष भी मौसम का मिजाज सामान्य नहीं दिख रहा है। प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो की स्थिति और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव ने किसानों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में मानसून 20 जून के बाद दक्षिण-पूर्वी हिस्सों से प्रवेश कर सकता है, लेकिन बारिश का वितरण सामान्य रहेगा या नहीं, इस पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे हालात में किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह यही है कि वे जल्दबाजी में बुवाई न करें। मानसून की पहली बारिश होते ही खेतों में बीज डाल देना कई बार भारी नुकसान का कारण बन जाता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेत में कम से कम तीन से चार इंच अच्छी वर्षा होने और मिट्टी के भीतर पर्याप्त नमी पहुंचने के बाद ही बोनी की जानी चाहिए। यदि मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं होगी तो बीज अंकुरित नहीं होंगे या सड़ सकते हैं, जिससे दोबारा बुवाई की नौबत आ सकती है। किसानों को अपनी मिट्टी की प्रकृति को समझना भी बेहद जरूरी है। मध्य प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में काली मिट्टी पाई जाती है, जो नमी को लंबे समय तक रोककर रख सकती है। अच्छी बारिश के बाद यह मिट्टी 15 से 20 दिनों तक फसल को नमी प्रदान कर सकती है। वहीं दोमट मिट्टी में यह क्षमता 7 से 10 दिनों तक सीमित रहती है, जबकि रेतीली मिट्टी केवल 3 से 5 दिन तक ही नमी बनाए रख पाती है। इसलिए बोनी और सिंचाई की रणनीति मिट्टी की प्रकृति को ध्यान में रखकर ही बनाई जानी चाहिए। अल नीनो के प्रभाव वाले इस सीजन में फसल विविधीकरण भी किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पूरे खेत में एक ही किस्म की फसल लगाने के बजाय अलग-अलग अवधि में पकने वाली किस्मों का चयन किया जाए। यदि किसी एक किस्म को मौसम की मार झेलनी पड़े तो दूसरी किस्म उत्पादन देकर नुकसान की भरपाई कर सकती है। सोयाबीन, मक्का और दलहनी फसलों में यह रणनीति विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेना भी जरूरी है। मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए बीमा किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। यदि सूखा, कम वर्षा या अन्य प्राकृतिक आपदा के कारण फसल प्रभावित होती है तो बीमा योजना राहत का आधार बन सकती है। जल संरक्षण भी इस सीजन की सबसे बड़ी जरूरत है। खेतों में मजबूत मेड़बंदी, रिज-फरो पद्धति और मल्चिंग जैसी तकनीकों का उपयोग कर वर्षा जल को खेत में रोका जा सकता है। इससे न केवल मिट्टी में नमी बनी रहती है बल्कि फसल को लंबे समय तक पानी उपलब्ध होता है। सब्जी उत्पादक किसानों के लिए प्लास्टिक मल्च या सूखी घास का उपयोग भी लाभकारी साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान, कृषि मौसम सलाह और डिजिटल एप्स की जानकारी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आज के दौर में खेती केवल अनुभव नहीं बल्कि वैज्ञानिक जानकारी और तकनीक पर भी निर्भर है। बदलते मौसम और अल नीनो की चुनौती के बीच वही किसान सफल होगा जो समय रहते तैयारी करेगा और परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बदलेगा। इस खरीफ सीजन में सावधानी, वैज्ञानिक सोच और सही प्रबंधन ही बेहतर उत्पादन की कुंजी साबित होंगे।

पेंशन शिकायत पर भड़के मंत्री विश्वास सारंग, वार्ड प्रभारी को लगाई फटकार

मध्य प्रदेश । भोपाल में जनसमस्याओं के निराकरण के लिए आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान उस समय माहौल गंभीर हो गया, जब कुछ महिलाओं ने पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायत सीधे खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग के सामने रखी। शिकायत सुनते ही मंत्री ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित वार्ड प्रभारी को तत्काल तलब कर जवाब मांगा। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंत्री विश्वास सारंग के निवास पर प्रतिदिन आयोजित होने वाले जनदर्शन कार्यक्रम में नरेला विधानसभा क्षेत्र के वार्ड क्रमांक-59 स्थित अन्ना नगर की निवासी मंदा सोनवानी, सहला सेनवानी, सुशीला विश्वकर्मा और सोमा सुरेश पहुंचीं। महिलाओं ने मंत्री को बताया कि वे शासन की पेंशन योजनाओं के लिए पात्र हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि समस्या के समाधान के लिए पहले भी कई बार प्रयास किए गए, लेकिन किसी स्तर पर सुनवाई नहीं हुई। महिलाओं की शिकायत सुनने के बाद मंत्री सारंग ने तुरंत संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली। प्रारंभिक जानकारी मिलने पर उन्होंने वार्ड क्रमांक-59 के प्रभारी रमीजुद्दीन को मौके पर बुलाने के निर्देश दिए। कुछ ही देर में वार्ड प्रभारी के पहुंचने पर मंत्री ने उनसे पेंशन प्रकरणों में हुई देरी और लापरवाही के संबंध में जवाब तलब किया। मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र लोगों तक समय पर लाभ पहुंचाना है। यदि पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर कमी मानी जाएगी। उन्होंने वार्ड प्रभारी को कड़ी फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि सभी लंबित प्रकरणों की तत्काल समीक्षा कर पात्र लोगों को पेंशन का लाभ दिलाया जाए। जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को भी चेतावनी दी कि आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान में लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसलिए सभी विभागीय अधिकारियों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। मंत्री सारंग ने यह भी कहा कि जनदर्शन कार्यक्रम का उद्देश्य जनता और प्रशासन के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है, ताकि लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा सके। ऐसे कार्यक्रमों में प्राप्त शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भविष्य में इस तरह की शिकायतें दोबारा सामने न आएं और प्रत्येक पात्र हितग्राही को समय पर योजना का लाभ मिले। इस घटनाक्रम के बाद संबंधित अधिकारियों ने लंबित पेंशन प्रकरणों की जांच और निराकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही प्रभावित महिलाओं सहित अन्य पात्र हितग्राहियों को भी पेंशन योजना का लाभ मिल सकेगा। मंत्री की सख्ती को प्रशासनिक जवाबदेही और जनहित के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।

ट्विशा शर्मा मौत मामला: रिटायर्ड जज गिरिबाला की मांगें कोर्ट ने ठुकराईं, न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ी

मध्य प्रदेश । भोपाल में चर्चित एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की न्यायिक हिरासत अब 30 जून तक बढ़ा दी गई है। मंगलवार को रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद दोनों आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया, जहां कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने अदालत के समक्ष अपनी ओर से कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि जेल में उपलब्ध कराए जा रहे हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में उनके मामले से जुड़ी खबरों को काटकर अलग कर दिया जाता है। ऐसे में उन्हें पूरी सामग्री पढ़ने का अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें बिना किसी कटौती के पूरा अखबार उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा गिरिबाला सिंह ने वकीलों से मिलने के लिए निर्धारित 20 मिनट की समय-सीमा को समाप्त करने की मांग भी की। उनका कहना था कि मामला गंभीर और जटिल है, इसलिए कानूनी सलाह और रणनीति पर चर्चा के लिए अधिक समय की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि उन्हें और उनके बेटे समर्थ सिंह को एक ही समय पर अपने वकीलों से मिलने की अनुमति दी जाए, ताकि बचाव पक्ष की रणनीति बेहतर ढंग से तैयार की जा सके। हालांकि अदालत ने इन मांगों को स्वीकार नहीं किया। सुनवाई के दौरान केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत को बताया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। एजेंसी के अनुसार कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच जारी है। ट्विशा शर्मा की दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अध्ययन किया जाना है, परिजनों और रिश्तेदारों के बयान दर्ज किए जाने हैं तथा मोबाइल फोन और लैपटॉप की डिजिटल फॉरेंसिक जांच भी प्रक्रिया में है। इसी आधार पर सीबीआई ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह की ओर से अदालत में कुछ अन्य आवेदन भी प्रस्तुत किए गए। इनमें ट्विशा के बैंक खाते, कथित सात लाख रुपए के खर्च, मोबाइल टावर लोकेशन और कार की चाबी से संबंधित जांच की मांग शामिल थी। अदालत ने इन बिंदुओं पर सुनवाई के लिए 27 जून की तारीख तय की है। मीडिया ट्रायल का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान प्रमुखता से उठा। गिरिबाला सिंह ने आरोप लगाया कि ट्विशा के परिजन और रिश्तेदार मीडिया में लगातार बयान दे रहे हैं, जिससे मामले की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि परिजनों को सार्वजनिक बयान देने से रोका जाए। साथ ही जांच के दौरान जब्त की गई दवाइयों के जब्ती पंचनामा की प्रति उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। अदालत ने सीबीआई को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। दूसरी ओर, ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा द्वारा लीगल एड वकीलों की भूमिका को लेकर उठाए गए सवाल भी चर्चा में हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ लीगल एड वकील आरोपी पक्ष के साथ जुड़े दिखाई दिए, जबकि उनकी नियुक्ति गिरिबाला सिंह के न्यायिक कार्यकाल के दौरान हुई थी। इस संबंध में उन्होंने मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और उच्च न्यायालय को शिकायत भेजकर स्वतंत्र जांच की मांग की है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डिजिटल फॉरेंसिक जांच तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। इस हाई-प्रोफाइल मामले पर पूरे प्रदेश की नजरें टिकी हुई हैं।

झारखंड राज्यसभा चुनाव में '61' का नया सियासी सस्पेंस, क्या एनडीए खेमे में सेंधमारी कर पाएगा सत्तारूढ़ महागठबंधन

नई दिल्ली । झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने राज्य की सियासत में भारी गरमाहट पैदा कर दी है। चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे दोनों ही खेमों के बीच शह और मात का खेल दिलचस्प होता जा रहा है। एक तरफ जहां सत्तारूढ़ महागठबंधन अपने दोनों प्रत्याशियों की जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिख रहा है, वहीं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए भी अपनी रणनीति को धार देने में जुटा हुआ है। इस बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक नए नारे ने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है और राज्य में बड़े सियासी उलटफेर के संकेत दे दिए हैं। सत्तारूढ़ दल झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद पांडेय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए ’56 नहीं, 61′ के नारे ने चुनावी समीकरणों को पूरी तरह से रहस्यमयी बना दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस संक्षिप्त लेकिन प्रभावी संदेश के कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं। वर्तमान संख्या बल के हिसाब से देखा जाए तो विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास कुल छप्पन विधायक मौजूद हैं, जो दोनों सीटों पर अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए पूरी तरह से पर्याप्त हैं। ऐसे में महासचिव के इस दावे के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि महागठबंधन विपक्ष के कुछ विधायकों को अपने पाले में लाने में सफल हो चुका है। संख्या बल के वास्तविक समीकरणों पर नजर डालें तो इक्यासी सदस्यीय झारखंड विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास वर्तमान में कुल छप्पन विधायकों का मजबूत समर्थन हासिल है। इस कुनबे में झारखंड मुक्ति मोर्चा के चौंतीस, कांग्रेस के सोलह, राष्ट्रीय जनता दल के चार और सीपीआई एमएल के दो विधायक शामिल हैं। दूसरी तरफ, एनडीए गठबंधन के पाले में कुल चौबीस विधायक हैं, जबकि एक विधायक निर्दलीय चुनाव जीतकर सदन में पहुंचे हैं। नियम के अनुसार, एक राज्यसभा सीट पर सीधे तौर पर जीत दर्ज करने के लिए किसी भी प्रत्याशी को कम से कम अट्ठाईस प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होती है। गणित के इस खेल में महागठबंधन को अपनी दोनों सीटों पर प्रणव झा और वैद्यनाथ राम को सुरक्षित रूप से राज्यसभा भेजने के लिए कुल छप्पन वोटों की जरूरत है, जो उनके पास पहले से ही उपलब्ध हैं। वहीं, एनडीए द्वारा समर्थित प्रत्याशी परिमल नथवानी की राह थोड़ी मुश्किल नजर आ रही है। एनडीए के पास अपने केवल चौबीस वोट हैं और उन्हें जीत की दहलीज पार करने के लिए चार और अतिरिक्त मतों की दरकार है। शुरुआत में कयास लगाए जा रहे थे कि एनडीए विपक्षी खेमे के असंतुष्ट विधायकों में सेंध लगाकर यह जादुई आंकड़ा हासिल कर सकता है, लेकिन जेएमएम के नए नारे ने पासा पलट दिया है। अब चर्चा इस बात की है कि महागठबंधन खुद एनडीए के पांच विधायकों को अपने पक्ष में मतदान कराने के लिए तैयार कर चुका है, जिससे उनका आंकड़ा छप्पन से बढ़कर इकसठ तक पहुंच सकता है। इस संभावित क्रॉस वोटिंग के डर ने दोनों ही खेमों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। राज्य में रिसॉर्ट और होटल पॉलिटिक्स एक बार फिर सक्रिय हो गई है, जहां विधायकों को एकजुट रखने के लिए गुप्त रणनीतियां बनाई जा रही हैं और मॉक पोल के जरिए मतदान का अभ्यास कराया जा रहा है। मतदान की प्रक्रिया सुबह से शुरू होकर शाम तक चलेगी, जिसके तुरंत बाद आने वाले परिणाम ही इस नए नारे के वास्तविक सच और झारखंड की भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

स्पीड पोस्ट की रफ्तार पर उपभोक्ता आयोग सख्त, 7 दिन की देरी पर डाक विभाग को ठहराया दोषी

मध्य प्रदेश । भरोसेमंद और तेज डिलीवरी के लिए जानी जाने वाली स्पीड पोस्ट सेवा एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। भोपाल में एक पार्सल की डिलीवरी में हुई देरी ने न केवल डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए, बल्कि मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंच गया। सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने डाक विभाग को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए पीड़ित उपभोक्ता को मुआवजा देने का आदेश जारी किया है। मामला भोपाल निवासी ज्योति शर्मा से जुड़ा है। उन्होंने 12 जनवरी 2026 को अरेरा हिल्स उप डाकघर से स्पीड पोस्ट के माध्यम से एक पार्सल भेजा था। इस पार्सल में धार्मिक महत्व की पुस्तक श्रीमद्भगवद्गीता, शुद्ध घी से बनी मिठाइयां और कुछ कपड़े रखे गए थे। पार्सल को सुरक्षित और शीघ्र पहुंचाने के लिए उन्होंने 1228 रुपए का शुल्क भी जमा किया था। स्पीड पोस्ट सेवा का चयन इस विश्वास के साथ किया गया था कि पार्सल तय समय सीमा के भीतर अपने गंतव्य तक पहुंच जाएगा। दिलचस्प बात यह रही कि उसी दिन ज्योति शर्मा द्वारा भेजा गया एक अन्य स्पीड पोस्ट पार्सल मात्र तीन दिनों में अपने गंतव्य तक पहुंच गया। लेकिन दूसरा पार्सल सात दिन बाद, यानी 19 जनवरी को पहुंचा। एक ही दिन और एक ही सेवा के तहत भेजे गए दो पार्सलों की डिलीवरी अवधि में इतना बड़ा अंतर उपभोक्ता के लिए चिंता का विषय बन गया। मामले की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि पार्सल को किसी दूरस्थ क्षेत्र में नहीं बल्कि अपेक्षाकृत नजदीकी स्थान पर भेजा गया था, जहां सामान्य परिस्थितियों में स्पीड पोस्ट दो से तीन दिन के भीतर पहुंच जाती है। ऐसे में सात दिन की देरी को सामान्य नहीं माना जा सकता था। आयोग ने इस तथ्य को भी गंभीरता से लिया कि डाक विभाग देरी के पीछे कोई ठोस और संतोषजनक कारण प्रस्तुत नहीं कर पाया। जिला उपभोक्ता आयोग की बेंच क्रमांक-1, जिसमें अध्यक्ष योगेश दत्त शुक्ला और सदस्य डॉ. प्रतिभा पांडेय शामिल थे, ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि जब कोई उपभोक्ता अतिरिक्त शुल्क देकर प्रीमियम सेवा लेता है तो समयबद्ध सेवा प्रदान करना विभाग की जिम्मेदारी बन जाती है। केवल यह कह देना कि पार्सल अंततः डिलीवर हो गया, विभाग को जिम्मेदारी से मुक्त नहीं कर सकता। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि समय पर डिलीवरी न होना और उसके पीछे उचित कारण न बता पाना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर डाक विभाग को उपभोक्ता को मानसिक और आर्थिक क्षति के लिए 5 हजार रुपए तथा वाद व्यय के रूप में 3 हजार रुपए देने के निर्देश दिए गए हैं। कुल 8 हजार रुपए की यह राशि दो माह के भीतर भुगतान करनी होगी। यदि तय समय सीमा में भुगतान नहीं किया गया तो विभाग को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना पड़ेगा। यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो समयबद्ध सेवाओं के लिए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करते हैं। आयोग का यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि सेवा प्रदाताओं को अपने दायित्वों का गंभीरता से पालन करना होगा और लापरवाही की स्थिति में जवाबदेह भी बनना पड़ेगा।

Bind Honeytrap Scam: बंद कमरे में रिकॉर्ड होते थे वीडियो, फिर शुरू होता था ब्लैकमेलिंग का खेल!

Bhind honeytrap case

Bind Honeytrap Scam: मध्यप्रदेश। पहले दोस्ती, फिर बंद कमरे में मुलाकात, उसके बाद छिपे कैमरे से वीडियो रिकॉर्डिंग और आखिर में लाखों रुपये की डिमांड। भिंड में सामने आए एक हाईप्रोफाइल हनीट्रैप रैकेट की कहानी किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है। पुलिस ने पुरे मामले में बताया कि महिलाओं और उनके साथियों का यह गिरोह पहले अमीर लोगों को निशाना बनाता था। फिर उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाए जाते थे और इन्ही के जरिए ब्लैकमेलिंग की जाती थी, रकम मिलने के बाद 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर समझौता तक कराया जाता था। अब पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। भोपाल मेट्रो को मिलेगी नई रफ्तार, जुलाई से दोनों ट्रैक पर दौड़ेगी ट्रेन भरोसा जीतकर बनाते थे वीडियो जब पुलिस जांच की तो सामने आया है कि आरोपी महिलाएं सरकारी काम, दस्तावेज बनवाने या अन्य मदद का बहाना बनाकर लोगों से संपर्क करती थीं। इसके बाद धीरे-धीरे लोगों विश्वास कायम करने के बाद निजी मुलाकातें होती थीं और इसी दौरान छिपे कैमरों से वीडियो रिकॉर्ड कर लिए जाते थे। बाद में इन्हीं वीडियो के आधार पर पीड़ितों पर दबाव बनाया जाता था। लाखों रुपए की ठगने का आरोप वीडियो रिकॉर्ड होने के कुछ दिन बाद पीड़ितों से संपर्क कर उनसे 20 हजार से लेकर कई लाख रुपए तक की मांग की जाती थी। रकम नहीं देने पर वीडियो वायरल करने या पुलिस कार्रवाई कराने की धमकी दी जाती थी। जांच में ये भी सामने आया है कि कई लोगों ने बदनामी के डर से रकम देकर समझौता तक कर लिया। G7 में जापान का बड़ा संदेश: हिंद-प्रशांत सुरक्षा, चीन की चुनौतियां और होर्मुज जलडमरूमध्य पर जताई चिंता स्टाम्प पेपर पर कराते थे एग्रीमेंट पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह सिर्फ यहीं नहीं रुकता था बल्कि रकम लेने के बाद बाकायदा 100 रुपए का स्टाम्प पेपर बनवाकर उसपर समझौता भी करवाता था। इनमें दोनों पक्षों की सहमति का उल्लेख किया जाता था और गवाहों के हस्ताक्षर भी कराए जाते थे। ऑडियो रिकॉर्डिंग से खुला राज मामले से जुड़े कुछ ऑडियो सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर समझौते और पैसों की मांग को लेकर बातचीत सुनाई देती है। बातचीत में लाखों रुपए की मांग, केस दर्ज कराने की चेतावनी और समझौते के लिए दबाव बनाए जाने जैसी बातें सामने आई हैं। इन्हीं रिकॉर्डिंग्स के जरिए पूरे मामले की परतें खुलीं। पीओके में बढ़ा असंतोष: पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई पर उठे सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग तेज कई प्रतिष्ठित लोग आए जांच के दायरे में जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि शहर के कई कारोबारी, सेवानिवृत्त व्यक्ति और अन्य प्रतिष्ठित लोग इस गैंग के निशाने पर रहे। कुछ लोगों ने बदनामी से बचने के लिए कर्ज लेकर या उधार जुटाकर रकम चुकाई। पुलिस अब ऐसे सभी मामलों की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे। एक आरोपी महिला HIV पॉजिटिव पुलिस के अनुसार गिरफ्तार महिलाओं में से एक HIV पॉजिटिव है। उसे अपनी बीमारी की जानकारी कई साल पहले मिल चुकी थी। इसके बावजूद वह कथित तौर पर इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा बनी रही। पुलिस इस पहलू की भी अलग से जांच कर रही है। गोविंदा और सुनीता आहूजा के तलाक की खबरों पर बेटी टीना का बड़ा खुलासा, शादी में दरार के दावों को बताया महज अफवाह पुलिस कर रही विस्तृत जांच फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आए हैं और जांच आगे बढ़ने के साथ और खुलासे हो सकते हैं। अधिकारियों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति की भूमिका की जांच की जाएगी।