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इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भारत ने रचा नया इतिहास, तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बना सेक्टर; एआई और डेटा सेंटर निर्माण से मिलेगी नई रफ्तार

नई दिल्ली । भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और अब यह देश से निर्यात होने वाली वस्तुओं की श्रेणी में तीसरे सबसे बड़े स्थान पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि भारत के औद्योगिक विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस प्रगति को देश की आर्थिक मजबूती और दीर्घकालिक औद्योगिक रणनीति का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र ने अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। एक समय था जब इस क्षेत्र का लक्ष्य केवल शीर्ष दस निर्यात श्रेणियों में शामिल होना था, लेकिन लगातार बढ़ती उत्पादन क्षमता, निवेश और वैश्विक मांग के कारण यह क्रमशः आगे बढ़ते हुए अब तीसरे स्थान तक पहुंच गया है। वर्तमान में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग लगभग 13 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। इसी क्रम में महाराष्ट्र के पुणे स्थित रंजनगांव में एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकाई का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र आधुनिक तकनीकों पर आधारित उपकरणों के निर्माण के लिए विकसित किया गया है और इसे देश की तकनीकी अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई इकाई घरेलू जरूरतों की पूर्ति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भी उत्पादन करेगी, जिससे भारत के निर्यात को अतिरिक्त बल मिलेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई वर्तमान समय में वैश्विक आर्थिक विकास की प्रमुख शक्ति बनकर उभरी है। दुनिया भर में एआई आधारित डेटा सेंटरों की मांग तेजी से बढ़ रही है और इनके संचालन के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह केवल उपभोक्ता बाजार तक सीमित न रहे, बल्कि एआई और डेटा सेंटर उद्योग के लिए जरूरी प्रमुख तकनीकी उपकरणों का उत्पादन भी देश के भीतर ही करे। उन्होंने बताया कि नई विनिर्माण इकाई में एआई सिस्टम, डेटा सेंटर उपकरण, 5जी नेटवर्किंग उत्पाद, उच्च क्षमता वाले नेटवर्किंग समाधान, औद्योगिक ऊर्जा प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे जटिल एवं उन्नत तकनीकी उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इससे भारत की तकनीकी क्षमताओं में वृद्धि होगी और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में उसकी भागीदारी और मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में बढ़ोतरी केवल निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव रोजगार, कौशल विकास और स्थानीय उद्योगों पर भी पड़ता है। नई परियोजना के माध्यम से स्थानीय स्तर पर लगभग 11,000 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इसके अलावा बड़ी संख्या में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भी वैश्विक तकनीकी आपूर्ति शृंखला से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इस परियोजना के माध्यम से स्थानीयकरण को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे कई इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों और घटकों का उत्पादन देश के भीतर किया जा सकेगा। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योगों को नई संभावनाएं प्राप्त होंगी। साथ ही भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी वृद्धि होगी। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में लगातार हो रही प्रगति भारत को वैश्विक तकनीकी उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। एआई, डेटा सेंटर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण पर बढ़ता फोकस आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि, निर्यात क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

अमेरिका-ईरान समझौते में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका चर्चा में, शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर के साथ कूटनीतिक सफलता का किया दावा

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। इस समझौते को लेकर पाकिस्तान भी वैश्विक चर्चा का हिस्सा बन गया है, क्योंकि उसने इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का दावा किया है। समझौते पर अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेतृत्व द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी मध्यस्थ के रूप में दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए और इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। समझौते के बाद पाकिस्तान सरकार की ओर से जारी संदेशों में इसे ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि यह समझौता कई महीनों से जारी तनाव और टकराव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। उनके अनुसार, दोनों देशों द्वारा संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाना इस बात का संकेत है कि जटिल अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत के माध्यम से भी संभव है। समझौते के प्रमुख बिंदुओं में क्षेत्रीय समुद्री मार्गों की सामान्य स्थिति बहाल करने और तनाव कम करने से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और पिछले कुछ समय से इसके संचालन को लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बनी हुई थी। समझौते के बाद ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार गतिविधियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस अवसर पर अमेरिका और ईरान दोनों देशों के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि समझौते तक पहुंचना आसान प्रक्रिया नहीं थी। उन्होंने इसे धैर्य, संवाद और राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय शांति केवल सैन्य शक्ति से नहीं बल्कि निरंतर कूटनीतिक प्रयासों और आपसी विश्वास निर्माण से सुनिश्चित की जा सकती है। हालांकि इस समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता तत्काल तनाव कम करने में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष इसके प्रावधानों का किस प्रकार पालन करते हैं। पिछले वर्षों में अमेरिका और ईरान के संबंधों में उतार-चढ़ाव और अविश्वास का लंबा इतिहास रहा है, जिसके कारण समझौते की स्थिरता को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक परिस्थितियां अत्यंत जटिल हैं, जहां कई क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के हित जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसी भी समझौते की सफलता केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसका प्रभाव व्यापक क्षेत्रीय संतुलन पर भी पड़ता है। इसी कारण आने वाले दिनों में विभिन्न देशों की प्रतिक्रियाओं और आगे की कूटनीतिक गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाएगी। फिलहाल इस समझौते ने संघर्ष और टकराव के माहौल में संवाद की संभावना को मजबूत किया है। पाकिस्तान इसे अपनी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात पर ध्यान केंद्रित किए हुए है कि समझौते के बाद क्षेत्र में वास्तविक स्थिरता और शांति स्थापित होती है या नहीं। आने वाले सप्ताह इस समझौते की प्रभावशीलता और इसके व्यापक परिणामों को समझने के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।

प्रधानमंत्री मोदी 20 जून को किसानों के खातों में भेजेंगे 18,880 करोड़ रुपये, पीएम-किसान की 23वीं किस्त के साथ कई कृषि योजनाओं को भी मिलेगी नई रफ्तार

नई दिल्ली । केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त जारी करेंगे। इस अवसर पर देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक पात्र किसानों के बैंक खातों में लगभग 18,880 करोड़ रुपये सीधे हस्तांतरित किए जाएंगे। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगी, जिससे उन्हें बिना किसी बिचौलिए के आर्थिक सहायता उपलब्ध हो सकेगी। प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के हुगली जिले स्थित तारकेश्वर से इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के दौरान केवल पीएम-किसान योजना की किस्त जारी नहीं की जाएगी, बल्कि कृषि, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण भी किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पूर्वी भारत, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, को विकास की नई गति प्रदान करना है। पीएम-किसान योजना देश के करोड़ों किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा बन चुकी है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की सहायता तीन समान किस्तों में प्रदान की जाती है। 2019 में शुरू हुई इस योजना के माध्यम से अब तक देशभर के किसानों को 4.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। 23वीं किस्त जारी होने के बाद यह आंकड़ा और अधिक बढ़ जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र में तकनीकी बदलाव को बढ़ावा देने वाली कई नई पहलों का शुभारंभ भी किया जाएगा। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत एग्रीटेक आधारित सुविधाओं को विस्तार दिया जाएगा, जिससे किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर डेटा प्रबंधन और स्मार्ट कृषि समाधान उपलब्ध हो सकेंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन और प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना जैसी योजनाओं को भी नई दिशा मिलेगी। कृषि सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना का भी विस्तार किया जाएगा। इन योजनाओं की संयुक्त लागत लगभग 12,200 करोड़ रुपये बताई गई है। सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान करीब 1.10 करोड़ किसानों को फसल बीमा सुरक्षा प्रदान करना है। इसके अंतर्गत लगभग 30 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को बीमा कवरेज में शामिल किया जाएगा, जबकि 28,140 करोड़ रुपये मूल्य की फसलों को सुरक्षा प्रदान करने की योजना है। पश्चिम बंगाल को भी इस कार्यक्रम से विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। राज्य के 45 लाख से अधिक किसानों को लगभग 907 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्राप्त होगी। इससे राज्य में पीएम-किसान योजना के तहत वितरित कुल राशि 15,000 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता और बीमा सुरक्षा का यह संयोजन किसानों की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करेगा तथा कृषि निवेश को बढ़ावा देगा। केंद्र सरकार का कहना है कि कृषि, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और तकनीकी नवाचारों को एक साथ आगे बढ़ाकर किसानों की आय बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। आगामी कार्यक्रम को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र में उत्पादकता, सुरक्षा और आधुनिकता को नई गति मिलने की उम्मीद है।

WhatsApp अब सिर्फ मैसेजिंग ऐप नहीं, Meta ने भारत में लॉन्च किया प्रीमियम ‘WhatsApp Plus’; ₹79 महीने में मिलेंगे एक्सक्लूसिव फीचर्स, AI रणनीति से जुड़ा बड़ा कदम

नई दिल्ली । भारत के डिजिटल संचार बाजार में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। दुनिया की अग्रणी टेक्नोलॉजी कंपनी Meta ने भारतीय यूजर्स के लिए WhatsApp Plus नामक प्रीमियम सब्सक्रिप्शन सेवा लॉन्च कर दी है। इस नई सेवा के तहत यूजर्स को कई अतिरिक्त और विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनके लिए उन्हें प्रति माह 79 रुपये का शुल्क देना होगा। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि WhatsApp का सामान्य संस्करण पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा और उसके मौजूदा फीचर्स में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। भारत WhatsApp के सबसे बड़े बाजारों में से एक माना जाता है, जहां करोड़ों लोग रोजाना इस प्लेटफॉर्म का उपयोग व्यक्तिगत और व्यावसायिक संवाद के लिए करते हैं। ऐसे में WhatsApp Plus को कंपनी की नई कारोबारी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रीमियम सेवाओं के जरिए अतिरिक्त राजस्व अर्जित करना है। नई सेवा के तहत यूजर्स को अपने WhatsApp अनुभव को अधिक व्यक्तिगत बनाने का अवसर मिलेगा। प्रीमियम सदस्य अपनी पसंद के अनुसार ऐप की थीम बदल सकेंगे और मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देने वाले WhatsApp आइकन को भी नया रूप दे सकेंगे। इसके अलावा विशेष स्टिकर्स और एक्सक्लूसिव रिंगटोन्स जैसी सुविधाएं भी केवल सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध रहेंगी। कंपनी ने चैट मैनेजमेंट से जुड़े फीचर्स में भी सुधार किया है। WhatsApp Plus उपयोगकर्ताओं को अधिक संख्या में चैट्स पिन करने की सुविधा मिलेगी, जिससे महत्वपूर्ण बातचीत को आसानी से शीर्ष पर रखा जा सकेगा। साथ ही चैट सूची को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त विकल्प भी उपलब्ध कराए जाएंगे। Meta का मानना है कि ये फीचर्स उन यूजर्स के लिए उपयोगी साबित होंगे जो WhatsApp का व्यापक और नियमित उपयोग करते हैं। WhatsApp Plus की शुरुआत के साथ कंपनी नए ग्राहकों को एक महीने का निःशुल्क ट्रायल भी उपलब्ध करा रही है। ट्रायल अवधि समाप्त होने के बाद सब्सक्रिप्शन स्वतः नवीनीकृत हो सकता है। इसलिए उपयोगकर्ताओं को अपनी सदस्यता की स्थिति पर ध्यान देना होगा, विशेषकर तब जब वे सेवा को जारी नहीं रखना चाहते हों। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल प्रीमियम फीचर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि Meta की व्यापक कृत्रिम बुद्धिमत्ता रणनीति का भी हिस्सा है। पिछले कुछ समय में कंपनी ने AI आधारित सेवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश किया है। WhatsApp में Meta AI के एकीकरण के बाद कंपनी के सर्वर और तकनीकी संसाधनों पर खर्च बढ़ा है। ऐसे में WhatsApp Plus को आय के नए स्रोत के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य की तकनीकी परियोजनाओं को वित्तीय आधार प्रदान कर सकता है। डिजिटल उद्योग के जानकारों का कहना है कि दुनिया भर में कई टेक कंपनियां अब फ्रीमियम मॉडल की ओर बढ़ रही हैं, जिसमें मूल सेवाएं मुफ्त रहती हैं जबकि उन्नत सुविधाओं के लिए भुगतान करना पड़ता है। Meta का यह कदम भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय उपभोक्ता इन अतिरिक्त सुविधाओं के लिए मासिक शुल्क देने को कितना तैयार होते हैं। भारत जैसे मूल्य-संवेदनशील बाजार में किसी भी प्रीमियम सेवा की सफलता उसके वास्तविक उपयोग और ग्राहकों को मिलने वाले अतिरिक्त लाभों पर निर्भर करती है। फिलहाल Meta ने स्पष्ट कर दिया है कि WhatsApp Plus पूरी तरह वैकल्पिक सेवा है और सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए WhatsApp का अनुभव पहले की तरह निशुल्क और उपलब्ध बना रहेगा।

टेलीग्राम पर केंद्र का सख्त रुख, हाई कोर्ट में कहा- आतंकी गतिविधियों और अपराधों का प्रमुख माध्यम बन रहा प्लेटफॉर्म

नई दिल्ली । देश में लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक ओर केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर अपराध और परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा का हवाला देते हुए प्लेटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध के अपने फैसले का बचाव कर रही है, वहीं दूसरी ओर कंपनी इस कार्रवाई को न्यायालय में चुनौती दे रही है। इस पूरे मामले ने डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दिल्ली हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने टेलीग्राम को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। सरकार की ओर से कहा गया कि यह प्लेटफॉर्म कई मामलों में अपराधियों और असामाजिक तत्वों के लिए सुविधाजनक माध्यम बनता जा रहा है। सरकार का तर्क है कि इसकी कुछ तकनीकी विशेषताएं ऐसी हैं, जिनके कारण संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों तक पहुंचना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को बताया कि मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद ही कार्रवाई की गई है। अधिकारियों के अनुसार इस विषय पर गठित उच्चस्तरीय समिति ने विभिन्न पहलुओं का परीक्षण किया था। समिति ने सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट, तकनीकी मूल्यांकन और प्लेटफॉर्म से जुड़े जोखिमों का अध्ययन करने के बाद अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थीं। सरकार का दावा है कि निर्णय किसी एक घटना के आधार पर नहीं बल्कि व्यापक सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखकर लिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया कि क्या किसी एक वर्ग या उद्देश्य की सुरक्षा के लिए व्यापक स्तर पर उपयोगकर्ताओं के अधिकारों को सीमित किया जा सकता है। यह सवाल डिजिटल युग में नागरिक अधिकारों और सुरक्षा उपायों के बीच संतुलन की जटिलता को दर्शाता है। अदालत ने इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनीं और फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि प्लेटफॉर्म के कुछ फीचर विशेष रूप से चिंता का विषय हैं। इनमें संदेशों और उनसे जुड़े समय संबंधी विवरणों में बदलाव की क्षमता को लेकर सवाल उठाए गए। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे फीचर जांच प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं और संवेदनशील मामलों में तथ्यात्मक सत्यापन को जटिल बना सकते हैं। इसी आधार पर सरकार ने प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। टेलीग्राम का पक्ष है कि किसी प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग के लिए पूरी सेवा को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कंपनी का मानना है कि अपराध रोकने के लिए तकनीकी सहयोग और नियामकीय उपाय बेहतर विकल्प हो सकते हैं। कंपनी यह भी कह रही है कि किसी प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होती, क्योंकि गलत गतिविधियों में शामिल लोग अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी कर सकते हैं। इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में हाल के महीनों में सामने आए कुछ संवेदनशील मामलों और परीक्षा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया जा रहा है। इन्हीं चिंताओं के मद्देनजर सरकार ने सीमित अवधि के लिए प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया था। इस फैसले का असर देश के करोड़ों उपयोगकर्ताओं पर पड़ा, जिनमें छात्र, व्यवसायी, कंटेंट क्रिएटर और सामान्य उपभोक्ता शामिल हैं। अब सभी की निगाहें दिल्ली हाई कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। यह निर्णय केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी जवाबदेही और डिजिटल अधिकारों से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

युद्ध का नया कमांडर बना AI! 96 घंटे में 2,000 ठिकानों पर हमलों के दावे से बढ़ी चिंता, बदल रही वैश्विक युद्ध की तस्वीर

नई दिल्ली । आधुनिक युद्ध की परिभाषा तेजी से बदल रही है और अब केवल मिसाइल, टैंक या लड़ाकू विमान ही किसी सैन्य शक्ति की पहचान नहीं रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने युद्धक्षेत्र में अपनी ऐसी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी है, जिसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया संघर्ष के दौरान सामने आए दावों ने यह संकेत दिया है कि भविष्य के युद्धों में AI की भूमिका निर्णायक हो सकती है। संघर्ष के दौरान ऐसी रिपोर्टें सामने आईं कि अमेरिकी सैन्य अभियानों में उन्नत AI तकनीकों का उपयोग किया गया। दावा किया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों ने बेहद कम समय में बड़ी मात्रा में सैन्य सूचनाओं का विश्लेषण कर संभावित लक्ष्यों की पहचान करने और अभियान की गति बढ़ाने में सहायता की। इससे युद्ध संचालन की पारंपरिक अवधारणाओं पर नई चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI की सबसे बड़ी ताकत विशाल डेटा को कुछ ही सेकंड में प्रोसेस करने की क्षमता है। आधुनिक युद्ध में उपग्रह चित्रों, ड्रोन फीड, रडार संकेतों, संचार नेटवर्क और खुफिया सूचनाओं से लगातार डेटा प्राप्त होता है। AI इन जानकारियों का विश्लेषण कर कमांडरों को तेजी से निर्णय लेने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियां अब AI आधारित रक्षा प्रणालियों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। युद्धक्षेत्र में ड्रोन तकनीक का बढ़ता प्रभाव भी इसी परिवर्तन का हिस्सा माना जा रहा है। विशेष रूप से ड्रोन स्वॉर्म तकनीक ने सैन्य रणनीति को नया आयाम दिया है। इस व्यवस्था में बड़ी संख्या में ड्रोन एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर काम करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर अपनी भूमिकाएं स्वतः बदल सकते हैं। यदि कोई ड्रोन नष्ट हो जाए तो दूसरा उसकी जिम्मेदारी संभाल लेता है। इससे हमले अधिक प्रभावी और लचीले बन जाते हैं। AI का प्रभाव केवल भौतिक युद्ध तक सीमित नहीं है। साइबर युद्ध के क्षेत्र में भी इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। आधुनिक सुरक्षा ढांचे में AI नेटवर्क पर होने वाले संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने, साइबर हमलों को रोकने और संवेदनशील प्रणालियों की निगरानी करने में मदद कर रहा है। दूसरी ओर, यही तकनीक साइबर हमलों को अधिक जटिल और प्रभावशाली बनाने के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है। इस कारण साइबर सुरक्षा अब वैश्विक रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार आने वाले वर्षों में AI आधारित युद्ध मॉडल और अधिक विकसित हो सकते हैं। भविष्य में ऐसी प्रणालियां देखने को मिल सकती हैं जो इंसानी सैनिकों, स्वायत्त ड्रोन, रोबोटिक वाहनों और निगरानी नेटवर्क के बीच समन्वय स्थापित कर युद्ध संचालन को अधिक तेज और सटीक बनाएंगी। इससे सैन्य अभियानों की गति और प्रभावशीलता दोनों में वृद्धि होने की संभावना है। हालांकि इस तकनीकी प्रगति के साथ गंभीर नैतिक और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि घातक हथियारों को पूरी तरह स्वायत्त निर्णय लेने की क्षमता दे दी गई तो जवाबदेही, नियंत्रण और मानव सुरक्षा से जुड़े बड़े प्रश्न खड़े हो सकते हैं। यही वजह है कि दुनिया भर में AI आधारित सैन्य तकनीकों के नियमन और अंतरराष्ट्रीय मानकों को लेकर बहस तेज हो गई है। स्पष्ट है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल तकनीकी नवाचार का विषय नहीं रह गई है। यह वैश्विक सुरक्षा, सैन्य रणनीति और शक्ति संतुलन का नया केंद्र बनती जा रही है। आने वाले समय में युद्ध केवल सैनिकों और हथियारों से नहीं, बल्कि एल्गोरिद्म, डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता से भी तय होते दिखाई दे सकते हैं।

BJP Yuva Morcha: विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने का आह्वान, श्योपुर पहुंचे श्याम हेमंत टेलर

BJP Yuva Morcha

 BJP Yuva Morcha: श्योपुर। भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष श्याम हेमंत टेलर गुरुवार को एक दिवसीय दौरे पर श्योपुर पहुंचे। उनके आगमन पर युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं ने शहर के विभिन्न स्थानों पर स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष के दौरे के साथ ही भाजयुमो के जिलाध्यक्ष पद को लेकर भी संगठनात्मक गतिविधियां तेज नजर आईं। स्वागत कार्यक्रमों में जिलाध्यक्ष पद के संभावित दावेदार अपने समर्थकों के साथ पहुंचे, जिससे संगठन के भीतर चल रही राजनीतिक हलचल काफी चर्चाओं में आ गयी। PhonePe Wallet पर नया चार्ज बना चर्चा का विषय, 12 महीने निष्क्रिय रहने पर लग सकती है फीस; UPI यूजर्स में बढ़ी चिंता जिलाध्यक्ष पद को लेकर बढ़ी हलचल भाजयुमो जिलाध्यक्ष पद के लिए राजबहादुर मारु, सौरभ भार्गव, नंदू जांगिड़, सोनू चौधरी, ईश्वर चौधरी और अमित शर्मा के नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल बताए जा रहे हैं। कार्यक्रमों के दौरान समर्थकों ने अपने-अपने नेताओं के पक्ष में नारेबाजी कर समर्थन जताया। दौरे के दौरान भाजपा जिला कार्यालय में “विकसित भारत का अमृत काल: सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण” विषय पर युवा संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिलेभर से बड़ी संख्या में युवा और पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। VILLAGERS RAILWAY LINE DEMAND: ‘रेल नहीं तो वोट नहीं’ भिंड में ग्रामीणों ने ली शपथ, लहार में रेल लाइन लगाने की मांग युवाओं की भूमिका अहम कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष श्याम हेमंत टेलर ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के क्षेत्र में सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं, जिनके सफल क्रियान्वयन में युवाओं का योगदान सराहनीय रहा है।

मई में बॉक्स ऑफिस पर 1138 करोड़ की बारिश, ‘करुप्पु’ और ‘दृश्यम 3’ बने गेमचेंजर, बॉलीवुड की 8 बड़ी फिल्में हुईं फ्लॉप

नई दिल्ली । मई 2026 का महीना भारतीय फिल्म उद्योग के लिए उतार-चढ़ाव से भरा रहा। बॉक्स ऑफिस पर कुल 1138 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया गया, जिसने यह साबित कर दिया कि दर्शक आज भी अच्छी कहानी और मजबूत कंटेंट को हाथोंहाथ लेते हैं। हालांकि इस कमाई का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा फिल्मों के खाते में गया, जबकि कई बहुप्रतीक्षित बॉलीवुड फिल्में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकीं। महीने की सबसे बड़ी सफलता साउथ सिनेमा के नाम रही। तमिल एक्शन-ड्रामा ‘करुप्पु’ ने रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर धुआंधार प्रदर्शन किया। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों दोनों का शानदार समर्थन मिला। दमदार कहानी, जबरदस्त एक्शन और मजबूत स्टारकास्ट की बदौलत फिल्म ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में शानदार कारोबार किया। इसके अलावा ‘दृश्यम 3’ ने भी दर्शकों के बीच जबरदस्त क्रेज पैदा किया और अपनी रिलीज के बाद लगातार रिकॉर्ड तोड़ कमाई दर्ज की। मोहनलाल स्टारर ‘दृश्यम 3’ ने न सिर्फ मलयालम सिनेमा बल्कि पूरे भारतीय बॉक्स ऑफिस में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। फिल्म की कहानी, सस्पेंस और जॉर्जकुट्टी के किरदार की लोकप्रियता ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में अहम भूमिका निभाई। यही वजह रही कि फिल्म कई क्षेत्रों में हाउसफुल शो के साथ आगे बढ़ती रही। दूसरी ओर बॉलीवुड के लिए मई का महीना निराशाजनक साबित हुआ। बड़े सितारों और भारी-भरकम प्रचार के बावजूद कई फिल्में दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाईं। रिपोर्ट के अनुसार बॉलीवुड की करीब आठ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुईं। इनमें कुछ ऐसी फिल्में भी शामिल रहीं जिनसे निर्माताओं को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन कमजोर कहानी, खराब वर्ड ऑफ माउथ और साउथ फिल्मों के दबदबे के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि अब दर्शकों की पसंद में बड़ा बदलाव आया है। केवल स्टार पावर के दम पर फिल्में सफल नहीं हो रही हैं, बल्कि कंटेंट और मनोरंजन का स्तर सबसे बड़ा फैक्टर बन चुका है। यही कारण है कि क्षेत्रीय सिनेमा लगातार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है और हिंदी फिल्मों को कड़ी टक्कर दे रहा है। मई महीने की रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि भारतीय सिनेमा में साउथ इंडस्ट्री का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ‘करुप्पु’ और ‘दृश्यम 3’ जैसी फिल्मों ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर कमाल किया, बल्कि यह भी साबित किया कि अच्छी कहानी भाषा की सीमाओं से परे होती है। इन फिल्मों ने हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी शानदार प्रदर्शन किया। कुल मिलाकर मई 2026 भारतीय बॉक्स ऑफिस के लिए यादगार महीना रहा। जहां कुछ फिल्मों ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए, वहीं कई बड़े बैनरों और सितारों को दर्शकों की बेरुखी का सामना करना पड़ा। आने वाले महीनों में भी बॉक्स ऑफिस पर इसी तरह की कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है, जहां कंटेंट ही असली किंग साबित होगा।

सोशल मीडिया से दूरी और डिजिटल शांति का नया विकल्प, लॉन्च हुआ Commodore Callback 8020; Android Apps सपोर्ट के साथ Flip Phone ने खींचा ध्यान

नई दिल्ली । स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग और लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम के बीच टेक्नोलॉजी बाजार में एक अलग सोच वाला डिवाइस सामने आया है। Commodore ने अपना नया Callback 8020 Flip Phone लॉन्च किया है, जिसे उन लोगों के लिए तैयार किया गया है जो आधुनिक तकनीक का लाभ तो चाहते हैं, लेकिन सोशल मीडिया, अनावश्यक नोटिफिकेशन और लगातार ऑनलाइन रहने की आदत से दूरी बनाना चाहते हैं। कंपनी इसे पारंपरिक फीचर फोन और आधुनिक स्मार्टफोन के बीच का संतुलित विकल्प बता रही है। डिजिटल जीवनशैली में बढ़ती व्यस्तता और स्मार्टफोन पर बढ़ती निर्भरता के बीच Callback 8020 को एक ऐसे उपकरण के रूप में पेश किया गया है जो उपयोगकर्ताओं को डिजिटल विकर्षणों से राहत दिलाने का प्रयास करता है। इस फोन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेब ब्राउजर और ईमेल जैसी सुविधाओं को जानबूझकर शामिल नहीं किया गया है, ताकि उपयोगकर्ता का ध्यान केवल आवश्यक संचार और सीमित डिजिटल गतिविधियों पर केंद्रित रहे। फोन की कीमत 499 डॉलर रखी गई है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 42 हजार रुपये के बराबर है। हालांकि इस कीमत पर बाजार में कई उन्नत स्मार्टफोन उपलब्ध हैं, लेकिन कंपनी का लक्ष्य सीधे स्मार्टफोन बाजार से प्रतिस्पर्धा करना नहीं है। इसके बजाय यह उन उपभोक्ताओं को आकर्षित करना चाहती है जो तकनीक का उपयोग नियंत्रित और संतुलित तरीके से करना चाहते हैं। Callback 8020 की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्राइवेसी-केंद्रित ऑपरेटिंग सिस्टम माना जा रहा है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस पारंपरिक एंड्रॉयड सिस्टम का उपयोग किए बिना भी अधिकांश एंड्रॉयड एप्लिकेशन चलाने में सक्षम है। इसके अलावा उपयोगकर्ता चाहें तो फोन की टचस्क्रीन सुविधा को पूरी तरह बंद कर सकते हैं, जिससे डिवाइस का अनुभव और अधिक सरल तथा सीमित हो जाता है। फोन में T9 स्टाइल टेक्स्टिंग, हाई-डेफिनिशन ऑडियो सपोर्ट, एफएम रेडियो और एलईडी नोटिफिकेशन सिस्टम जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। इन फीचर्स का उद्देश्य उपयोगकर्ता को आवश्यक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जबकि उसे अनावश्यक डिजिटल व्यस्तताओं से दूर रखना है। कंपनी का मानना है कि आधुनिक उपयोगकर्ता अब केवल अधिक फीचर्स नहीं, बल्कि बेहतर डिजिटल संतुलन भी चाहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हाल के वर्षों में डिजिटल डिटॉक्स की अवधारणा तेजी से लोकप्रिय हुई है। लगातार सोशल मीडिया उपयोग, नोटिफिकेशन और ऑनलाइन गतिविधियों के कारण मानसिक तनाव, ध्यान भंग होने और उत्पादकता में कमी जैसी समस्याओं पर चर्चा बढ़ी है। ऐसे माहौल में सीमित लेकिन उपयोगी फीचर्स वाले फोन फिर से बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं। फ्लिप फोन की वापसी को केवल पुरानी तकनीक के प्रति आकर्षण के रूप में नहीं देखा जा रहा है। युवा उपयोगकर्ता इन्हें सोशल मीडिया से दूरी बनाने और स्क्रीन टाइम कम करने के साधन के रूप में अपना रहे हैं, जबकि वरिष्ठ नागरिक इनके आसान उपयोग और सरल इंटरफेस को पसंद कर रहे हैं। फोन को बंद करने के लिए फ्लिप को बंद करना भी कई लोगों को एक स्पष्ट डिजिटल विराम का अनुभव देता है। तकनीकी बाजार में Callback 8020 जैसे उत्पाद यह संकेत दे रहे हैं कि भविष्य की प्रतिस्पर्धा केवल अधिक शक्तिशाली स्मार्टफोन बनाने तक सीमित नहीं रहेगी। उपयोगकर्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं को देखते हुए अब ऐसे उपकरणों की मांग भी बढ़ सकती है जो तकनीक और व्यक्तिगत जीवन के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने का प्रयास करें।

शाहरुख खान ने 7 साल पहले ही कर दी थी ‘तारक मेहता’ की भविष्यवाणी! दिलीप जोशी और चंपकलाल का अनोखा कनेक्शन हुआ वायरल

नई दिल्ली । टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ को शुरू हुए लगभग दो दशक होने जा रहे हैं, लेकिन आज भी इसकी लोकप्रियता बरकरार है। शो के हर किरदार ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है, खासकर जेठालाल और उनके पिता चंपकलाल की जोड़ी। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए हैं। यह वीडियो साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म ‘वन 2 का 4’ का है, जिसमें बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ अभिनेता दिलीप जोशी भी नजर आए थे। दिलीप जोशी आज भले ही ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में जेठालाल के किरदार के लिए पहचाने जाते हों, लेकिन इससे पहले उन्होंने कई फिल्मों और टीवी शो में छोटे-बड़े किरदार निभाए थे। वायरल हो रहे इस वीडियो में एक दिलचस्प संयोग देखने को मिलता है। फिल्म ‘वन 2 का 4’ में दिलीप जोशी जिस किरदार को निभा रहे थे, उसका नाम ‘चंपक’ था। एक दृश्य में शाहरुख खान उनसे टकरा जाते हैं और गुस्से में उन्हें ‘चंपक की औलाद’ कहकर संबोधित करते हैं। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही संवाद आने वाले वर्षों में एक मजेदार संयोग के रूप में चर्चा का विषय बन जाएगा। दरअसल, सात साल बाद जब 2008 में ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ शुरू हुआ, तो दिलीप जोशी ने जेठालाल का किरदार निभाया और शो में उनके पिता का नाम चंपकलाल रखा गया। इस तरह फिल्म में शाहरुख खान द्वारा कहा गया संवाद मानो भविष्यवाणी की तरह सच साबित होता नजर आया। यही वजह है कि सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को देखकर इसे एक मजेदार संयोग और ‘भविष्यवाणी’ बता रहे हैं। वायरल क्लिप में दिखाया गया है कि दिलीप जोशी का किरदार सीढ़ियों के नीचे सो रहा होता है। तभी शाहरुख खान वहां से गुजरते हुए उससे टकरा जाते हैं और कहते हैं, “चंपक की औलाद, कितनी बार कहा है कि सीढ़ियों के सामने बिस्तर मत लगाया कर।” यह संवाद अब इंटरनेट पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। फिल्म ‘वन 2 का 4’ का निर्देशन शशिलाल के. नायर ने किया था। फिल्म में शाहरुख खान, जूही चावला और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े सितारे नजर आए थे। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा सकी, लेकिन इसके कुछ दृश्य आज भी दर्शकों को याद हैं। फिल्म का संगीत ए.आर. रहमान ने दिया था। वहीं ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की बात करें तो यह शो 2008 से लगातार दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है। गोकुलधाम सोसाइटी की कहानी, पड़ोसियों के बीच प्यार, सामाजिक संदेश और हल्की-फुल्की कॉमेडी ने इसे भारतीय टेलीविजन का सबसे लंबे समय तक चलने वाला और पसंदीदा शो बना दिया है। अब शाहरुख खान और दिलीप जोशी से जुड़ा यह पुराना वीडियो एक बार फिर लोगों को मनोरंजन के साथ-साथ हैरान भी कर रहा है।