भोपाल में दर्दनाक सड़क हादसा: आयशर की टक्कर से पेट्रोल पंप कर्मचारी की मौत, दो मासूम बच्चों के सिर से उठा पिता का साया

भोपाल । राजधानी भोपाल के खजूरी थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। नाइट ड्यूटी पूरी कर घर लौट रहे एक पेट्रोल पंप कर्मचारी की आयशर वाहन की टक्कर से मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतक अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गया है, जिनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान 30 वर्षीय नितेश यादव पुत्र अशोक यादव निवासी आमना खेड़ी के रूप में हुई है। नितेश भैंसा खेड़ी स्थित एक पेट्रोल पंप पर सेल्समैन के पद पर कार्यरत था। बुधवार और गुरुवार की दरमियानी रात वह अपनी नियमित ड्यूटी पर था। ड्यूटी समाप्त होने के बाद वह सुबह बाइक से अपने घर लौट रहा था। सुबह करीब 10:15 बजे जब नितेश खजूरी सड़क क्षेत्र के पास एक मोड़ से गुजर रहा था, तभी सामने से आ रहे एक आयशर वाहन ने उसकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि नितेश गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दुर्घटना के बाद आयशर चालक वाहन लेकर भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए उसे पकड़ लिया। इसके बाद चालक को पुलिस के हवाले कर दिया गया। सूचना मिलते ही खजूरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को जब्त कर थाने में खड़ा कर लिया है। प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नितेश यादव की निजी जिंदगी भी जिम्मेदारियों से भरी हुई थी। करीब छह वर्ष पहले उसकी शादी हुई थी और वह दो बच्चों का पिता था। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी मुख्य रूप से उसी के कंधों पर थी। उसकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। पोस्टमॉर्टम के बाद गुरुवार दोपहर शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई। अस्पताल की मर्चुरी के बाहर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के सदस्य और रिश्तेदार इस हादसे को लेकर स्तब्ध हैं। मोहल्ले और परिचितों में भी घटना को लेकर शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था और निगरानी बढ़ाने की मांग की है। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और लापरवाह ड्राइविंग के गंभीर खतरे की याद दिलाता है। एक पल की असावधानी ने न केवल एक युवक की जान ले ली, बल्कि उसके परिवार को जीवनभर का दुख दे दिया।
एनएसई का 30,000 करोड़ रुपये का मेगा आईपीओ तैयार, भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में बन सकता है सबसे बड़ा पब्लिक ऑफर

नई दिल्ली । भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ने अपने बहुप्रतीक्षित प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नियामकीय प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। लंबे समय से बाजार की नजर जिस प्रस्ताव पर टिकी हुई थी, वह अब औपचारिक रूप से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। अनुमान है कि यह सार्वजनिक निर्गम करीब 30,000 करोड़ रुपये का हो सकता है, जो भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बनने की क्षमता रखता है। इस प्रस्तावित आईपीओ की सबसे प्रमुख विशेषता यह है कि यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल आधारित होगा। इसका अर्थ है कि कंपनी नए शेयर जारी कर पूंजी नहीं जुटाएगी, बल्कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे। इस मॉडल के तहत कंपनी की बैलेंस शीट पर कोई नई पूंजी नहीं आएगी, जबकि निवेशकों को अपनी हिस्सेदारी के आंशिक विनिवेश का अवसर मिलेगा। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अनलिस्टेड मार्केट में एनएसई का मूल्यांकन लगभग पांच लाख करोड़ रुपये के आसपास आंका जा रहा है। इसी आधार पर यदि कुल हिस्सेदारी का सीमित प्रतिशत भी सार्वजनिक निर्गम के तहत पेश किया जाता है, तो इसका आकार 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह आंकड़ा भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास के कई बड़े आईपीओ को पीछे छोड़ सकता है और पूंजी बाजार में नया रिकॉर्ड स्थापित कर सकता है। इस इश्यू में कई प्रमुख संस्थागत निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में हैं। लंबे समय से एनएसई में निवेश बनाए रखने वाले बड़े वित्तीय संस्थान और विदेशी निवेशक इस सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से आंशिक निकास प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि देश की सबसे बड़ी बीमा संस्था एलआईसी इस आईपीओ में अपनी हिस्सेदारी बेचने की योजना में शामिल नहीं है। बाजार विश्लेषक इसे एनएसई में दीर्घकालिक विश्वास और रणनीतिक निवेश दृष्टिकोण के रूप में देख रहे हैं। एनएसई की लिस्टिंग का महत्व केवल इश्यू के आकार तक सीमित नहीं है। यह कदम भारतीय वित्तीय बाजारों में पारदर्शिता, कॉरपोरेट गवर्नेंस और निवेशकों की भागीदारी को नई दिशा दे सकता है। देश के अधिकांश इक्विटी और डेरिवेटिव कारोबार का संचालन इसी एक्सचेंज के माध्यम से होता है। ऐसे में इसका सार्वजनिक कंपनी के रूप में सामने आना बाजार संरचना के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। आईपीओ प्रक्रिया तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं रहा। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न नियामकीय और प्रक्रियात्मक चुनौतियों के कारण यह योजना कई बार चर्चा में रही। अब आवश्यक मंजूरियां और प्रक्रियाएं आगे बढ़ने के बाद बाजार को इस ऐतिहासिक निर्गम का इंतजार है। निवेशकों और वित्तीय संस्थानों की नजर आगामी चरणों पर बनी हुई है, जहां मूल्य निर्धारण, हिस्सेदारी के आकार और निवेशकों की प्रतिक्रिया जैसे पहलू महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आईपीओ अनुमानित आकार में सफलतापूर्वक पूरा होता है तो यह केवल एक कॉर्पोरेट इवेंट नहीं रहेगा, बल्कि भारतीय पूंजी बाजार की परिपक्वता और वैश्विक निवेश आकर्षण का प्रतीक भी बनेगा। इससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है तथा बाजार को नई गति मिल सकती है। भारतीय शेयर बाजार के विकास की यात्रा में यह कदम एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ सकता है। आने वाले महीनों में इस आईपीओ से जुड़ी गतिविधियां निवेश जगत के केंद्र में रहने की संभावना है और पूरा वित्तीय क्षेत्र इसके अगले चरणों पर बारीकी से नजर रखेगा।
मनुआभान टेकरी कांड में बड़ा फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या के दोषियों को उम्रकैद, डीएनए साक्ष्यों ने दिलाई सजा

भोपाल । भोपाल के बहुचर्चित मनुआभान टेकरी दुष्कर्म एवं हत्या कांड में आखिरकार न्यायालय का बड़ा फैसला सामने आया है। विशेष न्यायाधीश कुमुदिनी पटेल की अदालत ने मामले के दोनों आरोपियों अविनाश साहू और जस्टिन राज को दोषी ठहराते हुए शेष प्राकृतिक जीवन तक सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर 8-8 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। इस फैसले के साथ वर्षों से चल रहे इस संवेदनशील मामले का महत्वपूर्ण कानूनी अध्याय समाप्त हुआ है। यह मामला वर्ष 2019 में सामने आया था और उस समय पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया था। घटना 30 अप्रैल 2019 की है, जब आठवीं कक्षा में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा अपनी 16 वर्षीय बुआ और उसके मित्र अविनाश साहू के साथ मनुआभान टेकरी घूमने गई थी। आरोप है कि टेकरी पर दोनों आरोपियों ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया और फिर पहचान छिपाने के उद्देश्य से पत्थर से उसका सिर कुचलकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपियों ने शव को लगभग 100 फीट गहरी खाई में स्थित एक गुफा में छिपा दिया था ताकि किसी को घटना की जानकारी न मिल सके। घटना के बाद आरोपी खुद को निर्दोष साबित करने के लिए छात्रा की तलाश का नाटक करते रहे। जब बालिका के लापता होने की सूचना पुलिस को मिली तो कोहेफिजा थाना पुलिस ने पूरी रात सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन शुरुआत में कोई सफलता नहीं मिली। जांच के दौरान पुलिस को अविनाश साहू के बयानों में लगातार विरोधाभास दिखाई दिया। संदेह गहराने पर पुलिस ने उससे गहन पूछताछ की, जिसके बाद उसने पूरी वारदात कबूल कर ली। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने खाई में छिपाया गया छात्रा का शव बरामद किया। जांच के दौरान पुलिस ने डीएनए रिपोर्ट, मेडिकल परीक्षण और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को एकत्रित किया। पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म, हत्या और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अदालत में चालान पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की सिफारिश भी की थी। हालांकि बाद में सीबीआई ने पुलिस की डीएनए रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए दोनों आरोपियों को क्लीन चिट देने का प्रयास किया और अदालत में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी। लेकिन अदालत ने सीबीआई की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया और उससे विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद मामले का ट्रायल जारी रहा और उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान तथा वैज्ञानिक जांच रिपोर्टों का गहन परीक्षण किया गया। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल रहा है। न्यायालय ने माना कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपियों की संलिप्तता को स्पष्ट रूप से साबित करते हैं। इसी आधार पर दोनों दोषियों को कठोर सजा सुनाई गई। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों में वैज्ञानिक साक्ष्य और सतत न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सकता है। प्रदेश के चर्चित मामलों में शामिल इस प्रकरण में आया फैसला न्याय व्यवस्था के प्रति लोगों के विश्वास को भी मजबूत करने वाला माना जा रहा है।
मानसून से पहले भोपाल की बड़ी पोल खुली! एक साल से धंसी सड़क नहीं हुई दुरुस्त, एमपी नगर में घुटनों तक भर रहा पानी

भोपाल । मानसून की आमद से पहले राजधानी भोपाल में तैयारियों की वास्तविक तस्वीर सामने आने लगी है। शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में शामिल एमपी नगर में एक साल पहले धंसी सड़क आज भी पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो सकी है। नतीजा यह है कि थोड़ी सी बारिश होते ही सड़क पर घुटनों तक पानी भर जाता है और हजारों वाहन चालकों व राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति तब है जब मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय भी नहीं हुआ है। एमपी नगर स्थित बोर्ड ऑफिस चौराहे और एमपी नगर चौराहे के बीच की सड़क 17 जुलाई 2025 को अचानक धंस गई थी। जांच में सामने आया था कि यह सड़क एक पुराने नाले के ऊपर बनी हुई थी। शुरुआती स्तर पर सड़क की मरम्मत की गई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद आसपास का हिस्सा भी कमजोर पड़ने लगा और फिर सड़क के दूसरे हिस्से में भी धंसाव की आशंका पैदा हो गई। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने स्थायी समाधान के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू करने का निर्णय लिया। बताया जाता है कि जिस नाले के ऊपर सड़क बनी हुई है, वह लगभग 50 साल पुराना है। इसे मजबूत बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी ने रेलवे अंडरपास की तर्ज पर प्री-कास्ट तकनीक से नया स्ट्रक्चर तैयार करने की योजना बनाई। हालांकि यह परियोजना शुरुआत से ही बाधाओं में घिरी रही। दो बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन किसी एजेंसी ने काम में रुचि नहीं दिखाई। दोनों बार टेंडर निरस्त करने पड़े। तीसरी बार प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू हो सका। पिछले चार महीनों से चल रहे इस काम ने क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। ज्योति टॉकीज चौराहे से बोर्ड ऑफिस चौराहे तक आने-जाने वाले लोगों को रोज लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है। सड़क की एक लेन बंद होने के कारण ट्रैफिक का दबाव दूसरी सड़कों पर बढ़ गया है। चेतक ब्रिज से आने वाले वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब बारिश होती है। हाल ही में हुई बारिश के दौरान निर्माणाधीन क्षेत्र में इतना पानी भर गया कि पैदल चलना मुश्किल हो गया। सड़क पर घुटनों तक पानी जमा हो गया और वाहन रेंगते हुए निकलते दिखाई दिए। कई कारें पानी में फंस गईं और लोगों को घंटों जाम तथा अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। चिंता की बात यह है कि जिस नई तकनीक के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान खोजा जा रहा था, उसके बावजूद जलभराव की समस्या बरकरार दिखाई दे रही है। सड़क की जिस लेन का निर्माण कार्य पूरा बताया जा रहा है, वहां भी पानी भरने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे परियोजना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। एमपी नगर जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक क्षेत्र में रोजाना लाखों लोगों की आवाजाही होती है। अनुमान है कि करीब पांच लाख लोग प्रतिदिन इस मार्ग का उपयोग करते हैं। ऐसे में सड़क निर्माण की धीमी गति और जलनिकासी व्यवस्था की खामियां नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी हैं। मानसून शुरू होने से पहले यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
भोपाल में इंजीनियरिंग की बड़ी चूक! फुटपाथ को ही रेलिंग लगाकर किया बंद, पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी

भोपाल । भोपाल में एक बार फिर खराब इंजीनियरिंग और बिना जमीनी हकीकत को समझे किए गए विकास कार्यों का मामला सामने आया है। शहर के ऐशबाग क्षेत्र में 90 डिग्री ब्रिज के बाद वार्ड क्रमांक 32 में बनाए गए फुटपाथ को इस तरह रेलिंग से घेर दिया गया है कि अब वह पैदल यात्रियों की सुविधा के बजाय उनके लिए परेशानी का कारण बन गया है। जिस फुटपाथ का निर्माण लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था, वह अब किसी बंद पिंजरे जैसा दिखाई दे रहा है। सड़क किनारे किए गए सौंदर्यीकरण कार्य के तहत लगभग तीन फीट ऊंची लोहे की जाली लगाई गई है। इस रेलिंग के कारण राहगीरों का सीधे फुटपाथ पर पहुंचना मुश्किल हो गया है। कुछ चुनिंदा स्थानों पर प्रवेश और निकास के लिए कट पॉइंट बनाए गए हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश स्थानों पर ठेला संचालकों और अन्य अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर रखा है। परिणामस्वरूप पैदल चलने वाले लोगों को फुटपाथ का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई स्थानों पर स्थिति और भी विचित्र है। फुटपाथ के एक ओर तीन फीट ऊंची लोहे की रेलिंग है, जबकि दूसरी ओर पहले से बनी पक्की दीवार मौजूद है। ऐसे में पैदल यात्री बीच में फंसकर रह जाते हैं और उन्हें सड़क पर चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया है, जिसने मूल उद्देश्य को ही समाप्त कर दिया है। क्षेत्रवासियों ने सवाल उठाया है कि जब कोई भी सार्वजनिक परियोजना नागरिकों की सुविधा के लिए बनाई जाती है, तो उसकी डिजाइन और उपयोगिता का आकलन किए बिना मंजूरी कैसे दी जाती है। लोगों का कहना है कि बस या सार्वजनिक परिवहन से उतरने वाले यात्री सीधे फुटपाथ तक नहीं पहुंच सकते। इससे दुर्घटना की आशंका भी बढ़ जाती है। नागरिकों ने इसे सरकारी धन की बर्बादी और योजना निर्माण में गंभीर लापरवाही करार दिया है। मामले के सामने आने के बाद नगर निगम के अधिकारियों ने भी संज्ञान लिया है। निगम के कार्यपालन यंत्री (ईई) एन.के. डेहरिया ने बताया कि संबंधित इंजीनियर से जानकारी मांगी गई है कि यह कार्य किस मद और किस प्रक्रिया के तहत स्वीकृत किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि फुटपाथ के उपयोग में लोगों को दिक्कत हो रही है तो आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। उन्होंने स्वयं स्थल निरीक्षण करने की बात भी कही है। वहीं वार्ड की पार्षद आरती अनेजा का कहना है कि क्षेत्र में अतिक्रमण और शराबियों के जमावड़े की समस्या को देखते हुए यह कदम उठाया गया था। ठेकेदार ने आश्वासन दिया था कि रेलिंग लगाने के बावजूद लोगों की आवाजाही प्रभावित नहीं होगी, लेकिन मौके पर पहुंचकर देखने पर स्थिति अलग मिली। पार्षद ने स्पष्ट किया कि यदि वर्तमान डिजाइन लोगों के लिए असुविधाजनक है तो इसमें बदलाव कराया जाएगा। यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि विकास कार्यों में तकनीकी योजना और जमीनी जरूरतों के बीच तालमेल कितना जरूरी है। यदि परियोजनाएं नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के बजाय मुश्किलें खड़ी करने लगें, तो उनकी उपयोगिता पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
भोपाल में हाईटेंशन लाइन पर चढ़ा युवक, तारों पर चलता रहा; 57 मिनट की मशक्कत के बाद क्रेन से बचाया गया

भोपाल । राजधानी भोपाल के एमपी नगर इलाके में गुरुवार सुबह एक हैरान कर देने वाला घटनाक्रम सामने आया, जब एक युवक अचानक हाईटेंशन बिजली के खंभे पर चढ़ गया और कुछ ही देर में बिजली के तारों पर चलता हुआ दिखाई दिया। इस खतरनाक दृश्य को देखकर मौके पर मौजूद लोगों की सांसें थम गईं। देखते ही देखते आसपास बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई और पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना शासकीय प्रेस के सामने की बताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक अचानक बिजली के पोल पर चढ़ गया और फिर हाईटेंशन लाइन तक पहुंच गया। कई मिनटों तक वह तारों के बीच चलता और इधर-उधर घूमता रहा। लोगों को डर था कि कहीं युवक करंट की चपेट में न आ जाए या संतुलन बिगड़ने से नीचे न गिर पड़े। घटना की सूचना मिलते ही एमपी नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने सबसे पहले इलाके को सुरक्षित कराया और लोगों को बिजली के खंभे तथा तारों से दूर रहने की सलाह दी। इसके बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास शुरू किए गए। पुलिस, बिजली कंपनी और अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारियों ने संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। करीब 57 मिनट तक चले इस अभियान के दौरान युवक को लगातार समझाइश दी जाती रही। अधिकारियों ने धैर्य और सतर्कता के साथ उससे बातचीत की ताकि वह किसी भी तरह का जोखिम भरा कदम न उठाए। आखिरकार युवक को शांत कर नीचे आने के लिए तैयार किया गया और क्रेन की सहायता से उसे सुरक्षित जमीन पर उतार लिया गया। युवक के नीचे आते ही मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। पुलिस जांच में युवक की पहचान 42 वर्षीय श्रवण कुमार निवासी हरदा के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार वह करीब पांच वर्ष पहले तक हरदा पोस्ट ऑफिस में अस्थायी कर्मचारी के रूप में कार्यरत था। एक आपराधिक मामले में नाम आने के बाद उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं। तब से वह नौकरी में पुनर्बहाली के लिए लगातार प्रयास कर रहा था। बताया गया कि श्रवण कुमार गुरुवार सुबह हरदा से भोपाल पहुंचा था। वह एमपी नगर स्थित डाक विभाग के कार्यालय में अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी नौकरी बहाल करने की मांग रखना चाहता था। हालांकि, उसकी अधिकारियों से मुलाकात नहीं हो सकी। इससे निराश होकर वह कार्यालय से बाहर निकला और कुछ ही देर बाद बिजली के पोल पर चढ़ गया। इस घटना के दौरान पुलिस ने बिजली कंपनी को भी तत्काल सूचना दी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जब तक युवक सुरक्षित नीचे नहीं उतर जाता, तब तक लाइन चालू न की जाए। हालांकि राहत की बात यह रही कि उस समय लाइन मेंटेनेंस कार्य के कारण संबंधित बिजली लाइन पहले से ही बंद थी। इसी वजह से एक बड़ा हादसा टल गया। यह घटना न केवल प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण रही, बल्कि मानसिक तनाव और रोजगार संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। फिलहाल पुलिस युवक से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की जांच जारी है।
CM MOHAN YADAV INSTRUCTION: मुख्यमंत्री ने पुलिस को दिए दो टुक निर्देश, बोले-मेरे राज में संतो का अपमान बर्दाश्त नहीं

CM MOHAN YADAV INSTRUCTION: अशोकनगर। दिगंबर जैन मुनि सुधासागर जी महाराज के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाते हुए अशोकनगर पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। US–ईरान MoU: होर्मुज स्ट्रेट 60 दिन तक टोल-फ्री रहने की संभावना, 5वें पॉइंट में भविष्य के मैनेजमेंट पर बड़ा संकेत क्या है पूरा मामला? बताया जा रहा है कि मध्यप्रदेश पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त पूर्व डीएसपी रेखा जैन ने दिगंबर जैन मुनि सुधासागर जी महाराज के खिलाफ सोशल मीडिया पर टिपणी की थी जिसको लेकर ये पूरा विवाद खड़ा हुआ। इसपर दिगंबर जैन समाजने नाराजगी जताते हुए विधायक अनिल जैन और वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र जैन के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि मुनि सुधासागर जी महाराज जैन समाज के प्रमुख संतों में शामिल हैं और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था उनसे जुड़ी हुई है। ऐसे में उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों से समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। BJP Leader Controversy: जन कल्याण शिविर में अधिकारीयों को धमकाते नजर आए भाजपा नेता, कर्मचारियों से बोले- तुम लोग कामचोर हो! CM मोहन यादव ने दिए कड़े निर्देश मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तत्काल अपने ओएसडी राजेश हिंगडकर को बुलाया और अशोकनगर के पुलिस अधीक्षक राजीव मिश्रा से फोन पर बात की। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मामले में कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति धार्मिक संतों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने का साहस न कर सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि प्रदेश में किसी भी धर्म, संत या धार्मिक व्यक्तित्व के सम्मान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कानून व्यवस्था बनाए रखने और दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई करने पर जोर दिया।
दुनिया के पहले खरबपति बनने के बाद एलन मस्क को बड़ा वित्तीय झटका लगा है।

नई दिल्ली। दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी और तकनीकी उद्यमी एलन मस्क को खरबपति बनने के कुछ ही समय बाद बड़ा झटका लगा है। उनकी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कंपनी SpaceX के शेयरों में आई गिरावट के चलते महज 24 घंटे के भीतर उनकी संपत्ति में लगभग 56.4 अरब डॉलर यानी करीब 53,298 करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई। यह रकम भारत के कई बड़े उद्योगपतियों की कुल संपत्ति के बराबर मानी जा रही है। हाल ही में SpaceX ने अपने शेयर बाजार सफर के दौरान जबरदस्त प्रदर्शन किया था। कंपनी के शेयर लगातार तीन कारोबारी सत्रों में करीब 50 प्रतिशत तक उछले थे, जिससे कंपनी का बाजार पूंजीकरण रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इसी तेजी के दम पर एलन मस्क की कुल संपत्ति भी नए शिखर पर पहुंची और वह दुनिया के पहले खरबपति के रूप में चर्चा में आ गए। लेकिन बाजार में मुनाफावसूली शुरू होते ही तस्वीर बदल गई। बुधवार को SpaceX के शेयर कारोबार के दौरान शुरुआती बढ़त के बावजूद दबाव में आ गए और अंततः लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। शेयरों में इस कमजोरी का सीधा असर कंपनी के मूल्यांकन और एलन मस्क की व्यक्तिगत संपत्ति पर पड़ा। हालांकि गिरावट के बाद भी SpaceX का बाजार मूल्य लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर के आसपास बना हुआ है, जो इसे दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल रखता है। शेयरों में आई गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ गया। इसके अलावा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को लेकर दिए गए संकेतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। फेड ने फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रखा है, लेकिन भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई है। इसके बाद अमेरिकी शेयर बाजारों में व्यापक बिकवाली देखने को मिली। इस माहौल का असर टेक्नोलॉजी और हाई-वैल्यूएशन कंपनियों पर सबसे अधिक पड़ा। SpaceX भी इससे अछूती नहीं रही। S&P 500 और Nasdaq जैसे प्रमुख सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का रुझान जोखिम वाले शेयरों से हटता दिखाई दिया। यही वजह रही कि SpaceX के शेयरों में तेजी पर अचानक ब्रेक लग गया। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में SpaceX के शेयरों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। कंपनी के सीमित फ्री-फ्लोट के कारण शेयरों में छोटी खरीद-बिक्री भी बड़े मूल्य परिवर्तन का कारण बन रही है। साथ ही भविष्य में लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद शुरुआती निवेशकों द्वारा शेयर बेचने की संभावना भी बाजार पर दबाव बना सकती है। हालांकि इस गिरावट के बावजूद एलन मस्क की कुल संपत्ति अभी भी लगभग 1.26 खरब डॉलर के आसपास बनी हुई है। इस वर्ष उनकी संपत्ति में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है और वह अब भी दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति बने हुए हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि SpaceX आने वाले दिनों में अपनी तेजी को दोबारा हासिल कर पाती है या नहीं।
एमपी में मानसून की एंट्री 22–24 जून के बीच संभव, छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र के बाद पहुंचेगा

भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून के लिए इंतजार अभी और बढ़ सकता है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, प्रदेश में मानसून 22 से 24 जून के बीच दस्तक दे सकता है। फिलहाल मानसून पश्चिमी तट पर 8 जून से ही रुका हुआ है और अभी तक मुंबई तक भी नहीं पहुंच पाया है। ऐसे में यह पहले छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में आगे बढ़ेगा, उसके बाद मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा। इस बीच प्रदेश में भीषण गर्मी और हीटवेव का असर अगले कुछ दिनों तक बना रहेगा। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों के लिए अलर्ट जारी किया है। जून महीने में बारिश के आंकड़े भी कमजोर बने हुए हैं। 1 से 17 जून के बीच प्रदेश में औसतन 41.6 मिमी (करीब 1.6 इंच) बारिश होती है, लेकिन इस बार अब तक सिर्फ करीब 1 इंच बारिश ही दर्ज हुई है। यह सामान्य से लगभग 37 प्रतिशत कम है। सबसे खराब स्थिति अलीराजपुर जिले की है, जहां अब तक बारिश रिकॉर्ड ही नहीं की गई है, जिससे वहां आंकड़ा शून्य है। इसके अलावा बालाघाट, दमोह, कटनी, मैहर, रीवा, शहडोल, टीकमगढ़, बड़वानी, भिंड, दतिया, धार और खरगोन जैसे 13 जिलों में 12.5 मिमी (आधा इंच) से भी कम बारिश हुई है। वहीं, भोपाल एकमात्र ऐसा जिला है जहां अब तक सामान्य से बेहतर बारिश दर्ज हुई है। यहां 91.9 मिमी यानी साढ़े 3 इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। आगर-मालवा, बुरहानपुर, देवास, गुना, हरदा, इंदौर, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, विदिशा, डिंडौरी, सतना और सीधी में 1 से ढाई इंच तक बारिश दर्ज हुई है। बुधवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। भोपाल और राजगढ़ में आधा इंच से ज्यादा बारिश हुई, जबकि बैतूल, गुना, इंदौर और छिंदवाड़ा में भी हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई। बारिश के चलते तापमान में गिरावट भी देखने को मिली। बैतूल में एक ही दिन में तापमान 10 डिग्री गिरकर 26.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। अन्य जिलों में शिवपुरी-पचमढ़ी में 34 डिग्री, छिंदवाड़ा में 35.9 डिग्री, रायसेन में 26.6 डिग्री, सागर में 37 डिग्री, नर्मदापुरम में 37.2 डिग्री, श्योपुर-धार में 37.4 डिग्री और मंडला में 37.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में भोपाल में 34.8 डिग्री, इंदौर में 37.2 डिग्री, उज्जैन में 39 डिग्री, जबलपुर में 39.3 डिग्री और ग्वालियर में 39.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ। मौसम विभाग ने गुरुवार को रतलाम, छिंदवाड़ा और बालाघाट में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। वहीं ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, अशोकनगर, विदिशा, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर में आंधी-बारिश की संभावना जताई गई है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खरगोन, शाजापुर, देवास, सीहोर, रायसेन, सागर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया और शहडोल में गर्मी का असर बना रहेगा।
US–ईरान MoU: होर्मुज स्ट्रेट 60 दिन तक टोल-फ्री रहने की संभावना, 5वें पॉइंट में भविष्य के मैनेजमेंट पर बड़ा संकेत

नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने को लेकर जिस MoU पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने हस्ताक्षर किए हैं, उसका पूरा विवरण अब सार्वजनिक कर दिया गया है। अमेरिका की ओर से जारी इस दस्तावेज़ में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने, कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने और परमाणु मुद्दों पर बातचीत की रूपरेखा शामिल है। कुल 14 बिंदुओं वाले इस MoU में 5वां बिंदु सबसे अहम माना जा रहा है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि समझौते के बाद ईरान कोशिश करेगा कि कमर्शियल जहाजों को फारस की खाड़ी से ओमान सागर और ओमान सागर से फारस की खाड़ी तक 60 दिनों तक बिना किसी टोल के सुरक्षित आवाजाही की अनुमति मिले। दस्तावेज़ के अनुसार, जहाजों की आवाजाही तुरंत शुरू की जाएगी, जबकि रास्ते में मौजूद तकनीकी बाधाओं और बारूदी सुरंगों को हटाने में लगभग 30 दिन का समय लग सकता है। इसके साथ ही MoU में यह भी कहा गया है कि होर्मुज स्ट्रेट के भविष्य के प्रबंधन को लेकर ईरान ओमान के साथ बातचीत करेगा। इसमें फारस की खाड़ी से जुड़े अन्य देशों को भी शामिल किया जाएगा और यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय कानून तथा तटीय देशों के संप्रभु अधिकारों के तहत पूरी की जाएगी। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी हिस्सेदारी गुजरती है। हाल ही में तनाव और संघर्ष की स्थिति के चलते इस मार्ग पर असर पड़ा था, जिससे अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति प्रभावित हुई। MoU के 5वें बिंदु के मुताबिक, शुरुआती 60 दिनों तक टोल-फ्री व्यवस्था लागू रहने की बात कही गई है, जबकि आगे चलकर ईरान और ओमान मिलकर इसके स्थायी प्रबंधन और संभावित शुल्क व्यवस्था पर निर्णय ले सकते हैं।