शाहिद कपूर की फिल्म की रिलीज के बाद दर्शकों में बढ़ा सिनेमाई उत्साह, 'अल्फा' और 'वेलकम टू द जंगल' सहित इन बड़े प्रोजेक्ट्स पर टिकीं सबकी नजरें

नई दिल्ली । भारतीय बॉक्स ऑफिस पर शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर फिल्म ‘कॉकटेल 2’ की भव्य रिलीज के साथ ही दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया है। इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के सिनेमाघरों में दस्तक देने के तुरंत बाद मनोरंजन जगत की प्रतिष्ठित ट्रैकिंग वेबसाइट आईएमडीबी ने दर्शकों की पसंद और उत्सुकता के आधार पर मोस्ट एंटीसिपेटेड यानी सबसे ज्यादा इंतजार की जाने वाली आगामी हिंदी फिल्मों की सूची को अपडेट कर दिया है। इस नई सूची से साफ संकेत मिलते हैं कि आने वाले हफ्तों में सिनेमाघरों से लेकर विभिन्न डिजिटल और टेलीविजन प्लेटफॉर्म्स पर बड़े सितारों के बड़े बजट वाले प्रोजेक्ट्स दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस सूची में सबसे पहला और बड़ा नाम निर्देशक अहमद खान के मार्गदर्शन में बन रही मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म ‘वेल्कम टू द जंगल’ का है। अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, परेश रावल, रवीना टंडन, अरशद वारसी और दिशा पाटनी जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी यह बड़े बजट की फिल्म आगामी 26 जून को सीधे सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। हाल ही में जारी हुए इसके ट्रेलर ने दर्शकों के बीच पहले ही भारी उत्सुकता पैदा कर दी है, जिससे इसे बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रतिक्रिया मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। थिएटर रिलीज की इस कतार में अगला बड़ा नाम निर्देशक इंद्र कुमार की सुपरहिट कॉमेडी फ्रेंचाइजी की अगली कड़ी ‘धमाल 4’ का है। साल 2007 में शुरू हुई इस मशहूर सीरीज के चौथे भाग में अजय देवगन, रितेश देशमुख, रवि किशन, संजय मिश्रा और जावेद जाफरी जैसे कलाकार अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को गुदगुदाने के लिए लौट रहे हैं। कॉमेडी शैली की यह फिल्म अगले महीने की 10 तारीख यानी 10 जुलाई को सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी, जिसे लेकर सिनेमाप्रेमियों के बीच जबरदस्त क्रेज देखा जा रहा है। एक्शन और थ्रिलर के शौकीनों के लिए यशराज फिल्म्स के चर्चित स्पाई यूनिवर्स की अगली बड़ी पेशकश ‘अल्फा’ भी सिनेमाघरों में तहलका मचाने को तैयार है। शिव रवैल द्वारा निर्देशित इस कड़क स्पाई थ्रिलर फिल्म में आलिया भट्ट और शरवरी वाघ मुख्य भूमिकाओं में हैरतअंगेज एक्शन करती नजर आएंगी। बॉबी देओल और अनिल कपूर जैसे मजबूत अभिनेताओं से सजी इस फिल्म में सुपरस्टार ऋतिक रोशन का एक विशेष कैमियो भी शामिल किया गया है, जो दर्शकों के लिए बड़ा सरप्राइज होगा। यह फिल्म आगामी 3 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। सिल्वर स्क्रीन के अलावा डिजिटल स्पेस और टेलीविजन क्षेत्र में भी मनोरंजन का बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। निर्देशक सिद्धार्थ पी मल्होत्रा की बहुप्रतीक्षित थ्रिलर फिल्म ‘इक्का’ आगामी 10 जुलाई को सीधे नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम की जाएगी, जिसमें सनी देओल एक कड़क वकील की मुख्य भूमिका में अक्षय खन्ना और दिया मिर्जा के साथ स्क्रीन साझा करते दिखेंगे। वहीं दूसरी ओर, प्रख्यात फिल्म निर्माता राजकुमार हिरानी भी डिजिटल माध्यम में अपना पहला कदम रख रहे हैं। उनके निर्देशन में बनी कॉमेडी क्राइम सारांश सीरीज ‘प्रीतम पेड्रो’ 3 जुलाई को जियो हॉटस्टार पर रिलीज होगी, जिसमें विक्रांत मैसी, संजय दत्त और बोमन ईरानी मुख्य भूमिकाओं में हैं। छोटे पर्दे की बात करें तो कलर्स टीवी पर 29 जून से एक नया धारावाहिक ‘जूही मुही’ शुरू हो रहा है, जिसमें ईशा सिंह एक ऑटिस्टिक बच्ची का चुनौतीपूर्ण किरदार निभा रही हैं और उनके साथ वरिष्ठ अभिनेता संजय सूरी भी अहम भूमिका में नजर आएंगे।
स्मृति मंधाना ने रचा इतिहास T20I में 600 चौके लगाने वाली दुनिया की पहली खिलाड़ी बनीं

नई दिल्ली । भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उप कप्तान स्मृति मंधाना ने टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में इतिहास रच दिया है। नीदरलैंड्स के खिलाफ खेले गए मुकाबले में उन्होंने न केवल 74 रनों की शानदार पारी खेली बल्कि इस प्रारूप में 600 चौके पूरे करने वाली दुनिया की पहली खिलाड़ी बनकर एक ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम किया जो अब तक पुरुष और महिला दोनों क्रिकेट में कोई भी खिलाड़ी हासिल नहीं कर सका था। हेडिंग्ले में खेले गए इस मैच में मंधाना ने अपनी पारंपरिक आक्रामक और क्लासिक बल्लेबाजी का बेहतरीन प्रदर्शन किया। उन्होंने 47 गेंदों पर 74 रन बनाते हुए कई आकर्षक चौके लगाए और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने चौकों की संख्या 600 के पार पहुंचा दी। यह उपलब्धि उन्होंने अपने 168वें टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में हासिल की, जो उनकी निरंतरता और उच्च स्तर की बल्लेबाजी क्षमता को दर्शाता है। मंधाना की पारी की खासियत उनकी टाइमिंग और गैप्स का सटीक उपयोग रहा, जिसके दम पर उन्होंने लगातार रन गति बनाए रखी और भारतीय टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। उनकी इस पारी के चलते भारत ने नीदरलैंड्स के खिलाफ विशाल स्कोर खड़ा किया और मुकाबले में 95 रनों से शानदार जीत दर्ज की। टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा चौके लगाने वाली खिलाड़ियों की सूची में अब मंधाना शीर्ष पर पहुंच चुकी हैं। उनके 604 चौकों के साथ न्यूजीलैंड की सूजी बेट्स 521 चौकों के साथ दूसरे स्थान पर हैं, जबकि पाकिस्तान के बाबर आजम, आयरलैंड के पॉल स्टर्लिंग और भारत के रोहित शर्मा क्रमशः पीछे हैं। यह आंकड़ा बताता है कि मंधाना किस तरह लगातार विश्व क्रिकेट में अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से दबदबा बनाए हुए हैं। इस ऐतिहासिक पारी के दौरान मंधाना ने एक और उपलब्धि हासिल की। उन्होंने भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर को पीछे छोड़ते हुए महिला टी20 विश्व कप में भारत की ओर से सबसे ज्यादा 50 से अधिक रन बनाने वाली खिलाड़ी बनने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। यह उनका छठा 50+ स्कोर रहा, जो उनकी स्थिरता और बड़े मैचों में योगदान को दर्शाता है। मैच की बात करें तो भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा की 115 रनों की मजबूत साझेदारी की बदौलत 209 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। जवाब में नीदरलैंड्स की टीम 114 रनों पर सिमट गई। भारत की ओर से गेंदबाजी में भी शानदार प्रदर्शन देखने को मिला, जहां श्री चरणी ने चार विकेट झटके और शेफाली वर्मा ने तीन विकेट लेकर टीम की जीत को सुनिश्चित किया। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने विश्व कप में अपनी स्थिति और मजबूत कर ली है। अब टीम का अगला मुकाबला दक्षिण अफ्रीका से होगा, जहां एक बार फिर सभी की नजरें स्मृति मंधाना पर टिकी होंगी कि क्या वह अपनी यह शानदार फॉर्म आगे भी जारी रख पाती हैं।
ढाबा संचालक को उम्रकैद: महिला से दुष्कर्म और जातिसूचक प्रताड़ना के मामले में उज्जैन कोर्ट का बड़ा फैसला

मध्यप्रदेश । उज्जैन जिले में वर्ष 2024 में सामने आए दुष्कर्म और अत्याचार के एक गंभीर मामले में न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। महिला के साथ दुष्कर्म करने और जातिसूचक अपमान करने के मामले में दोषी पाए गए आरोपी को अदालत ने कठोर दंड देते हुए समाज में ऐसे अपराधों के प्रति सख्त संदेश दिया है। मीडिया सेल प्रभारी कुलदीप सिंह भदौरिया के अनुसार यह घटना 15 सितंबर 2024 की है। पीड़िता अपने एक परिचित युवक के साथ मोटरसाइकिल से महिदपुर क्षेत्र स्थित घड़ी वाले बाबा के दर्शन करने गई थी। दर्शन के बाद दोनों रात करीब 10 बजे माकड़ौन थाना क्षेत्र में स्थित एक ढाबे पर भोजन करने पहुंचे। यह ढाबा आरोपी लाखन सिंह गुर्जर द्वारा संचालित किया जाता था। अभियोजन के अनुसार भोजन करने के बाद जब दोनों ने बिल का भुगतान करना चाहा तो आरोपी ने पैसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने दोनों पर रात में वहीं रुकने का दबाव बनाया। जब पीड़िता और उसके साथी ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और मारपीट शुरू कर दी। आरोप है कि आरोपी ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए दोनों को अपमानित भी किया। मामले में यह भी सामने आया कि आरोपी ने हथियार दिखाकर पीड़िता के साथी को वहां से भगा दिया। इसके बाद उसने महिला के साथ जबरन दुष्कर्म किया और घटना की जानकारी किसी को देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। घटना के बाद पीड़िता ने साहस दिखाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने साक्ष्य और गवाहों के आधार पर जांच पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त साक्ष्य पेश किए, जिन्हें न्यायालय ने स्वीकार करते हुए आरोपी को दोषी माना। मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने आरोपी लाखन सिंह गुर्जर (37), निवासी ग्राम झिरनिया, थाना माकड़ौन, जिला उज्जैन को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(वी) के तहत दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई तथा 6 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। इस फैसले को महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। न्यायालय के निर्णय ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध और जातिगत अत्याचार जैसे गंभीर मामलों में कानून सख्ती से कार्रवाई करेगा।
ईरान समझौते पर आगे बढ़ने की कोशिश स्विट्जरलैंड यात्रा टलने के बावजूद अमेरिका प्रतिबद्ध

नई दिल्ली । वाशिंगटन में ईरान के साथ तकनीकी वार्ता के अगले चरण को लेकर चल रही तैयारी के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance की स्विट्जरलैंड यात्रा को फिलहाल टाल दिया गया है। यह यात्रा उस प्रक्रिया का हिस्सा थी जिसमें दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए प्रारंभिक समझौते को लागू करने और उसके क्रियान्वयन से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से बातचीत होनी थी। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि यात्रा स्थगित होने के बावजूद बातचीत की प्रक्रिया जारी है और दोनों पक्ष जल्द से जल्द अगले चरण की तकनीकी चर्चा शुरू करने के लिए तैयार हैं। व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि तकनीकी बातचीत की तारीख अभी अंतिम रूप में तय नहीं हुई है और स्थिति लगातार बदल रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल किसी भी समय प्रस्थान के लिए तैयार है लेकिन वार्ता की व्यवस्था और समय तय करना आसान प्रक्रिया नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल उपराष्ट्रपति उसी दिन यात्रा नहीं कर रहे हैं और आगे की जानकारी परिस्थितियों के अनुसार साझा की जाएगी। अमेरिकी प्रशासन ने यह संकेत दिया कि जैसे ही अगले चरण की बातचीत को लेकर कोई निश्चित कार्यक्रम तय होगा उसे सार्वजनिक किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि बातचीत की प्रक्रिया में कोई देरी नहीं की जा रही है बल्कि समन्वय से जुड़े तकनीकी कारणों के चलते समय में बदलाव हुआ है। प्रशासन ने यह भी दोहराया कि उनका उद्देश्य जल्द से जल्द तकनीकी वार्ता शुरू करना है ताकि समझौते के कार्यान्वयन को आगे बढ़ाया जा सके। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब वाशिंगटन और तेहरान दोनों ही पक्ष समझौते के बाद निगरानी और अनुपालन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की तैयारी कर रहे हैं। इन वार्ताओं में सबसे अहम विषय यह माना जा रहा है कि समझौते को जमीनी स्तर पर कैसे लागू किया जाए और उसकी प्रभावी निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाए। उपराष्ट्रपति ने पहले संकेत दिया था कि तकनीकी बातचीत कुछ ही दिनों में शुरू हो सकती है और इसके लिए स्विट्जरलैंड संभावित स्थान हो सकता है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया था कि इस प्रक्रिया का समन्वय चुनौतीपूर्ण है क्योंकि दोनों पक्षों के बीच समय और स्थान को लेकर लगातार बदलाव की स्थिति बनी रहती है। उन्होंने कहा था कि योजना के अनुसार स्विट्जरलैंड जाने की तैयारी थी लेकिन यह स्थिति परिस्थितियों पर निर्भर करती है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि बातचीत का मुख्य फोकस तकनीकी विवरणों पर होगा जिनमें निगरानी प्रक्रिया सत्यापन तंत्र और ईरान के संवर्धित यूरेनियम से जुड़े प्रबंधन जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार इन तकनीकी पहलुओं पर सहमति बनना ही बड़े समझौते की सफलता की असली परीक्षा होगी। व्हाइट हाउस ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशासन केवल बयानों पर नहीं बल्कि व्यावहारिक कार्यों पर भरोसा करता है और इसी आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। अमेरिका का कहना है कि बातचीत में प्रगति तभी मानी जाएगी जब जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम सामने आएंगे और समझौते का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा।
NEET-UG री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम को बड़ा झटका, दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 दिन के प्रतिबंध को दी वैधता; परीक्षा की शुचिता पर सख्त रुख

नई दिल्ली । देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले दिल्ली हाईकोर्ट के एक अहम फैसले ने परीक्षा सुरक्षा को लेकर सरकार की रणनीति को कानूनी मजबूती प्रदान कर दी है। अदालत ने केंद्र सरकार द्वारा मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगाए गए पांच दिनों के अस्थायी प्रतिबंध को उचित और आवश्यक बताते हुए उसे चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। इस फैसले को परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सार्वजनिक हित और परीक्षा की पवित्रता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। न्यायालय के अनुसार, यदि किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से परीक्षा संबंधी गोपनीय सूचनाओं के प्रसार, पेपर लीक या संगठित नकल की आशंका हो, तो संबंधित एजेंसियों को समय रहते प्रभावी कदम उठाने का अधिकार है। कोर्ट ने माना कि सरकार द्वारा लिया गया निर्णय एक निवारक कार्रवाई थी, जिसका उद्देश्य संभावित अनियमितताओं को रोकना था। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत को बताया कि हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग के कई मामले सामने आए हैं। सरकार का पक्ष था कि कुछ संगठित समूह परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसे में परीक्षा से ठीक पहले सीमित अवधि के लिए प्रतिबंध लगाना आवश्यक समझा गया ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को रोका जा सके। अदालत ने यह भी माना कि संबंधित आदेश विधिक प्रक्रिया के तहत जारी किया गया था और इसमें निर्धारित प्रावधानों का पालन किया गया। न्यायालय ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है, लेकिन जब मामला लाखों छात्रों के भविष्य और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की विश्वसनीयता से जुड़ा हो, तब नियामक संस्थाओं को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार प्राप्त है। सुनवाई के दौरान प्लेटफॉर्म की ओर से यह तर्क दिया गया कि पूरे मंच को ब्लॉक करना अत्यधिक कठोर कदम है और केवल संदिग्ध खातों या समूहों पर कार्रवाई की जानी चाहिए थी। हालांकि अदालत इस तर्क से सहमत नहीं हुई। न्यायालय ने कहा कि यदि संबंधित एजेंसियों को व्यापक स्तर पर दुरुपयोग की आशंका दिखाई देती है, तो परिस्थितियों के अनुरूप व्यापक कदम भी उठाए जा सकते हैं। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि प्रतिबंध स्थायी नहीं बल्कि सीमित अवधि के लिए लगाया गया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है। हाल के वर्षों में डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग ने परीक्षा संचालन को जहां अधिक सुविधाजनक बनाया है, वहीं साइबर दुरुपयोग और सूचना लीक जैसी चुनौतियां भी सामने आई हैं। ऐसे में प्रशासन और न्यायपालिका दोनों परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने पर विशेष जोर दे रहे हैं। इस निर्णय के बाद अब NEET-UG री-एग्जाम की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक एजेंसियां और अधिक सतर्क नजर आ रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और तकनीकी नियंत्रण के जरिए परीक्षा को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अदालत के फैसले ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि छात्रों के हित और परीक्षा की शुचिता से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
महाकाल की शरण में पहुंचे युजवेंद्र चहल, भस्म आरती में हुए शामिल; बोले- यह अनुभव शब्दों से परे

मध्यप्रदेश । भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल शुक्रवार सुबह धार्मिक नगरी उज्जैन पहुंचे, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। चहल ने तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती में भाग लिया और करीब दो घंटे तक मंदिर परिसर में रहकर पूजा-अर्चना की। उनके मंदिर पहुंचने की खबर मिलते ही श्रद्धालुओं और क्रिकेट प्रेमियों में उत्साह देखने को मिला। जानकारी के अनुसार, युजवेंद्र चहल सुबह करीब 3 बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर के नंदी हॉल में बैठकर बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती का दर्शन किया। आरती के दौरान चहल पूरी तरह भक्ति भाव में डूबे नजर आए और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते दिखाई दिए। महाकाल मंदिर की आध्यात्मिक और दिव्य वातावरण ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया। भस्म आरती में शामिल होने के बाद चहल ने नंदी महाराज का पूजन और अभिषेक किया। परंपरा के अनुसार उन्होंने नंदी जी के कान में अपनी मनोकामना भी कही। इसके बाद चांदी द्वार से भगवान महाकाल को जल अर्पित किया गया। मंदिर के पुजारियों के माध्यम से उन्होंने विशेष पूजा कर बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त किया। दर्शन और पूजन के उपरांत श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से युजवेंद्र चहल का सम्मान किया गया। मंदिर प्रशासन ने उन्हें बाबा महाकाल का प्रसाद और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। महाकाल के दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में युजवेंद्र चहल ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि उन्हें जो आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त हुआ है, उसे शब्दों में व्यक्त करना बेहद कठिन है। उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव हुआ। चहल ने यह भी कहा कि जब भी उन्हें बाबा महाकाल का बुलावा मिलेगा, वे दोबारा उज्जैन आकर दर्शन अवश्य करेंगे। गौरतलब है कि श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। क्रिकेट, फिल्म और राजनीति जगत की कई नामचीन हस्तियां भी समय-समय पर बाबा महाकाल के दरबार में मत्था टेकने आती रही हैं। अब इस कड़ी में भारतीय क्रिकेटर युजवेंद्र चहल का नाम भी जुड़ गया है।
जम्मू कश्मीर भारत का अविभाज्य अंग भारत ने वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के प्रचार को किया खारिज

नई दिल्ली । जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के बासठवें सत्र में भारत ने पाकिस्तान और इस्लामी सहयोग संगठन की ओर से जम्मू कश्मीर को लेकर की गई टिप्पणियों को पूरी तरह खारिज कर दिया। भारत ने स्पष्ट कहा कि जम्मू कश्मीर देश का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इस विषय पर किसी भी प्रकार का भ्रम या गलत व्याख्या स्वीकार नहीं की जा सकती। भारतीय प्रतिनिधि ने मंच पर कहा कि पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और गलत इरादों पर आधारित हैं तथा इनका उद्देश्य केवल अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करना है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से अपने घरेलू संकट और आतंकवाद को दिए जा रहे समर्थन से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे प्रचार का सहारा लेता रहा है। भारतीय पक्ष ने यह भी कहा कि इस्लामी सहयोग संगठन द्वारा की गई टिप्पणियां तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और यह एकतरफा दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। भारत ने यह दोहराया कि जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा था और है तथा हमेशा रहेगा और इस वास्तविकता को कोई भी बयान बदल नहीं सकता। भारतीय प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि असली मुद्दा वह क्षेत्र है जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में है और जिसे पाकिस्तान अधिकृत जम्मू कश्मीर के रूप में जाना जाता है। भारत ने आरोप लगाया कि वहां दशकों से लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है और सैन्य दबाव के कारण जनता की मूलभूत स्वतंत्रताओं को सीमित किया गया है। भारत ने कहा कि यह स्थिति किसी भी प्रकार से लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है और लगातार असंतोष और अशांति का कारण बनी हुई है। भारत ने आगे कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद को अपनी नीति के रूप में इस्तेमाल करता है और फिर खुद को आतंकवाद का शिकार बताने की कोशिश करता है। भारतीय प्रतिनिधि ने इस विरोधाभास को उजागर करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस तरह की दोहरी नीति लंबे समय से देखी जा रही है। भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे दावे वास्तविकता को नहीं बदल सकते और न ही तथ्यों को छिपा सकते हैं। सिंधु जल संधि पर टिप्पणी करते हुए भारत ने कहा कि यह समझौता उस समय की परिस्थितियों में हुआ था जब क्षेत्रीय स्थिति अलग थी लेकिन अब समय बदल चुका है और जल संसाधनों के प्रबंधन को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार देखना होगा। भारत ने संकेत दिया कि आतंकवाद और सहयोग एक साथ नहीं चल सकते और किसी भी प्रकार की साझेदारी तभी संभव है जब पारस्परिक विश्वास और जिम्मेदारी सुनिश्चित हो। भारत ने अपने वक्तव्य में यह भी स्पष्ट किया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति और स्थिरता के पक्ष में है लेकिन किसी भी प्रकार के झूठे प्रचार और राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित बयानों को स्वीकार नहीं करेगा। भारत ने दोहराया कि उसकी प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना है तथा वह इस दिशा में हर आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
तुलसी गबार्ड ने जारी किए कोविड बायोलैब्स दस्तावेज, एंथनी फौसी पर खुफिया जानकारी प्रभावित करने के गंभीर आरोप

नई दिल्ली । अमेरिका में कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड द्वारा कुछ ऐसे दस्तावेज सार्वजनिक किए गए हैं, जिन्हें पहले प्रतिबंधित और वर्गीकृत माना जाता था। इन दस्तावेजों के सामने आने के बाद अमेरिका की वैज्ञानिक, खुफिया और राजनीतिक संस्थाओं की भूमिका पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। गबार्ड के अनुसार, इन दस्तावेजों से संकेत मिलता है कि अमेरिकी-वित्त पोषित जैविक प्रयोगशालाओं से जुड़े मामलों की जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज के पूर्व निदेशक एंथनी फौसी ने कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर तैयार किए गए खुफिया आकलनों को प्रभावित किया और बाद में कांग्रेस के सामने दिए गए बयान में इस तरह के किसी भी हस्तक्षेप से इनकार किया। राष्ट्रीय खुफिया निदेशक कार्यालय द्वारा जारी इस रिपोर्ट को ट्रंप प्रशासन की उस व्यापक पहल का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसके तहत महामारी की उत्पत्ति और उससे जुड़े सरकारी निर्णयों की फिर से समीक्षा की जा रही है। इस प्रक्रिया में विभिन्न खुफिया अधिकारियों की गवाही और आंतरिक संचार दस्तावेजों का भी अध्ययन किया गया है। दस्तावेजों में दावा किया गया है कि जब कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर बहस तेज हुई कि यह प्राकृतिक रूप से फैला या चीन के वुहान स्थित प्रयोगशाला से जुड़ा है, तब कई स्तरों पर वैज्ञानिक और खुफिया समुदाय के बीच चर्चा हुई। इन बातचीतों में फौसी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं, जिसमें कहा गया कि उन्होंने कुछ वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों को खुफिया आकलन प्रक्रिया में सुझाव देने के लिए प्रभावित किया। गबार्ड ने आरोप लगाया कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग किया और खुफिया जानकारी के मूल्यांकन में हस्तक्षेप किया। उन्होंने यह भी कहा कि महामारी के दौरान लाखों लोगों की जान जाने के बाद अब जनता को पूरी सच्चाई और पारदर्शिता मिलनी चाहिए। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2021 में अमेरिकी खुफिया समुदाय के भीतर ईमेल और आंतरिक संवाद में फौसी को एक विशेषज्ञ के रूप में संदर्भित किया गया था, जिनकी सलाह को कई मामलों में महत्वपूर्ण माना गया। इसी वजह से कुछ आकलन प्रक्रियाओं में उनकी राय को शामिल करने पर चर्चा हुई। हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच यह भी सामने आया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां अभी तक कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर किसी एक निश्चित निष्कर्ष पर नहीं पहुंची हैं। कुछ एजेंसियों का मानना है कि वायरस प्राकृतिक रूप से जानवरों से मानवों में फैला, जबकि कुछ इसे प्रयोगशाला से जुड़ी दुर्घटना की संभावना मानते हैं। इस मुद्दे पर वैज्ञानिक समुदाय भी लंबे समय से विभाजित है और विभिन्न रिपोर्टें अलग-अलग निष्कर्षों की ओर इशारा करती रही हैं। नए दस्तावेजों के जारी होने के बाद यह बहस एक बार फिर तेज हो गई है और आने वाले समय में इस पर और राजनीतिक तथा वैज्ञानिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।
काशी की दिव्यता से अभिभूत हुए अमित सियाल: गंगा आरती में शामिल होकर बोले- मां गंगा के सान्निध्य में मिली अद्भुत आत्मिक शांति

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा और वेब सीरीज जगत के चर्चित अभिनेता अमित सियाल का हालिया वाराणसी दौरा चर्चा का विषय बना हुआ है। अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता ने इस बार आध्यात्मिक अनुभवों की तलाश में काशी का रुख किया, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में भाग लेकर मां गंगा का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान उन्होंने काशी की आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक वातावरण को करीब से महसूस किया। वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर प्रतिदिन आयोजित होने वाली गंगा आरती देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र मानी जाती है। इसी दिव्य आयोजन में अभिनेता अमित सियाल अपने सहयोगी पुनीत सिंह के साथ शामिल हुए। घाट पर पहुंचकर उन्होंने मां गंगा के समक्ष श्रद्धा भाव से नमन किया और वैदिक परंपराओं के अनुसार पूजन-अर्चन में भाग लिया। गंगा आरती के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय दिखाई दिया। घाट पर गूंजते शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार, दीपों की जगमगाहट और श्रद्धालुओं की आस्था ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इस भव्य दृश्य को देखकर अभिनेता भी गहराई से प्रभावित नजर आए। उन्होंने आरती के प्रत्येक चरण को श्रद्धा और एकाग्रता के साथ देखा तथा इस अनुभव को अपने जीवन के विशेष क्षणों में से एक बताया। अभिनेता ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। यहां का वातावरण मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मां गंगा के तट पर बैठकर और आरती का दर्शन करके उन्हें एक अलग तरह की आत्मिक संतुष्टि का अनुभव हुआ, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना आसान नहीं है। अपने प्रवास के दौरान अमित सियाल ने आयोजन से जुड़े लोगों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने आगंतुक पुस्तिका में अपने अनुभव दर्ज करते हुए लिखा कि काशी की यात्रा उनके लिए अत्यंत यादगार रही। उन्होंने उल्लेख किया कि मां गंगा की आरती का दिव्य स्वरूप मन को भीतर तक स्पर्श करता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है। साथ ही उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों की सराहना की। घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच भी अभिनेता की उपस्थिति को लेकर उत्साह देखा गया। हालांकि उन्होंने अपने दौरे को पूरी तरह धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव तक सीमित रखा तथा श्रद्धालुओं की तरह ही आरती में भाग लिया। इस दौरान उनका सम्मान भी किया गया और उन्हें पारंपरिक स्मृति चिह्न भेंट किए गए। अमित सियाल लंबे समय से फिल्मों और डिजिटल मंचों पर अपने प्रभावशाली अभिनय के लिए जाने जाते हैं। कई चर्चित वेब सीरीज और फिल्मों में अपने दमदार किरदारों के माध्यम से उन्होंने दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बनाई है। अभिनय के व्यस्त कार्यक्रमों के बीच उनका यह आध्यात्मिक प्रवास दर्शाता है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच भी लोग मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन की तलाश में धार्मिक स्थलों का रुख करते हैं। काशी की इस यात्रा ने अभिनेता को न केवल आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से उनके जुड़ाव को भी उजागर किया। गंगा आरती में उनकी सहभागिता और उससे जुड़ी भावनाएं अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
महाकाल नगरी में लापरवाही का वीडियो वायरल: ई-रिक्शा की छत पर बैठाकर घुमाया श्रद्धालु, पुलिस ने किया जब्त

मध्यप्रदेश । उज्जैन में महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के बीच यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन सतर्क है। इसी बीच एक ई-रिक्शा चालक की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने न केवल यातायात नियमों की अनदेखी की बल्कि एक यात्री की जान भी जोखिम में डाल दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और संबंधित चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। वायरल वीडियो में ई-रिक्शा क्रमांक 4778 दिखाई दे रहा है, जिसमें निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई गई थीं। इतना ही नहीं, एक यात्री वाहन की छत पर बैठकर सफर करता नजर आया। सड़क पर चल रहे अन्य लोगों ने इस खतरनाक दृश्य का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। वीडियो सामने आने के बाद उज्जैन यातायात पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की। जांच में वीडियो सही पाए जाने पर ई-रिक्शा को जब्त कर लिया गया और चालक के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की लापरवाही किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती थी। यातायात डीएसपी दिलीप परिहार ने बताया कि चालक द्वारा वाहन में क्षमता से अधिक सवारियां बैठाना और यात्री को छत पर बैठाकर परिवहन करना गंभीर नियम उल्लंघन है। इसी आधार पर कार्रवाई करते हुए वाहन का चालान तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही चालक का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शहर में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ऐसे मामलों को भी गंभीरता से लिया जा रहा है और दोषियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने श्रद्धालुओं और वाहन चालकों से अपील की है कि यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करें। कुछ समय बचाने या अधिक कमाई के लालच में नियमों की अनदेखी करना जानलेवा साबित हो सकता है। प्रशासन ने लोगों से आग्रह किया है कि वे ओवरलोड वाहनों में सफर न करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही दिखाई देने पर तुरंत इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।