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किडनी कैंसर पर जागरूकता जरूरी शराब और धूम्रपान बढ़ाते हैं जोखिम, समय पर पहचान से बच सकती है जान

नई द‍िल्‍ली । किडनी कैंसर दुनिया भर में तेजी से बढ़ती एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। यह वैश्विक स्तर पर 14वां सबसे आम कैंसर माना जाता है, जिसमें हर साल लाखों नए मामले सामने आते हैं और बड़ी संख्या में लोगों की मौत भी होती है। पुरुषों, बुजुर्गों और विकसित देशों में इसके मामले अधिक देखे जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी केवल इन्हीं वर्गों तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किडनी कैंसर का समय पर पता चल जाए तो सर्जरी, थेरेपी और अन्य आधुनिक उपचारों के माध्यम से मरीज की जान बचाई जा सकती है। समस्या यह है कि अधिकतर मामलों में इसका पता तब चलता है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है, जिससे इलाज कठिन हो जाता है। किडनी कैंसर को लेकर समाज में कई तरह की गलतफहमियां फैली हुई हैं, जो इसके समय पर निदान और उपचार में बाधा बन सकती हैं। एक आम धारणा यह है कि यह बीमारी केवल बुजुर्गों को होती है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार यह पूरी तरह सही नहीं है। हालांकि उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम बढ़ जाता है, लेकिन युवाओं में भी इसके मामले देखे जा रहे हैं। शोध बताते हैं कि 50 वर्ष से कम उम्र के लगभग एक तिहाई मामलों में यह बीमारी पाई जा सकती है। खराब जीवनशैली, धूम्रपान, शराब का सेवन, आनुवांशिक कारण और पहले से मौजूद किडनी संबंधी बीमारियां इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। एक और आम मिथक यह है कि पेशाब में खून आना हमेशा किडनी कैंसर का संकेत होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह लक्षण कई अन्य बीमारियों में भी दिख सकता है, जैसे यूटीआई या संक्रमण। हालांकि यदि कई दिनों तक पेशाब का रंग लाल, बरगंडी या गहरा दिखाई दे तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। लिंग को लेकर भी एक गलत धारणा है कि महिलाओं में किडनी कैंसर का खतरा अधिक होता है, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। पुरुषों में इसका जोखिम महिलाओं की तुलना में लगभग दोगुना पाया गया है। इसका एक कारण धूम्रपान और कार्यस्थल पर हानिकारक रसायनों के संपर्क में आना भी माना जाता है। हालांकि बार-बार होने वाले यूटीआई या संक्रमण से ग्रस्त महिलाओं को भी नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहना चाहिए। इसके अलावा यह भी एक मिथक है कि शराब का सेवन केवल लिवर को नुकसान पहुंचाता है, किडनी को नहीं। डॉक्टरों के अनुसार शराब और धूम्रपान दोनों ही किडनी कैंसर के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। ये आदतें शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कैंसर के विकास की संभावना को बढ़ा देती हैं। अनुमान के अनुसार, इन आदतों के कारण पुरुषों में लगभग 30 प्रतिशत और महिलाओं में लगभग 25 प्रतिशत किडनी कैंसर के मामले जुड़े हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी कैंसर से बचाव के लिए जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण कदम है। स्वस्थ जीवनशैली, धूम्रपान और शराब से दूरी, नियमित स्वास्थ्य जांच और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करना इस बीमारी के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है। सही समय पर पहचान और इलाज से इस गंभीर बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को मिली रफ्तार: उज्जैन में बन रहे 4 नए सबस्टेशन, 750 मेगावाट बिजली आपूर्ति का लक्ष्य

मध्यप्रदेश । उज्जैन शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर शहर के दौरे पर पहुंचेंगे। दोनों नेता विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ-साथ राज्य की महत्वपूर्ण विकास और जनकल्याण योजनाओं की समीक्षा भी करेंगे। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ओंकारेश्वर दौरे के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद इंदौर एयरपोर्ट पर उन्हें विदाई देंगे। इसके बाद वे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ इंदौर में निर्धारित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और वहां से उज्जैन के लिए रवाना होंगे। दोनों नेताओं के शाम करीब 4:30 बजे उज्जैन पहुंचने की संभावना है। उज्जैन पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। कार्यक्रमों में कपिला गौशाला का दौरा भी प्रस्तावित माना जा रहा है। प्रशासन ने दोनों नेताओं के दौरे को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए हैं। दौरे का मुख्य केंद्र प्रशासनिक संकुल भवन में आयोजित होने वाली दो महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकें रहेंगी। पहली बैठक शाम 6 बजे आयोजित होगी, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में चल रहे कार्यों और उपलब्धियों की समीक्षा की जाएगी। बैठक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स, कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई अभियान और जनभागीदारी के प्रयासों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद दूसरी बैठक पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) को लेकर होगी। इस बैठक में प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने, बिजली नुकसान कम करने, अधोसंरचना विकास और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने से जुड़े कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण योजना की समीक्षा में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी को देखते हुए इन बैठकों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि दोनों नेता प्रदेश में चल रही प्रमुख योजनाओं की प्रगति का आकलन करने के साथ आगामी कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा करेंगे। उज्जैन में होने वाली ये बैठकें न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि प्रदेश में स्वच्छता, शहरी विकास और ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं को गति देने की दिशा में भी अहम मानी जा रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन बैठकों से कई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई दिशा तय होगी।

कैमरे के सामने छलक पड़े बाघा के आंसू: मां की याद में भावुक हुए तन्मय वेकारिया, शूटिंग बीच में रोकनी पड़ी

नई दिल्ली । छोटे पर्दे के सबसे लोकप्रिय और लंबे समय से प्रसारित हो रहे कॉमेडी शो के सेट पर हाल ही में एक ऐसा भावुक क्षण देखने को मिला, जिसने कलाकारों और तकनीकी टीम के सदस्यों को भी भावुक कर दिया। दर्शकों को वर्षों से हंसाने वाले अभिनेता तन्मय वेकारिया, जो अपने चर्चित किरदार ‘बाघा’ के लिए जाने जाते हैं, शूटिंग के दौरान अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सके और कैमरे के सामने ही रो पड़े। इस अप्रत्याशित घटना के बाद कुछ समय के लिए शूटिंग रोकनी पड़ी। बताया जा रहा है कि एक भावनात्मक दृश्य की शूटिंग चल रही थी, जिसमें उनके किरदार से जुड़ा महत्वपूर्ण सीन फिल्माया जा रहा था। जैसे ही कैमरा चालू हुआ और कलाकारों ने अपने संवादों की तैयारी शुरू की, तन्मय वेकारिया अचानक भावुक हो गए। उनकी आंखों से आंसू बहने लगे और वह खुद को संभाल नहीं सके। सेट पर मौजूद कलाकार और क्रू सदस्य पहले तो स्थिति को समझ नहीं पाए, लेकिन जल्द ही स्पष्ट हो गया कि वह अपनी निजी भावनाओं से गुजर रहे हैं। उनकी हालत देखकर पूरी यूनिट चिंतित हो गई। शूटिंग को तत्काल रोक दिया गया ताकि अभिनेता को समय और मानसिक सहारा मिल सके। इस दौरान शो से जुड़े वरिष्ठ सदस्यों ने उन्हें संभालने का प्रयास किया और उन्हें भावनात्मक समर्थन दिया। माहौल कुछ समय के लिए पूरी तरह शांत और गंभीर हो गया। कुछ देर बाद जब तन्मय वेकारिया सामान्य हुए तो उन्होंने अपनी मां से जुड़ी कई यादों को साझा किया। उन्होंने बताया कि उनके अभिनय सफर में उनकी मां का योगदान और समर्थन बेहद महत्वपूर्ण रहा है। जब भी उन्हें दर्शकों की सराहना मिलती थी, उनकी मां सबसे अधिक खुश होती थीं। उनकी सफलता और लोकप्रियता को देखकर उनकी मां गर्व महसूस करती थीं और यही बातें उस समय उन्हें बार-बार याद आ रही थीं। अभिनेता ने बताया कि परिवार का भावनात्मक साथ किसी भी कलाकार के लिए सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने अपनी मां के साथ बिताए गए कई यादगार पलों को याद किया और कहा कि जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिनकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। यही वजह रही कि शूटिंग के दौरान अचानक भावनाएं उमड़ पड़ीं और वह खुद को संभाल नहीं पाए। यह घटना दर्शाती है कि कलाकार चाहे कितने भी लोकप्रिय क्यों न हों, वे भी सामान्य इंसानों की तरह भावनाओं और यादों से जुड़े रहते हैं। कैमरे के सामने हमेशा मुस्कुराते रहने वाले कलाकारों के जीवन में भी ऐसे क्षण आते हैं, जब निजी भावनाएं पेशेवर जिम्मेदारियों पर भारी पड़ जाती हैं। सेट पर मौजूद लोगों ने भी इस संवेदनशील पल को पूरी समझदारी और संवेदनशीलता के साथ संभाला। वर्षों से दर्शकों का मनोरंजन कर रहा यह शो आज भी भारतीय टेलीविजन का एक प्रमुख नाम बना हुआ है। शो के विभिन्न किरदारों ने दर्शकों के दिलों में विशेष स्थान बनाया है और तन्मय वेकारिया का किरदार भी उनमें से एक है। उनकी सरल अभिनय शैली और हास्य प्रस्तुति ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई है। हालिया घटना ने उनके व्यक्तित्व का एक भावनात्मक पक्ष सामने लाया है। यह केवल एक कलाकार के आंसुओं की कहानी नहीं, बल्कि उन यादों और रिश्तों की झलक है जो जीवन भर इंसान के साथ बने रहते हैं। दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने वाले अभिनेता का यह भावुक रूप लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का काम कर रहा है।

अक्षय कुमार ने वैष्णो देवी में टेका माथा ‘वेलकम टू द जंगल’ रिलीज से पहले फैंस में बढ़ा उत्साह

नई द‍िल्‍ली । बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार इन दिनों अपनी आगामी फिल्म वेलकम टू द जंगल को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। फिल्म की रिलीज से ठीक पहले अभिनेता आध्यात्मिक यात्रा पर निकले और जम्मू कश्मीर स्थित माता वैष्णो देवी के पवित्र दरबार पहुंचे जहां उन्होंने विधिवत दर्शन कर माता का आशीर्वाद लिया। अक्षय कुमार के वैष्णो देवी पहुंचने की खबर सामने आते ही श्रद्धालुओं और उनके फैंस में उत्साह का माहौल बन गया। त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित इस पवित्र मंदिर परिसर में जैसे ही अभिनेता नजर आए वहां मौजूद लोगों की भीड़ उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ी। कई प्रशंसकों ने उनके साथ सेल्फी लेने की कोशिश की जबकि कुछ लोग दूर से ही उनकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित नजर आए। इस दौरान अक्षय कुमार पारंपरिक सफेद कुर्ता पहने हुए दिखाई दिए जो उनकी सादगी और धार्मिक आस्था को दर्शा रहा था। मंदिर परिसर में प्रवेश करने से पहले अभिनेता बेस कैंप कटरा पहुंचे जहां से उन्होंने आगे की यात्रा शुरू की। अधिकारियों के अनुसार अक्षय कुमार ने पूरे श्रद्धा भाव के साथ गुफा मंदिर में दर्शन किए और कुछ समय तक पूजा अर्चना में भी शामिल रहे। पूरे दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ और अभिनेता की उपस्थिति को सुचारु रूप से संभाला जा सके। मंदिर प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित करने में सहयोग किया और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखा। अक्षय कुमार का यह धार्मिक दौरा उनकी फिल्म वेलकम टू द जंगल की रिलीज से ठीक पहले हुआ है जिससे फिल्म को लेकर चर्चा और भी बढ़ गई है। यह फिल्म मशहूर कॉमेडी फ्रेंचाइजी वेलकम का अगला हिस्सा बताई जा रही है जिसका निर्देशन अहमद खान कर रहे हैं। फिल्म में अक्षय कुमार के साथ कई बड़े सितारे नजर आने वाले हैं। इनमें सुनील शेट्टी दिशा पाटनी जैकलीन फर्नांडिस रवीना टंडन लारा दत्ता अरशद वारसी तुषार कपूर श्रेयस तलपड़े आफताब शिवदासानी और जैकी श्रॉफ जैसे नाम शामिल हैं। लगभग 34 कलाकारों की बड़ी स्टारकास्ट के कारण यह फिल्म पहले से ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म वेलकम टू द जंगल 26 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। उम्मीद की जा रही है कि यह फिल्म कॉमेडी और एंटरटेनमेंट के दम पर दर्शकों को फिर से उसी फ्रेंचाइजी का पुराना मजा देगी जिसके लिए वेलकम सीरीज जानी जाती है। अक्षय कुमार का वैष्णो देवी दर्शन न केवल उनकी व्यक्तिगत आस्था को दर्शाता है बल्कि उनके फैंस के बीच भी सकारात्मक संदेश देता है। रिलीज से पहले इस तरह की आध्यात्मिक यात्रा ने फिल्म को लेकर लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी है।

सीएम मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर आज उज्जैन में: स्वच्छ भारत मिशन और आरडीएसएस योजना की करेंगे समीक्षा

मध्यप्रदेश । उज्जैन शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर शहर के दौरे पर पहुंचेंगे। दोनों नेता विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के साथ-साथ राज्य की महत्वपूर्ण विकास और जनकल्याण योजनाओं की समीक्षा भी करेंगे। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ओंकारेश्वर दौरे के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद इंदौर एयरपोर्ट पर उन्हें विदाई देंगे। इसके बाद वे केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ इंदौर में निर्धारित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे और वहां से उज्जैन के लिए रवाना होंगे। दोनों नेताओं के शाम करीब 4:30 बजे उज्जैन पहुंचने की संभावना है। उज्जैन पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगे। कार्यक्रमों में कपिला गौशाला का दौरा भी प्रस्तावित माना जा रहा है। प्रशासन ने दोनों नेताओं के दौरे को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम किए हैं। दौरे का मुख्य केंद्र प्रशासनिक संकुल भवन में आयोजित होने वाली दो महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकें रहेंगी। पहली बैठक शाम 6 बजे आयोजित होगी, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन के तहत प्रदेश में चल रहे कार्यों और उपलब्धियों की समीक्षा की जाएगी। बैठक में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता से जुड़े विभिन्न प्रोजेक्ट्स, कचरा प्रबंधन, साफ-सफाई अभियान और जनभागीदारी के प्रयासों पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद दूसरी बैठक पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) को लेकर होगी। इस बैठक में प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था को मजबूत बनाने, बिजली नुकसान कम करने, अधोसंरचना विकास और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने से जुड़े कार्यों की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र की इस महत्वपूर्ण योजना की समीक्षा में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी को देखते हुए इन बैठकों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि दोनों नेता प्रदेश में चल रही प्रमुख योजनाओं की प्रगति का आकलन करने के साथ आगामी कार्ययोजनाओं पर भी चर्चा करेंगे। उज्जैन में होने वाली ये बैठकें न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि प्रदेश में स्वच्छता, शहरी विकास और ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं को गति देने की दिशा में भी अहम मानी जा रही हैं। अधिकारियों को उम्मीद है कि इन बैठकों से कई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी और आम जनता को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई दिशा तय होगी।

सुनील ग्रोवर की सादगी ने जीता दिल: नदी किनारे श्रद्धालुओं के बीच जमीन पर सोते दिखे अभिनेता, वायरल हुआ अनोखा अंदाज

नई दिल्ली । मनोरंजन जगत में अपनी बेहतरीन कॉमेडी और दमदार अभिनय से अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता सुनील ग्रोवर एक बार फिर चर्चा में हैं। हालांकि इस बार उनकी किसी फिल्म, शो या कॉमिक किरदार की वजह से नहीं, बल्कि उनकी सादगी और जमीन से जुड़े व्यक्तित्व ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में सुनील ग्रोवर आम श्रद्धालुओं के बीच नदी किनारे खुले आसमान के नीचे रात बिताते नजर आ रहे हैं, जिसे देखकर उनके प्रशंसक उनकी सरल जीवनशैली की जमकर सराहना कर रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि रात का समय है और नदी के तट पर कई श्रद्धालु विश्राम कर रहे हैं। इसी दौरान सुनील ग्रोवर भी एक साधारण चटाई पर लेटे हुए दिखाई देते हैं। उनके आसपास कोई विशेष व्यवस्था, सुरक्षा घेरा या सेलिब्रिटी जैसा माहौल नजर नहीं आता। पूरा दृश्य सामान्य लोगों के बीच एक आम व्यक्ति की तरह समय बिताने का संदेश देता है। यही वजह है कि यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो के साथ साझा किए गए संक्षिप्त कैप्शन ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। खुले आसमान, शांत वातावरण और साधारण जीवन के इस दृश्य ने लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने का काम किया है। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे जीवन की वास्तविक खुशियों और सादगी से जोड़कर देखा है। लोगों का मानना है कि लोकप्रियता और सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी यदि कोई कलाकार अपनी जड़ों से जुड़ा रहे, तो वह दर्शकों के और अधिक करीब पहुंच जाता है। वीडियो का एक अन्य आकर्षक पहलू इसका आध्यात्मिक माहौल है। पृष्ठभूमि में सुनाई देने वाला भक्ति संगीत पूरे दृश्य को शांत और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अभिनेता केवल आराम ही नहीं कर रहे, बल्कि आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव भी कर रहे हैं। श्रद्धालुओं के बीच बिना किसी विशेष पहचान के समय बिताना उनके व्यक्तित्व के एक अलग पक्ष को सामने लाता है। हालांकि अभिनेता ने यह जानकारी साझा नहीं की है कि यह वीडियो किस स्थान का है या किस धार्मिक स्थल के आसपास रिकॉर्ड किया गया है। इसके बावजूद वीडियो ने लोगों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। कई प्रशंसक इस स्थान के बारे में जानना चाहते हैं, जबकि अन्य लोग अभिनेता के सहज और सरल व्यवहार की प्रशंसा कर रहे हैं। सुनील ग्रोवर लंबे समय से भारतीय मनोरंजन उद्योग का लोकप्रिय चेहरा रहे हैं। कॉमेडी शो से लेकर फिल्मों और वेब सीरीज तक, उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया है। उनके विभिन्न किरदारों को आज भी लोग याद करते हैं। हाल के वर्षों में उन्होंने हास्य कलाकार के साथ-साथ एक गंभीर अभिनेता के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत की है। मनोरंजन की चमक-दमक से दूर इस तरह का दृश्य दर्शाता है कि लोकप्रियता के बावजूद व्यक्ति अपनी सादगी और मानवीय मूल्यों को बनाए रख सकता है। यही कारण है कि यह वीडियो केवल एक वायरल क्लिप नहीं, बल्कि एक सकारात्मक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। सुनील ग्रोवर का यह अंदाज उनके प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और सोशल मीडिया पर लगातार सराहना बटोर रहा है।

दिल्ली में बड़ा खुलासा बच्चे खरीद-बिक्री रैकेट का पर्दाफाश, 5 नवजात बरामद, अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े तार

नई द‍िल्‍ली । देश की राजधानी दिल्ली में एक सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है, जहां पुलिस ने नवजात बच्चों की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में अस्पताल की संचालिका सहित कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पुलिस ने पांच नवजात शिशुओं को सुरक्षित बरामद कर आश्रय गृह भेज दिया है। यह गिरोह पिछले लंबे समय से कई राज्यों में सक्रिय था और अब तक करीब 30 बच्चों की खरीद-फरोख्त कर चुका है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था। आरोपी राजस्थान और गुजरात के गरीब परिवारों को लालच देकर उनसे नवजात बच्चों को मात्र 10 से 15 हजार रुपये में खरीद लेते थे। इसके बाद इन्हीं बच्चों को बेऔलाद दंपतियों को 5 से 10 लाख रुपये तक में बेच दिया जाता था। इस पूरे रैकेट में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात तक के नेटवर्क जुड़े हुए थे। मामले का खुलासा तब हुआ जब जून के पहले सप्ताह में दिल्ली के पहाड़गंज इलाके से पुलिस को सूचना मिली कि एक महिला अलग-अलग बच्चों के साथ संदिग्ध रूप से घूम रही है। पुलिस ने एक नकली ग्राहक बनाकर महिला से संपर्क किया। सौदा तय होने और 20 हजार रुपये की टोकन मनी दिए जाने के बाद जब आरोपियों ने नवजात को सौंपा, तभी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ज्योति उर्फ कमलेश को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसी दिन उसकी साथी शालू और ललित को भी हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ के दौरान इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलती गईं और जांच बेगमपुर स्थित एक निजी अस्पताल तक पहुंची। पुलिस ने छापा मारकर अस्पताल की संचालिका डॉ. विवेकी को भी गिरफ्तार किया, जो इस गिरोह की कथित मास्टरमाइंड बताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया कि इस रैकेट में लैब टेक्निशियन और वाहन चालक की भूमिका भी अहम थी, जो बच्चों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और दस्तावेज तैयार करने में मदद करते थे। गिरोह का संचालन कई स्तरों पर किया जाता था। राजस्थान और गुजरात से बच्चों की व्यवस्था साएबा भाई घमर उर्फ कालिया करता था, जिन्हें कार चालक विपिन दिल्ली तक पहुंचाता था। इसके बाद अस्पताल में ही फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार किए जाते थे ताकि बच्चों को कानूनी रूप से गोद लेने जैसा दिखाया जा सके। इस नेटवर्क में लड़कियों की कीमत 4 से 5 लाख रुपये और लड़कों की कीमत 8 से 10 लाख रुपये तक तय थी। पुलिस ने आगे की कार्रवाई में ग्वालियर और पानीपत से भी कई खरीदारों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने लाखों रुपये देकर नवजात खरीदे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि बरामद पांच बच्चों में से चार आदिवासी समुदाय से हैं, जबकि एक बच्चा दिल्ली का बताया जा रहा है। सभी बच्चों की उम्र 27 दिन से लेकर चार महीने के बीच है। फिलहाल पुलिस बच्चों के जैविक माता-पिता की पहचान में जुटी है और पुष्टि के बाद उन्हें उनके असली परिवारों को सौंपा जाएगा। इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि कैसे संगठित अपराध गरीब और असहाय वर्ग को निशाना बनाकर मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराध को अंजाम देते हैं।

गोद भराई समारोह में जा रहे दो भाइयों की सड़क हादसे में मौत: ट्रैक्टर की टक्कर से परिवार की खुशियां मातम में बदलीं

मध्यप्रदेश । उज्जैन जिले में गुरुवार को एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। भांजे के घर आयोजित गोद भराई समारोह में शामिल होने जा रहे दो सगे भाइयों की ट्रैक्टर की टक्कर से मौत हो गई, जबकि उनके साथ बाइक चला रहा पोता गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे की खबर मिलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और जिस घर में उत्सव की तैयारियां चल रही थीं, वहां मातम का माहौल छा गया। जानकारी के अनुसार मरंडवा गांव निवासी 80 वर्षीय पीरूलाल मोथलिया और उनके छोटे भाई 75 वर्षीय भागीरथ मोथलिया अपने पोते अभिषेक के साथ बाइक से उज्जैन जा रहे थे। अभिषेक बाइक चला रहा था। तीनों नागझिरी क्षेत्र में रहने वाले अपने भांजे के यहां आयोजित गोद भराई कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकले थे। परिवार में इस कार्यक्रम को लेकर उत्साह का माहौल था, लेकिन रास्ते में हुए हादसे ने सब कुछ बदल दिया। बताया जा रहा है कि गांव से लगभग 25 से 30 किलोमीटर दूर मुख्य मार्ग पर पीछे से तेज रफ्तार में आए एक ट्रैक्टर ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक सवार तीनों लोग सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तत्काल घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। अस्पताल ले जाते समय पीरूलाल मोथलिया ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। वहीं गंभीर रूप से घायल भागीरथ मोथलिया को उज्जैन के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान देर शाम उनकी भी मौत हो गई। हादसे में घायल अभिषेक का इलाज जारी है और उसकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। डॉक्टर उसकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। परिजनों ने बताया कि पीरूलाल मोथलिया खेती-किसानी का कार्य करते थे, जबकि भागीरथ मोथलिया मध्य प्रदेश विद्युत मंडल (एमपीईबी) से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। परिवार सामाजिक और शासकीय क्षेत्र में भी सक्रिय रहा है। परिवार का एक सदस्य वर्तमान में उज्जैन में पटवारी के पद पर कार्यरत है। हादसे की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंच गए। शुक्रवार सुबह दोनों मृतकों का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। अंतिम संस्कार के लिए दोनों शवों को उनके पैतृक गांव ले जाया गया, जहां पूरे गांव ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। पुलिस ने मामले में दुर्घटना का प्रकरण दर्ज कर लिया है और फरार ट्रैक्टर चालक की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हादसे के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को दुर्घटना का प्रमुख कारण माना जा रहा है। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। एक परिवार जो खुशियों के समारोह में शामिल होने निकला था, वह कुछ ही पलों में अपनों को खोने के गहरे दुख में डूब गया।

सोना महंगा, आयात घटा और राजस्व बढ़ा भारत की अर्थव्यवस्था में नीतिगत बदलावों का बड़ा प्रभाव

नई द‍िल्‍ली । भारत की आर्थिक नीतियों और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव का असर अब स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार देश में सोने के आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पिछले कुछ समय में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोना खरीद को सीमित करने की अपील के बाद देखने को मिली है। सरकार ने 13 मई को सोने पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था, जिसका सीधा प्रभाव आयात मात्रा पर पड़ा है। पहले जहां मासिक आयात 75 से 100 टन के बीच रहता था, वहीं अब यह घटकर लगभग 25 से 30 टन रह गया है। हालांकि मात्रा में भारी गिरावट के बावजूद सोने के मूल्य में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसकी मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की ऊंची कीमतें बताई जा रही हैं। मई महीने में भारत का सोना आयात सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 3.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया। आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल और मई की अवधि में सोने का कुल आयात 60 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 9.04 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने लगभग 71.98 अरब डॉलर मूल्य का सोना आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 24 प्रतिशत अधिक है। हालांकि इस दौरान मात्रा के लिहाज से आयात में 4.76 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 721.03 टन पर आ गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि सोने की कीमतों में वृद्धि ने आयात के मूल्य को बढ़ा दिया है जबकि वास्तविक खपत में कमी आई है। भारत के कुल आयात में सोने की हिस्सेदारी पांच प्रतिशत से अधिक बनी हुई है, जो यह दर्शाता है कि यह अब भी देश की अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण घटक है। सरकार के इन कदमों का उद्देश्य सोने के आयात को नियंत्रित करना और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव को कम करना माना जा रहा है। इसी बीच, देश के टैक्स संग्रह में भी मजबूत वृद्धि देखने को मिली है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार शुद्ध आयकर संग्रह लगभग 15 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। इसमें कॉरपोरेट और गैर-कॉरपोरेट दोनों प्रकार के कर शामिल हैं। कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो 2.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 8 प्रतिशत बढ़कर 2.94 लाख करोड़ रुपये हो गया है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में 89,026 करोड़ रुपये के रिफंड भी जारी किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में मामूली वृद्धि दर्शाते हैं। वहीं सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 12 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 6.10 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि एक ओर जहां सोने के आयात में सरकार की नीतियों और वैश्विक कीमतों के कारण गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर कर संग्रह में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था में नीतिगत संतुलन और वित्तीय अनुशासन की ओर संकेत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यदि यही रुझान जारी रहता है तो यह देश की आर्थिक स्थिरता और विकास दर को और मजबूती दे सकता है।

NEET-UG री-एग्जाम के लिए NTA का सख्त एक्शन प्लान, बायोमेट्रिक जांच, ड्रेस कोड और सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य

नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 की पुनर्परीक्षा को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। परीक्षा की पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस बार कई प्रक्रियाओं को और अधिक सख्त बनाया गया है। एजेंसी ने उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर समय से पहुंचने, निर्धारित नियमों का पालन करने और सुरक्षा जांच में पूर्ण सहयोग करने की सलाह दी है। पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित की जानी है और इसके लिए देशभर के परीक्षा केंद्रों पर विशेष प्रबंध किए गए हैं। एजेंसी के अनुसार प्रत्येक अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश से पहले अनिवार्य सुरक्षा जांच और बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा। यह व्यवस्था परीक्षा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की संभावना को रोकने के उद्देश्य से लागू की गई है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया परीक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी, लेकिन यदि किसी तकनीकी समस्या, मशीन में खराबी, नेटवर्क संबंधी दिक्कत या शारीरिक कारणों से किसी अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा नहीं हो पाता है तो उसे परीक्षा देने से नहीं रोका जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित उम्मीदवार को निर्धारित घोषणा पत्र भरना होगा और बाद में प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान किसी अभ्यर्थी को अनावश्यक परेशानी न हो। एजेंसी का मानना है कि सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि योग्य उम्मीदवार किसी तकनीकी कारण से परीक्षा से वंचित न रह जाएं। ड्रेस कोड को लेकर भी विस्तृत सलाह जारी की गई है। अभ्यर्थियों को हल्के और आरामदायक कपड़े पहनकर परीक्षा केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई है। गर्मी और मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसे वस्त्र पहनने को कहा गया है जिनकी जांच आसानी से की जा सके। यदि कोई उम्मीदवार पूर्ण बाजू वाले कपड़े या अतिरिक्त परिधान पहनता है, तो उसे समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचना होगा ताकि सुरक्षा जांच प्रक्रिया समय पर पूरी की जा सके। धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का सम्मान करते हुए कुछ विशेष वस्त्रों और प्रतीकों को अनुमति दी गई है। हालांकि ऐसे अभ्यर्थियों को अतिरिक्त सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ सकता है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि सभी व्यवस्थाएं सुरक्षा मानकों के अनुरूप लागू की जाएंगी और किसी भी उम्मीदवार के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा। परीक्षा केंद्र में ले जाने वाली वस्तुओं को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उम्मीदवार केवल पारदर्शी पानी की बोतल और निर्धारित प्रारूप में रखे प्रवेश पत्र को ही अपने साथ ले जा सकेंगे। मोबाइल फोन, स्मार्ट घड़ी, ब्लूटूथ डिवाइस, ईयरफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। इसके अलावा धातु से बनी भारी वस्तुएं, बड़े आभूषण और अन्य संदिग्ध सामग्री भी केंद्र में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। फुटवियर को लेकर भी विशेष सलाह दी गई है। अभ्यर्थियों को साधारण चप्पल या कम ऊंचाई वाले फुटवियर पहनने की सलाह दी गई है। ऊंची एड़ी वाले जूते या जटिल डिजाइन वाले फुटवियर की अतिरिक्त जांच की जा सकती है, जिससे प्रवेश प्रक्रिया में समय अधिक लग सकता है। परीक्षा निर्धारित समयानुसार दोपहर 2 बजे शुरू होकर शाम 5 बजकर 15 मिनट तक चलेगी। विशेष श्रेणी के पात्र अभ्यर्थियों को नियमानुसार अतिरिक्त समय भी उपलब्ध कराया जाएगा। एजेंसी ने सभी उम्मीदवारों से अपील की है कि वे अंतिम समय की जल्दबाजी से बचें और परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से पहले पहुंचकर सभी औपचारिकताएं पूरी कर लें। विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया घटनाक्रमों और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर बढ़ी संवेदनशीलता के बीच यह व्यवस्था परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। सख्त सुरक्षा, तकनीकी निगरानी और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के माध्यम से परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।