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रविवार को कुछ देर के लिए गायब हो जाएगी परछाई: 21 जून को दिखेगा ‘जीरो शैडो डे’, साल का सबसे बड़ा दिन भी होगा

मध्यप्रदेश । आसमान और खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए 21 जून का दिन बेहद खास रहने वाला है। इस दिन उज्जैन सहित कर्क रेखा के आसपास स्थित क्षेत्रों में एक अनोखी खगोलीय घटना देखने को मिलेगी, जिसे ‘शून्य छाया दिवस’ यानी ‘जीरो शैडो डे’ कहा जाता है। इस दौरान कुछ क्षणों के लिए लोगों और वस्तुओं की परछाई लगभग गायब हो जाएगी। यह नजारा हर दिन देखने को नहीं मिलता, बल्कि पृथ्वी और सूर्य की विशेष स्थिति के कारण साल में चुनिंदा अवसरों पर ही दिखाई देता है। उज्जैन की जीवाजी वेधशाला के अनुसार यह दुर्लभ घटना 21 जून को दोपहर 12 बजकर 28 मिनट पर दिखाई देगी। इस समय सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध में अपनी अधिकतम उत्तरी स्थिति के करीब होगा और उसकी किरणें लगभग सीधी धरती पर पड़ेंगी। परिणामस्वरूप खड़ी वस्तुओं की छाया बेहद छोटी होकर लगभग शून्य हो जाएगी। वेधशाला में शंकु यंत्र के माध्यम से इस खगोलीय घटना का प्रत्यक्ष अवलोकन भी कराया जाएगा। 21 जून को केवल जीरो शैडो डे ही नहीं, बल्कि वर्ष का सबसे बड़ा दिन भी माना जाता है। इस दिन सूर्य की स्थिति ऐसी होती है कि उत्तरी गोलार्द्ध में दिन की अवधि सबसे अधिक और रात सबसे छोटी होती है। उज्जैन में सूर्योदय सुबह 5:42 बजे और सूर्यास्त शाम 7:16 बजे होगा। यानी दिन की कुल अवधि 13 घंटे 34 मिनट रहेगी, जबकि रात केवल 10 घंटे 26 मिनट की होगी। खगोलविदों के अनुसार पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है और सूर्य की परिक्रमा करती है। इसी कारण वर्षभर सूर्य की स्थिति बदलती हुई दिखाई देती है। 21 जून को सूर्य कर्क रेखा के सबसे निकट पहुंच जाता है। चूंकि उज्जैन कर्क रेखा के करीब स्थित है, इसलिए यहां सूर्य की किरणें लगभग लंबवत पड़ती हैं। यही वजह है कि दोपहर के समय परछाई सिकुड़कर लगभग समाप्त हो जाती है। इस खगोलीय घटना का वैज्ञानिक महत्व भी काफी बड़ा है। जीरो शैडो डे पृथ्वी की गति, उसकी धुरी के झुकाव और सूर्य की स्थिति को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है। स्कूलों, कॉलेजों और विज्ञान प्रेमियों के लिए यह दिन एक प्राकृतिक प्रयोगशाला की तरह होता है, जहां खगोलीय सिद्धांतों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और समझा जा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार 21 जून के बाद सूर्य की आभासी गति दक्षिण दिशा की ओर दिखाई देने लगेगी, जिसे दक्षिणायन कहा जाता है। इसके साथ ही उत्तरी गोलार्द्ध में दिन धीरे-धीरे छोटे और रातें लंबी होने लगेंगी। आगामी 23 सितंबर को शरद विषुव के अवसर पर दिन और रात लगभग बराबर हो जाएंगे। इस तरह 21 जून केवल कैलेंडर का एक दिन नहीं, बल्कि प्रकृति और ब्रह्मांड के अद्भुत संतुलन को करीब से देखने और समझने का दुर्लभ अवसर भी है।

राज्यसभा चुनाव में NDA का दबदबा, 27 में 19 सीटें जीतकर ऊपरी सदन में बढ़ाई ताकत; INDIA गठबंधन को बड़ा राजनीतिक झटका

नई दिल्ली । 10 राज्यों की 27 राज्यसभा सीटों पर हुए चुनाव के नतीजों ने देश की संसदीय राजनीति में नया समीकरण खड़ा कर दिया है। चुनाव परिणामों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए 19 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि विपक्षी INDIA गठबंधन को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। इन नतीजों ने संसद के उच्च सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति को और अधिक मजबूत कर दिया है। राज्यसभा चुनाव के परिणामों को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इनके जरिए आगामी विधायी और राजनीतिक रणनीतियों की दिशा तय होने की संभावना है। चुनाव परिणामों के बाद 245 सदस्यीय राज्यसभा में NDA की संख्या बढ़कर 152 तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा गठबंधन को पहले की तुलना में अधिक प्रभावशाली स्थिति प्रदान करता है और महत्वपूर्ण विधेयकों पर उसकी रणनीतिक क्षमता को मजबूत बनाता है। विपक्षी INDIA गठबंधन को इस चुनाव में केवल पांच सीटों पर सफलता मिली। चुनाव से पहले विपक्ष को कुछ राज्यों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन अंतिम परिणाम उसके पक्ष में नहीं रहे। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम विपक्षी एकजुटता और चुनावी प्रबंधन के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जाएगा। चुनाव के सबसे चर्चित परिणामों में झारखंड का नाम प्रमुखता से सामने आया। यहां राज्यसभा की दोनों सीटों पर मुकाबला राजनीतिक हलकों में विशेष चर्चा का विषय बना रहा। एक सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की, जबकि दूसरी सीट पर NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार ने विपक्षी खेमे को बड़ा झटका देते हुए विजय हासिल की। इस परिणाम ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दिया है और विपक्षी दलों के भीतर भी रणनीतिक समीक्षा की जरूरत महसूस की जा रही है। झारखंड का परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विधानसभा में संख्याबल को देखते हुए विपक्षी गठबंधन को बेहतर स्थिति में माना जा रहा था। इसके बावजूद चुनावी गणित और समर्थन जुटाने की रणनीति ने अंतिम परिणाम को प्रभावित किया। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इस जीत ने यह संकेत दिया है कि राज्यसभा चुनावों में केवल संख्याबल ही नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रबंधन भी निर्णायक भूमिका निभाता है। मध्य प्रदेश में भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला। यहां संभावित मुकाबले की चर्चा के बीच विपक्षी उम्मीदवार की उम्मीदवारी निरस्त हो जाने के बाद एक सीट पर सत्तारूढ़ दल को निर्विरोध लाभ मिला। इससे NDA के कुल प्रदर्शन को अतिरिक्त मजबूती मिली और राज्यसभा में उसकी संख्या बढ़ाने में सहायता मिली। चुनाव परिणामों के बाद अब राजनीतिक चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि उच्च सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन की बढ़ती ताकत का असर आगामी संसदीय सत्रों पर किस प्रकार पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि NDA को कुछ क्षेत्रीय और तटस्थ दलों का समर्थन मिलता रहा तो कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों को पारित कराने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक आसान हो सकती है। राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आगामी राष्ट्रीय राजनीति के संकेत भी देता है। राज्यसभा में मजबूत स्थिति किसी भी सरकार के लिए विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में हालिया परिणामों को सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए रणनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इन नतीजों के बाद विपक्षी दलों को अपने संगठनात्मक ढांचे, समन्वय और चुनावी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है। वहीं NDA के लिए यह परिणाम राजनीतिक आत्मविश्वास बढ़ाने वाला साबित हुआ है, जिसने उच्च सदन में उसकी स्थिति को पहले से अधिक मजबूत कर दिया है।

MP के 81 लाख किसानों को मिलेगी 1,634 करोड़ की सौगात: पीएम किसान की 23वीं किस्त कल जारी, शिवराज बोले- खरीफ से पहले बड़ी राहत

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 23वीं किस्त शुक्रवार, 20 जून को किसानों के खातों में पहुंच जाएगी। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से देशभर के किसानों के लिए 23वीं किस्त जारी करेंगे। इसके तहत मध्यप्रदेश के 81.67 लाख किसानों के खातों में 1,634 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि खरीफ सीजन की शुरुआत से ठीक पहले मिलने वाली यह आर्थिक सहायता किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे बीज, खाद और अन्य कृषि कार्यों के लिए किसानों को समय पर आर्थिक मदद मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से अब तक देशभर के किसानों को 22 किस्तों में लगभग 4.28 लाख करोड़ रुपए की सहायता सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचाई जा चुकी है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार 23वीं किस्त के तहत देश के करीब 9 करोड़ किसानों के खातों में 18,800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि हस्तांतरित की जाएगी। इस अवसर को खास बनाने के लिए पूरे देश में “पीएम किसान उत्सव दिवस” मनाया जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्रों, आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और पंचायत स्तर तक विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अनुमान है कि लगभग 4 करोड़ किसान विभिन्न स्थानों से प्रधानमंत्री का संबोधन सुनेंगे और कार्यक्रमों में भाग लेंगे। पश्चिम बंगाल के किसानों को लेकर भी शिवराज सिंह चौहान ने महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहले राज्य के किसानों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था, लेकिन अब वहां के 44.42 लाख किसानों को भी पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिलेगा। इससे छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। कृषि मंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर दलहन खरीदी को लेकर भी संकेत दिए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने पीएम-आशा योजना के तहत उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और गुजरात को मूंग, उड़द और मसूर की खरीदी एमएसपी पर करने की अनुमति दे दी है। मध्यप्रदेश के मामले में राज्य सरकार के साथ चर्चा जारी है और जल्द ही इस संबंध में फैसला लिया जाएगा। इस दौरान मानसून और अल नीनो के संभावित प्रभाव पर भी चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार मौसम की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मध्यप्रदेश के 16 जिलों में अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए विशेष कंटीजेंसी प्लान तैयार किया जा रहा है। कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने, वैकल्पिक खेती के विकल्प उपलब्ध कराने और बेहतर बीज उपलब्ध कराने की रणनीति पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सामान्य से कम बारिश होती है या वर्षा में लंबा अंतराल आता है, तो किसानों को नुकसान से बचाने के लिए जिला स्तर पर विशेष योजनाएं लागू की जाएंगी। साथ ही पराली प्रबंधन को लेकर भी राज्यों को पहले से आवश्यक तैयारी करने के निर्देश दिए गए हैं। राजनीतिक सवालों पर भी शिवराज सिंह चौहान ने अपनी शैली में जवाब दिया। कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के सत्याग्रह से जुड़े सवाल पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।” उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। कुल मिलाकर, पीएम किसान की 23वीं किस्त किसानों के लिए आर्थिक राहत लेकर आ रही है, वहीं सरकार खरीफ सीजन, मानसून और संभावित मौसमीय चुनौतियों से निपटने के लिए भी व्यापक तैयारी में जुटी हुई है।

NEET-UG 2026 के लिए हाई अलर्ट: सेंटरों पर CCTV-जैमर, डॉक्टर और टाइम डिस्प्ले की व्यवस्था, छात्रों के लिए स्पेशल ट्रेन भी चलेगी

मध्यप्रदेश । देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए मध्य प्रदेश में व्यापक तैयारियां की गई हैं। 21 जून को आयोजित होने वाली इस परीक्षा को लेकर जिला प्रशासन, पुलिस और रेलवे समेत सभी संबंधित विभाग हाई अलर्ट पर हैं। प्रदेश के सभी परीक्षा केंद्रों पर CCTV कैमरे और सिग्नल जैमर लगाए जा रहे हैं, ताकि किसी भी प्रकार की नकल या तकनीकी गड़बड़ी की संभावना को खत्म किया जा सके। राजधानी भोपाल में इस बार 13,774 परीक्षार्थी परीक्षा देंगे। इसके लिए 32 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। जिला कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने सभी केंद्र प्रभारियों के साथ वन-टू-वन बैठक कर परीक्षा प्रबंधन की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि कई बार एक जैसे नाम वाले केंद्रों के कारण अभ्यर्थी भ्रमित हो जाते हैं, इसलिए केंद्रों के नाम और लोकेशन स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं। परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए दिशा-सूचक बोर्ड भी लगाए जाएंगे। परीक्षार्थियों को समय का सही अंदाजा रहे, इसके लिए प्रत्येक केंद्र के बाहर बड़ी डिजिटल घड़ी लगाई जाएगी। वहीं किसी छात्र की तबीयत खराब होने की स्थिति में तुरंत उपचार उपलब्ध कराने के लिए डॉक्टर और मेडिकल टीम भी तैनात रहेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा के दौरान स्वास्थ्य और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भोपाल के अलावा छिंदवाड़ा में 4,303, गुना में 1,839, विदिशा में 1,709, नर्मदापुरम में 1,283 और अशोकनगर में 865 अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने की संभावना है। ग्वालियर में 25 केंद्रों पर करीब 5 हजार छात्र परीक्षा देंगे। यहां बायोमैट्रिक अटेंडेंस, CCTV निगरानी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोपहर 1 बजे के बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इंदौर, भोपाल और रतलाम के बीच विशेष ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। यह ट्रेन 20 जून को संचालित होगी, जिससे विभिन्न शहरों से आने वाले छात्र समय पर अपने परीक्षा केंद्र तक पहुंच सकेंगे। ट्रेन में 13 स्लीपर, 2 जनरल और 2 एसएलआर कोच सहित कुल 17 कोच लगाए जाएंगे। जबलपुर में पहली बार परीक्षार्थियों के लिए विशेष बस सेवा शुरू की जा रही है। यहां 23 परीक्षा केंद्रों पर 10 हजार से अधिक छात्र परीक्षा देंगे। अभिभावकों के लिए शेड, बैठने की व्यवस्था, कूलर, पंखे और अस्थायी कैंटीन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। सभी केंद्रों पर 20 जून को सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं का ट्रायल भी किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रश्नपत्रों की आवाजाही बेहद सुरक्षित तरीके से होगी। सुरक्षा व्यवस्था में वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी रहेगी और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए विशेष कंट्रोल रूम भी सक्रिय रहेगा। कुल मिलाकर NEET-UG 2026 को लेकर प्रदेश में अभूतपूर्व तैयारियां की गई हैं, ताकि लाखों छात्रों का भविष्य तय करने वाली यह परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, सुरक्षित और व्यवस्थित माहौल में संपन्न हो सके।

एक्सेंचर के कमजोर आउटलुक से आईटी सेक्टर में मची भारी बिकवाली, निफ्टी आईटी 6 प्रतिशत से अधिक टूटा, इंफोसिस-टीसीएस समेत दिग्गज शेयरों में बड़ी गिरा

नई दिल्ली । वैश्विक प्रौद्योगिकी सेवा क्षेत्र से आई कमजोर संकेतों ने भारतीय शेयर बाजार के आईटी सेक्टर को बड़ा झटका दिया है। दुनिया की प्रमुख टेक्नोलॉजी और कंसल्टिंग कंपनियों में शामिल एक्सेंचर द्वारा अपने वित्त वर्ष 2026 के राजस्व वृद्धि अनुमान में कटौती किए जाने के बाद भारतीय आईटी शेयरों में व्यापक बिकवाली देखने को मिली। इसके परिणामस्वरूप निफ्टी आईटी इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 6 प्रतिशत से अधिक टूट गया और पूरे बाजार में नकारात्मक माहौल बन गया। शुक्रवार के कारोबार में आईटी सेक्टर सबसे अधिक दबाव में रहा। निवेशकों ने वैश्विक तकनीकी खर्च में संभावित सुस्ती और कॉरपोरेट ग्राहकों द्वारा खर्च कम किए जाने की आशंकाओं के चलते आईटी शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी। इसका सीधा असर भारतीय टेक कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया, जिनमें दिनभर भारी उतार-चढ़ाव और गिरावट दर्ज की गई। बाजार खुलने के कुछ ही समय बाद निफ्टी आईटी इंडेक्स 1,800 अंकों से अधिक फिसलकर अपने दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला, लेकिन इंडेक्स फिर भी भारी नुकसान के साथ कारोबार करता रहा। यह गिरावट इस बात का संकेत मानी जा रही है कि वैश्विक मांग को लेकर निवेशकों की चिंता अभी समाप्त नहीं हुई है। आईटी कंपनियों में सबसे अधिक दबाव इंफोसिस के शेयरों पर दिखाई दिया, जिनमें तेज गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक जैसे बड़े नाम भी बिकवाली की चपेट में रहे। मिडकैप आईटी कंपनियां भी इस दबाव से अछूती नहीं रहीं। पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, एलटीआईमाइंडट्री, कोफोर्ज, केपीआईटी टेक्नोलॉजीज, टाटा एल्क्सी और एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज जैसे शेयरों में भी उल्लेखनीय कमजोरी देखने को मिली। विश्लेषकों का मानना है कि इस गिरावट की प्रमुख वजह एक्सेंचर का संशोधित आउटलुक है। कंपनी ने तीसरी तिमाही में मजबूत राजस्व दर्ज किया, लेकिन ग्राहकों के खर्च को लेकर बनी अनिश्चितता और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के प्रभाव को देखते हुए पूरे वर्ष के लिए विकास अनुमान कम कर दिया। इसके अलावा कंपनी की नई बुकिंग्स में भी पिछले वर्ष की तुलना में कमी दर्ज की गई, जिसने निवेशकों की चिंता को और बढ़ा दिया। भारतीय आईटी कंपनियों की अमेरिकी डिपॉजिटरी रसीदों में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे घरेलू बाजार में नकारात्मक धारणा और मजबूत हुई। विदेशी बाजारों में आई इस गिरावट का असर भारतीय निवेशकों की रणनीति पर भी पड़ा और उन्होंने आईटी शेयरों में मुनाफावसूली तथा बिकवाली को प्राथमिकता दी। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियों में आईटी क्षेत्र को लेकर सतर्क दृष्टिकोण बनाए रखना आवश्यक है। हालांकि हालिया गिरावट के बाद कई कंपनियों के मूल्यांकन आकर्षक स्तरों पर पहुंचने लगे हैं, लेकिन यदि आने वाली तिमाहियों में आय वृद्धि के अनुमान और कमजोर होते हैं तो इस सेक्टर पर दबाव लंबे समय तक बना रह सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार भारतीय आईटी कंपनियों का मूल्यांकन अभी भी कई वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में ऊंचा माना जाता है। ऐसे में निवेशक भविष्य की आय, ऑर्डर बुक और वैश्विक मांग के संकेतों पर विशेष नजर बनाए हुए हैं। आगामी तिमाहियों के कारोबारी प्रदर्शन और प्रबंधन की टिप्पणियां इस क्षेत्र की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। आईटी सेक्टर में आई इस बड़ी गिरावट का असर व्यापक बाजार पर भी दिखाई दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे तथा निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता कमजोर होती नजर आई। ऐसे माहौल में बाजार की निगाहें अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, ब्याज दरों की दिशा और तकनीकी सेवाओं की मांग में संभावित सुधार पर टिकी हुई हैं।

CM MOHAN YADAV ACTION: ‘सबको 40 लाख, मुझे सिर्फ 16 लाख’… महिला की फरियाद सुन CM मोहन यादव ने लिया तुरंत एक्शन

CM Mohan Yadav

CM MOHAN YADAV ACTION: इंदौर। इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बड़ा गणपति स्थित शासकीय शारदा कन्या विद्यालय के कार्यक्रम में पहुंचे। इसी दौरान कार्यक्रम में कुछ ऐसी घटना हुई जिसने सबका ध्यान अपनी ओर खिंच लिया। दरअसल बीच प्रोग्राम में एक महिला रोते अपनी मुआवजे की शिकायत लेकर उनके पास पहुंच गई। इसपर मुख्यमंत्री ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अधिकारीयों को त्वरित करवाई के निर्देश दिए। 97 साल की उम्र में भी जिंदगी को खुलकर जीती थीं जोहरा सहगल, बेबाक बयान ने बटोरी थीं सुर्खियां महिला ने रोते हुए सुनाई आपबीती पीड़ित महिला रोते हुए सीएम के पास पहुंची और बताया कि मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए उनके इलाके में करीब 16 मकानों को तोड़ा जा रहा है जिसमें महिला का माकन भी शामिल है। उनका कहना है कि उसके आसपास के सभी मकान मालिकों को मुआवजा मिल गया है लेकिन उसके साथ मुआवजे में भेदभाव किया गया है। महिला पिंकी वर्मा का आरोप है कि आस-पास के अन्य 15 मकान मालिकों को प्रति मकान लगभग ₹40 लाख का मुआवजा दिया गया है, वहीं मेट्रो प्रबंधन के अधिकारी उन्हें उनके घर के बदले केवल ₹16 लाख ही देना चाहते हैं। GWALIOR FRAUD WIFE CASE: शादी के 1 महीने बाद ही पति के घर से भागी पत्नी, बोली- 5 लाख नहीं दिए तो जिस्मफरोशी का आरोप लगाउंगी सीएम ने दिए जांच के निर्देश महिला का कहना है कि वह मुआवजे की मांग को लेकर तीन-चार महीने से अधिकारीयों के चक्कर काट रही है। लेकिन कोई भी सुनने को तैयार नहीं है, इसी से परेशान होकर उसने मुख्यमंत्री के सामने अपनी गुहार लगाई। महिला की बात सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कलेक्टर को बुलाकर मामले की जांच करने और पीड़िता को न्याय दिलाने के निर्देश दिए। महिला की मांग पर सीएम ने उसके आवेदन पर लिखित टिप्पणी दर्ज कर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

MP के खिलाड़ियों को बड़ी सौगात: पुलिस में होगी सीधी भर्ती, 10 SI और 50 आरक्षक पदों पर मिलेगा मौका

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी सौगात दी है। अब खेल मैदान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी हासिल करने का सुनहरा अवसर मिलेगा। प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सीधी भर्ती से संबंधित नियमों में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत उप निरीक्षक (SI) के 10 और आरक्षक के 50 पदों पर खिलाड़ियों की सीधी भर्ती की जाएगी। खास बात यह है कि वर्ष 2021 के बाद पहली बार खिलाड़ियों के लिए यह भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू की जा रही है। सरकार का उद्देश्य खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और उन्हें खेल उपलब्धियों के आधार पर सरकारी सेवा में अवसर प्रदान करना है। नए नियमों के अनुसार अब यह भर्ती प्रक्रिया नियमित रूप से हर वर्ष आयोजित की जाएगी। संशोधित नियम 2026 के तहत उप निरीक्षक (SI) पद के लिए केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी पात्र होंगे। ओलंपिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल, विश्व कप और विश्व चैंपियनशिप जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले या पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सीधी भर्ती का अवसर मिलेगा। इन प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक हासिल करने वाले खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं आरक्षक पद के लिए पात्रता का दायरा अपेक्षाकृत व्यापक रखा गया है। राष्ट्रीय खेलों और अधिकृत राष्ट्रीय चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले खिलाड़ी आरक्षक भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को इस योजना का लाभ मिलेगा। इसके अलावा जो खिलाड़ी SI पद की पात्रता पूरी करते हैं, उन्हें आरक्षक पद के लिए स्वतः पात्र माना जाएगा। सरकार का कहना है कि नियमों में किए गए संशोधन से चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और प्रभावी बनाया गया है। इससे खिलाड़ियों को खेल उपलब्धियों का उचित सम्मान मिलेगा और युवाओं में खेलों के प्रति रुचि भी बढ़ेगी। प्रदेश सरकार ने इस संशोधित नियम को राजपत्र में प्रकाशित कर दिया है, जिससे यह आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इसके साथ ही पात्रता और चयन से जुड़े विस्तृत मापदंड भी निर्धारित कर दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस भर्ती व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए प्रदेश में पुलिस भर्ती बोर्ड गठित करने की घोषणा भी की है। सरकार के अनुसार आगामी तीन वर्षों में पुलिस विभाग के 21 हजार से अधिक रिक्त पदों को भरा जाएगा। इनमें से लगभग 7,500 पदों पर भर्ती प्रक्रिया इसी वर्ष शुरू होने की संभावना है। खेल जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यह फैसला प्रदेश के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणादायक साबित होगा और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

एमएसपी सुरक्षा कवच का विस्तार: चार राज्यों में दालों-तिलहनों की रिकॉर्ड खरीद को मंजूरी, उत्तर प्रदेश के किसानों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ

नई दिल्ली । किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने और कृषि बाजार में मूल्य अस्थिरता के प्रभाव को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने दालों और तिलहनों की बड़े पैमाने पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद को मंजूरी दी है। यह निर्णय मूल्य समर्थन योजना के तहत लिया गया है और इससे विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु तथा हरियाणा के लाखों किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि कई बार बाजार में कीमतों में गिरावट आने के कारण किसानों को अपनी उपज कम दाम पर बेचनी पड़ती है। ऐसी स्थिति में एमएसपी आधारित खरीद किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए दालों और तिलहनों की सरकारी खरीद का दायरा बढ़ाया गया है, ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित प्रतिफल मिल सके। इस निर्णय में सबसे बड़ा लाभ उत्तर प्रदेश को मिला है। ग्रीष्मकालीन 2026 सीजन के लिए राज्य में मूंग, उड़द और मूंगफली की बड़ी मात्रा में खरीद को स्वीकृति दी गई है। राज्य में कुल स्वीकृत खरीद का मूल्य 1,490 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। कृषि क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रदेश के दाल एवं तिलहन उत्पादक किसानों की आय को महत्वपूर्ण समर्थन मिलेगा और उन्हें बाजार की अनिश्चितताओं से राहत मिलेगी। उत्तर प्रदेश में मूंग और उड़द की खेती करने वाले किसानों के लिए यह फैसला विशेष महत्व रखता है। पिछले कुछ वर्षों में दालों के उत्पादन में वृद्धि हुई है, लेकिन कई बार मांग और आपूर्ति के असंतुलन के कारण किसानों को अपेक्षित कीमत नहीं मिल पाती। ऐसे में सरकारी खरीद किसानों के लिए स्थिर आय का आधार प्रदान करेगी। गुजरात के लिए भी सरकार ने ग्रीष्मकालीन सीजन के तहत मूंग की खरीद को मंजूरी दी है। राज्य में स्वीकृत खरीद का कुल मूल्य 160 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। इससे मूंग उत्पादक किसानों को सीधे लाभ मिलेगा और उन्हें खुले बाजार में कम कीमतों पर फसल बेचने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। कृषि क्षेत्र में यह कदम उत्पादन को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ किसानों का भरोसा बढ़ाने वाला माना जा रहा है। तमिलनाडु में सरकार ने पहले से निर्धारित खरीद सीमा को बढ़ाने का निर्णय लिया है। राज्य में मूंग की अतिरिक्त खरीद को मंजूरी मिलने से किसानों को अधिक मात्रा में अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को बेचने का अवसर मिलेगा। इससे फसल की बिक्री प्रक्रिया अधिक सुगम होगी और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा। हरियाणा में भी मूंग की खरीद के लिए स्वीकृति दी गई है। राज्य के किसानों को इससे प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। कृषि मंत्रालय का मानना है कि यह निर्णय मूल्य समर्थन व्यवस्था को मजबूत करेगा और किसानों को बाजार में मूल्य गिरावट से सुरक्षा प्रदान करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार दालों और तिलहनों की एमएसपी खरीद का विस्तार केवल किसानों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में खाद्य सुरक्षा और तिलहन-दाल उत्पादन को प्रोत्साहित करने की व्यापक रणनीति का भी हिस्सा है। इससे किसानों का भरोसा बढ़ेगा, उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा और कृषि क्षेत्र में स्थिरता को मजबूती मिलेगी।

मानसून की देरी से बढ़ी किसानों की मुश्किलें: खरगोन में हाईवे जाम, बड़वानी में 36 लाख की केले की फसल बर्बाद

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक में हो रही देरी अब किसानों के लिए गंभीर चिंता का कारण बन गई है। प्रदेश के कई जिलों में खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है, जबकि कहीं मौसम की मार किसानों की तैयार फसलों को तबाह कर रही है। शुक्रवार को खरगोन और बड़वानी से सामने आई तस्वीरों ने किसानों की परेशानी को और उजागर कर दिया। खरगोन जिले में जल संकट से परेशान किसानों ने नहर का पानी छोड़ने की मांग को लेकर खंडवा-बड़ौदा हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। सुबह करीब 11:30 बजे 200 से अधिक किसान बैलगाड़ियां लेकर सड़क पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। किसानों का कहना है कि क्षेत्र की वेदा, कुंदा और खारक नदियां लगभग सूख चुकी हैं, जिससे खेतों में सिंचाई का संकट गहरा गया है। प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि मृग नक्षत्र शुरू हुए करीब दो सप्ताह होने को हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में नमी नहीं बन पा रही है। अधिकांश किसानों ने खेतों की जुताई और अन्य तैयारियां पूरी कर ली हैं, लेकिन बारिश नहीं होने के कारण बुवाई शुरू नहीं हो पा रही है। किसानों को डर है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। दूसरी ओर बड़वानी जिले के खड़की क्षेत्र में मौसम की बेरुखी ने दो किसान भाइयों को भारी नुकसान पहुंचाया है। तेज आंधी और बारिश के कारण अंबाराम और गंगाराम की करीब 9 एकड़ में लगी केले की तैयार फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। बाजार में बिक्री के लिए तैयार लगभग 1500 केले के पौधे जमीन पर गिर गए। किसानों के अनुसार इस फसल पर करीब 14 लाख रुपए की लागत आई थी, जबकि कुल नुकसान 36 लाख रुपए तक पहुंच गया है। अचानक हुए इस भारी नुकसान का सदमा किसान अंबाराम सहन नहीं कर पाए और उनकी तबीयत बिगड़ गई। उन्हें तत्काल राजपुर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से फसल सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। प्रदेश में कम बारिश के कारण खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें जैसे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर की बुवाई भी प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सफल बुवाई के लिए जमीन में पर्याप्त नमी जरूरी है। इसके लिए कम से कम 100 मिलीमीटर बारिश की आवश्यकता होती है। ऐसे में किसानों को जल्दबाजी में बोवनी करने से बचना चाहिए, क्योंकि पर्याप्त नमी नहीं होने पर बीज खराब होने का खतरा बढ़ जाता है। मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से अब तक मध्य प्रदेश में सामान्य से लगभग 39 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में स्थिति और अधिक चिंताजनक बनी हुई है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण आने वाले दिनों में कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी रह सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि अगले कुछ दिनों में मानसून सक्रिय नहीं हुआ तो खरीफ सीजन पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। फिलहाल प्रदेशभर के किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

भोपाल में 24 घंटे में बदली पटवारियों की ट्रांसफर लिस्ट, 46 में से 24 के तबादले रद्द होने पर उठे सवाल

भोपाल । राजधानी भोपाल में पटवारियों के तबादलों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कलेक्टर कार्यालय द्वारा 15 जून को जारी स्थानांतरण आदेश में जिन 46 पटवारियों का तबादला किया गया था, उनमें से 24 पटवारियों को महज 24 घंटे के भीतर राहत मिल गई। 16 जून को जारी संशोधित सूची में इन कर्मचारियों के नाम हटा दिए गए, जिससे उनके तबादले स्वतः निरस्त हो गए। इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, 15 जून को जारी सूची में ऐसे पटवारियों को शामिल किया गया था जो लंबे समय से एक ही तहसील या क्षेत्र में पदस्थ थे। इनमें अधिकांश कर्मचारी हुजूर और कोलार तहसीलों में पांच से आठ वर्षों से कार्यरत थे। कुछ पटवारी अपनी गृह तहसील में भी पदस्थ थे। स्थानांतरण नीति के तहत लंबे समय से एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मचारियों को दूसरे क्षेत्र में भेजने का प्रावधान है, जिसके तहत यह कार्रवाई की गई थी। हालांकि अगले ही दिन कैबिनेट बैठक के बाद स्थानांतरण की समय-सीमा बढ़ने के फैसले के बीच देर रात एक संशोधित सूची जारी की गई। इस नई सूची में 24 पटवारियों के नाम हटा दिए गए। सूत्रों के अनुसार संशोधित आदेश में शामिल अधिकांश कर्मचारी भी हुजूर और कोलार क्षेत्र से जुड़े हुए थे। इसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि प्रभावशाली संपर्कों और राजनीतिक पहुंच के चलते कुछ कर्मचारियों ने अपने नाम सूची से हटवा लिए। विवाद को और हवा तब मिली जब उन नामों को भी राहत मिलने की जानकारी सामने आई, जो पूर्व में एक चर्चित मीडिया स्टिंग ऑपरेशन में सामने आ चुके थे। इनमें निधि नेमा और किशोर सिंह दांगी के नाम प्रमुख रूप से शामिल बताए जा रहे हैं। इससे पूरे मामले को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं। स्थानांतरण से राहत पाने वाले कर्मचारियों में कई ऐसे नाम शामिल हैं, जो वर्ष 2015 से लेकर 2022 तक लगातार एक ही क्षेत्र में पदस्थ रहे हैं। इनमें सदाशिव गौंड, नरेंद्र रैकवार, केवल सिंह कौर, रेनु पटेल, बुजकिशोर नागर, अभिषेक शर्मा, मुकुल सराठे, दीक्षा शर्मा, संदीप शर्मा, प्रियंका सिंह, सौरभ सोलंकी, प्रदीप पटेल, पूजा ठाकुर, प्रियंका दुबे और अन्य कर्मचारी शामिल हैं। इस मामले में राजनीतिक प्रभाव की चर्चा भी जोरों पर है। संशोधित सूची से बाहर हुए 24 पटवारियों में से 20 हुजूर तहसील और 4 कोलार क्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे हैं। ये दोनों क्षेत्र विधायक रामेश्वर शर्मा के विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। वहीं बैरसिया क्षेत्र से केवल एक नाम हटने की जानकारी सामने आई है। इसी वजह से राजनीतिक हस्तक्षेप की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। स्थानांतरण नीति के तहत जिले में कुल कर्मचारियों के 20 प्रतिशत से अधिक तबादले नहीं किए जा सकते। भोपाल जिले में वर्तमान में 243 पटवारी पदस्थ हैं, जिसके अनुसार अधिकतम 47 तबादले संभव हैं। पहले 46 पटवारियों के तबादले किए गए और फिर संशोधित सूची जारी होने से कुल 76 स्थानांतरण संबंधी आदेशों की स्थिति बन गई। नीति विशेषज्ञों का मानना है कि निरस्त किए गए आदेश भी प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं, इसलिए नियमों के पालन पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। इसके अलावा आदेश जारी करने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ गई है। स्थानांतरण नीति की कंडिका-42 के अनुसार सभी आदेश ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से जारी किए जाने चाहिए। जबकि 15 जून का आदेश हस्ताक्षरित स्वरूप में जारी हुआ था और 16 जून का संशोधित आदेश ई-ऑफिस से निकाला गया। इतना ही नहीं, संशोधित आदेश में पूर्व आदेश को स्पष्ट रूप से निरस्त करने का उल्लेख भी नहीं किया गया है। अब इस पूरे मामले के सामान्य प्रशासन विभाग तक पहुंचने और उच्चस्तरीय जांच की संभावना जताई जा रही है। प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की नजरें संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।