भारत को बड़ा झटका दक्षिण अफ्रीका से हारा महिला टीम का सेमीफाइनल समीकरण हुआ पेचीदा

नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप में भारतीय महिला क्रिकेट टीम को एक अहम मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 6 विकेट से हार का सामना करना पड़ा है इस हार के बाद भारत की सेमीफाइनल में पहुंचने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है और ग्रुप स्टेज का समीकरण अब और भी कठिन हो गया है मैच मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान में खेला गया जहां भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट खोकर 158 रन बनाए भारत की ओर से किसी भी बल्लेबाज ने बड़ी पारी नहीं खेली और टीम नियमित अंतराल पर विकेट गंवाती रही दीप्ति शर्मा ने सबसे ज्यादा 29 रन बनाए जबकि यास्तिका भाटिया ने 15 रन जेमिमा रोड्रिग्स ने 12 रन और कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 24 रन का योगदान दिया लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत भी अच्छी नहीं रही कप्तान लौरा वोल्वार्ड्ट 20 रन बनाकर आउट हो गईं लेकिन इसके बाद तजमिन ब्रिट्स ने 40 रनों की अहम पारी खेलकर टीम को संभाला और मैच को संतुलन में ला दिया इसके बाद मारिजान कैप ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बना दिया कैप ने मात्र 45 गेंदों में 81 रनों की तूफानी पारी खेली जिसमें 4 छक्के और 7 चौके शामिल रहे उनकी इस पारी ने मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया और भारत के हाथ से जीत फिसल गई मारिजान कैप ने सिर्फ बल्लेबाजी ही नहीं बल्कि गेंदबाजी में भी योगदान दिया और 2 महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए उनकी ऑलराउंड परफॉर्मेंस भारत पर भारी पड़ी और दक्षिण अफ्रीका ने 5 गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया इस हार के साथ भारतीय टीम ग्रुप ए में दूसरे स्थान पर बनी हुई है लेकिन सेमीफाइनल की राह अब मुश्किल हो गई है ऑस्ट्रेलिया 6 अंकों के साथ शीर्ष पर है जबकि भारत के 4 अंक हैं और पाकिस्तान टूर्नामेंट से बाहर हो चुका है अब भारतीय टीम के लिए आने वाले मुकाबले बेहद अहम होंगे क्योंकि हर मैच में जीत सेमीफाइनल की उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए जरूरी हो गई है
बिग बॉस हाउस के अंदर के चौंकाने वाले सच ,सामने आए दिव्या अग्रवाल ने खोले कई राज

नई दिल्ली । बिग बॉस रियलिटी शो हमेशा से दर्शकों के बीच उत्सुकता और विवाद का केंद्र रहा है जहां कैमरों की निगरानी में रहने वाले कंटेस्टेंट्स की निजी जिंदगी को लेकर कई तरह की चर्चाएं होती रहती हैं अब बिग बॉस ओटीटी के पहले सीजन की विनर दिव्या अग्रवाल ने शो को लेकर कई ऐसे खुलासे किए हैं जिन्होंने एक बार फिर इस शो की सच्चाइयों पर बहस छेड़ दी है दिव्या अग्रवाल हाल ही में एक पॉडकास्ट में शामिल हुईं जहां उन्होंने बिग बॉस हाउस के अंदर के नियमों अनुभवों और आमतौर पर फैलने वाली अफवाहों पर खुलकर बात की उन्होंने बताया कि घर के अंदर कई चीजें बाहर से दिखने से बिल्कुल अलग होती हैं और कई बार दर्शकों की कल्पनाएं वास्तविकता से काफी दूर होती हैं उन्होंने खाने पीने और राशन से जुड़े नियमों का जिक्र करते हुए कहा कि घर के अंदर सामान्य चीजें भी लग्जरी बन जाती हैं जैसे कॉफी और केचअप जैसी साधारण चीजें भी आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं कंटेस्टेंट्स को सीमित राशन में ही अपना गुजारा करना पड़ता है और कई बार उन्हें जुगाड़ के सहारे काम चलाना पड़ता है इसी बातचीत में दिव्या ने सिगरेट को लेकर भी एक अहम बात साझा की उनके अनुसार सिगरेट को बिग बॉस हाउस में अलग तरह से देखा जाता है और यह कंटेस्टेंट्स को नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाती है उन्होंने यह भी कहा कि कंटेस्टेंट्स से उनकी पसंद के ब्रांड तक पूछे जाते हैं ताकि उन्हें वही दिया जा सके शराब को लेकर सबसे ज्यादा फैली अफवाहों पर दिव्या ने साफ कहा कि बिग बॉस हाउस के अंदर किसी भी तरह की शराब या अल्कोहल की अनुमति नहीं होती उन्होंने इन सभी दावों को गलत बताया और कहा कि यह सिर्फ बाहर की कल्पनाएं हैं जबकि वास्तविकता इससे अलग है शो के अंदर रिश्तों और निजी व्यवहार को लेकर पूछे जाने वाले सवालों पर भी दिव्या ने बेबाकी से जवाब दिया उन्होंने इशारों में कहा कि कैमरों के बावजूद घर के अंदर कई तरह की निजी स्थितियां बनती हैं लेकिन हर चीज को दिखाया या प्रसारित नहीं किया जाता इस पर शो के फॉर्मेट और नियमों की सीमाएं लागू होती हैं इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि दर्शक और लोग उनसे कई अजीब सवाल पूछते हैं जैसे घर के अंदर क्या क्या चीजें संभव हैं और क्या वहां ऐसी सुविधाएं होती हैं जिनकी लोग कल्पना करते हैं उन्होंने इन सवालों को मनोरंजक लेकिन अक्सर गलतफहमी पर आधारित बताया कुल मिलाकर दिव्या अग्रवाल के इन खुलासों ने एक बार फिर बिग बॉस हाउस के अंदर की जिंदगी को लेकर लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है और यह चर्चा तेज कर दी है कि असलियत और टीवी पर दिखने वाली कहानी के बीच कितना बड़ा अंतर होता है
इंदौर में MCA छात्रा ने लगाई फांसी: परीक्षा के तनाव में उठाया खौफनाक कदम, कमरे में मिला शव

मध्यप्रदेश । इंदौर के परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया। उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए अपने घर से दूर रहकर पढ़ाई कर रही एक 22 वर्षीय छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। शुरुआती जांच में परीक्षा के दबाव और मानसिक तनाव को इस घटना की संभावित वजह माना जा रहा है। घटना के बाद छात्रा के परिवार और दोस्तों में गहरा शोक व्याप्त है। पुलिस के अनुसार मृतक छात्रा रेखा गाढे बुरहानपुर की रहने वाली थी और पिछले करीब एक वर्ष से इंदौर में रहकर MCA की पढ़ाई कर रही थी। वह चमेली देवी कॉलेज की छात्रा थी और वर्तमान में सेकंड सेमेस्टर की परीक्षाएं दे रही थी। पढ़ाई में मेहनती मानी जाने वाली रेखा पिछले कुछ दिनों से मानसिक रूप से परेशान चल रही थी। जानकारी के मुताबिक रविवार शाम उसकी सहेलियों ने उसे राजबाड़ा घूमने चलने के लिए कहा था, लेकिन उसने जाने से इनकार कर दिया। सहेलियां उसे अकेला छोड़कर घूमने चली गईं। देर रात जब वे वापस लौटीं तो कमरे का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। रेखा कमरे में फांसी के फंदे पर लटकी हुई थी। सहेलियों ने तत्काल आसपास के लोगों और पुलिस को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही परदेशीपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने छात्रा के कमरे की तलाशी ली, लेकिन वहां से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ। ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस द्वारा सहेलियों और परिचितों से पूछताछ में यह बात सामने आई है कि रेखा परीक्षा को लेकर काफी तनाव में थी। उसके कुछ पेपर उम्मीद के मुताबिक नहीं हुए थे, जिससे वह निराश और चिंतित रहने लगी थी। सहेलियों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वह पढ़ाई पर ठीक से ध्यान नहीं दे पा रही थी और अक्सर उदास दिखाई देती थी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। परिजन इंदौर पहुंच रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। यह घटना एक बार फिर विद्यार्थियों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव और मानसिक तनाव की गंभीर समस्या को सामने लाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा में अपेक्षित प्रदर्शन न होने पर छात्रों को निराशा के बजाय परिवार, मित्रों और शिक्षकों से संवाद करना चाहिए। मानसिक तनाव की स्थिति में समय रहते परामर्श और सहायता प्राप्त करना बेहद आवश्यक है। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छात्रा ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया। पूरे मामले ने कॉलेज और छात्र समुदाय को भी गहरे सदमे में डाल दिया है।
इंदौर में विजयवर्गीय का मुस्लिम समुदाय पर तंज: विकास चाहिए तो भेदभाव की राजनीति छोड़नी होगी

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इंदौर में आयोजित एक विकास कार्यक्रम के दौरान ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-1 में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री विजयवर्गीय ने विकास कार्यों के भूमिपूजन के दौरान कहा कि कुछ मुस्लिम भाई उन्हें और उनकी विचारधारा से जुड़े लोगों को काफिर कहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि वे काफिर हैं तो उनकी बनाई सड़कों पर नहीं चलना चाहिए और सरकार की योजनाओं का लाभ भी नहीं लेना चाहिए। विजयवर्गीय ने कहा कि जिस क्षेत्र में विकास कार्य किए जा रहे हैं वहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग रहते हैं। उन्होंने मंच से कहा कि कई मुस्लिम भाई हमें काफिर कहते हैं। यदि हम काफिर हैं तो हमारी बनाई सड़क पर मत चलो। यदि आपके घर में लाड़ली बहना या लाड़ली लक्ष्मी योजना का पैसा पहुंच रहा है तो उसे भी मत लो। उनके इस बयान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। हालांकि अपने संबोधन में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार और पार्टी की नीति किसी प्रकार के भेदभाव की नहीं रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और सबका प्रयास के सिद्धांत पर काम किया है। सरकार ने कभी यह नहीं देखा कि कौन किस धर्म या समुदाय से जुड़ा है। विकास कार्यों का लाभ सभी नागरिकों तक समान रूप से पहुंचाने का प्रयास किया गया है। मंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते जनता की सेवा करना उनका दायित्व है। जनता उन्हें वोट दे या न दे लेकिन विकास कार्य रुकेंगे नहीं। उन्होंने कहा कि यदि जनता राजनीतिक समर्थन देती है तो और अधिक उत्साह के साथ काम किया जाएगा लेकिन समर्थन न मिलने की स्थिति में भी विकास की गति जारी रहेगी। उनका कहना था कि जनता की सेवा करना राजनीति से ऊपर की जिम्मेदारी है। यह बयान उस समय आया जब विजयवर्गीय दो दिवसीय विकास कार्यक्रम के दूसरे दिन क्षेत्रीय दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने वार्ड क्रमांक-1 और वार्ड क्रमांक-5 में लगभग 2 करोड़ 39 लाख 80 हजार रुपए की लागत से होने वाले 10 विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और भाजपा कार्यकर्ता मौजूद थे। अपने संबोधन में विजयवर्गीय ने भाजपा कार्यकर्ता होने को अपना पहला सौभाग्य और जनप्रतिनिधि बनकर जनता की सेवा करने को दूसरा सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता प्राप्त करना नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा करना होना चाहिए। विजयवर्गीय का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में राजनीतिक दलों के बीच सामाजिक समरसता और विकास के मुद्दों पर लगातार बहस जारी है। उनके बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं। हालांकि उन्होंने अपने पूरे भाषण में विकास कार्यों और जनता की सेवा को प्राथमिकता देने की बात दोहराई तथा यह संदेश देने का प्रयास किया कि सरकार की योजनाएं सभी नागरिकों के लिए समान रूप से उपलब्ध हैं।
NQAS टीम की सख्ती से अस्पताल में मचा हड़कंप: गंदगी और शराब की बोतलों पर जताई नाराजगी, बंद बगीचे का खुलवाया ताला

मध्यप्रदेश । उज्जैन के जिला अस्पताल चरक भवन में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया जब नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (NQAS) की राष्ट्रीय मूल्यांकन टीम री-सर्टिफिकेशन के लिए निरीक्षण करने पहुंची। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) दिल्ली के निर्देश पर पहुंचे इस दल ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया और कई स्थानों पर गंभीर खामियां मिलने पर अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए। मूल्यांकन दल में महाराष्ट्र की डॉ. स्वर्णा पंजाब की रुपिंदर कौर और पटना के डॉ. विजय चंद्र झा शामिल थे। टीम ने अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार से निरीक्षण की शुरुआत की। इस दौरान अस्पताल परिसर में कई स्थानों पर गंदगी देखी गई जिस पर टीम ने कड़ा रुख अपनाया। अधिकारियों और सफाई व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट कहा गया कि उन्हें किसी का परिचय पत्र देखने में रुचि नहीं है बल्कि एक घंटे के भीतर अस्पताल पूरी तरह साफ दिखाई देना चाहिए। निरीक्षण के दौरान अस्पताल परिसर और मुख्य गेट के आसपास शराब की खाली बोतलें तथा अन्य अनुपयोगी सामग्री बिखरी मिली। यह दृश्य देखकर टीम के सदस्य नाराज हो गए। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से सवाल किया कि मरीजों और उनके परिजनों के लिए बने परिसर में इस प्रकार की सामग्री कैसे पहुंच रही है। साथ ही नियमित निगरानी और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। निरीक्षण के दौरान टीम की नजर अस्पताल परिसर में स्थित एक बंद बगीचे पर भी पड़ी। बगीचा लंबे समय से बंद था और उस पर ताला लगा हुआ था। टीम ने तुरंत ताला खुलवाया और अंदर जाकर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों से पूछा गया कि सार्वजनिक उपयोग के लिए बने इस स्थान को बंद क्यों रखा गया है। निरीक्षण के बाद टीम ने निर्देश दिए कि बगीचे को व्यवस्थित किया जाए और मरीजों तथा उनके परिजनों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाए ताकि उन्हें बेहतर वातावरण मिल सके। राष्ट्रीय मूल्यांकन दल ने अस्पताल की शासकीय भोजनशाला का भी निरीक्षण किया। यहां मेन्यू बोर्ड प्रदर्शित नहीं मिला जिस पर टीम ने तत्काल मेन्यू बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। इसके अलावा शिकायत पेटी की व्यवस्था उसकी चाबी किसके पास रहती है और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तृत जानकारी ली गई। टीम ने अस्पताल में लगाए गए सिटीजन चार्टर का भी अवलोकन किया और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की जानकारी का परीक्षण किया। इसके साथ ही कचरा संग्रहण वाहन का निरीक्षण किया गया और उसकी तस्वीरें लेकर रिकॉर्ड तैयार किया गया। निरीक्षण के दौरान टीम ने अस्पताल प्रशासन को साफ संदेश दिया कि गुणवत्ता मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं बनाए रखना जरूरी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। NQAS री-सर्टिफिकेशन के लिए हो रहे इस निरीक्षण को अस्पताल प्रबंधन के लिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके आधार पर अस्पताल की गुणवत्ता और सेवाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। टीम के निर्देशों के बाद अस्पताल प्रशासन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में जुट गया है।
महाकाल दरबार में श्रद्धा का विशेष उपहार: परिवार सहित पहुंचे भक्त ने चढ़ाया चांदी का दिव्य छत्र

मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर के दरबार में एक बार फिर श्रद्धा और समर्पण का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। राजस्थान के जयपुर से आए एक भक्त परिवार ने बाबा महाकाल के चरणों में अपनी आस्था अर्पित करते हुए लाखों रुपए मूल्य का चांदी का भव्य छत्र समर्पित किया। इस विशेष भेंट ने न केवल मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया बल्कि यह भी साबित किया कि महाकाल के प्रति भक्तों का विश्वास और समर्पण समय के साथ और अधिक मजबूत होता जा रहा है। जयपुर के सन सिटी नीदड़ निवासी भागचंद बलेसरा लंबे समय से भगवान महाकाल के प्रति गहरी श्रद्धा रखते हैं। इसी श्रद्धा भाव के साथ उन्होंने विशेष रूप से 1 किलो 300 ग्राम चांदी से एक सुंदर और कलात्मक छत्र तैयार करवाया। इस छत्र की अनुमानित कीमत करीब 3 लाख 25 हजार रुपए बताई जा रही है। भागचंद बलेसरा अपने पूरे परिवार के साथ उज्जैन पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना के बाद इस दिव्य छत्र को बाबा महाकाल को अर्पित किया। इस धार्मिक अवसर पर उनकी धर्मपत्नी सीता देवी, पुत्र गोविंद बलेसरा और सीताराम बलेसरा, पुत्रियां ममता, सुमन और अनिता तथा पौत्र महावीर बलेसरा भी मौजूद रहे। पूरे परिवार ने बाबा महाकाल के दर्शन कर सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की। महाकालेश्वर मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक धार्मिक विधि-विधान के साथ छत्र का पूजन कराया। इसके बाद विशेष अनुष्ठान संपन्न कर यह चांदी का छत्र भगवान महाकाल के मुखमंडल पर धारण कराया गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने इस दिव्य क्षण को श्रद्धा और भक्ति के साथ देखा। पूजा के दौरान वातावरण हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। छत्र अर्पण के बाद मंदिर समिति की ओर से भागचंद बलेसरा और उनके परिवार का सम्मान भी किया गया। श्रद्धालु परिवार ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि बाबा महाकाल की कृपा से उन्हें जीवन में अनेक उपलब्धियां और खुशियां मिली हैं। इसी कृतज्ञता और आस्था के भाव से उन्होंने यह विशेष भेंट समर्पित की है। महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा सोने-चांदी के आभूषण, मुकुट, छत्र और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने की परंपरा वर्षों पुरानी है। देश और विदेश से आने वाले भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान को बहुमूल्य उपहार भेंट करते हैं। विशेष बात यह है कि सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी होने के बावजूद धार्मिक दान और भेंट की भावना में कोई कमी नहीं आई है। महाकालेश्वर मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। जयपुर से आए इस श्रद्धालु परिवार द्वारा अर्पित किया गया चांदी का छत्र भी इसी अटूट विश्वास और भक्ति का प्रतीक बनकर सामने आया है।
भस्म आरती बुकिंग पर सख्ती: एक मोबाइल नंबर से बार-बार नहीं होगी एंट्री, महाकाल मंदिर समिति का फैसला

मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में होने वाली भस्म आरती में शामिल होने के लिए अब श्रद्धालुओं को नई व्यवस्था का पालन करना होगा। मंदिर समिति ने भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नियमों को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी श्रद्धालु को एक ही मोबाइल नंबर से तीन माह के भीतर दोबारा भस्म आरती की अनुमति नहीं मिलेगी। यह नियम सामान्य श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रोटोकॉल के माध्यम से अनुमति प्राप्त करने वालों पर भी समान रूप से लागू रहेगा। महाकाल मंदिर में प्रतिदिन तड़के होने वाली भस्म आरती देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। सीमित संख्या में उपलब्ध अनुमति के कारण लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग एक ही मोबाइल नंबर या पहचान का उपयोग कर बार-बार अनुमति प्राप्त कर लेते हैं जबकि कई श्रद्धालु वर्षों तक भस्म आरती के दर्शन का अवसर नहीं पा पाते। इसी समस्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। दरअसल वर्ष 2024 में भी भस्म आरती की अनुमति को लेकर लगातार शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर नीरज सिंह ने ऑनलाइन बुकिंग करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक आधार कार्ड और एक मोबाइल नंबर से तीन माह बाद ही दोबारा अनुमति देने का नियम लागू किया था। कुछ समय तक यह व्यवस्था प्रभावी रही लेकिन बाद में इसका पालन अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाया। अब फिर से शिकायतें मिलने के बाद मंदिर समिति ने इस नियम को सख्ती के साथ लागू करने का फैसला किया है। नई व्यवस्था के अनुसार अब कोई भी श्रद्धालु चाहे वह ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से आवेदन करे या किसी विशेष प्रोटोकॉल के तहत अनुमति प्राप्त करने का प्रयास करे उसे एक ही मोबाइल नंबर से बार-बार अनुमति नहीं मिलेगी। एक बार भस्म आरती में शामिल होने के बाद उसी नंबर से अगली अनुमति प्राप्त करने के लिए कम से कम तीन माह का इंतजार करना होगा। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को भस्म आरती में शामिल होने का अवसर मिलेगा और अनुमति प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। साथ ही लंबे समय से उठ रहे पक्षपात और बार-बार अनुमति मिलने जैसे आरोपों पर भी रोक लग सकेगी। महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि यह व्यवस्था पहले से लागू है लेकिन अब इसे और अधिक प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। उनका कहना है कि एक ही मोबाइल नंबर का बार-बार उपयोग रोकने से वास्तविक श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा और भस्म आरती की अनुमति प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष बन सकेगी। महाकाल मंदिर समिति के इस फैसले को श्रद्धालुओं के बीच सकारात्मक कदम माना जा रहा है। उम्मीद है कि नई व्यवस्था से भस्म आरती में शामिल होने की इच्छा रखने वाले अधिक लोगों को अवसर मिल सकेगा और व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और संतुलित बनेगी।
उज्जैन में दर्दनाक सड़क हादसा: तेज रफ्तार डंपर ने तीन मजदूरों को रौंदा, एक की मौत, दो जिंदगी की जंग लड़ रहे

मध्यप्रदेश । उज्जैन जिले के नरवर क्षेत्र में सोमवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार का सहारा छीन लिया और दो लोगों को जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया। मजदूरी करने के लिए घर से निकले तीन मजदूरों की यात्रा उस समय हादसे में बदल गई जब उनकी बाइक को एक तेज रफ्तार डंपर ने जोरदार टक्कर मार दी। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसके दो साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के अनुसार नरवर निवासी धर्मेंद्र शेरवाल, कालू नागवंशी और रोशन रोज की तरह मजदूरी के लिए उज्जैन जा रहे थे। तीनों एक ही बाइक पर सवार होकर सुबह घर से निकले थे। जब वे सेमलिया फंटे के पास फोरलेन सड़क पार कर रहे थे तभी देवास की ओर से तेज गति से आ रहे डंपर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे और डंपर की चपेट में आ गए। हादसे में 39 वर्षीय धर्मेंद्र शेरवाल की मौके पर ही मौत हो गई। अचानक हुई इस घटना से आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। गंभीर रूप से घायल कालू नागवंशी और रोशन को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। कालू की हालत नाजुक होने के कारण उसे देवास के अमलतास अस्पताल रेफर किया गया है जबकि रोशन का इलाज उज्जैन के चरक अस्पताल में जारी है। घटना की खबर मिलते ही गांव में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और हादसे के लिए जिम्मेदार डंपर चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे। गुस्साए ग्रामीणों ने कुछ समय के लिए देवास रोड पर प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। लोगों का कहना था कि इस मार्ग पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार लंबे समय से दुर्घटनाओं का कारण बन रही है लेकिन इसके बावजूद प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। सूचना मिलने पर नरवर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और दोषी चालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कराया गया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त डंपर को जब्त कर लिया है और चालक की तलाश शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार को हादसे का प्रमुख कारण माना जा रहा है। वहीं मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की लापरवाह ड्राइविंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन समय रहते प्रभावी कदम उठाए तो ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है और कई परिवारों को उजड़ने से बचाया जा सकता है।
15 साल के वैभव सूर्यवंशी का धमाका! 29 गेंदों में 94 रन ठोककर इंटरनेशनल डेब्यू के दरवाजे पर पहुंचे युवा स्टार

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट को एक और बड़ा सितारा मिल गया है। महज 15 साल की उम्र में अपने विस्फोटक बल्लेबाजी अंदाज से क्रिकेट जगत का ध्यान खींचने वाले वैभव सूर्यवंशी अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। श्रीलंका ए के खिलाफ ट्राई सीरीज के फाइनल में उन्होंने जिस तरह की बल्लेबाजी की उसने चयनकर्ताओं के साथ-साथ क्रिकेट विशेषज्ञों को भी प्रभावित कर दिया है। अब माना जा रहा है कि 26 जून को आयरलैंड के खिलाफ होने वाले पहले टी20 मुकाबले में उन्हें भारतीय टीम की ओर से खेलने का मौका मिल सकता है। बिहार के इस युवा बल्लेबाज ने बेहद कम समय में अपनी अलग पहचान बनाई है। वैभव की सबसे बड़ी ताकत उनका निडर खेल और दबाव भरे मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करना है। यही वजह है कि उन्हें अब नॉकआउट मुकाबलों का नया किंग कहा जाने लगा है। इस साल उन्होंने पांच करो या मरो मुकाबले खेले हैं जिनमें चार अर्धशतक और एक शतक लगाया है। खास बात यह है कि तीन बार वह 90 से अधिक रन बनाकर आउट हुए लेकिन कभी व्यक्तिगत उपलब्धि के लिए अपनी बल्लेबाजी की रफ्तार धीमी नहीं की। श्रीलंका ए के खिलाफ ट्राई सीरीज के फाइनल में वैभव ने अपने करियर की सबसे यादगार पारियों में से एक खेली। भारतीय टीम के लिए ओपनिंग करने उतरे इस युवा बल्लेबाज ने सिर्फ 29 गेंदों में 94 रन ठोक दिए। उनकी पारी में 10 चौके और 8 छक्के शामिल रहे। यानी उन्होंने अपने 94 में से 88 रन केवल बाउंड्री से जुटाए। शतक से महज कुछ कदम दूर रह जाने के बावजूद उनकी इस पारी ने मैच का रुख बदल दिया और विरोधी टीम पर जबरदस्त दबाव बना दिया। वैभव की बल्लेबाजी का अंदाज उन्हें अपनी उम्र के खिलाड़ियों से अलग बनाता है। वह बड़े शॉट खेलने से नहीं घबराते और मैच की स्थिति के अनुसार तेजी से रन बनाने की क्षमता रखते हैं। यही कारण है कि उन्हें भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सितारा माना जा रहा है। उनके प्रदर्शन ने यह भी साबित किया है कि दबाव जितना बढ़ता है उनका खेल उतना ही निखरता है। अब क्रिकेट प्रेमियों की नजरें भारत के आयरलैंड दौरे पर टिकी हैं। भारतीय टीम वहां दो टी20 मैच खेलेगी। पहला मुकाबला 26 जून और दूसरा 28 जून को बेलफास्ट में खेला जाएगा। यदि वैभव को पहले ही मैच में मौका मिलता है तो वह भारतीय क्रिकेट इतिहास में सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने वाले खिलाड़ियों में शामिल हो जाएंगे। इतना ही नहीं वे महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के सबसे कम उम्र में भारत के लिए डेब्यू करने के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकते हैं। आयरलैंड दौरे के बाद भारत को इंग्लैंड के खिलाफ भी टी20 सीरीज खेलनी है। ऐसे में यदि वैभव को मौका मिलता है और वह अपनी फॉर्म बरकरार रखते हैं तो भारतीय क्रिकेट को एक नया सुपरस्टार मिल सकता है। फिलहाल पूरे देश की नजरें 26 जून पर टिकी हैं जब यह युवा बल्लेबाज अपने सपनों की उड़ान भर सकता है।
सरकारी भवनों पर कब्जे का शिकंजा 38 लाख की लैब में बस गया परिवार आंगनबाड़ी पर 6 साल से दबंग का ताला

मध्यप्रदेश । सरकारी जमीनों और भवनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के दावे करने वाला प्रशासन शिवपुरी जिले में अपनी ही संपत्तियों को कब्जे से मुक्त नहीं करा पा रहा है। हालात यह हैं कि बदरवास में लाखों रुपए की लागत से बनी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला पिछले सात वर्षों से एक परिवार के कब्जे में है जबकि कोलारस क्षेत्र के एक गांव में आंगनबाड़ी केंद्र पर छह साल से ताला लटका हुआ है। इन दोनों मामलों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बदरवास तहसील कार्यालय के पीछे वर्ष 2018 में मंडी बोर्ड द्वारा कृषि विभाग के लिए आधुनिक मृदा परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण कराया गया था। करीब 38 लाख रुपए की लागत से तैयार इस भवन का उद्देश्य किसानों को मिट्टी की जांच की सुविधा उपलब्ध कराना था ताकि वे अपनी फसलों के लिए वैज्ञानिक सलाह प्राप्त कर सकें। लेकिन प्रयोगशाला शुरू होने से पहले ही भवन पर एक परिवार ने कब्जा जमा लिया और धीरे-धीरे उसे अपने आवास में तब्दील कर दिया। आज स्थिति यह है कि जिस भवन में किसानों के हित से जुड़ी अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू होनी थीं वहां घरेलू गतिविधियां संचालित हो रही हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भवन खाली कराने के कई प्रयास किए गए लेकिन सफलता नहीं मिली। विभाग का आरोप है कि कब्जाधारी के खिलाफ कार्रवाई करने में कई तरह की बाधाएं सामने आती रही हैं। इस संबंध में राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। परिणामस्वरूप लाखों रुपए की सरकारी संपत्ति वर्षों से बेकार पड़ी हुई है और किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। दूसरी ओर कोलारस विकासखंड के ग्राम सेसईखुर्द में स्थित शासकीय आंगनबाड़ी केंद्र भी वर्षों से अपने मूल उद्देश्य से भटका हुआ है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में आए एक तेज तूफान के बाद एक स्थानीय व्यक्ति ने आंगनबाड़ी भवन का ताला तोड़कर उसमें अपना सामान रख लिया और धीरे-धीरे पूरे भवन पर कब्जा कर लिया। बताया जाता है कि बाद में भवन की संरचना में भी बदलाव कर दिया गया। इसके चलते आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन प्रभावित हो गया और बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली कई महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ बाधित हो गया। स्थानीय स्तर पर आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन वैकल्पिक व्यवस्था के तहत किया जा रहा है लेकिन सरकारी भवन पर कब्जा होने से व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारू नहीं हो पा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला है। इन दोनों मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी भवनों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो करोड़ों रुपए की सार्वजनिक संपत्तियां इसी तरह अतिक्रमण और लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेंगी। प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्रवाई का भरोसा जरूर दिया है लेकिन अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि जमीन पर परिणाम कब दिखाई देते हैं।