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मुन्ना भाई एमबीबीएस में नहीं दिखा वह सीन जिसने बाद में 3 इडियट्स के क्लाइमैक्स को यादगार बना दिया

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय फिल्मों में शामिल मुन्ना भाई एमबीबीएस और 3 इडियट्स के बीच एक दिलचस्प कड़ी सामने आई है। मशहूर निर्देशक राजकुमार हिरानी ने खुलासा किया है कि 3 इडियट्स का एक बेहद चर्चित और भावुक दृश्य दरअसल पहले मुन्ना भाई एमबीबीएस की स्क्रिप्ट का हिस्सा था। हालांकि उस समय इसे फिल्म से हटा दिया गया लेकिन वर्षों बाद यही विचार नए रूप में 3 इडियट्स में नजर आया और दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरने में सफल रहा। साल 2003 में रिलीज हुई मुन्ना भाई एमबीबीएस ने भारतीय सिनेमा में एक नया अध्याय लिखा था। संजय दत्त और अरशद वारसी की जोड़ी ने दर्शकों को हंसाया भी और भावुक भी किया। फिल्म की कहानी और उसके किरदार आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म की स्क्रिप्ट में कई ऐसे दृश्य भी लिखे गए थे जो बाद में अंतिम संस्करण का हिस्सा नहीं बन पाए। राजकुमार हिरानी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने मुन्ना भाई एमबीबीएस के लिए एक खास दृश्य लिखा था जो मुख्य किरदार मुन्ना के जीवन में बड़ा बदलाव लाने वाला था। कहानी के अनुसार एक रात मुन्ना और सर्किट शराब पीकर सड़क पर घूम रहे होते हैं। शहर में कर्फ्यू लगा होता है और सन्नाटा पसरा होता है। तभी एक छोटा बच्चा घबराया हुआ उनके पास आता है और बताता है कि उसकी मां को प्रसव पीड़ा हो रही है लेकिन कोई एम्बुलेंस या डॉक्टर मदद के लिए उपलब्ध नहीं है। जब बच्चे को पता चलता है कि मुन्ना डॉक्टर बनने की पढ़ाई कर रहा है तो वह उसे अपने साथ चलने के लिए मजबूर कर देता है। मुन्ना के पास कोई वास्तविक चिकित्सकीय अनुभव नहीं होता लेकिन वह फिल्मों में देखी गई बातों के आधार पर मदद करने की कोशिश करता है। वह लोगों से गर्म पानी और जरूरी सामान लाने को कहता है और हालात को संभालने का प्रयास करता है। कहानी के अनुसार अंततः बच्चे का जन्म हो जाता है और जब मुन्ना पहली बार नवजात को अपनी गोद में उठाता है तब उसके भीतर एक बड़ा भावनात्मक परिवर्तन आता है। उसी पल उसे जीवन की कीमत और अपने पेशे की जिम्मेदारी का एहसास होता है। यही दृश्य उसके किरदार के विकास में महत्वपूर्ण मोड़ बनने वाला था। हालांकि बाद में यह पूरा दृश्य फिल्म से हटा दिया गया। लेकिन राजकुमार हिरानी को इस विचार की ताकत पर पूरा भरोसा था। इसलिए वर्षों बाद जब उन्होंने 3 इडियट्स बनाई तो इसी भावनात्मक आधार को नए अंदाज में इस्तेमाल किया। फिल्म में रैंचो आपात स्थिति में पिया की बहन की डिलीवरी करवाता है। यह दृश्य न सिर्फ फिल्म के सबसे यादगार पलों में शामिल हुआ बल्कि इसके जरिए वायरस के किरदार का हृदय परिवर्तन भी दिखाया गया। 3 इडियट्स में यह दृश्य दर्शकों के लिए रोमांच भावनाओं और प्रेरणा का अनूठा मिश्रण साबित हुआ। शायद यही वजह है कि आज भी यह सीन फिल्म के सबसे चर्चित हिस्सों में गिना जाता है। राजकुमार हिरानी का यह खुलासा बताता है कि कई बार फिल्म निर्माण के दौरान हटाए गए विचार भी वर्षों बाद नई कहानी में जगह पाकर इतिहास रच देते हैं। मुन्ना भाई एमबीबीएस से निकलकर 3 इडियट्स तक पहुंचा यह दृश्य इसका बेहतरीन उदाहरण है।

37 साल बाद टूटी चुप्पी ओए ओए गर्ल सोनम खान ने अफेयर की अफवाहों पर बताया पूरा सच

नई दिल्ली । बॉलीवुड की चर्चित फिल्म त्रिदेव का सुपरहिट गाना ओए ओए आज भी लोगों की जुबान पर है। इस गाने ने जहां फिल्म को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया वहीं अभिनेत्री सोनम खान को भी रातोंरात लोकप्रिय बना दिया। हालांकि इस सफलता के साथ एक ऐसी अफवाह भी जुड़ गई जो वर्षों तक उनका पीछा करती रही। दावा किया जाता था कि सोनम खान को यह गाना और फिल्म में विशेष महत्व इसलिए मिला क्योंकि उनका फिल्म के निर्देशक राजीव राय के साथ अफेयर चल रहा था। अब करीब 37 साल बाद अभिनेत्री ने खुद सामने आकर इस पूरे मामले की सच्चाई बताई है। सोनम खान ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए उन सभी चर्चाओं और अफवाहों पर विराम लगाने की कोशिश की जो दशकों से उनके नाम के साथ जुड़ी हुई थीं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब त्रिदेव की शूटिंग शुरू हुई थी तब वह और राजीव राय किसी भी तरह के प्रेम संबंध में नहीं थे। इतना ही नहीं दोनों उस समय अलग अलग लोगों के साथ रिश्ते में थे। सोनम ने बताया कि त्रिदेव के पहले दिन की शूटिंग और उनके पहले बड़े गाने के साथ ही पहली बड़ी अफवाह ने जन्म लिया था। फिल्म की रिलीज के बाद यह धारणा बना दी गई कि निर्देशक के साथ करीबी रिश्तों के कारण उन्हें फिल्म में बाकी अभिनेत्रियों से ज्यादा महत्व मिला। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग थी। अभिनेत्री ने अपने पोस्ट में खुलासा किया कि राजीव राय उन्हें फिल्म में लेने के पक्ष में भी नहीं थे। उन्होंने पहले किसी दूसरी अभिनेत्री को फिल्म में लेने की योजना बनाई थी और लगभग बातचीत भी पूरी कर ली थी। सोनम के अनुसार निर्देशक ने उनकी पिछली फिल्म के कुछ दृश्य देखे थे और वह उनसे प्रभावित नहीं हुए थे। ऐसे में उन्हें फिल्म में लेना राजीव राय की पहली पसंद नहीं बल्कि मजबूरी बन गया था क्योंकि अन्य विकल्प उपलब्ध नहीं थे। सोनम ने यह भी कहा कि उस समय राजीव राय अपनी गर्लफ्रेंड के साथ थे जबकि उनका अपना बॉयफ्रेंड भी शूटिंग स्थल के आसपास मौजूद रहता था। ऐसे में दोनों के बीच किसी तरह के गुप्त रिश्ते या रोमांस की बात पूरी तरह निराधार थी। उन्होंने कहा कि न तो कोई सीक्रेट मुलाकात होती थी और न ही कोई छिपा हुआ प्रेम प्रसंग था। दिलचस्प बात यह है कि बाद में परिस्थितियां बदलीं और त्रिदेव की रिलीज के काफी समय बाद सोनम खान और राजीव राय एक दूसरे के करीब आए। उस समय दोनों अपने अपने पुराने रिश्तों से बाहर निकल चुके थे और सिंगल थे। इसके बाद दोनों ने एक दूसरे को डेट करना शुरू किया और उनका रिश्ता आगे बढ़ता गया। आखिरकार वर्ष 1991 में दोनों ने शादी कर ली। हालांकि यह रिश्ता भी हमेशा कायम नहीं रह सका और साल 2016 में दोनों अलग हो गए। त्रिदेव की बात करें तो यह फिल्म अपने दौर की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में शामिल रही। फिल्म में सनी देओल जैकी श्रॉफ नसीरुद्दीन शाह माधुरी दीक्षित और अमरीश पुरी जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए थे। वहीं ओए ओए गाना आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय गीतों में गिना जाता है। सोनम खान का यह खुलासा न केवल एक पुरानी अफवाह का अंत करता है बल्कि यह भी दिखाता है कि फिल्मी दुनिया में कई बार बिना सच्चाई जाने बनाई गई धारणाएं कलाकारों का वर्षों तक पीछा करती रहती हैं।

ओटीटी पर 2026 का जलवा इन 11 वेब सीरीज ने जीता दर्शकों का दिल IMDB रेटिंग भी है जबरदस्त

नई दिल्ली । साल 2026 ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए बेहद खास साबित हो रहा है। इस वर्ष कई ऐसी वेब सीरीज रिलीज हुईं जिन्होंने न सिर्फ दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया बल्कि अपनी दमदार कहानियों और शानदार अभिनय के दम पर आलोचकों की भी तारीफ हासिल की। क्राइम थ्रिलर से लेकर स्पोर्ट्स ड्रामा और बायोपिक तक हर तरह का कंटेंट दर्शकों को देखने को मिला। खास बात यह है कि इन चर्चित सीरीज की आईएमडीबी रेटिंग भी 6.5 से ऊपर है जो उनकी लोकप्रियता और गुणवत्ता को साबित करती है। इस साल सबसे ज्यादा चर्चा बटोरने वाली सीरीज में ब्राउन का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। करिश्मा कपूर की वापसी वाली इस साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर ने दर्शकों को एक रहस्यमयी और रोमांचक दुनिया से रूबरू कराया। वहीं नाना पाटेकर अभिनीत संकल्प ने राजनीति और सत्ता के पीछे चलने वाले खेल को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। क्राइम और कॉमेडी का शानदार मिश्रण लेकर आई द पिरामिड स्कीम भी दर्शकों की पसंदीदा सीरीज में शामिल रही। हरिद्वार की पृष्ठभूमि पर बनी यह कहानी नेटवर्क मार्केटिंग के चमकदार लेकिन खतरनाक जाल को उजागर करती है। दूसरी ओर नेटफ्लिक्स की ग्लोरी ने खेल जगत की चमक के पीछे छिपे संघर्ष और साजिशों को रोमांचक अंदाज में दिखाया। इमरान हाशमी की तस्करी द स्मगलर्स वेब ने भी दर्शकों को बांधे रखा। मुंबई एयरपोर्ट पर चल रहे अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के खिलाफ जंग की यह कहानी एक हाई वोल्टेज थ्रिलर के रूप में सामने आई। वहीं विजय वर्मा स्टारर मटका किंग ने मुंबई के सट्टेबाजी साम्राज्य की कहानी को दिलचस्प अंदाज में पेश किया और खूब सराहना बटोरी। अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई राख इस साल की सबसे चर्चित क्राइम थ्रिलर सीरीज में गिनी जा रही है। अली फजल और सोनाली बेंद्रे की दमदार अदाकारी ने इस रहस्यमयी कहानी को और प्रभावशाली बना दिया। दो बच्चों के अचानक गायब होने की घटना से शुरू होने वाली यह कहानी दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है। बायोपिक श्रेणी में हेलो बच्चों ने खास पहचान बनाई। फिजिक्स वाला के संस्थापक अलख पांडे के संघर्ष और सफलता की कहानी पर आधारित इस सीरीज ने युवाओं को प्रेरित किया। वहीं हाथरस ने एक संवेदनशील और चर्चित वास्तविक घटना को डॉक्यू सीरीज के रूप में पेश कर दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। इस साल की सबसे सराही गई सीरीज में मेड इन इंडिया ए टाइटन स्टोरी भी शामिल है। यह सीरीज बताती है कि किस तरह भारतीय उद्योग जगत ने चुनौतियों के बीच एक वैश्विक ब्रांड की नींव रखी। नसीरुद्दीन शाह और जिम सरभ की शानदार अदाकारी ने इसे और खास बना दिया। हालांकि सभी सीरीज के बीच सपने वर्सेस एवरीवन सीजन 2 ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया। 9.6 की शानदार आईएमडीबी रेटिंग के साथ यह सीरीज दर्शकों की पहली पसंद बनी हुई है। मिडिल क्लास युवाओं के सपनों संघर्ष और महत्वाकांक्षाओं को बेहद भावनात्मक तरीके से पेश करने वाली इस कहानी ने लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई है। कुल मिलाकर साल 2026 ओटीटी कंटेंट के लिहाज से बेहद समृद्ध रहा है। अगर आप भी बेहतरीन कहानियों और दमदार अभिनय के शौकीन हैं तो ये 11 वेब सीरीज आपकी वॉचलिस्ट में जरूर शामिल होनी चाहिए।

Chhindwara Road Accident: छिंदवाड़ा हादसे पर सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान, मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख की सहायता

MP CM Mohan Yadav

Chhindwara Road Accident: भोपाल। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में हुए भीषण सड़क हादसे में 5 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि करीब 20 लोग घायल बताये जा रहे हैं। हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गहरा दुख जताते हुए मृतकों और घायलों के लिए आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। सीएम ने जताया शोक छिंदवाड़ा-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग पर टेमनी खुर्द के पास मजदूरों से भरी पिकअप और ट्रक की आमने-सामने टक्कर हो गई। हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया के जरिए शोक व्यक्त किया और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताई। राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी का विवाद गहराया, चंपत राय पर उठे सवाल, जांच से तय होगा आगे का रास्ता CM मोहन यादव ने किया 4-4 लाख मुआवजे का ऐलान CM मोहन यादव ने अपने X हैंडल पर ट्वीट करते हुए लिखा कि, ‘छिंदवाड़ा-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग पर टेमनी खुर्द के समीप हुई सड़क दुर्घटना अत्यंत दुखद है। मेरी संवेदनाएं प्रभावित परिजनों के साथ हैं। हम मृतकों के परिवारजनों को 4-4 लाख रुपये, गंभीर घायलों को 1-1 लाख रुपये एवं घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश देते हैं। उन्होंने लिखा कि बाबा महाकाल दिवंगतों को शांति व शोकाकुल परिजनों को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं।   छिंदवाड़ा-बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग पर टेमनी खुर्द के समीप हुई सड़क दुर्घटना अत्यंत दुखद है। मेरी संवेदनाएं प्रभावित परिजनों के साथ हैं। मृतकों के परिवारजनों को 4-4 लाख रुपये, गंभीर घायलों को 1-1 लाख रुपये एवं घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए… — Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 22, 2026 खेतों में काम करने जा रहे थे मजदूर बताया जा रहा है कि पिकअप में सवार करीब 26 मजदूर मछेरा गांव से खेतों में काम करने जा रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रहे ट्रक का टायर फट गया और वह अनियंत्रित होकर पिकअप से टकरा गया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप सड़क से दूर खेत में जा घुसी। हादसे में घायल हुए मजदूरों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों की टीम घायलों का इलाज कर रही है, जबकि एक गंभीर घायल को नागपुर रेफर किया गया है।

राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी का विवाद गहराया, चंपत राय पर उठे सवाल, जांच से तय होगा आगे का रास्ता

लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस विवाद के केंद्र में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय आ गए हैं, जिनकी भूमिका को लेकर अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। राम मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चंपत राय लंबे समय से ट्रस्ट के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते रहे हैं। समर्थक उन्हें अनुशासित और समर्पित कार्यकर्ता मानते हैं, वहीं आलोचक उन पर निर्णयों में एकतरफा रवैया अपनाने के आरोप लगाते रहे हैं। ट्रस्ट में बढ़ता असंतोष और पुराने विवाद सूत्रों और चर्चा के अनुसार, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई पुराने संत और महंत ट्रस्ट के गठन से ही कुछ फैसलों से असंतुष्ट रहे हैं। उनका आरोप रहा है कि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कई प्रमुख संतों और संस्थाओं को निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा गया। ट्रस्ट में अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और अन्य पदों की मौजूदगी के बावजूद, लंबे समय से यह धारणा रही है कि प्रशासनिक और संगठनात्मक निर्णयों में चंपत राय की भूमिका प्रमुख रही है। इसी कारण कुछ सदस्यों के बीच असंतोष की स्थिति भी बनी रही। चढ़ावे की चोरी का मामला और बढ़ता विवाद हाल ही में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले के बाद चंपत राय पर भी राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ पूर्व जुड़े लोगों और संतों ने सार्वजनिक रूप से आलोचना भी की है, जबकि कुछ ने जांच की मांग की है। हालांकि, चंपत राय को लेकर उनके समर्थक यह भी मानते हैं कि उनका सार्वजनिक जीवन पारदर्शिता और सादगी से जुड़ा रहा है और उन पर सीधे तौर पर किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप साबित नहीं हुआ है। सरकार और ट्रस्ट की प्रतिक्रिया इस पूरे मामले पर सरकार और ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों ने संयमित प्रतिक्रिया दी है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने ट्रस्ट के कार्यों में कुछ व्यवस्थागत कमियों की बात स्वीकार की है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर किसी भी तरह के गंभीर आरोपों से इनकार किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हालिया घटनाक्रमों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के चरित्र पर बिना ठोस आधार के टिप्पणी नहीं होनी चाहिए। आगे क्या होगा? सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच जारी है और यदि आवश्यकता पड़ी तो ट्रस्ट के ढांचे में बदलाव या पुनर्गठन पर भी विचार किया जा सकता है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट होगी। फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और आगे की स्थिति जांच रिपोर्ट और आधिकारिक निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

चातुर्मास कब से शुरू होगा? जानिए तिथि, धार्मिक महत्व, पूजा-विधि और पालन के प्रमुख नियम

नई दिल्ली। सनातन धर्म में चातुर्मास को भक्ति, तपस्या और आत्मसंयम का विशेष काल माना जाता है। यह चार महीने का पावन समय भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी पर जागते हैं। इसी अवधि को चातुर्मास कहा जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी से होगी और इसका समापन 20 नवंबर को देवउठनी एकादशी के दिन होगा। इस दौरान श्रावण, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास आएंगे। क्या है चातुर्मास का धार्मिक महत्व? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं। इसी कारण इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार और अन्य मांगलिक कार्यों को स्थगित रखा जाता है। देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु के जागने के साथ ही शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत फिर से हो जाती है। पौराणिक कथाओं में चातुर्मास का संबंध राजा बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार से बताया गया है। कथा के अनुसार, भगवान वामन ने राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी थी। दो पग में उन्होंने पृथ्वी और आकाश को नाप लिया, जबकि तीसरे पग के लिए राजा बलि ने अपना सिर अर्पित कर दिया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें वरदान दिया और चार माह तक उनके द्वार पर रहने का संकल्प लिया। इसी परंपरा से चातुर्मास की मान्यता जुड़ी मानी जाती है। चातुर्मास में क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य? चातुर्मास के दौरान विवाह, यज्ञ, गृह प्रवेश, जनेऊ संस्कार सहित अन्य बड़े शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है। हालांकि नियमित पूजा-पाठ, सत्यनारायण कथा, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई रोक नहीं होती। बल्कि इस समय को साधना, ध्यान और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। चातुर्मास में खान-पान के नियम इस अवधि में सात्विक जीवनशैली अपनाने और खान-पान में संयम रखने की सलाह दी जाती है। कई श्रद्धालु गुड़, तेल, बैंगन, हरी पत्तेदार सब्जियां, अधिक मसालेदार और तामसिक भोजन का त्याग करते हैं। वैष्णव परंपरा का पालन करने वाले भक्त प्याज, लहसुन और कुछ विशेष खाद्य पदार्थों से भी दूरी बनाए रखते हैं। मास अनुसार परहेज के नियम इस प्रकार बताए गए हैं श्रावण मास: पालक और हरी पत्तेदार सब्जियों से परहेज।भाद्रपद मास: दही का सेवन नहीं किया जाता।आश्विन मास: दूध का त्याग करने की परंपरा है।कार्तिक मास: मांसाहार, विशेष रूप से मछली का सेवन वर्जित माना जाता है। चातुर्मास में कैसे करें पूजा और साधना? चातुर्मास का पालन घर पर रहकर भी सरलता से किया जा सकता है। इसके लिए प्रतिदिन भगवान विष्णु की आराधना, मंत्र-जाप और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करने का विशेष महत्व बताया गया है। – प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर भगवान विष्णु की पूजा करें।– दीप प्रज्वलित कर तुलसी दल अर्पित करें।– विष्णु सहस्रनाम अथवा हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करें।– चातुर्मास में कम से कम एकादशी व्रत अवश्य रखें।– किसी एक प्रिय वस्तु या आदत का त्याग कर व्यक्तिगत संकल्प लें।– श्रीमद्भागवत, रामायण या अन्य धार्मिक ग्रंथों का पाठ एवं श्रवण करें।– अन्नदान, जरूरतमंदों की सहायता और धार्मिक सेवा कार्यों में सहभागिता करें।धार्मिक दृष्टि से चातुर्मास केवल व्रत और नियमों का समय नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, अनुशासन और ईश्वर भक्ति को जीवन में उतारने का अवसर भी माना जाता है।

दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह की विशाल सुरंग का खुलासा, 50 ईरानी ड्रोन और भारी हथियार बरामद

नई दिल्ली। इजरायल डिफेंस फोर्सेज IDF ने दक्षिणी लेबनान के माजदल जौन क्षेत्र में हिज्बुल्लाह के एक बड़े भूमिगत नेटवर्क का खुलासा करने का दावा किया है। सेना के अनुसार, गांव के नीचे करीब 200 मीटर लंबी और 29 मीटर गहरी सुरंग मिली है, जिसमें बड़ी मात्रा में हथियार, एंटी-टैंक मिसाइलें और 50 ईरानी निर्मित विस्फोटक ड्रोन बरामद किए गए हैं। IDF ने बताया कि यह कार्रवाई 2026 के युद्धविराम (सीजफायर) के दौरान चलाए जा रहे सुरक्षा अभियान के तहत की गई। पिछले सप्ताह 551वीं ब्रिगेड और विशेष याहलोम यूनिट ने इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया, जिसमें 20 से अधिक हिज्बुल्लाह लड़ाकों को मार गिराने का दावा किया गया। सेना ने सुरंग के आसपास मौजूद कई अन्य ठिकानों को भी ध्वस्त कर दिया।सुरंग में मौजूद थीं हमले की पूरी तैयारियांसेना के मुताबिक, सुरंग को इस तरह तैयार किया गया था कि आतंकी लंबे समय तक इसमें रह सकें। अंदर रहने के लिए कमरे बनाए गए थे और इजरायल की दिशा में लॉन्च शाफ्ट स्थापित किए गए थे। यहां से रॉकेट और मिसाइल हमलों को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी। बरामद किए गए 50 सुसाइड ड्रोन और एंटी-टैंक मिसाइलें संभावित हमले की तैयारियों की ओर संकेत करती हैं। ईरानी मदद से निर्माण का दावा IDF का कहना है कि यह सुरंग नेटवर्क पिछले एक दशक में ईरानी वित्तीय और सैन्य सहायता के जरिए तैयार किया गया। सेना के अनुसार, सुरंगों को जानबूझकर आबादी वाले क्षेत्रों के नीचे बनाया गया था और इनके कुछ हिस्से गांव की मस्जिद के आसपास भी जुड़े हुए थे। इजरायल ने आरोप लगाया है कि हिज्बुल्लाह नागरिक क्षेत्रों का इस्तेमाल अपनी सैन्य गतिविधियों को छिपाने के लिए करता रहा है।नागरिक इलाकों के नीचे हथियारों का जखीरा ऑपरेशन के दौरान जारी किए गए वीडियो में सुरंग के भीतर हथियारों के भंडार, ड्रोन और रहने की व्यवस्थाएं दिखाई गई हैं। इजरायल का दावा है कि इन संरचनाओं को स्कूलों, अस्पतालों और धार्मिक स्थलों के आसपास विकसित किया गया, जिससे स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता था। सीजफायर के बीच बढ़ा तनाव इजरायल का आरोप है कि युद्धविराम के बावजूद हिज्बुल्लाह अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने में जुटा हुआ था। दूसरी ओर, लेबनान लगातार इजरायली सैन्य अभियानों पर सवाल उठाता रहा है। इस ताजा घटनाक्रम ने क्षेत्र में लागू सीजफायर की प्रभावशीलता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आगे भी जारी रहेगा अभियान IDF के प्रवक्ता ने कहा कि दक्षिणी लेबनान में तलाशी अभियान आगे भी जारी रहेगा। सेना का लक्ष्य सीमा क्षेत्र के आसपास मौजूद सभी संभावित सुरंगों और आतंकी ठिकानों का पता लगाकर उन्हें निष्क्रिय करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इजरायल की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने की कोई नई कोशिश हुई तो सेना और कड़ी कार्रवाई करेगी।

एमपी में चार दिन तक लू और उमस का कहर, 25 जून के बाद मानसून की दस्तक के संकेत

भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम के तेवर फिलहाल राहत देने वाले नहीं हैं। प्रदेश में 26 जून तक लू, उमस भरी गर्मी और कहीं-कहीं आंधी-बारिश का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। मानसून की एंट्री में देरी और प्री-मानसून गतिविधियों के कमजोर पड़ने से गर्मी का प्रभाव बढ़ गया है। पिछले दो दिनों से जबलपुर संभाग के कई इलाकों में हीटवेव का असर भी महसूस किया जा रहा है। मौसम विभाग के भोपाल केंद्र ने जबलपुर, रीवा और सागर संभाग के जिलों के लिए अगले चार दिनों तक हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। सोमवार को नरसिंहपुर, जबलपुर, मंडला, उमरिया और डिंडौरी में दिन के समय गर्म हवाएं चलने की संभावना है। हालांकि शाम के बाद कुछ क्षेत्रों में आंधी और बारिश हो सकती है। इसके अलावा ग्वालियर, भिंड, मुरैना, दतिया, श्योपुर, गुना, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, राजगढ़, भोपाल, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, देवास, सीहोर, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में भी गर्मी का असर बना रहने का अनुमान है। 21 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश की संभावनाहीटवेव और गर्मी के बीच प्रदेश के 21 से अधिक जिलों में आंधी और बारिश का दौर भी जारी रह सकता है। झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, मैहर, अनूपपुर, कटनी, दमोह, सागर, विदिशा और अशोकनगर में तेज आंधी चलने का अलर्ट जारी किया गया है।रायसेन में सबसे ज्यादा बारिश रविवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी और बारिश दर्ज की गई। रायसेन में 61 मिमी यानी करीब ढाई इंच बारिश हुई। भोपाल में दोपहर के समय जोरदार बारिश हुई, जबकि सतना में लगभग पौन इंच पानी गिरा। जबलपुर, खजुराहो, नौगांव और सिवनी में भी बारिश का सिलसिला बना रहा।तापमान में आई गिरावट बारिश के असर से रविवार को अधिकतम तापमान में कुछ कमी दर्ज की गई। भोपाल में तापमान 35.3 डिग्री सेल्सियस, इंदौर में 37.1 डिग्री, ग्वालियर में 39.7 डिग्री, उज्जैन में 36 डिग्री और जबलपुर में 38 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश के हिल स्टेशन पचमढ़ी में सबसे कम 32.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। वहीं सिवनी और शिवपुरी में 35 डिग्री, रायसेन में 36 डिग्री तथा सागर और टीकमगढ़ में 36.5 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। दतिया प्रदेश का सबसे गर्म जिला रहा, जहां पारा 40.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मानसून की दस्तक में अभी और इंतजार मध्य प्रदेश में मानसून निर्धारित समय से करीब सात दिन देरी से चल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून को प्रदेश में प्रवेश करने में अभी लगभग चार दिन और लग सकते हैं। अनुमान है कि 25 जून के बाद मानसून प्रदेश में दस्तक देगा। वहीं 23 जून तक इसके छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की ओर आगे बढ़ने की संभावना है।

CM Mohan Yadav News: CM मोहन यादव को सर्व किया गंदा पानी, अधिकारी को भेजा कारण बताओ नोटिस

Contaminated Water

CM Mohan Yadav News: मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के शाजापुर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे के दौरान पीने के पानी की व्यवस्था में बड़ी लापरवाही सामने आई है। जांच में खुलासा हुआ है कि मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी मेहमानों को जो पानी उपलब्ध कराया गया था, वह गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। मामले में अब जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है। सीएमओ ने जताई थी आपत्ति 30 अप्रैल को मुख्यमंत्री मोहन यादव शाजापुर दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान पोलायकलां स्थित सेमली धाम आश्रम में उनके भोजन और पेयजल की व्यवस्था की गई थी। बताया गया कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधिकारियों ने पानी में दुर्गंध और गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई थी। इसके बाद पानी के नमूनों की जांच कराई गई। Morena Police Negligence: NEET ड्यूटी छोड़ AC कर में सोते दिखे आरक्षक, मुरैना में परीक्षा के दौरान थे तैनात जांच रिपोर्ट में सामने आई गंभीर खामी भोपाल की स्टेट रिसर्च लेबोरेटरी की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि पानी में गंदलेपन (टर्बिडिटी) का स्तर तय मानकों से करीब सात गुना अधिक था। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह का पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है और पीने योग्य नहीं माना जाता। अधिकारियों को जारी हुआ नोटिस उज्जैन संभाग के कमिश्नर आशीष सिंह ने 18 मई को संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया था, जो अब सामने आया है। नोटिस में कहा गया है कि वीआईपी मेहमानों के लिए की गई पेयजल व्यवस्था में गंभीर कमियां पाई गईं और उपलब्ध कराया गया पानी पीने योग्य नहीं था। GWALIOR MURDER CASE: ‘जिंदा है या नहीं’ ये देखने सलवार-सूट पहनकर अस्पताल पहुंचा हमलावर, पत्नी ने पहचाना अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी नोटिस में इस लापरवाही को मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत गंभीर कदाचार माना गया है। साथ ही मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। संबंधित अधिकारी से पूरे मामले में जवाब मांगा गया है।

Morena Police Negligence: NEET ड्यूटी छोड़ AC कर में सोते दिखे आरक्षक, मुरैना में परीक्षा के दौरान थे तैनात

Traffic Constable

Morena Police Negligence: मध्यप्रदेश। मुरैना में 21 जून को नीट परीक्षा के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक ट्रैफिक आरक्षक का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। वायरल वीडियो में आरक्षक अपनी कार के अंदर सोता हुआ दिखाई दे रहा है। मामला उस समय का बताया जा रहा है जब जिले में NEET परीक्षा को लेकर सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए गए थे। परीक्षा के लिए किए गए थे विशेष इंतजाम जानकारी के अनुसार जिले में NEET परीक्षा के लिए सात परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। परीक्षा को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए परीक्षा केंद्रों के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया था। वहीं प्रमुख चौराहों पर यातायात व्यवस्था संभालने के लिए ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी लगाई गई थी। GWALIOR MURDER CASE: ‘जिंदा है या नहीं’ ये देखने सलवार-सूट पहनकर अस्पताल पहुंचा हमलावर, पत्नी ने पहचाना ड्यूटी छोड़ AC कार में सो गए बताया जा रहा है कि ट्रैफिक थाने में पदस्थ आरक्षक राहुल गुर्जर की ड्यूटी बैरियर चौराहा, ट्रैफिक थाना परिसर के सामने लगाई गई थी। आरोप है कि ड्यूटी के दौरान वह अपनी निजी स्विफ्ट कार में जाकर बैठ गया और एसी चालू कर सो गया। इसी दौरान किसी व्यक्ति ने उसका वीडियो बना लिया, जिसमें वह कार के अंदर आराम करता नजर आ रहा है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया। वायरल वीडियो के बाद उठे सवाल वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि जब परीक्षा के दौरान सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस पर थी, तब ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी का इस तरह आराम करना गंभीर लापरवाही माना जा सकता है। Indian Railways Fine Hike: ट्रैन में बिना टिकट बैठने और 500 का जुर्माना; महिला कोच में घुसने पर देने होंगे 2500 रूपए अधिकारियों का पक्ष नहीं आया सामने मामले में ट्रैफिक थाना प्रभारी संतोष भदौरिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। फोन कॉल किए जाने के बावजूद उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। फिलहाल इस मामले में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।