GWALIOR MURDER CASE: ‘जिंदा है या नहीं’ ये देखने सलवार-सूट पहनकर अस्पताल पहुंचा हमलावर, पत्नी ने पहचाना

GWALIOR MURDER CASE: मध्यप्रदेश। ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल से एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने मरीजों और अस्पताल स्टाफ को भी हैरान कर दिया। के भेष में एक युवक सर्जिकल वार्ड में घुस गया, बाद में पता चला कि वह वही आरोपी है। लेकिन उसकी यह चाल ज्यादा देर तक नहीं चल सकी। जिस व्यक्ति पर उसने हमला किया था, उसकी पत्नी ने उसे पहचान लिया और शोर मचा दिया। इसके बाद लोगों ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। Indian Railways Fine Hike: ट्रैन में बिना टिकट बैठने और 500 का जुर्माना; महिला कोच में घुसने पर देने होंगे 2500 रूपए मजदूरी के बाद हुआ था विवाद कंपू थाना क्षेत्र के चार शहर का नाका निवासी 32 वर्षीय देवेन्द्र मौर्य मजदूरी करता है। शनिवार रात वह अपनी पत्नी रचना मौर्य और अन्य मजदूरों के साथ गुढ़ा-गुढ़ी नाका इलाके में वॉल पुट्टी का ट्रक खाली करने गया था। काम खत्म होने के बाद देवेन्द्र अपने परिचित पप्पू भदौरिया और धर्मेन्द्र भदौरिया के साथ बैठकर शराब पीने लगा। इसी दौरान किसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ गई कि मामला हिंसा तक पहुंच गया। GWALIOR WEATHER UPDATE: ग्वालियर में लोग हुए उमस से परेशान, पारा-39 के पार; आज हलकी बारिश की संभावना सीने, पेट और गर्दन पर किए चाकू से वार पत्नी रचना मौर्य ने बताया कि विवाद बढ़ने पर दोनों आरोपियों ने चाकू निकाल लिया और देवेन्द्र पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। आरोपियों ने उसके सीने, पेट, गर्दन और हाथ पर कई वार किए। वारदात के बाद दोनों आरोपी वहां से फरार हो गए। जिसके बाद परिजनों ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। रसोई में इन 5 चीजों का खाली होना पड़ सकता है भारी मां अन्नपूर्णा हो सकती हैं नाराज घायल मारा या जिन्दा है ये देखने पहुंचा अस्पताल पुलिस का कहना है कि घटना के बाद आरोपी धर्मेन्द्र भदौरिया को इस बात का डर था कि कहीं घायल की मौत न हो जाए। इसी वजह से वह महिला का भेष बना कर उसकी हालत जानने अस्पताल पहुंचा था। लेकिन घायल के पास मौजूद उसकी पत्नी आरोपी को पहचान लिया। महिला ने उसकी कद-काठी और चलने के तरीके को गौर से देखा और तुरंत समझ गयी कि यह वही आरोपी है जिसने उसके पति पर हमला किया था। आरोपी को देखते ही रचना ने शोर मचा दिया। हंगामा होते ही आरोपी वहां से भागने लगा, लेकिन अस्पताल में मौजूद लोगों और सुरक्षाकर्मियों ने उसे पकड़ लिया। एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरे की तलाश सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी धर्मेन्द्र भदौरिया को हिरासत में ले लिया। रचना मौर्य की शिकायत पर धर्मेन्द्र और पप्पू भदौरिया के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने धर्मेन्द्र को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दूसरा आरोपी पप्पू भदौरिया अभी फरार है। उसकी तलाश के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। वहीं घायल देवेन्द्र का अस्पताल में इलाज जारी है।
Indian Railways Fine Hike: ट्रैन में बिना टिकट बैठने और 500 का जुर्माना; महिला कोच में घुसने पर देने होंगे 2500 रूपए

Indian Railways Fine Hike: ग्वालियर। अब ट्रैन में बिना टिकट सफर करना इतना आसान नहीं होने वाला है, क्योंकि यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने नियमों में बदलाव कार दिए है। नए प्रावधानों के तहत नियम तोड़ने वालों को अब पहले से ज्यादा जुर्माना भरना पड़ सकता है। रेलवे ने करीब 13 साल बाद जुर्माने की रकम में बदलाव किया है। नए नियमों के मुताबिक अगर कोई यात्री बिना टिकट या गलत टिकट के साथ यात्रा करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे किराए के अलावा कम से कम 500 रुपये जुर्माना भरना होगा। पहले यह जुर्माना 250 रुपये था। GWALIOR WEATHER UPDATE: ग्वालियर में लोग हुए उमस से परेशान, पारा-39 के पार; आज हलकी बारिश की संभावना दूसरे के टिकट पर सफर करना पड़ सकता है महंगा कई लोग रिश्तेदार या दोस्तों के नाम पर बुक टिकट से यात्रा कर लेते हैं, लेकिन अब ऐसा करना मुश्किल हो सकता है। रेलवे के अनुसार यदि कोई यात्री किसी दूसरे व्यक्ति के नाम वाले टिकट पर यात्रा करता हुआ पाया गया, तो उसका टिकट रद्द किया जा सकता है और उसके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है। महिला कोच में घुसने पर लगेगा भारी जुर्माना महिला यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे ने सख्ती बढ़ा दी है। यदि कोई पुरुष यात्री बिना अनुमति महिला कोच में यात्रा करता हुआ पाया जाता है, तो उस पर 2500 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। नीट परीक्षा व्यवस्था के बीच पीएम मोदी का संवेदनशील कदम एयरपोर्ट पर रोका काफिला ट्रेन और स्टेशन पर अनुशासन जरूरी रेलवे ने साफ किया है कि स्टेशन या ट्रेन में गंदगी फैलाना, नशे की हालत में हंगामा करना या दूसरों को परेशान करना भी महंगा पड़ सकता है। ऐसे मामलों में 2000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। फेरी और भीख मांगने वालों पर भी कार्रवाई ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर बिना अनुमति सामान बेचने, फेरी लगाने या भीख मांगने वालों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाएंगे। ऐसे मामलों में जुर्माने के साथ जेल की सजा का भी प्रावधान रखा गया है। भोपाल पीएम आवास मल्टी में नकाबपोश बदमाशों का आतंक लाखों की चोरी से दहशत रेलवे का कहना है कि इन बदलावों का मकसद यात्रियों को सुरक्षित, साफ और बेहतर यात्रा अनुभव देना है। इसलिए अगली बार ट्रेन में सफर करने से पहले नियमों का ध्यान जरूर रखें, क्योंकि अब छोटी सी लापरवाही भी आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है।
कचरे से कमाई का नया तरीका 20 दिन में तैयार करें घर पर नेचुरल काला सोना खाद

नई दिल्ली । घर के किचन से निकलने वाला कचरा अक्सर लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन यही कचरा सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो पौधों के लिए सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक खाद बन सकता है, जिसे गार्डनिंग की दुनिया में ‘काला सोना’ कहा जाता है। आज के समय में जब बाजार की महंगी खाद हर किसी के लिए आसान नहीं है, ऐसे में घर पर ही ऑर्गेनिक खाद बनाना एक किफायती और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है। गार्डनिंग एक्सपर्ट जोड़ी अन्नू और वरुण ने एक ऐसा सरल तरीका बताया है, जिससे केवल 20 दिनों में किचन वेस्ट पूरी तरह से पौधों के लिए उपयोगी खाद में बदल सकता है। इस प्रक्रिया की शुरुआत सही कंटेनर चुनने से होती है। प्लास्टिक के बजाय मिट्टी का गमला या वेंटिलेशन वाला कंटेनर सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें हवा का संचार बेहतर होता है। नीचे ड्रेनेज होल होना जरूरी है ताकि अतिरिक्त नमी बाहर निकल सके। गमले को सीधे जमीन पर न रखकर किसी स्टैंड पर रखने से भी एयर फ्लो बना रहता है और बदबू या कीड़ों की समस्या कम होती है। इसके बाद किचन से निकलने वाले गीले कचरे का सही चयन जरूरी है। इसमें फलों के छिलके, सब्जियों के अवशेष, चाय की पत्ती और सूखी पत्तियां शामिल की जा सकती हैं। लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि पका हुआ खाना, तेल, घी, मांस, डेयरी उत्पाद या हड्डियां बिल्कुल नहीं डालनी चाहिए क्योंकि इससे सड़न और फंगस की समस्या बढ़ सकती है। अन्नू और वरुण के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया का सबसे खास हिस्सा है एक विशेष कंपोस्टिंग पाउडर का इस्तेमाल। हर बार जब भी कचरा डाला जाए, उस पर केवल एक छोटा चम्मच पाउडर छिड़कना होता है। इसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया कचरे को तेजी से तोड़कर उसे खाद में बदलने में मदद करते हैं और बदबू को भी नियंत्रित रखते हैं। कंपोस्टिंग में ऑक्सीजन की भूमिका बहुत अहम होती है। इसलिए हर 3 से 4 दिन में कचरे को हल्का-हल्का मिलाना जरूरी है ताकि हवा सभी हिस्सों तक पहुंच सके। यह प्रक्रिया नमी और तापमान को संतुलित रखती है और खाद बनने की गति को तेज कर देती है। सामान्य तौर पर खाद बनने में महीनों लग सकते हैं, लेकिन इस आसान तकनीक से लगभग 20 दिनों में ही गीला कचरा गहरे भूरे रंग की सूखी, खुशबूदार और पोषक तत्वों से भरपूर ऑर्गेनिक खाद में बदल जाता है। यह घर की बनी खाद पौधों के लिए किसी प्राकृतिक अमृत से कम नहीं है। इसमें मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं, जड़ों को मजबूत बनाते हैं और पौधों की ग्रोथ को तेजी से बढ़ाते हैं। इस तरह यह तरीका न केवल आपके पौधों को स्वस्थ बनाता है बल्कि कचरे के सही उपयोग से पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। घर के किचन से निकलने वाला कचरा अक्सर लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन यही कचरा सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो पौधों के लिए सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक खाद बन सकता है, जिसे गार्डनिंग की दुनिया में ‘काला सोना’ कहा जाता है। आज के समय में जब बाजार की महंगी खाद हर किसी के लिए आसान नहीं है, ऐसे में घर पर ही ऑर्गेनिक खाद बनाना एक किफायती और पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है। गार्डनिंग एक्सपर्ट जोड़ी अन्नू और वरुण ने एक ऐसा सरल तरीका बताया है, जिससे केवल 20 दिनों में किचन वेस्ट पूरी तरह से पौधों के लिए उपयोगी खाद में बदल सकता है। इस प्रक्रिया की शुरुआत सही कंटेनर चुनने से होती है। प्लास्टिक के बजाय मिट्टी का गमला या वेंटिलेशन वाला कंटेनर सबसे अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें हवा का संचार बेहतर होता है। नीचे ड्रेनेज होल होना जरूरी है ताकि अतिरिक्त नमी बाहर निकल सके। गमले को सीधे जमीन पर न रखकर किसी स्टैंड पर रखने से भी एयर फ्लो बना रहता है और बदबू या कीड़ों की समस्या कम होती है। इसके बाद किचन से निकलने वाले गीले कचरे का सही चयन जरूरी है। इसमें फलों के छिलके, सब्जियों के अवशेष, चाय की पत्ती और सूखी पत्तियां शामिल की जा सकती हैं। लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि पका हुआ खाना, तेल, घी, मांस, डेयरी उत्पाद या हड्डियां बिल्कुल नहीं डालनी चाहिए क्योंकि इससे सड़न और फंगस की समस्या बढ़ सकती है। अन्नू और वरुण के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया का सबसे खास हिस्सा है एक विशेष कंपोस्टिंग पाउडर का इस्तेमाल। हर बार जब भी कचरा डाला जाए, उस पर केवल एक छोटा चम्मच पाउडर छिड़कना होता है। इसमें मौजूद अच्छे बैक्टीरिया कचरे को तेजी से तोड़कर उसे खाद में बदलने में मदद करते हैं और बदबू को भी नियंत्रित रखते हैं। कंपोस्टिंग में ऑक्सीजन की भूमिका बहुत अहम होती है। इसलिए हर 3 से 4 दिन में कचरे को हल्का-हल्का मिलाना जरूरी है ताकि हवा सभी हिस्सों तक पहुंच सके। यह प्रक्रिया नमी और तापमान को संतुलित रखती है और खाद बनने की गति को तेज कर देती है। सामान्य तौर पर खाद बनने में महीनों लग सकते हैं, लेकिन इस आसान तकनीक से लगभग 20 दिनों में ही गीला कचरा गहरे भूरे रंग की सूखी, खुशबूदार और पोषक तत्वों से भरपूर ऑर्गेनिक खाद में बदल जाता है। यह घर की बनी खाद पौधों के लिए किसी प्राकृतिक अमृत से कम नहीं है। इसमें मौजूद नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं, जड़ों को मजबूत बनाते हैं और पौधों की ग्रोथ को तेजी से बढ़ाते हैं। इस तरह यह तरीका न केवल आपके पौधों को स्वस्थ बनाता है बल्कि कचरे के सही उपयोग से पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वास्तु शास्त्र में घड़ी का महत्व सही दिशा से बदल सकती है आर्थिक स्थिति

नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में समय को केवल मापने का साधन नहीं माना जाता बल्कि इसे ऊर्जा और भाग्य से भी जोड़ा जाता है। घर में लगी दीवार घड़ी का प्रभाव केवल समय देखने तक सीमित नहीं रहता बल्कि यह घर के वातावरण और आर्थिक स्थिति पर भी असर डालती है। माना जाता है कि यदि घड़ी सही दिशा और सही तरीके से लगाई जाए तो जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं। वहीं गलत स्थान पर लगी या खराब घड़ी बाधाओं का कारण बन सकती है। घर में घड़ी का चयन भी बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। वास्तु के अनुसार गोल आकार वाली घड़ी को अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह निरंतरता और संतुलन का प्रतीक होती है। अंडाकार और चौकोर आकार भी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाते हैं। पेंडुलम वाली घड़ी को विशेष रूप से शुभ माना जाता है क्योंकि उसकी गति घर में ऊर्जा के प्रवाह को सक्रिय बनाए रखती है। घड़ी के रंग का भी विशेष महत्व होता है। पूर्व दिशा के लिए हल्के रंग जैसे सफेद हल्का नीला और हल्का हरा शुभ माने जाते हैं। उत्तर दिशा में सफेद या धातु जैसे रंग बेहतर माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि सही रंग का चयन मानसिक शांति और आर्थिक स्थिरता को बढ़ाता है। घड़ी की नियमित सफाई भी आवश्यक है क्योंकि धूल या गंदगी ऊर्जा के प्रवाह को बाधित कर सकती है। वास्तु के अनुसार घड़ी लगाने की दिशा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पूर्व दिशा को अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यह सूर्य उदय की दिशा है और सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत मानी जाती है। उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना गया है इसलिए यहां घड़ी लगाने से आर्थिक लाभ और समृद्धि के अवसर बढ़ते हैं। पश्चिम दिशा को भी उपयुक्त माना गया है यदि अन्य दिशा में स्थान उपलब्ध न हो। दक्षिण दिशा को घड़ी लगाने के लिए अशुभ माना जाता है क्योंकि इसे यम की दिशा कहा गया है। इस दिशा में घड़ी लगाने से मानसिक तनाव और रुकावटें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा दरवाजे के ठीक ऊपर घड़ी लगाना भी उचित नहीं माना जाता क्योंकि इससे घर के सदस्यों पर दबाव और बेचैनी का प्रभाव पड़ सकता है। टूटी हुई या बंद घड़ी को घर में रखना भी नकारात्मक ऊर्जा का कारण माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि रुकी हुई घड़ी जीवन में रुकावटों और प्रगति में बाधा का संकेत देती है। घड़ी हमेशा सही समय दिखानी चाहिए या फिर हल्का आगे होना शुभ माना जाता है। पीछे चलने वाली घड़ी को प्रगति में रुकावट का प्रतीक माना जाता है। घर में घड़ी का सही चयन और सही स्थान न केवल समय को व्यवस्थित करता है बल्कि यह मानसिक शांति और आर्थिक उन्नति में भी सहायक माना जाता है। वास्तु के इन सरल नियमों का पालन करके व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है और तरक्की के नए रास्ते खोल सकता है।
सोमवार पूजा विधि: भगवान शिव की कृपा पाने का सरल और प्रभावी तरीका, जानें पूरी विधि

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ को समर्पित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन शिवजी की आराधना करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। विशेष रूप से अविवाहित कन्याएं अच्छे वर की प्राप्ति के लिए और गृहस्थ जीवन में सुख-शांति के लिए सोमवार का व्रत रखती हैं। यह दिन आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। सुबह की पूजा विधि: कैसे करें शिव आराधना की शुरुआतसोमवार के दिन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। स्नान के बाद साफ और हल्के सफेद या नीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या शिवालय में जाकर भगवान शिव का ध्यान करें और पूजा स्थल को स्वच्छ करें। इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित कर पूजा की शुरुआत की जाती है। अभिषेक और पूजन की विधिभगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग का अभिषेक अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सबसे पहले जल और गंगाजल से अभिषेक करें, उसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प और भस्म चढ़ाना शुभ माना जाता है। बेलपत्र पर “ॐ नमः शिवाय” लिखकर चढ़ाने का विशेष महत्व होता है। मंत्र जाप और ध्यान का महत्वपूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए। इससे मन शांत होता है और मानसिक तनाव दूर होता है। यदि संभव हो तो रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करना अधिक फलदायी माना जाता है। इसके साथ शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करने से विशेष लाभ मिलता है। सोमवार व्रत की विधि और नियमसोमवार को व्रत रखने वाले भक्त दिनभर फलाहार या दूध का सेवन करते हैं। व्रत के दौरान सात्विक आचरण अपनाना चाहिए और क्रोध, झूठ व नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए। संध्या के समय शिव आरती कर व्रत का समापन किया जाता है। कई भक्त लगातार 16 सोमवार का व्रत रखते हैं, जिसे अत्यंत फलदायी माना गया है। दान और सेवा का महत्वसोमवार के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। सफेद वस्त्र, चावल, दूध या गरीबों को भोजन दान करना शुभ माना जाता है। इससे भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है। क्या न करें इस दिनसोमवार के दिन मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। किसी का अपमान, झूठ बोलना और क्रोध करना व्रत के प्रभाव को कम कर सकता है। इस दिन मन को शांत और भक्ति में लीन रखना चाहिए। सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। सही विधि से पूजा, व्रत और मंत्र जाप करने से भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है और सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं।
GWALIOR WEATHER UPDATE: ग्वालियर में लोग हुए उमस से परेशान, पारा-39 के पार; आज हलकी बारिश की संभावना

HIGHLIGHTS: तापमान 39.7°C पहुंचा। उमस से बढ़ी परेशानी। 24 घंटे में बारिश के आसार। तेज हवाएं चल सकती हैं। 30 जून तक मानसून संभव। GWALIOR WEATHER UPDATE: ग्वालियर। ग्वालियर में मौसम के मिजाज लगातार बदलते हुए नजर आ रहे हैं। एक तरफ शहर में रुक-रुक बारिश का दौर जारी है, वहीं दूसरी तरफ उमस भी बढ़ गई है। रविवार को अधिकतम तापमान 39.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिससे लोगों को गर्मी और चिपचिपी उमस का सामना करना पड़ा। सोमवार सुबह भी मौसम गर्म और उमस भरा रहा। सुबह से आसमान साफ रहने के कारण सूर्य की तपिश ज्यादा महसूस हुई। आज का मौसम अपडेट: दिनभर गर्मी का असर, दोपहर बाद बारिश की हल्की राहत की संभावना अरब सागर से आ रही हवाएं बढ़ा रही हैं परेशानी मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अरब सागर से लगातार नमीयुक्त हवाएं आ रही हैं। इन हवाओं की वजह से वातावरण में नमी बढ़ गई है, जिससे लोगों को दिनभर उमस का सामना करना पड़ रहा है। खासकर दोपहर के समय हालात ज्यादा मुश्किल हो रहे हैं। सीहोर में किसानों-कांग्रेस नेताओं ने रोका शिवराज का काफिला, बोले- “आप हमारे भी प्रतिनिधि”; नीमच में विधायक को जनता का विरोध झेलना पड़ा बारिश के साथ बदल सकता है मौसम हालांकि राहत की खबर भी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले 24 घंटे में ग्वालियर-चंबल के कुछ इलाकों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। इसके अलावा बादल छाने और तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। यदि ऐसा होता है तो लोगों को गर्मी और उमस से कुछ राहत मिल सकती है। 30 जून तक पहुंच सकता है मानसून मानसून का इंतजार कर रहे लोगों के लिए अच्छी खबर यह है कि मौसम विभाग ने 30 जून तक ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में मानसून पहुंचने की संभावना जताई है। फिलहाल मानसून की चाल सामान्य बनी हुई है और यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो जल्द ही बारिश का दौर शुरू हो सकता है। इंदौर ने रचा योग इतिहास: 10 हजार साधकों ने 3 मिनट तक किया सामूहिक भ्रामरी प्राणायाम, बना रिकॉर्ड जाने आपके शहर का तापमान? ग्वालियर – 39.7°C भोपाल – 34.8°C इंदौर – 31.8°C जबलपुर – 32.6°C उज्जैन – 32.0°C सागर – 33.5°C रीवा – 35.2°C गुना – 36.4°C शिवपुरी – 37.1°C मुरैना – 40.2°C दोपहर में सावधानी जरूरी विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि तेज धूप और उमस के दौरान दोपहर में बिना जरूरी काम के घर से बाहर न निकलें। पर्याप्त पानी पीते रहें और शरीर को हाइड्रेट रखें। मौसम में फिलहाल उतार-चढ़ाव बना रहेगा, लेकिन आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है।
बच्चों में दस्त बन सकता है गंभीर खतरा, समय पर इलाज और देखभाल से बचाई जा सकती है जान

नई दिल्ली। बच्चों में होने वाली सबसे आम लेकिन बेहद गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है दस्त, जिसे चिकित्सा भाषा में Diarrhea कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या जितनी सामान्य लगती है, उतनी ही खतरनाक भी हो सकती है, यदि समय पर ध्यान न दिया जाए। विशेषकर छोटे बच्चों में दस्त के कारण शरीर में पानी और आवश्यक पोषक तत्वों की तेजी से कमी हो जाती है, जिससे निर्जलीकरण (Dehydration), कमजोरी और कई जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ और नेशनल हेल्थ मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार National Health Mission लगातार लोगों को जागरूक कर रहा है कि बच्चों में दस्त को हल्के में लेना गंभीर भूल साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों की पहचान और तुरंत उपचार ही बच्चे की जान बचाने में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि दस्त से बचाव के लिए सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम है शिशु को शुरुआती छह महीनों तक केवल मां का दूध देना। स्तनपान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है और कई संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करता है। यह प्राकृतिक रूप से बच्चे के शरीर को मजबूत आधार देता है। दूसरा महत्वपूर्ण उपाय है स्वच्छता का पालन। गंदगी और अस्वच्छ वातावरण दस्त फैलाने वाले प्रमुख कारणों में से एक है। इसलिए बच्चों के आसपास साफ-सफाई रखना, हाथों को नियमित धोना और सुरक्षित पेयजल का उपयोग करना बेहद जरूरी माना गया है। इसके साथ ही रोटावायरस और खसरा जैसी बीमारियों के खिलाफ समय पर टीकाकरण भी बच्चों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। तीसरा और सबसे जरूरी कदम है—यदि बच्चे को दस्त हो जाए तो तुरंत उपचार शुरू करना। डॉक्टरों के अनुसार हर बार दस्त होने पर बच्चे को Oral Rehydration Solution (ओआरएस) देना चाहिए ताकि शरीर में पानी और नमक की कमी पूरी हो सके। इसके साथ ही चिकित्सक की सलाह पर जिंक की गोली 14 दिनों तक देना भी लाभकारी माना जाता है, जो दस्त की अवधि और गंभीरता को कम करने में मदद करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि माता-पिता समय पर इन उपायों को अपनाएं तो बच्चों को गंभीर स्थिति में पहुंचने से बचाया जा सकता है। दस्त के दौरान सबसे बड़ी चुनौती शरीर में तेजी से होने वाला पानी का नुकसान होता है, जिसे समय रहते रोका जाए तो स्थिति सामान्य की जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि बच्चों को हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक आहार दिया जाए तथा किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए। दस्त के लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना सबसे सुरक्षित विकल्प है। कुल मिलाकर, जागरूकता, स्वच्छता और सही उपचार ही बच्चों को इस खतरनाक लेकिन नियंत्रित की जा सकने वाली बीमारी से सुरक्षित रखने की सबसे बड़ी कुंजी है।
आज बाजार में अस्थिरता के आसार, 22 जून को रह सकता है शेयर मार्केट में दबाव और रिकवरी दोनों

नई दिल्ली । सप्ताह की शुरुआत में निवेशक आमतौर पर सतर्क रुख अपनाते हैं। ग्लोबल मार्केट से मिले संकेतों के आधार पर सेंसेक्स और निफ्टी में हल्की बढ़त या गिरावट दोनों ही देखने को मिल सकती है। यदि अमेरिकी और एशियाई बाजारों में मजबूती रहती है तो भारतीय बाजार में भी सकारात्मक शुरुआत संभव है। बैंकिंग और IT सेक्टर पर नजरबाजार में बैंकिंग और IT सेक्टर हमेशा प्रमुख भूमिका निभाते हैं। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो इन सेक्टरों में तेजी देखी जा सकती है। वहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की हलचल बनी रह सकती है। वैश्विक संकेत तय करेंगे दिशाकच्चे तेल की कीमतें और डॉलर इंडेक्स बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। अगर कच्चे तेल में तेजी आती है तो भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, विदेशी बाजारों में स्थिरता या तेजी से घरेलू बाजार को समर्थन मिल सकता है। निवेशकों के लिए सावधानी जरूरीविशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे समय में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। छोटे समय के ट्रेड में जोखिम अधिक हो सकता है, इसलिए स्टॉप-लॉस का इस्तेमाल जरूरी माना जाता है। कुल मिलाकर 22 जून को शेयर बाजार में हल्की तेजी के साथ उतार-चढ़ाव का माहौल रह सकता है। बाजार किसी एक दिशा में मजबूत ट्रेंड बनाने से पहले वैश्विक संकेतों का इंतजार कर सकता है।
आज का मौसम अपडेट: दिनभर गर्मी का असर, दोपहर बाद बारिश की हल्की राहत की संभावना

मध्यप्रदेश । आज सुबह से ही मौसम ने अपने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। आसमान साफ रहने और तेज धूप निकलने के कारण तापमान में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। गर्म हवाओं के चलते आम जनजीवन प्रभावित नजर आ रहा है और घर से बाहर निकलने वाले लोग धूप से बचने के उपाय करते दिख रहे हैं। सुबह के समय ही गर्मी का असर इतना तेज रहा कि वातावरण में नमी और उमस ने लोगों को और अधिक परेशान कर दिया। दोपहर में पारा 35 डिग्री के पार, गर्म हवाओं का असर जारीजैसे-जैसे दिन आगे बढ़ रहा है, तापमान में भी लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है। दोपहर के समय पारा लगभग 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है, जिससे गर्मी का असर और अधिक तीव्र हो सकता है। वातावरण में मौजूद नमी के कारण उमस भरी गर्मी लोगों को ज्यादा असहज कर रही है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह मौसम थोड़ा चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। दोपहर बाद बदल सकता है मौसम का मिजाज, बारिश की हल्की संभावनामौसम विभाग के संकेतों के अनुसार, दिन के दूसरे हिस्से में आसमान में बादल छाने लगेंगे और कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बौछारें पड़ने की संभावना है। हालांकि यह बारिश व्यापक नहीं होगी, लेकिन जहां भी बारिश होगी वहां तापमान में थोड़ी गिरावट देखने को मिलेगी और लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। हवा में नमी बरकरार, रात में भी रहेगी हल्की गर्मीदिनभर हवा में नमी का स्तर ऊंचा बना रहेगा, जिससे मौसम पूरी तरह ठंडा होने की संभावना कम है। रात के समय भी हल्की गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है। हालांकि बारिश होने की स्थिति में तापमान में कुछ गिरावट संभव है, लेकिन मौसम पूरी तरह ठंडा नहीं होगा। मौसम से जुड़ी सावधानियां जरूरीआज के मौसम को देखते हुए विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि लोग दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचें। पानी का सेवन अधिक करें और हल्के, ढीले कपड़े पहनें। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है क्योंकि गर्मी और उमस का असर उनके स्वास्थ्य पर जल्दी पड़ सकता है। कुल मिलाकर आज का मौसम मिश्रित प्रभाव वाला रहेगा, जहां एक ओर तेज धूप और उमस लोगों को परेशान करेगी, वहीं दूसरी ओर दोपहर बाद हल्की बारिश थोड़ी राहत लेकर आ सकती है। मौसम का यह बदलता मिजाज पूरे दिन लोगों को सतर्क और सावधान रहने का संकेत देता है।
हार्ट हेल्थ के लिए योगासन: तनाव घटाएं, दिल को बनाएं मजबूत और जीवन को रखें स्वस्थ

नई दिल्ली । आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग सफलता, कमाई और उपलब्धियों के पीछे भागते हुए अपनी सेहत को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। खासकर दिल की सेहत, जो शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है, उस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ दिल ही लंबी और खुशहाल जिंदगी की असली नींव है। लगातार तनाव, अनियमित खान-पान और खराब लाइफस्टाइल हृदय रोगों के खतरे को तेजी से बढ़ा रहे हैं। ऐसे में योगासन और प्राणायाम दिल को सुरक्षित रखने का एक प्राकृतिक और प्रभावी उपाय बनकर सामने आए हैं। योग और ध्यान से मिलता है दिल को प्राकृतिक संरक्षणआयुष विशेषज्ञों के अनुसार नियमित योग और ध्यान न केवल शरीर को स्वस्थ रखते हैं बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करते हैं। योगाभ्यास से तनाव कम होता है, मन स्थिर रहता है और भावनात्मक संतुलन बेहतर होता है। इसका सीधा असर हृदय स्वास्थ्य पर पड़ता है। योग करने से रक्त संचार बेहतर होता है, कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित रहता है और दिल की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। यही कारण है कि योग को हार्ट हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। दिल के लिए लाभकारी प्रमुख योगासविशेषज्ञों ने कुछ ऐसे योगासन बताए हैं जो दिल की सेहत को मजबूत बनाने में विशेष भूमिका निभाते हैं। भुजंगासन, शवासन, अनुलोम-विलोम और सूर्य नमस्कार जैसे योगासन नियमित रूप से करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है और तनाव कम होता है। भुजंगासन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और रक्त प्रवाह को सुधारता है।शवासन मानसिक तनाव को दूर कर शरीर को गहरी शांति प्रदान करता है।अनुलोम-विलोम प्राणायाम फेफड़ों की क्षमता बढ़ाकर मन को शांत करता है और दिल पर दबाव कम करता है।सूर्य नमस्कार पूरे शरीर का संतुलित व्यायाम है, जो ऊर्जा और लचीलापन बढ़ाता है। प्राणायाम और ध्यान से कम होता है तनावतनाव को दिल की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। ऐसे में गहरी सांस लेने वाले व्यायाम जैसे प्राणायाम मानसिक दबाव को कम करने में बेहद प्रभावी हैं। नियमित ध्यान और प्राणायाम से हार्ट रेट स्थिर रहता है और शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है, जिससे दिल स्वस्थ रहता है। जीवनशैली में छोटे बदलाव ला सकते हैं बड़ा सुधारविशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोजाना 30 से 45 मिनट योग करना दिल की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही संतुलित आहार लेना, पर्याप्त नींद लेना और तनावपूर्ण विचारों से दूर रहना भी आवश्यक है। तैलीय और जंक फूड से दूरी बनाकर हरी सब्जियों और फल का सेवन करना हृदय रोगों के खतरे को कम करता है। योगासन और प्राणायाम केवल व्यायाम नहीं बल्कि एक स्वस्थ जीवन का आधार हैं। नियमित अभ्यास से न केवल दिल मजबूत बनता है बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी मिलती है। यदि योग को जीवन का हिस्सा बना लिया जाए तो कई गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है और जीवन को अधिक स्वस्थ और संतुलित बनाया जा सकता है।