बारिश बनी आफत: झारखंड में आकाशीय बिजली से 8 लोगों की मौत, मौसम विभाग का अलर्ट जारी

नई दिल्ली ।झारखंड में मानसून की बारिश के साथ आकाशीय बिजली लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिलों में हुई बारिश के दौरान वज्रपात की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। अलग-अलग इलाकों में बिजली गिरने से आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग झुलसकर घायल हो गए। मौसम विभाग ने हालात को देखते हुए कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है तथा लोगों से खराब मौसम के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। खूंटी जिले में वज्रपात की दो दर्दनाक घटनाओं ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। पहली घटना कर्रा प्रखंड के कच्चाबारी पंचायत क्षेत्र के पतराटोली गांव में हुई, जहां क्रिकेट मैच के दौरान अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। बताया जा रहा है कि पतराटोली और लोधमा गांव की टीमों के बीच मैच खेला जा रहा था। मैच देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और युवा मैदान में मौजूद थे। खेल के दौरान मौसम अचानक खराब होने लगा। आसमान में काले बादल छा गए और तेज गर्जना होने लगी, लेकिन इसके बावजूद मैच जारी रहा। इसी दौरान अचानक तेज चमक और गर्जना के साथ आकाशीय बिजली मैदान में गिरी और वहां मौजूद खिलाड़ियों तथा दर्शकों को अपनी चपेट में ले लिया। इस दर्दनाक हादसे में पतराटोली निवासी 22 वर्षीय प्रेम बाखला की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद मैदान में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। ग्रामीणों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कर्रा पहुंचाया। चिकित्सकों ने प्रेम बाखला को मृत घोषित कर दिया। हादसे में अंकित बाखला और जवकीम मिंज गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों की हालत गंभीर होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए खूंटी से रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) रेफर किया गया है। अन्य घायलों का भी इलाज जारी है। खूंटी जिले में ही दूसरी घटना तोरपा थाना क्षेत्र के हूसीर पंचायत अंतर्गत रोन्हे गांव में हुई। यहां बारिश के दौरान खेत में काम कर रहे निस्तार टोपनो नामक ग्रामीण पर अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। बिजली की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में झारखंड के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश और वज्रपात की संभावना बनी हुई है। विभाग ने 27 जून तक कई जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि खराब मौसम के दौरान खुले मैदानों, पेड़ों के नीचे और खेतों में काम करने से बचें। साथ ही गरज-चमक शुरू होते ही सुरक्षित स्थान पर शरण लें। बारिश जहां किसानों और आम लोगों के लिए राहत लेकर आती है, वहीं आकाशीय बिजली जैसी घटनाएं गंभीर खतरा भी पैदा करती हैं। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना और सतर्क रहना बेहद जरूरी है ताकि जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।
California Wildfire: कैलिफोर्निया में बढ़ा जंगल की आग का खतरा, रिकॉर्ड वाइल्डफायर से अलर्ट पर प्रशासन

California Wildfire: नई दिल्ली ।अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में जंगल की आग यानी वाइल्डफायर का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। बढ़ते तापमान, लंबे सूखे और तेजी से सूखती वनस्पतियों ने राज्य को आग के प्रति बेहद संवेदनशील बना दिया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब अधिकारी पारंपरिक “फायर सीजन” की अवधारणा को छोड़कर पूरे साल आग के खतरे की बात करने लगे हैं। इस वर्ष अभी जंगल की आग का चरम मौसम शुरू भी नहीं हुआ है, लेकिन दमकल विभाग पहले ही 2,580 से अधिक वाइल्डफायर घटनाओं का सामना कर चुका है। कैलिफोर्निया वन एवं अग्नि सुरक्षा विभाग के अनुसार इस साल अब तक राज्य में 2,584 जंगल की आग की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें 79,690 एकड़ से अधिक क्षेत्र जलकर राख हो गया है। इन आगजनी की घटनाओं में 25 इमारतें भी नष्ट हुई हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। सोमवार को भी रिवरसाइड, केर्न और सैन डिएगो समेत कई इलाकों में जंगलों में आग जलती रही। दमकल अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में तापमान और बढ़ने तथा मौसम के और अधिक शुष्क होने के कारण आग लगने की घटनाएं सामान्य से कहीं ज्यादा हो सकती हैं। सीएएल फायर के बटालियन चीफ डेविड एक्यूना ने कहा कि अब “फायर सीजन” शब्द पुराना हो चुका है। उनके मुताबिक जंगलों में आग लगने का खतरा केवल गर्मियों और पतझड़ तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह पूरे साल बना रहता है। इसी वजह से विभाग अब “पीक फायर ईयर” जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहा है। बीजेपी मध्यप्रदेश में संगठन का बड़ा विस्तार 106 सदस्यीय प्रदेश कार्यसमिति घोषित दिग्गज नेताओं से लेकर नए चेहरों तक साधे गए राजनीतिक और सामाजिक समीकरण विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन इस संकट को और गंभीर बना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में अच्छी बारिश के कारण बड़ी मात्रा में वनस्पति उगी थी। अब वही वनस्पति गर्म और सूखे मौसम में सूखकर आग के लिए ईंधन का काम कर रही है। इससे आग तेजी से फैलने और बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में लेने की आशंका बढ़ गई है। सीएएल फायर के बटालियन प्रमुख ब्रेंट पास्कुआ ने कहा कि सभी प्रेडिक्टिव मॉडल संकेत दे रहे हैं कि इस साल औसत से अधिक खतरनाक वाइल्डफायर सीजन देखने को मिल सकता है। वहीं वैज्ञानिकों ने भी चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण कैलिफोर्निया में आग का मौसम पहले की तुलना में जल्दी शुरू हो रहा है और अधिक समय तक बना रहता है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया लॉस एंजिल्स की एक स्टडी में पाया गया कि मानवजनित जलवायु परिवर्तन के कारण 1992 से 2020 के बीच कैलिफोर्निया में आग का मौसम छह से 46 दिन पहले शुरू होने लगा है। अध्ययन के अनुसार घास, झाड़ियों और पेड़ों में नमी की कमी आग लगने के समय और उसकी तीव्रता को प्रभावित करने वाला सबसे बड़ा कारक है। कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम ने भी हाल ही में चेतावनी दी थी कि जलवायु परिवर्तन मौसम को और अधिक खतरनाक बना रहा है। उन्होंने कहा कि अब जंगल की आग का कोई ऑफ-सीजन नहीं बचा है और एक छोटी सी चिंगारी भी बड़ी तबाही में बदल सकती है। राम मंदिर दान विवाद पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान, ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफे की मांग राज्य सरकार ने इस खतरे से निपटने के लिए पिछले कुछ वर्षों में फायर ब्रिगेड के बजट को लगभग दोगुना कर दिया है। साथ ही दमकल कर्मियों की संख्या बढ़ाई गई है और दुनिया के सबसे बड़े एरियल फायरफाइटिंग बेड़ों में से एक का निर्माण किया गया है। अधिकारियों ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे अपने घरों के आसपास सुरक्षा क्षेत्र बनाएं, आपातकालीन किट तैयार रखें और स्थानीय अलर्ट सिस्टम से जुड़े रहें। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में कैलिफोर्निया के लिए चुनौती और बढ़ सकती है। ऐसे में प्रशासन और नागरिकों दोनों को सतर्क रहकर तैयारी करनी होगी ताकि किसी भी संभावित आपदा से नुकसान को कम किया जा सके।
India Agriculture growth: भारत की विकास यात्रा को मिलेगी नई रफ्तार: कृषि और टेक्नोलॉजी बनेंगे अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े इंजन

India Agriculture growth: नई दिल्ली । दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत आने वाले वर्षों में भी अपनी विकास गति बनाए रखेगा। चीन के डालियान शहर में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एनुअल न्यू चैंपियंस मीटिंग यानी समर दावोस में वैश्विक विशेषज्ञों ने भारत की आर्थिक क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि देश के विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में कृषि और टेक्नोलॉजी की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत न केवल वैश्विक विकास दर में महत्वपूर्ण योगदान देगा बल्कि नवाचार और डिजिटल परिवर्तन के जरिए नई आर्थिक संभावनाओं का केंद्र भी बनेगा। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मैनेजिंग डायरेक्टर मिरेक डुसेक ने भारत को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बताते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत गति से आगे बढ़ती रहेगी। उनके अनुसार भारत वैश्विक आर्थिक वृद्धि का एक प्रमुख आधार बन चुका है और इसकी विकास यात्रा दुनिया भर के निवेशकों और नीति निर्माताओं का ध्यान आकर्षित कर रही है। डुसेक ने कहा कि समर दावोस का उद्देश्य दुनिया भर के इनोवेटर्स, टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं को एक मंच पर लाकर वैश्विक चुनौतियों के समाधान तलाशना है। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसी उभरती तकनीकें न केवल उत्पादकता बढ़ाने में मदद करेंगी बल्कि वैश्विक आर्थिक विकास को भी नई दिशा देंगी। MORENA BHOJ UNIVERSITY: कुर्सियां नहीं, छात्र जमीन पर बैठकर एग्जाम देने को मजबूर; मुरैना के भोज विश्वविद्यालय पर उठे सवाल! वहीं पद्मश्री से सम्मानित और ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी में मृदा विज्ञान के प्रतिष्ठित प्रोफेसर रतन लाल ने भारत की कृषि क्षमता को देश की आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और इस लक्ष्य को हासिल करने में कृषि क्षेत्र की बड़ी भूमिका होगी। प्रोफेसर रतन लाल ने कहा कि खेती की उत्पादकता बढ़ाने के लिए मिट्टी की सेहत सुधारना और भूमि के टिकाऊ प्रबंधन को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि क्षेत्र में वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक संसाधनों का उपयोग किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीकें भारतीय कृषि में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं। इन तकनीकों की मदद से मिट्टी की जांच पहले की तुलना में अधिक तेज, सस्ती और सटीक हो सकेगी। इससे किसानों को अपनी जमीन और फसल की जरूरतों के अनुरूप सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और लागत कम होगी। MP CABINET: MP कैबिनेट का बड़ा फैसला, अब किसानों को जीरो प्रतिशत ब्याज पर मिलेगा लोन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की युवा आबादी, तेजी से बढ़ता डिजिटल ढांचा, तकनीकी नवाचार और मजबूत कृषि आधार देश को वैश्विक आर्थिक शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। समर दावोस में हुई चर्चाओं से यह स्पष्ट संकेत मिला कि भविष्य की भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार केवल उद्योग और सेवाएं नहीं बल्कि आधुनिक तकनीक से सशक्त कृषि भी होगी। यही संयोजन भारत को आने वाले दशक में वैश्विक विकास का सबसे बड़ा केंद्र बना सकता है।
MP Politics: बीजेपी मध्यप्रदेश में संगठन का बड़ा विस्तार 106 सदस्यीय प्रदेश कार्यसमिति घोषित दिग्गज नेताओं से लेकर नए चेहरों तक साधे गए राजनीतिक और सामाजिक समीकरण

MP Politics: मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा कदम उठाते हुए नई प्रदेश कार्यसमिति की घोषणा कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की ओर से जारी सूची में कुल 106 नेताओं को प्रदेश कार्यसमिति सदस्य बनाया गया है। इस नई टीम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित पार्टी के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं को शामिल किया गया है। इसके साथ ही विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों के प्रतिनिधित्व को महत्व देते हुए अनेक नए चेहरों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। नई कार्यसमिति को भाजपा के आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक अभियानों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व ने इस सूची के माध्यम से स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में संगठन को और अधिक मजबूत बनाने के लिए अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन स्थापित किया जाएगा। प्रदेश कार्यसमिति में वरिष्ठ नेताओं के साथ महिला प्रतिनिधित्व को भी पर्याप्त महत्व दिया गया है। कई महिला नेताओं को शामिल कर भाजपा ने संगठन में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करने का प्रयास किया है। घोषित सूची में जगदीश देवड़ा कैलाश विजयवर्गीय प्रह्लाद पटेल विष्णु दत्त शर्मा नरेंद्र सिंह तोमर के करीबी नेताओं सहित कई अनुभवी कार्यकर्ताओं को स्थान मिला है। वहीं विभिन्न संभागों और जिलों से जुड़े नेताओं को भी प्रतिनिधित्व देकर क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने इस नई कार्यसमिति के जरिए संगठन के भीतर सभी प्रमुख वर्गों और क्षेत्रों को साथ लेकर चलने का संदेश दिया है। सूची जारी होने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। कार्यसमिति में शामिल नेताओं ने इसे संगठन के प्रति अपनी जिम्मेदारी और पार्टी नेतृत्व के विश्वास का सम्मान बताया है। वहीं जिन नए चेहरों को मौका मिला है उनके लिए यह राजनीतिक रूप से बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि मजबूत संगठन ही चुनावी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है और इसी सोच के तहत कार्यसमिति का गठन किया गया है। यूरोप पर गर्मी का कहर: फ्रांस में 18 मौतें, ब्रिटेन में रेड अलर्ट, कई देशों में आपात हालात राजनीतिक दृष्टि से यह घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि प्रदेश में आने वाले समय में नगरीय निकाय चुनाव पंचायत चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे शुरू होने वाली हैं। ऐसे में भाजपा संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के लिए नई टीम पर भरोसा जता रही है। पार्टी की रणनीति साफ है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर राजनीतिक आधार को और मजबूत किया जाए। नई प्रदेश कार्यसमिति में वरिष्ठ नेताओं के अनुभव और युवा कार्यकर्ताओं की ऊर्जा का समावेश भाजपा की भविष्य की रणनीति को दर्शाता है। माना जा रहा है कि यह टीम न केवल संगठनात्मक गतिविधियों को गति देगी बल्कि आगामी चुनावी चुनौतियों के लिए भी पार्टी को मजबूत आधार प्रदान करेगी। भाजपा की इस घोषणा को प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक कदम माना जा रहा है जिसकी राजनीतिक चर्चा आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है।
यूरोप पर गर्मी का कहर: फ्रांस में 18 मौतें, ब्रिटेन में रेड अलर्ट, कई देशों में आपात हालात

नई दिल्ली । यूरोप इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है और हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन, इटली, जर्मनी और बेल्जियम समेत कई देशों में तापमान सामान्य से कहीं अधिक दर्ज किया जा रहा है। गर्मी का असर केवल लोगों की सेहत तक सीमित नहीं है बल्कि परिवहन व्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति, शिक्षा व्यवस्था और दैनिक जीवन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की चरम मौसमीय घटनाएं पहले की तुलना में अधिक खतरनाक और बार-बार देखने को मिल रही हैं। फ्रांस में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। देश के आधे से अधिक हिस्सों में रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है और लगभग 3.9 करोड़ लोग इसकी जद में हैं। भीषण गर्मी के कारण अब तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें दो छोटे बच्चे भी शामिल हैं। बताया गया है कि दोनों बच्चों को एक कार के अंदर बेहोश अवस्था में पाया गया था। हालात की गंभीरता को देखते हुए फ्रांस सरकार ने आपात समीक्षा बैठक बुलाने का फैसला किया है। देशभर में 1,350 से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं ताकि बच्चों को गर्मी के दुष्प्रभाव से बचाया जा सके। ब्रिटेन में भी गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी ने इंग्लैंड के छह क्षेत्रों में रेड हेल्थ वार्निंग जारी की है। यह चेतावनी बताती है कि अत्यधिक गर्मी स्वस्थ लोगों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इंग्लैंड और वेल्स में तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इससे वर्ष 1976 का जून माह का तापमान रिकॉर्ड भी टूटने की संभावना जताई जा रही है। वैज्ञानिकों ने इसके पीछे “हीट डोम” को जिम्मेदार बताया है जो पश्चिमी यूरोप के ऊपर गर्म हवा को फंसा देता है और तापमान को लगातार बढ़ाता रहता है। स्पेन में भी हालात असामान्य बने हुए हैं। आमतौर पर अपेक्षाकृत ठंडा माना जाने वाला सान सेबेस्टियन क्षेत्र भी 40 डिग्री सेल्सियस तापमान झेल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से 5 से 10 डिग्री अधिक दर्ज किया जा रहा है। वहीं उत्तरी क्षेत्रों में यह अंतर 10 डिग्री से भी ज्यादा हो सकता है। इटली ने 12 शहरों में रेड हीट अलर्ट जारी किया है जबकि दक्षिण-पश्चिम फ्रांस में एक परमाणु संयंत्र को नदी के पानी के अत्यधिक गर्म होने के कारण अपना एक रिएक्टर बंद करना पड़ा। जर्मनी में सप्ताहांत के दौरान गर्मी से जुड़े हादसों में पांच लोगों की मौत हुई है। फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर भी यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा जहां विमान लंबे समय तक रनवे पर खड़े रहने के कारण लोग गर्मी से बेहाल हो गए। बेल्जियम के मौसम विभाग ने भी चेतावनी दी है कि यह हीटवेव एक सप्ताह तक जारी रह सकती है और तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में यूरोप के कई देशों में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बढ़ सकता है। बढ़ती गर्मी ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन की गंभीर चुनौती को दुनिया के सामने ला खड़ा किया है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत का बड़ा संदेश 2030 तक एड्स को खत्म करने के वैश्विक संकल्प का समर्थन

नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एचआईवी और एड्स पर उच्चस्तरीय बैठक में भारत ने वैश्विक एकजुटता और सहयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए वर्ष 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने इस अवसर पर भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर एचआईवी और एड्स के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है और इस दिशा में सामूहिक प्रयासों को और मजबूत करने की जरूरत है। भारत ने बैठक में प्रस्तुत राजनीतिक घोषणा पत्र में व्यक्त वैश्विक एकजुटता की भावना का समर्थन करते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में एचआईवी संक्रमण और एड्स से होने वाली मौतों को कम करने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। हालांकि अभी भी असमानताओं, वित्तीय संसाधनों की कमी और नई वैश्विक चुनौतियों के कारण इस दिशा में हासिल उपलब्धियों पर खतरा बना हुआ है। पी हरीश ने कहा कि भारत वर्ष 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने और उसके बाद भी इस क्षेत्र में प्रगति बनाए रखने के संकल्प के साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। उन्होंने बताया कि भारत इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राष्ट्रीय एड्स एवं यौन संचारित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के माध्यम से व्यापक स्तर पर कार्य कर रहा है। यह कार्यक्रम वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित योजना, सामुदायिक सहभागिता और एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं पर आधारित है। भारत ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि लगातार घरेलू निवेश और योजनाबद्ध प्रयासों की बदौलत देश में नए एचआईवी संक्रमण और एड्स से संबंधित मौतों में उल्लेखनीय कमी आई है। साथ ही रोकथाम, जांच, उपचार, देखभाल और परामर्श सेवाओं तक लोगों की पहुंच भी पहले की तुलना में काफी बढ़ी है। बैठक में भारत ने देश-आधारित रणनीतियों और टिकाऊ वित्तपोषण के महत्व को भी रेखांकित किया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि प्रत्येक देश को अपनी स्थानीय परिस्थितियों और महामारी की प्रकृति के अनुरूप रणनीति तैयार करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। इसके साथ ही मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और पूर्वानुमेय वित्तीय सहायता भी सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि लंबे समय तक सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकें। भारत ने गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए अपनाई जा रही अपनी ट्रिपल एलिमिनेशन रणनीति का भी उल्लेख किया। इस पहल के तहत गर्भवती महिलाओं में एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस-बी की सार्वभौमिक जांच, समय पर उपचार और संक्रमित बच्चों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जा रही है। भारत ने बच्चों में एड्स को समाप्त करने और संक्रमण के मातृ-शिशु प्रसार को रोकने के वैश्विक प्रयासों का भी समर्थन किया। इसके अलावा भारत ने एचआईवी, तपेदिक, वायरल हेपेटाइटिस और अन्य सह-संक्रमणों के खिलाफ एकीकृत स्वास्थ्य रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत का मानना है कि ऐसी समेकित व्यवस्था स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के साथ-साथ संसाधनों के प्रभावी उपयोग में भी मदद करती है। भारत ने बैठक में सस्ती दवाओं, जांच सुविधाओं और नई चिकित्सा तकनीकों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता को भी प्रमुखता से उठाया। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन के टीआरआईपीएस समझौते के अंतर्गत उपलब्ध लचीले प्रावधानों का उपयोग विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि जीवनरक्षक दवाओं और स्वास्थ्य उत्पादों तक आम लोगों की पहुंच सुनिश्चित की जा सके। संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह पहल वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा, समान स्वास्थ्य सेवाओं और एड्स मुक्त भविष्य के लिए उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह आने वाले वर्षों में भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर एचआईवी और एड्स के खिलाफ इस लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा।
भारत-मंगोलिया दोस्ती को नई मजबूती विदेश मंत्री जयशंकर ने रिफाइनरी प्रोजेक्ट की प्रगति परखी

नई दिल्ली । भारत और मंगोलिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने की दिशा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का मंगोलिया दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने भारत की सहायता से विकसित की जा रही बहुप्रतीक्षित मंगोल तेल रिफाइनरी परियोजना के निर्माण स्थल का दौरा कर वहां चल रहे कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उनके साथ मंगोलिया की विदेश मंत्री बत्त्सेत्सेग बटमुंख और उद्योग एवं खनन मंत्री गोंगोर दमदिन्न्यम भी मौजूद रहे। निर्माण स्थल के दौरे के दौरान विदेश मंत्री ने परियोजना से जुड़े अधिकारियों और इंजीनियरों के साथ विस्तृत चर्चा की तथा विभिन्न चरणों में चल रहे कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने इस परियोजना को भारत और मंगोलिया की मित्रता का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों के सहयोग का एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण उदाहरण है। एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मंगोल रिफाइनरी परियोजना भारत-मंगोलिया मित्रता का एक प्रमुख प्रतीक है और इसका निर्माण कार्य लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने परियोजना में शामिल विभिन्न टीमों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद सभी कर्मचारी पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। दौरे के दौरान विदेश मंत्री ने परियोजना स्थल पर कार्यरत भारतीय और मंगोलियाई कर्मचारियों से भी मुलाकात की। उन्होंने कठिन भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों में कार्य कर रहे श्रमिकों, इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों के समर्पण की प्रशंसा की तथा परियोजना को समय पर पूरा करने के उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया। मंगोलिया की विदेश मंत्री बत्त्सेत्सेग बटमुंख के साथ हुई बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए एस. जयशंकर ने कहा कि भारत और मंगोलिया के संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंध मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और विकास की समान आकांक्षाओं ने दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाया है। विदेश मंत्री ने बताया कि उनकी यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य पिछले वर्ष भारत दौरे पर आए मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई चर्चाओं के परिणामों की समीक्षा करना भी है। दोनों देशों ने हाल के वर्षों में आर्थिक, ऊर्जा, शिक्षा और विकास साझेदारी के क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। तेल रिफाइनरी परियोजना को भारत-मंगोलिया सहयोग की सबसे महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। मंगोलिया के डोर्नोगोवी प्रांत के अल्तानशिरी क्षेत्र में निर्माणाधीन इस रिफाइनरी के लिए भारत सरकार ने 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर की सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट उपलब्ध कराई है। यह भारत सरकार द्वारा विदेशों में वित्तपोषित सबसे बड़ी सॉफ्ट लाइन ऑफ क्रेडिट परियोजनाओं में शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना पूरी होने के बाद मंगोलिया की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बड़ा बल मिलेगा और उसे पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह परियोजना दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भारत और मंगोलिया के बीच बढ़ता सहयोग यह दर्शाता है कि दोनों देश भविष्य में भी विकास, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय साझेदारी के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
MORENA BHOJ UNIVERSITY: कुर्सियां नहीं, छात्र जमीन पर बैठकर एग्जाम देने को मजबूर; मुरैना के भोज विश्वविद्यालय पर उठे सवाल!

MORENA BHOJ UNIVERSITY: मुरैना। भोज विश्वविद्यालय से बदहाल शिक्षा अव्यवस्था और नकल के गंभीर मामले सामने आए हैं। छात्रों का कहना है कि परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं मूलभूत सुविधाओं की कमी से भी परीक्षार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। छात्रों का कहना है कि निर्धारित शासकीय महाविद्यालय की जगह कुछ दिनों तक एक निजी महाविद्यालय आचार्य नरेंद्र देव महाविद्यालय में परीक्षाएं आयोजित कराई गईं। शिकायतों के बाद परीक्षाएं दोबारा शासकीय महाविद्यालय में कराई जाने लगीं। इस पूरे मामले को लेकर छात्रों और अभिभावकों ने सवाल उठाए हैं। MP CABINET: MP कैबिनेट का बड़ा फैसला, अब किसानों को जीरो प्रतिशत ब्याज पर मिलेगा लोन परीक्षा केंद्रों पर नकल माफिया सक्रिय आरोप है कि परीक्षा केंद्रों पर नकल माफिया सक्रिय हैं और खुलेआम नकल कराई जा रही है। परीक्षार्थियों का दावा है कि केंद्रों के बाहर और अंदर ऐसे लोगों की मौजूदगी रहती है जो नकल कराने में मदद करते हैं। इससे परीक्षा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इतना ही नहीं, बल्कि परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त फर्नीचर न होने के कारण कई छात्रों को जमीन पर बैठकर परीक्षा भी देनी पड़ रही है। भीषण गर्मी और असुविधाजनक माहौल में परीक्षा देने को मजबूर छात्रों ने व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई है। Madhya Pradesh News: MP में अब मुक्तिधाम से ही मिलेगा मृत्यु प्रमाण पत्र! CM मोहन यादव का बड़ा निर्देश दोषियों के खिलाफ हो निष्पक्ष जांच छात्रों और अभिभावकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन तथा जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, नकल पर रोक लगाने और परीक्षा केंद्रों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
राम मंदिर दान विवाद पर आचार्य प्रमोद कृष्णम का बड़ा बयान, ट्रस्ट पदाधिकारियों के इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली । अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे के मामले में चल रही जांच के बीच आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। उनका मानना है कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना सबसे जरूरी है। गाजियाबाद में मीडिया से बातचीत करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों राम भक्तों की आस्था और भावनाओं का केंद्र है। ऐसे में यदि ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं और जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं तो निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पदाधिकारियों को स्वयं आगे आकर नैतिक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्याय होना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह भी है कि न्याय होता हुआ दिखाई दे। यदि जांच के दौरान पदाधिकारी अपने पदों पर बने रहते हैं तो लोगों के मन में संदेह की स्थिति बनी रह सकती है। इसलिए जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों को इस्तीफा देकर निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ करना चाहिए। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी अपील की कि ट्रस्ट के वर्तमान पदाधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार किए जाएं और आवश्यकता पड़ने पर ट्रस्ट का नए सिरे से गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा किसी भी प्रकार के विवाद की गुंजाइश कम होगी। बिहार के चर्चित भरत तिवारी प्रकरण पर भी आचार्य प्रमोद कृष्णम ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानूनी प्रक्रिया से बाहर जाकर दंडित नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि कानून के शासन वाले लोकतंत्र में न्यायिक प्रक्रिया का पालन सर्वोपरि है और किसी भी मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में बढ़ती ऐसी घटनाओं पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है। कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि किसी निर्दोष व्यक्ति के अधिकारों का हनन न हो। लखनऊ में हुए भीषण अग्निकांड पर दुख व्यक्त करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इसे व्यवस्था की विफलता बताया। उन्होंने कहा कि केवल हादसे के बाद संवेदना व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से प्रभावी सुरक्षा योजनाएं और निगरानी तंत्र तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने तेजी से हो रहे शहरी विकास पर भी चिंता जताई और कहा कि विकास कार्यों के साथ सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य है। यदि सुरक्षा उपायों की अनदेखी की जाती है तो ऐसी त्रासदियां बार-बार सामने आती रहेंगी। उनके अनुसार प्रशासन, स्थानीय निकायों और संबंधित एजेंसियों को मिलकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। राम मंदिर से जुड़े मामले पर दिए गए आचार्य प्रमोद कृष्णम के बयान ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में नई चर्चा को जन्म दे दिया है। अब सभी की नजर जांच की प्रगति और इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर बनी हुई है।
शिक्षा की नई उड़ान गुजरात में स्कूल ऑन व्हील्स की शुरुआत, गांव-गांव पहुंचेगी पढ़ाई

नई दिल्ली । गुजरात में शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने स्कूल प्रवेश महोत्सव के साथ स्कूल ऑन व्हील्स योजना की शुरुआत की है। इस अभिनव पहल का उद्देश्य दूरदराज और छोटे कस्बों में रहने वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। मंगलवार को गांधीनगर में आयोजित कार्यक्रम में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने समग्र शिक्षा अभियान के तहत तैयार की गई 28 विशेष बसों का लोकार्पण किया। इन बसों को चलते-फिरते स्कूल के रूप में विकसित किया गया है ताकि उन क्षेत्रों के बच्चों को भी शिक्षा का लाभ मिल सके जहां स्थायी स्कूलों तक पहुंचना कठिन है। गुजरात राज्य मार्ग वाहन व्यवहार निगम द्वारा तैयार की गई ये बसें विशेष रूप से अगरिया विस्तार और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए संचालित की जाएंगी। स्कूल ऑन व्हील्स बसों को आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस किया गया है। बसों में स्मार्ट टीवी, डिश टीवी, एफएम पोर्टेबल रेडियो, योग गतिविधियों के लिए विशेष स्थान तथा डिजिटल शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ मनोरंजक और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा। इन बसों की सबसे बड़ी विशेषता इनका पर्यावरण अनुकूल होना है। प्रत्येक बस की छत पर उच्च क्षमता वाले सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से बसों को संचालित करने में मदद करेंगे। अधिकारियों के अनुसार इन सोलर पैनलों में ऐसी तकनीक का उपयोग किया गया है जिससे बिजली से जुड़े उपकरण लंबे समय तक संचालित रह सकें। बसों में लगाए गए सोलर सिस्टम की वारंटी भी दी गई है, जिससे यह परियोजना लंबे समय तक प्रभावी ढंग से चल सकेगी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि राज्य में 23वें प्रवेश उत्सव की शुरुआत के साथ शिक्षा को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने बताया कि गुजरात राज्य मार्ग वाहन निगम ने 28 विशेष बसें शिक्षा विभाग को सौंपी हैं। इन बसों में बच्चों के लिए ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं जो कई बार पारंपरिक कक्षाओं से भी बेहतर अनुभव प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि हर बस में लगभग 20 बच्चों के बैठकर अध्ययन करने की व्यवस्था की गई है। ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए डिश टीवी और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। साथ ही बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर भी मिलेगा जिससे उनकी रुचि शिक्षा के प्रति बढ़ेगी। हर्ष संघवी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में ऐसी और बसों को भी शामिल किया जाएगा ताकि राज्य के अधिक से अधिक बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाई जा सके। उनका मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक और नवाचार का यह प्रयोग भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल साबित हो सकता है। गुजरात सरकार की यह पहल न केवल शिक्षा के प्रसार में मदद करेगी बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों से जोड़कर उनके भविष्य को नई दिशा देने का काम भी करेगी।