इन बसों को चलते-फिरते स्कूल के रूप में विकसित किया गया है ताकि उन क्षेत्रों के बच्चों को भी शिक्षा का लाभ मिल सके जहां स्थायी स्कूलों तक पहुंचना कठिन है। गुजरात राज्य मार्ग वाहन व्यवहार निगम द्वारा तैयार की गई ये बसें विशेष रूप से अगरिया विस्तार और अन्य दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए संचालित की जाएंगी।
स्कूल ऑन व्हील्स बसों को आधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस किया गया है। बसों में स्मार्ट टीवी, डिश टीवी, एफएम पोर्टेबल रेडियो, योग गतिविधियों के लिए विशेष स्थान तथा डिजिटल शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ मनोरंजक और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा।
इन बसों की सबसे बड़ी विशेषता इनका पर्यावरण अनुकूल होना है। प्रत्येक बस की छत पर उच्च क्षमता वाले सोलर पैनल लगाए गए हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से बसों को संचालित करने में मदद करेंगे। अधिकारियों के अनुसार इन सोलर पैनलों में ऐसी तकनीक का उपयोग किया गया है जिससे बिजली से जुड़े उपकरण लंबे समय तक संचालित रह सकें। बसों में लगाए गए सोलर सिस्टम की वारंटी भी दी गई है, जिससे यह परियोजना लंबे समय तक प्रभावी ढंग से चल सकेगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि राज्य में 23वें प्रवेश उत्सव की शुरुआत के साथ शिक्षा को और अधिक सुलभ बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने बताया कि गुजरात राज्य मार्ग वाहन निगम ने 28 विशेष बसें शिक्षा विभाग को सौंपी हैं। इन बसों में बच्चों के लिए ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं जो कई बार पारंपरिक कक्षाओं से भी बेहतर अनुभव प्रदान करती हैं।
उन्होंने कहा कि हर बस में लगभग 20 बच्चों के बैठकर अध्ययन करने की व्यवस्था की गई है। ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए डिश टीवी और अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग किया जाएगा। साथ ही बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर भी मिलेगा जिससे उनकी रुचि शिक्षा के प्रति बढ़ेगी।
हर्ष संघवी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आने वाले समय में ऐसी और बसों को भी शामिल किया जाएगा ताकि राज्य के अधिक से अधिक बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाई जा सके। उनका मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक और नवाचार का यह प्रयोग भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक मॉडल साबित हो सकता है। गुजरात सरकार की यह पहल न केवल शिक्षा के प्रसार में मदद करेगी बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों से जोड़कर उनके भविष्य को नई दिशा देने का काम भी करेगी।