कॉलेजियम पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: सिर्फ वरिष्ठता से नहीं मिलता जज बनने का अधिकार

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि केवल वरिष्ठता किसी अधिकारी को हाईकोर्ट का जज बनने का अधिकार नहीं देती। अदालत ने दोहराया कि जजों के चयन की प्रक्रिया में उम्मीदवार की उपयुक्तता योग्यता और समग्र मूल्यांकन को प्राथमिकता दी जाती है। साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा लिए गए निर्णय न्यायिक समीक्षा और सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे से बाहर हैं। यह टिप्पणी हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ न्यायिक अधिकारी अरविंद मल्होत्रा की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। मल्होत्रा ने दावा किया था कि उनकी उम्मीदवारी को उचित तरीके से नहीं देखा गया और उनसे जूनियर अधिकारियों को हाईकोर्ट जज के पद के लिए आगे बढ़ा दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाईकोर्ट कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया। मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि कॉलेजियम के निर्णयों में दखल देना उचित नहीं होगा क्योंकि इससे पूरी चयन प्रक्रिया पर अनावश्यक विवाद खड़ा हो सकता है। पीठ ने कहा कि किसी भी उम्मीदवार का चयन व्यापक विचार विमर्श और मूल्यांकन के बाद किया जाता है तथा केवल वरिष्ठता के आधार पर किसी को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि पहले दिए गए एक आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने चयन प्रक्रिया को अधिक सामूहिक और पारदर्शी बनाने की आवश्यकता जताई थी। हालांकि अदालत ने माना कि कॉलेजियम की प्रक्रिया अपने निर्धारित मानकों और उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर संचालित होती है तथा इसमें उम्मीदवारों की उपयुक्तता का मूल्यांकन सबसे महत्वपूर्ण तत्व होता है। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी जूनियर अधिकारी की सिफारिश की जाती है तो इससे वरिष्ठ अधिकारी को स्वतः कानूनी चुनौती देने का अधिकार नहीं मिल जाता। अदालत के अनुसार कॉलेजियम का निर्णय उसकी संतुष्टि और उपलब्ध तथ्यों पर आधारित होता है और उस संतुष्टि को न्यायिक मंच पर चुनौती नहीं दी जा सकती। यही कारण है कि कॉलेजियम द्वारा की गई सिफारिशों को न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर माना गया है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाल ही में हिमाचल प्रदेश से तीन न्यायिक अधिकारियों के नाम हाईकोर्ट जज के रूप में मंजूर किए थे। अदालत ने कहा कि इन नामों पर विचार करते समय सभी संबंधित दस्तावेजों सूचनाओं और रिपोर्टों का अध्ययन किया गया था। इसलिए एक बार कॉलेजियम द्वारा निर्णय ले लिए जाने के बाद अदालत उसके सही या गलत होने पर न्यायिक स्तर पर पुनर्विचार नहीं कर सकती। पीठ ने अरविंद मल्होत्रा को सलाह देते हुए कहा कि वे अभी अपेक्षाकृत युवा हैं और उन्हें धैर्य रखना चाहिए। साथ ही उन्हें यह स्वतंत्रता भी दी गई कि यदि उनके खिलाफ कोई लंबित जांच या प्रशासनिक प्रक्रिया है तो उसके शीघ्र निपटारे के लिए वे संबंधित हाईकोर्ट के समक्ष अपनी बात रख सकते हैं। इस फैसले के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायपालिका में नियुक्ति की प्रक्रिया केवल वरिष्ठता पर आधारित नहीं है बल्कि योग्यता क्षमता निष्पक्षता और समग्र उपयुक्तता जैसे कई महत्वपूर्ण मानकों पर निर्भर करती है। अदालत का यह रुख भविष्य में जज नियुक्ति से जुड़े विवादों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक माना जा रहा है।
Qatar : रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स में भीषण धमाका….13 लोगों की मौत, मृतकों में 12 भारतीय

दोहा। कतर (Qatar) के रास लफ्फान LNG कॉम्प्लेक्स (Ras Laffan LNG complex) में हुए भीषण धमाके में 13 लोगों की मौत हुई है जिनमें भारतीयों की संख्या 12 बताई जा रही है. वहीं, इस हादसे में 66 लोग घायल हुए हैं. भारतीय दूतावास (Indian Embassy) ने भी इस घटना पर चिंता जताई है. ये हादसा उस समय हुआ जब ईरानी मिसाइल हमले से प्रभावित गैस फैसिलिटी में काम दोबारा शुरू किया जा रहा था। कतर के अधिकारियों ने इस घटना को बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुआ एक टेक्निकल एक्सीडेंट बताया है. यह सुविधा देश के सबसे बड़े LNG प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट हब रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी का हिस्सा है. कतर के एनर्जी मंत्रालय ने बताया कि हादसे में 13 लोगों की मौत हुई है। दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने इस हादसे पर गहरी चिंता जताई है. दूतावास ने कहा कि कई लोग घायल हुए हैं और कुछ लोगों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है. कतर के एनर्जी मिनिस्टर साद शेरिदा अल-काबी ने सोमवार को दोहा में मृतकों की संख्या की पुष्टि करते हुए इंडस्ट्रियल हादसा बताया। ईरान के होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण के बाद कतर ने अपना प्रोडक्शन को रोक दिया था. इसका असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर पड़ा था. कतर अपने क्लाइंट्स को LNG शिपमेंट नहीं भेज पा रहा था. युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत शुरू होने और ईरान की पकड़ कमजोर होने के बाद एक्सपोर्ट टर्मिनल शुरू करने की कोशिश की जा रही थी। सरकारी कंपनी कतरएनर्जी के मुताबिक, रविवार रात बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में काम के दौरान धमाका हुआ. इसके बाद आग लग गई. कतर दुनिया के सबसे बड़े नैचुरल गैस प्रोड्यूसर देशों में शामिल है. ऐसे में रास लफ्फान जैसे बड़े LNG हब में हुई यह घटना ग्लोबल एनर्जी सप्लाई को लेकर नई चिंता पैदा कर रही है।
Gwalior Drainage System: ग्वालियर में मंडराया जलभराव का खतरा, मानसून आने से पहले ही नालों में भरा पानी

Gwalior Drainage System: ग्वालियर। मध्यप्रदेश में मोनू बस एंट्री लेने ही वाला है, लेकिन शहर की जल निकासी व्यवस्था अब भी सवालों के घेरे में है। हाल ही में हुई प्री-मानसून बारिश ने नगर निगम की तैयारियों की हकीकत उजागर कर दी। महज आधे घंटे की बारिश में मुरार, रेलवे स्टेशन, हजीरा समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शहर के प्रमुख नालों पर अतिक्रमण, ड्रेनेज सिस्टम की खराब स्थिति और सालों से अटके सुधर कार्यों के कारण इस बार भी हालत बिगड़ते नजर आ रहे हैं। हालात यह हैं कि स्वर्णरेखा और मुरार जैसी नदियां कई जगह सिकुड़कर नालों में तब्दील हो चुकी हैं और शहर के करीब 10 बड़े नाले अब भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाए हैं। Gwalior BJP MLA: वोट हमने दिया, गाली क्यों? किसान के सवाल पर BJP विधायक ने जोड़ा हाथ, VIDEO वायरल मुरार, थाटीपुर और सिटी सेंटर में हर साल समस्या मुरार के बारादरी, सदर बाजार और नदी किनारे बसे कई इलाके हर साल जलभराव की मार झेलते हैं। नालों में जमा सिल्ट और बढ़ते अतिक्रमण के कारण उनकी जल निकासी क्षमता लगातार घट रही है। थाटीपुर के सुरेश नगर, जीवाजी नगर और दर्पण कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां कई स्थानों पर नाले संकरे और चोक हो चुके हैं। वहीं सिटी सेंटर क्षेत्र के गोविंदपुरी, हरगोविंदपुरम, पटेल नगर, अनुपम नगर और कैलाश विहार जैसी कॉलोनियों में सड़कों और नालों की डिजाइन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई जगह ढलान सही नहीं होने के कारण पानी नालों तक पहुंच ही नहीं पाता और सड़कें जलभराव का शिकार हो जाती हैं। नतीजा यह है कि थोड़ी देर की बारिश में ही सड़कें पानी से लबालब हो जाती हैं और बाजारों में कारोबार प्रभावित होने लगता है। India US trade deal: भारत और अमेरिका के बीच मेगा ट्रेड एग्रीमेंट की तैयारी तेज, बातचीत को अंतिम रूप देने भारत पहुंचे जैमीसन ग्रीर निगम का दावा- लगातार चल रहा सफाई अभियान नगर निगम के अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव का कहना है कि दो महीने पहले से ही नालों और नालियों की सफाई का अभियान शुरू कर दिया गया था। पिछले वर्ष जिन क्षेत्रों में जलभराव की समस्या सामने आई थी, वहां पहले से ही सफाई कराई गई है। उन्होंने बताया कि चारों विधानसभा क्षेत्रों में जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से लगातार सफाई कार्य चल रहा है। इसके बावजूद शहरवासियों की चिंता बनी हुई है। लोगों का कहना है कि हर साल दावों के बाद भी पहली तेज बारिश में व्यवस्था की पोल खुल जाती है। ऐसे में मानसून शुरू होने से पहले जल निकासी व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
Delhi: तकिया काले खान इलाके में बाल्मीकि बस्ती में लगी भीषण आग…. कई झुग्गियां जलीं

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में एक बार फिर आग की घटना सामने आई है. मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज (Maulana Azad Medical College) के पीछे, तकिया काले खान इलाके (Takiya Kale Khan area) की बाल्मीकि बस्ती (Valmiki Basti) की झुग्गियों में भीषण आग लग गई. घटना की जानकारी मिलते ही दमकल की 24 गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं। कड़ी मशक्कत के बाद अब आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है. राहत की बात ये है कि इस हादसे में फिलहाल किसी के हताहत होने या किसी की जान जाने की कोई खबर नहीं है। फायर ब्रिगेड अधिकारी ने बताया कि उन्हें 11 बजकर 22 मिनट पर आग की जानकारी मिली थी. आग की गंभीरता देखते हुए फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बढ़ाई गईं और मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। रात करीब 11 बजे भड़की आगघटना के एक चश्मदीद मोहम्मद फैजान ने मीडिया को बताया, ‘रात के पौने 11 बज रहे थे. हम सामने बैठे थे और हमने आग की लपटें उठती हुई देखीं. तो हम इधर की तरफ भागकर आए तो देखा कि आग लग गई थी और आग ऐसी थी कि बुझाए नहीं बुझ रही थी. हम अंदर जा रहे थे तो उसकी लपटें हमारे ऊपर आ रही थीं। चश्मदीद ने आगे बताया, ‘एक बिल्डिंग में 8 लोग फंसे हुए थे, जिन्हें अंडरग्राउंड रास्ते से उन्हें निकाला गया. उनके बाहर आते ही सिलेंडर फटने लगे और आग बढ़ती चली गई. फिर फोन करने के 5 मिनट बाद ही एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड आ गईं. जब हम बाहर निकल रहे थे, तब तक आग बेकाबू हो चुकी थी. फिर बिजली के खंभों में आग लगने लगी और आग बढ़ते-बढ़ते चारों तरफ फैल गई। लकड़ियों की भारी मात्रा के चलते बेकाबू हुई आगदूसरे चश्मदीद मोहम्मद यूसुफ ने बताया, ‘जब आग लगी तो हमने हल्की आग समझी और ड्रमों से पानी डालकर बुझाने की कोशिश की. हमने ऊपर सो रहे लोगों को बचाया, फिर लकड़ियां हटवाईं. लेकिन लकड़ियां बहुत थीं, लकड़ी की और पक्की झुग्गियां थीं लेकिन आग काबू नहीं आई. फिर हमें फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने आग से बाहर निकाला क्योंकि बिजली के तारों में भी आग लगी थी. हमने 5-10 लोगों को बचाया।
ब्रिटिश PM किएर स्टार्मर ने दिया इस्तीफा…. भारत के साथ रिश्तों की दी मजबूती

नई दिल्ली। किएर स्टार्मर (Keir Starmer) ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री (British Prime Minister) पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद अब लेबर पार्टी के लिए अपना नया लीडर चुनने का समय और बढ़ गया है. वहीं, नए चुने गए पार्लियामेंट मेंबर एंडी बर्नहैम (Parliament Member Andy Burnham) आने वाले हफ्तों में 10 डाउनिंग स्ट्रीट में चार्ज संभालने वाले हैं। ब्रिटिश इंडियन एक्सपर्ट्स का कहना है कि ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर के तौर पर उनके स्टार्मर ने सिर्फ भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को पूरा किया. इसके साथ ही उन्होंने आगे के लिए भी आपसी रिश्तों को मजबूती दी, जिस पर देश के नए पीएम आगे काम कर सकते हैं। कोबरा बीयर के फाउंडर और इंडिया ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप के को-चेयर लॉर्ड करण बिलिमोरिया ने कहा, ‘जब भारत की बात आती है, तो उनके प्राइम मिनिस्टर रहते हुए UK-इंडिया फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन हुए थे, जिस पर हमने जनवरी 2022 में ही बातचीत शुरू कर दी थी। भारत-ब्रिटेन के रिश्तों की मजबूती में स्टार्मर का रोलबिलिमोरिया ने आगे कहा, ‘भारत उनके लिए एक खास रिश्ते और एक खास देश के तौर पर बहुत, बहुत जरूरी है, जहां UK की बात है और हमेशा रहेगी. लेबर पार्टी का अगला लीडर कोई भी हो, भारत उनकी टॉप प्रायोरिटी होगी और वो दुनिया की पांचवीं और छठी सबसे बड़ी इकॉनोमी और दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी इकॉनोमी भारत के बीच UK-भारत के रिश्ते के भविष्य को सबसे जरूरी मानेंगे। बिलिमोरिया ने स्टार्मर को एक ‘अच्छा इंसान’ बताया, जो बाइलेटरल पार्टनरशिप की बात आने पर हमेशा सुनते थे. उन्होंने बताया, ‘नौ साल तक, मैं एक के बाद एक प्राइम मिनिस्टर से कहता रहा, चाहे वो बोरिस जॉनसन हों, चाहे ऋषि सुनक हों, एक बड़ा बिजनेस डेलीगेशन भारत ले जाएं क्योंकि इससे बहुत बड़ा असर पड़ेगा. और उनमें से किसी ने ऐसा नहीं किया, लेकिन किएर स्टार्मर ने सुना और पिछले साल अक्टूबर में हम एक बड़ा बिजनेस डेलीगेशन मुंबई ले गए। ‘बिजनेस सरकार से पहले आता है…’यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के ग्रुप CEO डॉ. किशोर जयरामन ने इन डेवलपमेंट्स को ‘बदलाव का प्रोसेस’ बताया. जयरामन ने कहा, ‘जब FTA पर बातचीत हो रही थी, तब सरकार बदल गई. ग्रेट ब्रिटेन ने जो महानता दिखाई है, वो ये है कि वो सरकार से आगे है. बिजनेस सरकार से पहले आता है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘ये एक ऐसी पार्टनरशिप है जो बहुत लंबे समय तक चलेगी क्योंकि ये सिद्धांतों पर आधारित है, ये एक विन-विन एग्रीमेंट पर आधारित है और ये आगे बढ़ती रहेगी और ये दोनों तरफ की इंडस्ट्री को फायदा पहुंचाती रहेगी. UKIBC एक ट्रेड काउंसिल है जो बिजनेस ग्रोथ को बढ़ावा देती है और हम UK और इंडिया में बिजनेस को सपोर्ट करते रहेंगे और कॉरिडोर को बढ़ाते रहेंगे। ट्रेड एग्रीमेंट के जरिए मजबूत किए UK-इंडिया के रिश्तेटेक एंटरप्रेन्योर और AI पॉलिसी लैब्स के फाउंडर उदय नागराजू हाल ही में हाउस ऑफ लॉर्ड्स में सबसे नए ब्रिटिश इंडियन लेबर पीयर्स में से एक बने हैं. उनका भी मानना है कि स्टार्मर ने कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट के साथ UK-इंडिया रिश्तों में एक बड़ा कदम आगे बढ़ाने में मदद की है। नागराजू ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हमारे प्राइम मिनिस्टर, किएर स्टार्मर, इज्जत और एक सीरियस रिकॉर्ड के साथ ऑफिस छोड़ रहे हैं. उन्होंने लेबर पार्टी को सरकार में वापस लाया, स्थिरता और आर्थिक भरोसे को ब्रिटिश राजनीति के केंद्र में वापस लाया. उन्होंने 2024 के आम चुनाव से पहले वादा किया था कि उनके प्रधानमंत्री रहते लेबर सरकार भारत के साथ रिश्ते फिर से ठीक करेगी, जो उन्होंने पूरा किया. उन्होंने कहा, ‘CETA का क्रेडिट किएर और बेशक, भारत सरकार को भी जाता है। उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे लगता है कि अगले लेबर प्राइम मिनिस्टर ग्रोथ, सिक्योरिटी, क्लीन एनर्जी स्किल्स, टेक, AI और भारत के साथ गहरी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप के उस प्लेटफॉर्म पर काम करेंगे और उन्हें ऐसा करना चाहिए। ‘GDP में बड़े योगदान के लिए याद…’लेबर लीडर के तौर पर स्टार्मर के साथ मिलकर काम करने वाले कृष रावल ने स्टार्मर को ऐसा प्राइम मिनिस्टर बताया जिन्होंने भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन किया. उनके मुताबिक स्टार्मर को ब्रिटेन की GDP में उनके बड़े योगदान के लिए याद किया जाएगा।
PM मोदी जुलाई में करेंगे 3 देशों की यात्रा ! 38 साल बाद इस देश जाएगा कोई भारतीय प्रधानमंत्री

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) जुलाई के महीने में एक अहम विदेशी दौरे पर जा सकते हैं। जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी 6 से 11 जुलाई के बीच इंडो-पैसिफिक क्षेत्र (Indo-Pacific region) के तीन देशों- इंडोनेशिया (Indonesia), ऑस्ट्रेलिया (Australia) और न्यूजीलैंड (New Zealand) की यात्रा कर सकते हैं। तैयारियों से जुड़े लोगों का कहना है कि इस दौरे के दौरान राष्ट्राध्यक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं और भारतीय समुदाय से बातचीत मुख्य एजेंडे में शामिल होगी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल प्रधानमंत्री के इस प्रस्तावित दौरे का पूरा शेड्यूल अंतिम रूप से तैयार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) या विदेश मंत्रालय (MEA) की तरफ से अभी तक इस यात्रा को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में यात्रा की तारीखों, जगहों और कार्यक्रमों में बदलाव की संभावना भी बनी हुई है। किस देश में क्या रहेगा पीएम मोदी का एजेंडा?पीएम मोदी के इस संभावित 3 देशों के दौरे को रणनीतिक और व्यापारिक लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। दौरे का फोकस कुछ इस तरह रह सकता है। इंडोनेशिया: अपने दौरे के दौरान पीएम मोदी की मुलाकात इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो से हो सकती है। गौरतलब है कि इससे पहले 7 जून को नई दिल्ली में भारत-इंडोनेशिया संयुक्त आयोग की बैठक हुई थी। इसमें दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा और आपसी संबंधों को लेकर समीक्षा की थी। पीएम मोदी की यह वार्ता इसी आधार पर आगे बढ़ सकती है। ऑस्ट्रेलिया: ऑस्ट्रेलिया दौरे पर पीएम मोदी वहां के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं की इस बातचीत का मुख्य फोकस व्यापक रणनीतिक साझेदारी (कम्प्रेहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप), रक्षा और सुरक्षा सहयोग, क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों), शिक्षा और व्यापार पर रहेगा। न्यूजीलैंड का ऐतिहासिक दौरा: इस यात्रा का सबसे खास हिस्सा न्यूजीलैंड का दौरा माना जा रहा है। यहां पीएम मोदी न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ वार्ता कर सकते हैं। यह दौरा इसलिए भी अहम है क्योंकि साल 1986 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की यात्रा के बाद किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला न्यूजीलैंड दौरा होगा। फ्रांस दौरे से लौटे हैं पीएम मोदीबता दें कि हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा संपन्न करने के बाद लौट आए हैं। यात्रा के दौरान उन्होंने जी7 शिखर सम्मेलन में भाग लिया और विश्व के कई नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। प्रधानमंत्री मोदी 13 जून को भूमध्यसागरीय शहर नीस पहुंचे थे, जहां उन्होंने मैक्रों के साथ ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन किया और द्विपक्षीय बैठक भी की। इससे पहले मोदी ने स्लोवाकिया की “ऐतिहासिक” यात्रा पूरी की। मोदी स्लोवाकिया की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं।
US ने ईरान से तेल ब्रिक्री पर लगे प्रतिबंध को हटाया…. भारत को भी मिलेगा फायदा

तेहरान। अमेरिका (America) ने ईरान (Iran) के तेल सेक्टर (Oil sector) पर लगे कड़े प्रतिबंधों को अस्थायी तौर पर हटा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की ओर से ईरान को 60 दिनों की राहत दी गई है। इसके तहत ईरान अब 21 अगस्त तक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों (Crude Oil and Petroleum Products) की बिक्री कर सकेगा। अमेरिका के इस कदम का असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट के साथ-साथ भारत पर भी देखने को मिलेगा। ईरान को क्यों मिली यह छूट?17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे। यह 60 दिनों की छूट उसी समझौते का हिस्सा है। इस समझौते के तहत ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बिना किसी रोक-टोक के मुक्त आवाजाही (फ्री एंड ओपन ट्रांजिट) की अनुमति देने का वादा किया है। इसके अलावा, ईरान अब अपने देश में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को भी आने की इजाजत देगा। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में हुई इस बातचीत को ‘अच्छी प्रगति’ बताया है और इसे एक बड़ी उपलब्धि करार दिया है। किन देशों को तेल बेच सकेगा ईरान?इस फैसले के बाद ईरान दुनिया के लगभग हर देश को अपना तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बेच सकता है। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे उत्तर कोरिया, क्यूबा और क्रीमिया को ईरान तेल नहीं बेच पाएगा। इस सौदे में एक अहम बात यह भी है कि ईरान को तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर में किया जा सकेगा। क्या अमेरिका भी करेगा ईरान से तेल का आयात?1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अमेरिका ने कभी भी ईरानी तेल का आयात नहीं किया है। लेकिन, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की ओर से जारी किए गए नए जनरल लाइसेंस के अनुसार, अगर तेल की बिक्री, डिलीवरी या ऑफलोडिंग की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जरूरी हुआ, तो ईरानी तेल को अमेरिका में भी आयात किया जा सकता है। भारत के लिए इस फैसले के क्या हैं मायने?साल 2019 में जब अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाए थे, उससे पहले तक भारत ईरानी तेल का एक बहुत बड़ा खरीदार था। भारत के अलावा दक्षिण कोरिया, जापान, ग्रीस, ताइवान, इटली और तुर्की भी बड़े खरीदार थे। 2009 के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत के कुल कच्चे तेल के आयात में ईरान की 14 फीसदी हिस्सेदारी थी और वह भारत का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर था। लेकिन 2019 में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति रहते हुए जब ईरान पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगाए गए, तब नई दिल्ली ने तेहरान से तेल खरीदना पूरी तरह से बंद कर दिया था। मौजूदा समय में दुनिया भर में तेल सप्लाई की जो किल्लत और अस्थिरता चल रही है, उसे देखते हुए अमेरिका की इस 60 दिन की छूट से भारत को बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। आपको बता दें कि फिलहाल भारत रूस से रिकॉर्ड स्तर पर तेल खरीद रहा है। मार्केट एनालिटिक्स फर्म केप्लर (Kpler) के अनुसार, केवल जून महीने में भारत ने रूस से 26 लाख बैरल प्रतिदिन तेल का आयात किया है, जो इसी अवधि में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 54 प्रतिशत है।
Gwalior BJP MLA: वोट हमने दिया, गाली क्यों? किसान के सवाल पर BJP विधायक ने जोड़ा हाथ, VIDEO वायरल

Gwalior BJP MLA: ग्वालियर। भितरवार क्षेत्र में सड़क पर लगे जाम के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जाम में फंसी बीजेपी विधायक मोहन सिंह राठौड़ की गाड़ी के सामने एक किसान ने गनमैन की शिकायत कर दी। किसान का आरोप था कि रास्ता खुलवाने के दौरान विधायक के गनमैन ने उससे गाली-गलौज की। शिकायत सुनते ही विधायक ने गाड़ी का शीशा नीचे किया और किसान से माफी मांग ली। India US trade deal: भारत और अमेरिका के बीच मेगा ट्रेड एग्रीमेंट की तैयारी तेज, बातचीत को अंतिम रूप देने भारत पहुंचे जैमीसन ग्रीर दौरा करने निकले थे विधायक दरअसल बीजेपी विधायक मोहन सिंह राठौड़ शनिवार को क्षेत्र का दौरा करने निकले थे। इसी दौरान रस्ते में एक किसान की ट्रॉली पलटने से सड़क पर जाम लग गया। उस समय बीजेपी विधायक की गाड़ी वहां से गुजर रही थी और जाम में फंस गयी। जिसके बाद उनका गनमैन गाड़ी से उतरा और रास्ता साफ़ करवाने लगा। तभी गनमैन की एक किसान से बहस हो गयी। बताया जा रहा है कि विवाद इतना बढ़ गया की गनमैन ने गली-गलौज करनी शुरू करदी। किसान बोलै हम वोट देते हैं, आप हमें गली देते हो गनमैन के इस व्यव्हार से परेशान होकर किसान सीधे विधायक की गाड़ी तक पहुंच गया और शिकायत करते हुए कहा कि जनता वोट देकर नेताओं को चुनती है, लेकिन उनके सुरक्षाकर्मी आम लोगों से बदसलूकी कर रहे हैं। किसान की बात सुनने के बाद विधायक मोहन सिंह राठौड़ ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कार का शीशा नीचे करते हुए कहा, ‘बेटा, मैं माफी मांग रहा हूं।’ विधायक के इस जवाब के बाद मामला शांत हो गया और उनका काफिला आगे बढ़ गया। DATIA MOLEST CASE: घर में अकेली बहू से ससुर ने की छेड़छाड़! विरोध करने पर अभद्रता का आरोप विधायक बोले- किसान कांग्रेस का कार्यकर्ता घटना का वीडियो सामने आने के बाद विधायक ने भी अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि ट्रॉली पलटने के कारण सड़क पर जाम लगा था और पुलिस व उनके सहयोगी यातायात सामान्य कराने की कोशिश कर रहे थे। विधायक का कहना है कि जिस व्यक्ति से विवाद हुआ, वह कांग्रेस का कार्यकर्ता है और वीडियो में भी सरकार आने पर देख लेने जैसी बातें करता दिखाई दे रहा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में मिला टिकट बता दें कि मोहन सिंह राठौड़ केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक माने जाते हैं। वे सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें भितरवार सीट से टिकट दिया था, जहां उन्होंने पूर्व मंत्री लाखन सिंह यादव को हराकर पहली बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया।