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Gwalior Drainage System: ग्वालियर में मंडराया जलभराव का खतरा, मानसून आने से पहले ही नालों में भरा पानी

Gwalior Waterlogging

Gwalior Drainage System: ग्वालियर। मध्यप्रदेश में मोनू बस एंट्री लेने ही वाला है, लेकिन शहर की जल निकासी व्यवस्था अब भी सवालों के घेरे में है। हाल ही में हुई प्री-मानसून बारिश ने नगर निगम की तैयारियों की हकीकत उजागर कर दी। महज आधे घंटे की बारिश में मुरार, रेलवे स्टेशन, हजीरा समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

शहर के प्रमुख नालों पर अतिक्रमण, ड्रेनेज सिस्टम की खराब स्थिति और सालों से अटके सुधर कार्यों के कारण इस बार भी हालत बिगड़ते नजर आ रहे हैं। हालात यह हैं कि स्वर्णरेखा और मुरार जैसी नदियां कई जगह सिकुड़कर नालों में तब्दील हो चुकी हैं और शहर के करीब 10 बड़े नाले अब भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाए हैं।

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मुरार, थाटीपुर और सिटी सेंटर में हर साल समस्या

मुरार के बारादरी, सदर बाजार और नदी किनारे बसे कई इलाके हर साल जलभराव की मार झेलते हैं। नालों में जमा सिल्ट और बढ़ते अतिक्रमण के कारण उनकी जल निकासी क्षमता लगातार घट रही है। थाटीपुर के सुरेश नगर, जीवाजी नगर और दर्पण कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। यहां कई स्थानों पर नाले संकरे और चोक हो चुके हैं।

वहीं सिटी सेंटर क्षेत्र के गोविंदपुरी, हरगोविंदपुरम, पटेल नगर, अनुपम नगर और कैलाश विहार जैसी कॉलोनियों में सड़कों और नालों की डिजाइन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई जगह ढलान सही नहीं होने के कारण पानी नालों तक पहुंच ही नहीं पाता और सड़कें जलभराव का शिकार हो जाती हैं। नतीजा यह है कि थोड़ी देर की बारिश में ही सड़कें पानी से लबालब हो जाती हैं और बाजारों में कारोबार प्रभावित होने लगता है।

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निगम का दावा- लगातार चल रहा सफाई अभियान

नगर निगम के अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव का कहना है कि दो महीने पहले से ही नालों और नालियों की सफाई का अभियान शुरू कर दिया गया था। पिछले वर्ष जिन क्षेत्रों में जलभराव की समस्या सामने आई थी, वहां पहले से ही सफाई कराई गई है।

उन्होंने बताया कि चारों विधानसभा क्षेत्रों में जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से लगातार सफाई कार्य चल रहा है। इसके बावजूद शहरवासियों की चिंता बनी हुई है। लोगों का कहना है कि हर साल दावों के बाद भी पहली तेज बारिश में व्यवस्था की पोल खुल जाती है।

ऐसे में मानसून शुरू होने से पहले जल निकासी व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

 

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