इंदौर की ज्वेलरी दुकान में दिनदहाड़े ठगी: ग्राहक बनकर आया युवक सोने की चेन और अंगूठियां लेकर बाइक से हुआ फरार

मध्य प्रदेश: के इंदौर शहर में एक ज्वेलरी दुकान पर हुई सुनियोजित ठगी और चोरी की वारदात ने व्यापारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। कनाड़िया थाना क्षेत्र स्थित एक प्रतिष्ठित ज्वेलरी शोरूम में ग्राहक बनकर पहुंचे युवक ने बड़ी चतुराई से दुकान संचालक और स्टाफ को बातचीत में उलझाया तथा मौका मिलते ही करीब डेढ़ लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण लेकर फरार हो गया। पूरी घटना दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है, जिसके आधार पर पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी हुई है। घटना कनाड़िया रोड स्थित एक ज्वेलरी दुकान की है, जहां सोमवार को एक युवक ग्राहक बनकर पहुंचा। उसने खुद को खरीददार बताते हुए सोने की दो अंगूठियां और एक चेन देखने की इच्छा जताई। युवक ने काफी देर तक आभूषणों को देखा और उनके बारे में जानकारी हासिल की। उसने दुकानदार को भरोसा दिलाया कि वह यह सामान किसी को उपहार देने के लिए खरीदना चाहता है और भुगतान नकद करेगा। बातचीत के बाद उसने एटीएम से पैसे निकालकर आने की बात कही और वहां से चला गया। दुकान संचालक और स्टाफ को उस समय किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ क्योंकि युवक सामान्य ग्राहक की तरह व्यवहार कर रहा था। शाम के समय वह दोबारा दुकान पहुंचा और पहले पसंद किए गए आभूषणों को फिर से दिखाने की मांग की। उसने नकद भुगतान करने की बात दोहराई, जिसके बाद काउंटर पर मौजूद कर्मचारी ने उसे सोने की चेन और अंगूठियों का बॉक्स दिखाया। बताया जा रहा है कि युवक लगातार बातचीत कर माहौल को सामान्य बनाए हुए था। इसी दौरान उसने दुकान संचालक से आभूषणों का वजन कराने का अनुरोध किया। जैसे ही संचालक अपनी सीट से उठे और दूसरी ओर गए, आरोपी ने मौके का फायदा उठाया। उसने गहनों से भरा बॉक्स उठाया और तेजी से दुकान के बाहर निकल गया। जब तक दुकान का स्टाफ स्थिति को समझ पाता, वह बाहर खड़ी बाइक पर सवार होकर फरार हो चुका था। घटना के तुरंत बाद दुकान कर्मचारियों ने उसका पीछा करने का प्रयास किया, लेकिन आरोपी तेजी से मौके से निकल गया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब्त कर ली। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए मास्क और टोपी पहन रखी थी। प्रारंभिक जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि उसने वारदात से पहले दुकान की रेकी की थी और पूरी योजना के साथ वहां पहुंचा था। पुलिस को यह जानकारी भी मिली है कि आरोपी जिस बाइक से आया था, उसकी नंबर प्लेट हटाई गई थी, जिससे उसकी पहचान करना मुश्किल हो सके। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान करने का प्रयास कर रही है। आसपास के इलाकों के कैमरों की रिकॉर्डिंग भी खंगाली जा रही है ताकि उसके आने और जाने के रास्तों का पता लगाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी की तलाश तेज कर दी गई है और जल्द ही उसे गिरफ्तार करने की उम्मीद है। इस घटना ने शहर के व्यापारियों को सतर्क कर दिया है। पुलिस ने भी दुकानदारों से अपील की है कि महंगे सामान दिखाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतें और संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखें ताकि इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके।
तुअर दाल के कारोबार में मुनाफे का झांसा देकर 65 लाख की ठगी, स्टॉक के फोटो दिखाकर कारोबारी को फंसाया; दो पर केस दर्ज

मध्य प्रदेश: की आर्थिक राजधानी इंदौर में व्यापारिक निवेश के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। तुअर दाल के कारोबार में अधिक मुनाफा दिलाने का भरोसा देकर एक कारोबारी से 65 लाख रुपए की राशि हासिल कर ली गई। आरोप है कि रकम लेने के बाद न तो माल की आपूर्ति की गई और न ही निवेश की गई राशि लौटाई गई। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार भंवरकुआं थाना क्षेत्र निवासी कारोबारी गिरीश रामनानी ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उनकी पहचान महाराष्ट्र के सोलापुर निवासी गुरुशांतलिंग कुंभार और सोमनाथ हलगोदे से कई वर्ष पहले हुई थी। दोनों व्यापारियों से पूर्व में भी विभिन्न स्थानों पर व्यापारिक लेन-देन हो चुका था। इसी पुराने परिचय और विश्वास का फायदा उठाकर आरोपियों ने उन्हें नए व्यापारिक निवेश का प्रस्ताव दिया। शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने खुद को तुअर दाल के बड़े कारोबारी के रूप में प्रस्तुत किया और अपनी फर्म के माध्यम से व्यापार में निवेश करने पर आकर्षक मुनाफा मिलने का दावा किया। फरवरी 2026 में एक आरोपी इंदौर पहुंचा और कारोबारी से मुलाकात की। इस दौरान उसने मोबाइल फोन पर बड़े पैमाने पर तुअर दाल के स्टॉक की तस्वीरें और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े विवरण दिखाए। साथ ही निवेश करने पर कम समय में अच्छा लाभ मिलने का भरोसा भी दिलाया। व्यापारिक अवसर को लाभदायक मानते हुए गिरीश रामनानी ने निवेश का निर्णय लिया। शिकायत के अनुसार उन्होंने विभिन्न बैंकों से ऋण लेकर कुल 65 लाख रुपए की व्यवस्था की। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में यह पूरी राशि आरोपियों द्वारा संचालित फर्म के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई। लेन-देन के दौरान कारोबारी को भरोसा दिलाया गया था कि तय समय के भीतर माल की आपूर्ति कर दी जाएगी और व्यापारिक लाभ भी मिलेगा। फरियादी का आरोप है कि रकम जमा होने के बाद आरोपियों का व्यवहार बदलने लगा। निर्धारित अवधि बीत जाने के बावजूद तुअर दाल की खेप नहीं भेजी गई। जब माल की आपूर्ति को लेकर लगातार संपर्क किया गया तो आरोपियों ने विभिन्न कारण बताते हुए समय मांगना शुरू कर दिया। कई बार बातचीत के बावजूद न तो व्यापार पूरा हुआ और न ही निवेश की गई राशि वापस की गई। समय बीतने के साथ कारोबारी को संदेह हुआ कि उनके साथ सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की गई है। उन्होंने अपने स्तर पर आरोपियों से संपर्क कर समाधान निकालने की कोशिश की, लेकिन कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की और उपलब्ध दस्तावेज, बैंक ट्रांजैक्शन की जानकारी तथा अन्य साक्ष्य जांच एजेंसी को सौंपे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए तथ्यों और बैंकिंग रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया है। शिकायत के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां अब धनराशि के लेन-देन, व्यापारिक दस्तावेजों और आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं। यह मामला व्यापारिक निवेश के दौरान सतर्कता बरतने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े वित्तीय लेन-देन से पहले संबंधित व्यक्ति, फर्म और कारोबार की स्वतंत्र जांच करना आवश्यक है। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और आरोपियों की भूमिका तथा धनराशि के उपयोग से जुड़े पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
ट्रेनों में चोरी कर देशभर में फरार होता था शातिर चोर, इंदौर जीआरपी ने दबोचा, 15 लाख के जेवर बरामद

मध्य प्रदेश: के इंदौर में रेलवे पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। ट्रेनों में चोरी की वारदातों को अंजाम देकर लंबे समय से पुलिस को चकमा देने वाले एक शातिर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी के कब्जे से करीब 15 लाख रुपये मूल्य के सोने के आभूषण बरामद किए गए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी न केवल कई राज्यों में सक्रिय था, बल्कि वारदात के बाद अपनी पहचान छिपाने और गिरफ्तारी से बचने के लिए हवाई यात्रा का सहारा भी लेता था। रेलवे पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान उत्तराखंड निवासी जितेंद्र चावला उर्फ जीतू के रूप में हुई है। उस पर देश के विभिन्न हिस्सों में चोरी की अनेक घटनाओं को अंजाम देने के आरोप हैं। हाल ही में उसने अहमदाबाद से इंदौर आ रही ट्रेन में यात्रा कर रही एक महिला का पर्स चोरी कर लिया था। पर्स में बड़ी मात्रा में सोने के आभूषण रखे हुए थे, जिनकी कीमत करीब 15 लाख रुपये बताई गई थी। घटना सामने आने के बाद पीड़िता ने रेलवे पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की। आरोपी की पहचान और लोकेशन का पता लगाने के लिए कई राज्यों में फैले सीसीटीवी नेटवर्क का सहारा लिया गया। जांच दल ने फरीदाबाद, बरेली, मुरादाबाद, बदायूं सहित विभिन्न शहरों के 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल ट्रैकिंग और लगातार निगरानी के आधार पर आखिरकार आरोपी तक पहुंच बनाई गई। पुलिस ने उसे नीमच क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के कब्जे से चोरी किए गए सोने के आभूषण बरामद किए गए हैं। इनमें सोने का हार, कंगन, अंगूठियां और अन्य कीमती गहने शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि बरामद आभूषणों की पहचान संबंधित पीड़िता द्वारा की गई है। इससे मामले में महत्वपूर्ण साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कई अहम खुलासे किए हैं। उसने स्वीकार किया कि वह अपने महंगे शौक और आलीशान जीवनशैली को बनाए रखने के लिए ट्रेनों में चोरी की वारदातों को अंजाम देता था। भीड़भाड़ वाली ट्रेनों और लंबी दूरी की यात्राओं को वह अपना आसान निशाना बनाता था। यात्रियों की असावधानी का फायदा उठाकर वह कीमती सामान लेकर फरार हो जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया का भी व्यापक उपयोग करता था। वह फेसबुक के माध्यम से विभिन्न महिलाओं और युवतियों से संपर्क स्थापित करता था। दोस्ती बढ़ाने के बाद वह अलग-अलग शहरों में उनसे मिलने जाता और इसी दौरान क्षेत्र की रेकी कर चोरी की संभावनाएं तलाशता था। पुलिस को आशंका है कि आरोपी ने इसी तरीके से कई राज्यों में अपना नेटवर्क तैयार किया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी के खिलाफ करीब 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें चोरी और संपत्ति संबंधी अपराध प्रमुख रूप से शामिल हैं। तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में उसकी गतिविधियों की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब उसके पुराने मामलों का रिकॉर्ड जुटा रही हैं ताकि अन्य लंबित अपराधों का भी खुलासा किया जा सके। रेलवे पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से अंतरराज्यीय चोरी की कई घटनाओं का पर्दाफाश हो सकता है। साथ ही यात्रियों को भी सलाह दी गई है कि रेल यात्रा के दौरान अपने कीमती सामान और आभूषणों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतें।
MP Politics: CM मोहन यादव पर लगे जमीन खरीद के आरोपों पर भाजपा का पलटवार, ऊर्जा मंत्री तोमर बोले- कांग्रेस फैला रही भ्रम

MP Politics: ग्वालियर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर कांग्रेस द्वारा लगाए गए जमीन खरीदी के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार किया है। बीता दें कि ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने कहा कि कांग्रेस पहले से मुख्यमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है और जनता को भरम में दाल रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बनने से पहले ही डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार ने जमीन खरीद ली थी, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कोई जमीन नहीं खरीदी है। ऐसे में कांग्रेस के आरोप पूरी तरह से निराधार हैं। नगरासू गुरुद्वारा विवाद थमा, लेकिन बढ़ा नया बवाल: निहंगों के रवाना होने के बाद कार्रवाई की मांग तेज आरोपों में घिरे CM कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार द्वारा पिछले कुछ वर्षों में बड़ी मात्रा में जमीनों की खरीद-फरोख्त की गई है। कांग्रेस ने इस मामले में जमीनों के सौदों और संपत्ति में वृद्धि को लेकर सवाल उठाते हुए पारदर्शिता की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि इस मामले की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। भाजपा का पलटवार ऊर्जा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के परिवार को भी अन्य लोगों की तरह व्यापार करने का पूरा अधिकार है। किसी के परिवार के लोग व्यापार करें तो वह सामान्य बात है, लेकिन कांग्रेस इसे मुद्दा बनाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है। Rani Durgavati Airport: CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान, अब रानी दुर्गावती के नाम से पहचाना जाएगा जबलपुर एयरपोर्ट मुख्यमंत्री को बदनाम करने की साजिश प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि प्रदेश सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि मुख्यमंत्री की संपत्ति को लेकर गलत और भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी इस मामले में पार्टी का पक्ष सार्वजनिक रूप से रख चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को बदनाम करने की साजिश कर रही है, लेकिन उसकी यह कोशिश कभी सफल नहीं होगी। भाजपा ने दावा किया कि जनता सच्चाई जानती है और कांग्रेस के आरोपों में कोई दम नहीं है।
चीन को लेकर अमेरिका में बढ़ी चिंता: संवेदनशील प्रयोगशालाओं तक पहुंच पर उठे गंभीर सवाल

नई दिल्ली ।अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच अब अमेरिकी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में चीनी नागरिकों की मौजूदगी एक नया राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दा बन गई है। अमेरिका के दो वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटरों ने ट्रंप प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और संवेदनशील शोध संस्थानों तक विदेशी नागरिकों की पहुंच की समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल वैज्ञानिक सहयोग का मामला नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और तकनीकी श्रेष्ठता से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। अर्कांसस से रिपब्लिकन सीनेटर टॉम कॉटन और यूटा से सीनेटर माइक ली ने अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट को एक विस्तृत पत्र लिखकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। दोनों सांसदों का कहना है कि अमेरिकी ऊर्जा विभाग की राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं कृत्रिम बुद्धिमत्ता उन्नत कंप्यूटिंग ऊर्जा सुरक्षा सामग्री विज्ञान और परमाणु अनुसंधान जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में काम करती हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में चीनी नागरिकों की मौजूदगी और उनकी पहुंच राष्ट्रीय हितों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है। पत्र में दोनों सीनेटरों ने ऊर्जा विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि वित्त वर्ष 2025 के दौरान लगभग 1900 अल्पकालिक यात्राएं चीनी नागरिकों द्वारा की गईं। इसके अतिरिक्त करीब 1300 दीर्घकालिक शोध नियुक्तियां और लगभग 2100 औपचारिक रोजगार पदों पर भी चीनी नागरिक विभिन्न प्रयोगशालाओं से जुड़े रहे। इन आंकड़ों ने अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। सांसदों ने यह भी बताया कि इसी अवधि में चीनी नागरिकों ने राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं की सुविधाओं तक 5000 से अधिक बार प्रत्यक्ष अथवा दूरस्थ पहुंच हासिल की। उनके अनुसार यह स्थिति केवल सामान्य वैज्ञानिक आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है बल्कि इससे संवेदनशील तकनीकों और अनुसंधान से जुड़ी जानकारियों के लीक होने की आशंका भी पैदा होती है। टॉम कॉटन और माइक ली का तर्क है कि चीन वर्तमान समय में उभरती तकनीकों की वैश्विक दौड़ में अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन लंबे समय से विदेशी तकनीक और बौद्धिक संपदा हासिल करने की रणनीति पर काम करता रहा है। ऐसे में अमेरिकी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं तक व्यापक पहुंच देना राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से चिंताजनक है। पत्र में दोनों सांसदों ने ऊर्जा विभाग से कई महत्वपूर्ण सवाल भी पूछे हैं। उन्होंने जानना चाहा है कि विभाग अपनी सुरक्षा नीतियों में चीन के राष्ट्रीय खुफिया कानून को किस प्रकार ध्यान में रखता है। सीनेटरों का दावा है कि यह कानून चीनी नागरिकों को आवश्यक होने पर अपने देश की खुफिया एजेंसियों के साथ सहयोग करने के लिए बाध्य करता है। इसलिए अमेरिका को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। इसके अलावा सांसदों ने यह भी जानकारी मांगी है कि क्या चीनी नागरिकों को निर्यात नियंत्रण वाली तकनीकों नियंत्रित अनुसंधान परियोजनाओं या अन्य संवेदनशील वैज्ञानिक कार्यक्रमों तक पहुंच दी जा रही है। उन्होंने यह भी पूछा है कि रिमोट एक्सेस को सीमित करने और संभावित जोखिमों को कम करने के लिए विभाग कौन से कदम उठा रहा है। सीनेटरों ने अपने पत्र में स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण तकनीकी बढ़त को बनाए रखना ऊर्जा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि यदि हजारों विदेशी नागरिक विशेषकर चीन जैसे रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी देश के नागरिक इन प्रयोगशालाओं तक लगातार पहुंच बनाते रहेंगे तो अमेरिका की तकनीकी बढ़त और सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकती हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब इस मुद्दे को उठाया गया हो। जनवरी में भी टॉम कॉटन माइक ली और अन्य रिपब्लिकन सांसदों ने ऊर्जा विभाग से कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद मार्च 2025 में उन्होंने जीएटीई एक्ट नामक विधेयक पेश किया था जिसका उद्देश्य अमेरिकी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं और संवेदनशील तकनीकों तक प्रतिद्वंद्वी देशों के नागरिकों की पहुंच को सीमित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। ऐसे में वैज्ञानिक सहयोग और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखना अमेरिकी प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
इंदौर के शिशुकुंज स्कूल में बच्चों की तबीयत बिगड़ने का मामला गंभीर, किचन सील; गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन के मिले लक्षण

मध्य प्रदेश: के इंदौर स्थित शिशुकुंज स्कूल में विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ने के मामले ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। स्कूल में लंच करने के बाद 150 से अधिक बच्चों के बीमार पड़ने की घटना सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और जांच की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रभावित बच्चों की स्थिति पर नजर रखने के लिए डॉक्टरों की टीम घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है, जबकि मामले के कारणों का पता लगाने के लिए खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच जारी है। घटना के बाद स्कूल प्रबंधन और अभिभावकों के बीच भी सतर्कता बढ़ गई है। प्रशासन द्वारा स्कूल की रसोई सील किए जाने के बाद प्रबंधन ने अभिभावकों से बच्चों के लिए घर से भोजन भेजने का अनुरोध किया है। इसके बाद अधिकांश विद्यार्थी टिफिन लेकर स्कूल पहुंचे। घटना के प्रभाव के चलते स्कूल में विद्यार्थियों की उपस्थिति भी सामान्य दिनों की तुलना में कम दर्ज की गई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रभावित बच्चों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मंगलवार को चिकित्सकों की टीम कई बच्चों के घर पहुंची और उनकी स्वास्थ्य जांच की। इस दौरान डॉक्टरों ने बच्चों के अभिभावकों से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी ली और यह सुनिश्चित किया कि किसी भी बच्चे की स्थिति गंभीर नहीं है। विभाग का कहना है कि प्रभावित विद्यार्थियों की निगरानी आगामी दिनों में भी जारी रहेगी ताकि किसी भी संभावित स्वास्थ्य जोखिम को समय रहते रोका जा सके। जानकारी के अनुसार बच्चों में पेट दर्द, उल्टी, घबराहट, कमजोरी और शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षण देखने को मिले थे। चिकित्सकीय जांच में कई बच्चों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन के संकेत पाए गए हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल किसी भी बच्चे की स्थिति गंभीर नहीं बताई गई है और सभी की हालत स्थिर बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अधिकांश बच्चों को प्राथमिक उपचार और आवश्यक सलाह देने के बाद घर पर ही निगरानी में रखा गया है। घटना के बाद अभिभावकों में भी चिंता का माहौल बना रहा। बड़ी संख्या में अभिभावक स्कूल पहुंचे और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। प्रभावित विद्यार्थियों में अधिकांश बच्चे प्राथमिक कक्षाओं के बताए जा रहे हैं। अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक कुछ विद्यार्थियों को अस्वस्थ महसूस होने पर एहतियातन घर भेजा गया था। इसके अलावा कई अभिभावकों ने बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी शिकायतें प्रशासन और स्कूल प्रबंधन तक पहुंचाईं। इसके आधार पर पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने विस्तृत निगरानी अभियान शुरू किया है। मामले की जांच के दौरान जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने स्कूल परिसर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान रसोई में कुछ खाद्य सामग्री निर्धारित उपयोग अवधि से अधिक समय तक रखी हुई पाई गई। इसके बाद एहतियाती कदम उठाते हुए स्कूल की किचन को सील कर दिया गया। जांच टीम ने भोजन, मसाले, डेयरी उत्पाद, पानी और अन्य खाद्य सामग्री सहित कुल 23 नमूने एकत्र कर प्रयोगशाला भेजे हैं। अब पूरे मामले की दिशा प्रयोगशाला रिपोर्ट पर निर्भर मानी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों की तबीयत बिगड़ने के पीछे खाद्य पदार्थ, पानी या कोई अन्य कारण जिम्मेदार था। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग, खाद्य सुरक्षा विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से मामले की निगरानी कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
टैरिफ से बदलेगी अमेरिका की तस्वीर: ट्रंप बोले- फैक्ट्रियां लौट रहीं, बढ़ रही नौकरियां

नई दिल्ली ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी टैरिफ आधारित व्यापार नीति को देश की आर्थिक मजबूती का आधार बताया है। पेंसिल्वेनिया के मैकुंगी स्थित मैक ट्रक्स फैक्ट्री में कर्मचारियों को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि आयातित वस्तुओं पर लगाए गए टैरिफ न केवल अमेरिकी उद्योगों को नई ताकत दे रहे हैं बल्कि कंपनियों को अमेरिका में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए भी प्रेरित कर रहे हैं। उनके मुताबिक यह नीति वर्षों से कमजोर पड़ रहे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को पुनर्जीवित करने और लाखों रोजगार सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि लंबे समय तक अमेरिकी श्रमिकों को ऐसे हालात का सामना करना पड़ा जब वैश्विक व्यापार नीतियों के कारण फैक्ट्रियां बंद होती गईं और नौकरियां दूसरे देशों में स्थानांतरित होती रहीं। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने इस प्रवृत्ति को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए हैं और अब अमेरिकी हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। ट्रंप ने कहा कि आज देश के श्रमिकों के पास ऐसा नेतृत्व है जो अमेरिका और अमेरिकी कामगारों के हितों को सबसे पहले रखता है। राष्ट्रपति ने विदेशी स्टील एल्यूमीनियम और कॉपर पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य घरेलू उद्योगों को सस्ता विदेशी प्रतिस्पर्धी दबाव से बचाना है। उन्होंने यह भी बताया कि विदेशी कारों और मध्यम तथा भारी श्रेणी के ट्रकों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है ताकि अमेरिकी कंपनियां घरेलू बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकें। ट्रंप के अनुसार इस नीति का सीधा लाभ मैक ट्रक्स जैसी कंपनियों को मिला है जो अमेरिका में निर्माण कर रही हैं और हजारों लोगों को रोजगार दे रही हैं। ट्रंप ने दावा किया कि टैरिफ नीति के कारण कई वैश्विक कंपनियां अपना उत्पादन अमेरिका में स्थानांतरित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश में पहले की तुलना में तीन गुना अधिक फैक्ट्रियों का निर्माण हो रहा है। इनमें ऑटोमोबाइल उत्पादन इकाइयों से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी फैक्ट्रियां शामिल हैं। उन्होंने कंपनियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि यदि वे टैरिफ से बचना चाहती हैं तो उन्हें अमेरिका में फैक्ट्री लगानी होगी और अमेरिकी नागरिकों को रोजगार देना होगा। व्यापार संतुलन को लेकर भी ट्रंप ने अपनी सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान चीन के साथ व्यापार घाटे में ऐतिहासिक कमी दर्ज की गई और अमेरिकी निर्यात में लगभग 150 अरब डॉलर की वृद्धि हुई। उनके अनुसार यह अमेरिका के व्यापार इतिहास में सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है और इससे घरेलू उद्योगों को नई ऊर्जा मिली है। मैक ट्रक्स के कर्मचारियों और प्रबंधन की सराहना करते हुए ट्रंप ने कंपनी को अमेरिकी औद्योगिक ताकत का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अमेरिका की सड़कों पर अधिकतर ट्रक अमेरिकी फैक्ट्रियों में बने होंगे। कार्यक्रम के दौरान मरीन कॉर्प्स के पूर्व सैनिक और मैक ट्रक्स के तीसरी पीढ़ी के कर्मचारी पैट्रिक मैकह्यू ने भी कहा कि कंपनी अमेरिका में ही उत्पादन करने और देश की प्रगति में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। अपने संबोधन में ट्रंप ने पेंसिल्वेनिया में हो रहे नए निवेशों का भी जिक्र किया। उन्होंने फार्मास्युटिकल कंपनी एली लिली टेलीकॉम कंपनी नोकिया और मेडिकल टेक्नोलॉजी क्षेत्र की कंपनी बी ब्रॉन के निवेश प्रस्तावों को अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बढ़ते विश्वास का प्रमाण बताया। ट्रंप के अनुसार ये निवेश दर्शाते हैं कि वैश्विक कंपनियां अमेरिका को भविष्य के विनिर्माण और नवाचार केंद्र के रूप में देख रही हैं। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनकी टैरिफ नीति को लेकर अमेरिका और दुनिया भर में बहस जारी है। समर्थकों का मानना है कि इससे घरेलू उद्योग और रोजगार मजबूत होंगे जबकि आलोचक इसे वैश्विक व्यापार के लिए चुनौती मानते हैं। हालांकि ट्रंप का दावा है कि उनकी आर्थिक रणनीति का अंतिम लक्ष्य अमेरिकी उद्योगों को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाना है।
भारत बनेगा वैश्विक निवेश का अगला बड़ा केंद्र, तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग और टेक्नोलॉजी बना रहे मजबूत बाजार

नई दिल्ली ।चीन के डालियान में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक ‘न्यू चैंपियंस’ यानी समर दावोस के दौरान भारत की आर्थिक संभावनाओं को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संदेश सामने आया है। नॉर्वे की प्रमुख बायोटेक्नोलॉजी कंपनी एकर बायोमरीन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैट्स जोहानसन ने भारत को दुनिया के सबसे मजबूत और आकर्षक दीर्घकालिक बाजारों में से एक बताते हुए कहा कि देश की विशाल आबादी, तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग और नई तकनीकों को तेजी से अपनाने की क्षमता भविष्य की आर्थिक सफलता का मजबूत आधार तैयार कर रही है। आईएएनएस से बातचीत में जोहानसन ने कहा कि भारत उन देशों में शामिल है जहां दीर्घकालिक निवेश और कारोबारी विस्तार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उनके अनुसार भारत केवल एक बड़ा उपभोक्ता बाजार ही नहीं है बल्कि नवाचार और तकनीकी बदलावों को स्वीकार करने की असाधारण क्षमता भी रखता है। यही वजह है कि वैश्विक कंपनियां भारत को भविष्य के विकास इंजन के रूप में देख रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत में बड़ी आबादी और लगातार बढ़ती क्रय शक्ति वाला मध्यम वर्ग आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा दे रहा है। इसके साथ ही डिजिटल तकनीक और नवाचार को अपनाने की रफ्तार भी दुनिया के कई देशों से बेहतर है। इन सभी कारकों के कारण भारत आने वाले वर्षों में भी वैश्विक निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बाजार बना रहेगा। भारत के प्रति अपनी कंपनी की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए जोहानसन ने बताया कि एकर बायोमरीन देश में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी मुंबई में नया कार्यालय खोलने की तैयारी कर रही है ताकि भारतीय बाजार में अपनी गतिविधियों का विस्तार किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत पहले से ही कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है और आने वाले समय में इसकी भूमिका और अधिक बढ़ने वाली है। उन्होंने बताया कि एकर बायोमरीन लंबे समय से भारतीय झींगा पालन उद्योग को आवश्यक सामग्री उपलब्ध करा रही है। भारत का श्रिम्प फार्मिंग सेक्टर दुनिया के प्रमुख एक्वाकल्चर बाजारों में शामिल है और इस क्षेत्र में कंपनी की मजबूत भागीदारी रही है। अब कंपनी केवल जलीय कृषि तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि खाद्य उत्पादों और मानव स्वास्थ्य से जुड़े पोषण सप्लीमेंट्स के क्षेत्र में भी भारतीय बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की योजना बना रही है। मैट्स जोहानसन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में एआई वैश्विक अर्थव्यवस्था और उद्योगों की उत्पादकता बढ़ाने वाला सबसे बड़ा कारक बन सकता है। उनके मुताबिक एआई का उपयोग केवल उत्पादन इकाइयों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि बिक्री, विपणन, वित्तीय प्रबंधन और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में भी बड़े बदलाव लाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी कंपनी एआई को अपनी पूरी वैल्यू चेन में शामिल करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इससे न केवल दक्षता बढ़ेगी बल्कि लागत में कमी और बेहतर निर्णय लेने में भी मदद मिलेगी। जोहानसन का मानना है कि एआई वैश्विक आर्थिक विकास का नया इंजन बनने जा रहा है और जो कंपनियां इसे तेजी से अपनाएंगी वे भविष्य में प्रतिस्पर्धा में आगे रहेंगी। गौरतलब है कि 23 जून से शुरू हुआ समर दावोस सम्मेलन 25 जून तक चलेगा। इस वैश्विक मंच पर दुनिया भर के उद्योग जगत के दिग्गज, नीति निर्माता, शिक्षाविद और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि नवाचार, उद्यमिता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आर्थिक विकास के भविष्य पर मंथन कर रहे हैं। भारत को लेकर व्यक्त किए गए सकारात्मक विचार एक बार फिर यह संकेत देते हैं कि वैश्विक निवेशकों की नजर में देश की आर्थिक संभावनाएं लगातार मजबूत होती जा रही हैं।
नगरासू गुरुद्वारा विवाद थमा, लेकिन बढ़ा नया बवाल: निहंगों के रवाना होने के बाद कार्रवाई की मांग तेज

नई दिल्ली ।उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित नगरासू गुरुद्वारे में पिछले चार दिनों से चला आ रहा तनावपूर्ण विवाद मंगलवार को भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इसके बाद एक नए विवाद और जनआक्रोश की आशंका पैदा हो गई है। गुरुद्वारे में डटे निहंग सिखों को पंजाब से पहुंचे आठ सदस्यीय शिष्टमंडल की मध्यस्थता के बाद वापस भेज दिया गया, लेकिन स्थानीय लोग इस पूरे घटनाक्रम से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। उनका आरोप है कि कई दिनों तक क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना रहा, पत्थरबाजी और तनाव की घटनाएं हुईं, इसके बावजूद किसी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। मंगलवार सुबह से ही गुरुद्वारे में गतिविधियां तेज हो गई थीं। सुरक्षा कारणों से किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। पूर्वाह्न करीब साढ़े ग्यारह बजे पंजाब से आए धार्मिक प्रतिनिधियों और गुरुद्वारा प्रबंधन के बीच बातचीत शुरू हुई। लगभग तीन घंटे तक चली चर्चा के बाद सहमति बनी और शाम करीब चार बजे पांचों निहंगों को सुरक्षा घेरे में पंजाब के लिए रवाना कर दिया गया। इस दौरान निहंग जयकारे लगाते और उत्साह जताते दिखाई दिए। कुछ निहंग मोटरसाइकिलों पर जबकि एक अन्य वाहन से रवाना हुआ। आनंदपुर साहिब से पहुंचे जत्थेदार बाबा अजीत सिंह ने कहा कि सभी पक्ष शांति चाहते हैं और उत्तराखंड के लोग उनके भाई हैं। उन्होंने गुरुद्वारे पर कब्जे के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निहंग अपने धार्मिक स्थल पर ही रुके हुए थे। उनके अनुसार पुलिस कार्रवाई के भय से वे छत पर चले गए थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून से बड़ा कोई नहीं है और प्रशासन जो भी उचित कार्रवाई करेगा, वह स्वीकार होगी। हालांकि स्थानीय लोगों का नजरिया इससे अलग है। उनका कहना है कि चार दिनों तक गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर कब्जे जैसी स्थिति बनी रही, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत ने सवाल उठाया कि जब पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात थे तो विवाद का समाधान पहले क्यों नहीं किया गया। वहीं युवा नेता मोहित डिमरी ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि शांत माहौल को खराब करने की कोशिश हुई और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस पर पत्थरबाजी की गई और धारदार हथियारों का प्रदर्शन भी हुआ। सोमवार रात को हाईवे पर पत्थरबाजी की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी थी। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि निहंगों को उकसाने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद उन्होंने प्रतिक्रिया दी। इसके बावजूद लोगों का मानना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। नगर पालिका अध्यक्ष संतोष रावत और जिला पंचायत सदस्य संपन्न नेगी समेत कई जनप्रतिनिधियों ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि गुरुद्वारा प्रबंधन ने तोड़फोड़ और अव्यवस्था के आरोप लगाए थे तो उनकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी। अब स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तहरीर देने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यदि चार दिनों तक चले घटनाक्रम में कानून व्यवस्था प्रभावित हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। फिलहाल प्रशासन राहत की सांस ले रहा है कि विवाद शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया, लेकिन क्षेत्र में लोगों की नाराजगी यह संकेत दे रही है कि मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
मानसून ने दी मध्य प्रदेश में दस्तक, कई जिलों में शुरू हुई बारिश; मौसम विभाग ने जारी किया तेज हवाओं और गरज-चमक का चेतावनी संदेश

मध्य प्रदेश: में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मानसून ने दस्तक दे दी है। मौसम विभाग ने बुधवार को राज्य में मानसून के प्रवेश की आधिकारिक घोषणा कर दी। इस बार मानसून सामान्य तिथि से नौ दिन देरी से प्रदेश पहुंचा है, जिससे किसानों के साथ-साथ आम लोगों को भी राहत की उम्मीद जगी है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले तीन से चार दिनों के भीतर मानसून प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर लेगा और वर्षा गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। मौसम विभाग के अनुसार मानसून ने बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, हरदा, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन और बड़वानी के रास्ते मध्य प्रदेश में प्रवेश किया है। दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी जिलों में मानसून की सक्रियता के साथ ही कई क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला शुरू हो गया है। विशेष रूप से बैतूल और बुरहानपुर में मानसून की पहली बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट और मौसम में ठंडक महसूस की गई। मानसून के आगमन के साथ मौसम विभाग ने प्रदेश के 33 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। हरदा, बैतूल, खंडवा, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बुरहानपुर सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ वर्षा की संभावना जताई गई है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, उज्जैन, इंदौर, देवास, सीहोर, शाजापुर, खरगोन, नर्मदापुरम, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, रीवा, मऊगंज और सिंगरौली समेत अनेक जिलों में भी मौसम के सक्रिय बने रहने का अनुमान है। पिछले 24 घंटों के दौरान भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ दिखाई दिया। कुल 39 जिलों में तेज हवाओं और बारिश की गतिविधियां दर्ज की गईं। कई स्थानों पर तेज बारिश के साथ आंधी चली, जबकि बालाघाट जिले में ओलावृष्टि की भी सूचना मिली। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में वर्षा का दायरा और अधिक विस्तृत होगा। हालांकि प्रदेश के कुछ हिस्सों में अभी भी गर्मी का प्रभाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। मौसम विभाग ने जबलपुर, मंडला, दमोह और उमरिया में हीटवेव की स्थिति बने रहने की चेतावनी जारी की है। वहीं प्रदेश के कई जिलों में दिन का तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है। दतिया में सर्वाधिक 42.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जबकि ग्वालियर में भी तापमान 40 डिग्री के पार रहा। सोमवार और मंगलवार को प्री-मानसूनी गतिविधियों ने प्रदेश के मौसम को पूरी तरह बदल दिया। धार में लगभग दो इंच वर्षा दर्ज की गई, जबकि भोपाल में पौन इंच बारिश रिकॉर्ड हुई। इंदौर, खंडवा, रायसेन, राजगढ़, उज्जैन, छिंदवाड़ा, जबलपुर, सागर, सतना, सिवनी, बड़वानी, शाजापुर और सीहोर सहित कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला। पचमढ़ी प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 31.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के आगे बढ़ने के साथ तापमान में और गिरावट दर्ज की जाएगी। इससे खेती-किसानी की गतिविधियों को गति मिलेगी और जलाशयों में जलस्तर बढ़ने की संभावना भी बनेगी। प्रदेश के किसानों के लिए यह बारिश खरीफ सीजन की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समय पर और पर्याप्त वर्षा होने से सोयाबीन, धान, मक्का तथा अन्य खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी। मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार मध्य प्रदेश में मानसून के प्रवेश की सामान्य तिथि 15 जून मानी जाती है। वर्ष 2021 में मानसून 9 जून को ही प्रदेश पहुंच गया था, जबकि वर्ष 2018 में इसकी सबसे देर से एंट्री 25 जून को दर्ज की गई थी। पिछले वर्ष मानसून 16 जून को पहुंचा था और पूरे सीजन में सामान्य से अधिक वर्षा हुई थी। फिलहाल मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज होगी। इसके साथ ही आंधी, गरज-चमक और तेज हवाओं की गतिविधियां भी जारी रह सकती हैं। ऐसे में लोगों को मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।