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कानून व्यवस्था बनाए रखने प्रशासन का बड़ा फैसला, BNSS धारा 163 लागू, उल्लंघन पर होगी FIR

ग्वालियर। ग्वालियर जिले में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी रुचिका चौहान द्वारा जारी आदेश के अनुसार पूरे जिले में बिना पूर्व अनुमति के किसी भी प्रकार के धरना, प्रदर्शन, रैली और जुलूस के आयोजन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत जारी किया गया है और आगामी दो माह तक प्रभावी रहेगा। प्रशासन का कहना है कि यह कदम जिले में शांति, सौहार्द और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया है। विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले बाजारों, प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों, मॉल और संवेदनशील स्थानों पर किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है। जारी निर्देशों के मुताबिक किसी भी संगठन, संस्था या व्यक्ति को सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने से पहले प्रशासनिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा। यदि कार्यक्रम किसी एक अनुविभाग की सीमा में आयोजित किया जाना है तो संबंधित एसडीएम से अनुमति प्राप्त करनी होगी। वहीं यदि कार्यक्रम का दायरा एक से अधिक अनुविभागों में आता है तो आयोजन के लिए अपर जिला दंडाधिकारी से लिखित स्वीकृति लेना आवश्यक होगा। प्रशासन ने सोशल मीडिया गतिविधियों को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि भड़काऊ, भ्रामक, अफवाह फैलाने वाली अथवा सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करने वाली पोस्ट पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। पुलिस और आईटी सेल ऐसे मामलों पर लगातार नजर रखेंगे। यदि कोई व्यक्ति धर्म, जाति, समुदाय या सामाजिक समूहों की भावनाओं को आहत करने वाली सामग्री प्रसारित करता है तो उसके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों को किसी प्रकार की राहत नहीं दी जाएगी। बिना अनुमति धरना, प्रदर्शन, जुलूस या रैली आयोजित करने वाले व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत मामला दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से नियमों का पालन करने तथा प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गई है। कलेक्टर कार्यालय की ओर से जारी इस आदेश के बाद अब जिले में किसी भी सार्वजनिक आयोजन से पहले अनुमति प्रक्रिया का पालन अनिवार्य होगा। प्रशासन ने नागरिकों से शांति, सौहार्द और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया है।

NEET विवाद के बीच राघव चड्ढा की चुप्पी पर उठे सवाल, वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया में तेज हुई राजनीतिक बहस

नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े विवाद और पेपर लीक के आरोपों के बीच राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। हालांकि इस बार वजह उनका कोई बयान नहीं, बल्कि कथित तौर पर महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनकी चुप्पी बनी हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो और उससे जुड़ी चर्चाओं ने उनके राजनीतिक रुख को लेकर नई बहस छेड़ दी है। राघव चड्ढा लंबे समय तक उन नेताओं में गिने जाते रहे हैं जो महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दों पर लगातार मुखर रहते थे। संसद से लेकर सोशल मीडिया तक उनकी सक्रियता अक्सर चर्चा में रहती थी। लेकिन हाल के महीनों में उनकी सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं में आई कमी को लेकर राजनीतिक पर्यवेक्षक और सोशल मीडिया उपयोगकर्ता सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कुछ लोग उनसे NEET पेपर लीक मामले पर प्रतिक्रिया देने की मांग करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कथित तौर पर उनसे पूछा जाता है कि वह इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर कुछ क्यों नहीं बोल रहे हैं। इसी दौरान व्यंग्यात्मक अंदाज में यह टिप्पणी भी सुनाई देती है कि उनका बोलना ही बंद हो गया है। वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। हालांकि वीडियो की परिस्थितियों और उसके पूरे संदर्भ को लेकर विभिन्न दावे किए जा रहे हैं, लेकिन इससे पैदा हुई राजनीतिक चर्चा लगातार तेज होती जा रही है। कई लोगों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े इतने बड़े विवाद पर प्रमुख राजनीतिक नेताओं की स्पष्ट राय सामने आनी चाहिए। वहीं कुछ समर्थकों का कहना है कि किसी एक मुद्दे पर सार्वजनिक बयान न देने को राजनीतिक निष्क्रियता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। राघव चड्ढा के राजनीतिक सफर में जनसरोकार से जुड़े मुद्दों की विशेष भूमिका रही है। उन्होंने समय-समय पर करदाताओं के हित, बढ़ती महंगाई, रोजगार, स्वास्थ्य सुविधाओं और शहरी समस्याओं को लेकर अपनी बात प्रमुखता से रखी है। यही कारण है कि उनकी पहचान एक ऐसे नेता के रूप में बनी, जो सीधे आम लोगों से जुड़े विषयों पर सवाल उठाते रहे हैं। वर्तमान विवाद में भी उनकी पुरानी राजनीतिक शैली की तुलना मौजूदा स्थिति से की जा रही है। हाल के महीनों में उनके राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम भी सामने आए हैं। राज्यसभा में उनकी भूमिका और विभिन्न राजनीतिक निर्णयों को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों ने उनके सार्वजनिक हस्तक्षेप और राजनीतिक सक्रियता को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान दौर में सोशल मीडिया राजनीतिक संवाद का बड़ा माध्यम बन चुका है। ऐसे में किसी भी सार्वजनिक व्यक्ति की सक्रियता या चुप्पी दोनों ही चर्चा का विषय बन जाती हैं। विशेष रूप से शिक्षा, भर्ती परीक्षाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं को लेकर लोगों की अपेक्षाएं पहले की तुलना में अधिक बढ़ गई हैं। फिलहाल NEET विवाद, वायरल वीडियो और राघव चड्ढा की कथित चुप्पी को लेकर चर्चा जारी है। आने वाले दिनों में इस विषय पर उनकी ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया आती है या नहीं, इस पर भी राजनीतिक हलकों और सोशल मीडिया की नजर बनी हुई है। वहीं यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर यह दिखाता है कि सार्वजनिक जीवन में नेताओं के बयान ही नहीं, बल्कि उनकी खामोशी भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन जाती है।

मध्य प्रदेश में आदिवासी मुद्दों पर कांग्रेस सक्रिय, जल-जंगल-जमीन संरक्षण के लिए बनाई हाई लेवल कमेटी

भोपाल। मध्य प्रदेश में आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ी पहल की है। जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा तथा आदिवासी समुदाय के हितों को मजबूत करने के उद्देश्य से पार्टी ने एक विशेष उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति का गठन अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर किया गया है और इसे प्रदेश में आदिवासी हितों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर कार्य करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी की ओर से गठित इस समिति में पार्टी के कई वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं को शामिल किया गया है। मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को समिति में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई है। इसके अलावा पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल भैया तथा आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया को भी सदस्य बनाया गया है। कांग्रेस का मानना है कि आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दे प्रदेश की राजनीति और सामाजिक संरचना दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसी उद्देश्य से समिति को विभिन्न क्षेत्रों में अध्ययन कर सुझाव देने और पार्टी की भावी रणनीति तैयार करने का दायित्व सौंपा गया है। समिति प्रदेश के आदिवासी अंचलों में जाकर जमीनी स्तर की समस्याओं का आकलन भी करेगी। समिति का प्रमुख फोकस जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा पर रहेगा। इसके साथ ही आदिवासी समुदाय को मिले संवैधानिक और पारंपरिक अधिकारों के संरक्षण के लिए भी यह समिति कार्य करेगी। वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा करना और उससे जुड़े मुद्दों को सामने लाना भी इसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके अलावा आदिवासी क्षेत्रों में भूमि विवाद, वन भूमि के पट्टों, विस्थापन और अधिकारों से जुड़े मामलों का अध्ययन कर पार्टी को सुझाव दिए जाएंगे। समिति इन विषयों पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर कांग्रेस की रणनीति भी तैयार करेगी ताकि आदिवासी वर्ग की आवाज को प्रभावी तरीके से उठाया जा सके। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मध्य प्रदेश में आदिवासी मतदाताओं का बड़ा प्रभाव है और कांग्रेस इस वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। विशेष समिति का गठन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में समिति की रिपोर्ट और सुझावों के आधार पर कांग्रेस आदिवासी हितों से जुड़े मुद्दों को सड़क से लेकर विधानसभा तक मजबूती से उठाने की तैयारी कर सकती है। कांग्रेस का यह कदम न केवल आदिवासी समाज के अधिकारों को लेकर उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीति का भी संकेत माना जा रहा है। पार्टी का लक्ष्य है कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों पर व्यापक जनजागरण अभियान चलाकर आदिवासी समुदाय की समस्याओं को प्रमुखता से सामने लाया जाए।

सुरक्षा बल के अधिकारी भी नहीं सुरक्षित, साइबर अपराधियों ने BSF इंस्पेक्टर को बनाया शिकार

ग्वालियर । ग्वालियर में साइबर अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां सीमा सुरक्षा बल के एक अधिकारी को ही साइबर ठगों ने अपना शिकार बना लिया। टेकनपुर स्थित बीएसएफ प्रशिक्षण केंद्र में पदस्थ एक इंस्पेक्टर का मोबाइल फोन हैक कर शातिर बदमाशों ने उनके बैंक खातों और क्रेडिट कार्ड से 3 लाख 10 हजार रुपये की धोखाधड़ी कर ली। घटना के बाद पुलिस और साइबर सेल की टीम जांच में जुट गई है। जानकारी के अनुसार बिहार के समस्तीपुर निवासी 34 वर्षीय अविनाश कुमार वर्तमान में एसटीसी बीएसएफ टेकनपुर में इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। उनके पास आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और यस बैंक के क्रेडिट कार्ड तथा बैंकिंग सुविधाएं थीं। 17 जून की रात अज्ञात साइबर अपराधियों ने किसी तकनीकी माध्यम से उनके मोबाइल फोन का ऑनलाइन एक्सेस हासिल कर लिया। मोबाइल पर नियंत्रण मिलते ही ठगों ने बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं तक पहुंच बनाई। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर डाले। अलग-अलग किस्तों में किए गए इन लेनदेन के जरिए कुल 3 लाख 10 हजार रुपये खाते और क्रेडिट कार्ड से निकाल लिए गए। पूरी वारदात बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई, जिससे शुरुआती दौर में पीड़ित को इसकी भनक तक नहीं लगी। घटना का खुलासा तब हुआ जब इंस्पेक्टर अविनाश कुमार के मोबाइल पर लगातार ट्रांजैक्शन संबंधी संदेश आने लगे। बैंक खातों से रकम निकलने की जानकारी मिलते ही उनके होश उड़ गए। उन्होंने तत्काल संबंधित बैंक अधिकारियों से संपर्क किया और बाद में बिलौआ थाना पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार साइबर सेल की टीम ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड, बैंकिंग डेटा और तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है। साथ ही लेनदेन में उपयोग किए गए आईपी एड्रेस और डिजिटल ट्रेल को भी खंगाला जा रहा है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधी अब रिमोट एक्सेस ऐप, फर्जी लिंक, स्क्रीन शेयरिंग और मालवेयर जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों के मोबाइल और बैंक खातों तक पहुंच बना रहे हैं। ऐसे में किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने या ओटीपी और बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचना बेहद जरूरी है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी किसी को भी निशाना बना सकते हैं। आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के अधिकारी भी इनके जाल में फंस रहे हैं। ऐसे में डिजिटल सतर्कता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

नाबालिग की तस्वीर से रची गई गंदी साजिश, अश्लील कंटेंट वायरल करने वाले 3 आरोपी गिरफ्तार

उज्जैन । उज्जैन में एक नाबालिग लड़की की तस्वीर का दुरुपयोग कर उसे बदनाम करने की साजिश का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सोशल मीडिया के माध्यम से नाबालिग की छवि धूमिल करने और परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंवासा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि एक आरोपी अब भी फरार है जिसकी तलाश जारी है। जानकारी के अनुसार 21 जून को पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनकी नाबालिग बेटी की तस्वीर का दुरुपयोग कर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही है। वायरल किए गए फोटो और वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों का परिवार से कोई संबंध नहीं था लेकिन नाबालिग की तस्वीर जोड़कर उसे बदनाम करने का प्रयास किया गया। मामले की जांच के दौरान पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला। जांच में सामने आया कि मतदाता संबंधी सरकारी दस्तावेज में लगी नाबालिग की पासपोर्ट साइज फोटो बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी द्वारा व्हाट्सएप के माध्यम से एहसान पटेल को भेजी गई थी। इसके बाद यह फोटो कई लोगों के बीच साझा होती रही और अंततः गलत हाथों में पहुंचकर उसका दुरुपयोग किया गया। पुलिस पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने आपस में तस्वीर साझा की और बाद में फोटो एडिटिंग के जरिए नाबालिग की तस्वीर को किसी अन्य युवती की तस्वीर के साथ जोड़कर आपत्तिजनक सामग्री तैयार की गई। इसके बाद उस सामग्री को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित कर दिया गया जिससे पीड़िता और उसके परिवार को मानसिक और सामाजिक रूप से नुकसान पहुंचा। जांच के दौरान पुलिस ने मामले में इस्तेमाल किए गए चार मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइल उपकरणों की डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सामग्री किन-किन प्लेटफॉर्म और लोगों तक पहुंचाई गई थी। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। कार्रवाई के तहत पुलिस ने आबिद पटेल मुजफ्फर पटेल और एहसान पटेल को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं सरकारी दस्तावेज से फोटो साझा करने के मामले में बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी के खिलाफ भी वैधानिक कार्रवाई की गई है। मामले का एक अन्य आरोपी यूसुफ पटेल अभी फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने कहा कि नाबालिग की पहचान और सम्मान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच गंभीरता से की जा रही है और जो भी व्यक्ति इस साजिश में शामिल पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी सामग्री को साझा करने से पहले उसकी सत्यता और संवेदनशीलता का ध्यान रखें।

आयुष्मान कार्ड का बड़ा लाभ, लाखों रुपये की एयर एम्बुलेंस सेवा मिली मुफ्त, बुजुर्ग की बची जान

नर्मदापुरम।नर्मदापुरम जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल देखने को मिली जब पहली बार पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से एक गंभीर मरीज को त्वरित उपचार के लिए एयरलिफ्ट कर नागपुर भेजा गया। इस अत्याधुनिक और महंगी चिकित्सा सुविधा का लाभ 83 वर्षीय बुजुर्ग रामगोपाल टोकसे को मिला जो गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। खास बात यह रही कि आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र होने के कारण मरीज को यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई गई जिससे लाखों रुपये का खर्च बच गया। रसूलिया शिवाजीनगर निवासी रामगोपाल टोकसे नर्मदापुरम के एक निजी अस्पताल में उपचाररत थे। उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर थी और वे ब्रेन हैमरेज तथा मल्टी ऑर्गन फेलियर जैसी जटिल स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। चिकित्सकों ने उनकी नाजुक हालत को देखते हुए उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा वाले अस्पताल में तत्काल रेफर करने की सलाह दी। इसके बाद परिजनों ने प्रशासन से पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरसिंह गहलोत और डिप्टी कलेक्टर डॉ. बबिता राठौर के मार्गदर्शन में प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। प्रारंभिक योजना के अनुसार हेलीकॉप्टर को नर्मदापुरम स्थित एसपीएम केंद्रीय विद्यालय मैदान में बनाए गए हेलीपैड पर उतरना था। हालांकि लगातार हो रही बारिश के कारण मैदान की स्थिति अनुकूल नहीं रही और अंतिम समय में स्थान परिवर्तन का निर्णय लेना पड़ा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नर्मदापुरम प्रशासन ने सीहोर जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित किया और बुधनी स्थित ट्राइडेंट कंपनी के हेलीपैड को वैकल्पिक स्थल के रूप में चुना गया। प्रशासनिक टीमों की सक्रियता और बेहतर समन्वय के कारण एयर एम्बुलेंस गुरुवार सुबह 11 बजकर 15 मिनट पर बुधनी पहुंची और मरीज को लेकर नागपुर के लिए रवाना हो गई। पूरे ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता यह रही कि एयर एम्बुलेंस ने महज 1 घंटा 15 मिनट में नागपुर पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया। दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर हेलीकॉप्टर नागपुर पहुंचा और मात्र 15 मिनट बाद मरीज को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। समय पर मिले इस उपचार से मरीज को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकी। मरीज के पुत्र ऋतिक टोकसे ने इस सहायता के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यह सुविधा नहीं मिलती तो परिवार के लिए इतना बड़ा खर्च वहन करना संभव नहीं था। उन्होंने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और मानवीय संवेदनशीलता की सराहना की। नर्मदापुरम में पहली बार सफलतापूर्वक संचालित हुई पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा ने यह साबित कर दिया है कि आपातकालीन परिस्थितियों में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती हैं। यह पहल प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं को नई दिशा देने के साथ आम लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आई है।

बारिश में बाधित नहीं होगा सफर, राष्ट्रीय राजमार्गों पर ड्रेनेज, निगरानी और रैपिड रिस्पॉन्स सिस्टम पर गडकरी का जोर

नई दिल्ली । मानसून के दौरान राष्ट्रीय राजमार्गों पर जलभराव, भूस्खलन और यातायात अवरोध जैसी समस्याओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने तैयारियों को तेज करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट रूप से कहा है कि बारिश के मौसम में सड़क नेटवर्क को सुरक्षित, सुचारु और बाधारहित बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम समय रहते पूरे किए जाएं। हाल ही में आयोजित समीक्षा बैठकों में तेलंगाना, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संचालित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता और रखरखाव की स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया। इन क्षेत्रों में हजारों किलोमीटर लंबाई वाले राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने मानसून से पहले विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया है। समीक्षा के दौरान सड़कों की वर्तमान स्थिति, निर्माण कार्यों की गति और सुरक्षा मानकों के अनुपालन पर भी चर्चा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि भारी बारिश के दौरान सड़कों पर पानी जमा न हो। अक्सर देखा जाता है कि अपर्याप्त जल निकासी व्यवस्था के कारण सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, जिससे यातायात प्रभावित होने के साथ-साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत बनाने को प्राथमिकता दी गई है। गडकरी ने पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में ढलानों की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए विशेष उपाय अपनाने के निर्देश भी दिए। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों में मानसून और खराब मौसम के दौरान भूस्खलन की घटनाएं आम हैं, जिससे सड़क संपर्क बाधित हो सकता है। ऐसे में स्लोप स्टेबिलाइजेशन और सुरक्षा संरचनाओं को मजबूत बनाना आवश्यक माना गया है। समीक्षा बैठकों में यह भी स्पष्ट किया गया कि मौसम संबंधी आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित की जाए। इसके तहत ऐसे तंत्र तैयार किए जाएंगे जो किसी भी आपदा, सड़क अवरोध या संरचनात्मक समस्या की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित कर सकें। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि राहत और मरम्मत कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन पहले से उपलब्ध रखे जाएं ताकि यात्रियों को न्यूनतम असुविधा हो। मंत्री ने परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल निर्माण कार्य पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि सड़कें लंबे समय तक टिकाऊ और सुरक्षित बनी रहें। इसके लिए आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों, उन्नत निर्माण पद्धतियों और मजबूत निगरानी तंत्र को अपनाने की आवश्यकता बताई गई। गडकरी ने अधिकारियों और कार्यान्वयन एजेंसियों को जवाबदेही बढ़ाने तथा नियमित निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उनका मानना है कि मजबूत निगरानी व्यवस्था से परियोजनाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और निर्माण के दौरान संभावित कमियों की समय रहते पहचान की जा सकेगी। इससे राष्ट्रीय राजमार्गों का दीर्घकालिक प्रदर्शन बेहतर होगा और रखरखाव की लागत भी कम की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि अच्छी गुणवत्ता वाले और सुरक्षित राष्ट्रीय राजमार्ग केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे क्षेत्रीय विकास, व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अवसरों को भी गति देते हैं। ऐसे में मानसून से पहले व्यापक तैयारी करना और सड़क बुनियादी ढांचे को मौसम संबंधी चुनौतियों के लिए तैयार रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मंत्रालय का मानना है कि इन कदमों से राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क अधिक मजबूत, सुरक्षित और यात्रियों के लिए सुविधाजनक बन सकेगा।

नम आंखों से पंडित प्रदीप मिश्रा ने दी श्रद्धांजलि, लखनऊ हादसे में बच्चों की मौत पर जताया गहरा शोक

सीहोर। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए मृत बच्चों को श्रद्धांजलि अर्पित की है। हादसे की जानकारी मिलते ही वे बेहद भावुक हो गए और उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। कथा के दौरान जारी अपने संदेश में पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि मासूम बच्चों का असमय इस दुनिया से चले जाना अत्यंत पीड़ादायक और दुखद है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार के लिए अपने बच्चे को खोने का दुख शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। यह ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई कभी संभव नहीं होती। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में उनकी संवेदनाएं पूरी तरह से उन परिवारों के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। पंडित मिश्रा ने दिवंगत बच्चों को श्रद्धांजलि देते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि वे सभी मासूम आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें। साथ ही उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना की कि शोक संतप्त परिवारों को इस असहनीय दुख को सहने की शक्ति और साहस मिले। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं पूरे समाज को भीतर तक झकझोर देती हैं और हर संवेदनशील व्यक्ति को पीड़ा पहुंचाती हैं। उन्होंने हादसे में घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की भी कामना की। पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि ईश्वर सभी घायलों को जल्द स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें और उन्हें इस कठिन परिस्थिति से बाहर निकलने की शक्ति दें। उन्होंने लोगों से भी पीड़ित परिवारों के लिए प्रार्थना करने और दुख की इस घड़ी में उनके साथ खड़े रहने की अपील की। पंडित प्रदीप मिश्रा के इस भावुक संदेश के बाद देश और विदेश में मौजूद उनके लाखों अनुयायियों ने भी सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से हादसे पर शोक व्यक्त किया। श्रद्धालुओं ने दिवंगत बच्चों की आत्मा की शांति तथा पीड़ित परिवारों को संबल प्रदान करने के लिए प्रार्थनाएं कीं। लखनऊ की इस दुखद घटना ने एक बार फिर सभी को जीवन की अनिश्चितताओं का एहसास कराया है। पूरे देश में इस हादसे को लेकर शोक का माहौल है और लोग मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जता रहे हैं।

पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अमेजन का बड़ा दांव, भारत में 1.24 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश से एआई और क्लाउड सेक्टर को मिलेगी रफ्तार

नई दिल्ली । भारत वैश्विक निवेशकों के लिए लगातार आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है और दुनिया की अग्रणी प्रौद्योगिकी एवं ई-कॉमर्स कंपनियां देश में अपनी मौजूदगी और निवेश बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही हैं। इसी क्रम में अमेजन ने भारत में 13 अरब डॉलर यानी लगभग 1.24 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश की घोषणा कर एक बड़ा संकेत दिया है। यह निवेश मुख्य रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर केंद्रित रहेगा। अमेजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एंडी जेसी के भारत दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद यह घोषणा सामने आई है। कंपनी का कहना है कि भारत आने वाले वर्षों में उसके सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक बाजारों में शामिल रहेगा। नए निवेश के साथ देश में डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने और व्यवसायों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे। कंपनी के ताजा निवेश प्रस्ताव के बाद भारत में अमेजन की कुल घोषित निवेश योजना 48 अरब डॉलर तक पहुंच गई है। इससे पहले कंपनी ने दिसंबर 2025 में 35 अरब डॉलर के बड़े निवेश की घोषणा की थी। दोनों घोषणाओं को मिलाकर देखा जाए तो केवल छह महीनों के भीतर अमेजन ने भारत में 48 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जताई है, जो देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर उसके बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। अमेजन के अनुसार, वर्ष 2030 तक एआई और क्लाउड सेवाओं की मांग में तेज वृद्धि होने की संभावना है। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी भारत में डेटा सेंटर, क्लाउड नेटवर्क, डिजिटल सेवाओं और एआई आधारित समाधानों के विस्तार पर विशेष फोकस करेगी। इससे न केवल बड़ी कंपनियों बल्कि स्टार्टअप, डेवलपर्स, छोटे व्यवसायों और सार्वजनिक संस्थानों को भी आधुनिक तकनीकी संसाधनों तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी। कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व का मानना है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल बाजारों में से एक है। ई-कॉमर्स, डिजिटल भुगतान, क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती मांग ने वैश्विक कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। अमेजन लंबे समय से भारतीय बाजार में सक्रिय है और लाखों ग्राहकों, विक्रेताओं तथा उद्यमियों को विभिन्न सेवाएं उपलब्ध करा रही है। एंडी जेसी ने भारत में कंपनी की भूमिका को केवल व्यवसाय तक सीमित न बताते हुए रोजगार और उद्यमिता से भी जोड़ा। उनके अनुसार, अमेजन ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार अवसरों के सृजन में योगदान दिया है। कंपनी का दावा है कि उसके डिजिटल प्लेटफॉर्म ने भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिससे निर्यात को भी बढ़ावा मिला है। कंपनी ने छोटे और मध्यम कारोबारियों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी कई योजनाएं तैयार की हैं। एआई आधारित समाधान, डिजिटल टूल्स और क्लाउड सेवाओं के माध्यम से लाखों छोटे व्यवसायों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही शिक्षा क्षेत्र में भी तकनीकी पहुंच बढ़ाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक छात्रों और संस्थानों को डिजिटल संसाधनों का लाभ मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेजन की यह निवेश योजना भारत के डिजिटल परिवर्तन अभियान को नई गति दे सकती है। एआई, क्लाउड और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाला निवेश न केवल तकनीकी क्षेत्र को मजबूत करेगा बल्कि रोजगार, नवाचार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा करेगा। भारत में वैश्विक कंपनियों की बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि देश भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्रों में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।

घर की चौखट से आत्मनिर्भरता तक का सफर, भरतपुर की महिलाओं ने मिट्टी की कला को बनाया आय और पहचान का नया माध्यम

नई दिल्ली । राजस्थान के भरतपुर जिले में महिलाओं का पारंपरिक कौशल आज आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम बनकर उभर रहा है। वर्षों से घरों तक सीमित रहने वाली मिट्टी और चीनी मिट्टी के बर्तन बनाने की कला अब महिलाओं को नई पहचान, सम्मान और आय प्रदान कर रही है। स्थानीय बाजारों में इन उत्पादों की बढ़ती मांग ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति दी है। भरतपुर के शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाएं अपने घरों से ही मिट्टी और चीनी मिट्टी के विभिन्न उत्पाद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों में कुल्हड़, गिलास, कटोरी, प्लेट, सजावटी सामान और अन्य उपयोगी वस्तुएं शामिल हैं। पारंपरिक कारीगरी और आकर्षक डिजाइनों के कारण ये उत्पाद ग्राहकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। स्थानीय बाजारों के अलावा मेलों और विशेष आयोजनों में भी इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक दौर में पर्यावरण अनुकूल और पारंपरिक उत्पादों की ओर लोगों का झुकाव बढ़ा है। यही कारण है कि मिट्टी से बने बर्तनों को ग्राहक प्राथमिकता दे रहे हैं। इन उत्पादों की उपयोगिता के साथ-साथ इनका सांस्कृतिक महत्व भी लोगों को आकर्षित करता है। भरतपुर की महिलाओं ने इसी बदलती मांग को अवसर में बदलते हुए अपने कौशल को व्यवसाय का रूप दिया है। इस परिवर्तन में स्वयं सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं। इससे उनके काम में स्थिरता आई है और उत्पादन क्षमता भी बढ़ी है। कई महिलाएं अब व्यक्तिगत स्तर से आगे बढ़कर समूह आधारित उत्पादन और बिक्री मॉडल अपना रही हैं, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। महिलाओं द्वारा तैयार किए गए बर्तन और सजावटी उत्पाद सड़कों के किनारे लगाए गए स्टॉलों पर आसानी से देखे जा सकते हैं। स्थानीय निवासी, पर्यटक और राहगीर इन उत्पादों को पसंद कर रहे हैं। त्योहारों, धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर इनकी बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाती है। इससे महिलाओं को अतिरिक्त आय अर्जित करने का अवसर मिलता है और उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है। इन उत्पादों की कीमतें भी ग्राहकों की पहुंच के अनुरूप रखी जाती हैं। छोटे आकार के बर्तन कम कीमत पर उपलब्ध होते हैं, जबकि बड़े और विशेष डिजाइन वाले उत्पाद अपेक्षाकृत अधिक मूल्य पर बेचे जाते हैं। किफायती दरों और आकर्षक स्वरूप के कारण ग्राहक इनकी ओर आकर्षित होते हैं। यही वजह है कि स्थानीय बाजार में इन उत्पादों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। आर्थिक लाभ के साथ-साथ इस पहल का सामाजिक प्रभाव भी दिखाई दे रहा है। जो महिलाएं पहले केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, वे अब परिवार की आय में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। इससे उनके निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक भागीदारी में भी वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की यह बढ़ती सक्रियता अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित कर रही है। सरकार और प्रशासन द्वारा भी स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहयोग प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाओं के जरिए महिलाओं को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिल रही है। भरतपुर की महिलाओं की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि पारंपरिक हुनर यदि सही अवसर और समर्थन के साथ जोड़ा जाए तो वह आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है। मिट्टी के बर्तनों के माध्यम से ये महिलाएं न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधार रही हैं, बल्कि स्थानीय हस्तशिल्प परंपरा को भी नई पहचान दिला रही हैं। उनकी यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर साकार करने की एक प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई है।