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इमरजेंसी की 51वीं बरसी पर प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा संदेश, बोले- संविधान पर हमला था वह दौर, नहीं भूल सकता देश लोकतंत्र का दर्द

नई दिल्ली । देश में लागू किए गए आपातकाल की 51वीं बरसी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 1975 के उस दौर को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया है। उन्होंने कहा कि आपातकाल केवल एक राजनीतिक निर्णय नहीं था, बल्कि यह संविधान की मूल भावना और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार था। प्रधानमंत्री ने नागरिकों को उस कालखंड की याद दिलाते हुए लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारत का संविधान देश के प्रत्येक नागरिक की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की शक्ति केवल चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आजादी और संस्थागत मजबूती में भी निहित होती है। उनके अनुसार आपातकाल के दौरान इन मूलभूत सिद्धांतों को गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ा था। प्रधानमंत्री ने उस दौर को याद करते हुए कहा कि देश के नागरिकों से उनकी स्वतंत्रता छीन ली गई थी और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि आपातकाल भारतीय इतिहास का ऐसा अध्याय है, जिसे लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला कोई भी नागरिक आसानी से नहीं भूल सकता। इस अवसर पर उन्होंने उन लोगों को भी श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और कठिन परिस्थितियों का सामना किया। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में उन अनगिनत नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं के साहस का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने दबाव और प्रतिबंधों के बावजूद लोकतंत्र की आवाज को जीवित रखा। उन्होंने कहा कि उस समय अनेक लोगों ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। यही संघर्ष भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत और प्रेरणा का स्रोत बना। भारत के राजनीतिक इतिहास में 25 जून 1975 की तारीख को विशेष महत्व प्राप्त है। इसी दिन तत्कालीन सरकार की सिफारिश पर देश में आपातकाल लागू किया गया था। संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत घोषित इस आपातकाल का आधार आंतरिक अशांति को बताया गया था। उस समय देश में व्यापक राजनीतिक गतिविधियां चल रही थीं और विभिन्न विपक्षी दल सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। आपातकाल लागू होने के बाद लगभग 21 महीनों तक देश ने असाधारण परिस्थितियों का सामना किया। इस अवधि में नागरिकों के कई मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए और मीडिया पर कड़ी सेंसरशिप लागू की गई। समाचार पत्रों और प्रकाशनों को सामग्री प्रकाशित करने से पहले सरकारी अनुमति की आवश्यकता पड़ती थी। इसके अलावा अनेक विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को हिरासत में लिया गया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती संविधान के सम्मान और संस्थाओं की स्वतंत्रता में निहित होती है। उन्होंने भरोसा जताया कि देश आज पहले से अधिक जागरूक और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों को भारत की प्रगति का आधार बताते हुए इन्हीं मूल्यों के अनुरूप विकसित राष्ट्र के निर्माण का संकल्प दोहराया। आपातकाल की 51वीं बरसी के अवसर पर दिया गया यह संदेश केवल इतिहास की एक घटना का स्मरण नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्ता को रेखांकित करने का प्रयास भी माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकतंत्र की सफलता के लिए नागरिक अधिकारों, स्वतंत्र संस्थाओं और संवैधानिक मर्यादाओं का संरक्षण हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता बना रहना चाहिए।

WhatsApp का नया सुरक्षा कवच! अनजान नंबर से चैट शुरू करने से पहले देगा स्कैम अलर्ट

नई दिल्ली। दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स में शामिल WhatsApp लगातार अपने यूजर्स की सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए नए फीचर्स पेश कर रहा है। ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए कंपनी अब एक और महत्वपूर्ण सुरक्षा फीचर लेकर आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार WhatsApp ने ऐसा नया वार्निंग सिस्टम रोलआउट करना शुरू कर दिया है जो किसी अनजान नंबर से आने वाले संदेशों को लेकर यूजर्स को पहले से सतर्क करेगा। डिजिटल युग में साइबर ठगी के तरीके लगातार बदल रहे हैं। स्कैमर्स अक्सर अनजान नंबरों से संपर्क कर लोगों को लालच देकर या डराकर उनकी निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में बैंक डिटेल्स, ओटीपी, पासवर्ड और पैसों की मांग कर लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जाता है। ऐसे खतरों को देखते हुए WhatsApp ने यह नया सुरक्षा फीचर तैयार किया है ताकि यूजर्स किसी भी संदिग्ध चैट को शुरू करने से पहले पूरी जानकारी प्राप्त कर सकें। फीचर ट्रैकर WABetaInfo की रिपोर्ट के मुताबिक जब किसी यूजर को ऐसे नंबर से मैसेज प्राप्त होगा जो उसकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव नहीं है तो WhatsApp चैट खोलने से पहले एक विशेष चेतावनी संदेश दिखाएगा। इस चेतावनी में कई उपयोगी जानकारियां शामिल होंगी जो यूजर को यह समझने में मदद करेंगी कि सामने वाला व्यक्ति कितना विश्वसनीय हो सकता है। नए फीचर के तहत यूजर को उस देश की जानकारी दिखाई जाएगी जहां संबंधित फोन नंबर रजिस्टर्ड है। इसके अलावा यह भी बताया जाएगा कि नंबर फोनबुक में सेव है या नहीं। यदि यूजर और मैसेज भेजने वाले व्यक्ति के बीच कोई कॉमन ग्रुप मौजूद है तो उसकी जानकारी भी स्क्रीन पर दिखाई जाएगी। इन जानकारियों के आधार पर यूजर यह तय कर सकेगा कि बातचीत आगे बढ़ानी है या नहीं। WhatsApp द्वारा दिखाए जाने वाले चेतावनी संदेश में यह भी स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि स्कैमर्स अक्सर लोगों को उनकी निजी जानकारी साझा करने के लिए बहकाते हैं या पैसे भेजने के लिए दबाव बना सकते हैं। कंपनी का उद्देश्य यूजर्स को जागरूक करना है ताकि वे किसी भी तरह की ऑनलाइन ठगी का शिकार बनने से बच सकें। इस फीचर की सबसे खास बात यह है कि अंतिम फैसला पूरी तरह यूजर के हाथ में होगा। यदि यूजर चाहे तो चैट जारी रख सकता है या फिर बातचीत शुरू होने से पहले ही उसे बंद कर सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यूजर द्वारा लिए गए निर्णय की कोई सूचना मैसेज भेजने वाले व्यक्ति को नहीं मिलेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार यह फीचर एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जा रहा है। माना जा रहा है कि इससे स्पैम मैसेज, फर्जी ऑफर और ऑनलाइन फ्रॉड से जुड़े मामलों में कमी आ सकती है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ भी लंबे समय से ऐसे सिस्टम की मांग कर रहे थे जो यूजर्स को संदिग्ध नंबरों की पहचान करने में मदद करे। WhatsApp फिलहाल कई अन्य नए फीचर्स पर भी काम कर रहा है। इनमें होम स्क्रीन के लिए वॉयस नोट विजेट और आईफोन यूजर्स के लिए व्यू-वन्स टेक्स्ट मैसेज फीचर शामिल बताए जा रहे हैं। कंपनी का फोकस लगातार यूजर एक्सपीरियंस और सुरक्षा को बेहतर बनाने पर बना हुआ है।

करिश्मा-अजय के रिश्ते की दरार ने डुबो दी करोड़ों की फिल्म, कभी रिलीज नहीं हो पाई ‘काला पानी’

नई दिल्ली। बॉलीवुड की लोलो यानी करिश्मा कपूर ने अपने करियर में कई सुपरहिट और ब्लॉकबस्टर फिल्मों के जरिए दर्शकों के दिलों पर राज किया। 25 जून को अपना जन्मदिन मना रहीं करिश्मा कपूर का नाम 90 के दशक की सबसे सफल अभिनेत्रियों में शुमार किया जाता है। उन्होंने सलमान खान, गोविंदा, आमिर खान और शाहरुख खान जैसे बड़े सितारों के साथ काम किया और कई यादगार फिल्में दीं। हालांकि उनके फिल्मी सफर में एक ऐसी फिल्म भी रही जो बड़े पर्दे तक कभी पहुंच ही नहीं पाई। यह फिल्म थी ‘काला पानी’ जिसमें उनके साथ अजय देवगन मुख्य भूमिका में नजर आने वाले थे। 90 के दशक में करिश्मा कपूर और अजय देवगन की जोड़ी दर्शकों की पसंदीदा जोड़ियों में शामिल थी। दोनों ने जिगर, सुहाग और शक्तिमान जैसी फिल्मों में साथ काम किया और उनकी केमिस्ट्री को खूब सराहा गया। ऑनस्क्रीन हिट जोड़ी बनने के साथ-साथ दोनों की नजदीकियां वास्तविक जीवन में भी बढ़ने लगी थीं। उस दौर में फिल्मी पत्रिकाओं और मनोरंजन जगत में दोनों के रिश्ते की चर्चा आम थी। माना जाता है कि दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब थे और उनका रिश्ता काफी गंभीर हो चुका था। इसी दौरान निर्देशक प्रकाश झा ने करिश्मा कपूर और अजय देवगन को लेकर एक बड़े बजट की फिल्म ‘काला पानी’ बनाने की योजना बनाई। फिल्म को लेकर इंडस्ट्री में काफी उत्साह था और इसे उस समय के बड़े प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा था। शूटिंग भी शुरू हो चुकी थी और फिल्म का कुछ हिस्सा पूरा कर लिया गया था। लेकिन इसी बीच दोनों कलाकारों के रिश्ते में दरार आने लगी। रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्म की शूटिंग के दौरान अजय देवगन और करिश्मा कपूर के संबंध खराब होने लगे। कहा जाता है कि इसी दौरान अजय देवगन की जिंदगी में काजोल की एंट्री हुई और इसके बाद करिश्मा और अजय के रिश्ते में तनाव बढ़ गया। धीरे-धीरे हालात इतने बिगड़ गए कि दोनों के बीच बातचीत तक बंद हो गई। निजी जीवन में पैदा हुई यह दूरी फिल्म के सेट तक पहुंच गई और इसका असर शूटिंग पर साफ दिखाई देने लगा। जो कलाकार कभी एक-दूसरे के साथ घंटों समय बिताते थे वे अब साथ में सीन शूट करने से भी कतराने लगे। बताया जाता है कि दोनों ने एक-दूसरे के साथ काम करने में अनिच्छा जतानी शुरू कर दी थी। निर्देशक प्रकाश झा ने मामले को संभालने और दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिश की लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। फिल्म की शूटिंग बार-बार प्रभावित होने लगी और प्रोजेक्ट पर संकट गहराता गया। आखिरकार स्थिति ऐसी बन गई कि मेकर्स को फिल्म का काम रोकना पड़ा। करोड़ों रुपये खर्च होने और शूटिंग का बड़ा हिस्सा पूरा होने के बावजूद ‘काला पानी’ को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इस फैसले से निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। साथ ही दर्शक भी उस फिल्म को देखने से वंचित रह गए जिसे उस समय एक संभावित ब्लॉकबस्टर माना जा रहा था। फिल्म बंद होने के बाद करिश्मा कपूर और अजय देवगन की राहें हमेशा के लिए अलग हो गईं। करिश्मा ने आगे चलकर गोविंदा और सलमान खान के साथ कई हिट फिल्में दीं जबकि अजय देवगन ने काजोल के साथ अपना जीवन और करियर आगे बढ़ाया। आज भी जब बॉलीवुड की अधूरी और अनरिलीज्ड फिल्मों का जिक्र होता है तो ‘काला पानी’ का नाम सबसे पहले लिया जाता है। यह फिल्म इस बात का उदाहरण है कि कभी-कभी निजी रिश्तों की खटास एक बड़े सिनेमाई सपने को भी अधूरा छोड़ देती है।

ऑनलाइन ठगी पर लगाम लगाने की तैयारी, WhatsApp का नया फीचर बताएगा किस नंबर पर भरोसा करना है और किससे रहना है सतर्क

नई दिल्ली । डिजिटल संचार के सबसे लोकप्रिय माध्यमों में शामिल व्हाट्सएप अब अपने करोड़ों यूजर्स की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। ऑनलाइन धोखाधड़ी, फर्जी पहचान और साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच कंपनी एक नया सुरक्षा फीचर लेकर आ रही है, जिसे ‘ट्रस्ट वॉर्निंग’ नाम दिया गया है। यह फीचर किसी भी अनजान या कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव न किए गए नंबर से बातचीत शुरू करने से पहले यूजर्स को अतिरिक्त जानकारी और सुरक्षा चेतावनी उपलब्ध कराएगा। बीते कुछ वर्षों में व्हाट्सएप पर फर्जी कॉल, नकली नौकरी के प्रस्ताव, बैंकिंग धोखाधड़ी, कूरियर फ्रॉड और निवेश संबंधी ठगी के मामलों में लगातार वृद्धि देखी गई है। साइबर अपराधी अक्सर अज्ञात नंबरों के जरिए लोगों से संपर्क कर विश्वास हासिल करने का प्रयास करते हैं और बाद में आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए यह नया फीचर तैयार किया गया है। नई व्यवस्था के तहत जब कोई यूजर ऐसे नंबर से चैट शुरू करने का प्रयास करेगा जो उसकी संपर्क सूची में मौजूद नहीं है, तब सीधे चैट विंडो खुलने के बजाय एक विशेष चेतावनी स्क्रीन दिखाई देगी। इस स्क्रीन पर उस नंबर से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदर्शित की जाएंगी, जिससे यूजर बातचीत शुरू करने से पहले अधिक सूचित निर्णय ले सकेगा। इस चेतावनी स्क्रीन में यह जानकारी शामिल होगी कि संबंधित नंबर किस देश में पंजीकृत है, क्या वह नंबर यूजर की कॉन्टैक्ट सूची में सेव है या नहीं, और क्या दोनों किसी साझा व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा हैं। इसके साथ ही सुरक्षा संबंधी सुझाव भी दिए जाएंगे, ताकि उपयोगकर्ता संभावित जोखिमों को समझ सके। इसके बाद यूजर के पास बातचीत जारी रखने या चैट बंद करने का विकल्प रहेगा। विशेष बात यह है कि यूजर द्वारा चुने गए विकल्प की जानकारी सामने वाले व्यक्ति को नहीं मिलेगी। इससे उपयोगकर्ता बिना किसी दबाव के सुरक्षित निर्णय ले सकेगा। कंपनी का मानना है कि इस प्रकार की पूर्व चेतावनी उपयोगकर्ताओं को जल्दबाजी में प्रतिक्रिया देने से रोकने में मदद करेगी और संभावित साइबर अपराधों के जोखिम को कम करेगी। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश ऑनलाइन ठगी साधारण बातचीत से शुरू होती है। कई मामलों में अपराधी खुद को किसी परिचित व्यक्ति, बैंक कर्मचारी, सरकारी अधिकारी या व्यावसायिक प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करते हैं। शुरुआत में बातचीत सामान्य लगती है, लेकिन धीरे-धीरे पीड़ित को वित्तीय या व्यक्तिगत जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित किया जाता है। नया फीचर ऐसे प्रयासों के प्रति शुरुआती स्तर पर सतर्कता बढ़ाने का काम करेगा। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि चेतावनी दिखाई देने का अर्थ यह नहीं होगा कि संबंधित नंबर धोखाधड़ी से जुड़ा है। कई बार वास्तविक और वैध उपयोगकर्ता भी नए या विदेशी नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। इसी तरह कुछ संदिग्ध नंबर ऐसे भी हो सकते हैं जिन पर चेतावनी न दिखाई दे। इसलिए अंतिम निर्णय लेते समय उपयोगकर्ताओं को अपनी सतर्कता और विवेक का भी उपयोग करना होगा। यह फीचर फिलहाल परीक्षण चरण में है और धीरे-धीरे विभिन्न प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जा रहा है। आने वाले समय में इसके व्यापक स्तर पर जारी होने की संभावना है। डिजिटल सुरक्षा को लेकर बढ़ती चुनौतियों के बीच यह कदम उपयोगकर्ताओं को अधिक सुरक्षित अनुभव प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस फीचर का प्रभावी उपयोग किया गया तो व्हाट्सएप पर होने वाले कई सामान्य साइबर स्कैम को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकेगा।

मंदिर में दीपक जलाने के नियम: किस दिशा में रखें दीया, कौन सा मंत्र करें जाप?

नई दिल्ली। सनातन धर्म में दीपक को केवल प्रकाश का साधन नहीं बल्कि शुभता, सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वरीय कृपा का प्रतीक माना गया है। किसी भी देवी-देवता की पूजा दीप प्रज्वलित किए बिना अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दीपक अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है। यही कारण है कि घर के मंदिर से लेकर बड़े धार्मिक स्थलों तक पूजा के समय दीपक जलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हालांकि दीपक जलाने से जुड़े कुछ विशेष नियम और विधियां हैं जिनका पालन करना बेहद आवश्यक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दिन में दो बार दीपक जलाना शुभ माना जाता है। पहला दीपक सूर्योदय के समय और दूसरा संध्या काल यानी सूर्यास्त के बाद जलाया जाता है। सुबह लगभग 5 बजे से 7 बजे के बीच और शाम को 5:30 बजे से 7:30 बजे के बीच दीपक जलाना श्रेष्ठ माना जाता है। मौसम और स्थान के अनुसार इस समय में थोड़ा बदलाव हो सकता है। विशेष रूप से संध्या के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से माता लक्ष्मी का घर में आगमन माना जाता है। दीपक जलाने के लिए मिट्टी, पीतल या तांबे के दीपक का उपयोग करना शुभ माना जाता है। पूजा से पहले दीपक को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। यदि मिट्टी का दीपक हो तो उसे कुछ समय पानी में भिगोकर सुखाने के बाद प्रयोग करना बेहतर माना जाता है। दीपक में गाय का घी, तिल का तेल या सरसों का तेल डाला जा सकता है। इसके बाद रुई की बाती को घी या तेल में अच्छी तरह भिगोकर दीपक में स्थापित करना चाहिए। ध्यान रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूजा में कभी भी टूटा, फूटा या गंदा दीपक नहीं जलाना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा एक जलते हुए दीपक से दूसरा दीपक जलाने से भी बचने की सलाह दी जाती है। दीपक में पर्याप्त मात्रा में घी या तेल होना चाहिए ताकि पूजा के दौरान उसकी लौ बीच में न बुझे। दीपक जलाते समय मंत्रोच्चार का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि मंत्रों के साथ दीपक प्रज्वलित करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। दीपक जलाते समय यह मंत्र बोला जा सकता है— शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसंपदा।शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते॥ यह मंत्र जीवन में सुख, स्वास्थ्य, धन और शत्रुओं से रक्षा की कामना के लिए बोला जाता है। दीपक की दिशा भी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। यदि तेल का दीपक जलाया जा रहा है तो उसे भगवान की बाईं ओर रखना चाहिए जबकि घी का दीपक भगवान की दाईं ओर रखना शुभ माना जाता है। दीपक की लौ हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए। पूर्व दिशा में रखा दीपक आयु और स्वास्थ्य में वृद्धि का प्रतीक माना जाता है जबकि उत्तर दिशा में रखा दीपक धन, वैभव और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है। दक्षिण दिशा यम और पितरों की दिशा मानी जाती है इसलिए सामान्य पूजा में इस दिशा में दीपक रखने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सही समय, सही दिशा और सही विधि से जलाया गया दीपक घर में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। इसलिए पूजा करते समय दीपक से जुड़े इन नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए।

गौतम अदाणी की ‘वंदे भारतम्’ पहल लॉन्च, देश के हर कोने से उभरते इनोवेटर्स और उद्यमियों को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

नई दिल्ली । देश के स्टार्टअप और नवाचार परिदृश्य को व्यापक आधार देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उद्योगपति गौतम अदाणी ने ‘वंदे भारतम्’ नामक नई पहल की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के उन प्रतिभाशाली लोगों तक अवसर पहुंचाना है, जो बड़े शहरों से दूर रहते हैं लेकिन अपने विचारों, नवाचारों और उद्यमशीलता की क्षमता के बल पर समाज और अर्थव्यवस्था में बदलाव लाने का सामर्थ्य रखते हैं। अपने 64वें जन्मदिन के अवसर पर शुरू की गई इस पहल को देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा। यह कार्यक्रम 800 से अधिक जिलों तक पहुंचेगा और विभिन्न भारतीय भाषाओं में संचालित होगा, जिससे अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके। इस पहल का उद्देश्य केवल स्थापित स्टार्टअप्स तक सीमित नहीं है, बल्कि उन लोगों को भी अवसर देना है जिनके पास कोई नया विचार, समाधान या व्यवसाय शुरू करने की इच्छा है। गौतम अदाणी ने कहा कि उनका अपना सफर भी सीमित संसाधनों से शुरू हुआ था और जो कुछ उन्होंने हासिल किया है, उसमें भारत की मिट्टी और अवसरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन अवसरों का समान वितरण अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऐसे में ‘वंदे भारतम्’ का लक्ष्य उन लोगों तक पहुंचना है, जिन्हें अब तक उचित पहचान और सहयोग नहीं मिल पाया है। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए किसी विशेष आयु, शैक्षणिक योग्यता, पेशे या व्यवसायिक अनुभव की अनिवार्यता नहीं रखी गई है। प्रतिभागी अपने विचार, प्रोटोटाइप, शुरुआती चरण के स्टार्टअप या पहले से संचालित व्यवसाय के साथ आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए किसी कंपनी का औपचारिक रूप से पंजीकृत होना भी आवश्यक नहीं होगा। इससे बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को अवसर मिलेगा जो पारंपरिक ढांचे से बाहर रहकर भी नवाचार पर काम कर रहे हैं। पहल के तहत तकनीक, विनिर्माण, कृषि, पर्यावरणीय स्थिरता, पारंपरिक शिल्प, स्थानीय उद्योगों और सामुदायिक समाधान जैसे विविध क्षेत्रों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। विशेष रूप से महिलाओं, आदिवासी समुदायों, ग्रामीण क्षेत्रों के नवाचारकर्ताओं, दिव्यांग उद्यमियों और स्थानीय समस्याओं के समाधान विकसित करने वाले लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। आवेदनों के मूल्यांकन के दौरान नवाचार की गुणवत्ता, उद्यमशीलता की क्षमता, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव तथा विस्तार की संभावनाओं को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। चयन प्रक्रिया विभिन्न चरणों में पूरी होगी, जिसमें राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर मूल्यांकन शामिल रहेगा। इसके बाद चुने गए 75 फाइनलिस्ट को अहमदाबाद में आयोजित विशेष कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को अनुभवी मेंटर्स, उद्योग विशेषज्ञों, निवेशकों और व्यवसायिक नेताओं से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा। साथ ही उन्हें इनक्यूबेशन सपोर्ट, रणनीतिक साझेदारी और संभावित निवेश तक पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उनके विचारों को व्यवहारिक और टिकाऊ व्यवसाय में बदला जा सके। कार्यक्रम का ग्रैंड फिनाले स्वतंत्रता दिवस के आसपास आयोजित किया जाएगा। इसके माध्यम से एक ऐसा राष्ट्रीय नेटवर्क विकसित करने की योजना है, जो नवाचारकर्ताओं, निवेशकों और उद्योग जगत के प्रमुख लोगों को एक साझा मंच पर जोड़ सके। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में उद्यमशीलता और नवाचार की व्यापक भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ऐसे में ‘वंदे भारतम्’ जैसी पहलें देश के छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती हैं।

कांचीपुरम में पुस्तक विमोचन और पुडुचेरी में ऐतिहासिक परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगी निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली । केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का तमिलनाडु और पुडुचेरी का दो दिवसीय आधिकारिक दौरा शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और ऐतिहासिक धरोहरों के पुनरोद्धार से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के कारण चर्चा में है। इस यात्रा के दौरान वह कई ऐसी परियोजनाओं का शुभारंभ और उद्घाटन करेंगी, जिनका उद्देश्य स्थानीय इतिहास, परंपरा और सामाजिक विकास को नई दिशा प्रदान करना है। वित्त मंत्री बुधवार शाम नई दिल्ली से चेन्नई पहुंचीं, जहां भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। दौरे की शुरुआत तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले से होगी, जहां वह महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में भाग लेंगी। कांचीपुरम स्थित एसएसकेवी कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस फॉर विमेन में वह ‘डॉटर्स ऑफ कांची – द एसएसकेवी स्टोरी’ नामक पुस्तक का विमोचन करेंगी। यह पुस्तक संस्थान के इतिहास, उपलब्धियों और समाज में उसके योगदान को रेखांकित करती है। विशेष रूप से महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में संस्थान की भूमिका और उसके प्रभाव को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। माना जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री छात्रों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों से संवाद भी करेंगी तथा शिक्षा के महत्व और महिलाओं की भागीदारी पर अपने विचार साझा करेंगी। कांचीपुरम लंबे समय से अपनी सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक हथकरघा उद्योग के लिए जाना जाता है। यह क्षेत्र वित्त मंत्री के लिए भी विशेष महत्व रखता है। वह विभिन्न अवसरों पर कांचीपुरम की प्रसिद्ध बुनाई परंपरा और यहां के शिल्पकारों के योगदान का उल्लेख करती रही हैं। हाल के वर्षों में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर इस क्षेत्र की कला और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। दौरे के दूसरे चरण में वित्त मंत्री पुडुचेरी पहुंचेंगी, जहां वह ऐतिहासिक महत्व रखने वाले पुनर्निर्मित लाइटहाउस का उद्घाटन करेंगी। यह कार्यक्रम सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स कमिश्नरेट परिसर में आयोजित होगा। लंबे समय से संरक्षण और मरम्मत की प्रक्रिया से गुजर रहे इस लाइटहाउस को अब नई पहचान के साथ आम लोगों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य केवल एक ऐतिहासिक संरचना का संरक्षण करना नहीं है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को भी सुरक्षित रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय इतिहास के प्रति लोगों की जागरूकता भी बढ़ाते हैं। औपनिवेशिक काल की वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व को संरक्षित रखने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अपने दौरे के अंतिम दिन वित्त मंत्री पुडुचेरी के एक सरकारी मध्य विद्यालय परिसर में स्थित लगभग 400 वर्ष पुराने ‘मुझियांकुलम’ के जीर्णोद्धार के बाद उसका उद्घाटन करेंगी। यह परियोजना ऐतिहासिक संरचनाओं के संरक्षण और सामुदायिक सुविधाओं के विकास को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। इसके माध्यम से स्थानीय नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान को भी सुरक्षित रखने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले ये कार्यक्रम केंद्र सरकार की उस नीति को दर्शाते हैं, जिसमें शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक विकास को समान महत्व दिया जा रहा है। वित्त मंत्री का यह दौरा स्थानीय स्तर पर चल रही विकास और संरक्षण परियोजनाओं को नई गति देने के साथ-साथ क्षेत्रीय पहचान और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगा।

भारत-अमेरिका ने सेमीकंडक्टर, एआई और क्रिटिकल मिनरल्स पर बढ़ाया रणनीतिक फोकस, उभरती तकनीकों में गहरे सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच उभरती प्रौद्योगिकियों तथा रणनीतिक औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने के उद्देश्य से उच्च स्तरीय वार्ता आयोजित की गई। इस चर्चा में सेमीकंडक्टर निर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती और क्रिटिकल मिनरल्स तक पहुंच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने बदलते वैश्विक आर्थिक और तकनीकी परिदृश्य के बीच साझेदारी को और गहरा करने की आवश्यकता पर बल दिया। वाशिंगटन में आयोजित इस बैठक के दौरान भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों ने तकनीकी सहयोग के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। बातचीत का प्रमुख केंद्र उन क्षेत्रों पर रहा जिन्हें भविष्य की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर निर्माण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों की संभावनाओं का मूल्यांकन किया गया। वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर उद्योग को आधुनिक तकनीकी विकास की रीढ़ माना जाता है। स्मार्टफोन, कंप्यूटर, ऑटोमोबाइल, रक्षा उपकरण और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के निर्माण में इसकी केंद्रीय भूमिका है। हाल के वर्षों में दुनिया ने चिप आपूर्ति संकट का सामना किया है, जिसके बाद कई देशों ने इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत विकसित करने पर जोर बढ़ाया है। भारत और अमेरिका की यह पहल भी इसी व्यापक रणनीतिक सोच का हिस्सा मानी जा रही है। वार्ता के दौरान दोनों देशों ने भरोसेमंद और विविधीकृत सप्लाई चेन विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया। वैश्विक व्यापार में भू-राजनीतिक चुनौतियों और आपूर्ति व्यवधानों को देखते हुए मजबूत सप्लाई नेटवर्क की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी उत्पादों और औद्योगिक विनिर्माण के लिए स्थिर आपूर्ति श्रृंखला भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बनेगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी इस चर्चा का एक प्रमुख विषय रहा। एआई वर्तमान समय में स्वास्थ्य, शिक्षा, वित्त, विनिर्माण और प्रशासन जैसे अनेक क्षेत्रों को तेजी से प्रभावित कर रहा है। भारत और अमेरिका दोनों ही इस तकनीक को आर्थिक विकास, नवाचार और उत्पादकता बढ़ाने के प्रभावी माध्यम के रूप में देख रहे हैं। ऐसे में एआई अनुसंधान, नवाचार और व्यावसायिक उपयोग के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया। इसके साथ ही क्रिटिकल मिनरल्स तक पहुंच सुनिश्चित करने के मुद्दे पर भी बातचीत हुई। ये खनिज इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण, क्लीन एनर्जी सिस्टम, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उपकरणों के लिए अत्यंत आवश्यक माने जाते हैं। वैश्विक स्तर पर इन संसाधनों की बढ़ती मांग को देखते हुए कई देश इनके सुरक्षित और स्थायी स्रोत विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। भारत और अमेरिका ने भी इस क्षेत्र में सहयोग को रणनीतिक महत्व का विषय माना है। यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब दोनों देशों के बीच तकनीकी और आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में डिजिटल प्रौद्योगिकी, नवाचार, अनुसंधान और विनिर्माण के क्षेत्रों में सहयोग का दायरा तेजी से बढ़ा है। दोनों देश उभरती तकनीकों के क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी को वैश्विक प्रतिस्पर्धा और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग आने वाले वर्षों में तेज विस्तार के दौर में प्रवेश करने वाला है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। भारत के पास विशाल तकनीकी प्रतिभा और प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हैं, जिससे वह वैश्विक सेमीकंडक्टर और उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण कौशल केंद्र के रूप में उभर सकता है। कुल मिलाकर यह वार्ता केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था, औद्योगिक सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। आने वाले वर्षों में इस सहयोग का प्रभाव तकनीक, निवेश, रोजगार और नवाचार के क्षेत्र में व्यापक रूप से दिखाई दे सकता है।

आपातकाल के 51 साल: भारत के लोकतंत्र का सबसे विवादित दौर, जानें कैसे बदला था देश का राजनीतिक परिदृश्य

नई दिल्ली। भारत में 25 जून 1975 की आधी रात से 21 मार्च 1977 तक लगभग 21 महीनों तक लागू रहा आपातकाल आज 51 साल पूरे कर चुका है। तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार की सिफारिश पर संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत देश में आपातकाल की घोषणा की थी। यह दौर भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे विवादित समय माना जाता है, जिसे लेकर आज भी राजनीतिक बहस जारी रहती है। आपातकाल के मुद्दे को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लगातार उठाया है, खासकर तब जब विपक्ष ने वर्तमान सरकार पर संविधान के खिलाफ काम करने के आरोप लगाए। किन परिस्थितियों में लगा आपातकाल आपातकाल की पृष्ठभूमि में इलाहाबाद हाई कोर्ट का 1975 का फैसला माना जाता है। इस फैसले में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चुनावी अनियमितताओं का दोषी ठहराया गया था। 1971 के लोकसभा चुनाव में भारी जीत के बाद उनके प्रतिद्वंद्वी राजनारायण ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि चुनाव में अनियमित तरीके अपनाए गए थे। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त कर दिया, जिसके बाद देश में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति बन गई और अंततः आपातकाल की घोषणा की गई। आपातकाल के दौरान देश पर असर आपातकाल लागू होने के बाद देश में कई बड़े बदलाव देखने को मिले—– पूरे देश में चुनाव स्थगित कर दिए गए।– नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अन्य अधिकार प्रभावित हुए।– 25 जून की रात से ही विपक्षी नेताओं की массов गिरफ्तारियां शुरू हो गईं, जिनमें अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और जयप्रकाश नारायण जैसे नेता शामिल थे।– जेलों में कैदियों की संख्या इतनी बढ़ गई कि स्थान की कमी हो गई।– प्रेस पर सख्त सेंसरशिप लागू की गई, जिसके तहत किसी भी खबर के प्रकाशन से पहले अनुमति अनिवार्य थी।– सरकार विरोधी खबरें प्रकाशित करने पर कार्रवाई और गिरफ्तारियों के मामले भी सामने आए। इस दौर में प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई को लेकर कई तरह के आरोप और अनुभव भी सामने आए, जिन्हें बाद में व्यापक बहस का विषय बनाया गया। आपातकाल से जुड़े दावे और चर्चाएं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निजी सचिव रहे आरके धवन के एक साक्षात्कार में आपातकाल से जुड़े कई पहलुओं पर चर्चा की गई। उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री एस.एस. राय ने जनवरी 1975 में ही आपातकाल लागू करने की सलाह दी थी। यह भी दावा किया गया कि तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने आपातकाल की सिफारिश को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई थी और तुरंत सहमति दे दी थी। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि उस समय इंदिरा गांधी को अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता थी, जबकि बाद में 1977 के चुनाव में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। आपातकाल का राजनीतिक प्रभाव आपातकाल भारतीय राजनीति में एक ऐसा अध्याय बन गया, जिसे कई दल लोकतंत्र पर बड़ा संकट मानते हैं। यह दौर आज भी राजनीतिक चर्चाओं और बहसों में एक प्रमुख संदर्भ के रूप में देखा जाता है, खासकर लोकतांत्रिक अधिकारों और संवैधानिक स्वतंत्रता के मुद्दों पर।

कीमती धातुओं में फिर बढ़ी खरीदारी, सोना और चांदी संभले; हालिया गिरावट के बाद निवेशकों को मिली राहत

नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर मजबूती लौटती दिखाई दी है। लगातार दो कारोबारी सत्रों तक दबाव में रहने के बाद दोनों कीमती धातुओं में खरीदारी बढ़ी, जिससे कीमतों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया। शुरुआती कारोबार में कमजोरी के संकेत मिलने के बावजूद निवेशकों की सक्रियता ने बाजार की दिशा बदल दी और सोना-चांदी दोनों ही हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सोने की शुरुआत दबाव के साथ हुई थी। कारोबार के शुरुआती चरण में कीमतें पिछले बंद स्तर की तुलना में नीचे खुलीं, जिससे यह संकेत मिला कि बाजार में अभी भी सतर्कता बनी हुई है। हालांकि कुछ ही समय बाद खरीदारी का माहौल बनने लगा और सोने ने तेजी से रिकवरी करते हुए अपने शुरुआती नुकसान की भरपाई कर ली। कारोबार के दौरान सोने में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला, लेकिन निवेशकों की रुचि बढ़ने से कीमतें मजबूती के साथ आगे बढ़ती रहीं। चांदी के बाजार में भी लगभग यही तस्वीर दिखाई दी। शुरुआत में कीमतों पर दबाव रहा और बाजार कमजोर स्तर पर खुला, लेकिन बाद में मांग बढ़ने से तेजी का रुख बन गया। कारोबार के शुरुआती घंटों में ही चांदी ने अपनी गिरावट को पीछे छोड़ते हुए मजबूती हासिल कर ली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में हुई तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी को अवसर के रूप में देखा, जिससे कीमतों को समर्थन मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजारों का प्रभाव भी घरेलू कारोबार पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। वैश्विक स्तर पर सोने में सीमित बढ़त दर्ज की गई, जबकि चांदी के दामों में दबाव बना रहा। इसके बावजूद भारतीय बाजार में दोनों धातुओं ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। विश्लेषकों के अनुसार घरेलू निवेशकों की मांग और तकनीकी स्तरों पर हुई खरीदारी ने स्थानीय बाजार को सहारा दिया। बीते कुछ महीनों का प्रदर्शन देखें तो सोना और चांदी दोनों ही भारी दबाव में रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों, डॉलर की चाल, ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदों और वैश्विक निवेश प्रवाह में बदलाव के कारण कीमती धातुओं में व्यापक बिकवाली देखी गई। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और निवेशकों को कई बार तेज गिरावट का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से चांदी में गिरावट का दायरा अधिक रहा है। पिछले कुछ महीनों के दौरान इसके दामों में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई, जबकि सोना भी लगातार दबाव में बना रहा। एक सप्ताह के भीतर चांदी में दो अंकों की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी थी। ऐसे में मौजूदा तेजी को बाजार सहभागियों ने राहत के संकेत के रूप में देखा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान तेजी को अभी स्थायी रुझान नहीं माना जा सकता। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और डॉलर की चाल पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो सोना और चांदी अपनी हालिया रिकवरी को आगे बढ़ा सकते हैं। वहीं किसी भी नकारात्मक संकेत की स्थिति में बाजार में फिर से अस्थिरता लौट सकती है। फिलहाल, दो दिनों की लगातार गिरावट के बाद कीमती धातुओं में आई यह मजबूती निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। बाजार की मौजूदा स्थिति यह दर्शाती है कि निचले स्तरों पर खरीदारी अभी भी मजबूत बनी हुई है और निवेशक सोने तथा चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देख रहे हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में यह स्पष्ट होगा कि यह तेजी अल्पकालिक राहत है या फिर बाजार में नए उछाल की शुरुआत।