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जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता, गोरखपुर में CM योगी ने जनता दर्शन में सुनीं 200 फरियादियों की शिकायतें

गोरखपुर । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने तीन दिवसीय गोरखपुर प्रवास के दौरान शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे करीब 200 फरियादियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उनका प्रभावी तथा समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक शिकायत को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना जाए और उसका ऐसा समाधान किया जाए जिससे शिकायतकर्ता पूरी तरह संतुष्ट हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसमस्याओं के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी मामलों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन में पहुंचे लोगों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक की समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जनसेवा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और लोगों को न्याय तथा राहत दिलाने में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी। जनता दर्शन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग अपनी व्यक्तिगत, सामाजिक, राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य और अन्य प्रशासनिक समस्याएं लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को कई मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए। जनता दर्शन में शामिल होने के लिए किसी विशेष पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती। कोई भी नागरिक सीधे कार्यक्रम में पहुंचकर अपनी शिकायत मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों के सामने रख सकता है। हालांकि प्रशासन नागरिकों को सलाह देता है कि वे अपनी शिकायत पहले से ही जनसुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करा दें, ताकि उसका रिकॉर्ड उपलब्ध रहे और सुनवाई के दौरान प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जा सके। सरकार की ओर से यह भी बताया गया है कि जनता दर्शन के समय और स्थान में प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार बदलाव संभव है। इसलिए नागरिकों को किसी भी आधिकारिक सूचना के लिए राज्य सरकार के अधिकृत पोर्टल या जनसुनवाई पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

'वेलकम टू द जंगल' का पहला रिएक्शन आया सामने, किसी ने बताया पैसा वसूल एंटरटेनर तो किसी ने कहा कॉमेडी से ज्यादा हंगामा

नई दिल्ली । अक्षय कुमार की बहुप्रतीक्षित कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। लंबे समय से चर्चा में रही इस मल्टीस्टारर फिल्म को लेकर दर्शकों में पहले दिन से ही खासा उत्साह देखने को मिला। फिल्म का पहला शो खत्म होते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दर्शकों ने अपने शुरुआती रिएक्शन साझा करने शुरू कर दिए। शुरुआती प्रतिक्रियाओं में फिल्म को लेकर मिली-जुली राय सामने आई है। कुछ दर्शकों ने इसे भरपूर मनोरंजन से भरपूर बताया, जबकि कुछ का मानना है कि फिल्म की कहानी अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती। रिलीज के बाद सामने आए शुरुआती रिव्यू में बड़ी संख्या में दर्शकों ने अक्षय कुमार की कॉमिक टाइमिंग की जमकर तारीफ की है। कई लोगों का कहना है कि अभिनेता एक बार फिर अपने पुराने हास्य अंदाज में दिखाई दिए हैं। दर्शकों के अनुसार उनकी एंट्री और कई कॉमिक सीक्वेंस फिल्म के सबसे मजबूत हिस्सों में शामिल हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने लिखा कि लंबे समय बाद अक्षय कुमार को उसी अंदाज में देखना अच्छा लगा, जिसके लिए वह पहले से पहचाने जाते रहे हैं। फिल्म देखने वाले कई दर्शकों का मानना है कि ‘वेलकम टू द जंगल’ को गंभीर कहानी या तर्क के आधार पर नहीं, बल्कि हल्के-फुल्के मनोरंजन के रूप में देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि फिल्म लगातार हास्य से भरपूर माहौल बनाए रखती है और कॉमिक सीन्स दर्शकों को हंसाने में सफल रहते हैं। कुछ दर्शकों ने इसे परिवार के साथ देखने लायक मनोरंजक फिल्म बताया और कहा कि यदि उद्देश्य केवल मनोरंजन है तो फिल्म निराश नहीं करती। हालांकि दूसरी ओर कुछ दर्शकों ने फिल्म की आलोचना भी की है। उनका कहना है कि कलाकारों की बड़ी संख्या के कारण कई किरदारों को पर्याप्त स्क्रीन स्पेस नहीं मिल पाया, जिससे कहानी कई जगह बिखरी हुई महसूस होती है। कुछ प्रतिक्रियाओं में यह भी कहा गया कि कई दृश्य कॉमेडी की बजाय अनावश्यक शोर-शराबे जैसे लगते हैं और पटकथा अपेक्षित मजबूती नहीं दिखा पाती। फिल्म की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विशाल स्टारकास्ट मानी जा रही है। अक्षय कुमार के साथ सुनील शेट्टी, परेश रावल, अरशद वारसी, जैकी श्रॉफ, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, रवीना टंडन, लारा दत्ता, जॉनी लीवर, राजपाल यादव, श्रेयस तलपड़े, तुषार कपूर और फरीदा जलाल सहित कई चर्चित कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए हैं। इतने बड़े कलाकारों को एक साथ देखने को लेकर भी दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई थी। फिल्म का निर्देशन अहमद खान ने किया है और इसे कॉमेडी फ्रेंचाइजी की अगली कड़ी के रूप में पेश किया गया है। पहले दिन के शुरुआती रुझानों से साफ है कि फिल्म को लेकर दर्शकों की राय दो हिस्सों में बंटी हुई है। जहां एक वर्ग इसे हल्का-फुल्का मनोरंजन और ‘पैसा वसूल’ फिल्म बता रहा है, वहीं दूसरा वर्ग कहानी और प्रस्तुति को लेकर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का प्रदर्शन और दर्शकों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह मल्टीस्टारर कॉमेडी दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।

पूर्वांचल के विकास को रफ्तार, देवरिया में 106 परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे CM योगी, गोरखपुर में अस्पताल का उद्घाटन भी

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को पूर्वांचल के दो महत्वपूर्ण जिलों देवरिया और गोरखपुर के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह देवरिया में 456 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 106 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। इसके साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित करेंगे। मुख्यमंत्री का कार्यक्रम देवरिया के बरहज और रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्रों में आयोजित होगा। इस अवसर पर सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बुनियादी ढांचा और अन्य विकास कार्यों से जुड़ी परियोजनाओं की शुरुआत की जाएगी। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और स्थानीय लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। मुख्यमंत्री लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रमाण-पत्र भी सौंपेंगे। इन योजनाओं का उद्देश्य पात्र परिवारों तक सरकारी सुविधाओं का लाभ पहुंचाना और उन्हें आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। देवरिया कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री गोरखपुर पहुंचेंगे, जहां वह एस्ट्रोमेडिक्स मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल के उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। अस्पताल के शुरू होने से गोरखपुर और आसपास के जिलों के लोगों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलने की उम्मीद है। अपने दौरे से पहले मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर संदेश जारी करते हुए कहा कि पूज्य देवरहा बाबा की पावन भूमि देवरिया में विकास और जनकल्याण के एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन विकास परियोजनाओं और जनकल्याणकारी योजनाओं से क्षेत्र के लोगों के जीवन में नई आशा, नए अवसर और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। सरकार के अनुसार, पूर्वांचल में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और जनहित योजनाओं के विस्तार के उद्देश्य से लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह दौरा भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

'धर्मेंद्र-हेमा मालिनी जैसा निस्वार्थ प्यार अब दुर्लभ', रिश्तों और तलाक पर पहली बार खुलकर बोलीं ईशा देओल

नई दिल्ली। अभिनेत्री ईशा देओल ने पति भरत तख्तानी से अलग होने के बाद पहली बार अपने निजी जीवन और रिश्तों को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने स्वीकार किया कि तलाक के बाद उनकी जिंदगी में प्यार और रोमांस की कमी महसूस होती है, लेकिन इसके बावजूद उनका प्रेम और रिश्तों पर भरोसा आज भी कायम है। ईशा का कहना है कि जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव इंसान की सोच बदल सकते हैं, लेकिन सच्चे प्यार की अहमियत कभी कम नहीं होती। ईशा ने बातचीत के दौरान कहा कि वह स्वभाव से बेहद रोमांटिक हैं और आज भी रोमांटिक गीत, प्रेम कहानियां और रिश्तों की भावनात्मक गहराई उन्हें आकर्षित करती है। उनके अनुसार, प्यार किसी भी इंसान के जीवन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और फिलहाल वह इसी एहसास की कमी महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि रोमांस जीवन को खूबसूरत बनाता है और यही कारण है कि वह आज भी प्रेम पर पूरी आस्था रखती हैं। अभिनेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वैवाहिक जीवन में आई कठिनाइयों या अलगाव का अर्थ यह नहीं है कि प्यार खत्म हो जाता है। उन्होंने कहा कि रिश्तों में ब्रेकअप या अलगाव जीवन का हिस्सा हैं और इससे प्रेम के प्रति उनका नजरिया नहीं बदला है। उनके मुताबिक, जीवन में पहले भी ऐसे रिश्ते रहे हैं जो लंबे समय तक नहीं चल सके, लेकिन इन अनुभवों ने उन्हें प्रेम से दूर नहीं किया। ईशा देओल ने अपने माता-पिता धर्मेंद्र और हेमा मालिनी के रिश्ते का जिक्र करते हुए कहा कि बचपन से उन्होंने दोनों के बीच सम्मान, विश्वास और बिना किसी शर्त के प्यार को बेहद करीब से देखा है। उसी रिश्ते ने उनके भीतर प्रेम की परिभाषा गढ़ी। उनका मानना है कि आज के दौर में वैसी गहराई, समर्पण और गरिमा वाले रिश्ते बहुत कम देखने को मिलते हैं। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता का रिश्ता हमेशा उनके लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति अपने जीवन में अच्छे और कठिन दोनों तरह के अनुभवों से गुजरता है। रिश्तों का टूटना निश्चित रूप से भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन इससे जीवन रुक नहीं जाता। उनके अनुसार, हर अनुभव इंसान को पहले से अधिक मजबूत और परिपक्व बनाता है तथा भविष्य के लिए नई सीख भी देता है। ईशा और व्यवसायी भरत तख्तानी ने वर्ष 2012 में विवाह किया था। दोनों की दो बेटियां हैं और शादी के एक दशक से अधिक समय बाद वर्ष 2024 में दोनों ने अलग होने का फैसला किया। इस निर्णय के बाद दोनों ने अपनी निजी जिंदगी को गरिमा के साथ आगे बढ़ाने की बात कही थी। अलगाव के बाद ईशा ने सार्वजनिक रूप से अपने व्यक्तिगत जीवन पर बहुत कम प्रतिक्रिया दी थी। अब लंबे समय बाद उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए यह स्पष्ट किया है कि कठिन दौर के बावजूद वह जीवन और प्यार दोनों को सकारात्मक नजरिए से देखती हैं। उनका मानना है कि सच्चे रिश्ते विश्वास, सम्मान और आपसी समझ पर टिके होते हैं। यही मूल्य उन्होंने अपने परिवार से सीखे हैं और भविष्य में भी वह इन्हीं मूल्यों के साथ जीवन को आगे बढ़ाना चाहती हैं।

अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला, बोले- संवेदनहीनता का चेहरा सामने आया, जनता सब समझ चुकी है

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश की जनता अब भाजपा नेताओं के भाषण सुनने के मूड में नहीं है, बल्कि जवाब चाहती है। अपने बयान में उन्होंने एक कथित वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि उससे भाजपा नेताओं की वास्तविक कार्यशैली और व्यवहार लोगों के सामने आ गया है। अखिलेश यादव ने कहा कि अहंकार इंसान का विवेक छीन लेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने किसी नेता को ईमानदारी, सादगी और जनसेवा का प्रतीक मान रखा था, उनका भ्रम अब टूट चुका है। उनके अनुसार हाल ही में सामने आए एक कथित वीडियो ने उस बनाई गई छवि को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। सपा प्रमुख ने कहा कि किसी परिवार पर दुख का पहाड़ टूटने के समय संवेदना और सहानुभूति दिखाने के बजाय यदि कोई सार्वजनिक रूप से कठोर भाषा और व्यवहार अपनाता है, तो यह उसकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद लोगों के सामने उस नेता का वास्तविक चेहरा उजागर हो गया है और कथित नायकत्व का मायाजाल बिखर गया है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि इस घटना से सबसे अधिक निराश वे समर्थक हुए हैं, जो अब तक संबंधित नेता की छवि का प्रचार करते रहे थे। उन्होंने कहा कि लोग अब यह सोचने को मजबूर हैं कि यदि ऐसी घटना उनके अपने परिवार के साथ होती, तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होती। उनके अनुसार इस घटना ने समाज में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के व्यवहार पर सवाल उठे हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी पत्रकारों और अधिकारियों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार के मामले सामने आ चुके हैं। उनका कहना था कि जिसके सार्वजनिक व्यवहार में संयम नहीं होता, उसके नेतृत्व पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। सपा अध्यक्ष ने व्यंग्य करते हुए कहा कि अब यह भी कहा जा सकता है कि वायरल वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से बनाया गया है, लेकिन जनता सब समझती है। उन्होंने दावा किया कि लोग वास्तविकता और दिखावे के बीच का अंतर पहचान चुके हैं। अपने बयान के अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़ी किसी भी घटना को समाज गंभीरता से लेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण से भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचा है और महिलाओं के बीच इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा।

लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर भीषण हादसा, ट्रेलर से टकराई डबल डेकर बस, 2 की मौत, 30 घायल

फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में शुक्रवार को एक भीषण सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियां छीन लीं। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर सवारियों से भरी एक तेज रफ्तार डबल डेकर बस आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस में सवार यात्रियों के बीच चीख-पुकार मच गई। हादसे में दो लोगों की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि करीब 30 यात्री घायल हो गए। यह दुर्घटना नंगला खंगर थाना क्षेत्र में हुई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस में 60 से अधिक यात्री सवार थे। बताया जा रहा है कि तेज रफ्तार के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख सका और बस सीधे आगे चल रहे ट्रेलर से जा भिड़ी। टक्कर के बाद बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और कई यात्री उसमें फंस गए। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस और एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान दो यात्रियों ने दम तोड़ दिया। अन्य घायलों का इलाज जारी है, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस ने बताया कि दुर्घटना के समय बस में क्षमता से अधिक नहीं, बल्कि 60 से ज्यादा यात्री सफर कर रहे थे। हादसे के कारण एक्सप्रेसवे पर कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस ने क्षतिग्रस्त बस और ट्रेलर को हटवाकर यातायात सामान्य कराया। प्रशासन ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में तेज रफ्तार और चालक का वाहन पर नियंत्रण खोना हादसे की प्रमुख वजह माना जा रहा है, हालांकि तकनीकी और अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा नियमों के पालन और नियंत्रित गति से वाहन चलाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। अधिकारियों ने वाहन चालकों से सावधानी बरतने और निर्धारित गति सीमा का पालन करने की अपील की है।

हॉर्मुज स्ट्रेट में सामान्य हो रहा समुद्री व्यापार, सुरक्षित कॉरिडोर बनने के बाद जहाजों की आवाजाही में दिखा तेज सुधार

नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य तनाव समाप्त होने के बाद वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होती दिखाई दे रही है। ताजा आकलन के अनुसार, इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या युद्ध से पहले के स्तर के लगभग 57 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यह सुधार अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक शिपिंग उद्योग के लिए राहत भरा संकेत माना जा रहा है, क्योंकि संघर्ष के दौरान इस क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां काफी प्रभावित हुई थीं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, हॉर्मुज स्ट्रेट से एक दिन में कुल 78 जहाजों की आवाजाही दर्ज की गई। इनमें से बड़ी संख्या में जहाजों ने नए सुरक्षित समुद्री कॉरिडोर का उपयोग किया, जिसे ओमान और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों की पहल के बाद लागू किया गया। इस व्यवस्था का उद्देश्य जहाजों को संभावित सुरक्षा जोखिमों से बचाते हुए सुरक्षित और सुचारु आवागमन सुनिश्चित करना है। समुद्री क्षेत्र में इस नई व्यवस्था का प्रभाव जहाजों की बढ़ती आवाजाही के रूप में स्पष्ट दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिनभर की कुल समुद्री गतिविधियों में 40 प्रतिशत से अधिक जहाजों ने सुरक्षित कॉरिडोर का उपयोग किया। इनमें अधिकांश जहाज खाड़ी क्षेत्र से बाहर की ओर रवाना हो रहे थे, जबकि कुछ जहाजों ने विशेष परिस्थितियों में अपनी पहचान संबंधी प्रसारण प्रणाली बंद रखते हुए यात्रा की। कुछ अन्य जहाज ईरान की समुद्री सीमा के अपेक्षाकृत निकट से भी गुजरे। विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री मार्गों पर जोखिम का आकलन करते हुए जहाज परिचालन कंपनियां अलग-अलग रणनीतियां अपना रही हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। कई जहाज सुरक्षा कारणों से बंदरगाहों और खाड़ी क्षेत्र के भीतर ही रुके रहे। अब हालात सामान्य होने के साथ इनमें से कई जहाज दोबारा अपने निर्धारित मार्गों पर लौटने लगे हैं। इसे वैश्विक समुद्री परिवहन और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियों के धीरे-धीरे सामान्य होने का शुरुआती संकेत माना जा रहा है। हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों में कच्चे तेल और रासायनिक उत्पादों के टैंकरों की संख्या सबसे अधिक रही। इसके अलावा बल्क कैरियर, सामान्य कार्गो जहाज, कंटेनर पोत, एलपीजी और एलएनजी टैंकरों ने भी इस समुद्री मार्ग का उपयोग किया। ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से यह मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में शामिल है, इसलिए यहां गतिविधियों का सामान्य होना वैश्विक बाजारों के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आने वाले जहाजों में उल्लेखनीय हिस्सेदारी उन पोतों की रही, जिनका संबंध ईरान से था। इसी अवधि में कई बड़े क्रूड ऑयल टैंकरों ने भी सफलतापूर्वक हॉर्मुज स्ट्रेट को पार किया। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों की ढुलाई करने वाले कई टैंकर भी इस मार्ग से सुरक्षित रूप से गुजरे, जिससे ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में धीरे-धीरे स्थिरता लौटने के संकेत मिले हैं। हॉर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा व्यापार की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील समुद्री मार्ग माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से में निर्यात होने वाले कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति इसी रास्ते से होकर गुजरती है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या सुरक्षा संकट अंतरराष्ट्रीय बाजारों, ऊर्जा कीमतों और समुद्री व्यापार को सीधे प्रभावित करता है। वर्तमान में जहाजों की बढ़ती आवाजाही यह संकेत दे रही है कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ समुद्री परिवहन धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौट रहा है, जिससे वैश्विक व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

जमीन विवाद में रिश्तों का कत्ल, ससुर पर दामाद की हत्या का आरोप, सास-ससुर हिरासत में

रायबरेली । उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में जमीन विवाद ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। नसीराबाद थाना क्षेत्र के कुंवरमऊ ग्राम सभा के पूरे दुर्गा सिंह मजरे में हुए खूनी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान वीरेंद्र सिंह के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई, जबकि मृतक के परिवार में मातम पसरा हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि इस दौरान वीरेंद्र सिंह पर चाकू से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उपचार के दौरान उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। मृतक के परिजनों ने इस घटना के लिए उसके ससुर को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि जमीन विवाद के दौरान ससुर ने चाकू से हमला किया, जिसके कारण वीरेंद्र सिंह की मौत हुई। हालांकि पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। घटना की सूचना मिलते ही नसीराबाद थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ साक्ष्य भी जुटाए हैं। मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस ने मृतक के सास और ससुर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। इस दर्दनाक घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। एहतियात के तौर पर पुलिस क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की मजबूत छलांग, 61 यूनिकॉर्न के साथ दुनिया में चौथा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बना देश

नई दिल्ली । भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत ने 61 यूनिकॉर्न स्टार्टअप के साथ दुनिया में चौथा स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि देश में नवाचार, तकनीकी विकास और निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत मानी जा रही है। यूनिकॉर्न उन स्टार्टअप कंपनियों को कहा जाता है जिनका बाजार मूल्य एक अरब डॉलर या उससे अधिक होता है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका अब भी यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। उसके पास 806 यूनिकॉर्न हैं, जो वैश्विक कुल का लगभग आधा हिस्सा हैं। इसके बाद चीन 381 यूनिकॉर्न के साथ दूसरे और यूनाइटेड किंगडम 70 यूनिकॉर्न के साथ तीसरे स्थान पर है। भारत 61 यूनिकॉर्न के साथ चौथे स्थान पर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने में सफल रहा है। देश के भीतर बेंगलुरु एक बार फिर स्टार्टअप राजधानी के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा है। शहर में 25 यूनिकॉर्न कंपनियां मौजूद हैं, जो इसे भारत का सबसे बड़ा नवाचार केंद्र बनाती हैं। इसके बाद मुंबई 13 यूनिकॉर्न के साथ दूसरे स्थान पर है। इन दोनों शहरों ने तकनीकी उद्यम, निवेश और प्रतिभा विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी भूमिका को और मजबूत किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर यूनिकॉर्न कंपनियों की संख्या बढ़कर 1,603 तक पहुंच गई है। इन सभी कंपनियों का संयुक्त मूल्यांकन लगभग 8 ट्रिलियन डॉलर आंका गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज़ प्रगति ने वैश्विक स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई गति दी है और इसी वजह से यूनिकॉर्न कंपनियों के मूल्यांकन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हुरुन की रिपोर्ट के अनुसार एआई क्षेत्र ने इस वर्ष सबसे अधिक प्रभाव डाला है। वैश्विक यूनिकॉर्न कंपनियों की कुल वैल्यू में एआई आधारित कंपनियों की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। एआई यूनिकॉर्न की संख्या भी तेजी से बढ़कर 215 हो गई है, जो फिनटेक क्षेत्र की कंपनियों के लगभग बराबर है। इससे स्पष्ट होता है कि आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक निवेश और तकनीकी विकास की सबसे महत्वपूर्ण ताकत बनी रह सकती है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2026 के दौरान 308 नए स्टार्टअप यूनिकॉर्न बने, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है। हालांकि यह संख्या वर्ष 2021 के रिकॉर्ड स्तर से कम है, लेकिन इस बार उभरने वाले स्टार्टअप अधिक परिपक्व और उच्च गुणवत्ता वाले माने जा रहे हैं। इनमें एआई, रोबोटिक्स और नई ऊर्जा जैसे क्षेत्रों की कंपनियों का दबदबा देखने को मिला। वैश्विक रैंकिंग में अमेरिका की एआई कंपनी एंथ्रोपिक सबसे अधिक मूल्यांकन वाली यूनिकॉर्न कंपनी बनी हुई है। इसके बाद ओपनएआई और चीन की बाइटडांस का स्थान है। इन कंपनियों की सफलता यह दर्शाती है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था में एआई आधारित तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ती जाएगी और निवेशकों का झुकाव भी इसी क्षेत्र की ओर रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए यह रैंकिंग केवल संख्या का संकेत नहीं बल्कि देश की नवाचार क्षमता, उद्यमिता संस्कृति और डिजिटल अर्थव्यवस्था की मजबूती का प्रमाण है। यदि निवेश, अनुसंधान, तकनीकी विकास और नीतिगत सहयोग की वर्तमान गति बनी रहती है, तो आने वाले वर्षों में भारत वैश्विक यूनिकॉर्न सूची में और मजबूत स्थान हासिल कर सकता है। देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता भी लगातार विकसित कर रहा है।

वैश्विक तनाव घटने से कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट, आपूर्ति सुधरने से बाजार को राहत, फिर भी पश्चिम एशिया के हालात पर बनी हुई है नजर

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी का दौर जारी है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कमी और प्रमुख समुद्री मार्गों से तेल आपूर्ति सामान्य होने के कारण शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों के दाम दो प्रतिशत तक लुढ़क गए। ऊर्जा बाजार में यह गिरावट ऐसे समय दर्ज की गई है जब निवेशकों का भरोसा आपूर्ति व्यवस्था के स्थिर होने की ओर बढ़ा है। हालांकि पश्चिम एशिया में हाल ही में सामने आई कुछ घटनाओं ने यह संकेत भी दिया है कि बाजार पूरी तरह जोखिम से बाहर नहीं निकला है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में पिछले कुछ सप्ताह से उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियां रही हैं। पहले संघर्ष और आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया था, लेकिन अब हालात अपेक्षाकृत सामान्य होने के बाद बाजार में राहत का माहौल बनता दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपूर्ति सुचारु बनी रहती है तो निकट भविष्य में कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है। हालांकि इस राहत के बीच ओमान के निकट एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले ने ऊर्जा बाजार को फिर से सतर्क कर दिया। इस घटना के बाद कुछ समय के लिए तेल की कीमतों में तेजी आई, क्योंकि निवेशकों को आशंका थी कि यदि समुद्री सुरक्षा प्रभावित हुई तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ सकता है। बाद में बाजार ने स्थिति का आकलन किया और कीमतें दोबारा गिरावट की ओर लौट गईं। इससे स्पष्ट है कि निवेशक अभी भी पश्चिम एशिया की हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का परिवहन इसी रास्ते से होता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि, सुरक्षा चुनौती या राजनीतिक तनाव का सीधा प्रभाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दिखाई देता है। हाल के दिनों में इस मार्ग से तेल टैंकरों की आवाजाही में सुधार होने से आपूर्ति बाधित होने की आशंका काफी कम हुई है, जिससे कीमतों पर दबाव बना है। सप्ताहभर के प्रदर्शन पर नजर डालें तो प्रमुख वैश्विक बेंचमार्क में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। यह संकेत देता है कि बाजार फिलहाल आपूर्ति की स्थिति को लेकर पहले की तुलना में अधिक आश्वस्त है। फिर भी विशेषज्ञ यह मानते हैं कि यदि क्षेत्रीय तनाव दोबारा बढ़ता है या समुद्री मार्गों में किसी प्रकार की बाधा आती है तो कीमतों में फिर तेजी लौट सकती है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट सकारात्मक मानी जाती है। इससे आयात लागत कम हो सकती है, जिसका असर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों और महंगाई पर भी पड़ सकता है। साथ ही परिवहन, विनिर्माण और ऊर्जा पर निर्भर उद्योगों को भी लागत में राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान लंबे समय तक बना रहता है तो इसका सकारात्मक प्रभाव देश की आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे सकता है। भारतीय कच्चे तेल बास्केट की औसत कीमतों में भी हाल के समय में उल्लेखनीय कमी आई है। यह संकेत देता है कि वैश्विक बाजार में आई नरमी का असर भारत के आयात बिल पर भी पड़ रहा है। ऊर्जा विश्लेषकों के अनुसार आने वाले समय में यदि अंतरराष्ट्रीय कीमतें नियंत्रित रहती हैं तो इससे विदेशी मुद्रा व्यय में कमी और आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। फिलहाल वैश्विक तेल बाजार राहत और सतर्कता के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहा है। एक ओर आपूर्ति सामान्य होने से कीमतों में गिरावट का माहौल बना है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया की घटनाएं यह याद दिला रही हैं कि ऊर्जा बाजार अभी भी भू-राजनीतिक जोखिमों से पूरी तरह मुक्त नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में क्षेत्रीय हालात, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक मांग की दिशा ही कच्चे तेल की कीमतों का अगला रुख तय करेगी।