ट्विशा शर्मा केस में जांच तेज CBI ने कोर्ट से मांगी आरोपियों की हिरासत बढ़ाने की अनुमति डिजिटल सबूतों की जांच जारी

नई दिल्ली। बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को एक बार फिर अदालत में सुनवाई हुई जहां केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की। मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट आरती आदित्य बांदिल की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा के पिता और भाई भी अदालत पहुंचे और पूरी कार्यवाही के दौरान मौजूद रहे। इस संवेदनशील मामले पर अब सभी की नजर अदालत के अंतिम आदेश पर टिकी हुई है। सीबीआई ने अदालत से आरोपी पति समर्थ सिंह और सास रिटायर्ड जज गिरिबाला की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ाने का अनुरोध किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच जारी है। ऐसे में आरोपियों का न्यायिक अभिरक्षा में रहना जांच की निष्पक्षता और प्रगति के लिए आवश्यक है। जांच एजेंसी के अनुसार मामले में अभी कई गवाहों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं। इसके साथ ही जब्त किए गए मोबाइल फोन लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी जारी है। सीबीआई का कहना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से जांच को नई दिशा मिल सकती है इसलिए सभी तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि समर्थ सिंह के लैपटॉप तक पहुंच जांच का अहम हिस्सा है लेकिन उसका पासवर्ड अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। एजेंसी के अनुसार लैपटॉप में मौजूद संभावित डिजिटल जानकारी और अन्य दस्तावेजों की जांच के लिए पासवर्ड जरूरी है। इसके बिना कई महत्वपूर्ण जानकारियों तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। सीबीआई ने अदालत को यह भी संकेत दिया कि यदि जांच के दौरान जरूरत महसूस हुई तो दोनों आरोपियों की दोबारा पुलिस रिमांड भी मांगी जा सकती है। एजेंसी का कहना है कि जांच लगातार आगे बढ़ रही है और सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले अदालत ने 16 जून को दोनों आरोपियों को 30 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। अब एजेंसी ने हिरासत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है ताकि लंबित जांच पूरी की जा सके। अदालत के आदेश के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों आरोपी आगे भी न्यायिक हिरासत में रहेंगे या नहीं। गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा की 11 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्यों गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी बीच हाल ही में आरोपी रिटायर्ड जज गिरिबाला के घर चोरी की घटना भी सामने आई थी जिसमें कुछ दस्तावेज और जेवरात चोरी करने का प्रयास किया गया था हालांकि पुलिस की सक्रियता के चलते आरोपी सामान छोड़कर फरार हो गए थे। अब पूरे मामले में अदालत के फैसले का इंतजार है क्योंकि उसी के आधार पर जांच की अगली दिशा तय होगी।
भोपाल में धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान राम मंदिर दान मामले की निष्पक्ष जांच की मांग इंडोनेशिया मॉडल का किया जिक्र

नई दिल्ली। भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने राम मंदिर से जुड़े दान विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के धाम से जुड़ा कोई भी मामला केवल एक मंदिर तक सीमित नहीं होता बल्कि यह पूरे सनातन समाज की भावनाओं और विश्वास से जुड़ा विषय है। उनके अनुसार यदि किसी ने भगवान के धाम में रहकर अनुचित कार्य किया है तो उसे कानून के साथ साथ ईश्वर का भी महादंड मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच पहले से विशेष जांच एजेंसियां और एसआईटी कर रही हैं इसलिए बिना तथ्यों के किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय जांच पूरी होने का इंतजार करना चाहिए। जब उनसे राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े आरोपों और कुछ नामों पर एफआईआर नहीं होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं है इसलिए जांच एजेंसियों को निष्पक्ष तरीके से अपना काम करने देना चाहिए। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सनातन परंपरा से जुड़े लोगों के मन में इस पूरे प्रकरण को लेकर पीड़ा है। उन्होंने बताया कि विदेश यात्रा के दौरान भी उनसे इस विषय पर चर्चा हुई थी और उन्होंने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में भी इस मुद्दे का उल्लेख किया था। उनके अनुसार भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत दुनिया भर के लोगों के लिए प्रेरणा का विषय है इसलिए इससे जुड़े मामलों में पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखना जरूरी है। मंदिरों के प्रबंधन को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि देश में कुछ धर्म विरोधी ताकतें ऐसा माहौल तैयार कर रही हैं जिससे मंदिरों और संत समाज पर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिरों की सेवा और प्रबंधन ऐसे लोगों के हाथ में होना चाहिए जो पूरी निष्ठा के साथ सनातन परंपरा भगवान और धार्मिक मूल्यों के प्रति समर्पित हों। इससे मंदिरों की गरिमा और श्रद्धालुओं का विश्वास दोनों सुरक्षित रहेंगे। अपने संबोधन के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भारत के मुसलमानों के संदर्भ में इंडोनेशिया का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया में बड़ी संख्या में मुस्लिम आबादी होने के बावजूद वहां धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक समरसता देखने को मिलती है। उनके अनुसार वहां पांच वक्त की नमाज पढ़ने वाले लोग दीपावली जैसे त्योहार भी मनाते हैं और रामकथा जैसे धार्मिक आयोजनों में भी शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि भारत में भी सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान की भावना को मजबूत करने की जरूरत है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री भोपाल में हबीबगंज स्थित कैंसर हीलर सेंटर के उद्घाटन कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस अवसर पर उन्होंने आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि समय पर जांच और बेहतर इलाज से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। कार्यक्रम में चिकित्सा विशेषज्ञों समाजसेवियों जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आयोजकों के अनुसार यह सेंटर भोपाल सहित आसपास के जिलों के मरीजों को आधुनिक कैंसर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मंगलवार के इन आसान वास्तु उपायों से दूर होगी नकारात्मक ऊर्जा घर में आएगी सुख समृद्धि और बजरंगबली की कृपा

नई दिल्ली। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान और मंगल ग्रह को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के साथ सुख समृद्धि और मानसिक शांति लाने में सहायक माने जाते हैं। मान्यता है कि यदि मंगलवार को घर और आसपास के वातावरण को व्यवस्थित रखते हुए कुछ छोटे लेकिन महत्वपूर्ण नियमों का पालन किया जाए तो जीवन में आने वाली कई परेशानियों को कम किया जा सकता है और परिवार में खुशहाली बनी रहती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार मंगलवार की शुरुआत घर की साफ सफाई से करनी चाहिए। मुख्य द्वार को विशेष रूप से स्वच्छ रखना शुभ माना जाता है क्योंकि यही स्थान सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का मार्ग माना जाता है। मुख्य द्वार पर स्वस्तिक बनाना या शुभ प्रतीक अंकित करना भी मंगलकारी माना जाता है। इससे घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और नकारात्मक प्रभाव कम होने की मान्यता है। इस दिन भगवान हनुमान की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और भय तथा मानसिक तनाव दूर होने की मान्यता है। पूजा में सिंदूर चमेली का तेल और लाल फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथ ही गुड़ और भुने हुए चने का भोग लगाने के बाद उनका प्रसाद बांटना भी मंगलकारी माना जाता है। वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है। इसलिए मंगलवार को इस दिशा की विशेष सफाई करने और यहां किसी प्रकार का कबाड़ या टूटा फूटा सामान न रखने की सलाह दी जाती है। घर में लंबे समय से खराब पड़े इलेक्ट्रॉनिक सामान जंग लगे लोहे के उपकरण या बेकार वस्तुओं को हटाना भी सकारात्मक ऊर्जा के लिए लाभकारी माना जाता है। मंगलवार को जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी शुभ माना गया है। लाल मसूर की दाल लाल वस्त्र या गुड़ का दान करने से मंगल ग्रह की शुभता बढ़ने की मान्यता है। वहीं बंदरों या गाय को भोजन कराना भी कई लोग शुभ मानते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसे कार्यों से जीवन में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और सौभाग्य में वृद्धि होती है। घर के मंदिर में नियमित रूप से दीपक जलाना और शाम के समय मुख्य द्वार पर दीप प्रज्ज्वलित करना भी वास्तु के अनुसार शुभ माना जाता है। इससे घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बना रहता है। इसके अलावा मंगलवार के दिन क्रोध विवाद और कटु वचन से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि शांत व्यवहार को ही मंगल ग्रह की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल उपाय माना गया है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार इन उपायों को किसी अंधविश्वास के बजाय आस्था और सकारात्मक जीवनशैली के रूप में अपनाना चाहिए। नियमित साफ सफाई अनुशासित दिनचर्या पूजा पाठ और सेवा भाव जैसे कार्य न केवल मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं बल्कि परिवार के भीतर सौहार्द और सकारात्मक वातावरण भी मजबूत करते हैं।
भारतीय सिनेमा का गौरव: पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्रियां, कला के क्षेत्र में अमूल्य योगदान की पूरी सूची

नई दिल्ली। भारतीय फिल्म जगत यानी बॉलीवुड में ऐसे कई प्रतिभावान कलाकार हुए हैं, जिन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय और कला के प्रति समर्पण से न केवल दर्शकों के दिलों में जगह बनाई, बल्कि देश का नाम भी रोशन किया है। सिनेमा के क्षेत्र में उत्कृष्ट और अमूल्य योगदान देने वाले इन सितारों को भारत सरकार द्वारा समय-समय पर देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्म श्री’ से अलंकृत किया गया है। इस प्रतिष्ठित सूची में फिल्म उद्योग की कई ऐसी दिग्गज अभिनेत्रियों के नाम शामिल हैं, जिन्होंने अपनी कलात्मक यात्रा से भारतीय सिनेमा को एक नया आयाम दिया है। इनमें से कुछ अभिनेत्रियां आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत हमेशा अमर रहेगी। इस प्रतिष्ठित सम्मान को पाने वाली अभिनेत्रियों में बॉलीवुड की ‘ड्रीम गर्ल’ कही जाने वाली हेमा मालिनी का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। अपनी बेहतरीन अदाकारी और नृत्य कला के लिए प्रसिद्ध हेमा मालिनी को भारत सरकार द्वारा साल 2000 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। वहीं, हिंदी सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार मानी जाने वाली दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी को कला के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए साल 2013 में इस गौरवपूर्ण नागरिक सम्मान से नवाजा गया था। भले ही वे अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्में आज भी सिनेप्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं। समीक्षकों द्वारा सराहे गए अभिनय और अपनी बेबाक शैली के लिए जानी जाने वाली अभिनेत्री और निर्माता कंगना रनौत को साल 2020 में पद्म श्री पुरस्कार प्रदान किया गया था। सत्तर और अस्सी के दशक की अपनी संजीदा अदाकारी से समां बांधने वाली सदाबहार अभिनेत्री रेखा को साल 2010 में इस सम्मान से विभूषित किया गया था। उन्होंने ‘उमराव जान’ और ‘खूबसूरत’ जैसी यादगार फिल्मों में दमदार भूमिकाएं निभाई हैं। नब्बे के दशक की लोकप्रिय और सफल अभिनेत्रियों में शामिल रवीना टंडन को हाल ही में वर्ष 2023 में महामहिम राष्ट्रपति द्वारा इस राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। अपनी खूबसूरती और बेहतरीन अभिनय क्षमता के बल पर वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने वाली पूर्व विश्व सुंदरी ऐश्वर्या राय बच्चन को साल 2009 में पद्म श्री की उपाधि दी गई थी। वहीं, लीक से हटकर किरदारों को पर्दे पर जीवंत करने वाली सशक्त अभिनेत्री विद्या बालन को साल 2014 में इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। इसके अतिरिक्त, बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी कला का परचम लहराने वाली ग्लोबल आइकन प्रियंका चोपड़ा को साल 2016 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से अलंकृत किया गया था। गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को सहजता से निभाने वाली उत्कृष्ट अभिनेत्री तब्बू और अपनी चुलबुली अदाकारी से करोड़ों फैंस के दिलों पर राज करने वाली अभिनेत्री काजोल को साल 2011 में एक साथ इस सर्वोच्च सम्मान के लिए चुना गया था। अपने जमाने की बेहद खूबसूरत और बोल्ड अभिनेत्री मानी जाने वाली शर्मिला टैगोर को सिनेमाई दुनिया में उनके विशेष योगदान हेतु साल 2005 में इस उपाधि से विभूषित किया गया था। इस सूची में भारतीय समानांतर सिनेमा की मजबूत स्तंभ रहीं दिवंगत अभिनेत्री स्मिता पाटिल का नाम भी शामिल है, जिन्हें बहुत कम उम्र में, साल 1985 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। कला जगत में इन सभी महिलाओं का योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।
देवेंद्र फडणवीस को PM पद पर समर्थन देने का ऐलान उद्धव ठाकरे के बयान से सियासी पारा चढ़ा

नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में उस समय नई हलचल पैदा हो गई जब शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर बड़ा बयान दिया। ठाकरे ने कहा कि यदि फडणवीस भविष्य में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी करते हैं तो उनकी पार्टी उनका समर्थन करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह फडणवीस के विरोधी नहीं बल्कि हितैषी हैं और महाराष्ट्र से यदि कोई नेता देश का प्रधानमंत्री बनता है तो उसका समर्थन किया जाना चाहिए। शिरडी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि कुछ राजनीतिक ताकतें ऐसी रणनीति बना रही हैं जिससे देवेंद्र फडणवीस 2029 में प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शामिल न हो सकें। उन्होंने कहा कि अगर महाराष्ट्र का कोई नेता प्रधानमंत्री बनने की स्थिति में पहुंचता है तो उनकी पार्टी उसके साथ खड़ी होगी। हालांकि समर्थन की बात कहने के साथ ठाकरे ने भाजपा की आंतरिक राजनीति पर भी तंज कसा। उनका कहना था कि यदि फडणवीस सार्वजनिक रूप से प्रधानमंत्री पद की महत्वाकांक्षा जाहिर करते हैं तो यह उनके लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है। ठाकरे ने सवाल उठाया कि ऐसी घोषणा के बाद क्या वह अपनी ही पार्टी में उसी स्थिति में बने रह पाएंगे। शिरडी में आयोजित रैली के दौरान ठाकरे ने हाल में दल बदलकर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए सांसदों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के छह सांसदों के पाला बदलने के पीछे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका रही। ठाकरे ने यह भी कहा कि साईं बाबा के दर्शन के दौरान उन्होंने देवेंद्र फडणवीस की कुर्सी सुरक्षित रहने की प्रार्थना की। इससे पहले भी उद्धव ठाकरे ने ऑपरेशन टाइगर को लेकर बयान देते हुए दावा किया था कि इसका वास्तविक उद्देश्य ऑपरेशन देवेंद्र था। उनके अनुसार यह कथित रणनीति फडणवीस के राजनीतिक कद को सीमित रखने और उन्हें भविष्य में प्रधानमंत्री पद की दौड़ से दूर रखने के लिए बनाई गई थी। उधर देवेंद्र फडणवीस ने इन दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें महाराष्ट्र के 14 करोड़ लोगों और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व का आशीर्वाद प्राप्त है इसलिए कोई भी उनके राजनीतिक पंख नहीं काट सकता। उन्होंने हाल में उद्धव ठाकरे के साथ एक ही विमान में यात्रा करने को लेकर उठी अटकलों को भी महज संयोग बताया। महाराष्ट्र में हाल के दिनों में लगातार राजनीतिक उठापटक देखने को मिल रही है। शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में संभावित टूट तथा दल बदल की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे का यह बयान राज्य की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं को और तेज कर गया है।
मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा के जीवन पर बनी फिल्म 'रंग रसिया' के विवादों की कहानी, बोल्ड कंटेंट के कारण छह साल तक थमा रहा था रिलीज का रास्ता

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसी कई फिल्में रही हैं, जिन्हें अपनी अनूठी कहानी या बोल्ड कंटेंट के कारण भारी विवादों का सामना करना पड़ा है। इन्हीं में से एक बेहद चर्चित और विवादास्पद फिल्म ‘रंग रसिया’ थी, जिसे बनकर तैयार होने के बाद भी सिनेमाघरों तक पहुंचने में करीब छह साल का लंबा समय लग गया था। साल 2008 में पूरी तरह निर्मित हो चुकी इस फिल्म पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा उठाए गए कड़े एतराज के बाद एक तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। काफी कानूनी अड़चनों और विरोध प्रदर्शनों के दौर से गुजरने के बाद आखिरकार यह फिल्म नवंबर 2014 में दर्शकों के सामने आ सकी थी। केतन मेहता के निर्देशन में बनी यह पीरियड ड्रामा फिल्म देश के महान और विख्यात चित्रकार राजा रवि वर्मा के जीवन और उनकी अद्भुत कलाकृतियों से प्रेरित थी। फिल्म में अभिनेता रणदीप हुड्डा ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जिनके अभिनय की काफी सराहना भी हुई। इस फिल्म को शुरू में हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ कई अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में डब करके एक साथ बड़े पैमाने पर रिलीज करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन सेंसरशिप के विवादों और कानूनी पचड़ों में फंसने के कारण मेकर्स की यह महत्वाकांक्षी योजना समय पर धरातल पर नहीं उतर सकी। फिल्म के मुख्य विषय और उसकी कहानी पर गौर करें तो यह कला, जुनून और प्रेम की एक बेहद संवेदनशील दास्तान को दर्शाती है। राजा रवि वर्मा इतिहास के एक ऐसे दूरदर्शी कलाकार थे, जिन्होंने अपनी उत्कृष्ट पेंटिंग्स के माध्यम से देवी-देवताओं के स्वरूप को आम जनमानस और विशेष रूप से समाज के उस निचले तबके तक पहुंचाया, जिन्हें उस दौर में मंदिरों में प्रवेश करने या ईश्वर की छवि देखने तक की अनुमति नहीं थी। लेकिन विवाद की स्थिति तब पैदा हुई जब इस महान कलाकार ने अपनी कलात्मक स्वतंत्रता को समाज के तत्कालीन पारंपरिक नियमों और सीमाओं से ऊपर रखने का फैसला किया। पटकथा के अनुसार, मुख्य चित्रकार ने जिस खूबसूरत महिला को अपनी कला की प्रेरणा बनाकर उसे देवी के रूप में कैनवास पर उतारा था, बाद में उसी मॉडल की अन्य पेंटिंग्स में अत्यधिक बोल्डनेस और अश्लीलता दर्शाने के आरोप लगने लगे। उन बोल्ड पेंटिंग्स को जब व्यावसायिक रूप से बाजारों में लाया जाने लगा, तो समाज का एक बड़ा वर्ग उनके खिलाफ खड़ा हो गया। मामला तब और गंभीर हो गया जब कहानी में उस कलाकार और उनकी मॉडल के बीच के व्यक्तिगत संबंधों को भी बेहद संजीदगी और बोल्ड अंदाज में पर्दे पर दिखाया गया। इस दृश्य के बाद समाज में उनके प्रति तीखा आक्रोश फैल गया और उन पर देश की संस्कृति व मर्यादा को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगे, जिसके चलते उनकी प्रिंटिंग प्रेस तक को आग के हवाले कर दिया गया था। फिल्म के कुछ विशिष्ट दृश्यों और प्रचार पोस्टरों पर हिंदू देवी-देवताओं के आपत्तिजनक चित्रण को लेकर देश के कई धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। मेकर्स पर लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाते हुए देश की विभिन्न अदालतों में मुकदमे दर्ज कराए गए और सिनेमाघरों के बाहर हिंसक प्रदर्शन भी हुए। सेंसर बोर्ड का मानना था कि फिल्म के कई इंटीमेट और बोल्ड सीन्स आम दर्शकों के देखने के लिहाज से बहुत ज्यादा संवेदनशील हैं, इसलिए इन्हें बिना कांट-छांट के पास नहीं किया जा सकता। इस पूरे विवाद और फिल्म की लंबी देरी पर मुख्य अभिनेता रणदीप हुड्डा ने भी अपनी प्रतिक्रिया साझा की थी। उन्होंने एक बातचीत में स्वीकार किया था कि यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण और विवादास्पद प्रोजेक्ट था, जिसे सेंसरशिप की वजह से बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि, उनका मानना था कि कला से जुड़े ऐसे विषयों पर समाज में जितनी अधिक चर्चा और बहस होगी, वह फिल्म के संदर्भ को समझने में उतनी ही मददगार साबित होगी। कला प्रेमियों के लिए यह फिल्म आज भी सिनेमाई स्वतंत्रता और सामाजिक बंदिशों के बीच की एक बड़ी मिसाल मानी जाती है।
सलमान खान से अलग होने के बाद मुश्किल वक्त में भी ऐश्वर्या राय ने खुद को संभाला, फिल्म 'शब्द' की को-स्टार ने खोल दिए राज

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित जोड़ियों और उनके आपसी रिश्तों को लेकर समय-समय पर कई तरह की बातें सामने आती रही हैं। इसी क्रम में, फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ में साथ काम कर चुकीं सह-कलाकार सादिया सिद्दीकी ने सुपरस्टार सलमान खान और ऐश्वर्या राय के बहुचर्चित ब्रेकअप के बाद के दौर को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि निजी जीवन में चल रहे इतने बड़े उतार-चढ़ाव और मुश्किलों के बावजूद ऐश्वर्या राय ने जिस तरह खुद को संभाला और अपने काम के प्रति निष्ठा दिखाई, वह वाकई तारीफ के काबिल था। एक हालिया साक्षात्कार के दौरान जब सादिया सिद्दीकी से पूछा गया कि क्या साल 2005 में आई फिल्म ‘शब्द’ की शूटिंग के दौरान उन्हें ऐश्वर्या राय की व्यक्तिगत जिंदगी में चल रहे तनाव का कोई अंदाजा हुआ था? इस पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि उस फिल्म में ऐश्वर्या के साथ उनका कोई सीधा सीन नहीं था और वे उन्हें व्यक्तिगत रूप से बहुत करीब से नहीं जानती थीं, लेकिन सेट पर उनके व्यवहार को देखकर कोई भी उनकी आंतरिक उथल-पुथल का अंदाजा नहीं लगा सकता था। उन्होंने अपनी भावनाओं और निजी जीवन की दिक्कतों को बहुत ही गरिमापूर्ण तरीके से छिपाकर रखा था। सह-कलाकार ने ऐश्वर्या राय के पेशेवर रवैये की जमकर सराहना करते हुए कहा कि वे हमेशा समय पर पूरी तैयारी के साथ सेट पर पहुंचती थीं। शूटिंग शुरू होने से पहले वे अपनी सभी पंक्तियों (लाइन्स) को अच्छी तरह याद रखती थीं, अपनी स्क्रिप्ट का गहराई से अध्ययन करती थीं और पूरे प्रोफेशनलिज्म के साथ अपना काम पूरा करती थीं। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत समस्याओं की परछाई को कभी भी अपने काम पर या सेट के माहौल पर नहीं पड़ने दिया। सादिया ने आगे बताया कि ऐश्वर्या अपने किरदारों को जीवंत करने के लिए काफी समर्पित थीं। वे दृश्यों को बेहतर बनाने के लिए बार-बार स्क्रिप्ट पढ़ती थीं और निर्देशक व साथी कलाकारों के साथ उस पर चर्चा करती थीं। वे अपने किरदार की मानसिक स्थिति और उसकी गहराई को समझने का पूरा प्रयास करती थीं, जो उनके एक बेहतरीन कलाकार होने का प्रमाण है। गौरतलब है कि साल 2005 में रिलीज हुई सस्पेंस थ्रिलर फिल्म ‘शब्द’ में ऐश्वर्या राय के साथ संजय दत्त और जायद खान मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। यदि दोनों कलाकारों के वर्तमान पेशेवर जीवन की बात करें, तो सलमान खान आने वाले समय में फिल्म ‘मातृभूमि’ में दिखाई देंगे, जिसका निर्देशन अपूर्व लाखिया कर रहे हैं। इस फिल्म में उनके साथ चित्रांगदा सिंह मुख्य भूमिका में होंगी। इसके अतिरिक्त, वे दक्षिण भारतीय सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री नयनतारा के साथ भी एक अनाम फिल्म (एसवीसी63) पर काम कर रहे हैं, जिसका निर्देशन वामशी पैदिपल्ली कर रहे हैं और यह फिल्म साल 2027 की ईद के अवसर पर सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। दूसरी तरफ, ऐश्वर्या राय आखिरी बार साल 2023 में आई मणिरत्नम की ऐतिहासिक फिल्म ‘पोन्नियिन सेल्वन’ में नजर आई थीं, जिसमें बेहतरीन अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार से भी नवाजा गया था।
फिल्म 'कोलोनी' में कलाकारों या स्टंटमैन ने नहीं, बल्कि ग्रुप डांसर्स ने निभाए रोंगटे खड़े कर देने वाले खूंखार एक्शन सीन्स

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा में जब भी किसी फिल्म में खतरनाक और हैरतअंगेज एक्शन दृश्यों को फिल्माना होता है, तो आमतौर पर मुख्य अभिनेता खुद कमान संभालते हैं या फिर जोखिम भरे दृश्यों के लिए पेशेवर स्टंटमैन और बॉडी डबल की सेवाएं ली जाती हैं। लेकिन मनोरंजन जगत में हाल ही में एक ऐसा अनोखा प्रयोग देखने को मिला है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। साल 2026 में प्रदर्शित हुई एक नई फिल्म में बेहद पेचीदा और डरावने एक्शन सीक्वेंस को पूरा करने के लिए किसी स्टंटमैन को नहीं, बल्कि पेशेवर डांसर्स को अनुबंधित किया गया। इस अनूठे फैसले के पीछे की वजह फिल्म की बेहद अलग और जटिल पटकथा थी, जिसे सामान्य एक्शन कलाकारों के लिए कर पाना मुमकिन नहीं था। यह पूरा घटनाक्रम हाल ही में सिनेमाघरों में रिलीज हुई चर्चित जॉम्बी थ्रिलर फिल्म ‘कोलोनी’ से जुड़ा हुआ है। यह फिल्म अपनी अनूठी कहानी के कारण पारंपरिक जॉम्बी फिल्मों से काफी अलग है। फिल्म की पटकथा के अनुसार, इसमें दिखाया गया वायरस इंसानी शरीर में प्रवेश करने के बाद एक अलग तरह का म्यूटेशन पैदा करता है, जिसे ‘हाइपर कोलिनेटेड’ कहा जाता है। इसका सीधा मतलब यह है कि वायरस से संक्रमित होने वाले सभी लोग अलग-अलग व्यवहार करने के बजाय एक सामूहिक मस्तिष्क यानी ‘कलेक्टिव माइंड’ की तरह काम करते हैं। यदि किसी एक संक्रमित को कोई जानकारी मिलती है, तो वह संदेश तुरंत एक ही पल में बाकी सभी जॉम्बीज तक पहुंच जाता है। इसी सामूहिक अवधारणा को स्क्रीन पर जीवंत करने के लिए निर्देशक को बेहद बारीकी से कोरियोग्राफ किए गए दृश्यों की आवश्यकता थी। फिल्म में कई दृश्य ऐसे थे जहां दर्जनों जॉम्बीज को एक साथ मिलकर बेहद पेचीदा शारीरिक गतिविधियां और एक समान स्टंट करने थे। इन दृश्यों में जरा सी भी चूक पूरे तालमेल को बिगाड़ सकती थी। किसी सामान्य स्टंटमैन के लिए शरीर को इस हद तक लचीला बनाना और सामूहिक रूप से एक ही समय पर सटीक शारीरिक मुद्राएं प्रदर्शित करना काफी कठिन काम था। इस चुनौती से निपटने के लिए निर्माण टीम को ग्रुप डांसर्स की आवश्यकता महसूस हुई, जो न केवल चेहरे पर सटीक भाव ला सकें, बल्कि सामूहिक टाइमिंग और मूवमेंट में भी पूरी तरह निपुण हों। यही कारण था कि फिल्म के निर्माताओं ने इस काम के लिए करीब 20 अनुभवी डांसर्स की एक विशेष टीम को काम पर रखा। दर्शकों को थिएटर्स में जिन दृश्यों को देखकर यह लग रहा है कि वे अत्याधुनिक विजुअल इफेक्ट्स (VFX) या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए हैं, वे असल में इन डांसर्स की कड़ी मेहनत और शारीरिक दक्षता का नतीजा हैं। इन कलाकारों ने बिना किसी तकनीक के सहारा लिए स्क्रीन पर एक साथ सटीक मूव्स दिखाकर दृश्यों को बेहद डरावना और वास्तविक बना दिया है। इस अनोखे प्रयोग और बेहतरीन तकनीकी काम की बदौलत फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों की तरफ से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) पर भी इस फिल्म को 7 के करीब रेटिंग हासिल हुई है, जो इस जॉनर की फिल्मों के लिए काफी बेहतर मानी जाती है। जो सिनेमाप्रेमी इस फिल्म को घर बैठे देखने का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें अभी थोड़ा और धैर्य रखना होगा। चालू वर्ष में रिलीज होने के कारण यह फिल्म फिलहाल किसी भी ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं कराई गई है और इसका आनंद अभी केवल सिनेमाघरों में ही लिया जा सकता है।
उर्फी जावेद ने धर्म और नाम बदलने के दावों को बताया पूरी तरह फर्जी, अफवाह फैलाने वालों को सोशल मीडिया पर दिया करारा जवाब

नई दिल्ली। अपने बेबाक बयानों और अनूठे पहनावे के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाली अभिनेत्री उर्फी जावेद एक बार फिर सोशल मीडिया पर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला उनके पहनावे का नहीं, बल्कि उनके नाम और धर्म परिवर्तन से जुड़ी एक बड़ी अफवाह का है। इंटरनेट पर पिछले कुछ दिनों से यह दावा किया जा रहा था कि अभिनेत्री ने इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया है। इन खबरों के तेजी से वायरल होने के बाद अब खुद अभिनेत्री ने सामने आकर इन दावों के पीछे का पूरा सच बताया है और गलत जानकारी फैलाने वालों की जमकर क्लास लगाई है। दरअसल, सोशल मीडिया पर एक महिला द्वारा वीडियो साझा कर यह दावा किया गया था कि उर्फी जावेद ने अपना धर्म बदल लिया है और अब उनका नया नाम रीता भारद्वाज हो गया है। वीडियो में अभिनेत्री के पहनावे को लेकर भी कई तरह की नकारात्मक टिप्पणियां की गई थीं। इस तरह की भ्रामक खबरों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उर्फी जावेद ने साफ किया कि उन्होंने कभी भी अपना नाम या मजहब नहीं बदला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी धर्म या रूढ़िवादी विचारधारा में विश्वास नहीं रखती हैं, इसलिए उनके बारे में ऐसी बातें करना पूरी तरह निराधार है। अभिनेत्री ने बिना किसी हिचकिचाहट के अफवाह फैलाने वालों को नसीहत देते हुए कहा कि किसी के बारे में भी टिप्पणी करने से पहले पूरी जानकारी जुटा लेनी चाहिए। उन्होंने इंटरनेट का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति उनके पुराने टेलीविजन कार्यक्रमों की सूची और उनमें उनके नाम की जांच कर सकता है। अभिनेत्री ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनके काम या पहनावे की आलोचना की जा सकती है, लेकिन किसी के बारे में इस तरह की मनगढ़ंत और झूठी खबरें फैलाना पूरी तरह गलत और गैर-जिम्मेदाराना है। मिली जानकारी के अनुसार, इस विवाद के बढ़ने और अभिनेत्री द्वारा कड़ा रुख अपनाए जाने के बाद संबंधित महिला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वह वीडियो हटा दिया है और अभिनेत्री के अकाउंट को ब्लॉक कर दिया है। उर्फी जावेद ने इस बात की पुष्टि करते हुए कुछ संदेशों के स्क्रीनशॉट भी साझा किए और बताया कि झूठे दावों की पोल खुलने के बाद अब वास्तविकता सबके सामने आ चुकी है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत हमलों से प्रभावित नहीं होतीं, लेकिन तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर उर्फी जावेद के पेशेवर जीवन की बात करें तो वे मनोरंजन जगत का एक जाना-माना नाम हैं। वे पिछले साल एक बड़े रियलिटी शो का हिस्सा रही थीं, जहां उन्होंने अपनी बेहतरीन रणनीति और खेल के दम पर जीत हासिल की थी। इसके अलावा वे कई अन्य लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिकों जैसे ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ और ‘कसौटी जिंदगी की 2’ में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुकी हैं। अभिनय के साथ-साथ वे कुछ डिजिटल शोज़ को बतौर होस्ट भी संभाल चुकी हैं और सोशल मीडिया पर उनकी एक बड़ी फैन फॉलोइंग है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर डेब्यू करने जा रहे अभिनेता सनी देओल ने पुरानी यादें कीं ताजा, फिल्म 'दामिनी' के अपने आइकॉनिक वकील के किरदार पर खुलकर की बात

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेताओं में शुमार सनी देओल जल्द ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपना कदम रखने जा रहे हैं। अपनी आने वाली नई फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के विशेष अवसर पर अभिनेता ने अपने फिल्मी सफर और अतीत की कुछ बेहद खास यादों को साझा किया। इस दौरान उन्होंने साल 1993 में आई अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘दामिनी’ में निभाए गए वकील के यादगार किरदार पर खुलकर बात की। अभिनेता ने स्वीकार किया कि जब उन्होंने इस फिल्म में काम करने का फैसला लिया था, तब उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उनका यह छोटा सा रोल दर्शकों के दिलों में इस कदर बस जाएगा और इतिहास रच देगा। अपनी आगामी कोर्टरूम ड्रामा फिल्म में भी सनी देओल एक बार फिर से वकील की भूमिका में नजर आने वाले हैं, जिसका सीधा जुड़ाव दर्शकों को उनकी पुरानी फिल्म से महसूस हो रहा है। ट्रेलर लॉन्च के कार्यक्रम के दौरान जब उनसे इस समानता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि वह उस समय हर हाल में उस फिल्म का हिस्सा बनना चाहते थे। उन्होंने बताया कि मूल कहानी में शुरुआत में उनका कोई बड़ा रोल नहीं था, लेकिन निर्देशक और उनके निर्माता दोस्तों के साथ बातचीत के बाद उन्हें इस छोटे से कैरेक्टर के बारे में बताया गया। उन्होंने इसके लिए तुरंत हामी भर दी क्योंकि वे इस खूबसूरत कहानी से जुड़ना चाहते थे। अभिनेता ने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहा कि किसी भी कलाकार के लिए उसकी फिल्मों की यात्रा बेहद खूबसूरत होती है। उन्होंने सिनेमा प्रेमियों से फिल्मों का भरपूर आनंद लेने का आग्रह करते हुए कहा कि कोई भी यह पहले से तय नहीं कर सकता कि कौन सा किरदार दर्शकों को कितना प्रभावित करेगा। ‘दामिनी’ के उस छोटे से रोल ने देश के कोने-कोने में लोगों को अपना मुरीद बना लिया था। अभिनेता ने यह भी साझा किया कि उस फिल्म के बाद उन्हें काफी लंबे समय तक उस तरह का दमदार और प्रभावशाली कोर्टरूम ड्रामा किरदार निभाने का दोबारा मौका नहीं मिल सका था, जो अब जाकर उन्हें मिला है। इसी भव्य आयोजन के दौरान सनी देओल अपने परिवार और पिता को याद कर काफी भावुक भी नजर आए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में जब उनसे उनके पिता और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के बारे में सवाल किया गया कि उन्हें उनके नाम से कितना गर्व महसूस होता है, तो सनी देओल खुद पर काबू नहीं रख पाए। उन्होंने बेहद संजीदगी और भरे गले से कहा कि वे हमेशा केवल अपने पापा के बेटे रहेंगे और उनके लिए इससे बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं है। यह कहते हुए उनकी आंखें नम हो गईं, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रभावित किया। डिजिटल माध्यम पर रिलीज होने जा रही यह नई फिल्म एक बार फिर से सनी देओल को उसी पुरानी दहाड़ और कानूनी दांव-पेंच वाले अवतार में वापस लेकर आ रही है, जिसका दर्शक लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों की तरफ से काफी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं और इसमें उनके साथ कई अन्य दिग्गज कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इस नए प्रोजेक्ट से अभिनेता को काफी उम्मीदें हैं क्योंकि यह उनके करियर की नई पारी की शुरुआत माना जा रहा है।