उर्फी जावेद ने धर्म और नाम बदलने के दावों को बताया पूरी तरह फर्जी, अफवाह फैलाने वालों को सोशल मीडिया पर दिया करारा जवाब

नई दिल्ली। अपने बेबाक बयानों और अनूठे पहनावे के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाली अभिनेत्री उर्फी जावेद एक बार फिर सोशल मीडिया पर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला उनके पहनावे का नहीं, बल्कि उनके नाम और धर्म परिवर्तन से जुड़ी एक बड़ी अफवाह का है। इंटरनेट पर पिछले कुछ दिनों से यह दावा किया जा रहा था कि अभिनेत्री ने इस्लाम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपना लिया है। इन खबरों के तेजी से वायरल होने के बाद अब खुद अभिनेत्री ने सामने आकर इन दावों के पीछे का पूरा सच बताया है और गलत जानकारी फैलाने वालों की जमकर क्लास लगाई है। दरअसल, सोशल मीडिया पर एक महिला द्वारा वीडियो साझा कर यह दावा किया गया था कि उर्फी जावेद ने अपना धर्म बदल लिया है और अब उनका नया नाम रीता भारद्वाज हो गया है। वीडियो में अभिनेत्री के पहनावे को लेकर भी कई तरह की नकारात्मक टिप्पणियां की गई थीं। इस तरह की भ्रामक खबरों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उर्फी जावेद ने साफ किया कि उन्होंने कभी भी अपना नाम या मजहब नहीं बदला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे किसी भी धर्म या रूढ़िवादी विचारधारा में विश्वास नहीं रखती हैं, इसलिए उनके बारे में ऐसी बातें करना पूरी तरह निराधार है। अभिनेत्री ने बिना किसी हिचकिचाहट के अफवाह फैलाने वालों को नसीहत देते हुए कहा कि किसी के बारे में भी टिप्पणी करने से पहले पूरी जानकारी जुटा लेनी चाहिए। उन्होंने इंटरनेट का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति उनके पुराने टेलीविजन कार्यक्रमों की सूची और उनमें उनके नाम की जांच कर सकता है। अभिनेत्री ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनके काम या पहनावे की आलोचना की जा सकती है, लेकिन किसी के बारे में इस तरह की मनगढ़ंत और झूठी खबरें फैलाना पूरी तरह गलत और गैर-जिम्मेदाराना है। मिली जानकारी के अनुसार, इस विवाद के बढ़ने और अभिनेत्री द्वारा कड़ा रुख अपनाए जाने के बाद संबंधित महिला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वह वीडियो हटा दिया है और अभिनेत्री के अकाउंट को ब्लॉक कर दिया है। उर्फी जावेद ने इस बात की पुष्टि करते हुए कुछ संदेशों के स्क्रीनशॉट भी साझा किए और बताया कि झूठे दावों की पोल खुलने के बाद अब वास्तविकता सबके सामने आ चुकी है। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत हमलों से प्रभावित नहीं होतीं, लेकिन तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर उर्फी जावेद के पेशेवर जीवन की बात करें तो वे मनोरंजन जगत का एक जाना-माना नाम हैं। वे पिछले साल एक बड़े रियलिटी शो का हिस्सा रही थीं, जहां उन्होंने अपनी बेहतरीन रणनीति और खेल के दम पर जीत हासिल की थी। इसके अलावा वे कई अन्य लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिकों जैसे ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ और ‘कसौटी जिंदगी की 2’ में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभा चुकी हैं। अभिनय के साथ-साथ वे कुछ डिजिटल शोज़ को बतौर होस्ट भी संभाल चुकी हैं और सोशल मीडिया पर उनकी एक बड़ी फैन फॉलोइंग है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म पर डेब्यू करने जा रहे अभिनेता सनी देओल ने पुरानी यादें कीं ताजा, फिल्म 'दामिनी' के अपने आइकॉनिक वकील के किरदार पर खुलकर की बात

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेताओं में शुमार सनी देओल जल्द ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपना कदम रखने जा रहे हैं। अपनी आने वाली नई फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के विशेष अवसर पर अभिनेता ने अपने फिल्मी सफर और अतीत की कुछ बेहद खास यादों को साझा किया। इस दौरान उन्होंने साल 1993 में आई अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘दामिनी’ में निभाए गए वकील के यादगार किरदार पर खुलकर बात की। अभिनेता ने स्वीकार किया कि जब उन्होंने इस फिल्म में काम करने का फैसला लिया था, तब उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि उनका यह छोटा सा रोल दर्शकों के दिलों में इस कदर बस जाएगा और इतिहास रच देगा। अपनी आगामी कोर्टरूम ड्रामा फिल्म में भी सनी देओल एक बार फिर से वकील की भूमिका में नजर आने वाले हैं, जिसका सीधा जुड़ाव दर्शकों को उनकी पुरानी फिल्म से महसूस हो रहा है। ट्रेलर लॉन्च के कार्यक्रम के दौरान जब उनसे इस समानता के बारे में पूछा गया तो उन्होंने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि वह उस समय हर हाल में उस फिल्म का हिस्सा बनना चाहते थे। उन्होंने बताया कि मूल कहानी में शुरुआत में उनका कोई बड़ा रोल नहीं था, लेकिन निर्देशक और उनके निर्माता दोस्तों के साथ बातचीत के बाद उन्हें इस छोटे से कैरेक्टर के बारे में बताया गया। उन्होंने इसके लिए तुरंत हामी भर दी क्योंकि वे इस खूबसूरत कहानी से जुड़ना चाहते थे। अभिनेता ने बातचीत को आगे बढ़ाते हुए कहा कि किसी भी कलाकार के लिए उसकी फिल्मों की यात्रा बेहद खूबसूरत होती है। उन्होंने सिनेमा प्रेमियों से फिल्मों का भरपूर आनंद लेने का आग्रह करते हुए कहा कि कोई भी यह पहले से तय नहीं कर सकता कि कौन सा किरदार दर्शकों को कितना प्रभावित करेगा। ‘दामिनी’ के उस छोटे से रोल ने देश के कोने-कोने में लोगों को अपना मुरीद बना लिया था। अभिनेता ने यह भी साझा किया कि उस फिल्म के बाद उन्हें काफी लंबे समय तक उस तरह का दमदार और प्रभावशाली कोर्टरूम ड्रामा किरदार निभाने का दोबारा मौका नहीं मिल सका था, जो अब जाकर उन्हें मिला है। इसी भव्य आयोजन के दौरान सनी देओल अपने परिवार और पिता को याद कर काफी भावुक भी नजर आए। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में जब उनसे उनके पिता और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के बारे में सवाल किया गया कि उन्हें उनके नाम से कितना गर्व महसूस होता है, तो सनी देओल खुद पर काबू नहीं रख पाए। उन्होंने बेहद संजीदगी और भरे गले से कहा कि वे हमेशा केवल अपने पापा के बेटे रहेंगे और उनके लिए इससे बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं है। यह कहते हुए उनकी आंखें नम हो गईं, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को प्रभावित किया। डिजिटल माध्यम पर रिलीज होने जा रही यह नई फिल्म एक बार फिर से सनी देओल को उसी पुरानी दहाड़ और कानूनी दांव-पेंच वाले अवतार में वापस लेकर आ रही है, जिसका दर्शक लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों की तरफ से काफी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं और इसमें उनके साथ कई अन्य दिग्गज कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देंगे। इस नए प्रोजेक्ट से अभिनेता को काफी उम्मीदें हैं क्योंकि यह उनके करियर की नई पारी की शुरुआत माना जा रहा है।
FATF में पाकिस्तान पर भारत का बड़ा दांव ऑपरेशन सिंदूर के साक्ष्यों से ग्रे लिस्ट में भेजने की तैयारी

नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की कथित घुसपैठ और पैतृक जमीन पर कब्जे के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय एक स्थानीय संगठन की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच कराने का फैसला किया है। हालांकि भारतीय सेना ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें गलत और निराधार बताया है। ताकसिंग इलाके की नाह वेलफेयर सोसाइटी ने जिला प्रशासन को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि चीन पिछले कई वर्षों से भारतीय सीमा के भीतर अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। संगठन के अनुसार स्थानीय लोगों की पैतृक जमीन पर कथित रूप से सैन्य शिविर बनाए गए हैं और वहां सड़क तथा पुल जैसी आधारभूत संरचनाएं भी तैयार की गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन इलाकों में पहले वे शिकार करने जाते थे और जहां उनके मवेशी चरते थे अब वे क्षेत्र चीन के नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। संगठन का दावा है कि पिछले 10 से 15 वर्षों के दौरान सीमा पर चीन की गतिविधियों में तेजी आई है और स्थानीय समुदाय धीरे धीरे अपनी पारंपरिक जमीन खो रहा है। संगठन ने इसे गंभीर सुरक्षा और आजीविका का मुद्दा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इन आरोपों के बाद अरुणाचल प्रदेश के गृह मंत्री मामा नटुंग ने कहा कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि पहले जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। यह रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन जनप्रतिनिधियों पंचायतों और क्षेत्र के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की जाएगी। यदि जांच में अतिक्रमण के दावे सही पाए जाते हैं तो सरकार विशेष जांच समिति गठित कर आगे की कार्रवाई करेगी। दूसरी ओर भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश में हालिया चीनी घुसपैठ और सैन्य शिविर स्थापित किए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट तथ्यहीन हैं। सेना ने कहा कि ऐसे दावों का कोई प्रमाण नहीं है और इन्हें गलत तथा आधारहीन माना जाना चाहिए। गौरतलब है कि पिछले महीने भारत और चीन के बीच बीजिंग में सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय तंत्र की 35वीं बैठक हुई थी। दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा करते हुए शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष जताया था। ऐसे समय में अरुणाचल से सामने आए इन दावों ने सीमा सुरक्षा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। फिलहाल राज्य सरकार जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है जबकि भारतीय सेना का कहना है कि घुसपैठ के दावों की पुष्टि नहीं होती।
MP GUNA NEWS: गुना में 4 दिन के दौरे पर ज्योतिरादित्य सिंधिया, 350 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात; जानिए किसको मिलेगा लाभ

MP GUNA NEWS: गुना। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने 4 दिवसीय गुना दौरे के दौरान शहर को करीब 350 करोड़ रुपए की परियोजनाओं की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने बिजली, सड़क, रेलवे, सिंचाई, कौशल विकास, स्वास्थ्य, कृषि और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी कई योजनाओं का लोकार्पण, भूमिपूजन और शुभारंभ किया। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से की शुरुआत सिंधिया ने अपने दौरे की शुरुआत कांजा गांव स्थित कूनो नदी के उद्गम स्थल से की। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत 700 पौधे लगाए। इसी दौरान ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ की शुरुआत की और चिनेरा गांव में करीब 17.98 लाख रुपये की लागत से बने चेक डैम का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने में जनभागीदारी सबसे जरूरी है। VIRAL HELICOPTER WEDDING: सीधे आसमान से निचे उतरी दुल्हन, हेलीकॉप्टर से हुई दुल्हन की शानदार विदाई; VIRAL VIDEO 225 गांवों को मिलेगा बेहतर बिजली का लाभ दौरे के अंतिम दिन सिंधिया ने 278 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मुद्रा हनुमान सबस्टेशन की आधारशिला रखी। इस परियोजना से 225 गांवों के करीब 2.25 लाख लोगों को बेहतर बिजली आपूर्ति मिलेगी। इसके लिए लगभग 100 किलोमीटर नई विद्युत लाइन भी बिछाई जा रही है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती की समस्या काफी हद तक खत्म होगी। सोलर प्लांट और आधुनिक आईटीआई का उद्घाटन भी किया खुटियावाड़ में 20 करोड़ रुपये की लागत से बने 4.5 मेगावाट क्षमता वाले सोलर प्लांट का उद्घाटन किया गया। यह प्लांट हर साल करीब 75 लाख यूनिट स्वच्छ बिजली का उत्पादन करेगा। वहीं, तिलवारा (मार्की माहू) में 14.74 करोड़ रुपये की लागत से बने आधुनिक आईटीआई भवन और 2.18 करोड़ रुपये के धनवाड़ी विद्युत उपकेंद्र का भी लोकार्पण किया गया। इससे युवाओं को बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत बिजली व्यवस्था मिलेगी। MP को मिली दो सोलर प्रोजेक्ट की सौगात…, नीमच में मिलेगी दुनिया की सबसे सस्ती ₹2.14 में बिजली रेलवे, सड़क और मंडी परियोजनाओं को मिली रफ्तार सिंधिया ने गुना रेलवे स्टेशन से बीना-रुठियाई-बीना मेमू ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रेन के समय में बदलाव का प्रस्ताव भी रेल मंत्रालय को भेजा गया है। इसके अलावा करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली नई फल एवं सब्जी मंडी का भूमिपूजन किया गया। वहीं 11.64 करोड़ रुपये की लागत से तैयार तीन प्रमुख सड़कों का लोकार्पण भी किया गया। बूढ़े बालाजी क्षेत्र में 160 हितग्राहियों को भूमि के पट्टे भी वितरित किए गए। महिलाओं और स्वरोजगार को बढ़ावा दौरे के दौरान सिंधिया ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के लाभार्थियों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि जिन महिला समूहों का वार्षिक कारोबार 1 करोड़ रुपये से अधिक होगा और जिन्हें परिवहन की जरूरत होगी, उन्हें सांसद निधि से लोडिंग वाहन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए नए फार्मूलों पर काम कर रही केन्द्र सरकार…. स्वास्थ्य और सिंचाई परियोजनाओं की हुई समीक्षा दिशा बैठक में सिंधिया ने जिले की स्वास्थ्य, शिक्षा और सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि जिले में 150 बिस्तरों वाले नए अस्पताल, 50 बिस्तरों के मातृत्व वार्ड, क्रिटिकल केयर यूनिट, एमआरआई और अन्य आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर तेजी से काम चल रहा है। इसके अलावा कूनो नदी पुनर्जीवन, निवाड़ी सिंचाई परियोजना, पनेटी बांध, पालडोरिया परियोजना और सिंध नदी आधारित पेयजल योजना जैसी बड़ी परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। सिंधिया बोले- विकास का लाभ हर नागरिक तक पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में गुना तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। उनका कहना था कि विकास का उद्देश्य सिर्फ निर्माण कार्य नहीं, बल्कि हर नागरिक के जीवन को बेहतर बनाना है। MP Monsoon: एमपी में फिर एक्टिव हुआ मानसून, 40 से ज्यादा शहरों में बारिश का यलो अलर्ट! किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा? 225 गांवों के 2.25 लाख लोगों को बेहतर बिजली आपूर्ति। किसानों को सिंचाई और जल संरक्षण परियोजनाओं का लाभ। युवाओं को आधुनिक आईटीआई और रोजगार के नए अवसर। यात्रियों को बेहतर रेल सुविधा। महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक मजबूती। मरीजों को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और नए अस्पताल का लाभ।
क्या चीन बढ़ा रहा है सीमा पर कब्जा स्थानीय आरोपों के बाद जांच के आदेश सेना ने दावों को किया खारिज

नई दिल्ली। अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की कथित घुसपैठ और पैतृक जमीन पर कब्जे के आरोपों ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सीमावर्ती क्षेत्र में सक्रिय एक स्थानीय संगठन की शिकायत के बाद राज्य सरकार ने पूरे मामले की जांच कराने का फैसला किया है। हालांकि भारतीय सेना ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें गलत और निराधार बताया है। ताकसिंग इलाके की नाह वेलफेयर सोसाइटी ने जिला प्रशासन को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि चीन पिछले कई वर्षों से भारतीय सीमा के भीतर अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा है। संगठन के अनुसार स्थानीय लोगों की पैतृक जमीन पर कथित रूप से सैन्य शिविर बनाए गए हैं और वहां सड़क तथा पुल जैसी आधारभूत संरचनाएं भी तैयार की गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन इलाकों में पहले वे शिकार करने जाते थे और जहां उनके मवेशी चरते थे अब वे क्षेत्र चीन के नियंत्रण में बताए जा रहे हैं। संगठन का दावा है कि पिछले 10 से 15 वर्षों के दौरान सीमा पर चीन की गतिविधियों में तेजी आई है और स्थानीय समुदाय धीरे धीरे अपनी पारंपरिक जमीन खो रहा है। संगठन ने इसे गंभीर सुरक्षा और आजीविका का मुद्दा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। इन आरोपों के बाद अरुणाचल प्रदेश के गृह मंत्री मामा नटुंग ने कहा कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने बताया कि पहले जिला प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। यह रिपोर्ट स्थानीय प्रशासन जनप्रतिनिधियों पंचायतों और क्षेत्र के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर तैयार की जाएगी। यदि जांच में अतिक्रमण के दावे सही पाए जाते हैं तो सरकार विशेष जांच समिति गठित कर आगे की कार्रवाई करेगी। दूसरी ओर भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश में हालिया चीनी घुसपैठ और सैन्य शिविर स्थापित किए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट तथ्यहीन हैं। सेना ने कहा कि ऐसे दावों का कोई प्रमाण नहीं है और इन्हें गलत तथा आधारहीन माना जाना चाहिए। गौरतलब है कि पिछले महीने भारत और चीन के बीच बीजिंग में सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय तंत्र की 35वीं बैठक हुई थी। दोनों देशों ने सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा करते हुए शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में हुई प्रगति पर संतोष जताया था। ऐसे समय में अरुणाचल से सामने आए इन दावों ने सीमा सुरक्षा को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। फिलहाल राज्य सरकार जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है जबकि भारतीय सेना का कहना है कि घुसपैठ के दावों की पुष्टि नहीं होती।
अमेरिका में स्वास्थ्य बीमा नियमों पर सियासी संग्राम ट्रंप प्रशासन के खिलाफ 25 राज्यों का मुकदमा

नई दिल्ली। अमेरिका में सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना मेडिकेड के नए नियमों को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद गहरा गया है। 25 राज्यों और वॉशिंगटन डीसी ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। इन राज्यों का आरोप है कि नए कार्य संबंधी नियम जरूरतमंद लोगों के लिए स्वास्थ्य बीमा हासिल करना कठिन बना देंगे और कई पात्र नागरिक भी योजना के लाभ से वंचित हो सकते हैं। विवाद की शुरुआत अमेरिकी स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत काम करने वाली सेंटर्स फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज की ओर से जारी अंतरिम नियमों के बाद हुई। राज्यों का कहना है कि प्रशासन ने पिछले वर्ष बने कानून की सीमा से आगे बढ़कर नए प्रावधान लागू किए हैं और कानून की ऐसी व्याख्या की है जिससे लाभार्थियों पर अतिरिक्त शर्तें लागू हो रही हैं। नए नियमों के अनुसार एक जनवरी से 19 से 64 वर्ष की आयु के वे लोग जो मेडिकेड विस्तार योजना के तहत आते हैं उन्हें हर महीने कम से कम 80 घंटे काम करना होगा या सामुदायिक सेवा करनी होगी अथवा आधे समय तक पढ़ाई करना अनिवार्य होगा। हालांकि गंभीर रूप से बीमार लोगों नशा मुक्ति कार्यक्रम में शामिल व्यक्तियों और कुछ अन्य श्रेणियों को छूट देने का प्रावधान रखा गया है। सबसे बड़ा विवाद गंभीर स्वास्थ्य स्थिति की नई परिभाषा को लेकर है। पहले कानून में विकलांगता गंभीर बीमारी या नशे की लत से जूझ रहे लोगों को छूट देने की व्यवस्था थी लेकिन नए नियमों में कहा गया है कि बीमारी इतनी गंभीर होनी चाहिए जिससे व्यक्ति की काम करने पढ़ाई करने या सामुदायिक सेवा करने की क्षमता काफी हद तक प्रभावित हो। तभी उसे छूट मिल सकेगी। मुकदमा दायर करने वाले राज्यों का कहना है कि इस नई शर्त के कारण कैंसर मरीज दिव्यांग मानसिक रोगी और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज और लंबी कागजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। इससे कई ऐसे लोग भी स्वास्थ्य बीमा से वंचित हो सकते हैं जो वास्तव में इसके हकदार हैं। राज्यों ने यह भी आरोप लगाया है कि लंबे समय तक चर्चा के बाद अचानक नियम बदल दिए गए जिससे प्रशासनिक स्तर पर नई व्यवस्था लागू करना मुश्किल हो गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि गंभीर बीमारी का प्रमाण किस प्रक्रिया के तहत स्वीकार किया जाएगा। दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि लाभ वास्तव में पात्र और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे। हालांकि मुकदमा दायर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और सेंटर्स फॉर मेडिकेयर एंड मेडिकेड सर्विसेज की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने नए नियमों पर चिंता जताते हुए कहा कि कैंसर दिव्यांगता मानसिक बीमारी या नशे की लत से उबर रहे लोगों को इलाज पाने के लिए अनावश्यक कागजी कार्रवाई में नहीं उलझाया जाना चाहिए। उनके अनुसार इन बदलावों से हजारों जरूरतमंद लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।
युद्धविराम के बीच फिर दहला गाजा इस्राइली हवाई हमलों में दो मासूम समेत आठ की मौत कई घायल

नई दिल्ली। गाजा पट्टी में युद्धविराम लागू होने के बावजूद हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। सोमवार को इस्राइल ने दक्षिणी और मध्य गाजा के कई इलाकों में हवाई हमले किए जिनमें दो बच्चों समेत कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई जबकि 20 से अधिक लोग घायल हो गए। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों और राहत एजेंसियों के अनुसार घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज जारी है। सबसे बड़ा हमला दक्षिणी गाजा के खान यूनिस स्थित अल मवासी इलाके में हुआ जहां विस्थापित लोगों के तंबू को निशाना बनाया गया। इस हमले में 23 वर्षीय महिला और उसकी एक साल की बेटी की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक हमले से पहले इलाके में चेतावनी जारी की गई थी। इसी क्षेत्र के करारा कस्बे में हुए एक अन्य हवाई हमले में 31 वर्षीय व्यक्ति की जान चली गई जिसकी कुछ महीने पहले ही शादी हुई थी और उसकी पत्नी गर्भवती है। खान यूनिस के तटीय क्षेत्र में विस्थापित लोगों के तंबुओं पर हुए एक अन्य हमले में दो लोगों की मौत हो गई जबकि 13 अन्य घायल हो गए। घायलों को फलस्तीनी रेड क्रिसेंट द्वारा संचालित फील्ड अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनका उपचार चल रहा है। मध्य गाजा के दीर अल बलाह में ड्रोन हमले में तीन फलस्तीनियों की मौत हुई। मृतकों में आठ वर्षीय एक बच्चा उसका दादा और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं। अस्पताल अधिकारियों के अनुसार बच्चा अपनी घायल मां से मिलने आया था और हमले में उसकी मां भी घायल हो गई। इस्राइली सेना ने कहा कि यह हमला एक उग्रवादी को निशाना बनाकर किया गया था लेकिन उसने न तो उस व्यक्ति की पहचान बताई और न ही उसके मारे जाने की पुष्टि की। युद्धविराम लागू होने के बाद बड़े स्तर पर लड़ाई भले कम हुई हो लेकिन गाजा में लगभग रोजाना हवाई हमले जारी हैं। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक 1045 फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है जिनमें 360 से अधिक महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। वहीं इस्राइल का कहना है कि उसकी सैन्य कार्रवाई केवल उन उग्रवादियों के खिलाफ है जो उसके सैनिकों पर हमले की तैयारी कर रहे थे। इस्राइली सेना के अनुसार युद्धविराम के बाद उग्रवादी हमलों में उसके पांच सैनिक भी मारे गए हैं। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अक्टूबर 2023 में शुरू हुए युद्ध के बाद अब तक 73 हजार से अधिक फलस्तीनियों की मौत हो चुकी है। दूसरी ओर इस्राइल का कहना है कि सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले में करीब 1200 लोगों की जान गई थी और 251 लोगों को बंधक बनाया गया था। उधर वेस्ट बैंक में भी तनाव बना हुआ है। रामल्लाह के पास इस्राइली सेना की छापेमारी के दौरान 15 वर्षीय एक फलस्तीनी किशोर के सिर में गोली लगने से मौत हो गई। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय के अनुसार इस वर्ष वेस्ट बैंक में इस्राइली सैनिकों और बसने वालों की कार्रवाई में कम से कम 59 फलस्तीनियों की जान जा चुकी है।
वर्ल्ड कप में मिली मायूसी ओलंपिक से आई बड़ी खुशखबरी भारतीय महिला टीम ने LA28 के लिए किया क्वालिफाई

नई दिल्ली। आईसीसी महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम का अभियान उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा और टीम ग्रुप चरण से ही बाहर हो गई। हालांकि इस निराशा के बीच हरमनप्रीत कौर की अगुवाई वाली टीम के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत ने लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 के लिए क्वालिफाई कर लिया है और अब पहली बार ओलंपिक क्रिकेट में पदक जीतने का सपना साकार करने का मौका मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने क्रिकेट की 128 साल बाद ओलंपिक में वापसी के लिए क्वालिफिकेशन प्रक्रिया का एलान कर दिया है। इसी के साथ महिला क्रिकेट की पहली चार क्वालिफाई करने वाली टीमों के नाम भी तय हो गए हैं जिनमें भारत भी शामिल है। भारत को एशिया का एकमात्र सीधा कोटा मिला क्योंकि टी20 वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाली एशियाई टीमों में उसका प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। आईसीसी के नए नियमों के अनुसार अफ्रीका एशिया यूरोप और ओशिनिया से एक एक टीम को सीधे ओलंपिक का टिकट दिया गया है। इसी आधार पर भारत एशिया से ऑस्ट्रेलिया ओशिनिया से दक्षिण अफ्रीका अफ्रीका से और ग्रेट ब्रिटेन यूरोप से लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 के लिए क्वालिफाई करने वाली पहली चार टीमें बन गई हैं। छह टीमों वाले महिला क्रिकेट टूर्नामेंट में पांचवां स्थान मेजबान अमेरिका को मिल सकता है। इसके लिए अमेरिका को इस साल के अंत तक आईसीसी महिला टी20 रैंकिंग में शीर्ष 15 में जगह बनानी होगी। यदि ऐसा नहीं होता है तो यह स्थान आईसीसी रैंकिंग में सबसे ऊंची रैंकिंग वाली गैर क्वालिफाई टीम को मिलेगा। वहीं छठी और अंतिम टीम का फैसला 2027 में होने वाले आईसीसी ओलंपिक क्वालिफायर से होगा जिसमें आठ टीमें हिस्सा लेंगी। आईसीसी ने वेस्टइंडीज को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। चूंकि ओलंपिक में अलग अलग देशों का प्रतिनिधित्व होता है इसलिए यदि वेस्टइंडीज पात्र होता है तो कैरेबियाई देशों के बीच अलग क्वालिफाइंग प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। पुरुष क्रिकेट स्पर्धा के लिए भी छह टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें से चार महाद्वीपों की शीर्ष रैंकिंग वाली टीमें सीधे क्वालिफाई करेंगी जबकि मेजबान अमेरिका के लिए भी विशेष प्रावधान रखा गया है। यदि अमेरिका निर्धारित अवधि में शीर्ष 15 रैंकिंग में जगह नहीं बना पाता है तो उसका स्थान किसी अन्य पात्र टीम को दिया जाएगा। आईसीसी चेयरमैन जय शाह ने क्रिकेट की ओलंपिक में वापसी को ऐतिहासिक अवसर बताया है। उनके अनुसार यह फैसला दुनिया भर में क्रिकेट के विस्तार और नए देशों तक इस खेल को पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा। वहीं आईसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजोग गुप्ता का कहना है कि नया क्वालिफिकेशन मॉडल प्रतिस्पर्धा और वैश्विक प्रतिनिधित्व के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करता है। गौरतलब है कि क्रिकेट आखिरी बार 1900 के पेरिस ओलंपिक का हिस्सा था। अब 128 साल बाद लॉस एंजेलिस ओलंपिक 2028 में क्रिकेट की वापसी होगी। महिला और पुरुष दोनों वर्गों में छह छह टीमें हिस्सा लेंगी और पहली बार क्रिकेट में ओलंपिक पदक के लिए मुकाबला होगा।
जीत के साथ विदाई का सपना टूटा बेन स्टोक्स का आखिरी मैच हारा इंग्लैंड न्यूजीलैंड ने सीरीज पर किया कब्जा

नई दिल्ली। इंग्लैंड के महान ऑलराउंडर बेन स्टोक्स का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर यादगार जीत के बजाय निराशाजनक हार के साथ समाप्त हुआ। नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज मैदान पर खेले गए तीसरे और निर्णायक टेस्ट मैच में न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड को 160 रन से हराकर तीन मैचों की टेस्ट सीरीज 2-1 से अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ न्यूजीलैंड ने एक बार फिर इंग्लैंड की धरती पर शानदार प्रदर्शन करते हुए टेस्ट सीरीज जीतने का कारनामा दोहराया। मैच में इंग्लैंड के सामने 373 रन का कठिन लक्ष्य था। पांचवें दिन टीम ने 103 रन पर चार विकेट से आगे खेलना शुरू किया लेकिन न्यूजीलैंड के गेंदबाजों ने लगातार दबाव बनाए रखा। इंग्लिश बल्लेबाज बड़ी साझेदारी नहीं कर सके और पूरी टीम 212 रन पर सिमट गई। लंच के कुछ देर बाद ही मुकाबला समाप्त हो गया और न्यूजीलैंड ने 160 रन की बड़ी जीत दर्ज कर ली। यह मुकाबला बेन स्टोक्स के अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मैच था। चौथे दिन उन्होंने संन्यास की घोषणा की थी और इंग्लैंड के प्रशंसकों को उम्मीद थी कि टीम अपने कप्तान को जीत के साथ विदाई देगी। हालांकि ऐसा नहीं हो सका। दूसरी पारी में स्टोक्स ने ओपनिंग करते हुए 30 रन बनाए लेकिन वह टीम को जीत तक नहीं पहुंचा सके। 35 वर्षीय बेन स्टोक्स ने लगभग 15 वर्षों तक इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व किया और पिछले चार वर्षों से टेस्ट टीम की कप्तानी संभाली। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक पारियां खेलीं और कठिन मौकों पर टीम को जीत दिलाई लेकिन उनका आखिरी मुकाबला हार के साथ समाप्त हुआ। यह हार इंग्लैंड के लिए कई मायनों में चिंता बढ़ाने वाली है। साल 2012 के बाद पहली बार टीम अपने घरेलू मैदान पर तीन या उससे अधिक मैचों की टेस्ट सीरीज हार गई। इतना ही नहीं इंग्लैंड ने अपने पिछले नौ टेस्ट मैचों में सातवीं हार झेली है। लगातार खराब प्रदर्शन के बाद टीम प्रबंधन और कोचिंग स्टाफ पर भी सवाल उठने लगे हैं। दूसरी ओर टॉम लैथम की कप्तानी में न्यूजीलैंड ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया। बल्लेबाजों ने पहली पारी में मजबूत स्कोर खड़ा किया जबकि गेंदबाजों ने दूसरी पारी में इंग्लैंड के बल्लेबाजी क्रम को पूरी तरह बिखेर दिया। इस जीत के साथ न्यूजीलैंड ने सीरीज अपने नाम करते हुए बेन स्टोक्स की विदाई को फीका कर दिया।
VIRAL HELICOPTER WEDDING: सीधे आसमान से निचे उतरी दुल्हन, हेलीकॉप्टर से हुई दुल्हन की शानदार विदाई; VIRAL VIDEO

VIRAL HELICOPTER WEDDING: भिंड। लहार में इन दिनों एक शादी काफी चर्चा में हैं, लेकिन शादी समारोह के वजह से नहीं बल्कि दुल्हन की विदाई की वजह से। चूँकि यहां के स्थानीय निवासी डॉ. मनीष चंदेल अपनी दुल्हन को ग्वालियर से हेलीकॉप्टर में विदा कराकर सीधे लहार लेकर पहुंचे। बताया जा रहा है कि लहार के इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी दूल्हे ने अपनी दुल्हन को हेलीकॉप्टर से घर लाकर शादी की विदाई को यादगार बना दिया। MP को मिली दो सोलर प्रोजेक्ट की सौगात…, नीमच में मिलेगी दुनिया की सबसे सस्ती ₹2.14 में बिजली हेलीकाप्टर देखने लगा लोगों का जमावड़ा पूरा मामला भिंड के लहार का बताया जा रहा है। इस विदाई को देखने के लिए के लिए उमड़ पड़ी। इस दौरान लोग हेलीकॉप्टर के साथ दूल्हा और दुल्हन के साथ सेल्फी लेते दिखाई दिए। लोगों का कहना है कि हमने कभी भी अपने क्षेत्र में इस तरह की हेलीकॉप्टर वाली विदाई नहीं देखी। दूल्हे डॉ. मनीष चंदेल ने बताया कि उनका सपना था कि उनकी शादी की विदाई शाही अंदाज में हो। इसी वजह से उन्होंने हेलीकॉप्टर से दुल्हन को घर लाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने अच्छा-खासा खर्च भी किया, लेकिन उनका कहना है कि जिंदगी के इस खास दिन को हमेशा के लिए यादगार बनाना उनकी पहली दिली ख्वाहिश थी। 100 साल में तीसरा सबसे सूखा रहा जून…. अल नीनो के असर से देश में बारिश में 42% की कमी फूल-मालाओं और बैंड-बाजे से हुआ स्वागत हेलीकॉप्टर के उतरते ही परिजनों और रिश्तेदारों ने नवदंपति का फूल-मालाओं, बैंड-बाजे और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ जोरदार स्वागत किया। पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन गया। आसमान से दुल्हन के आने का यह अनोखा नजारा देख लोग बहुत ज्यादा खुश नजर आए। MP Monsoon: एमपी में फिर एक्टिव हुआ मानसून, 40 से ज्यादा शहरों में बारिश का यलो अलर्ट! पूरे इलाके में बनी चर्चा इस अनोखी शादी और हेलीकॉप्टर से हुई विदाई की चर्चा अब पूरे चंबल अंचल में हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहली बार अपने क्षेत्र में इस तरह की शाही विदाई देखी है। यही वजह है कि यह शादी अब सोशल मीडिया पर भी लोगों का ध्यान खींच रही है।