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कांग्रेस में बगावत की आहट! 300 किलोमीटर पैदल चलकर भोपाल पहुंचे दो कार्यकर्ता, PCC कार्यालय के बाहर खोला मोर्चा

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश कांग्रेस में जिला कांग्रेस कमेटियों के गठन के बाद संगठन के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। रतलाम के दो निष्कासित कांग्रेस कार्यकर्ता करीब 300 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर भोपाल पहुंचे और प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। दोनों कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने जिला संगठन में एक ही व्यक्ति को कई पद दिए जाने का विरोध किया था, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और उन्हें अपनी बात रखने की सजा मिली है। धरने पर बैठे संजय रावल ने बताया कि वह और उनके साथी गौरव पोरवाल आठ दिन तक लगातार पैदल चलकर भोपाल पहुंचे हैं। उनका कहना है कि जिस पदाधिकारी ने उन्हें निष्कासित किया, उसके पास ऐसा निर्णय लेने का अधिकार ही नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे, लेकिन उनसे बातचीत किए बिना ही चले गए। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे पार्टी के खिलाफ नहीं बल्कि संगठन में पारदर्शिता और कार्यकर्ताओं के सम्मान की मांग को लेकर धरना दे रहे हैं। गौरव पोरवाल ने बताया कि हाल ही में घोषित रतलाम जिला कांग्रेस कमेटी में कुछ नेताओं को एक साथ तीन-तीन और चार-चार पद दे दिए गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से जिला अध्यक्ष को इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि संगठन में एक व्यक्ति को कई जिम्मेदारियां देना उचित नहीं है और इससे समर्पित कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय होता है। उनका दावा है कि इस मुद्दे पर जब उन्होंने जिला अध्यक्ष से चर्चा की तो जवाब मिला कि संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं की कमी है, इसलिए एक ही व्यक्ति को कई पद देने पड़े। गौरव का कहना है कि उन्होंने केवल संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से अपनी बात रखी थी, लेकिन इसके बजाय उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके निष्कासन के पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया गया और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। दोनों कार्यकर्ताओं ने यह भी बताया कि चार जून को नामली में उनकी मुलाकात प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से हुई थी। उनके मुताबिक पटवारी ने उन्हें गले लगाया और साथ बैठाकर बातचीत भी की थी। उनका आरोप है कि इसके बाद जिला कांग्रेस नेतृत्व नाराज हो गया और कुछ ही समय बाद उन्हें निष्कासित कर दिया गया। गौरव पोरवाल ने दावा किया कि जिला कांग्रेस में रवि तिवारी को तीन पद दिए गए हैं, जबकि प्रकाश पाटीदार और सुनील पोरवाल को भी एक से अधिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उनका कहना है कि वे स्वयं किसी पद पर नहीं हैं और केवल एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में संगठन में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। धरने पर बैठे दोनों कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें किसी पद की इच्छा नहीं है। उनकी केवल यही मांग है कि पार्टी में ईमानदारी से काम करने वाले कार्यकर्ताओं का सम्मान हो और संगठन में नियुक्तियां निष्पक्ष तरीके से की जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रदेश नेतृत्व ने उनकी बात नहीं सुनी तो वे भोपाल से पैदल दिल्ली तक मार्च करेंगे और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के सामने अपनी बात रखेंगे। फिलहाल दोनों कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के बाहर धरना जारी रखे हुए हैं और प्रदेश नेतृत्व की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। 

व्हाट्सएप का ऐतिहासिक प्राइवेसी अपडेट: बिना मोबाइल नंबर साझा किए चैट करने के लिए कंपनी जल्द लाएगी 'यूजरनेम' फीचर

नई दिल्ली। दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप ने यूजर्स की प्राइवेसी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने की घोषणा की है। मेटा के मालिकाना हक वाली कंपनी जल्द ही अपने प्लेटफॉर्म पर ‘यूजरनेम’ फीचर पेश करने जा रही है। इस नए और आधुनिक सुरक्षा फीचर की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इसके लागू होने के बाद यूजर्स अपना पर्सनल मोबाइल नंबर साझा किए बिना भी दूसरे लोगों से आसानी से जुड़ सकेंगे और चैट कर सकेंगे। कंपनी के अनुसार, वैश्विक स्तर पर यह फीचर साल के अंत तक सभी के लिए रोल आउट कर दिया जाएगा, लेकिन इसकी रिजर्वेशन प्रक्रिया इसी सप्ताह से शुरू की जा रही है। कंपनी ने इस कदम को डिजिटल गोपनीयता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर बताया है। अक्सर स्कूल-कॉलेज के नए सहपाठियों, पड़ोसियों या किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में मिले अपरिचित लोगों के साथ अपना निजी मोबाइल नंबर साझा करना सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं माना जाता, क्योंकि फोन नंबर सीधा बैंक खातों और अन्य व्यक्तिगत पहचानों से जुड़ा होता है। ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही इस फीचर को तैयार किया गया है ताकि लोग बिना झिझक के केवल बातचीत करने के उद्देश्य से एक-दूसरे से जुड़ सकें। यह नया प्राइवेसी फीचर बड़े ग्रुप चैट्स और सार्वजनिक कम्युनिटी ग्रुप्स में भी सुरक्षा का एक मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार करेगा। उदाहरण के लिए, किसी खेल टीम, आवासीय समिति या किसी अन्य सार्वजनिक ग्रुप में शामिल होते समय अब यूजर्स को अपनी पहचान उजागर होने का डर नहीं रहेगा। वे ग्रुप के अन्य अनजान सदस्यों को अपना नंबर दिखाए बिना केवल यूजरनेम के जरिए उस ग्रुप का हिस्सा बने रह सकते हैं। व्हाट्सएप के वैश्विक प्रमुख ने भी सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि उन्होंने इस प्रक्रिया के तहत अपना यूजरनेम पहले ही रिजर्व कर लिया है और अब इसे आम जनता के लिए पेश किया जा रहा है। वैश्विक स्तर पर व्हाट्सएप के तीन अरब से भी अधिक उपयोगकर्ता हैं, जिसे देखते हुए एक जैसे नाम होने की संभावना काफी अधिक है। इसी समस्या के समाधान के लिए कंपनी ने नाम रिजर्व करने की प्रक्रिया को जल्दी शुरू किया है ताकि लोगों को उनकी पसंद का यूनिक नाम मिल सके। उपयोगकर्ताओं की सुविधा के लिए ऐप के भीतर एक ‘यूजरनेम जनरेटर’ टूल भी दिया जाएगा, जो उपलब्ध नामों के विभिन्न विकल्प सुझाएगा। सुरक्षा को और अधिक पुख्ता करने के लिए कंपनी ने साफ किया है कि व्हाट्सएप पर यूजरनेम की कोई सार्वजनिक डायरेक्टरी या खोजने योग्य सूची नहीं होगी, यानी किसी को आपसे संपर्क करने के लिए आपके सटीक यूजरनेम की जानकारी होना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही छोटे व्यवसायों, डिजिटल क्रिएटर्स और व्यावसायिक संगठनों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है, जिसके तहत वे अपने फेसबुक या इंस्टाग्राम के मौजूदा यूजरनेम को व्हाट्सएप के लिए भी क्लेम कर सकेंगे। अतिरिक्त सुरक्षा के तौर पर यूजर्स एक ‘यूजरनेम की’ (Username Key) भी सेट कर सकते हैं, जिसके बिना कोई भी अज्ञात व्यक्ति पहला संदेश नहीं भेज पाएगा। इस फीचर का लाभ उठाने के लिए यूजर्स को ऐप के नवीनतम संस्करण में सेटिंग्स के भीतर अकाउंट सेक्शन में जाकर अपना नाम सुरक्षित करना होगा। आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से सभी देशों के यूजर्स को ऐप के भीतर इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन मिल जाएगा।

मध्य प्रदेश में मानसून का असर तेज: 50 जिलों में बारिश का अलर्ट, बिजली गिरने से दो की मौत, बैतूल में नदी बनी काल

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मानसून का असर लगातार बढ़ता जा रहा है और मंगलवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ले ली। राजधानी भोपाल, सीहोर और पांढुर्णा समेत कई जिलों में सुबह से बादल छाए रहे और कई स्थानों पर बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने प्रदेश के 50 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी और बालाघाट में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान करीब चार इंच तक बारिश होने की संभावना जताई गई है। बारिश के बीच कई जिलों से हादसों की खबरें भी सामने आई हैं। खरगोन जिले में दो अलग-अलग घटनाओं में आकाशीय बिजली गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में मजदूर राधेश्याम और गृहिणी केनू शामिल हैं। केनू अपने पीछे तीन साल के बेटे को छोड़ गई हैं। उधर बैतूल जिले के चिचोली क्षेत्र में चंपा नदी उफान पर होने के कारण सोमवार रात बड़ा हादसा हो गया। सिप्लाई गांव के राजेश बिहारे और दद्दू धुर्वे बाइक सहित नदी के रपटे से बह गए थे। रातभर चले तलाश अभियान के बाद मंगलवार सुबह दोनों के शव रपटे से करीब एक किलोमीटर दूर झाड़ियों में मिले। पांढुर्णा जिले में सोमवार रात से लगातार रुक-रुककर बारिश हो रही है। मंगलवार सुबह मुंगणापार-मोहगांव मार्ग पर एक बड़ा पेड़ बिजली के तारों पर गिर गया जिससे सड़क पर आवागमन प्रभावित हुआ और आसपास के आठ गांवों की बिजली आपूर्ति ठप हो गई। प्रशासन ने पेड़ हटाने और बिजली व्यवस्था बहाल करने का काम शुरू कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, आगर मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, हरदा, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत कुल 50 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। कई इलाकों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। वहीं ग्वालियर, भिंड, मुरैना, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ और अलीराजपुर में हल्की बारिश की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में मानसून की एंट्री 24 जून को हुई थी और शुरुआती दौर में 15 जिलों तक इसकी आधिकारिक पहुंच दर्ज की गई थी। हालांकि इसके बाद मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई और वह एक ही क्षेत्र में ठहर गया। इसी कारण प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी और उमस का असर भी बना रहा। फिलहाल मानसून के तेजी से आगे बढ़ने के संकेत नहीं मिले हैं लेकिन अगले कुछ दिनों तक अधिकांश जिलों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। एक जून से अब तक प्रदेश में औसतन 124.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी जबकि अभी तक केवल 75.7 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब 39 प्रतिशत कम बारिश हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 68 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड की गई है जबकि पश्चिमी हिस्से में यह कमी 11 प्रतिशत है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान नदी-नालों से दूर रहने, आकाशीय बिजली के समय खुले स्थानों में नहीं जाने और प्रशासन द्वारा जारी सलाह का पालन करने की अपील की है।

फुटबॉल वर्ल्ड कप में बड़ा उलटफेर: जर्मनी का सफर राउंड ऑफ 32 में समाप्त, रोमांचक मुकाबले में जापान को हराकर अंतिम-16 में पहुंचा ब्राजील

बोस्टन: फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ 32 में फुटबॉल जगत का एक बहुत बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। खिताब की प्रबल दावेदार मानी जा रही चार बार की विश्व विजेता जर्मनी का सफर इस बार बेहद निराशाजनक तरीके से समाप्त हो गया। पराग्वे की टीम ने मैदान पर शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए जर्मनी को पेनल्टी शूटआउट में 4-3 से शिकस्त देकर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही पराग्वे ने प्री-क्वार्टर फाइनल यानी अंतिम-16 में अपनी जगह सुरक्षित कर ली है। दोनों टीमों के बीच निर्धारित समय और एक्स्ट्रा टाइम तक मुकाबला 1-1 की बराबरी पर छूटा था। मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। गेंद पर अधिकांश समय जर्मनी के खिलाड़ियों का नियंत्रण रहा, लेकिन पराग्वे के मजबूत डिफेंस और सटीक रणनीति के आगे जर्मनी की आक्रामक पंक्ति पूरी तरह बेअसर साबित हुई। मैच के पहले हाफ के अंतिम क्षणों में पराग्वे को एक कॉर्नर मिला, जिस पर जर्मनी के गोलकीपर ने गेंद को रोकने की कोशिश की, मगर पराग्वे ने दोबारा गेंद पर नियंत्रण पा लिया। मटियास गलार्सा के बेहतरीन क्रॉस पर जूलियो एनसिसो ने एक शानदार हेडर लगाकर अपनी टीम को 1-0 की महत्वपूर्ण बढ़त दिला दी। विश्व कप के नॉकआउट चरण में पराग्वे का यह पहला गोल भी दर्ज हुआ। एक गोल से पिछड़ने के बाद दूसरे हाफ में जर्मनी ने अपनी रणनीति बदली और अधिक आक्रामक होकर मैच में वापसी की। खेल के 54वें मिनट में फ्लोरियन विर्ट्ज के बाएं छोर से आए एक सटीक क्रॉस पर काई हैवर्ट्ज ने दमदार हेडर लगाकर स्कोर को 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया। इस बराबरी के बाद जर्मनी ने विजयी गोल की तलाश में पराग्वे के पाले पर लगातार कई तीखे हमले किए, लेकिन पराग्वे की रक्षात्मक पंक्ति दीवार की तरह डटी रही और उन्होंने जर्मनी को बढ़त बनाने का कोई दूसरा मौका नहीं दिया। तय समय तक नतीजा न निकलने पर मुकाबला अतिरिक्त समय में चला गया। जर्मनी के मुख्य कोच ने मैच को पेनल्टी शूटआउट में जाने से रोकने के लिए अपने सभी प्रमुख फॉरवर्ड खिलाड़ियों को मैदान पर उतार दिया। एक्स्ट्रा टाइम के दौरान जर्मनी के जोनाथन ताह ने गेंद को गोल पोस्ट में पहुंचा भी दिया था, लेकिन रेफरी ने उनके साथी खिलाड़ी द्वारा पराग्वे के गोलकीपर पर किए गए फाउल के कारण इस गोल को अमान्य घोषित कर दिया। 120 मिनट के खेल के बाद भी जब स्कोर 1-1 रहा, तो मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट के जरिए करने का निर्णय लिया गया। पेनल्टी शूटआउट का रोमांच बेहद चरम पर था। जर्मनी की तरफ से पहली किक लेने आए काई हैवर्ट्ज के शॉट को पराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने शानदार तरीके से रोककर अपनी टीम को शुरुआती बढ़त दिला दी। इसके बाद दोनों टीमों की तरफ से गोल करने और चूकने का सिलसिला जारी रहा। अंत में पराग्वे के जोसे कनाले ने बेहद शांत अंदाज में निर्णायक पेनल्टी को गोल में तब्दील कर अपनी टीम को 4-3 से ऐतिहासिक जीत दिला दी। शानदार गोलकीपिंग के लिए ऑरलैंडो गिल को मैच का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। अब पराग्वे की टीम चार जुलाई को फिलाडेल्फिया में फ्रांस और स्वीडन के बीच होने वाले मैच के विजेता से मुकाबला करेगी। इसी दौरान टूर्नामेंट के एक अन्य रोमांचक मुकाबले में ब्राजील ने जापान को 2-1 से हराकर अंतिम-16 में अपनी जगह पक्की की। इस मैच में जापान ने 29वें मिनट में काइशु सानो के बेहतरीन गोल की मदद से 1-0 की शुरुआती बढ़त बनाकर ब्राजील को संकट में डाल दिया था। इसके बाद ब्राजील ने वापसी करते हुए कासेमिरो के हेडर की मदद से स्कोर बराबर किया। मैच के आखिरी मिनटों तक दोनों टीमें बढ़त बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं, लेकिन इंजरी टाइम में गैब्रियल完整 मार्टिनेली ने ब्राजील के लिए विजयी गोल दागकर अपनी टीम को प्री-क्वार्टर फाइनल का टिकट दिला दिया।

नगर निकाय चुनाव से पहले बड़ा प्रशासनिक बदलाव बैतूल को नगर निगम बनाने की तैयारी तेज 26 पंचायतों का सर्वे शुरू

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में अगले वर्ष प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनाव से पहले बैतूल को नगर निगम का दर्जा दिए जाने की तैयारी तेज हो गई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने प्रस्तावित नगर निगम की सीमा तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कलेक्टर को उन ग्राम पंचायतों का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है जिन्हें नई नगर निगम सीमा में शामिल किया जाना प्रस्तावित है। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार अंतिम निर्णय लेगी। बैतूल को नगर निगम बनाने की चर्चा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और स्थानीय विधायक हेमंत खंडेलवाल का विधानसभा क्षेत्र है। प्रशासनिक स्तर पर इस दिशा में गतिविधियां तेज होने के बाद इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर भी चर्चाएं बढ़ गई हैं। नगर निगम गठन की प्रक्रिया के तहत जनपद पंचायत बैतूल की मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने प्रस्तावित ग्राम पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों का विस्तृत ब्यौरा तैयार कराया है। इसमें पंचायत सचिव रोजगार सहायक और अन्य कर्मचारियों की जानकारी एकत्र की गई है। यह रिपोर्ट संबंधित एसडीएम और राजस्व अधिकारियों के माध्यम से कलेक्टर को भेजी जा चुकी है ताकि प्रशासनिक मूल्यांकन पूरा किया जा सके। जानकारी के अनुसार इस विषय पर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बैठक भी आयोजित की गई है जिसमें प्रस्तावित क्षेत्रों को नगर निगम सीमा में शामिल करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसके बाद संबंधित गांवों की प्रशासनिक स्थिति आबादी और अन्य आवश्यक मानकों का परीक्षण शुरू किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार कुल 26 ग्राम पंचायतों को बैतूल नगर निगम की सीमा में शामिल किया जा सकता है। इनमें कढ़ाई दनोरा बड़ोरा आरूल बाजपुर भैंसदेही खेड़ली मरामझिरी टेमनी जामठी खेड़ला डहरगांव खेड़ी सांवलीगढ़ महदगांव भड़ूस कुम्हारटेक भोगीतेड़ा रोढ़ा सूरगांव भरकावाड़ी खंडारा मलकापुर मिलानपुर बयावाड़ी ढोड़वाड़ा और खड़ला शामिल हैं। इन क्षेत्रों के शामिल होने से नगर निगम की आबादी और क्षेत्रफल दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। यदि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो नगर निगम गठन से पहले कैबिनेट की स्वीकृति आवश्यक होगी। इसके बाद संबंधित ग्राम पंचायतों को पंचायत क्षेत्र से हटाकर नगर निगम सीमा में शामिल किया जाएगा। साथ ही इन क्षेत्रों के मतदाताओं के नाम पंचायत मतदाता सूची से हटाकर नगर निगम की मतदाता सूची में जोड़े जाएंगे। पूरी प्रक्रिया समय पर पूरी करना आवश्यक होगा ताकि अगले नगरीय निकाय चुनाव नई व्यवस्था के तहत कराए जा सकें। वर्तमान में मध्य प्रदेश में 16 नगर निगम हैं। इनमें भोपाल इंदौर ग्वालियर जबलपुर उज्जैन सागर रीवा सतना सिंगरौली छिंदवाड़ा रतलाम मुरैना कटनी देवास खंडवा और बुरहानपुर शामिल हैं। इसके अलावा मुख्यमंत्री पहले ही विदिशा को नगर निगम बनाने की घोषणा कर चुके हैं हालांकि वहां प्रक्रिया अभी अंतिम चरण तक नहीं पहुंची है। अब बैतूल को लेकर भी प्रशासनिक प्रक्रिया तेज होने से आने वाले महीनों में महत्वपूर्ण फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।

शहरी रोजगार रिपोर्ट: देश के 46 बड़े शहरों में सात साल में तेजी से घटी बेरोजगारी दर, महिलाओं की स्थिति में भी बड़ा सुधार

नई दिल्ली। देश के बड़े शहरों में रोजगार के मोर्चे पर एक राहत भरी और सकारात्मक खबर सामने आई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक, 10 लाख से अधिक आबादी वाले देश के 46 प्रमुख शहरों में पिछले सात वर्षों के दौरान बेरोजगारी दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, साल 2018 से 2025 के बीच इन शहरों की कुल बेरोजगारी दर 7.9 फीसदी से घटकर अब महज 4.9 फीसदी के स्तर पर आ गई है। यह बदलाव दर्शाते हैं कि देश के बड़े महानगरीय और शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज हुई हैं, जिससे नए अवसर सृजित हो रहे हैं। इस रिपोर्ट में महिला और पुरुष दोनों ही श्रेणियों में बेरोजगारी दर में निरंतर आ रही कमी का विशेष उल्लेख किया गया है। पुरुषों की बात करें तो उनकी बेरोजगारी दर जो साल 2017-18 में 7.5 प्रतिशत थी, वह लगातार गिरते हुए वर्ष 2025 में 4.5 प्रतिशत के स्तर पर आ गई है। इसी तरह महिलाओं के मामले में भी काफी बड़ा सुधार देखने को मिला है। साल 2018-19 में महिला बेरोजगारी दर बढ़कर 10.4 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, लेकिन इसके बाद इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई और साल 2025 में यह घटकर 6.1 प्रतिशत रह गई। यह आंकड़े कामकाजी महिलाओं के लिए शहरी क्षेत्रों में बढ़ते अवसरों को रेखांकित करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन 46 शहरों में रोजगार की सामान्य स्थिति 4.9 प्रतिशत रही, जबकि वर्तमान साप्ताहिक स्थिति के आधार पर यह 6.8 प्रतिशत दर्ज की गई। यह आंकड़े लगभग पूरे शहरी भारत के औसत के समान ही हैं, जहां क्रमशः यह दर 4.8 प्रतिशत और 6.8 प्रतिशत रही है। एक खास बात यह भी सामने आई है कि इन बड़े शहरों में काम करने वाले पुरुष और महिला श्रमिक पूरे देश के अन्य शहरी इलाकों के मुकाबले औसतन अधिक घंटे काम कर रहे हैं। इसके अलावा, 15 से 29 वर्ष के ऐसे युवाओं का अनुपात जो किसी भी प्रकार के रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण का हिस्सा नहीं हैं, इन शहरों में 22.2 फीसदी रहा, जो पूरे शहरी भारत के औसत (25.0 फीसदी) से काफी बेहतर है। मंत्रालय की रिपोर्ट में श्रम बल से बाहर रहने के मुख्य कारणों का भी विश्लेषण किया गया है। पुरुषों के मामले में 53.5 प्रतिशत ने श्रम बल से बाहर रहने की मुख्य वजह अपनी पढ़ाई जारी रखना बताया। वहीं, महिलाओं के मामले में 68.7 प्रतिशत ने बच्चों की देखभाल और घरेलू जिम्मेदारियों को रोजगार न करने या उससे बाहर रहने का प्राथमिक कारण बताया। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर बढ़ते देश में शहर आर्थिक गतिविधियों, नवाचार और रोजगार सृजन के मुख्य केंद्र बन चुके हैं, इसलिए इनकी आर्थिक संरचना को समझना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, इन 46 बड़े शहरों में रहने वाले लोगों की औसत आय देश के अन्य शहरी हिस्सों की तुलना में काफी बेहतर पाई गई है। आंकड़ों के मुताबिक, स्वरोजगार से जुड़े लोगों की पिछले 30 दिनों की औसत आय 30,858 रुपये रही, जबकि नियमित वेतन पाने वाले कर्मचारियों की औसत आय 28,808 रुपये दर्ज की गई। दिहाड़ी या आकस्मिक श्रमिकों की बात करें तो वे रोजाना औसतन 624 रुपये कमा रहे हैं। इसके विपरीत, पूरे शहरी भारत में स्वरोजगार की औसत आय 23,013 रुपये, नियमित वेतनभोगियों की 26,258 रुपये और दिहाड़ी मजदूरों की कमाई 550 रुपये प्रतिदिन रही।

IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और रिटायर्ड IPS पिता पर भोपाल में FIR कुक से मारपीट और गाली गलौज के आरोप जांच शुरू

नई दिल्ली। भोपाल में आईपीएल क्रिकेटर शशांक सिंह और उनके पिता रिटायर्ड स्पेशल डीजी शैलेष सिंह के खिलाफ कुक से कथित मारपीट और गाली गलौज के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। रातीबड़ थाना पुलिस ने शिकायत और प्रारंभिक जांच के बाद भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस सभी पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। शिकायतकर्ता रीवा निवासी विपेंद्र सिंह तोमर ने आरोप लगाया है कि उन्हें परिचित के माध्यम से भोपाल बुलाया गया था। उनके अनुसार उन्हें शैलेष सिंह के घर खाना बनाने की नौकरी का प्रस्ताव दिया गया था और भविष्य में सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा भी दिया गया था। तय वेतन के साथ रहने और खाने की व्यवस्था का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने काम शुरू किया। विपेंद्र का आरोप है कि काम शुरू करने के कुछ ही समय बाद उनसे लगातार काम कराया जाने लगा। उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने काम छोड़ने की इच्छा जताई तो उनके साथ गाली गलौज की गई। शिकायत के अनुसार उनका मोबाइल भी छीन लिया गया और उन्हें जबरन काम करने के लिए कहा गया। पीड़ित का कहना है कि वह डरकर कमरे में चला गया था लेकिन बाद में उनके साथ कथित रूप से मारपीट की गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस दौरान शैलेष सिंह उनके बेटे शशांक सिंह और एक कर्मचारी ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने शरीर और चेहरे पर चोट आने का भी दावा किया है। घटना के बाद विपेंद्र ने रोते हुए एक वीडियो भी जारी किया जिसमें उन्होंने अपने साथ हुई कथित घटना का जिक्र किया। हालांकि वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। रातीबड़ थाना पुलिस के अनुसार शिकायत मिलने के बाद फरियादी और गवाहों के बयान दर्ज किए गए। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर शैलेष सिंह शशांक सिंह और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। इस मामले में एक और पहलू भी सामने आया है। इससे पहले विदिशा निवासी एक युवक ने भी रिटायर्ड अधिकारी शैलेष सिंह के खिलाफ नौकरी के दौरान कथित रूप से बंधक बनाने मारपीट करने और धमकी देने जैसी शिकायत दर्ज कराई थी। उस शिकायत में भी मोबाइल और सामान वापस नहीं करने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि उन आरोपों की कानूनी स्थिति और अंतिम निष्कर्ष अलग जांच प्रक्रिया का विषय हैं। क्रिकेट की बात करें तो शशांक सिंह ने आईपीएल में पंजाब किंग्स सहित कई टीमों का प्रतिनिधित्व किया है। उन्हें 2024 सीजन में शानदार प्रदर्शन के बाद पहचान मिली थी जबकि 2026 का सीजन उनके लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने इस सीजन में सीमित रन बनाए और टीम के लिए अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। फिलहाल इस पूरे मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच जारी है। आरोपों की सत्यता का अंतिम फैसला पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

साइबर सुरक्षा एजेंसी 'सार्ट-इन' का गंभीर अलर्ट: रिश्तेदारों के अकाउंट से आ रहे हैं खतरनाक वायरस, बैंकिंग डाटा चोरी होने का बड़ा खतरा

नई दिल्ली। कंप्यूटर और लैपटॉप पर काम के दौरान अपनी सहूलियत के लिए व्हाट्सएप वेब का उपयोग करने वाले करोड़ों यूजर्स के लिए एक बेहद जरूरी और चिंताजनक खबर सामने आई है। भारत सरकार की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी सार्ट-इन (CERT-In) ने डेस्कटॉप पर व्हाट्सएप का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए एक गंभीर सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। एजेंसी के मुताबिक, देश में इन दिनों साइबर अपराधियों द्वारा एक नए और बेहद शातिर तरीके से लोगों के पर्सनल कंप्यूटर को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे यूजर्स की महत्वपूर्ण बैंकिंग और निजी जानकारियां चोरी होने का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इस नए डिजिटल स्कैम की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसमें वायरस सीधे किसी अनजान नंबर से नहीं आता, बल्कि यूजर के किसी बहुत करीबी दोस्त, रिश्तेदार या सहकर्मी के अकाउंट से भेजा जाता है। जालसाज सबसे पहले किसी अन्य माध्यम का उपयोग कर आपके किसी परिचित का व्हाट्सएप अकाउंट पूरी तरह से हैक कर लेते हैं। इसके बाद, उस भरोसेमंद प्रोफाइल का गलत फायदा उठाते हुए उसकी चैट लिस्ट में शामिल तमाम लोगों को एक संदिग्ध फाइल भेज दी जाती है, जिस पर अमूमन लोग बिना किसी शक के भरोसा कर लेते हैं। यह खतरनाक डिजिटल वायरस अक्सर ‘.vbs’ (वीबीस्क्रिप्ट) फॉर्मेट में तैयार किया जाता है, जिसे हैकर्स किसी साधारण डॉक्यूमेंट या सामान्य फोटो का नाम देकर भेजते हैं। जैसे ही कोई यूजर अपने कंप्यूटर या लैपटॉप पर इस फाइल को डाउनलोड करके ओपन करता है, वैसे ही यह सिस्टम के बैकग्राउंड में एक छिपे हुए सॉफ्टवेयर (मालवेयर) की तरह तुरंत एक्टिव हो जाता है। इसके सक्रिय होते ही सिस्टम की सुरक्षा प्रणाली ध्वस्त हो जाती है और पूरे लैपटॉप या कंप्यूटर का रिमोट कंट्रोल परोक्ष रूप से हैकर्स के हाथों में चला जाता है। सिस्टम के भीतर इस खतरनाक कोडिंग फाइल के एक्टिव होते ही कंप्यूटर में सुरक्षित रखे गए सभी पर्सनल पासवर्ड, सोशल मीडिया हैंडल्स, ईमेल लॉग-इन और विशेष रूप से इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ी संवेदनशील वित्तीय जानकारियां चुपचाप हैकर्स के मुख्य सर्वर पर स्थानांतरित होने लगती हैं। इस गोपनीय डाटा का उपयोग करके जालसाज पल भर में यूजर्स के बैंक खातों में जमा गाढ़ी कमाई साफ कर सकते हैं। इसके साथ ही, कंप्यूटर की गैलरी में मौजूद निजी तस्वीरों और दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किए जाने का जोखिम भी लगातार बना रहता है। सरकारी एजेंसी ने इस प्रकार के गंभीर डिजिटल फ्रॉड और वायरस के हमलों से सुरक्षित रहने के लिए कुछ बेहद जरूरी सुरक्षा उपाय भी सुझाए हैं। देश के सभी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को सलाह दी गई है कि व्हाट्सएप पर किसी भी जानने वाले के नंबर से आई ऐसी किसी भी फाइल को भूलकर भी डाउनलोड न करें, जिसके अंत में एक्सटेंशन के रूप में ‘.vbs’ लिखा हुआ दिखाई दे। इसके अलावा, यदि कोई भी फाइल अचानक भेजी गई हो या संदिग्ध लगे, तो तुरंत उस संबंधित व्यक्ति को सामान्य वॉयस कॉल करके फाइल की वास्तविकता की जांच कर लेनी चाहिए। अपने सिस्टम की सुरक्षा बढ़ाने के लिए हमेशा एक प्रामाणिक एंटीवायरस का उपयोग करना चाहिए और किसी भी अप्रत्याशित वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

E20 पेट्रोल पर बढ़ीं वाहन मालिकों की चिंताएं लंबे समय तक खड़ी गाड़ियों में क्यों आ रही हैं फ्यूल सिस्टम की दिक्कतें जानिए

नई दिल्ली। देश में इथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार लगातार कदम उठा रही है। हाल ही में केंद्र सरकार ने 100 प्रतिशत इथेनॉल को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही देशभर में E20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उपयोग भी तेजी से बढ़ रहा है। इस पहल का उद्देश्य पेट्रोल पर निर्भरता कम करना विदेशी मुद्रा की बचत करना और प्रदूषण घटाना है। हालांकि इसके बढ़ते इस्तेमाल के बीच कुछ वाहन मालिकों और मैकेनिकों ने नई चिंताएं भी सामने रखी हैं। भोपाल के कई ऑटो मैकेनिकों का कहना है कि E20 पेट्रोल का उपयोग करने वाली कुछ गाड़ियों में पहले की तुलना में फ्यूल पंप जल्दी खराब होने की शिकायतें बढ़ी हैं। उनका दावा है कि जिन वाहनों में पहले फ्यूल पंप वर्षों तक बिना किसी समस्या के चलता था अब कुछ मामलों में उसे कम समय में बदलना पड़ रहा है। हालांकि यह अनुभव सभी वाहनों पर समान रूप से लागू नहीं होता और यह वाहन के मॉडल रखरखाव तथा निर्माता की तकनीक पर भी निर्भर करता है। मैकेनिकों के अनुसार जिन गाड़ियों का लंबे समय तक उपयोग नहीं होता उनमें फ्यूल टैंक में मौजूद इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नमी को अधिक आकर्षित कर सकता है। इससे कुछ परिस्थितियों में फ्यूल सिस्टम में जमाव या अन्य तकनीकी समस्याएं उत्पन्न होने की संभावना बढ़ जाती है। यदि वाहन कई सप्ताह या महीनों तक बिना चलाए खड़ा रहे तो फ्यूल लाइन और पंप पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नई पीढ़ी की E20 अनुकूल गाड़ियों को इसी प्रकार के ईंधन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इन वाहनों में ऐसे रबर सील फ्यूल पाइप और अन्य पुर्जे लगाए जाते हैं जो इथेनॉल मिश्रित ईंधन के साथ बेहतर तरीके से काम कर सकें। लेकिन पुराने मॉडल के कुछ वाहनों में यदि निर्माता ने E20 की मंजूरी नहीं दी है तो वाहन मालिकों को कंपनी के दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए। वाहन विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि गाड़ी लंबे समय तक खड़ी रखनी हो तो समय समय पर इंजन स्टार्ट करना और कुछ दूरी तक चलाना बेहतर रहता है। इससे फ्यूल सिस्टम सक्रिय रहता है और ईंधन के लंबे समय तक एक ही स्थान पर रहने से होने वाली संभावित समस्याओं का जोखिम कम हो सकता है। साथ ही समय पर सर्विस कराना फ्यूल फिल्टर की जांच कराना और केवल भरोसेमंद पेट्रोल पंप से ईंधन भरवाना भी जरूरी है। सरकार का मानना है कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन से कार्बन उत्सर्जन कम होगा किसानों को गन्ने और अन्य फसलों का बेहतर बाजार मिलेगा तथा कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी। दूसरी ओर वाहन उद्योग भी लगातार ऐसे इंजन विकसित कर रहा है जो E20 और भविष्य में अधिक इथेनॉल मिश्रित ईंधन के साथ बेहतर प्रदर्शन कर सकें। ऐसे में यदि आपका वाहन नया है और निर्माता ने E20 ईंधन की अनुमति दी है तो सामान्य रूप से चिंता की जरूरत नहीं है। वहीं यदि वाहन पुराना है तो कंपनी की गाइडलाइन के अनुसार ही ईंधन का चयन करना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। नियमित रखरखाव और समय पर जांच किसी भी ईंधन के साथ वाहन की बेहतर कार्यक्षमता बनाए रखने की सबसे महत्वपूर्ण शर्त है।

ट्विशा शर्मा केस में जांच तेज CBI ने कोर्ट से मांगी आरोपियों की हिरासत बढ़ाने की अनुमति डिजिटल सबूतों की जांच जारी

नई दिल्ली। बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को एक बार फिर अदालत में सुनवाई हुई जहां केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने की मांग की। मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट आरती आदित्य बांदिल की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा के पिता और भाई भी अदालत पहुंचे और पूरी कार्यवाही के दौरान मौजूद रहे। इस संवेदनशील मामले पर अब सभी की नजर अदालत के अंतिम आदेश पर टिकी हुई है। सीबीआई ने अदालत से आरोपी पति समर्थ सिंह और सास रिटायर्ड जज गिरिबाला की न्यायिक हिरासत 14 जुलाई तक बढ़ाने का अनुरोध किया। एजेंसी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच जारी है। ऐसे में आरोपियों का न्यायिक अभिरक्षा में रहना जांच की निष्पक्षता और प्रगति के लिए आवश्यक है। जांच एजेंसी के अनुसार मामले में अभी कई गवाहों के बयान दर्ज किए जाने बाकी हैं। इसके साथ ही जब्त किए गए मोबाइल फोन लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच भी जारी है। सीबीआई का कहना है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से जांच को नई दिशा मिल सकती है इसलिए सभी तकनीकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि समर्थ सिंह के लैपटॉप तक पहुंच जांच का अहम हिस्सा है लेकिन उसका पासवर्ड अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। एजेंसी के अनुसार लैपटॉप में मौजूद संभावित डिजिटल जानकारी और अन्य दस्तावेजों की जांच के लिए पासवर्ड जरूरी है। इसके बिना कई महत्वपूर्ण जानकारियों तक पहुंचना संभव नहीं हो पा रहा है जिससे जांच प्रभावित हो सकती है। सीबीआई ने अदालत को यह भी संकेत दिया कि यदि जांच के दौरान जरूरत महसूस हुई तो दोनों आरोपियों की दोबारा पुलिस रिमांड भी मांगी जा सकती है। एजेंसी का कहना है कि जांच लगातार आगे बढ़ रही है और सामने आने वाले नए तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले अदालत ने 16 जून को दोनों आरोपियों को 30 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। अब एजेंसी ने हिरासत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है ताकि लंबित जांच पूरी की जा सके। अदालत के आदेश के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों आरोपी आगे भी न्यायिक हिरासत में रहेंगे या नहीं। गौरतलब है कि ट्विशा शर्मा की 11 मई को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्यों गवाहों के बयान और अन्य तकनीकी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी बीच हाल ही में आरोपी रिटायर्ड जज गिरिबाला के घर चोरी की घटना भी सामने आई थी जिसमें कुछ दस्तावेज और जेवरात चोरी करने का प्रयास किया गया था हालांकि पुलिस की सक्रियता के चलते आरोपी सामान छोड़कर फरार हो गए थे। अब पूरे मामले में अदालत के फैसले का इंतजार है क्योंकि उसी के आधार पर जांच की अगली दिशा तय होगी।