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सूर्य-अरुण की युति आज बनाएगी दशांक योग…. इन राशि के जातकों की खुलेगी किस्मत !

नई दिल्ली। आज शाम करीब 6 बजकर 51 मिनट से ब्रह्मांड में एक बेहद महत्वपूर्ण और दुर्लभ ज्योतिषीय घटना होने जा रही है. इस समय सूर्य देव और अरुण ग्रह (Uranus) एक-दूसरे से 36 डिग्री की विशेष कोणीय स्थिति में आ रहे हैं. वैदिक ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस विशिष्ट कोणीय दूरी के कारण दशांक योग (Dashank Ypg 2026) का निर्माण हो रहा है. सूर्य को आत्मा, मान-सम्मान और सफलता का कारक माना जाता है, जबकि अरुण ग्रह को अचानक बदलाव, नवीनता और क्रांतिकारी विचारों का स्वामी माना जाता है. इन दोनों का यह संयोग कुछ विशेष राशि के जातकों के लिए भाग्य के द्वार खोलने वाला साबित होगा. आइए जानते हैं कि इस दशांक योग से किन राशियों को सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है। 1. मेष राशि (Aries)– मेष राशि के जातकों के लिए यह योग किसी वरदान से कम नहीं है. सूर्य और अरुण की यह स्थिति आपके कार्यक्षेत्र में बड़ा उछाल लाएगी.– फायदा: यदि आपका कोई सरकारी काम लंबे समय से अटका हुआ था, तो वह अब पूरा हो जाएगा.– आर्थिक पक्ष: अचानक धन लाभ के योग बनेंगे. व्यापार में नए और लाभकारी सौदे हाथ लग सकते हैं.– सलाह: इस दौरान अपने सीनियर्स के साथ संबंध मधुर बनाए रखें, पदोन्नति (Promotion) के रास्ते खुलेंगे. 2. सिंह राशि (Leo)– चूंकि सूर्य सिंह राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस दशांक योग का सीधा और सकारात्मक प्रभाव आप पर पड़ेगा. आपके आत्मविश्वास में जबरदस्त वृद्धि देखने को मिलेगी.– फायदा: समाज और कार्यस्थल पर आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी. आपकी नेतृत्व क्षमता (Leadership Quality) की लोग सराहना करेंगे.– आर्थिक पक्ष: निवेश के लिए यह समय बेहद उत्तम है. पुराना फंसा हुआ पैसा वापस मिल सकता है.– सलाह: अहंकार से बचें और अपनी ऊर्जा का सही दिशा में इस्तेमाल करें. 3. तुला राशि (Libra)– तुला राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक रूप से बेहद सुदृढ़ होने वाला है. अरुण ग्रह का प्रभाव आपके जीवन में कुछ सकारात्मक और अचानक बदलाव लेकर आएगा.– फायदा: नौकरीपेशा लोगों को नए अवसरों की प्राप्ति होगी. अगर आप नौकरी बदलने की सोच रहे हैं, तो अच्छे ऑफर मिल सकते हैं.– आर्थिक पक्ष: आय के नए स्रोत बनेंगे, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी.– सलाह: कोई भी बड़ा वित्तीय फैसला जल्दबाजी में न लें, सोच-समझकर आगे बढ़ें.4. धनु राशि (Sagittarius)– धनु राशि के जातकों के लिए भाग्य का पूरा साथ मिलने का समय आ गया है. इस योग के प्रभाव से आपके सोचे हुए काम समय पर पूरे होंगे.– फायदा: उच्च शिक्षा या विदेश यात्रा की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए यह समय अनुकूल परिणाम लेकर आएगा.– आर्थिक पक्ष: पैतृक संपत्ति से लाभ होने की संभावना है. व्यापारिक यात्राएं सुखद और मुनाफेदार रहेंगी.– सलाह: अपने गुरु और बड़ों का आशीर्वाद लेकर ही किसी नए काम की शुरुआत करें.

आईएमडीबी 2026 की सूची में शीर्ष पर रणबीर कपूर की 'रामायण', 'अल्फा' और 'किंग' जैसी महाफिल्मों को पछाड़ा

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा प्रेमियों के बीच आगामी फिल्मों को लेकर उत्सुकता चरम पर पहुंच गई है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण आईएमडीबी द्वारा जारी की गई साल 2026 की सबसे प्रतीक्षित फिल्मों की हालिया सूची में देखने को मिला है। इस प्रतिष्ठित सूची में अभिनेता रणबीर कपूर की मुख्य भूमिका वाली पौराणिक फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ ने अन्य सभी बड़ी और बहुप्रतीक्षित फिल्मों को पछाड़ते हुए शीर्ष स्थान हासिल किया है। वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में बॉक्स ऑफिस पर कई फिल्मों ने शानदार सफलता दर्ज की है, जिसके बाद अब साल के उत्तरार्ध में रिलीज होने वाली बड़ी फिल्मों पर दर्शकों की निगाहें टिकी हुई हैं। आईएमडीबी की यह रैंकिंग दर्शाती है कि आगामी महीनों में पौराणिक कथाओं, स्पाई थ्रिलर, एक्शन और ड्रामा शैलियों के बीच कड़ा मुकाबला होने वाला है, जिसमें फिलहाल ‘रामायण’ सबसे आगे चल रही है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस महत्वाकांक्षी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों और समीक्षकों के बीच जबरदस्त चर्चा है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम के मुख्य किरदार को जीवंत कर रहे हैं, जबकि दक्षिण भारतीय सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता की भूमिका में नजर आएंगी। इस फिल्म की स्टार कास्ट को लेकर भी खासा उत्साह है, जिसमें कन्नड़ सुपरस्टार यश रावण के रूप में, सनी देओल हनुमान की भूमिका में और टीवी व फिल्म अभिनेता रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में दिखाई देंगे। फिल्म का निर्माण नमित मल्होत्रा कर रहे हैं, जबकि यश भी इसके सह-निर्माता के रूप में जुड़े हुए हैं। यह फिल्म इस साल दिवाली के बड़े त्योहार पर सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसके चलते इसे इस साल की सबसे बड़ी रिलीज माना जा रहा है। आईएमडीबी की इस सूची में दूसरे पायदान पर यशराज फिल्म्स के बैनर तले बन रही स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘अल्फा’ ने अपनी जगह बनाई है। शिव रवैल द्वारा निर्देशित इस फिल्म में आलिया भट्ट और शरवरी वाघ मुख्य भूमिकाओं में एक्शन करती नजर आएंगी। इनके साथ ही फिल्म में बॉबी देओल और अनिल कपूर भी महत्वपूर्ण किरदारों में शामिल हैं, जो फिल्म के आकर्षण को और बढ़ाते हैं। इस बहुप्रतीक्षित सूची में तीसरा स्थान कन्नड़ अभिनेता यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ को मिला है, जिसका निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है। इस एक्शन थ्रिलर फिल्म में यश के साथ नयनतारा, कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और तारा सुतारिया जैसे बड़े नाम शामिल हैं। सूची के चौथे स्थान पर बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान की बहुचर्चित फिल्म ‘किंग’ का कब्जा है, जिसका निर्देशन सिद्धार्थ आनंद कर रहे हैं। इस फिल्म में शाहरुख खान के साथ दीपिका पादुकोण और सुहाना खान भी प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगी, जिससे यह फिल्म साल के अंत में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है। इसके बाद पांचवें स्थान पर टी-सीरीज और देवगन फिल्म्स के संयुक्त निर्माण में बनी कॉमेडी फ्रैंचाइजी की अगली कड़ी ‘धमाल 4’ शामिल है, जिसमें अजय देवगन, अरशद वारसी, रितेश देशमुख और जावेद जाफरी जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं। सूची में ओटीटी प्लेटफॉर्म की बेहद लोकप्रिय सीरीज के सिनेमाई रूपांतरण ‘मिर्जापुर द मूवी’ को भी महत्वपूर्ण स्थान मिला है, जिसमें पंकज त्रिपाठी, अली फजल, जितेंद्र कुमार और दिव्येंदु शर्मा जैसे कलाकार बड़े पर्दे पर धमाल मचाने आ रहे हैं। इसके साथ ही श्रद्धा कपूर की मुख्य भूमिका वाली फिल्म ‘इथा’ भी इस सूची का हिस्सा बनी है, जिसका निर्देशन लक्ष्मण उत्तेकर कर रहे हैं। आगामी महीनों में होने वाली इन बड़ी रिलीज से स्पष्ट है कि भारतीय सिनेमा उद्योग के लिए साल 2026 का दूसरा भाग व्यावसायिक और रचनात्मक दोनों ही दृष्टिकोणों से बेहद महत्वपूर्ण और प्रतिस्पर्धात्मक होने वाला है।

देश में आज से VB-G RAM G योजना लागू…. ग्रामीण मजदूरों को अब 125 दिन का रोजगार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था (Rural Employment System) में बड़ा बदलाव करते हुए ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ (वीबी-जी राम जी एक्ट -VB-G RAM G Act ) को 1 जुलाई से लागू कर दिया है। इसके साथ ही सरकार ने नई ग्रामीण रोजगार योजना (New Rural Employment Scheme) के तहत मजदूरी दरों में भी बढ़ोतरी की है। अब देश में औसत दैनिक मजदूरी 298.8 रुपये से बढ़कर 327.4 रुपये हो गई है। यानी औसतन 28.6 रुपये प्रतिदिन की बढ़ोतरी हुई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मंगलवार को नई मजदूरी दरों की अधिसूचना जारी की। नई दरें 1 जुलाई से देश के सभी 34 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और मजदूरी क्षेत्रों में लागू हो गई हैं। अब 100 नहीं, 125 दिन के रोजगार की गारंटीसरकार के अनुसार, नए कानून के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब 125 दिनों के मजदूरी वाले रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। पहले मनरेगा (MGNREGA) के तहत 100 दिनों के रोजगार की गारंटी थी। न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये तयसरकार ने नई योजना में 300 रुपये प्रतिदिन की अंतरिम न्यूनतम मजदूरी तय की है। इसका मतलब है कि इस योजना के तहत किसी भी राज्य में मजदूरी 300 रुपये से कम नहीं होगी। सरकार का कहना है कि पूरे देश में मजदूरी दरों में औसतन 10 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई है। इन राज्यों में सबसे ज्यादा बढ़ी मजदूरीमंत्रालय के अनुसार, 21 राज्यों और प्रशासनिक इकाइयों में मजदूरी को बढ़ाकर सीधे 300 रुपये प्रतिदिन कर दिया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में मजदूरी दरों में 15 से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। सबसे अधिक बढ़ोतरी अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में हुई है, जहां मजदूरी करीब 24.5 प्रतिशत बढ़ाई गई है। जिन राज्यों में पहले से मजदूरी अधिक थी, वहां भी बढ़ोतरी की गई है। नई अधिसूचना के अनुसार-हरियाणा- 409 रुपये प्रतिदिनगोवा- 406 रुपये प्रतिदिनकेरल- 401 रुपये प्रतिदिनसिक्किम (ऊंचाई वाले ग्राम पंचायत क्षेत्र) – 450 रुपये प्रतिदिन 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजटसरकार ने नई व्यवस्था को सुचारु रूप से लागू करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये की अंतरिम राशि आवंटित की है। इसका उद्देश्य समय पर मजदूरी भुगतान और विकास कार्यों को बिना रुकावट जारी रखना है। शिवराज सिंह चौहान ने बताया ऐतिहासिक कदमकेंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि कोई भी पात्र ग्रामीण मजदूर एक भी दिन काम से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि यह कानून विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत करेगा और गांवों की समृद्धि तथा आजीविका सुरक्षा को नई मजबूती देगा। पुराने जॉब कार्ड फिलहाल रहेंगे मान्यसरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी सत्यापित पुराने जॉब कार्ड तब तक मान्य रहेंगे, जब तक नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते। नई योजना में भी ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका बनी रहेगी। योजना के तहत जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि, ग्रामीण आधारभूत ढांचा और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कार्यों पर विशेष जोर दिया जाएगा। विपक्ष ने उठाए सवालनई व्यवस्था को लेकर विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे रोजगार की मांग आधारित व्यवस्था, राज्यों और पंचायतों की भूमिका तथा योजना के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराने जैसे मुद्दों पर असर पड़ सकता है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि नया कानून ग्रामीण आजीविका को और मजबूत करेगा, बेहतर परिसंपत्तियों का निर्माण करेगा और रोजगार सृजन को अधिक प्रभावी बनाएगा। सरकार 2 जुलाई को मुक्कावरिपल्ली गांव में इस कानून का राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक शुभारंभ करेगी। इस कार्यक्रम में ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड वितरित किए जाएंगे और योजना से संबंधित जागरूकता सामग्री भी जारी की जाएगी।

US: ट्रंप की तेल कंपनियों को सख्त चेतावनी, बोले- 'पेट्रोल के दाम कम करो वरना…'

वाशिंगटन। अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में कच्चे तेल की कीमतों (Crude Oil Prices) में आई भारी गिरावट के बाद अब अमेरिकी राजनीति में उबाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने देश के सभी पेट्रोल रिटेलर्स (पेट्रोल पंप मालिकों) और बड़ी तेल कंपनियों को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए ईंधन की कीमतों में तुरुंत कटौती करने का आदेश दिया है। ट्रंप ने तेल कंपनियों पर आम जनता की जेब काटने और ‘प्राइस गॉजिंग’ यानी नाजायज मुनाफाखोरी का सीधा आरोप लगाया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के जरिए अमेरिकी तेल कंपनियों और पेट्रोल पंप एसोसिएशनों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि हाल ही में वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों (जैसे अमेरिका-इरान वार्ता) और बाजार के रुख के कारण कच्चे तेल की कीमत गिरकर लगभग $68 प्रति बैरल पर आ गई। ट्रंप का तर्क है कि जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो ये कंपनियां कुछ ही घंटों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा देती हैं। लेकिन अब जब कच्चा तेल $68 पर आ चुका है, तो आम अमेरिकी नागरिकों को इसका फायदा क्यों नहीं दिया जा रहा है? राष्ट्रपति ने केवल चेतावनी ही नहीं दी, बल्कि अमेरिकी न्याय विभाग को इस पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगर रिटेलर्स ने तुरंत कीमतें कम नहीं कीं, तो उन्हें इसके गंभीर कानूनी नतीजे भुगतने होंगे। बड़ी कंपनियों पर आपदा में अवसर खोजने का आरोपFortune और Al Jazeera की रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में मिडिल-ईस्ट संकट और युद्ध के हालातों के चलते अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें आसमान छू रही थीं, जिससे आम जनता पर भारी आर्थिक दबाव था। इस संकट के दौरान वैश्विक तेल कंपनियों (जैसे एक्सॉनमोबिल, शेल और शेवरॉन) ने अरबों डॉलर का ‘अप्रत्याशित मुनाफा’ कमाया है। एक तरफ जहां आम अमेरिकी नागरिक $4.50 प्रति गैलन तक की दर से महंगा ईंधन खरीदने को मजबूर थे, वहीं शीर्ष तेल कंपनियों ने युद्ध के शुरुआती महीनों में ही करीब 23 अरब डॉलर का अतिरिक्त मुनाफा कूट लिया। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि बड़ी तेल कंपनियां इस मुनाफे का इस्तेमाल आम उपभोक्ताओं को राहत देने या भविष्य के संकट से निपटने के लिए निवेश करने के बजाय, अपने शेयर होल्डर्स को डिविडेंड बांटने और खुद की जेबें भरने में कर रही हैं। तेल कंपनियों की सफाई: “दाम हमारे हाथ में नहीं”इस तीखे हमले के बाद तेल उद्योग और रिफाइनिंग संगठनों ने भी अपनी सफाई पेश की है। उद्योग से जुड़े समूहों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें सीधे तौर पर केवल कच्चे तेल पर निर्भर नहीं करतीं। इसके पीछे कई अन्य वैश्विक कारक होते हैं, जैसे: रिफाइनिंग क्षमता की कमी: कच्चे तेल को पेट्रोल में बदलने वाली रिफाइनरियों की अपनी सीमाएं और लागतें होती हैं। स्थानीय टैक्स का बोझ: कैलिफोर्निया जैसे अमेरिकी राज्यों में भारी स्थानीय गैस टैक्स लागू हैं, जिसकी वजह से भी पेट्रोल की कीमतें नीचे नहीं आ पा रही हैं, जिसकी खुद ट्रंप ने भी आलोचना की है। अमेरिका में इस समय महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतें सबसे बड़ा घरेलू मुद्दा बनी हुई हैं। महंगे डीजल के कारण खाने-पीने की चीजों की ढुलाई महंगी हो गई है, जिससे सीधे तौर पर ग्रोसरी और अन्य जरूरी सामान के दाम बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन ने अब अपनी पुरानी ‘घरेलू तेल उत्पादन समर्थक’ छवि को थोड़ा बदलते हुए तेल कंपनियों के खिलाफ सीधे टकराव का रास्ता चुना है ताकि आम उपभोक्ताओं को तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।

PM मोदी ने ईरान से राष्ट्रपति को किया टेलीफोन…. बोले- होर्मुज स्ट्रेट में हो आवाजाही की स्वतंत्रता

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने ईरान (Iran) के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन (President Dr. Masoud Pezeshkian) से मंगलवार को टेलीफोन पर बातचीत की, जिसमें राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने पश्चिम एशिया (West Asia) की हालिया घटनाओं और आगे की दिशा की जानकारी प्रधानमंत्री को दी। पीएम मोदी ने समझौते का स्वागत करते हुए भारत की स्थिर नीति को दोहराया कि क्षेत्र के सभी मुद्दों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही होना चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के निरंतर प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया। इस दौरान समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता और वाणिज्य की सुरक्षा को बनाए रखने के महत्व को भी सामने रखा गया। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, ‘पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं के बारे में ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बात हुई। बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि लगातार कोशिशों से इस इलाके में स्थायी शांति आएगी। भारत और दुनिया के लिए होर्मुज स्ट्रेट में आवाजाही की आजादी के महत्व को फिर से दोहराया।’ इससे पहले, पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री मोदी को ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। खामेनेई का अंतिम संस्कार समारोह अगले सप्ताह आयोजित होने वाला है। खबरों के मुताबिक, सरकार भारत के प्रतिनिधि के तौर पर बिहार के राज्यपाल अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा को इन समारोह में भेजने की योजना बना रही है। अंतिम संस्कार की रस्में 5 से 9 जुलाई तक होंगी। भारत-ईरान के रिश्ते में उतार-चढ़ावभारत और ईरान के मौजूदा संबंध काफी जटिल और रणनीतिक महत्व वाले रहे हैं। दोनों देशों के बीच सभ्यतागत और ऐतिहासिक गहराई है, लेकिन हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों, क्षेत्रीय तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 2024 में भारत ने चाबहार पोर्ट के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को 10 वर्षों के लिए ऑपरेट करने का समझौता किया, जिसमें 120 मिलियन डॉलर का निवेश शामिल था। 2026 में अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारत ने पोर्ट पर अपनी गतिविधियां कम कीं और वादा किया राशि का भुगतान पूरा कर लिया। होर्मुज स्ट्रेट संकट के दौरान भारत ने ईरान के साथ कूटनीतिक संपर्क बढ़ाया, जहाजों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री स्तर पर बातचीत हुई। ईरान के सुप्रीम लीडर की मृत्यु पर भारत ने शोक व्यक्त किया और BRICS जैसे मंचों पर सहयोग जारी रखा। ऊर्जा आयात लगभग बंद हो गया है, लेकिन कनेक्टिविटी, अफगानिस्तान और मध्य एशिया पहुंच के लिए चाबहार अभी भी अहम बना हुआ है। दोनों देशों के बीच संबंध रणनीतिक स्वायत्तता और व्यावहारिक जरूरतों पर आधारित हैं। भारत ईरान को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी मानता है, जबकि ईरान भारत को बड़े बाजार और निवेशक के रूप में देखता है।

भारत दौरे पर आएंगी जापान की PM सनाए ताकाइली…. निवेश को लेकर हो सकते हैं नए ऐलान

नई दिल्ली। जापान (Japan) की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची (Prime Minister Sanae Takaichi) की भारत यात्रा (India Tour) को कई मायनों में महत्वूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान व्यापार, बुनियादी ढांचे में दीर्घकालिक निवेश, पूर्वोत्तर विकास, कृत्रिम बुद्धिमता के क्षेत्र में नए ऐलान किए जा सकते हैं। साथ ही हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता से निपटने के लिए क्वाड को फिर से सक्रिय करने पर भी बात हो सकती है। भारत में भारी निवेशकूटनीतिक जानकारों के अनुसार भारत के विकास में जापान की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है, क्योंकि उसने बुनियादी ढांचे, ऑटोमाइबल तथा भारी उद्योग क्षेत्र में दीर्घकालिक निवेश किया है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में भी वह निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उभरते क्षेत्रों में अनुसंधान, संयुक्त उपक्रम और निवेश की जापान से अपार संभावनाएं हैं। जापान का मौजूदा निवेश 44 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है तथा वह सिंगापुर, मॉरीशस, अमेरिका और नीदरलैंड के बाद पांचवा बड़ा निवेशक है। इस यात्रा के दौरान भी जापान की प्रधानमंत्री बड़े निवेश का ऐलान कर सकती हैं। भारत और जापान उभरती प्रौद्यौगिकी में 100 से अधिक परियोजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान एआई में सहयोग को लेकर घोषणा हो सकती है। भारत की एक्ट ईस्ट नीति के लिए भी जापान बेहद महत्वपूर्ण है। भारत और जापान ने 2017 में भारत-जापान एक्ट ईस्ट फोरम बनाया है, जिसके जरिये पूर्वोत्तर के विकास पर विशेष फोकस किया जा रहा है। पिछले एक साल के दौरान जापान के उच्चस्तरीय दलों ने मेघालय, असम, मणिपुर के दौरे किए हैं, जबकि मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, असम और नगालैंड के मुख्यमंत्रियों ने जापान के दौरे किए। बैठक में व्यापार को मजबूत करने पर भी होगी बातचीतविदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस बैठक में वैसे तो क्षेत्रीय और वैश्विक सभी मुद्दों पर दोनों राष्ट्राध्यक्ष बात करेंगे, लेकिन व्यापार को मजबूत करने पर भी बात होगी। दरअसल, भारत-जापान के बीच में 2011 से व्यापार समझौता है, लेकिन यह जापान के लिए ही फायदेमंद साबित हुआ है। दोनों देशों के बीच करीब 27 अरब डॉलर का सालाना कारोबार है, जिसमें भारत का निर्यात छह अरब डॉलर और आयात 21 अरब डॉलर का है। यानी 15 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है। भारत इस समझौते के नवीनीकरण के पक्ष में है। भारत में कहां सबसे ज्यादा निवेशपूर्वोत्तर में जापान ने भारी निवेश भी किए हैं तथा वहां के युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान करता है। जापान का मानना है कि पूर्वोत्तर एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत की एक्ट ईस्ट नीति और जापान की स्वतंत्र एवं खुले हिंद प्रशांत क्षेत्र के दृष्टिकोण को व्यवहार में लाया जाता है। एक तरफ जहां आर्थिक नजरिये से जापान महत्वपूर्ण है। वहीं, क्वाड के सदस्य के रूप में भी जापान भारत का महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदार है। लेकिन क्वाड निष्क्रिय होता जा रहा है। इसलिए संभावना है कि मोदी के संग बैठक में जापान की प्रधानमंत्री क्वाड को सक्रिय करने पर भी बात करेंगी। दरअसल, क्वाड की शुरुआती पहल जापान की तरफ से ही की गई थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप क्वाड को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं।

MP MLA Court Strict: हर जगह दिख रहे, पुलिस को नहीं मिल रहे? जीतू पटवारी पर कोर्ट सख्त, गिरफ्तारी वारंट जारी

Madhya Pradesh Politics

MP MLA Court Strict: ग्वालियर। 2024 लोकसभा में लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक विवादित टिपणी की थी, जिसके चलते अब मुश्किलें बढ़ गयी है। ग्वालियर के MP-MLA कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट ने भिंड पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक पटवारी को हर में अदालत में पेश किया जाए। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई तय की है। अफगानिस्तान का पाकिस्तान में ड्रोन हमला, ISIS-K ठिकानों को बनाया निशाना पुलिस पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत को बताया कि जीतू पटवारी का पता नहीं चल पा रहा है। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब पटवारी लगातार मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई दे रहे हैं, तो पुलिस उन्हें तलाशने में असफल कैसे है। अदालत ने भिंड एसपी को निर्देश दिए कि अगली तारीख पर पटवारी की पेशी सुनिश्चित की जाए। सोने में बड़ी गिरावट जारी, 18 साल की सबसे तेज मासिक गिरावट, चांदी भी 43% सस्ती हुई क्या है पूरा मामला? यह मामला 27 अप्रैल 2024 का है। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान जीतू पटवारी भिंड जिले के ऊमरी कस्बे में कांग्रेस प्रत्याशी फूल सिंह बरैया के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित कर रहे थे। सभा के दौरान उन्होंने भिंड-दतिया लोकसभा सीट से बसपा प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर भाजपा से सांठगांठ और लेनदेन के आरोप लगाए। शिकायत के मुताबिक, उन्होंने बिना सबूत गंभीर आरोप लगाए और आपत्तिजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया। 1 जुलाई का दैनिक राशिफल करियर धन प्रेम और सेहत में किस राशि को मिलेगा बड़ा लाभ पढ़ें आज का संपूर्ण भविष्यफल शिकायत के बाद दर्ज हुई थी FIR देवाशीष जरारिया की शिकायत पर 4 मई 2024 को भिंड के उमरी थाने में जीतू पटवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें 16 जनवरी 2026 को पेश होने का नोटिस भेजा था, लेकिन वे अदालत में उपस्थित नहीं हुए। जुलाई में शनि की वक्री चाल और गुरु के अस्त होने से बढ़ेगा ज्योतिषीय प्रभाव, इन तीन राशियों को बरतनी होगी विशेष सावधानी FIR में दर्ज है यह आरोप एफआईआर के अनुसार, शिकायतकर्ता ने चुनावी सभा की वीडियो रिकॉर्डिंग पुलिस को सौंपी थी। वीडियो की जांच के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया। शिकायत में आरोप है कि जीतू पटवारी ने सभा के दौरान कहा था कि देवाशीष जरारिया बीजेपी से माल लाए हैं, और मतदाताओं से बसपा को वोट न देने की अपील की थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह के बयान बिना किसी तथ्य के दिए गए, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।

सोने में बड़ी गिरावट जारी, 18 साल की सबसे तेज मासिक गिरावट, चांदी भी 43% सस्ती हुई

नई दिल्ली। सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सोना 18 साल की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज कर रहा है। अक्टूबर 2008 के बाद पहली बार कीमती धातु बाजार में इस तरह का तेज दबाव देखा जा रहा है। 1 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई, जिससे सोने की कीमतें 4,000 डॉलर के नीचे आ गईं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना फिसलावैश्विक बाजार में सोना 22 डॉलर से अधिक गिरकर 3,985 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इससे पहले सोना 4,005.69 डॉलर प्रति औंस पर खुला था, लेकिन दिनभर में इसमें लगातार गिरावट देखने को मिली। इस गिरावट के साथ ही सोना एक बार फिर 4,000 डॉलर के अहम स्तर से नीचे चला गया है। MCX पर भी भारी गिरावटघरेलू बाजार MCX पर भी सोने में तेज गिरावट देखने को मिली है। साल 2026 की शुरुआत में 10 ग्राम सोना 1.92 लाख रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि जून 2026 में ही सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ एक महीने में सोना करीब 19,700 रुपये तक सस्ता हुआ। महीने की शुरुआत में जहां यह लगभग 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर था, वहीं 30 जून तक यह घटकर करीब 1.40 लाख रुपये पर आ गया। रिकॉर्ड स्तर से 20% नीचे आया सोना, चांदी 43% तक टूटीसाल 2026 के शुरुआती छह महीनों में कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सोना अपने हालिया उच्च स्तर से करीब 20 प्रतिशत तक टूट चुका है। वहीं चांदी में इससे भी तेज गिरावट दर्ज की गई है और यह करीब 43 प्रतिशत तक सस्ती हो चुकी है। क्यों गिर रहे हैं सोने के दाम?विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई में इजाफा हुआ है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है। नए संभावित फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के सख्त रुख को भी बाजार में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में ऊंची ब्याज दरों के चलते निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं। इसके अलावा डॉलर की मजबूती ने भी सोने की मांग पर असर डाला है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और शेयर बाजार में कमजोर सेंटिमेंट के चलते निवेशक अपने निवेश को संतुलित करने के लिए सोने से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे कीमतों पर और दबाव बढ़ गया है।

अफगानिस्तान का पाकिस्तान में ड्रोन हमला, ISIS-K ठिकानों को बनाया निशाना

नई दिल्ली। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पार तनाव एक बार फिर गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर आतंकी संगठन ISIS-K के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है। तालिबान के अनुसार, यह कार्रवाई उन ठिकानों के खिलाफ की गई है जहां से अफगानिस्तान में नागरिकों पर हमलों की साजिश रची जा रही थी। यह घटनाक्रम पाकिस्तान द्वारा हाल ही में किए गए हवाई हमलों के दो दिन बाद सामने आया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में हमले का दावातालिबान का कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई पाकिस्तान के बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में की गई। अफगानिस्तान के मीडिया संस्थान ‘टोलो न्यूज’ ने भी इस दावे की पुष्टि की है। रिपोर्ट के अनुसार, ड्रोन हमलों के जरिए उन ठिकानों को निशाना बनाया गया जहां ISIS-K के आतंकी छिपे हुए थे। खैबर पख्तूनख्वा के सरान क्षेत्र में एक स्कूल को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है, जिसे कथित तौर पर आतंकियों द्वारा गुप्त ठिकाने के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। तालिबान ने दावा किया है कि इस कार्रवाई में कई आतंकी मारे गए हैं, जबकि किसी भी आम नागरिक के हताहत होने की सूचना नहीं है। पाकिस्तान के हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई का दावातालिबान के इस हमले को पाकिस्तान की हालिया सैन्य कार्रवाई के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। दो दिन पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान सीमा के भीतर हवाई हमले किए थे। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट (UNAMA) के अनुसार, उस कार्रवाई में कम से कम 28 नागरिकों की मौत हुई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। वहीं, अफगानिस्तान सरकार के प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने मृतकों की संख्या 38 बताई थी, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। भारत की प्रतिक्रिया भी सामने आईइस घटनाक्रम पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने अफगानिस्तान पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमलों की निंदा करते हुए कहा कि किसी भी देश की सीमा में घुसकर हमला करना उसकी संप्रभुता का उल्लंघन है और इससे क्षेत्रीय शांति प्रभावित होती है। भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक असफलताओं से ध्यान भटकाने के लिए अक्सर ऐसे कदम उठाता है, जिससे पड़ोसी देशों में अस्थिरता बढ़ती है। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाफिलहाल पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान आतंकवादी संगठनों को पनाह देता है, जबकि तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान में आतंकवाद उसकी अपनी आंतरिक नीतिगत विफलताओं का परिणाम है। ताजा एयरस्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है तथा हालात आगे और गंभीर रूप लेने की आशंका जताई जा रही है।

जुलाई में बदलेंगी सूर्य, बुध और शुक्र की चाल, 4 राशियों के खुलेंगे तरक्की के रास्ते, इन्‍हें बरतनी होगी सावधानी

नई दिल्ली। जुलाई 2026 का महीना ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने सूर्य, बुध और शुक्र जैसे प्रमुख ग्रह अपनी राशि या चाल में परिवर्तन करेंगे, जबकि शनि पहले से ही वक्री अवस्था में रहेंगे। ज्योतिष के अनुसार, इन ग्रहों के गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा। जहां कुछ राशियों के लिए यह समय प्रगति, आर्थिक लाभ और सफलता लेकर आ सकता है, वहीं कुछ राशि वालों को सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी गई है। जुलाई में कब-कब होगा ग्रहों का गोचरद्रिक पंचांग के अनुसार, महीने की शुरुआत में 4 जुलाई को शुक्र सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र को सुख, प्रेम, वैभव और भौतिक सुविधाओं का कारक माना जाता है, इसलिए इस गोचर का प्रभाव इन क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। इसके बाद 16 जुलाई को सूर्य मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। इस परिवर्तन को **कर्क संक्रांति** कहा जाता है, जिसका धार्मिक और ज्योतिषीय दोनों ही दृष्टि से विशेष महत्व है। वहीं, 24 जुलाई से बुध अपनी वक्री चाल समाप्त कर मार्गी हो जाएंगे। ज्योतिष मान्यता के अनुसार, इससे व्यापार, संचार, निर्णय क्षमता और बुद्धि से जुड़े कार्यों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। महीने के दौरान शनि देव भी कुंभ राशि में वक्री अवस्था में रहेंगे और अपनी धीमी गति से विभिन्न राशियों पर प्रभाव डालते रहेंगे। इन 4 राशियों को मिल सकते हैं शुभ परिणाममेष राशिबुध और सूर्य का गोचर आर्थिक मामलों में नए अवसर प्रदान कर सकता है। नौकरी और व्यवसाय में सम्मान बढ़ने के संकेत हैं। नया कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे लोगों के लिए समय अनुकूल माना जा रहा है। पारिवारिक जीवन भी सुखद रहने की संभावना है। सिंह राशिशुक्र और सूर्य का राशि परिवर्तन व्यक्तित्व में आकर्षण बढ़ा सकता है। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां या पदोन्नति मिलने के योग हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने की संभावना है। तुला राशिग्रहों का यह परिवर्तन करियर में उन्नति के नए अवसर दे सकता है। व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ मिलने के संकेत हैं। स्वास्थ्य में भी पहले की तुलना में सुधार देखने को मिल सकता है। धनु राशिशनि की अनुकूल स्थिति और बुध के मार्गी होने से भाग्य का साथ मिलने की संभावना है। लंबी दूरी की यात्राएं लाभदायक साबित हो सकती हैं। कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने के संकेत हैं। इन राशियों को बरतनी होगी सावधानीमिथुन राशिइस महीने अचानक खर्च बढ़ सकते हैं, जिससे आर्थिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। कार्यस्थल पर विवाद से बचें और अपनी वाणी पर संयम रखें। मकर राशिमानसिक तनाव बढ़ सकता है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही न बरतें और खान-पान पर विशेष ध्यान दें। पैसों के लेन-देन में सतर्कता बरतना बेहतर रहेगा। कुंभ राशिशनि की वक्री चाल के कारण कुछ कार्यों में रुकावट आ सकती है। वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी रखें। इस दौरान नया निवेश करने से बचने की सलाह दी गई है। मीन राशिपारिवारिक जीवन में गलतफहमियां उत्पन्न हो सकती हैं। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तालमेल बनाकर चलना लाभदायक रहेगा। धैर्य और संयम इस महीने आपकी सबसे बड़ी ताकत साबित हो सकते हैं।