विंबलडन 2026: एलेक्जेंड्रा एला ने रचा इतिहास, पहली फिलीपीन खिलाड़ी बनीं जो तीसरे दौर में पहुंचीं

नई दिल्ली। विंबलडन 2026 में फिलीपींस की युवा टेनिस स्टार एलेक्जेंड्रा एला ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए पहली बार महिला एकल के तीसरे दौर में प्रवेश कर लिया। गुरुवार को ऑल इंग्लैंड क्लब में खेले गए दूसरे दौर के मुकाबले में एला ने ऑस्ट्रेलिया की माया जॉइंट को 3-6, 6-2, 6-0 से हराकर न सिर्फ शानदार वापसी की, बल्कि विंबलडन के तीसरे दौर में पहुंचने वाली फिलीपींस की पहली खिलाड़ी बनने का गौरव भी हासिल किया। मुकाबले की शुरुआत एला के लिए चुनौतीपूर्ण रही। पहले सेट में माया जॉइंट ने आक्रामक खेल दिखाते हुए 6-3 से बढ़त बना ली। शुरुआती झटके के बाद एला ने अपना खेल पूरी तरह बदल दिया और दूसरे सेट में बेहतरीन सर्विस तथा दमदार ग्राउंड स्ट्रोक्स की बदौलत 6-2 से मुकाबला बराबरी पर ला दिया। निर्णायक तीसरे सेट में 21 वर्षीय एला ने अपने प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं दिया। उन्होंने शुरुआत में ही सर्विस ब्रेक हासिल कर दबाव बनाया और लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए 6-0 से सेट जीतकर मैच अपने नाम कर लिया। पूरे मुकाबले में उनकी फिटनेस, संयम और आक्रामक खेल ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। यह जीत एला के लिए इसलिए भी खास रही क्योंकि पिछले वर्ष ईस्टबोर्न ओपन के फाइनल में उन्हें माया जॉइंट के खिलाफ बेहद करीबी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था। उस मैच का फैसला तीसरे सेट के टाईब्रेक में 12-10 से हुआ था। विंबलडन में मिली यह जीत उनके लिए उस हार का बेहतरीन जवाब साबित हुई। महिला एकल के अन्य मुकाबलों में 21वीं वरीयता प्राप्त मैरी बौजकोवा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्रांट को 7-5, 6-3 से हराकर तीसरी बार विंबलडन के तीसरे दौर में जगह बनाई। अब उनका सामना पिछले साल की क्वार्टर फाइनलिस्ट ल्यूडमिला सैमसनोवा से होगा, जिन्होंने 15वीं वरीयता प्राप्त डायना श्नाइडर को 6-4, 4-6, 6-2 से हराया। अमेरिका की एमा नवारो ने भी लगातार तीसरे वर्ष विंबलडन के तीसरे दौर में प्रवेश किया। उन्होंने ओक्साना सेलेखमेतेवा को 3-6, 6-4, 6-1 से मात देकर शानदार वापसी दर्ज की। नवारो का अगला मुकाबला मार्टा कोस्त्युक और अन्ना ब्लिंकोवा के बीच होने वाले मैच की विजेता से होगा। एलेक्जेंड्रा एला की इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल फिलीपींस के टेनिस इतिहास में नया अध्याय जोड़ा है, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि युवा खिलाड़ी अब ग्रैंड स्लैम स्तर पर बड़े उलटफेर करने का दम रखते हैं।
महिला टी20 विश्व कप 2026: साइवर-ब्रंट की कप्तानी पारी से इंग्लैंड फाइनल में, दक्षिण अफ्रीका को 40 रन से हराया

नई दिल्ली। आईसीसी महिला टी20 विश्व कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में इंग्लैंड ने दमदार प्रदर्शन करते हुए दक्षिण अफ्रीका को 40 रन से हराकर पांचवीं बार फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। लंदन के केनिंग्टन ओवल में खेले गए मुकाबले में इंग्लिश टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 5 विकेट पर 169 रन बनाए। जवाब में दक्षिण अफ्रीका की टीम 20 ओवर में 8 विकेट पर 129 रन ही बना सकी। इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही। एमी जोन्स 2 रन और डैनी व्याट 12 रन बनाकर आउट हो गईं, जबकि एलिसा कैप्सी भी सिर्फ 1 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। महज 23 रन पर तीन विकेट गिरने के बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट और अनुभवी हीथर नाइट ने मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे विकेट के लिए 133 रन की शानदार साझेदारी कर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। कप्तान साइवर-ब्रंट ने जिम्मेदारी भरी बल्लेबाजी करते हुए 47 गेंदों में 75 रन बनाए। उनकी पारी में 11 चौके और एक छक्का शामिल रहा। वहीं हीथर नाइट ने 47 गेंदों पर 58 रन की उपयोगी पारी खेली जिसमें छह चौके और एक छक्का शामिल था। दोनों की शानदार बल्लेबाजी की बदौलत इंग्लैंड ने चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। दक्षिण अफ्रीका की ओर से शबनम इस्माइल और नॉनकुलुलेको म्लाबा ने दो-दो विकेट लिए लेकिन बाकी गेंदबाज इंग्लैंड की बड़ी साझेदारी को तोड़ने में सफल नहीं हो सके। 170 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी दक्षिण अफ्रीका को कप्तान लौरा वोल्वार्ट और ताजमिन ब्रिट्स ने अच्छी शुरुआत दिलाई। दोनों ने पहले विकेट के लिए 43 रन जोड़े लेकिन इसके बाद टीम लगातार अंतराल पर विकेट गंवाती रही। वोल्वार्ट 17 रन बनाकर आउट हुईं जबकि एनेरी डर्कसेन, मारिजाने कैप, सुने लुस और क्लो ट्रायोन बड़ी पारी नहीं खेल सकीं। ताजमिन ब्रिट्स ने अकेले संघर्ष करते हुए 45 गेंदों में 51 रन बनाए लेकिन दूसरे छोर से उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। नादिन डी क्लर्क 14 रन बनाकर नाबाद रहीं, जबकि बाकी बल्लेबाज इंग्लैंड के अनुशासित गेंदबाजी आक्रमण के सामने टिक नहीं सके। इंग्लैंड की ओर से लॉरेन बेल और चार्ली डीन ने दो-दो विकेट झटके। फ्रेया केम्प और लिन्से स्मिथ ने एक-एक विकेट लेकर दक्षिण अफ्रीका की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने पांचवीं बार महिला टी20 विश्व कप के फाइनल में प्रवेश किया है। अब रविवार को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर उसका मुकाबला छह बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से होगा। क्रिकेट प्रेमियों को खिताबी मुकाबले में महिला क्रिकेट की दो सबसे सफल टीमों के बीच रोमांचक टक्कर देखने को मिलेगी।
सीधे सेटों में जीते जेवरेव, बेरेटिनी और आर्थर फेरी ने भी अगले दौर का टिकट कटाया
नई दिल्ली। विंबलडन 2026 में दूसरी वरीयता प्राप्त अलेक्जेंडर जेवरेव ने अपने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए पुरुष एकल के तीसरे दौर में जगह बना ली है। जर्मनी के स्टार खिलाड़ी ने फ्रांस के वैलेंटिन रॉयर को सीधे सेटों में 6-1, 6-3, 7-6(3) से हराकर जीत दर्ज की। वहीं इटली के माटेओ बेरेटिनी और मेजबान ब्रिटेन के युवा खिलाड़ी आर्थर फेरी ने भी अपने-अपने मुकाबले जीतकर अगले दौर का टिकट हासिल कर लिया। फ्रेंच ओपन चैंपियन जेवरेव ने मुकाबले की शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और पहले दो सेट बेहद आसानी से अपने नाम कर लिए। तीसरे सेट में रॉयर ने कड़ी चुनौती पेश की और मुकाबले को टाई-ब्रेक तक पहुंचा दिया, लेकिन निर्णायक क्षणों में जेवरेव का अनुभव भारी पड़ा। दो घंटे चार मिनट तक चले मुकाबले में उन्होंने संयम बनाए रखते हुए जीत अपने नाम कर ली। जीत के बाद जेवरेव ने कहा कि लगभग ढाई सेट तक उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ टेनिस खेला। इसके बाद उनका ध्यान थोड़ा भटका, जिसका प्रतिद्वंद्वी ने फायदा उठाने की कोशिश की। उन्होंने माना कि ग्रैंड स्लैम के आगे के दौर में ऊर्जा बचाकर रखना बेहद जरूरी होता है और सीधे सेटों में मिली जीत उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगी। जेवरेव ने यह भी कहा कि विंबलडन हमेशा से उनका पसंदीदा टूर्नामेंट रहा है और इस बार वह यहां बड़ी सफलता हासिल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इटली के माटेओ बेरेटिनी ने भी प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए फ्रांस के आर्थर फिल्स को 6-4, 7-5, 3-6, 6-3 से मात दी। 2021 के विंबलडन उपविजेता बेरेटिनी ने सेंटर कोर्ट पर दमदार सर्विस और शानदार शॉट्स से मुकाबले पर नियंत्रण बनाए रखा। तीसरा सेट गंवाने के बाद उन्होंने बेहतरीन वापसी करते हुए चौथा सेट जीत लिया और 2023 के बाद पहली बार विंबलडन के तीसरे दौर में प्रवेश किया। दिन का सबसे चर्चित प्रदर्शन ब्रिटेन के 23 वर्षीय आर्थर फेरी का रहा। उन्होंने फिनलैंड के ओटो विर्टानेन को 5-7, 7-6(3), 6-3, 6-3 से हराकर अपने करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। पहला सेट हारने के बाद फेरी ने शानदार वापसी करते हुए लगातार तीन सेट अपने नाम किए। इस उपलब्धि के साथ वह वर्ष 2000 के बाद विंबलडन पुरुष एकल के तीसरे दौर में पहुंचने वाले केवल चौथे ब्रिटिश वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी बन गए हैं। फेरी का मुकाबला देखने के लिए प्रिंसेस ऑफ वेल्स भी कुछ समय तक स्टेडियम में मौजूद रहीं। हालांकि घरेलू दर्शकों और खास मेहमानों की मौजूदगी के बावजूद युवा खिलाड़ी पर किसी तरह का दबाव नहीं दिखा। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपना खेल जारी रखा। हाल के सप्ताहों में भी उनकी फॉर्म शानदार रही है। वह बर्मिंघम और नॉटिंघम के ग्रास कोर्ट टूर्नामेंट के फाइनल तक पहुंचे थे और पहले दौर में चौथी वरीयता प्राप्त बेन शेल्टन को हराकर बड़ा उलटफेर भी कर चुके हैं। जीत के बाद फेरी ने कहा कि जिस इलाके में वह बड़े हुए वहां से कुछ ही मिनट की दूरी पर स्थित विंबलडन में खेलना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा है। उन्होंने बताया कि स्टेडियम में परिवार, दोस्त और कई परिचितों की मौजूदगी ने उन्हें अतिरिक्त आत्मविश्वास दिया। अब तीसरे दौर में उनकी कोशिश इस शानदार लय को बरकरार रखते हुए अपने यादगार अभियान को आगे बढ़ाने की होगी।
ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले ऐप पर शिकंजा, ब्लूटूथ के जरिए बैटरी कंट्रोल के दुरुपयोग के बाद सरकार ने उठाया बड़ा कदम

नई दिल्ली। ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा और डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग को लेकर सामने आए मामलों के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ऐसे मोबाइल ऐप, जिनके जरिए ब्लूटूथ समर्थित ई-रिक्शा बैटरियों को दूर से नियंत्रित किए जाने की आशंका जताई गई थी, उन्हें प्रमुख ऐप स्टोर से हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य ई-रिक्शा चालकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और तकनीकी खामियों के संभावित दुरुपयोग पर रोक लगाना है। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए थे, जिनमें दावा किया गया कि कुछ लोग मोबाइल ऐप के माध्यम से चलते हुए ई-रिक्शा की बैटरी से कनेक्ट होकर वाहन को अचानक बंद कर दे रहे हैं। इन वीडियो ने ई-रिक्शा चालकों, बैटरी डीलरों और इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं के बीच सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी थी। कई मामलों में चालक बीच सड़क पर वाहन बंद हो जाने के कारण असहाय नजर आए और उन्हें ई-रिक्शा को धक्का देकर सुरक्षित स्थान तक ले जाना पड़ा। घटनाओं के सामने आने के बाद संबंधित विभागों ने पूरे मामले को गंभीरता से लिया। प्रारंभिक स्तर पर तकनीकी जांच शुरू की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित मोबाइल ऐप वास्तव में किस प्रकार कार्य करते हैं और उनके फीचर्स का दुरुपयोग किस सीमा तक संभव है। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि ये ऐप ब्लूटूथ तकनीक के माध्यम से सीमित दूरी के भीतर मौजूद संगत लिथियम बैटरियों से वायरलेस तरीके से जुड़ सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे ऐप मूल रूप से बैटरी की स्थिति पर निगरानी रखने के लिए विकसित किए जाते हैं। इनके माध्यम से बैटरी का वोल्टेज, तापमान, करंट और अन्य तकनीकी जानकारी देखी जा सकती है, जिससे बैटरी की कार्यक्षमता और रखरखाव में सुविधा मिलती है। हालांकि यदि सुरक्षा मानकों को पर्याप्त रूप से लागू नहीं किया जाए तो इसी नियंत्रण प्रणाली का गलत इस्तेमाल कर बैटरी के संचालन को प्रभावित किया जा सकता है, जिससे वाहन अचानक रुक सकता है। सरकार ने इसी संभावित खतरे को देखते हुए संबंधित ऐप को सार्वजनिक प्लेटफॉर्म से हटाने की प्रक्रिया शुरू कराई है। अधिकारियों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ साइबर सुरक्षा और डिजिटल नियंत्रण प्रणाली की मजबूती भी उतनी ही आवश्यक है। यदि बैटरी प्रबंधन प्रणाली में पर्याप्त सुरक्षा नहीं होगी तो भविष्य में इस प्रकार के मामलों की पुनरावृत्ति हो सकती है। तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयुक्त बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत एन्क्रिप्शन, सुरक्षित प्रमाणीकरण और नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट जैसी सुविधाओं से लैस किया जाना चाहिए। इससे अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा बैटरी तक पहुंच बनाने और नियंत्रण हासिल करने की संभावना काफी हद तक कम हो सकती है। निर्माता कंपनियों को भी अपने सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर सुरक्षा मानकों की समय-समय पर समीक्षा करनी होगी। ई-रिक्शा देश के अनेक शहरों में सार्वजनिक परिवहन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं और लाखों लोगों की आजीविका इससे जुड़ी हुई है। ऐसे में उनकी सुरक्षा से जुड़ी किसी भी तकनीकी कमजोरी को समय रहते दूर करना आवश्यक माना जा रहा है। सरकार की ताजा कार्रवाई को इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में चालकों और यात्रियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
फीफा वर्ल्ड कप 2026: अतिरिक्त समय में रामोस का वार, पुर्तगाल ने क्रोएशिया को किया बाहर

नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्विट्जरलैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अल्जीरिया को 2-0 से हराकर राउंड ऑफ-16 में अपनी जगह पक्की कर ली। वैंकूवर के बीसी प्लेस स्टेडियम में खेले गए राउंड ऑफ-32 मुकाबले में स्विस टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और पूरे मैच में अल्जीरिया को दबाव में रखा। स्विट्जरलैंड ने मैच के 10वें मिनट में बढ़त हासिल कर ली। जोहान मंजांबी की तेज दौड़ और सटीक पास पर ब्रील एम्बोलो ने शानदार फिनिश करते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के बाद स्विस टीम ने लगातार गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा जबकि अल्जीरिया बराबरी के लिए संघर्ष करता रहा। पहले हाफ में अल्जीरियाई खिलाड़ियों ने कुछ अच्छे मूव बनाए लेकिन स्विट्जरलैंड की मजबूत रक्षापंक्ति के सामने उन्हें सफलता नहीं मिली। दूसरे हाफ की शुरुआत भी स्विट्जरलैंड के नाम रही। खेल शुरू होने के महज एक मिनट बाद डेनिस जकारिया के क्रॉस को अल्जीरिया की टीम सही तरीके से क्लियर नहीं कर सकी। गेंद डैन नडोये के पास पहुंची और उन्होंने पेनल्टी बॉक्स के बाहर से जोरदार शॉट लगाकर स्कोर 2-0 कर दिया। यह नडोये का वर्ल्ड कप में पहला गोल रहा जिसे उन्होंने खास अंदाज में सेलिब्रेट किया। दो गोल से पिछड़ने के बाद अल्जीरिया ने वापसी की कोशिश की लेकिन स्विट्जरलैंड ने विपक्षी टीम को कोई बड़ा मौका नहीं दिया। मिडफील्ड और डिफेंस के बेहतरीन तालमेल की बदौलत स्विस टीम ने मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी और अंतिम सीटी तक बढ़त सुरक्षित रखी। इस जीत के साथ स्विट्जरलैंड ने टूर्नामेंट में लगातार तीसरी जीत दर्ज की। इससे पहले टीम ग्रुप चरण में बोस्निया और हर्जेगोविना तथा कनाडा को भी मात दे चुकी है। खास बात यह रही कि वर्ल्ड कप इतिहास में पहली बार स्विट्जरलैंड ने लगातार तीन मुकाबले जीतने का कारनामा किया है। शानदार फॉर्म में चल रही स्विस टीम अब 7 जुलाई को होने वाले राउंड ऑफ-16 मुकाबले में कोलंबिया और घाना के बीच होने वाले मैच के विजेता से भिड़ेगी। यह मुकाबला भी वैंकूवर में खेला जाएगा जहां स्विट्जरलैंड लगातार तीसरी बार मैदान पर उतरेगा। टीम की कोशिश अपनी जीत की लय बरकरार रखते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने की होगी।
आम महोत्सव में दिखेगी स्वाद, तकनीक और निर्यात की नई तस्वीर, किसानों से लेकर बच्चों तक के लिए होंगे विशेष आकर्षण, यूपी की आम अर्थव्यवस्था बनेगी चर्चा का केंद्र

नई दिल्ली। आम केवल स्वाद का प्रतीक नहीं, बल्कि भारत की कृषि, बागवानी और निर्यात अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा भी बन चुका है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए आयोजित होने वाले आम महोत्सव में किसानों, बागवानों, कृषि विशेषज्ञों, व्यापारियों और आम प्रेमियों को एक ही मंच पर जोड़ने की तैयारी की गई है। इस आयोजन में आम की आधुनिक खेती, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, अंतरराष्ट्रीय निर्यात, बाजार प्रबंधन और नई तकनीकों पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही बच्चों के लिए आम खाने की प्रतियोगिता जैसे मनोरंजक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। महोत्सव के दौरान कृषि विशेषज्ञ आम की बागवानी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन देंगे। इसमें पौधों के वैज्ञानिक प्रबंधन, उन्नत किस्मों का चयन, समय पर कटाई, कीट एवं रोग नियंत्रण, फलों की गुणवत्ता बनाए रखने और बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त करने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा होगी। विशेषज्ञ किसानों को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के व्यावहारिक उपाय भी बताएंगे। उत्तर प्रदेश देश में आम उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां की जलवायु और मिट्टी कई प्रसिद्ध किस्मों के लिए उपयुक्त है। राज्य के दशहरी, लंगड़ा, चौसा, रटौल, बॉम्बे ग्रीन और गौरजीत जैसे आम देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। विशेष रूप से मलिहाबाद का दशहरी अपनी मिठास, सुगंध और रेशारहित गूदे के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय है, जबकि वाराणसी का लंगड़ा और सहारनपुर का चौसा भी निर्यात बाजार में लगातार मांग बनाए हुए हैं। राज्य में आम के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक पैक हाउस, प्रसंस्करण इकाइयों और गुणवत्ता परीक्षण सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप फलों की पैकिंग और ट्रीटमेंट के कारण उत्तर प्रदेश से कई देशों में बड़ी मात्रा में आम और आम उत्पादों का निर्यात हो रहा है। भविष्य में जेवर क्षेत्र में प्रस्तावित फ्रूट टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट सेंटर से निर्यात प्रक्रिया को और अधिक गति मिलने की उम्मीद है। किसानों को फ्रूट बैग वितरण और पुराने बागों के पुनर्जीवन के लिए दी जा रही सब्सिडी जैसी योजनाएं भी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। आम महोत्सव में विभिन्न किस्मों की विशेषताओं को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। दशहरी अपनी सुगंध और मिठास के लिए प्रसिद्ध है, जबकि लंगड़ा का खट्टा-मीठा स्वाद इसे अलग पहचान देता है। चौसा अपनी रसीली बनावट के कारण पसंद किया जाता है और रटौल अपनी विशिष्ट खुशबू के लिए जाना जाता है। बॉम्बे ग्रीन और गौरजीत जैसी किस्में भी अपने स्वाद और समय से पहले पकने की विशेषता के कारण किसानों और उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं। महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण जापान की प्रसिद्ध मियाजाकी किस्म भी होगी, जिसे दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है। पकने पर इसका रंग गहरा लाल और बैंगनी हो जाता है तथा इसका गूदा पूरी तरह रेशारहित होता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा की मात्रा सामान्य किस्मों की तुलना में अधिक होती है, जिससे इसका स्वाद अत्यंत मीठा माना जाता है। उत्तर प्रदेश के कुछ किसानों ने भी इसकी सफल खेती शुरू कर नई संभावनाओं का मार्ग प्रशस्त किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और निर्यात उन्मुख खेती के माध्यम से भारत का आम उद्योग आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजार में और अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।
फीफा वर्ल्ड कप 2026: एम्बोलो-नडोये के गोल से स्विट्जरलैंड ने अल्जीरिया को किया बाहर

नई दिल्ली। फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्विट्जरलैंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अल्जीरिया को 2-0 से हराकर राउंड ऑफ-16 में अपनी जगह पक्की कर ली। वैंकूवर के बीसी प्लेस स्टेडियम में खेले गए राउंड ऑफ-32 मुकाबले में स्विस टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और पूरे मैच में अल्जीरिया को दबाव में रखा। स्विट्जरलैंड ने मैच के 10वें मिनट में बढ़त हासिल कर ली। जोहान मंजांबी की तेज दौड़ और सटीक पास पर ब्रील एम्बोलो ने शानदार फिनिश करते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के बाद स्विस टीम ने लगातार गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा जबकि अल्जीरिया बराबरी के लिए संघर्ष करता रहा। पहले हाफ में अल्जीरियाई खिलाड़ियों ने कुछ अच्छे मूव बनाए लेकिन स्विट्जरलैंड की मजबूत रक्षापंक्ति के सामने उन्हें सफलता नहीं मिली। दूसरे हाफ की शुरुआत भी स्विट्जरलैंड के नाम रही। खेल शुरू होने के महज एक मिनट बाद डेनिस जकारिया के क्रॉस को अल्जीरिया की टीम सही तरीके से क्लियर नहीं कर सकी। गेंद डैन नडोये के पास पहुंची और उन्होंने पेनल्टी बॉक्स के बाहर से जोरदार शॉट लगाकर स्कोर 2-0 कर दिया। यह नडोये का वर्ल्ड कप में पहला गोल रहा जिसे उन्होंने खास अंदाज में सेलिब्रेट किया। दो गोल से पिछड़ने के बाद अल्जीरिया ने वापसी की कोशिश की लेकिन स्विट्जरलैंड ने विपक्षी टीम को कोई बड़ा मौका नहीं दिया। मिडफील्ड और डिफेंस के बेहतरीन तालमेल की बदौलत स्विस टीम ने मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी और अंतिम सीटी तक बढ़त सुरक्षित रखी। इस जीत के साथ स्विट्जरलैंड ने टूर्नामेंट में लगातार तीसरी जीत दर्ज की। इससे पहले टीम ग्रुप चरण में बोस्निया और हर्जेगोविना तथा कनाडा को भी मात दे चुकी है। खास बात यह रही कि वर्ल्ड कप इतिहास में पहली बार स्विट्जरलैंड ने लगातार तीन मुकाबले जीतने का कारनामा किया है। शानदार फॉर्म में चल रही स्विस टीम अब 7 जुलाई को होने वाले राउंड ऑफ-16 मुकाबले में कोलंबिया और घाना के बीच होने वाले मैच के विजेता से भिड़ेगी। यह मुकाबला भी वैंकूवर में खेला जाएगा जहां स्विट्जरलैंड लगातार तीसरी बार मैदान पर उतरेगा। टीम की कोशिश अपनी जीत की लय बरकरार रखते हुए क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने की होगी।
अमित शाह से मुलाकात के बाद पंजाब की सियासत में बढ़ी हलचल, बीजेपी में शामिल होने की अटकलों पर सुखजिंदर सिंह रंधावा ने तोड़ी चुप्पी

नई दिल्ली । पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। दिल्ली में हुई इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या रंधावा कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम सकते हैं। हालांकि स्वयं रंधावा ने इन अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी मुलाकात का उद्देश्य केवल पंजाब की कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर चर्चा करना था। रंधावा की इस मुलाकात का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पंजाब में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और सभी दल अपनी राजनीतिक रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसी बीच कांग्रेस संगठन में हाल ही में हुए फेरबदल के बाद रंधावा को मिली नई जिम्मेदारी को लेकर उनकी नाराजगी की चर्चा भी लगातार सामने आती रही है। ऐसे माहौल में गृह मंत्री से हुई उनकी मुलाकात ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी। हाल ही में गठित पंजाब कांग्रेस की नई टीम में रंधावा को कोर कमेटी का प्रमुख बनाया गया है। राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि वह संगठन में अधिक प्रभावशाली भूमिका की उम्मीद कर रहे थे। उनके करीबी नेताओं का भी मानना है कि नई जिम्मेदारी को लेकर वे पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि रंधावा ने सार्वजनिक रूप से इस मुद्दे पर कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं दी है। बीजेपी में शामिल होने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए रंधावा ने साफ कहा कि उनकी मुलाकात पूरी तरह प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी विषयों पर केंद्रित थी। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर पंजाब के सीमावर्ती जिलों में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति, पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी गतिविधियों, नार्को-टेररिज्म, गैंगस्टर नेटवर्क और कानून-व्यवस्था से जुड़े गंभीर मामलों की जानकारी दी थी। इन्हीं पत्रों के आधार पर उन्हें चर्चा के लिए बुलाया गया। रंधावा के अनुसार उन्होंने बैठक में गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन और पठानकोट जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति का विस्तृत विवरण रखा। उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार गैंगस्टर गिरोह, अवैध वसूली, सीमा पार से होने वाली गतिविधियां और अपराधी नेटवर्क राज्य की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने जेलों के भीतर से मोबाइल फोन के इस्तेमाल और संगठित अपराध से जुड़े मामलों पर भी चिंता जताई। बैठक के दौरान केंद्रीय एजेंसियों की भूमिका और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। रंधावा का कहना है कि यदि केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इन परिस्थितियों को गंभीर मानती है तो आवश्यक कार्रवाई करना उसकी जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य और देश की सुरक्षा किसी भी राजनीतिक मतभेद से ऊपर है और इसी भावना के साथ उन्होंने अपनी चिंताओं को सरकार के सामने रखा। फिलहाल रंधावा ने भाजपा में शामिल होने की सभी अटकलों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है, लेकिन उनकी अमित शाह से मुलाकात ने पंजाब की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। चुनावी माहौल में यह घटनाक्रम राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति की दिशा पर इसका असर पड़ सकता है। कांग्रेस और भाजपा दोनों की रणनीतियों पर भी अब राजनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी हुई है।
UJJAIN WORLD FOREST ZOO: उज्जैन में बनाया जायेगा वर्ल्ड क्लास फॉरेस्ट जू ; 300+ वन्यजीवों का होगा बसेरा

UJJAIN WORLD FOREST ZOO: उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में उज्जैन को बड़ी सौगात मिलने वाली है। जिसके तहत नवलखी क्षेत्र में लगभग 200 हेक्टेयर जमीन पर वर्ल्ड क्लास फॉरेस्ट जू बनाने की तैयारियां की जा रही है। इस परियोजना में 300 से भी ज्यादा वन्यजीवों को प्राकृतिक एरिया में रखा जायेगा, ताकि पर्यटक भी उन्हें बिना किसी व्यवधान के करीब से देख सकें। परियोजना को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) से इन-प्रिंसिपल मंजूरी मिल चुकी है। अब प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का बड़ा संकेत, फिलहाल राहत बरकरार, सस्ती दरों पर फैसला करेगा ग्लोबल क्रूड का रुख पहले चरण में बनेगा ‘इंडिया फॉरेस्ट ज़ोन’ फॉरेस्ट जू को दो चरणों में तैयार किया जाएगा। पहले चरण में करीब 60 हेक्टेयर क्षेत्र में ‘इंडिया फॉरेस्ट ज़ोन’ बनाया जाएगा। यहां भारत में पाए जाने वाले वन्यजीवों को प्राकृतिक माहौल में रखा जाएगा। यहीं ड्राइव-थ्रू सफारी भी शुरू की जाएगी, जहां पर्यटक अपने वाहन या सफारी वाहन में बैठकर शेर, हिरण और अन्य वन्यजीवों को बेहद करीब से देख सकेंगे। स्पीड पोस्ट और कूरियर के जरिए 21 राज्यों में फैलाया गया करोड़ों का गांजा नेटवर्क बेनकाब, घर-घर पार्सल पहुंचाकर चल रहा था संगठित ड्रग्स कारोबार दूसरे चरण में दिखेगी दुनिया के जंगलों की झलक परियोजना के दूसरे चरण में ‘फॉरेस्ट ऑफ द वर्ल्ड’ तैयार किया जाएगा। इसमें अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों में पाए जाने वाले वन्यजीवों को शामिल किया जायेगा। यानी उज्जैन आने वाले लोगों को एक ही जगह भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के वन्यजीव देखने का मौका मिलेगा। Narmada Parikrama Path: नर्मदा परिक्रमा पथ को अतिक्रमण मुक्त बनाने की तैयारी तेज, सीएम मोहन यादव ने दिए निर्देश ग्रीन ओवरब्रिज और अंडरपास भी बनेंगे वन्यजीवों की आवाजाही सुरक्षित रहे, इसके लिए फॉरेस्ट जू क्षेत्र में 35 मीटर चौड़ा ग्रीन ओवरब्रिज और एक अंडरपास बनाया जाएगा। ओवरब्रिज पर पैदल चलने वालों और इलेक्ट्रिक सफारी वाहनों के लिए अलग रास्ते होंगे। वहीं, पूरे क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ लगाए जाएंगे, ताकि जंगल जैसा प्राकृतिक वातावरण बना रहे।
करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची DMK, सीएम विजय और मंत्रियों की बयानबाजी पर रोक की मांग, CBI जांच की निष्पक्षता पर उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली । तमिलनाडु के बहुचर्चित करूर भगदड़ मामले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए मामले में खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री थलपति विजय, उनके मंत्रियों और अन्य आरोपियों की सार्वजनिक बयानबाजी से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि जांच पूरी होने तक संबंधित पक्षों को मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से रोका जाए। करूर में 27 सितंबर 2025 को एक राजनीतिक जनसभा के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 142 लोग घायल हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को इसकी जांच CBI को सौंप दी थी। जांच की निगरानी पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति कर रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। DMK के संगठन सचिव आर.एस. भारती की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जांच के दौरान मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन और अन्य आरोपियों की सार्वजनिक टिप्पणियां गवाहों और जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। याचिका में विशेष रूप से 2 जुलाई 2026 को मंत्री आधव अर्जुन के उस बयान का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने करूर घटना को लेकर राजनीतिक जवाब देने जैसी टिप्पणी की थी। पार्टी का आरोप है कि इस प्रकार के बयान जांच की दिशा बदलने और गवाहों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने का माध्यम बन सकते हैं। याचिका में मुख्यमंत्री विजय के प्रस्तावित करूर दौरे का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री मृतकों के परिजनों और घायलों को सरकारी सहायता, अनुकंपा नियुक्ति तथा अन्य लाभ देने के लिए वहां जाने वाले हैं। DMK ने स्पष्ट किया है कि उसे पीड़ित परिवारों को राहत और सहायता दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जिन परिवारों को सहायता दी जानी है, वे CBI जांच में महत्वपूर्ण गवाह भी हैं। ऐसे में आरोपियों अथवा राजनीतिक कार्यपालिका का उनसे सीधा संपर्क जांच की निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा कर सकता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर 2025 में, जब मामला न्यायालय में लंबित था, तब भी मुख्यमंत्री विजय ने मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये तथा घायलों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की थी। पार्टी का कहना है कि भविष्य में भी यदि ऐसी सहायता दी जाती है तो वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सुरक्षा उपायों के अनुरूप और CBI को पूर्व सूचना देकर ही दी जानी चाहिए, ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। DMK ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि मंत्री आधव अर्जुन के हालिया बयान की जांच कराई जाए और यदि उसमें जांच को प्रभावित करने का प्रयास पाया जाता है तो उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं। साथ ही मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन, बसी आनंद, सी.टी.आर. निर्मल कुमार और अन्य आरोपियों को जांच पूरी होने तक मामले पर किसी भी प्रकार की सार्वजनिक टिप्पणी करने से रोका जाए। अब इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख तय करेगा कि जांच के दौरान सार्वजनिक बयानबाजी और पीड़ित परिवारों से संपर्क को लेकर आगे क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।