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UJJAIN WORLD FOREST ZOO: उज्जैन में बनाया जायेगा वर्ल्ड क्लास फॉरेस्ट जू ; 300+ वन्यजीवों का होगा बसेरा

Ujjain Forest Zoo

UJJAIN WORLD FOREST ZOO: उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में उज्जैन को बड़ी सौगात मिलने वाली है। जिसके तहत नवलखी क्षेत्र में लगभग 200 हेक्टेयर जमीन पर वर्ल्ड क्लास फॉरेस्ट जू बनाने की तैयारियां की जा रही है। इस परियोजना में 300 से भी ज्यादा वन्यजीवों को प्राकृतिक एरिया में रखा जायेगा, ताकि पर्यटक भी उन्हें बिना किसी व्यवधान के करीब से देख सकें। परियोजना को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) से इन-प्रिंसिपल मंजूरी मिल चुकी है। अब प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का बड़ा संकेत, फिलहाल राहत बरकरार, सस्ती दरों पर फैसला करेगा ग्लोबल क्रूड का रुख पहले चरण में बनेगा ‘इंडिया फॉरेस्ट ज़ोन’ फॉरेस्ट जू को दो चरणों में तैयार किया जाएगा। पहले चरण में करीब 60 हेक्टेयर क्षेत्र में ‘इंडिया फॉरेस्ट ज़ोन’ बनाया जाएगा। यहां भारत में पाए जाने वाले वन्यजीवों को प्राकृतिक माहौल में रखा जाएगा। यहीं ड्राइव-थ्रू सफारी भी शुरू की जाएगी, जहां पर्यटक अपने वाहन या सफारी वाहन में बैठकर शेर, हिरण और अन्य वन्यजीवों को बेहद करीब से देख सकेंगे। स्पीड पोस्ट और कूरियर के जरिए 21 राज्यों में फैलाया गया करोड़ों का गांजा नेटवर्क बेनकाब, घर-घर पार्सल पहुंचाकर चल रहा था संगठित ड्रग्स कारोबार दूसरे चरण में दिखेगी दुनिया के जंगलों की झलक परियोजना के दूसरे चरण में ‘फॉरेस्ट ऑफ द वर्ल्ड’ तैयार किया जाएगा। इसमें अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों में पाए जाने वाले वन्यजीवों को शामिल किया जायेगा। यानी उज्जैन आने वाले लोगों को एक ही जगह भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के वन्यजीव देखने का मौका मिलेगा। Narmada Parikrama Path: नर्मदा परिक्रमा पथ को अतिक्रमण मुक्त बनाने की तैयारी तेज, सीएम मोहन यादव ने दिए निर्देश ग्रीन ओवरब्रिज और अंडरपास भी बनेंगे वन्यजीवों की आवाजाही सुरक्षित रहे, इसके लिए फॉरेस्ट जू क्षेत्र में 35 मीटर चौड़ा ग्रीन ओवरब्रिज और एक अंडरपास बनाया जाएगा। ओवरब्रिज पर पैदल चलने वालों और इलेक्ट्रिक सफारी वाहनों के लिए अलग रास्ते होंगे। वहीं, पूरे क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ लगाए जाएंगे, ताकि जंगल जैसा प्राकृतिक वातावरण बना रहे।

करूर भगदड़ मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंची DMK, सीएम विजय और मंत्रियों की बयानबाजी पर रोक की मांग, CBI जांच की निष्पक्षता पर उठाए गंभीर सवाल

नई दिल्ली । तमिलनाडु के बहुचर्चित करूर भगदड़ मामले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए मामले में खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री थलपति विजय, उनके मंत्रियों और अन्य आरोपियों की सार्वजनिक बयानबाजी से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। याचिका में अदालत से आग्रह किया गया है कि जांच पूरी होने तक संबंधित पक्षों को मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से रोका जाए। करूर में 27 सितंबर 2025 को एक राजनीतिक जनसभा के दौरान मची भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 142 लोग घायल हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर 2025 को इसकी जांच CBI को सौंप दी थी। जांच की निगरानी पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति कर रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे। DMK के संगठन सचिव आर.एस. भारती की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जांच के दौरान मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन और अन्य आरोपियों की सार्वजनिक टिप्पणियां गवाहों और जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। याचिका में विशेष रूप से 2 जुलाई 2026 को मंत्री आधव अर्जुन के उस बयान का उल्लेख किया गया है, जिसमें उन्होंने करूर घटना को लेकर राजनीतिक जवाब देने जैसी टिप्पणी की थी। पार्टी का आरोप है कि इस प्रकार के बयान जांच की दिशा बदलने और गवाहों पर अप्रत्यक्ष दबाव बनाने का माध्यम बन सकते हैं। याचिका में मुख्यमंत्री विजय के प्रस्तावित करूर दौरे का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री मृतकों के परिजनों और घायलों को सरकारी सहायता, अनुकंपा नियुक्ति तथा अन्य लाभ देने के लिए वहां जाने वाले हैं। DMK ने स्पष्ट किया है कि उसे पीड़ित परिवारों को राहत और सहायता दिए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जिन परिवारों को सहायता दी जानी है, वे CBI जांच में महत्वपूर्ण गवाह भी हैं। ऐसे में आरोपियों अथवा राजनीतिक कार्यपालिका का उनसे सीधा संपर्क जांच की निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा कर सकता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर 2025 में, जब मामला न्यायालय में लंबित था, तब भी मुख्यमंत्री विजय ने मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये तथा घायलों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की थी। पार्टी का कहना है कि भविष्य में भी यदि ऐसी सहायता दी जाती है तो वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सुरक्षा उपायों के अनुरूप और CBI को पूर्व सूचना देकर ही दी जानी चाहिए, ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। DMK ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि मंत्री आधव अर्जुन के हालिया बयान की जांच कराई जाए और यदि उसमें जांच को प्रभावित करने का प्रयास पाया जाता है तो उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं। साथ ही मुख्यमंत्री विजय, मंत्री आधव अर्जुन, बसी आनंद, सी.टी.आर. निर्मल कुमार और अन्य आरोपियों को जांच पूरी होने तक मामले पर किसी भी प्रकार की सार्वजनिक टिप्पणी करने से रोका जाए। अब इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख तय करेगा कि जांच के दौरान सार्वजनिक बयानबाजी और पीड़ित परिवारों से संपर्क को लेकर आगे क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।

अमरनाथ यात्रा 2026 के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री का देशवासियों से भावुक आह्वान, शिवभक्तों को दिए राष्ट्र निर्माण और जनसेवा से जुड़े पांच संकल्प

नई दिल्ली । पवित्र अमरनाथ यात्रा 2026 के औपचारिक शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर के शिवभक्तों और तीर्थयात्रियों के नाम एक प्रेरणादायी संदेश जारी करते हुए सुरक्षित, अनुशासित और राष्ट्रहित से जुड़ी यात्रा का आह्वान किया। उन्होंने बाबा बर्फानी के दर्शन को सनातन परंपरा का अत्यंत पवित्र अवसर बताते हुए कहा कि यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय चेतना का भी सशक्त प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि देश के विभिन्न राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों से जुड़े लाखों श्रद्धालु एक ही आस्था के सूत्र में बंधकर इस कठिन यात्रा में शामिल होते हैं। यही विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने सभी यात्रियों की सुरक्षित, सफल और मंगलमय यात्रा की कामना करते हुए यात्रा को सेवा, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से पांच महत्वपूर्ण संकल्प अपनाने की अपील की। पहला संकल्प स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि हिमालय का प्राकृतिक वातावरण और अमरनाथ यात्रा मार्ग देश की अमूल्य धरोहर हैं। ऐसे में प्रत्येक श्रद्धालु का दायित्व है कि यात्रा के दौरान स्वच्छता बनाए रखे, प्लास्टिक और अन्य कचरे का उचित निस्तारण करे तथा प्रकृति को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचाए। दूसरे संकल्प में उन्होंने यात्रियों से सुरक्षा नियमों का पूरी गंभीरता से पालन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र का मौसम तेजी से बदलता है और यात्रा मार्ग चुनौतीपूर्ण है। इसलिए प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और चिकित्सा दलों द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना प्रत्येक यात्री की जिम्मेदारी है। तीसरे संकल्प के तहत प्रधानमंत्री ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि यात्रा के दौरान अपने कुल खर्च का एक हिस्सा स्थानीय दुकानदारों, कारीगरों और पारंपरिक उत्पादों की खरीद पर अवश्य खर्च करें। उनका कहना था कि इससे जम्मू-कश्मीर के स्थानीय परिवारों की आजीविका को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। चौथे संकल्प में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियान को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि यात्रा के बाद अपने घर लौटकर कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी नियमित देखभाल करें। उनके अनुसार प्रकृति संरक्षण प्रत्येक नागरिक का सामूहिक दायित्व है और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण छोड़ना हमारी जिम्मेदारी है। पांचवें और अंतिम संकल्प में प्रधानमंत्री ने ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रत्येक नागरिक को अपने संवैधानिक कर्तव्यों, सामाजिक जिम्मेदारियों और राष्ट्रहित को भी समान महत्व देना चाहिए। यही भावना देश की निरंतर प्रगति और एकता को मजबूत करती है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में अमरनाथ यात्रा को सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता का अद्भुत उदाहरण बताया। उन्होंने यात्रा को सफल बनाने में जुटे सुरक्षा बलों, प्रशासन, चिकित्सकों, स्वयंसेवकों, सफाई कर्मियों तथा स्थानीय नागरिकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके समर्पण और सेवा भाव से ही लाखों श्रद्धालुओं की यात्रा सुचारु रूप से संपन्न हो पाती है। अंत में उन्होंने बाबा बर्फानी से देशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और राष्ट्र की निरंतर उन्नति की प्रार्थना की।

जमीन कब्जे के विवाद में बवाल: देवास में तीन लोगों पर जानलेवा हमला, सिर में आई गंभीर चोटें

मध्यप्रदेश । देवास जिले के सोनकच्छ थाना क्षेत्र के देवगुराड़िया गांव में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। खेत बखरने के दौरान हुए इस विवाद में डंडों और धारदार हथियारों से हमला किए जाने से तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है। घायलों की पहचान निर्भय गुर्जर, जितेंद्र गुर्जर और शांतिलाल गुर्जर के रूप में हुई है। पीड़ितों के अनुसार वे अपने खेत में बखरने का कार्य कर रहे थे, तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और उन पर डंडों तथा धारदार हथियारों से हमला कर दिया। घायलों ने आरोप लगाया कि आरोपी उनकी जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं और इसी विवाद के चलते हमला किया गया। शांतिलाल गुर्जर का कहना है कि वह विवाद शांत कराने के लिए मौके पर पहुंचे थे, लेकिन हमलावरों ने उन्हें भी नहीं छोड़ा और मारपीट कर घायल कर दिया। हमले में तीनों के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। इनमें एक घायल के सिर पर 20 से अधिक टांके लगाने पड़े। पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि हमलावरों ने खेत में खड़े ट्रैक्टर में तोड़फोड़ कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

जुलाई 2026 में करियर की परीक्षा या तरक्की का मौका? ग्रहों की चाल से आईटी, बैंकिंग, स्टार्टअप और कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए बड़े बदलावों के संकेत

नई दिल्ली । जुलाई 2026 का महीना भारतीय कॉर्पोरेट जगत में काम करने वाले लाखों पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की बढ़ती गति के बीच कंपनियां अपने प्रदर्शन, लागत नियंत्रण और कार्यप्रणाली की समीक्षा में जुटी हुई हैं। ज्योतिषीय विश्लेषण के अनुसार इस अवधि में ग्रहों की स्थिति कॉर्पोरेट क्षेत्र में पुनर्मूल्यांकन, रणनीतिक बदलाव और कौशल आधारित प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने वाली मानी जा रही है। भारत की स्वतंत्रता कुंडली में वर्तमान समय में मंगल महादशा का प्रभाव माना जा रहा है। द्वितीय भाव में स्थित मंगल वित्तीय संसाधन, राजस्व और आर्थिक निर्णयों से जुड़े विषयों को सक्रिय करता है। इस कारण जुलाई के दौरान कॉर्पोरेट निवेश, वित्तीय नीतियां, लागत प्रबंधन और राजस्व संरचना पर अधिक ध्यान केंद्रित रहने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि कई कंपनियां अपने पुराने सिस्टम, डेटा सुरक्षा और परिचालन खर्चों की व्यापक समीक्षा कर सकती हैं। आईटी, एआई और फिनटेक सेक्टर के लिए यह अवधि अपेक्षाकृत अवसरों वाली मानी जा रही है। वैश्विक स्तर पर एआई आधारित सेवाओं और डिजिटल समाधानों की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जो पेशेवर नई तकनीकों को अपनाने, रिस्किलिंग और अपस्किलिंग पर ध्यान दे रहे हैं, उनके लिए नए प्रोजेक्ट, जिम्मेदारियां और करियर अवसर बढ़ सकते हैं। ज्ञान आधारित क्षेत्रों में नवाचार और रणनीतिक सोच को विशेष महत्व मिलने के संकेत बताए गए हैं। दूसरी ओर स्टार्टअप और वेंचर कैपिटल इकोसिस्टम में चयनात्मक हायरिंग का रुझान बना रह सकता है। जिन कंपनियों का फोकस लाभप्रदता और स्थिर व्यवसाय मॉडल पर है, उन्हें अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में माना जा रहा है, जबकि उच्च बर्न-रेट वाले स्टार्टअप्स को फंडिंग और विस्तार योजनाओं में सावधानी बरतनी पड़ सकती है। मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोबाइल सेक्टर में कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स लागत का दबाव चर्चा का विषय बना रह सकता है। ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों के कारण संचालन दक्षता बढ़ाने की आवश्यकता अधिक महसूस की जा सकती है। इस क्षेत्र में सप्लाई चेन, ऑपरेशंस और प्रोडक्शन से जुड़े पेशेवरों पर प्रदर्शन बनाए रखने का दबाव बढ़ने के संकेत हैं। बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में क्रेडिट रिस्क असेसमेंट, ऑडिट और अनुपालन प्रक्रियाएं अधिक सख्त हो सकती हैं। खुदरा और खाद्य महंगाई के दबाव के बीच वित्तीय संस्थानों द्वारा जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिए जाने की संभावना जताई गई है। इससे बैंकिंग पेशेवरों के लिए यह समय समीक्षा, रिपोर्टिंग और प्रदर्शन मूल्यांकन के लिहाज से व्यस्त रह सकता है। जुलाई के दूसरे पखवाड़े में सूर्य के कर्क राशि में गोचर को नेतृत्व और प्रबंधन से जुड़े निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि किसी कर्मचारी का प्रदर्शन मजबूत रहा है, तो इस अवधि में प्रमोशन, सैलरी हाइक या नई जिम्मेदारियों से जुड़ी फाइलों में तेजी आने की संभावना बताई गई है। हालांकि कार्यस्थल पर संवाद शैली, धैर्य और पेशेवर व्यवहार बनाए रखने की सलाह भी दी गई है, क्योंकि छोटी गलतफहमियां तनाव का कारण बन सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 7 से 24 जुलाई के बीच वक्री बुध के प्रभाव में डेटा प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और संचार से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सावधानी आवश्यक हो सकती है। महत्वपूर्ण ईमेल, वित्तीय लेनदेन और अनुबंधों की दोबारा जांच करने की सलाह दी जा रही है। वहीं 24 जुलाई के बाद अटके हुए इंटरव्यू, जॉब चेंज या कॉर्पोरेट निर्णयों में स्पष्टता आने की संभावना मानी जा रही है। समग्र रूप से जुलाई 2026 का संदेश यही माना जा रहा है कि यह समय निष्क्रिय रहने का नहीं, बल्कि स्वयं को लगातार अपडेट करने का है। जो पेशेवर अपस्किलिंग, संयमित संवाद और तकनीकी जागरूकता पर ध्यान देंगे, वे बदलते कॉर्पोरेट माहौल में बेहतर अवसर हासिल कर सकते हैं।

कोचिंग सेंटरों में मिली बड़ी लापरवाही: बंद मिले एग्जिट, फायर ऑडिट नहीं; नगर निगम का 2 दिन का अल्टीमेटम

मध्यप्रदेश । देशभर में कोचिंग संस्थानों में हुई दुर्घटनाओं के बाद देवास नगर निगम ने शहर के कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू कर दी है। निरीक्षण के दौरान कई संस्थानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आने पर नगर निगम ने संचालकों को दो दिन के भीतर सभी कमियां दूर करने का अंतिम अल्टीमेटम दिया है। तय समय सीमा में सुधार नहीं होने पर संबंधित संस्थानों को सील करने की कार्रवाई की जाएगी। शुक्रवार को नगर निगम की टीम ने शहर के विद्या कोचिंग, पार्थ कोचिंग और वर्मा कोचिंग क्लासेस का निरीक्षण किया। जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं। कई संस्थानों में फायर सेफ्टी और इलेक्ट्रिकल ऑडिट नहीं कराया गया था, जबकि आपातकालीन निकासी की व्यवस्था भी मानकों के अनुरूप नहीं मिली। निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर लापरवाही आपातकालीन निकासी मार्गों को लेकर सामने आई। कई स्थानों पर एग्जिट के रास्ते बंद पाए गए और उनमें कबाड़ रखा हुआ था। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में यह छात्रों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकता है। जांच में यह भी पाया गया कि कुछ कोचिंग संस्थानों में पर्याप्त सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए गए थे। इसके अलावा भवन की क्षमता और विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में अग्निशमन उपकरण भी पर्याप्त नहीं थे। विद्या कोचिंग के संचालक ने अधिकारियों को बताया कि संस्थान में अभी कक्षाएं शुरू नहीं हुई हैं और जल्द ही एग्जिट व्यवस्था, फायर सेफ्टी सहित सभी आवश्यक सुरक्षा मानकों को पूरा कर लिया जाएगा। वहीं पार्थ कोचिंग में केवल एक निकासी मार्ग चालू मिला, जबकि दो अन्य रास्ते बंद थे और उनमें कबाड़ रखा हुआ था। यहां फायर और इलेक्ट्रिकल ऑडिट भी नहीं कराया गया था। नगर निगम की टीम ने तत्काल सुधार करने, बंद एग्जिट खोलने और अग्निशमन उपकरणों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए। नगर निगम ने सभी कोचिंग संचालकों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि दो दिन के भीतर सभी सुरक्षा संबंधी कमियां दूर की जाएं। यदि निर्धारित समय में आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ सीलिंग सहित सख्त कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान नगर निगम के फायर अधिकारी जितेंद्र सिसोदिया, प्रतीक शर्मा, उमेश चतुर्वेदी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

शेयर बाजार में जोरदार तेजी, सेंसेक्स 650 अंक उछला, निफ्टी 24,000 के पार; वैश्विक संकेतों से निवेशकों का बढ़ा भरोसा

नई दिल्ली । सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत करते हुए निवेशकों का उत्साह बढ़ा दिया। वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर बढ़े भरोसे के बीच घरेलू शेयर बाजार में खरीदारी का माहौल देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत में बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स लगभग 650 अंकों की तेजी के साथ 78 हजार के स्तर को पार कर गया, जबकि एनएसई का निफ्टी 24 हजार के ऊपर पहुंचकर मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। विश्लेषकों के अनुसार बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आए हालिया आर्थिक संकेत रहे। जून महीने के रोजगार आंकड़े अपेक्षा से कमजोर रहने के बाद निवेशकों के बीच यह धारणा मजबूत हुई है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में और बढ़ोतरी से बच सकता है। इससे वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी और उभरते बाजारों सहित भारतीय शेयर बाजार को भी इसका सकारात्मक लाभ मिला। बाजार खुलते ही विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, ऑटो, पूंजीगत वस्तुओं और चुनिंदा आईटी कंपनियों के शेयरों ने शुरुआती कारोबार में बढ़त दर्ज की। निवेशकों का रुझान मजबूत कंपनियों और बड़े बाजार पूंजीकरण वाले शेयरों की ओर अधिक दिखाई दिया, जिससे प्रमुख सूचकांकों को सहारा मिला। वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। कुछ प्रमुख बाजारों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि अन्य में सीमित बढ़त रही। इसके बावजूद भारतीय बाजार ने घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी और सकारात्मक वैश्विक संकेतों के कारण मजबूती दिखाई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की धारणा में सुधार भी बाजार की तेजी को समर्थन दे रहा है। अमेरिकी शेयर बाजार में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान मिश्रित प्रदर्शन देखने को मिला। प्रमुख औद्योगिक सूचकांक ने नए रिकॉर्ड स्तर को छुआ, जबकि तकनीकी क्षेत्र के कुछ शेयरों में दबाव रहा। इसके बावजूद अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े ताजा आंकड़ों ने निवेशकों के बीच यह उम्मीद बढ़ाई कि आगे चलकर ब्याज दरों को लेकर राहत मिल सकती है, जिसका सकारात्मक असर वैश्विक निवेश भावना पर पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी भारतीय बाजार के लिए राहत का संकेत मानी जा रही है। कच्चे तेल के दाम नियंत्रित रहने से आयात लागत और महंगाई के दबाव में कमी आने की संभावना रहती है, जिसका सकारात्मक प्रभाव अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट आय पर पड़ सकता है। यही कारण है कि ऊर्जा कीमतों में नरमी को भी बाजार के लिए अनुकूल कारक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों, विदेशी निवेश प्रवाह और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू आर्थिक संकेत मजबूत रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान आगे भी जारी रह सकता है। फिलहाल सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन की मजबूत शुरुआत ने निवेशकों के विश्वास को नई मजबूती प्रदान की है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सरकार का बड़ा संकेत, फिलहाल राहत बरकरार, सस्ती दरों पर फैसला करेगा ग्लोबल क्रूड का रुख

नई दिल्ली । देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत भरी स्थिति बनी हुई है। शुक्रवार को भी सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने ईंधन की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। वहीं भविष्य में कीमतों में संभावित राहत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि सरकार वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार नजर बनाए हुए है। उनके अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम घटने का असर खुदरा ईंधन की कीमतों पर तुरंत दिखाई नहीं देता, क्योंकि कच्चे तेल की खरीद, परिवहन, भंडारण और रिफाइनिंग की पूरी प्रक्रिया में समय लगता है। वर्तमान में पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध ईंधन उस कच्चे तेल से तैयार किया गया है जिसकी खरीद लगभग दो महीने पहले हुई थी। सरकार का कहना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर स्थिर रहती हैं या उनमें और गिरावट आती है, तो आने वाले दिनों में स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए नियमित अंतराल पर मूल्यांकन किया जाएगा, जिसके बाद आवश्यक होने पर खुदरा कीमतों में बदलाव पर निर्णय लिया जा सकता है। हाल के दिनों में देश की एक निजी ईंधन विपणन कंपनी द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती किए जाने के बाद उपभोक्ताओं के बीच यह उम्मीद बढ़ी है कि सरकारी तेल कंपनियां भी कीमतों में राहत दे सकती हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का निर्णय बाजार की वास्तविक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के रुख को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.20 रुपये प्रति लीटर बनी रही। वहीं मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये प्रति लीटर और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर की दर से उपलब्ध है। अलग-अलग राज्यों में स्थानीय करों और वैट के कारण ईंधन की कीमतों में अंतर बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर के मुकाबले रुपये की विनिमय दर, परिवहन लागत और कर संरचना जैसे कई कारक घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसलिए वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल में गिरावट आने के बावजूद खुदरा कीमतों में तत्काल कमी होना हमेशा संभव नहीं होता। सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले सप्ताहों में वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है, तो उपभोक्ताओं को भविष्य में ईंधन कीमतों में राहत मिलने की संभावना पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतें यथावत बनी हुई हैं और उपभोक्ताओं को किसी नई बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

रेलवे फाटक बंद होने के बाद ट्रैक पार करना पड़ेगा भारी, वाहन जब्ती से लेकर जेल, जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने तक का है प्रावधान

नई दिल्ली। रेलवे फाटक बंद होने के बावजूद जल्दबाजी में ट्रैक पार करने की कोशिश करना कई लोगों की आदत बन चुकी है, लेकिन यही लापरवाही कभी भी बड़ी दुर्घटना और कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है। रेलवे प्रशासन लगातार लोगों से अपील करता है कि फाटक बंद होने पर धैर्य रखें और ट्रेन गुजरने तक इंतजार करें। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की जा रही है। रेलवे फाटक तभी बंद किया जाता है जब किसी ट्रेन के आने का निर्धारित समय होता है। इस दौरान फाटक के नीचे से बाइक, कार या अन्य वाहन निकालने की कोशिश न केवल अपनी जान बल्कि दूसरे लोगों की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है। तेज रफ्तार ट्रेन के सामने कुछ सेकंड की लापरवाही भी गंभीर हादसे में बदल सकती है। यही वजह है कि रेलवे ने इस तरह की हरकत को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा है। रेलवे नियमों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति बंद फाटक के नीचे से ट्रैक पार करते हुए पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ रेलवे अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे मामलों में एक हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और परिस्थितियों के आधार पर छह महीने तक की जेल की सजा का भी प्रावधान है। यदि किसी व्यक्ति की वजह से फाटक पर तैनात कर्मचारी के कार्य में बाधा उत्पन्न होती है तो उसके खिलाफ अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई भी संभव है। ऐसे मामलों में केवल आर्थिक दंड या जेल ही नहीं, बल्कि वाहन चालक के ड्राइविंग लाइसेंस पर भी असर पड़ सकता है। संबंधित विभाग गंभीर मामलों में लाइसेंस को निलंबित करने या रद्द करने की कार्रवाई कर सकता है। सड़क सुरक्षा और रेलवे सुरक्षा से जुड़े नियमों के उल्लंघन को देखते हुए संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्रवाई करती हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अब कई लेवल क्रॉसिंग पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं। इन कैमरों के जरिए नियम तोड़ने वालों की पहचान आसानी से की जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति मौके पर नहीं पकड़ा जाता, तब भी वाहन के नंबर के आधार पर बाद में चालान जारी किया जा सकता है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। कई मामलों में रेलवे सुरक्षा बल वाहन को जब्त करने की कार्रवाई भी करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ मिनट बचाने की कोशिश कभी-कभी पूरी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। रेलवे ट्रैक पार करने की जल्दबाजी केवल वाहन चालकों के लिए ही नहीं, बल्कि पैदल चलने वालों के लिए भी समान रूप से खतरनाक है। ट्रेन की गति और दूरी का सही अनुमान लगाना अक्सर संभव नहीं होता, जिससे दुर्घटना का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। रेलवे प्रशासन लोगों से लगातार अपील कर रहा है कि बंद फाटक को किसी भी स्थिति में पार करने का प्रयास न करें। फाटक खुलने तक धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करना ही सबसे सुरक्षित और जिम्मेदार विकल्प है। थोड़ी सी सावधानी न केवल जीवन की रक्षा करती है, बल्कि कानूनी कार्रवाई, आर्थिक नुकसान और अनावश्यक परेशानियों से भी बचाती है। रेलवे सुरक्षा नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी तरीका भी।

सोनमर्ग अटल टनल के पास CRPF वाहन हादसे का शिकार, छह जवान घायल; प्राथमिक उपचार के बाद कैंप में भर्ती, श्रीनगर-लेह हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था बरकरार

नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सोनमर्ग अटल टनल के समीप शुक्रवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) का एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में वाहन में सवार छह जवान घायल हो गए। दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों की टीम मौके पर पहुंची तथा घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। इसके बाद सभी घायल जवानों को आगे की चिकित्सकीय देखभाल के लिए निकटवर्ती सीआरपीएफ कैंप भेज दिया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सीआरपीएफ का वाहन श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर नियमित आवाजाही के दौरान सोनमर्ग सुरंग के पास सड़क से फिसलकर पलट गया। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए संबंधित अधिकारियों ने जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हादसा सड़क की स्थिति, मौसम अथवा किसी तकनीकी कारण से हुआ। अधिकारियों का कहना है कि विस्तृत जांच के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि की जा सकेगी। हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाया गया। सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन के समन्वय से घायलों को बिना किसी देरी के चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई गई। चिकित्सकों की निगरानी में सभी जवानों का उपचार जारी है और उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार किसी भी जवान को गंभीर जीवन-घातक चोट नहीं आई है, हालांकि सभी का आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण किया जा रहा है। श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग रणनीतिक दृष्टि से देश के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में गिना जाता है। इसी मार्ग के जरिए लद्दाख क्षेत्र तक सैन्य और नागरिक आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। सोनमर्ग अटल टनल के आसपास का इलाका भी सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में इस मार्ग पर सुरक्षा बलों की नियमित आवाजाही बनी रहती है और वाहनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विशेष सतर्कता बरती जाती है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब सीआरपीएफ ने वर्ष 2026 की पहली छमाही में अभियानों के दौरान उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में बल को किसी भी अभियान के दौरान जवानों की शहादत का सामना नहीं करना पड़ा। लगातार चल रहे आतंकवाद-रोधी और आंतरिक सुरक्षा अभियानों के बीच यह उपलब्धि सुरक्षा बल के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति में आए सुधार के बाद अभियान संबंधी हताहतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। देश के सबसे बड़े अर्धसैनिक बलों में शामिल सीआरपीएफ के जिम्मे जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियान, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियान, पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद विरोधी अभियान तथा विभिन्न राज्यों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसे महत्वपूर्ण दायित्व हैं। ऐसे में जवानों की सुरक्षित आवाजाही और परिचालन क्षमता बनाए रखना बल की प्राथमिकताओं में शामिल है। सोनमर्ग के निकट हुई यह दुर्घटना सुरक्षा संचालन के दौरान सड़क सुरक्षा और वाहन संचालन से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित करती है। फिलहाल घायल सभी जवानों का उपचार जारी है और संबंधित एजेंसियां दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच में जुटी हैं।