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सरकारी नौकरी का सुनहरा मौका मध्यप्रदेश में 2784 कृषि विस्तार अधिकारी पदों पर निकली भर्ती जानें योग्यता आवेदन और परीक्षा की पूरी जानकारी

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग में कृषि विस्तार अधिकारी यानी एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर के 2784 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी आज से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 17 जुलाई निर्धारित की गई है जबकि भर्ती परीक्षा 2 अगस्त से आयोजित होगी। यह भर्ती समूह 2 उप समूह 1 के अंतर्गत आयोजित की जा रही है और प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए सरकारी सेवा में प्रवेश का महत्वपूर्ण अवसर मानी जा रही है। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवार कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन भर सकते हैं। आवेदन करते समय सभी आवश्यक दस्तावेज सही तरीके से अपलोड करना जरूरी होगा ताकि बाद में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा इसलिए अभ्यर्थियों को अंतिम तिथि का इंतजार करने के बजाय जल्द आवेदन करने की सलाह दी गई है। भर्ती प्रक्रिया में राज्य सरकार की आरक्षण नीति लागू रहेगी। अनुसूचित जाति वर्ग को 20 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति वर्ग को 16 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। कुल 73 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था के अनुसार परिणाम घोषित किए जाएंगे। हालांकि ओबीसी आरक्षण न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा। कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती परीक्षा 2 अगस्त को दो पालियों में आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को निर्धारित रिपोर्टिंग समय से पहले पहुंचना अनिवार्य होगा। रिपोर्टिंग समय समाप्त होने के बाद किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसलिए उम्मीदवारों को समय का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है। परीक्षा में आधार आधारित पहचान सत्यापन अनिवार्य किया गया है। अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र के साथ आधार कार्ड या अन्य वैध फोटो पहचान पत्र लेकर परीक्षा केंद्र पहुंचना होगा। पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं होने पर परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं मिलेगी। परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कर्मचारी चयन मंडल ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। परीक्षा केंद्रों में मोबाइल फोन स्मार्ट वॉच कैलकुलेटर ब्लूटूथ डिवाइस या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। परीक्षा शुरू होने के बाद किसी भी उम्मीदवार को परीक्षा कक्ष से बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी। नियमों का उल्लंघन करने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। भर्ती के लिए कुछ महत्वपूर्ण पात्रता शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। जिन अभ्यर्थियों की 26 जनवरी 2001 या उसके बाद दो से अधिक संतान हैं वे आवेदन के पात्र नहीं होंगे। इसके अलावा जिन पुरुष अभ्यर्थियों का विवाह 21 वर्ष की आयु से पहले और महिला अभ्यर्थियों का विवाह 18 वर्ष की आयु से पहले हुआ है उन्हें भी आवेदन की अनुमति नहीं होगी। महिलाओं के विरुद्ध अपराध में दोषी ठहराए गए पुरुष अभ्यर्थी भी इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सकेंगे। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह भर्ती सुनहरा अवसर है। समय पर आवेदन करने के साथ परीक्षा की तैयारी को अंतिम रूप देना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी साबित हो सकता है।

SIMHASTHA 2028 UPDATES: CM मोहन यादव ने अधिकारियों को बताया शिप्रा का महत्व, बोले नदी का नाम ‘शिप्रा’ है, ‘क्षिप्रा’ नहीं!

Simhastha 2028

SIMHASTHA 2028 UPDATES: भोपाल। सिंहस्त 2028 को लेकर मध्यप्रदेश प्रशासन जोरो-शोरों से तैयारी कर रहा है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को नर्मदा नदी परियोजना और सिंहस्थ की तैयारियों की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को अहम जानकारी दी। दरअसल इस बैठक में अधिकारियों ने प्रस्तुत दस्तावेज में नदी का नाम क्षिप्रा लिखा था। जिसको लेकर CM ने नाराजगी जताई। Gwalior crime news: पति को छोड़ दोस्त के साथ संबंध, दो युवकों के साथ लिव इन में रही महिला की हत्या? AI का हवाला देने पर सीएम ने क्या कहा? सीएम ने आपत्ति जताते हुए कहा कि नदी का नाम प्रामाणिक तौर पर ‘शिप्रा’ है और सरकारी दस्तावेजों में भी इसी नाम को लिखा जायेगा। इसपर अधिकारियों ने बताया कि इंटरनेट और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कई स्रोतों में नदी का नाम ‘क्षिप्रा’ भी दर्ज है। इस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि केवल एआई या इंटरनेट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को महाकवि कालिदास के ‘मेघदूतम्’, ‘रघुवंश’ और वैदिक ग्रंथों का अध्ययन करने की सलाह दी। उनका कहना था कि इन प्राचीन ग्रंथों में नदी का मूल नाम ‘शिप्रा’ मिलता है। ‘शिप्रा’ और ‘क्षिप्रा’ में अंतर क्या बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने दोनों शब्दों का अर्थ भी समझाया। उन्होंने बताया कि ‘क्षिप्र’ का अर्थ होता है तेज गति से चलने वाला, जबकि ‘शिप्रा’ का अर्थ शांत और सौम्य प्रवाह वाली नदी माना जाता है। उन्होंने कहा कि शिप्रा नदी अपने शांत स्वभाव और सहज प्रवाह के लिए जानी जाती है, इसलिए इसका वास्तविक नाम भी उसी प्रकृति को दर्शाता है। 3 जुलाई का शेयर बाजार अपडेट बाजार में रहेगा उतार चढ़ाव या बनेगा नया रिकॉर्ड निवेश से पहले पढ़ें पूरी रिपोर्ट सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर भी जोर गौरतलब है कि 2028 में उज्जैन में विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक सिंहस्थ महापर्व आयोजित होना है। ऐसे में राज्य सरकार तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सिंहस्थ से जुड़े सभी सरकारी दस्तावेजों और रिकॉर्ड में नदी का नाम ‘शिप्रा’ ही लिखा जाए, ताकि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक प्रामाणिकता बनी रहे।

दतिया की चुनावी बिसात पर जातियों का गणित किसके पक्ष में जाएगा ब्राह्मण जाटव और ओबीसी वोटरों पर टिकी सभी दलों की नजर

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने प्रदेश की राजनीति को फिर गर्मा दिया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान और 3 अगस्त को मतगणना से पहले सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं। इस बार चुनाव का सबसे बड़ा आधार जातीय समीकरण माना जा रहा है क्योंकि यहां किसी एक वर्ग के भरोसे जीत हासिल करना आसान नहीं माना जा रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओबीसी ब्राह्मण अनुसूचित जाति और मुस्लिम मतदाताओं का रुख ही चुनावी परिणाम तय करेगा। दतिया विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ा वोट बैंक अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी का है। अनुमानित तौर पर करीब 95 हजार ओबीसी मतदाता हैं जो कुल वोटरों का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा माने जाते हैं। इस वर्ग में यादव कुशवाहा काछी लोधी बघेल पाल समेत कई प्रभावशाली समुदाय शामिल हैं। यही वजह है कि सभी दल इस वर्ग को साधने की रणनीति पर सबसे अधिक जोर दे रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि ओबीसी मतदाता किसी एक दल के पक्ष में एकजुट हो जाते हैं तो मुकाबले की दिशा पूरी तरह बदल सकती है। जातीय समीकरणों में ब्राह्मण और अहिरवार समाज भी सबसे प्रभावशाली माने जा रहे हैं। दोनों समुदायों की अनुमानित संख्या करीब 33 33 हजार बताई जाती है। परंपरागत रूप से ब्राह्मण मतदाताओं का झुकाव भाजपा की ओर माना जाता है जबकि अनुसूचित जाति विशेषकर अहिरवार समाज में कांग्रेस का प्रभाव मजबूत रहा है। ऐसे में इन दोनों वर्गों का रुझान इस उपचुनाव का सबसे अहम फैक्टर बन सकता है। सामान्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या भी लगभग 60 हजार बताई जा रही है। इसमें ब्राह्मणों के अलावा बनिया राजपूत कायस्थ और सिंधी समाज की अच्छी भागीदारी है। यदि सामान्य वर्ग किसी एक दल के समर्थन में एकजुट होता है तो चुनाव का परिणाम एकतरफा भी हो सकता है। दूसरी ओर अनुसूचित जाति के करीब 58 हजार मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे। खटीक वाल्मीकि कोरी और जाटव समाज कई बूथों पर जीत हार का अंतर तय करने की क्षमता रखते हैं। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भले लगभग आठ हजार है लेकिन करीबी मुकाबले में उनका समर्थन भी बेहद अहम साबित हो सकता है। कांग्रेस में उम्मीदवार चयन को लेकर सबसे ज्यादा हलचल दिखाई दे रही है। पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद उपचुनाव की स्थिति बनी है और अब वह अपने बेटे अनुज भारती को टिकट दिलाने के लिए सक्रिय हैं। वहीं वर्ष 2023 में भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए अवधेश नायक भी टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। उनका तर्क है कि पिछली बार उन्होंने पार्टी के लिए त्याग किया था इसलिए इस बार उन्हें मौका मिलना चाहिए। पूर्व विधायक घनश्याम सिंह का नाम भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल है जिससे कांग्रेस में मुकाबला और रोचक हो गया है। दूसरी ओर भाजपा की ओर से पूर्व गृह मंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा का चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है जबकि आजाद समाज पार्टी की ओर से दामोदर यादव प्रमुख चेहरा बनकर सामने आए हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा को 7742 मतों से हराया था इसलिए इस बार का उपचुनाव भी बेहद कांटे का माना जा रहा है। सभी दल जातीय संतुलन संगठनात्मक मजबूती और स्थानीय मुद्दों के सहारे चुनावी जीत का समीकरण तैयार करने में जुटे हैं।

ई रिक्शा चालकों के लिए नई मुसीबत मोबाइल ऐप से हो रहा सिस्टम लॉक सवारियां बीच रास्ते उतरने को मजबूर

भोपाल । भोपाल में ई रिक्शा चालकों के सामने एक नई और गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। शहर के कई इलाकों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि मोबाइल ऐप के जरिए ई रिक्शों के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी बीएमएस से छेड़छाड़ की जा रही है जिसके कारण चलते वाहन अचानक बीच सड़क पर बंद हो रहे हैं। इससे न केवल चालकों की रोजी रोटी पर संकट गहरा गया है बल्कि यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई मामलों में सवारियों को बीच रास्ते उतरना पड़ा जबकि चालकों को वाहन धक्का देकर ले जाना पड़ा। बुधवारा निवासी ई रिक्शा चालक तनवीर मोहम्मद खान ने बताया कि वीआईपी रोड पर बच्चों को लेकर जा रहे थे तभी उनका वाहन अचानक बंद हो गया। काफी कोशिशों के बाद भी रिक्शा चालू नहीं हुआ और आखिरकार उसे धक्का देकर ले जाना पड़ा। बाद में सिस्टम अनलॉक कराने के लिए उनसे 200 रुपए भी लिए गए। तनवीर का कहना है कि एक ही दिन में उनका ई रिक्शा चार बार बंद हुआ जिससे पूरे दिन की कमाई लगभग खत्म हो गई। उनका कहना है कि हर महीने लगभग आठ हजार रुपए की बैंक किस्त भरनी होती है लेकिन जब वाहन ही नहीं चलेगा तो किस्त कैसे चुकाई जाएगी। इसी तरह रेतघाट क्षेत्र के चालक फरान मोहम्मद खान ने भी बताया कि सवारी छोड़ने के बाद उनका ई रिक्शा अचानक बंद हो गया। उन्होंने मुख्य एमसीबी बंद कर दोबारा चालू करने की कोशिश की जिससे कुछ समय के लिए वाहन चल पड़ा लेकिन थोड़ी देर बाद फिर बंद हो गया। बाद में तकनीकी सहायता मिलने के बाद ही वाहन दोबारा चालू हो सका। फरान के अनुसार दिन में कई बार और रात के समय भी यह समस्या सामने आ रही है जिससे काम करना बेहद मुश्किल हो गया है। चालकों का दावा है कि यह समस्या केवल कुछ वाहनों तक सीमित नहीं है बल्कि शहर में बड़ी संख्या में ई रिक्शा प्रभावित हुए हैं। मैकेनिकों की दुकानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। जिन लोगों को तकनीकी जानकारी है वे किसी तरह सिस्टम को अनलॉक कर लेते हैं जबकि बाकी चालक घंटों तक परेशान होते रहते हैं। इससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है और कई लोगों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। जानकारी के अनुसार गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध BAT BMS नाम का एक ऐप ब्लूटूथ के माध्यम से आसपास मौजूद कुछ ई रिक्शों के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम को खोज सकता है। यदि किसी वाहन का सिस्टम पर्याप्त सुरक्षा या पासवर्ड से सुरक्षित नहीं है तो उससे जुड़े कुछ नियंत्रण विकल्प सामने आ सकते हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि सभी मामलों में इसी ऐप का दुरुपयोग हुआ है या नहीं लेकिन इस संभावना को गंभीरता से जांचा जा रहा है। पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ अब पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित ई रिक्शा मॉडलों में सुरक्षा संबंधी कौन सी तकनीकी कमजोरियां मौजूद थीं और उनका किस तरह गलत इस्तेमाल किया गया। यदि यह आशंका सही साबित होती है तो यह केवल भोपाल ही नहीं बल्कि देशभर में ई रिक्शा सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन निर्माताओं को मजबूत साइबर सुरक्षा और सुरक्षित बीएमएस सिस्टम विकसित करने की दिशा में तत्काल कदम उठाने होंगे ताकि चालकों की आजीविका और यात्रियों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सके।

आमिर खान ने शादी की खबर पर लगाई मुहर 5 जुलाई को गौरी स्प्रैट संग लेंगे सात फेरे बेटे जुनैद का रिएक्शन बना चर्चा का विषय

नई दिल्ली। बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान ने अपनी तीसरी शादी को लेकर चल रही सभी अटकलों पर आखिरकार विराम लगा दिया है। अभिनेता ने खुद पुष्टि की है कि वह 5 जुलाई को अपनी गर्लफ्रेंड गौरी स्प्रैट के साथ विवाह बंधन में बंधने जा रहे हैं। 61 वर्ष की उम्र में आमिर अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करने जा रहे हैं और इस खास मौके को उन्होंने पूरी तरह निजी रखने का फैसला किया है। शादी में केवल परिवार के सदस्य और कुछ बेहद करीबी दोस्त ही शामिल होंगे। अभिनेता ने इस मौके पर अपने प्रशंसकों से भी प्यार और आशीर्वाद की अपील की है ताकि उनके जीवन का नया सफर खुशियों से भरा रहे। आमिर खान हाल ही में अपने बेटे जुनैद खान के साथ एक कार्यक्रम में पहुंचे थे जहां उन्होंने मीडिया से खुलकर अपनी शादी को लेकर बातचीत की। सबसे दिलचस्प पल तब देखने को मिला जब आमिर अपनी शादी की जानकारी साझा कर रहे थे और उनके बगल में बैठे जुनैद खान मुस्कुराते हुए नजर आए। पिता की बात सुनकर उनके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। इस दौरान आमिर ने बताया कि शादी किसी आलीशान होटल या बड़े वेडिंग वेन्यू पर नहीं बल्कि उनके घर पर ही होगी। उन्होंने कहा कि यह एक छोटा और पारिवारिक समारोह होगा जिसमें केवल अपने लोग शामिल होंगे। अभिनेता ने स्पष्ट किया कि वह किसी भव्य रिसेप्शन या करोड़ों रुपये के आयोजन के पक्ष में नहीं हैं। उनकी प्राथमिकता सादगी और पारिवारिक माहौल है। आमिर का कहना है कि जीवन के इस महत्वपूर्ण अवसर को वह शोर शराबे के बजाय अपनों के साथ शांत और यादगार तरीके से मनाना चाहते हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान सभी से दुआएं मांगते हुए कहा कि उनकी और गौरी की नई जिंदगी खुशियों और विश्वास से भरी रहे। आमिर खान की निजी जिंदगी हमेशा चर्चा में रही है। उनकी पहली शादी रीना दत्ता से हुई थी जिनसे उन्हें दो बच्चे जुनैद खान और आयरा खान हैं। कई वर्षों तक साथ रहने के बाद दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया। इसके बाद आमिर ने फिल्म निर्माता किरण राव से दूसरी शादी की। इस रिश्ते से उनके बेटे आजाद राव खान का जन्म हुआ। हालांकि वर्ष 2021 में आमिर और किरण ने भी अलग होने का फैसला किया लेकिन दोनों आज भी अच्छे दोस्त हैं और बेटे की परवरिश मिलकर कर रहे हैं। अब आमिर खान गौरी स्प्रैट के साथ अपने जीवन की नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। पिछले कुछ समय से दोनों के रिश्ते की चर्चा लगातार हो रही थी लेकिन अभिनेता ने हमेशा इस रिश्ते को निजी रखा। अब शादी की आधिकारिक पुष्टि के बाद उनके प्रशंसकों में उत्साह बढ़ गया है। सोशल मीडिया पर भी फैंस उन्हें लगातार शुभकामनाएं दे रहे हैं और नई जिंदगी के लिए ढेर सारी बधाइयां भेज रहे हैं। आमिर खान का यह फैसला इस बात का भी संदेश देता है कि जीवन में नई शुरुआत के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती। अपने परिवार के समर्थन और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में वह 5 जुलाई को गौरी स्प्रैट का हाथ थामकर एक नए अध्याय की शुरुआत करेंगे। अब सभी की नजरें इस निजी लेकिन बेहद चर्चित शादी पर टिकी हुई हैं।

संतोषी माता व्रत का पूरा विधान जानें कब रखें कैसे करें पूजा और किन बातों का रखें विशेष ध्यान

नई दिल्ली । संतोषी माता का व्रत हिंदू धर्म में सबसे लोकप्रिय और श्रद्धा से किए जाने वाले व्रतों में से एक माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से शुक्रवार के दिन रखा जाता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से संतोषी माता का व्रत करते हैं उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और घर में सुख शांति समृद्धि तथा संतोष का वास होता है। यह व्रत महिलाएं और पुरुष दोनों कर सकते हैं। विवाह में बाधा संतान सुख आर्थिक परेशानियों और पारिवारिक कलह जैसी समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए भी इस व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। संतोषी माता का व्रत किसी भी शुक्रवार से शुरू किया जा सकता है। सामान्य रूप से लगातार 16 शुक्रवार तक यह व्रत रखने की परंपरा है। यदि किसी कारणवश बीच में व्रत छूट जाए तो अगले शुक्रवार से फिर श्रद्धापूर्वक व्रत जारी रखा जा सकता है। व्रत की शुरुआत से पहले माता का स्मरण कर अपनी मनोकामना का संकल्प लिया जाता है। व्रत वाले दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थल में संतोषी माता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। माता को लाल या पीला वस्त्र अर्पित करें और धूप दीप जलाकर पूजा करें। गुड़ और भुने हुए चने का भोग लगाना इस व्रत का सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है। इसके बाद संतोषी माता की व्रत कथा का श्रद्धापूर्वक श्रवण या पाठ करें। कथा के बाद आरती करें और प्रसाद सभी लोगों में बांटें। संतोषी माता के व्रत में सबसे महत्वपूर्ण नियम खट्टी वस्तुओं का त्याग है। व्रत करने वाला स्वयं तो खट्टी चीजें नहीं खाता ही है साथ ही व्रत के दिन किसी अन्य को भी खट्टी वस्तु खिलाने से बचना चाहिए। नींबू इमली आमचूर अचार दही में खट्टापन और अन्य अम्लीय खाद्य पदार्थों से इस दिन परहेज किया जाता है। मान्यता है कि इस नियम का पालन करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। व्रत के दौरान श्रद्धालु दिनभर फलाहार या एक समय सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं। पूजा में माता के समक्ष अपनी मनोकामना व्यक्त करते हुए परिवार की सुख शांति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है। पूरे व्रत काल में संयम सकारात्मक सोच और संतोष का भाव बनाए रखना भी इस व्रत का प्रमुख संदेश माना जाता है। जब 16 शुक्रवार का व्रत पूरा हो जाए तब उद्यापन किया जाता है। उद्यापन के दिन संतोषी माता की विशेष पूजा की जाती है और गुड़ चने का प्रसाद वितरित किया जाता है। परंपरा के अनुसार आठ बच्चों को भोजन कराया जाता है और उन्हें दक्षिणा तथा उपहार भी दिए जाते हैं। भोजन में भी किसी प्रकार की खट्टी वस्तु शामिल नहीं की जाती। इसके बाद माता का आशीर्वाद लेकर व्रत का समापन किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि संतोषी माता का व्रत केवल मनोकामनाओं की पूर्ति का माध्यम नहीं बल्कि जीवन में संतोष धैर्य और सकारात्मकता का संदेश भी देता है। जो व्यक्ति श्रद्धा विश्वास और नियमों के साथ यह व्रत करता है उसके जीवन में सुख शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है तथा परिवार में खुशहाली बनी रहती है।

स्वस्थ रहना है तो आज ही बदलें ये आदतें जानिए हेल्दी लाइफस्टाइल के आसान और असरदार उपाय

नई दिल्ली । स्वस्थ शरीर ही सुखी जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग काम के दबाव और अनियमित दिनचर्या के कारण अपनी सेहत पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। इसका परिणाम मोटापा मधुमेह उच्च रक्तचाप हृदय रोग और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं के रूप में सामने आता है। यदि कुछ आसान और नियमित आदतों को अपनाया जाए तो लंबे समय तक स्वस्थ और ऊर्जावान जीवन जिया जा सकता है। अच्छी सेहत की शुरुआत संतुलित और पौष्टिक भोजन से होती है। रोजाना के भोजन में हरी सब्जियां मौसमी फल साबुत अनाज दालें दूध दही सूखे मेवे और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शामिल करें। तला भुना भोजन अधिक चीनी नमक और पैकेज्ड फूड का सेवन सीमित रखें। भोजन हमेशा समय पर करें और अधिक खाने से बचें। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम भी उतना ही जरूरी है। प्रतिदिन कम से कम तीस से पैंतालीस मिनट तक तेज चलना योग दौड़ना साइकिल चलाना या कोई भी शारीरिक गतिविधि करने से शरीर फिट रहता है। व्यायाम न केवल वजन नियंत्रित रखता है बल्कि हृदय मांसपेशियों और हड्डियों को भी मजबूत बनाता है। पर्याप्त पानी पीना भी अच्छी सेहत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर हाइड्रेट रहता है पाचन बेहतर होता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलने में मदद मिलती है। अच्छी नींद स्वस्थ जीवन की बुनियाद मानी जाती है। हर व्यक्ति को प्रतिदिन सात से आठ घंटे की गहरी नींद लेनी चाहिए। पर्याप्त नींद लेने से शरीर की मरम्मत होती है रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक स्वास्थ्य। तनाव को कम करने के लिए योग ध्यान प्राणायाम संगीत पढ़ाई या अपनी पसंद के किसी शौक के लिए समय निकालें। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने से भी मानसिक संतुलन बना रहता है। धूम्रपान शराब और अन्य नशीले पदार्थों से दूरी बनाना स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। ये आदतें कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। समय समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी जरूरी है। रक्तचाप शुगर कोलेस्ट्रॉल और अन्य आवश्यक जांच नियमित रूप से करवाने से बीमारियों का समय रहते पता चल जाता है और उनका उपचार आसान हो जाता है। स्वस्थ जीवन का मतलब केवल बीमारी से बचना नहीं बल्कि शारीरिक मानसिक और सामाजिक रूप से संतुलित जीवन जीना है। यदि नियमित दिनचर्या पौष्टिक भोजन पर्याप्त नींद व्यायाम और सकारात्मक सोच को जीवन का हिस्सा बना लिया जाए तो व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ सक्रिय और खुशहाल जीवन जी सकता है।

रील नहीं रियल लाइफ के भी हीरो थे धर्मेंद्र अंडरवर्ल्ड की धमकी पर दिया ऐसा जवाब कि सब रह गए हैरान

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र को दर्शक आज भी उनकी शानदार अदाकारी दमदार संवाद और बेहतरीन एक्शन के लिए याद करते हैं। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर में रोमांस कॉमेडी और एक्शन हर शैली की फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। हालांकि उनकी पहचान केवल बड़े पर्दे तक सीमित नहीं थी। उन्हें करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि वास्तविक जीवन में भी धर्मेंद्र बेहद साहसी और निडर इंसान थे। उनके व्यक्तित्व से जुड़ा ऐसा ही एक किस्सा अभिनेता और निर्देशक सत्यजीत पुरी ने साझा किया जिसने यह साबित किया कि धर्मेंद्र केवल फिल्मों के ही नहीं बल्कि असल जिंदगी के भी सच्चे हीरो थे। सत्यजीत पुरी ने एक इंटरव्यू में बताया कि 1990 के दशक में जब फिल्म इंडस्ट्री पर अंडरवर्ल्ड का दबदबा बढ़ रहा था तब कई कलाकारों को धमकी भरे फोन और दबाव का सामना करना पड़ता था। उस दौर में कई लोग खामोश रहना ही बेहतर समझते थे लेकिन धर्मेंद्र का स्वभाव अलग था। उन्होंने कभी भी डर के आगे झुकना स्वीकार नहीं किया। सत्यजीत पुरी के अनुसार एक समय ऐसा भी आया जब अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों ने धर्मेंद्र पर दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन धर्मेंद्र ने घबराने के बजाय बेहद सख्त और आत्मविश्वास से भरा जवाब दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई उनसे टकराने की कोशिश करेगा तो उनके गांव सनेहवाल के लोग उनके साथ खड़े होंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि उनके पास लड़ने के लिए पूरी फौज जैसी ताकत है और उनसे उलझना किसी के लिए आसान नहीं होगा। बताया जाता है कि धर्मेंद्र के इस बेबाक और निडर जवाब के बाद अंडरवर्ल्ड ने दोबारा उन्हें परेशान करने की कोशिश नहीं की। यह घटना आज भी बॉलीवुड के चर्चित किस्सों में गिनी जाती है और धर्मेंद्र के साहस की मिसाल के रूप में सुनाई जाती है। धर्मेंद्र का व्यक्तित्व हमेशा सादगी और आत्मसम्मान से जुड़ा रहा। उन्होंने अपने करियर में कभी विवादों के सहारे लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश नहीं की बल्कि अपने काम और व्यवहार से लोगों का दिल जीता। यही वजह रही कि फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें बेहद सम्मान की नजर से देखा जाता था। धर्मेंद्र ने अपने फिल्मी करियर में सैकड़ों फिल्मों में अभिनय किया और कई सुपरहिट फिल्मों का हिस्सा रहे। उनकी जोड़ी कई बड़े सितारों के साथ पसंद की गई लेकिन अमिताभ बच्चन के साथ उनकी फिल्मों को आज भी दर्शक बड़े चाव से देखते हैं। उनकी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और बेहतरीन अभिनय ने उन्हें हिंदी सिनेमा का ही मैन बना दिया। 24 नवंबर 2025 को धर्मेंद्र के निधन की खबर ने फिल्म जगत और उनके करोड़ों प्रशंसकों को गहरा दुख पहुंचाया। उनके जाने के बाद भी उनकी फिल्में उनके संवाद और उनके साहस से जुड़े किस्से लोगों के दिलों में जिंदा हैं। मरणोपरांत उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया जो भारतीय सिनेमा में उनके असाधारण योगदान का सम्मान था। धर्मेंद्र का जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्चा नायक केवल पर्दे पर नहीं बल्कि अपने सिद्धांतों साहस और आत्मसम्मान से वास्तविक जीवन में भी पहचाना जाता है। यही कारण है कि उन्हें आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और प्रेरणादायक कलाकारों में गिना जाता है।

शुक्रवार व्रत कैसे करें धन सुख और समृद्धि पाने के लिए अपनाएं पूजा की सही विधि और उपाय

नई दिल्ली । शुक्रवार का व्रत माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत एवं पूजा करने से घर में सुख समृद्धि धन वैभव और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। जिन लोगों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हो या परिवार में सुख शांति की कामना हो उनके लिए शुक्रवार का व्रत विशेष फलदायी माना गया है। व्रत के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ या सफेद रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर और मुख्य द्वार की सफाई करें। पूजा स्थान पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि भगवान विष्णु की प्रतिमा भी हो तो उनका पूजन अवश्य करें क्योंकि माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ पूजी जाती हैं। पूजा में कमल का फूल या सफेद सुगंधित पुष्प अर्पित करें। रोली हल्दी अक्षत चंदन धूप दीप नैवेद्य फल मिठाई और खीर का भोग लगाना शुभ माना जाता है। घी का दीपक जलाकर माता लक्ष्मी का ध्यान करें और श्रीसूक्त कनकधारा स्तोत्र या लक्ष्मी अष्टोत्तर नामावली का पाठ करें। इसके साथ ही ऊँ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः मंत्र की कम से कम 108 बार माला जपना अत्यंत शुभ माना जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर सात्विक भोजन का पालन करें। कई लोग केवल फलाहार करते हैं जबकि कुछ श्रद्धालु एक समय बिना लहसुन प्याज का भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत के दौरान क्रोध कटु वचन और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि माता लक्ष्मी स्वच्छता विनम्रता और मधुर व्यवहार से प्रसन्न होती हैं। शाम के समय पुनः माता लक्ष्मी की आरती करें और दीपक जलाएं। यदि संभव हो तो घर के मुख्य द्वार पर भी दीपक रखें। पूजा के बाद परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद बांटें और जरूरतमंद लोगों को भोजन वस्त्र या सफेद रंग की वस्तुओं का दान करें। शुक्रवार के दिन कन्याओं को मिठाई या खीर खिलाना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि लगातार 11 या 16 शुक्रवार तक विधिपूर्वक व्रत करने से आर्थिक संकट दूर होते हैं और घर में सुख समृद्धि का आगमन होता है। हालांकि व्रत का सबसे महत्वपूर्ण नियम श्रद्धा सच्ची निष्ठा और सकारात्मक आचरण माना गया है। शुक्रवार का व्रत केवल धन प्राप्ति का माध्यम नहीं बल्कि आत्मसंयम सदाचार और ईश्वर के प्रति आस्था को मजबूत करने का भी अवसर है। जब पूजा के साथ सेवा दान और सद्भाव जुड़ जाता है तब उसका आध्यात्मिक और सकारात्मक प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

क्या सच में सुजैन खान को मिले थे 400 करोड़ रुपये? फराह खान अली ने सालों पुरानी अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी

नई दिल्ली। बॉलीवुड के सबसे चर्चित रिश्तों में शामिल रहे ऋतिक रोशन और सुजैन खान का तलाक आज भी चर्चा का विषय बना रहता है। दोनों ने साल 2000 में शादी की थी और करीब 14 साल साथ रहने के बाद 2014 में आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया। तलाक के बाद सबसे ज्यादा जिस बात ने सुर्खियां बटोरी वह थी यह दावा कि सुजैन खान को एलिमनी के रूप में 400 करोड़ रुपये मिले थे। अब इस मामले पर सुजैन की बड़ी बहन और जानी मानी ज्वेलरी डिजाइनर फराह खान अली ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है और इन सभी दावों को पूरी तरह निराधार बताया है। एक इंटरव्यू में फराह खान अली ने कहा कि वर्षों से सोशल मीडिया और विभिन्न रिपोर्टों में 400 करोड़ रुपये की एलिमनी की जो बातें कही जाती रही हैं उनमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनकी बहन ने तलाक के दौरान किसी तरह की एलिमनी नहीं ली। उन्होंने बताया कि जब भी वह इस तरह की खबरें पढ़ती हैं तो उन्हें बेहद दुख होता है क्योंकि इससे सुजैन की छवि को गलत तरीके से पेश किया जाता है। फराह ने कहा कि उनका परिवार हमेशा से रिश्तों और मानवीय मूल्यों को धन दौलत से अधिक महत्व देता आया है। उनके अनुसार सुजैन ने कभी भी आर्थिक लाभ के लिए कोई निर्णय नहीं लिया और यही वजह है कि आज भी उनके रिश्ते ऋतिक रोशन और उनके परिवार के साथ बेहद सम्मानजनक और सौहार्दपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि राकेश रोशन और पिंकी रोशन आज भी सुजैन को परिवार का हिस्सा मानते हैं और दोनों परिवारों के बीच अच्छे संबंध कायम हैं। फराह खान अली ने यह भी बताया कि तलाक के समय पूरा परिवार इस फैसले से भावुक था और सभी को गहरा झटका लगा था। हालांकि समय के साथ दोनों परिवारों ने इस स्थिति को समझदारी से स्वीकार किया और किसी तरह की सार्वजनिक कटुता सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि ऋतिक और सुजैन दोनों ने अपने रिश्ते के अंत को बेहद गरिमा और परिपक्वता के साथ संभाला। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने कई बार सुजैन से कहा कि वह 400 करोड़ रुपये वाली अफवाहों का सार्वजनिक रूप से खंडन करें लेकिन सुजैन ने हमेशा यही कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। फराह के अनुसार सुजैन का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति का उनके जीवन में कोई महत्व नहीं है तो उसकी राय भी उनके लिए मायने नहीं रखती। फराह ने ऋतिक और सुजैन की शादी को याद करते हुए कहा कि दोनों एक दूसरे से बेहद प्यार करते थे और शादी करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध थे। उस समय ऋतिक के करियर की शुरुआत हुई थी और परिवार चाहता था कि शादी कुछ समय बाद हो लेकिन दोनों ने अपने रिश्ते को प्राथमिकता देते हुए विवाह का निर्णय लिया। वर्तमान समय में ऋतिक रोशन अभिनेत्री सबा आजाद के साथ रिश्ते में हैं जबकि सुजैन खान अभिनेता अर्सलान गोनी को डेट कर रही हैं। फराह ने दोनों जोड़ों के लिए खुशी जताते हुए कहा कि जीवन में सबसे जरूरी बात खुश रहना है और ऐसे लोगों के साथ रहना है जो आपको सम्मान और सुकून दें। उनके अनुसार जब रिश्ते सम्मान और समझदारी पर टिके हों तो अलग होने के बाद भी आपसी सम्मान और दोस्ती बनाए रखी जा सकती है। यही बात ऋतिक और सुजैन के रिश्ते को आज भी खास बनाती है।