Gwalior crime news: पति को छोड़ दोस्त के साथ संबंध, दो युवकों के साथ लिव इन में रही महिला की हत्या?

Gwalior crime news: ग्वालियर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर से एक ऐसा मामला सामना आया है, जिसने रिश्तों के बंधनों को तार-तार कर रख दिया है। 11 साल पहले एक आरती नाम की नाम की महिला की शादी हुई, जिससे उसे 2 हुए। लेकिन वक्त बिता पति से लगा होकर महिला उसके दोस्त के साथ रहने लगी, वहां भी रिश्ता नहीं टिका तो दूसरे पति के रिश्तेदार के साथ सम्बंध में आ गयी। तीन रिश्तों में उलझे इस सफर का अंत आखिरकार महिला की हत्या के साथ हुआ। मामला ग्वालियर के हजारी थाना क्षैत्र का है, जहां 30 वर्षीय आरती की 1 जुलाई 2026 को गला दबाकर हत्या कर दी गई। पुलिस की शुरुआती जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हत्या की पुष्टि हुई है। मामले में एक आरोपी हिरासत में है, जबकि दूसरा फरार है। शुक्रवार व्रत कैसे करें धन सुख और समृद्धि पाने के लिए अपनाएं पूजा की सही विधि और उपाय शादी से शुरू हुई जिंदगी, फिर बदलते गए रिश्ते आरती की शादी 21 अप्रैल 2015 को शिवपुरी जिले के बिचपुरी गांव निवासी अतर सिंह से हुई थी। शादी के बाद दोनों के दो बच्चे हुए और परिवार सामान्य रूप से चल रहा था। परिजनों का कहना है कि इसी दौरान अतर सिंह के दोस्त धर्मेंद्र का घर में आना-जाना बढ़ा। धीरे-धीरे धर्मेंद्र और आरती के बीच नजदीकियां बढ़ीं। इस वजह से अतर सिंह और धर्मेंद्र के बीच विवाद और मारपीट तक की नौबत आ गई। करीब तीन साल पहले आरती ने पति का घर छोड़ दिया और धर्मेंद्र के साथ रहने लगी। उसने अपने कुछ दस्तावेजों में भी पति की जगह धर्मेंद्र का नाम दर्ज करा लिया था। दूसरा रिश्ता भी नहीं चला कुछ समय बाद आरती और धर्मेंद्र के बीच भी दूरियां बढ़ने लगीं। इसी दौरान धर्मेंद्र के फुफेरे भाई संजू से उसकी मुलाकात हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और करीब दो महीने पहले आरती अपने दोनों बच्चों के साथ संजू के पास ग्वालियर के आरा मिल इलाके में किराए के मकान में रहने लगी। दोनों ई-रिक्शा चलाकर घर का खर्च चलाते थे। परिवार का कहना है कि आरती अपने बच्चों की पढ़ाई और बेहतर भविष्य के लिए लगातार मेहनत कर रही थी। क्या सच में सुजैन खान को मिले थे 400 करोड़ रुपये? फराह खान अली ने सालों पुरानी अफवाहों पर तोड़ी चुप्पी हत्या से पहले भाई को किया आखिरी फोन 1 जुलाई को आरती रोज की तरह ई-रिक्शा चलाकर घर लौटी। कुछ देर बाद संजू भी घर पहुंचा। इसी बीच धर्मेंद्र भी वहां आ गया। परिजनों के अनुसार, तीनों ने साथ बैठकर शराब पी, लेकिन कुछ ही देर में पुराने रिश्तों को लेकर विवाद शुरू हो गया। इसी दौरान आरती ने अपने भाई को फोन किया। उसने बताया कि धर्मेंद्र उसे लगातार धमकी दे रहा है। आरती ने कहा कि अगर वह उसके साथ नहीं रही तो धर्मेंद्र उसे और संजू दोनों को जान से मार देगा। यह अपने भाई से उसकी आखिरी बातचीत साबित हुई। परिजनों का आरोप- दोनों ने मिलकर की हत्या परिजनों का आरोप है कि विवाद के बाद धर्मेंद्र और संजू ने मिलकर आरती का गला दबा दिया। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई। सूचना मिलते ही हजीरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने संजू को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी, जबकि धर्मेंद्र घटना के बाद से फरार है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हुई पुष्टि पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में आरती की मौत गला दबाने से होने की पुष्टि हुई है। जांच में यह भी सामने आया है कि महिला के निजी रिश्तों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। हालांकि पुलिस का कहना है कि मामले की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। मंदिरों के दान पर बढ़ेगी निगरानी: बिहार धार्मिक न्यास परिषद का बड़ा फैसला, अब हर तीन महीने होगी खातों की समीक्षा CCTV बना बड़ा सुराग जांच के दौरान पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में धर्मेंद्र घटनास्थल से निकलता दिखाई दिया है। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी है और संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपी को जल्द गिरफ्तार कर पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया जाएगा। फिलहाल पुलिस सभी साक्ष्यों और बयानों के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।
जमीन के नीचे मिला 40,000 सिक्कों का रोमन खजाना, फ्रांस में खुदाई में 1,700 साल पुराना इतिहास उजागर

नई दिल्ली। फ्रांस के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित शांत गांव सेनन में हुई एक साधारण खुदाई ने इतिहास के सबसे बड़े रहस्यों में से एक को उजागर कर दिया है। एक मकान के विस्तार के दौरान जमीन के नीचे तीन बड़े मिट्टी के घड़े मिले, जिनमें लगभग 1,700 साल पुराने 40,000 से अधिक रोमन कांसे और तांबे के सिक्के भरे हुए थे। यह खोज केवल एक खजाना नहीं, बल्कि रोमन साम्राज्य के उस भूले-बिसरे दौर की झलक है, जब वहां समृद्ध जीवन, व्यवस्थित शहर और आधुनिक माने जाने वाले ढांचागत सिस्टम मौजूद थे। खुदाई में मिला पूरा रोमन मोहल्लायह खोज तब सामने आई जब एक निजी संपत्ति पर निर्माण कार्य के लिए खुदाई शुरू की गई। इसके बाद नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर प्रिवेंटिव आर्कियोलॉजिकल रिसर्च (INRAP) की टीम ने 1,500 वर्ग मीटर क्षेत्र की जांच की। जांच में सिर्फ सिक्के ही नहीं, बल्कि एक पूरा रोमन आवासीय इलाका सामने आया, जिसमें पत्थर के घर, पक्की सड़कें, आंगन, कार्यशालाएं और जमीन के नीचे बना प्राचीन हीटिंग सिस्टम (हाइपोकॉस्ट) भी शामिल था। इससे संकेत मिलता है कि यह इलाका कभी व्यापारियों और समृद्ध कारीगरों का केंद्र रहा होगा। तीन घड़ों में छिपा ‘होम बैंक’पुरातत्वविदों के लिए सबसे बड़ी रहस्यपूर्ण खोज तीन मिट्टी के घड़े हैं, जिन्हें फर्श के नीचे बेहद व्यवस्थित तरीके से रखा गया था। इनमें से एक घड़े में लगभग 23,000 सिक्के थे, जिनका वजन करीब 38 किलोग्राम बताया गया है। दूसरे घड़े में लगभग 18,000 सिक्के मिले, जबकि तीसरा घड़ा खाली पाया गया। विशेष बात यह है कि इन घड़ों को सामान्य तौर पर खजाना छिपाने की तरह जल्दबाजी में नहीं, बल्कि एक योजनाबद्ध तरीके से जमीन के नीचे रखा गया था। इससे शोधकर्ताओं को यह अनुमान लगाने का आधार मिला है कि यह किसी तरह का ‘होम बैंक’ रहा होगा, जहां लोग अपनी दैनिक बचत जमा और निकालते थे। सिक्कों पर रोमन शासकों की छापइन सिक्कों पर रोमन साम्राज्य के शासकों विक्टोरिनस और टेट्रिकस के चित्र अंकित हैं, जो तीसरी शताब्दी से संबंधित हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह क्षेत्र उस समय रोमन प्रशासन और आर्थिक गतिविधियों का सक्रिय केंद्र रहा होगा। आग ने बदल दी पूरी कहानीपुरातात्विक अध्ययन के अनुसार, चौथी शताब्दी की शुरुआत में इस समृद्ध इलाके में एक भीषण आग लगी, जिसने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया। हालांकि बाद में लोगों ने इसे फिर से बसाने की कोशिश की, लेकिन कुछ समय बाद एक और बड़ी आग ने इस बस्ती को पूरी तरह नष्ट कर दिया। इसके बाद यह इलाका पूरी तरह उजड़ गया और निवासी कभी वापस नहीं लौटे। समय के साथ घर मलबे में बदल गए और फर्श के नीचे दबा यह ‘होम बैंक’ इतिहास की परतों में खो गया, जो अब सदियों बाद फिर से सामने आया है।
3 जुलाई शुक्रवार का वास्तु उपाय घर में सुख समृद्धि और धन वृद्धि के लिए अपनाएं ये आसान नियम

नई दिल्ली । शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन घर की स्वच्छता सकारात्मक ऊर्जा और सही दिशा में रखी गई वस्तुएं आर्थिक समृद्धि तथा पारिवारिक सुख को बढ़ाने में सहायक होती हैं। 3 जुलाई शुक्रवार के दिन यदि कुछ सरल वास्तु नियमों का पालन किया जाए तो घर का वातावरण सकारात्मक बनता है और वास्तु दोषों का प्रभाव भी कम होने लगता है। दिन की शुरुआत घर के मुख्य द्वार की सफाई से करें। मुख्य प्रवेश द्वार पर गंदगी या अनावश्यक सामान नहीं होना चाहिए क्योंकि वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश मार्ग माना गया है। यदि संभव हो तो सुबह रंगोली बनाएं और घी का दीपक जलाकर माता लक्ष्मी का स्मरण करें। घर के उत्तर और उत्तर पूर्व दिशा को साफ और खुला रखें। इन दिशाओं को धन और शुभ ऊर्जा का क्षेत्र माना जाता है। यहां भारी सामान कबाड़ या टूटी हुई वस्तुएं रखने से आर्थिक उन्नति में बाधा आने की मान्यता है। यदि ऐसी कोई वस्तु हो तो उसे तुरंत हटा दें। शुक्रवार के दिन रसोईघर की विशेष सफाई करना शुभ माना जाता है। गैस चूल्हे और भोजन बनाने की जगह को साफ रखें। अन्न का अपमान न करें और रसोई में बर्तन लंबे समय तक गंदे न छोड़ें। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। पूजा स्थल में सफेद या गुलाबी रंग के फूल अर्पित करें। माता लक्ष्मी को कमल का फूल विशेष प्रिय माना जाता है। यदि कमल उपलब्ध न हो तो सुगंधित सफेद फूल भी अर्पित किए जा सकते हैं। शाम के समय घी का दीपक जलाकर श्रीसूक्त या लक्ष्मी मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है। शुक्रवार को घर में टूटे हुए कांच बंद घड़ी फटे हुए जूते चप्पल या बेकार इलेक्ट्रॉनिक सामान लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए। ऐसी वस्तुएं नकारात्मक ऊर्जा का कारण मानी जाती हैं और तरक्की में रुकावट पैदा कर सकती हैं। धन रखने की अलमारी को दक्षिण पश्चिम दिशा में रखना और उसका मुंह उत्तर या पूर्व दिशा की ओर खुलना शुभ माना जाता है। अलमारी में स्वच्छता बनाए रखें और उसमें अनावश्यक कागज या बेकार सामान जमा न करें। इससे धन संबंधी ऊर्जा संतुलित रहती है। यदि घर में तुलसी का पौधा है तो शुक्रवार शाम उसके पास दीपक जलाएं। इससे घर में सकारात्मक वातावरण बनता है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। साथ ही घर के सभी सदस्यों को मीठा बोलने और अनावश्यक विवाद से बचने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि वास्तु केवल भवन का नहीं बल्कि व्यवहार का भी विज्ञान माना जाता है। आज का संदेश यही है कि छोटी छोटी सकारात्मक आदतें और स्वच्छता ही बड़े वास्तु दोषों को कम करने का आधार बन सकती हैं। श्रद्धा और सकारात्मक सोच के साथ किए गए उपाय घर में सुख शांति और समृद्धि का वातावरण बनाने में सहायक माने जाते हैं।
सोने में 3 हफ्ते की सबसे बड़ी तेजी, 4,151 डॉलर के पार पहुंचा भाव, चांदी में भी जोरदार उछाल

नई दिल्ली। कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी का रुख जारी है। पिछले दो दिनों में लगातार बढ़त दर्ज करते हुए सोना पिछले तीन हफ्तों की सबसे बड़ी छलांग के साथ नए स्तर पर पहुंच गया है। इससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना भी कमजोर पड़ गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,150 डॉलर के पारसिंगापुर स्पॉट मार्केट में सोना 0.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,151.48 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता देखा गया। इससे पहले पिछले सत्र में सोने में 2.3 प्रतिशत की तेज बढ़त दर्ज की गई थी, जो पिछले तीन हफ्तों में सबसे बड़ी दैनिक बढ़त मानी जा रही है। चांदी भी मजबूत रुख के साथ 1 प्रतिशत बढ़कर 61.50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। इससे पहले यह लगातार तीन सत्रों में करीब 5 प्रतिशत तक चढ़ चुकी है। ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स में पिछले सत्र की 0.5 प्रतिशत गिरावट के बाद हल्की मजबूती देखने को मिली है। घरेलू बाजार में भी उतार-चढ़ावघरेलू वायदा बाजार (MCX) में गुरुवार रात करीब 11:30 बजे सोना मामूली गिरावट के साथ 1,45,723 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं चांदी भी कमजोर होकर 2,33,200 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना 1,43,003 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,28,850 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बंद हुई। अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों का असरगुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में जून महीने में रोजगार वृद्धि की रफ्तार में तेज गिरावट दर्ज की गई है। इससे संकेत मिला है कि मजबूत दिखने के बावजूद अमेरिकी श्रम बाजार अब भी दबाव में है। इन आंकड़ों के बाद जुलाई में होने वाली फेडरल रिजर्व की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना काफी कम हो गई है। पहले जहां दर बढ़ोतरी की उम्मीद अधिक थी, वहीं अब स्वैप मार्केट में इसकी संभावना घटकर लगभग 18 प्रतिशत रह गई है, जो सप्ताह की शुरुआत में करीब 33 प्रतिशत थी। तेल और भू-राजनीतिक कारकों का भी असरहाल के महीनों में महंगाई को बढ़ाने वाला एक प्रमुख कारण रहे कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी देखी जा रही है। होर्मुज जलमार्ग से टैंकरों की आवाजाही बढ़ने और अमेरिका-ईरान के बीच कतर में हुई सकारात्मक वार्ता के बाद तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर के करीब आ गई हैं। इन घटनाक्रमों का असर वैश्विक महंगाई के दबाव को कम करने की दिशा में देखा जा रहा है। आगे और तेजी की संभावना सीमितटीडी सिक्योरिटीज में कमोडिटी रणनीति प्रमुख बार्ट मेलेक के अनुसार, कम ऊर्जा कीमतें और कमजोर रोजगार वृद्धि आने वाले समय में मुद्रास्फीति के दबाव को घटा सकती हैं। उनका कहना है कि इससे सोने में शॉर्ट पोजीशन कवरिंग बढ़ी है, जबकि नई बिकवाली का दबाव कम हुआ है। हालांकि, उनका मानना है कि सोने में तेजी फिलहाल 4,280 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक सीमित रह सकती है। वहीं, लंबे समय में 5,300 डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचने की उम्मीद फिलहाल अगले साल तक टल सकती है।
3 जुलाई का शेयर बाजार अपडेट बाजार में रहेगा उतार चढ़ाव या बनेगा नया रिकॉर्ड निवेश से पहले पढ़ें पूरी रिपोर्ट

नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में 3 जुलाई का कारोबारी सत्र कई महत्वपूर्ण घरेलू और वैश्विक संकेतों के बीच शुरू होगा। पिछले कुछ दिनों से बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर अब वैश्विक आर्थिक आंकड़ों कच्चे तेल की कीमतों विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर टिकी हुई है। ऐसे में आज का कारोबार भी काफी हलचल भरा रहने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत हल्की बढ़त या सीमित उतार चढ़ाव के साथ हो सकती है। यदि विदेशी बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो बैंकिंग आईटी ऑटो और कैपिटल गुड्स सेक्टर में अच्छी खरीदारी देखने को मिल सकती है। वहीं वैश्विक स्तर पर किसी नकारात्मक खबर का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई और घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई की खरीद बिक्री अहम भूमिका निभाएगी। यदि विदेशी निवेशकों का भरोसा बरकरार रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है जबकि बिकवाली बढ़ने पर मुनाफावसूली का दबाव भी देखने को मिल सकता है। आईटी सेक्टर पर निवेशकों की विशेष नजर बनी रहेगी क्योंकि आने वाले दिनों में बड़ी कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे सामने आने वाले हैं। इसके अलावा बैंकिंग शेयरों में भी गतिविधि तेज रहने की उम्मीद है। यदि ब्याज दरों को लेकर वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो वित्तीय शेयरों को समर्थन मिल सकता है। ऑटो सेक्टर में मासिक बिक्री के आंकड़े निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। अच्छी बिक्री दर्ज करने वाली कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं एफएमसीजी और फार्मा सेक्टर भी रक्षात्मक निवेश के लिहाज से आकर्षण का केंद्र बने रह सकते हैं। ऊर्जा और तेल गैस कंपनियों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव का सीधा असर इन कंपनियों के प्रदर्शन पर पड़ता है। यदि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है तो इससे भारतीय अर्थव्यवस्था और कई सेक्टर्स को राहत मिल सकती है। विशेषज्ञ फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न दे सकता है। इंट्राडे ट्रेडर्स के लिए आज का सत्र अवसरों के साथ जोखिम भी लेकर आ सकता है इसलिए स्टॉप लॉस का पालन करना जरूरी रहेगा। बाजार की चाल पर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों वैश्विक महंगाई की स्थिति डॉलर इंडेक्स और एशियाई बाजारों के प्रदर्शन का भी प्रभाव रहेगा। यदि वैश्विक संकेत सकारात्मक रहते हैं तो भारतीय शेयर बाजार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है। हालांकि किसी भी अप्रत्याशित अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से बाजार में अचानक उतार चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर 3 जुलाई का कारोबारी दिन निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। समझदारी से निवेश करने वाले निवेशकों के लिए बाजार में अच्छे अवसर बन सकते हैं जबकि बिना रणनीति के निवेश करने वालों को सतर्क रहने की जरूरत होगी।
Weather Update 3 July बारिश और बादलों का डबल अटैक कई राज्यों में ऑरेंज अलर्ट जारी मौसम विभाग ने दी सतर्क रहने की सलाह

नई दिल्ली । देशभर में 3 जुलाई शुक्रवार को मौसम का मिजाज तेजी से बदलता नजर आएगा। दक्षिण पश्चिम मानसून अब देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिय हो चुका है और इसका असर उत्तर भारत मध्य भारत पश्चिमी तटीय राज्यों तथा पूर्वोत्तर भारत में साफ दिखाई देगा। मौसम विभाग के अनुसार कई राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना है। वहीं कुछ इलाकों में तेज धूप और उमस लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और यात्रा से पहले स्थानीय मौसम की जानकारी लेने की सलाह दी गई है। दिल्ली एनसीआर में दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं जिससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी। सुबह और शाम के समय मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहने की संभावना है। उत्तर प्रदेश बिहार झारखंड और उत्तराखंड में गरज चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन और तेज बहाव वाले नालों के पास जाने से बचने की सलाह दी गई है। मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और पूर्वी राजस्थान में मानसून सक्रिय रहेगा। कई जिलों में अच्छी बारिश होने की संभावना है जिससे किसानों को राहत मिलेगी और खरीफ फसलों की बुआई को गति मिलेगी। हालांकि पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में गर्मी और उमस का असर अभी भी बना रह सकता है। महाराष्ट्र गोवा कर्नाटक और केरल के तटीय इलाकों में लगातार बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है जिससे जलभराव और यातायात प्रभावित होने की आशंका है। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की जरूरत है। पूर्वोत्तर भारत के असम मेघालय अरुणाचल प्रदेश नागालैंड मणिपुर मिजोरम और त्रिपुरा में भी तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। कई नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और निचले क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। कुछ स्थानों पर बादलों के बीच धूप निकलने से उमस बनी रह सकती है। किसानों को मौसम के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक मानसून की सक्रियता बनी रहेगी। ऐसे में जिन क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है वहां लोगों को जलभराव बिजली गिरने और तेज हवा जैसी परिस्थितियों से सावधान रहने की जरूरत है। घर से बाहर निकलते समय छाता या रेनकोट साथ रखें और मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट पर लगातार नजर बनाए रखें। मानसून की यह सक्रियता एक ओर जहां गर्मी से राहत दे रही है वहीं दूसरी ओर कई इलाकों में सावधानी बरतना भी बेहद जरूरी हो गया है।
दिग्विजय सिंह के 'फैक्ट चेक' से बदला सियासी समीकरण, भाजपा ने की तारीफ तो कांग्रेस में उठे सवाल

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक बयान इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। उज्जैन की एक जमीन से जुड़े मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोपों पर सवाल उठाने के बाद जहां भाजपा नेताओं ने दिग्विजय सिंह की खुले तौर पर सराहना की, वहीं कांग्रेस के भीतर उनके बयान को लेकर असहजता और विरोध के स्वर भी सुनाई देने लगे। वीर भारत न्यास की जमीन से शुरू हुआ विवादपूरा विवाद 24 जून को उस समय शुरू हुआ, जब कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पार्टी के मीडिया विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन ‘वीर भारत न्यास’ को मात्र एक रुपये में आवंटित कर दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी इस ट्रस्ट से जुड़े रहे हैं और आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। दिग्विजय सिंह ने दस्तावेजों का हवाला देकर रखा अलग पक्षकुछ दिनों बाद उज्जैन दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके पास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार संबंधित जमीन किसी निजी ट्रस्ट को नहीं, बल्कि एक सरकारी ट्रस्ट को दी गई थी। उन्होंने कहा कि वह किसी भी विषय पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से पहले तथ्यों और दस्तावेजों की जांच करते हैं। उनके अनुसार संबंधित ट्रस्ट का पदेन अध्यक्ष राज्य का मुख्यमंत्री होता है, इसलिए इसे निजी ट्रस्ट कहना सही नहीं है। इसी दौरान उन्होंने यह भी कहा कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए आरोप लगाने वाले लोगों की कमी नहीं है। बाद में इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई। भाजपा विधायक से मिली थी शुरुआती जानकारीबड़वानी में मीडिया से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने बताया कि जिस जानकारी के आधार पर विवाद खड़ा हुआ, वही जानकारी उन्हें भी एक भाजपा विधायक और स्थानीय अखबार के माध्यम से मिली थी। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें पता चला कि संबंधित ट्रस्ट सरकारी स्वरूप का है, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा। भाजपा नेताओं ने की सराहनादिग्विजय सिंह के बयान के बाद भाजपा नेताओं ने उनकी तथ्य आधारित टिप्पणी की प्रशंसा की। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष उषा अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि झूठ ज्यादा समय तक नहीं टिकता और दावा किया कि कांग्रेस के आरोपों को उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता ने तथ्यों के आधार पर खारिज कर दिया। भाजपा प्रवक्ता हितेश बाजपेयी ने भी कहा कि सार्वजनिक आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच जरूरी है और दिग्विजय सिंह ने यही किया। इतना ही नहीं, भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने उनकी कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए उन्हें भाजपा में शामिल होने का खुला निमंत्रण भी दे डाला। उन्होंने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह भाजपा में आते हैं तो उनका सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाएगा। कांग्रेस के भीतर उठे विरोध के स्वरदूसरी ओर, कांग्रेस के अंदर इस बयान को लेकर असहमति सामने आई। पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि यदि दिग्विजय सिंह को प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर आपत्ति थी तो उन्हें यह बात सार्वजनिक मंच की बजाय पार्टी के भीतर उठानी चाहिए थी। वहीं, कांग्रेस महासचिव निधि चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए सवाल उठाया कि कांग्रेस आखिर कब “दिग्विजय सिंह के नागपाश” से मुक्त होगी। साथ आए दिग्विजय और पटवारी, कहा- पार्टी एकजुटबढ़ते विवाद के बीच मंगलवार शाम दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी संयुक्त रूप से मीडिया के सामने आए। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश कांग्रेस मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार से जुड़े कथित भूमि मामलों और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर पूरी तरह एकजुट होकर संघर्ष कर रही है। इस दौरान दिग्विजय सिंह ने अपनी ‘दलाल’ वाली टिप्पणी पर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया। सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कांग्रेस के किसी नेता, विशेषकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, के लिए इस शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने कहा कि जीतू पटवारी उनके लिए पुत्र समान हैं और पार्टी में लंबे सार्वजनिक जीवन के दौरान उन्होंने कभी अपने किसी सहयोगी के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग नहीं किया।
मंदिरों के दान पर बढ़ेगी निगरानी: बिहार धार्मिक न्यास परिषद का बड़ा फैसला, अब हर तीन महीने होगी खातों की समीक्षा

पटना। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े गबन मामले के बाद बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद ने अपने अधीन आने वाले मंदिरों और मठों की वित्तीय निगरानी को और मजबूत करने का निर्णय लिया है। परिषद ने अब सभी पंजीकृत मंदिरों और मठों से हर तीन महीने में आय-व्यय और खातों का विवरण लेने की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर रणवीर नंदन ने बताया कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद के अधीन करीब 4,500 मंदिर और मठ आते हैं। अब तक इन सभी संस्थानों का वर्ष में एक बार ऑडिट कराया जाता था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत त्रैमासिक स्तर पर भी खातों की समीक्षा की जाएगी, ताकि दान राशि के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। अब हर तिमाही होगी वित्तीय निगरानीप्रो. रणवीर नंदन के अनुसार, वार्षिक ऑडिट में मंदिरों और मठों को प्राप्त दान, उसके उपयोग और खर्च का विस्तृत रिकॉर्ड जांचा जाता है। परिषद यह सुनिश्चित करती है कि दान की राशि का उपयोग केवल मंदिरों और मठों के रखरखाव, विकास और आवश्यक कार्यों पर ही किया जाए। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत हर तीन महीने में खातों का विवरण लेने से किसी भी संभावित वित्तीय अनियमितता की समय रहते पहचान की जा सकेगी और निगरानी व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक प्रभावी होगी। प्रत्येक मंदिर की अपनी न्यास समितिपरिषद अध्यक्ष ने बताया कि परिषद के अधीन आने वाले प्रत्येक मंदिर और मठ की अपनी अलग न्यास समिति होती है। यही समिति स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार विकास कार्यों और खर्च से जुड़े निर्णय लेती है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद की भूमिका निर्माण और अन्य कार्यों के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी करने तथा प्रशासनिक निगरानी बनाए रखने की होती है। पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में पहलपरिषद का मानना है कि नियमित वित्तीय समीक्षा से दान राशि के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रद्धालुओं का भरोसा भी मजबूत होगा। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम मंदिरों और मठों की वित्तीय व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाया गया है। अयोध्या मामले के बाद बढ़ी सतर्कताअयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में गबन का मामला इन दिनों जांच के दायरे में है। शिकायत के आधार पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) मामले की जांच कर रहा है। इस प्रकरण में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि संबंधित ट्रस्ट के पिछले पांच वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
आतंकवाद पर भारत-जापान का सख्त संदेश: संयुक्त बयान में पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद रोकने की अपील

नई दिल्ली। भारत और जापान ने आतंकवाद के खिलाफ साझा और सख्त रुख अपनाते हुए पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई करने की अपील की है। नई दिल्ली में आयोजित भारत-जापान वार्षिक शिखर बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद के हर स्वरूप की कड़ी निंदा करते हुए इसे वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बताया। पहलगाम और दिल्ली आतंकी हमलों की निंदासंयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सना तकाइची ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। इसके साथ ही 29 जुलाई 2025 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मॉनिटरिंग टीम की रिपोर्ट का उल्लेख किया गया, जिसमें द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का जिक्र किया गया था। दोनों नेताओं ने नवंबर 2025 में दिल्ली में हुए आतंकी हमले की भी निंदा करते हुए कहा कि इस हमले के दोषियों, साजिशकर्ताओं और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने वालों को बिना किसी देरी के कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। प्रतिबंधित आतंकी संगठनों पर निर्णायक कार्रवाई की मांगसंयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और जापान आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के हर रूप की बिना किसी शर्त के निंदा करते हैं। दोनों देशों ने विशेष रूप से पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद को गंभीर चिंता का विषय बताया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया गया। बयान में अल-कायदा, आईएसआईएस (ISIS), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और इनके सहयोगी संगठनों का भी उल्लेख किया गया। आतंक की फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों पर सख्ती की अपीलभारत और जापान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों को समाप्त करने, आतंकियों की वित्तीय मदद रोकने, अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क से उनके संबंध तोड़ने और सीमा पार आतंकियों की आवाजाही पर प्रभावी रोक लगाने के लिए समन्वित कार्रवाई करने का आह्वान किया। रणनीतिक साझेदारी को मिला नया संदेशयह संयुक्त बयान ऐसे समय सामने आया है, जब भारत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा लगातार उठा रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, भारत और जापान का यह साझा रुख दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने का संकेत भी माना जा रहा है।
पूरे मध्य प्रदेश में सक्रिय हुआ मानसून, खंडवा-हरदा में रेड अलर्ट, 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी

भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। 24 जून को नौ दिन की देरी से प्रदेश में प्रवेश करने वाला मानसून गुरुवार को उज्जैन, ग्वालियर और चंबल संभाग तक पहुंच गया। इसके साथ ही महज नौ दिनों में मानसून ने पूरे प्रदेश को कवर कर लिया है। हालांकि, अब भी 38 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि भोपाल, इंदौर और देवास में सबसे अधिक वर्षा हुई है। खंडवा और हरदा में रेड अलर्टभारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के भोपाल केंद्र ने शुक्रवार को खंडवा और हरदा जिलों के लिए अति भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इसके अलावा धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, बुरहानपुर और बैतूल में भी अति भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 24 घंटों में इन जिलों में 4 से 8 इंच तक वर्षा हो सकती है। 19 जिलों में भारी बारिश का अनुमानरतलाम, उज्जैन, राजगढ़, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी और अनूपपुर सहित कई जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है। इसके अलावा अलीराजपुर, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, इंदौर, शाजापुर, सीहोर, विदिशा, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, जबलपुर, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, कटनी, शहडोल और मंडला में भी गरज-चमक के साथ बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। सीजन का पहला रेड अलर्टमौसम विभाग ने प्रदेश में 6 जुलाई तक भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। अगले दो दिनों के लिए रेड अलर्ट घोषित किया गया है, जो इस मानसून सीजन का पहला रेड अलर्ट है। गुरुवार को भोपाल समेत 15 से अधिक जिलों में तेज बारिश दर्ज की गई। जुलाई में बेहतर बारिश की उम्मीदमौसम विभाग के अनुसार, जून में अपेक्षाकृत कम वर्षा हुई, लेकिन जुलाई में मानसून के अधिक सक्रिय रहने की संभावना है। आमतौर पर प्रदेश की कुल मानसूनी बारिश का लगभग एक-तिहाई हिस्सा जुलाई में होता है। उदाहरण के तौर पर भोपाल में सामान्य मानसूनी वर्षा करीब 39 इंच मानी जाती है, जिसमें लगभग 14 इंच बारिश केवल जुलाई में दर्ज होती है। वहीं, बड़े शहरों में जबलपुर ऐसा शहर है, जहां जुलाई के दौरान 17 इंच से अधिक वर्षा होती है। मौसम विभाग का कहना है कि जुलाई में प्रदेश की कुल मानसूनी वर्षा का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा रिकॉर्ड किया जाता है।