लंदन में PoK को लेकर जोरदार प्रदर्शन, पाकिस्तान हाई कमीशन तक निकाला मार्च; गिरफ्तारियों के विरोध में गूंजे आजादी के नारे

नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई देने लगी है। लंदन में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान के खिलाफ विरोध मार्च निकाला और पाकिस्तान हाई कमीशन तक पहुंचकर अपनी मांगों को जोरदार ढंग से उठाया। प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में चल रहे आंदोलन के समर्थन में नारे लगाए गए और हालिया गिरफ्तारियों पर भी कड़ी आपत्ति जताई गई। प्रदर्शनकारियों ने पार्लियामेंट स्क्वायर से पाकिस्तान हाई कमीशन तक मार्च किया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने रैली में भाग लेते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों पर कार्रवाई और आंदोलन से जुड़े नेताओं की गिरफ्तारी लोकतांत्रिक अधिकारों के विपरीत है। विरोध मार्च में शामिल लोगों ने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के प्रमुख शौकत नवाज मीर और अन्य नेताओं की गिरफ्तारी की निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि आंदोलन से जुड़े सभी नेताओं को जल्द रिहा किया जाए और स्थानीय नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार दिया जाए। उन्होंने कहा कि आंदोलन को दबाने के प्रयासों से लोगों में असंतोष और बढ़ रहा है। आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने दावा किया कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाई जा रही है। उनका कहना है कि क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों को लेकर व्यापक असंतोष मौजूद है, जिसे अब अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान भविष्य में आंदोलन को और तेज करने के संकेत भी दिए गए। जम्मू-कश्मीर नेशनल इंडिपेंडेंस अलायंस के चेयरमैन महमूद कश्मीरी ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि विभिन्न देशों में रह रहे कश्मीरी समुदाय के लोग भी इस अभियान में अपनी भागीदारी दर्ज करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य अपने मुद्दों को वैश्विक समुदाय के सामने रखना है और इसे आगे भी जारी रखा जाएगा। प्रदर्शन के दौरान कुछ प्रतिभागियों ने नियंत्रण रेखा से जुड़े मुद्दों और क्षेत्र में मानवीय परिस्थितियों पर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि स्थानीय लोगों की समस्याओं का शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान तलाशा जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में नागरिक अधिकारों और राजनीतिक स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशों में आयोजित ऐसे प्रदर्शन यह संकेत देते हैं कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दे अब प्रवासी समुदायों के बीच भी चर्चा का विषय बन रहे हैं। हालांकि इन दावों और आरोपों पर अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने दृष्टिकोण हैं। ऐसे में क्षेत्र की स्थिति और उससे जुड़े घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार नजर बनी हुई है।
पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख स्पष्ट, पहले कानूनी प्रक्रिया अपनाने की दी सलाह

नई दिल्ली । पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से जुड़े मामले में दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी मामले में सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले कानून के तहत उपलब्ध प्रक्रियाओं का पालन किया जाना आवश्यक है। अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित प्राधिकरण और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि कथित टिप्पणियां सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती हैं। इस आधार पर मामले में शीघ्र सुनवाई की मांग की गई। हालांकि अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और कहा कि ऐसे मामलों के लिए पहले से निर्धारित कानूनी तंत्र मौजूद है, जिसका उपयोग किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह जानना चाहा कि क्या मामले में संबंधित एजेंसियों या पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई है। अदालत ने कहा कि देश में कानून लागू करने वाली संस्थाएं मौजूद हैं और उन पर विश्वास बनाए रखना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति या संस्था ने कानून का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की भूमिका सीधे हर शिकायत की प्रारंभिक जांच करने की नहीं है। शीर्ष न्यायालय का दायित्व व्यापक संवैधानिक और कानूनी निगरानी सुनिश्चित करना है। यदि प्रत्येक मामला सीधे सर्वोच्च अदालत में लाया जाएगा तो निचली अदालतों और अन्य सक्षम संस्थाओं की भूमिका प्रभावित होगी, जो न्यायिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने कहा कि कानून के तहत उपलब्ध सभी विकल्पों का उपयोग किए जाने के बाद भी यदि संबंधित प्राधिकरण उचित कार्रवाई नहीं करते हैं, तब न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जा सकती है। अदालत ने संकेत दिया कि न्याय व्यवस्था में विभिन्न स्तरों पर स्थापित संस्थाओं को पहले अपना कार्य करने का अवसर मिलना चाहिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी माना कि धार्मिक भावनाओं और सामाजिक सद्भाव से जुड़े मामले संवेदनशील प्रकृति के होते हैं। ऐसे मामलों में सभी पक्षों को जिम्मेदारी और संयम के साथ व्यवहार करना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि संवेदनशील विषयों पर अनावश्यक विवाद या सनसनी फैलाने से बचना आवश्यक है, क्योंकि इससे सामाजिक वातावरण प्रभावित हो सकता है। अदालत ने दोहराया कि यदि किसी व्यक्ति द्वारा कानून का उल्लंघन किया गया है तो उसके खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि शिकायतों के निपटारे के लिए स्थापित संस्थागत व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखना लोकतांत्रिक और संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस घटनाक्रम के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि शीर्ष अदालत ऐसे मामलों में पहले वैधानिक प्रक्रिया अपनाने को प्राथमिकता देती है। न्यायालय का संदेश यह रहा कि कानून के दायरे में उपलब्ध सभी उपायों का उपयोग करने के बाद ही किसी मामले को सर्वोच्च न्यायिक मंच तक ले जाना उचित माना जाएगा।
पानी में भीग गया iPhone? चार्जिंग की जल्दबाजी पड़ सकती है भारी, जानिए सही तरीका

नई दिल्ली । बारिश के मौसम में या किसी अन्य कारण से अगर आपका iPhone पानी के संपर्क में आ जाए तो सबसे बड़ी गलती उसे तुरंत चार्ज करना हो सकती है। भले ही नए iPhone मॉडल वाटर रेजिस्टेंट तकनीक के साथ आते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे पूरी तरह वाटरप्रूफ हैं। यदि चार्जिंग पोर्ट में नमी रह जाए और उसी दौरान फोन को चार्जिंग पर लगा दिया जाए तो फोन, चार्जिंग पोर्ट और केबल तीनों को नुकसान पहुंच सकता है। iPhone 12 सीरीज के बाद लॉन्च हुए अधिकांश मॉडल IP68 रेटिंग के साथ आते हैं, जो सीमित स्तर तक पानी और धूल से सुरक्षा देती है। हालांकि यह सुरक्षा हमेशा के लिए नहीं होती और पानी अंदर पहुंचने पर फोन खुद उपयोगकर्ता को चेतावनी भी देता है। अगर चार्जिंग पोर्ट में नमी पहुंच जाती है तो iPhone स्क्रीन पर “Charging Not Available” या “Liquid Detected in USB-C Connector” जैसी चेतावनी दिखाई देती है। ऐसे में सबसे पहले फोन को चार्जर से तुरंत अलग कर देना चाहिए। साथ ही चार्जर और केबल को भी बिजली के प्लग से निकाल देना चाहिए। Apple के अनुसार ऐसी स्थिति में चार्जिंग जारी रखने से फोन को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। यदि आपको लगता है कि फोन के चार्जिंग पोर्ट में पानी चला गया है तो फोन को चार्जिंग पोर्ट नीचे की ओर रखते हुए हल्के-हल्के हाथ पर टैप करें ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके। इसके बाद फोन को कम से कम 30 मिनट तक किसी सूखी और हवादार जगह पर रखें। आधे घंटे बाद चार्जर लगाकर जांच सकते हैं कि फोन सामान्य रूप से चार्ज हो रहा है या नहीं। अगर 30 मिनट बाद भी वही चेतावनी संदेश दिखाई दे तो जल्दबाजी बिल्कुल न करें। ऐसी स्थिति में फोन को 24 घंटे तक प्राकृतिक रूप से सूखने दें। इसके बाद ही दोबारा चार्ज करने की कोशिश करें। यदि इसके बाद भी समस्या बनी रहती है तो अधिकृत सर्विस सेंटर से जांच कराना बेहतर रहेगा। कई लोग गीले फोन को सुखाने के लिए उसे चावल के डिब्बे में रख देते हैं, लेकिन यह तरीका सुरक्षित नहीं माना जाता। चावल से निकलने वाले बारीक कण चार्जिंग पोर्ट या अन्य हिस्सों में फंस सकते हैं, जिससे फोन को और अधिक नुकसान हो सकता है। इसलिए फोन को प्राकृतिक हवा में सूखने देना ही सबसे सुरक्षित तरीका है। क्या करें और क्या न करें?फोन में पानी जाने पर तुरंत चार्जिंग बंद करें।चार्जिंग पोर्ट नीचे रखकर हल्के से पानी बाहर निकालें।कम से कम 30 मिनट तक सूखने दें।चेतावनी बनी रहे तो 24 घंटे तक चार्ज न करें।हेयर ड्रायर, ब्लोअर या चावल का इस्तेमाल न करें।समस्या बनी रहने पर अधिकृत सर्विस सेंटर से संपर्क करें।
योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, जलालाबाद का नाम बदलेगा परशुरामपुरी; स्टार्टअप नीति, होमगार्ड स्वास्थ्य योजना समेत 28 प्रस्तावों को मंजूरी

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य सरकार ने विकास, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी। बैठक में कुल 29 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 28 को स्वीकृति मिल गई, जबकि मदरसा शिक्षा से संबंधित एक प्रस्ताव को फिलहाल स्थगित रखा गया। सबसे चर्चित निर्णय शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी किए जाने का रहा, जिसे मंत्रिमंडल ने अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी। सरकार के अनुसार जलालाबाद को भगवान परशुराम की जन्मस्थली के रूप में धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यता प्राप्त है। केंद्र सरकार से आवश्यक अनापत्ति मिलने के बाद राज्य मंत्रिमंडल ने नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को स्वीकृति दी। सरकार का कहना है कि यह निर्णय स्थानीय ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को अधिक स्पष्ट रूप से स्थापित करने की दिशा में उठाया गया कदम है। बैठक में प्रदेश में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 और उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन को भी मंजूरी दी गई। नई व्यवस्था के तहत स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए एक हजार करोड़ रुपये का विशेष फंड बनाया जाएगा। इसके अलावा नए उद्यमों को प्रोटोटाइप विकसित करने, शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराने तथा इनक्यूबेशन केंद्रों को वार्षिक वित्तीय सहायता देने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने समाप्त हो चुकी डेटा सेंटर नीति को भी दोबारा लागू करने का निर्णय लिया है। मंत्रिमंडल ने प्रदेश के लगभग 1.60 लाख होमगार्डों और उनके आश्रितों के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा को भी मंजूरी दी। इस योजना का उद्देश्य सेवा के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना को भी स्वीकृति दी गई, जिसके तहत पशुओं के बीमा प्रीमियम का अधिकांश हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी। प्राकृतिक आपदा, बीमारी अथवा दुर्घटना से पशुओं की मृत्यु होने पर पशुपालकों को बीमा का लाभ मिलेगा। स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई प्रस्ताव भी कैबिनेट की मंजूरी प्राप्त करने में सफल रहे। वाराणसी में ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि गोरखपुर और मुरादाबाद में 100-100 बेड वाले ईएसआईसी अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। मेडिकल कॉलेज में श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए आधी सीटें आरक्षित रखने का भी निर्णय लिया गया है। बैठक में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की सीधी भर्ती संबंधी नियमों में संशोधन को भी मंजूरी दी गई। संशोधित व्यवस्था के तहत पात्र खिलाड़ियों को समूह ‘ख’ और ‘ग’ के विभिन्न सरकारी पदों पर सीधे नियुक्ति का अवसर मिलेगा। इसके अलावा राज्य सरकार ने तीन निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, रायबरेली में उद्यान महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र की स्थापना, लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की पेंशन संबंधी संशोधन, गोरखपुर और मुरादाबाद नगर निगम के लिए म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी करने सहित कई प्रशासनिक और विकासात्मक प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की। सरकार का कहना है कि इन फैसलों से राज्य में निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्था को नई गति मिलेगी।
फीफा वर्ल्ड कप में सबसे बड़ा उलटफेर, नॉर्वे ने पांच बार की चैंपियन ब्राजील को हराकर रचा इतिहास

नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहां नॉर्वे ने पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील को 2-1 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। न्यू जर्सी में खेले गए इस रोमांचक मुकाबले में एर्लिंग हालैंड ने दो शानदार गोल कर अपनी टीम को पहली बार विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचा दिया। दूसरी ओर ब्राजील के लिए नेमार का इंजरी टाइम में किया गया गोल केवल हार के अंतर को कम कर सका। मुकाबले की शुरुआत दोनों टीमों ने बेहद सतर्क अंदाज में की। पहले हाफ में दोनों पक्षों के डिफेंस ने शानदार प्रदर्शन किया और किसी भी टीम को गोल करने का मौका नहीं दिया। हालांकि ब्राजील ने कई बार नॉर्वे के गोल पर हमला बोला, लेकिन हर बार गोलकीपर ओर्जन नायलैंड मजबूत दीवार बनकर सामने खड़े रहे। पहले हाफ के दौरान ब्राजील को वीएआर की मदद से पेनल्टी भी मिली। मैथियस कुन्हा पर हुए फाउल के बाद रेफरी ने पेनल्टी दी, लेकिन ब्रूनो गुइमारेस इस सुनहरे मौके को गोल में नहीं बदल सके। नायलैंड ने शानदार बचाव करते हुए पेनल्टी रोक ली। इसके अलावा उन्होंने गेब्रियल मार्टिनेली, विनीसियस जूनियर और अन्य ब्राजीली खिलाड़ियों के कई खतरनाक प्रयास भी विफल किए। दूसरे हाफ में ब्राजील ने आक्रामकता बढ़ाने के लिए बदलाव किए और युवा खिलाड़ी एंड्रिक को मैदान पर उतारा। 52वें मिनट में एंड्रिक के पास गोल करने का शानदार मौका भी आया, लेकिन वह उसे भुना नहीं सके। इसी चूक का फायदा नॉर्वे ने उठाया और धीरे-धीरे मुकाबले पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। 79वें मिनट में एर्लिंग हालैंड ने शानदार फिनिश के साथ नॉर्वे को 1-0 की बढ़त दिलाई। ब्राजील अभी इस झटके से उबर भी नहीं पाया था कि 90वें मिनट में हालैंड ने अपना दूसरा गोल दागकर स्कोर 2-0 कर दिया। इस गोल ने ब्राजील की वापसी की उम्मीदों को लगभग खत्म कर दिया। इंजरी टाइम में ब्राजील को पेनल्टी मिली, जिस पर अनुभवी स्टार नेमार ने गोल कर स्कोर 2-1 जरूर किया, लेकिन तब तक मुकाबला नॉर्वे की मुट्ठी में जा चुका था। अंतिम सीटी बजते ही नॉर्वे के खिलाड़ियों और प्रशंसकों ने ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया, जबकि ब्राजील के खिलाड़ी मायूस नजर आए। इस जीत के साथ नॉर्वे ने अपने फुटबॉल इतिहास में पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया है। अब उसका मुकाबला 11 जुलाई को इंग्लैंड और मेक्सिको के बीच होने वाले मैच की विजेता टीम से होगा। ब्राजील के लिए यह हार कई सवाल छोड़ गई। टीम ने पूरे मैच में कई बेहतरीन मौके बनाए, लेकिन खराब फिनिशिंग और नॉर्वे के गोलकीपर के शानदार प्रदर्शन ने उसके विश्व कप अभियान का अंत कर दिया। दूसरी ओर एर्लिंग हालैंड ने एक बार फिर साबित किया कि बड़े मुकाबलों में वह अपनी टीम के सबसे बड़े मैच विनर हैं।
11 जुलाई को नौसेना के बेड़े में शामिल होगा ‘महेंद्रगिरि’, स्वदेशी तकनीक से बना अत्याधुनिक युद्धपोत बढ़ाएगा भारत की समुद्री ताकत

नई दिल्ली । भारतीय नौसेना जल्द ही अपनी समुद्री शक्ति में एक और आधुनिक युद्धपोत जोड़ने जा रही है। 11 जुलाई को विशाखापत्तनम में आयोजित विशेष समारोह के दौरान स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा। प्रोजेक्ट-17ए श्रृंखला का यह छठा युद्धपोत देश की रक्षा आत्मनिर्भरता और अत्याधुनिक नौसैनिक तकनीक का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना की वर्तमान और भविष्य की समुद्री चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इसका डिजाइन भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने किया है। यह पूरी तरह स्वदेशी विशेषज्ञता और रक्षा विनिर्माण क्षमता का परिणाम है, जिससे भारत की तकनीकी दक्षता और मजबूत हुई है। यह युद्धपोत स्टील्थ तकनीक से लैस है, जिसके कारण दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान सामान्य जहाजों की तुलना में काफी कम होती है। विशेष संरचना और आधुनिक डिजाइन इसे समुद्र में अधिक गोपनीय तरीके से संचालन करने में सक्षम बनाते हैं। युद्ध की स्थिति में यह विशेषता नौसेना को सामरिक बढ़त दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। महेंद्रगिरि में अत्याधुनिक हथियार और आधुनिक युद्ध प्रणालियां स्थापित की गई हैं। इसमें सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, आधुनिक सेंसर, पनडुब्बी रोधी हथियार और एकीकृत कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। यह युद्धपोत एक साथ वायु, समुद्र और पनडुब्बी से आने वाले खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में सक्षम है। युद्धपोत में आधुनिक कंबाइंड डीजल ऑर गैस प्रणोदन प्रणाली का उपयोग किया गया है। सामान्य समुद्री गश्त के दौरान यह ईंधन की बचत करते हुए लंबी दूरी तक संचालन कर सकता है, जबकि आवश्यकता पड़ने पर गैस टर्बाइन की सहायता से तेज गति भी हासिल कर सकता है। यह क्षमता इसे लंबी अवधि के समुद्री अभियानों और विभिन्न परिचालन परिस्थितियों में प्रभावी बनाती है। महेंद्रगिरि की एक और बड़ी विशेषता इसकी उच्च स्वदेशी भागीदारी है। इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। देश की अनेक रक्षा कंपनियों के साथ-साथ सैकड़ों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ने इसके विभिन्न उपकरण, सेंसर, प्रणालियां और अन्य आवश्यक घटकों के निर्माण में योगदान दिया है। इससे रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलने के साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। यह युद्धपोत केवल युद्ध संचालन तक सीमित नहीं रहेगा। मानवीय सहायता एवं आपदा राहत अभियान, खोज एवं बचाव कार्य, समुद्री सुरक्षा गश्त और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिशनों में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। किसी प्राकृतिक आपदा के दौरान राहत पहुंचाने से लेकर हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति बनाए रखने तक, महेंद्रगिरि कई प्रकार के अभियानों में प्रभावी योगदान देने में सक्षम होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक गतिविधियों और वैश्विक समुद्री व्यापार के महत्व को देखते हुए आधुनिक युद्धपोतों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में महेंद्रगिरि जैसे स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक प्रभाव को नई ऊंचाई देंगे। यह युद्धपोत आने वाले वर्षों में भारत की समुद्री शक्ति, आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन और आधुनिक नौसैनिक क्षमता का महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर देश की सुरक्षा को और मजबूत करेगा।
ब्राजील के वर्ल्ड कप से बाहर होते ही नेमार ने कहा अलविदा, इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास का किया ऐलान

नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में ब्राजील का सफर समाप्त होने के साथ ही विश्व फुटबॉल के एक सुनहरे अध्याय का भी अंत हो गया। स्टार फुटबॉलर नेमार जूनियर ने ब्राजील की हार के बाद अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। राउंड ऑफ 16 में नॉर्वे के हाथों 2-1 की हार के बाद भावुक नेमार ने कहा कि उन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ दिया और अब उनका अंतरराष्ट्रीय सफर समाप्त हो चुका है। 34 वर्षीय नेमार ने मैच के बाद कहा कि उन्होंने हर संभव प्रयास किया लेकिन टीम को आगे नहीं ले जा सके। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत अमेरिका की धरती से की थी और अब उसी धरती पर अपने सफर का अंत कर रहे हैं। मैदान पर हार के बाद नेमार भावुक दिखाई दिए और साथी खिलाड़ियों के साथ उनकी आंखें भी नम नजर आईं। नॉर्वे के खिलाफ मुकाबले में नेमार शुरुआती एकादश का हिस्सा नहीं थे और उन्हें दूसरे हाफ में बतौर सब्स्टीट्यूट मैदान पर उतारा गया। इंजरी टाइम में उन्होंने ब्राजील के लिए एकमात्र गोल दागा जो उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी गोल भी बन गया। हालांकि उनका यह प्रयास टीम को हार से नहीं बचा सका और ब्राजील टूर्नामेंट से बाहर हो गया। नेमार ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में ब्राजील के लिए 130 मुकाबले खेले और रिकॉर्ड 80 गोल किए। इसके अलावा उन्होंने 59 गोल में असिस्ट देकर भी टीम की कई यादगार जीत में अहम भूमिका निभाई। वह ब्राजील के इतिहास में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय गोल करने वाले खिलाड़ी बनकर अपने करियर का समापन कर रहे हैं। साल 2010 में ब्राजील के लिए पदार्पण करने वाले नेमार ने एक दशक से अधिक समय तक टीम की अगुआई की। उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में ब्राजील को रजत पदक दिलाने में अहम योगदान दिया। इसके बाद 2016 रियो ओलंपिक में कप्तान के रूप में टीम को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाकर देश का सपना पूरा किया। वर्ष 2013 में फीफा कन्फेडरेशन कप जीतने में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा। हालांकि इस विश्व कप से पहले उनकी फिटनेस को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। चोटों से जूझने के बावजूद उन्होंने टीम के लिए खेलने का फैसला किया और पूरे टूर्नामेंट में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। विश्व कप के दौरान उनके सोशल मीडिया संकेतों से भी उनके संन्यास की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर अब उन्होंने आधिकारिक मुहर लगा दी है। ब्राजील के खिलाफ नॉर्वे ने शानदार प्रदर्शन किया। एर्लिंग हालैंड ने दो गोल कर अपनी टीम को क्वार्टर फाइनल में पहुंचाया। ब्राजील ने कई आसान मौके गंवाए, जिसमें एक पेनल्टी भी शामिल रही। आखिरकार नेमार का इंजरी टाइम में आया गोल केवल हार के अंतर को कम कर सका। नेमार के संन्यास के साथ ब्राजील फुटबॉल का एक यादगार दौर समाप्त हो गया। अपनी शानदार ड्रिब्लिंग, बेहतरीन गोल और नेतृत्व क्षमता के दम पर उन्होंने दुनिया भर के करोड़ों फुटबॉल प्रेमियों के दिलों में खास जगह बनाई। उनका नाम हमेशा ब्राजील के महानतम खिलाड़ियों में सम्मान के साथ लिया जाएगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मिले नए थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, सैन्य नेतृत्व और सर्वोच्च कमांडर के बीच हुआ औपचारिक संवाद

नई दिल्ली । भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सोमवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से राष्ट्रपति भवन में शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उनकी पत्नी कोमल सेठ भी उनके साथ मौजूद रहीं। थलसेना प्रमुख का पदभार संभालने के बाद राष्ट्रपति के साथ यह उनकी पहली औपचारिक मुलाकात रही, जिसे सैन्य नेतृत्व और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद के बीच संस्थागत संवाद की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भारतीय सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर हैं। ऐसे में सेना के नए प्रमुख की यह मुलाकात औपचारिक परंपराओं के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में शीर्ष नेतृत्व के बीच समन्वय और संवाद का भी महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है। समय-समय पर सेना के वरिष्ठ अधिकारी राष्ट्रपति से मुलाकात कर सैन्य परंपराओं और संस्थागत संबंधों को आगे बढ़ाते रहे हैं। हाल ही में भारतीय सेना के 31वें थलसेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभालने वाले जनरल धीरज सेठ एक अनुभवी सैन्य अधिकारी हैं। बख्तरबंद कोर से जुड़े रहे जनरल सेठ ने अपने लंबे सैन्य करियर में कई अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। सेना प्रमुख बनने से पहले वह उप-थलसेना प्रमुख के पद पर कार्यरत थे और विभिन्न महत्वपूर्ण सैन्य नियुक्तियों का अनुभव भी रखते हैं। कार्यभार ग्रहण करने के बाद जनरल धीरज सेठ ने भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप सैन्य क्षमताओं को मजबूत बनाने को अपनी प्रमुख प्राथमिकता बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सेना को तकनीक आधारित, अधिक सक्षम और तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप तैयार करना उनकी कार्ययोजना का प्रमुख हिस्सा होगा। उनकी रणनीतिक प्राथमिकताओं में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सैन्य क्षमताओं का विस्तार, स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा, आत्मनिर्भरता को मजबूत करना तथा तीनों सेनाओं के बीच बेहतर संयुक्त संचालन क्षमता विकसित करना शामिल है। उनका मानना है कि भविष्य के युद्धक्षेत्र में तकनीकी श्रेष्ठता और समन्वित सैन्य संचालन निर्णायक भूमिका निभाएंगे। थलसेना प्रमुख बनने के बाद जनरल धीरज सेठ ने अपना दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया है, जिसमें भारतीय सेना को आधुनिक, तकनीक-सक्षम और बहुआयामी सुरक्षा चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार करने पर विशेष बल दिया गया है। उनका मार्गदर्शक मंत्र ‘जय से विजय’ सैन्य क्षमता, नवाचार, आत्मनिर्भरता और संयुक्तता को बढ़ावा देने की सोच को दर्शाता है। राष्ट्रपति से मुलाकात से पहले जनरल धीरज सेठ ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी शिष्टाचार भेंट की थी। इस दौरान सेना के आधुनिकीकरण, रक्षा तैयारियों और भविष्य की रणनीतिक आवश्यकताओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई थी। नई जिम्मेदारी संभालने के बाद शीर्ष राजनीतिक और संवैधानिक नेतृत्व के साथ उनकी ये मुलाकातें भारतीय सेना की भावी दिशा और संस्थागत समन्वय को मजबूत करने की प्रक्रिया का हिस्सा मानी जा रही हैं। आने वाले समय में सेना के आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को बढ़ावा देने की दिशा में उनके नेतृत्व से महत्वपूर्ण पहल की उम्मीद की जा रही है।
क्रिस्टियानो रोनाल्डो का बड़ा ऐलान, फीफा वर्ल्ड कप 2026 होगा आखिरी विश्व कप, बोले- स्पेन के खिलाफ आखिरी मैच नहीं चाहता

नई दिल्ली । पुर्तगाल के महान फुटबॉलर और कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यह उनके करियर का आखिरी विश्व कप होगा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि इसका मतलब अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से तत्काल संन्यास नहीं है। रोनाल्डो ने कहा कि वह अभी भी देश के लिए खेलना चाहते हैं और उनके भविष्य का फैसला कोई और नहीं बल्कि वह स्वयं करेंगे। स्पेन के खिलाफ राउंड ऑफ 16 मुकाबले से पहले मीडिया से बातचीत में 41 वर्षीय रोनाल्डो ने कहा कि यह उनका अंतिम विश्व कप है लेकिन उन्हें उम्मीद है कि स्पेन के खिलाफ होने वाला मुकाबला उनके करियर का आखिरी मैच नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अब तक उनका कोई भी विश्व कप खराब नहीं रहा है और इस टूर्नामेंट में भी वह तीन गोल कर चुके हैं। उनकी कोशिश होगी कि स्पेन के खिलाफ भी गोल कर टीम की जीत में योगदान दें। इस विश्व कप में रोनाल्डो शानदार लय में नजर आए हैं। ग्रुप चरण में उन्होंने उज्बेकिस्तान के खिलाफ दो गोल किए थे जबकि राउंड ऑफ 32 में क्रोएशिया के खिलाफ पेनल्टी को गोल में बदलकर विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में अपना पहला गोल दर्ज किया। इसके साथ ही उन्होंने लगातार छह फीफा विश्व कप संस्करणों में गोल करने का अनोखा रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। विश्व कप इतिहास में उनके नाम अब 11 गोल दर्ज हो चुके हैं और वह लगातार छह विश्व कप में गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं। संन्यास को लेकर लगातार उठ रहे सवालों पर रोनाल्डो ने दो टूक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह कब तक खेलेंगे इसका फैसला सिर्फ वही करेंगे। उनका मानना है कि चाहे वह मैदान पर हों या नहीं उनकी राष्ट्रीय टीम में हमेशा एक अहम भूमिका रहेगी। उन्होंने कहा कि स्पेन के खिलाफ मैच में वह पूरी ताकत से खेलेंगे क्योंकि फुटबॉल को उन्होंने अपना सब कुछ दिया है और हर मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करेंगे। रोनाल्डो का अंतरराष्ट्रीय करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने पुर्तगाल के लिए अब तक 232 मैच खेले हैं और रिकॉर्ड 146 अंतरराष्ट्रीय गोल किए हैं। उनके नेतृत्व में पुर्तगाल ने 2016 में पहली बार यूरो कप का खिताब जीता था। इसके अलावा 2019 और 2025 में यूईएफए नेशंस लीग जीतने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। विश्व कप के माहौल को लेकर भी रोनाल्डो काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी पहचान दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का जुनून है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग देशों के प्रशंसकों से मिलकर उन्हें महसूस होता है कि फुटबॉल केवल एक खेल नहीं बल्कि भावनाओं को जोड़ने वाला माध्यम है। यही प्यार उन्हें लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देता है। क्लब और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल को मिलाकर रोनाल्डो अब तक 976 गोल कर चुके हैं और उनका अगला बड़ा लक्ष्य 1000 गोल का ऐतिहासिक आंकड़ा छूना है। ऐसे में भले ही यह उनका आखिरी विश्व कप हो लेकिन फुटबॉल प्रेमियों को अभी भी मैदान पर रोनाल्डो का जादू देखने को मिलता रहेगा।
श्रीलंका की बढ़त बरकरार, लेकिन होप-ग्रीव्स ने संभाली वेस्टइंडीज की पारी, तीसरे दिन कैरेबियाई टीम का दबदबा

नई दिल्ली । एंटिगुआ के विवियन रिचर्ड्स क्रिकेट स्टेडियम में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के तीसरे दिन वेस्टइंडीज ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए मुकाबले में दमदार वापसी की। श्रीलंका की पहली पारी के विशाल स्कोर के जवाब में कैरेबियाई बल्लेबाजों ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। दिन का खेल समाप्त होने तक वेस्टइंडीज ने पहली पारी में चार विकेट के नुकसान पर 318 रन बना लिए और मुकाबले में अपनी स्थिति मजबूत कर ली। तीसरे दिन वेस्टइंडीज ने 58 रन पर एक विकेट से आगे खेलना शुरू किया। जॉन कैंपबेल और केवम हॉज ने दूसरे विकेट के लिए 89 रन जोड़कर टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। दोनों बल्लेबाजों ने श्रीलंकाई गेंदबाजों को लंबे समय तक सफलता से दूर रखा और स्कोर को 100 रन के पार पहुंचाया। हालांकि 31 रन बनाकर हॉज प्रभात जयसूर्या का शिकार बने। इसके बाद पहले टेस्ट में दोहरा शतक लगाने वाले आमिर जंगू से बड़ी पारी की उम्मीद थी लेकिन वह इस बार केवल 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। उनके जल्दी आउट होने से श्रीलंका ने वापसी की कोशिश जरूर की लेकिन जॉन कैंपबेल ने एक छोर संभाले रखा। उन्होंने 154 गेंदों पर 72 रन की बेहतरीन पारी खेली जिसमें 9 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। उनकी पारी ने टीम को मजबूत आधार प्रदान किया। कैंपबेल के आउट होने के बाद शाई होप और जस्टिन ग्रीव्स ने जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और श्रीलंका को दिनभर कोई और सफलता हासिल नहीं करने दी। दोनों बल्लेबाजों ने धैर्य और शानदार तकनीक का परिचय देते हुए पांचवें विकेट के लिए 174 रन की नाबाद साझेदारी कर डाली। यह साझेदारी 324 गेंदों तक चली और श्रीलंका के गेंदबाज विकेट के लिए तरसते रहे। दिन का खेल समाप्त होने तक शाई होप 173 गेंदों पर 86 रन बनाकर नाबाद थे। उनकी पारी में 9 शानदार चौके शामिल रहे। दूसरी ओर जस्टिन ग्रीव्स भी 162 गेंदों पर 85 रन बनाकर क्रीज पर डटे रहे। दोनों बल्लेबाजों ने चौथे दिन बड़ी साझेदारी जारी रखने के संकेत दिए हैं। हालांकि वेस्टइंडीज अभी भी श्रीलंका के पहली पारी के 549 रन के विशाल स्कोर से 231 रन पीछे है। श्रीलंका की ओर से तीसरे दिन असिथा फर्नांडो और प्रभात जयसूर्या ने दो-दो विकेट हासिल किए लेकिन होप और ग्रीव्स की मजबूत साझेदारी के सामने गेंदबाज ज्यादा प्रभाव नहीं छोड़ सके। इससे पहले श्रीलंका ने अपनी पहली पारी 9 विकेट पर 549 रन बनाकर घोषित की थी। लाहिरू उदारा ने 188 रन की शानदार पारी खेली थी जबकि कामिंदु मेंडिस ने 84 रन, सोनल दिनुशा ने 92 रन और कुशल मेंडिस ने 69 रन का योगदान दिया था। अब चौथे दिन की शुरुआत में वेस्टइंडीज की कोशिश श्रीलंका की बढ़त को कम करने और मैच में बराबरी हासिल करने की होगी।