आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की बड़ी उपलब्धि, 104 करोड़ से अधिक हेल्थ रिकॉर्ड हुए डिजिटल

नई दिल्ली । केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) ने डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सरकार की ओर से जारी फैक्टशीट के अनुसार, अब तक 104 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड को 93 करोड़ से ज्यादा आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) से जोड़ा जा चुका है। इसके साथ ही यह मिशन दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल हेल्थ नेटवर्क में शामिल हो गया है। सरकार के अनुसार, सितंबर 2021 में शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य पूरे देश में ऐसा डिजिटल स्वास्थ्य ढांचा तैयार करना है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुलभ, प्रभावी और एक-दूसरे से जुड़ी हो सकें। इस व्यवस्था के जरिए मरीज अपने मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित तरीके से संभाल सकते हैं। अस्पतालों में कागजी प्रक्रिया कम होती है, पंजीकरण और इलाज में लगने वाला समय घटता है तथा मरीज, डॉक्टर, अस्पताल और बीमा कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता है। मिशन के तहत प्रत्येक नागरिक को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) के रूप में एक विशिष्ट डिजिटल हेल्थ आईडी उपलब्ध कराई जाती है। मरीज की सहमति के आधार पर यह आईडी उसके मेडिकल रिकॉर्ड को अस्पतालों, लैब, बीमा कंपनियों और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों से सुरक्षित तरीके से जोड़ती है। सरकार ने हाल ही में आरोग्य सेतु 2.0 को भी इस मिशन के तहत डिजिटल हेल्थ एप के रूप में लॉन्च किया है। इसके जरिए नागरिक ABHA अकाउंट बना सकते हैं, डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड देख और प्रबंधित कर सकते हैं, टेली-कंसल्टेशन ले सकते हैं, अस्पताल में अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं, बीमा संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और आसपास उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी भी हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा वियरेबल डिवाइस के जरिए स्वास्थ्य की निगरानी की सुविधा भी उपलब्ध है। फैक्टशीट के मुताबिक, नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की ‘स्कैन एंड शेयर’ सेवा ने अस्पतालों में ओपीडी पंजीकरण की प्रक्रिया को काफी आसान और तेज बना दिया है। 18 जून तक देशभर में 23.21 करोड़ से अधिक ABHA लिंक्ड डिजिटल टोकन जारी किए जा चुके हैं। सरकार ने बताया कि 18 जून तक इस योजना के तहत अस्पतालों को 107 करोड़ रुपये से अधिक, डायग्नोस्टिक सेंटर, लैब और फार्मेसी को 2.95 करोड़ रुपये से ज्यादा तथा डिजिटल हेल्थ समाधान उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को 26 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है। इसके अलावा 2,200 से अधिक स्वास्थ्य संस्थानों को ई-सुश्रुत क्लिनिक प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया है। सी-डैक द्वारा विकसित यह हल्का हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम छोटे अस्पतालों और क्लीनिकों को मरीजों के रिकॉर्ड और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण करने में मदद कर रहा है। सरकार का कहना है कि यह पहल देश में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और नागरिकों को बेहतर, तेज तथा पारदर्शी स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम है।
महिला टी20 विश्व कप फाइनल: कप्तान नेट साइवर-ब्रंट के अर्धशतक से इंग्लैंड ने ऑस्ट्रेलिया को दिया 151 रन का लक्ष्य

नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में इंग्लैंड ने शुरुआती झटकों से उबरते हुए ऑस्ट्रेलिया के सामने 151 रन का चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए मुकाबले में कप्तान नेट साइवर-ब्रंट ने जिम्मेदारी भरी नाबाद अर्धशतकीय पारी खेली, जबकि फ्रेया केम्प ने तेजतर्रार बल्लेबाजी करते हुए उनका शानदार साथ निभाया। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत बेहद खराब रही। टीम ने महज 32 रन तक अपने दोनों सलामी बल्लेबाज एमी जोंस और डैनी वायट-हॉज के विकेट गंवा दिए। एमी जोंस 6 रन और डैनी वायट-हॉज 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। इसके बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट और एलिस कैप्सी ने पारी संभालते हुए तीसरे विकेट के लिए 35 रन जोड़े। कैप्सी 20 गेंदों में 23 रन बनाकर आउट हुईं। कुछ ही देर बाद हीदर नाइट भी केवल 2 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं, जिससे इंग्लैंड का स्कोर 70 रन पर 4 विकेट हो गया। मुश्किल परिस्थिति में कप्तान ब्रंट ने फ्रेया केम्प के साथ शानदार बल्लेबाजी की। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए नाबाद 80 रन की साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। ब्रंट ने 53 गेंदों में 58 रन की नाबाद पारी खेली, जिसमें 5 चौके शामिल रहे। वहीं, फ्रेया केम्प ने 28 गेंदों में 44 रन बनाए और अपनी पारी में 4 चौके व 1 छक्का लगाया। ऑस्ट्रेलिया की ओर से किम गार्थ, लूसी हैमिल्टन, कप्तान सोफी मोलिनेक्स और एनाबेल सदरलैंड ने एक-एक विकेट हासिल किया। 151 रन के लक्ष्य के साथ इंग्लैंड ने मुकाबले में खुद को बनाए रखा, लेकिन दूसरी पारी में उसे ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत बल्लेबाजी लाइनअप को रोकने के लिए अनुशासित और आक्रामक गेंदबाजी की जरूरत थी। दूसरी ओर, छह बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया रिकॉर्ड सातवीं बार विश्व कप जीतने के इरादे से मैदान पर उतरी।
विमेंस टी20 वर्ल्ड कप में डैनी वायट-हॉज का ऐतिहासिक रिकॉर्ड, एक संस्करण में 300 रन बनाने वाली पहली बल्लेबाज

नई दिल्ली । इंग्लैंड की स्टार सलामी बल्लेबाज डैनी वायट-हॉज ने विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 में ऐसा रिकॉर्ड बना दिया, जिसे इससे पहले कोई भी महिला क्रिकेटर हासिल नहीं कर सकी थी। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फाइनल में 8 रन की छोटी पारी खेलने के बावजूद उन्होंने टूर्नामेंट में अपने कुल रन 302 तक पहुंचाए और विमेंस टी20 वर्ल्ड कप के एक ही संस्करण में 300 रन बनाने वाली पहली खिलाड़ी बन गईं। डैनी ने पूरे टूर्नामेंट में सात मैचों में 60.40 की शानदार औसत से 302 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 42 चौके और दो छक्के निकले। लगातार बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत उन्होंने इंग्लैंड को फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी सबसे यादगार पारी श्रीलंका के खिलाफ आई, जब उन्होंने नाबाद 105 रन बनाकर टीम को बड़ी जीत दिलाई। इसके बाद उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ 16 रन, स्कॉटलैंड के विरुद्ध 7 रन, वेस्टइंडीज के खिलाफ 65 रन और न्यूजीलैंड के खिलाफ नाबाद 89 रन की शानदार पारी खेली। सेमीफाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने 12 रन का योगदान दिया और फाइनल में 8 रन जोड़कर इतिहास रच दिया। लॉर्ड्स में खेले गए खिताबी मुकाबले में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए चार विकेट पर 150 रन बनाए। टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और एमी जोन्स जल्दी आउट हो गईं। इसके बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट और डैनी वायट-हॉज ने दूसरे विकेट के लिए 25 रन जोड़े। एलिस कैप्सी ने 23 रन बनाए, जबकि कप्तान नेट साइवर-ब्रंट 58 रन और फ्रेया कैंप 44 रन बनाकर नाबाद रहीं। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 80 रन की महत्वपूर्ण साझेदारी कर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया ने बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड की शानदार बल्लेबाजी के दम पर लक्ष्य आसानी से हासिल कर सात विकेट से जीत दर्ज की और रिकॉर्ड सातवीं बार विमेंस टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम कर लिया। इंग्लैंड ट्रॉफी नहीं जीत सका, लेकिन डैनी वायट-हॉज का ऐतिहासिक रिकॉर्ड इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी व्यक्तिगत उपलब्धियों में दर्ज हो गया।
अग्निपथ योजना में हो सकता है बड़ा बदलाव, अधिक अग्निवीरों को स्थायी सेवा में शामिल करने का प्रस्ताव सरकार के पास पहुंचा

नई दिल्ली। अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए लाखों अग्निवीरों के लिए भविष्य में स्थायी सैन्य सेवा के अवसर बढ़ सकते हैं। तीनों सेनाओं की ओर से चार वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले अधिक अग्निवीरों को नियमित सेवा में शामिल करने का प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा गया है। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन प्रस्ताव पर गंभीर स्तर पर विचार किए जाने की चर्चा है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो अग्निपथ योजना लागू होने के बाद यह सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक माना जाएगा। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार प्रत्येक बैच के अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को प्रदर्शन, योग्यता और संगठन की आवश्यकता के आधार पर नियमित सेवा में शामिल किया जा सकता है। अब तीनों सेनाओं ने इस सीमा को बढ़ाने का सुझाव दिया है। बताया जा रहा है कि भारतीय नौसेना ने सबसे अधिक संख्या में अग्निवीरों को स्थायी सेवा देने का प्रस्ताव रखा है, जबकि थल सेना और वायुसेना ने भी मौजूदा प्रतिशत बढ़ाने की सिफारिश की है। यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब अग्निपथ योजना के तहत भर्ती पहला बैच अपना चार वर्षीय कार्यकाल पूरा करने की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित जवानों के भविष्य को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि चार वर्षों के दौरान विशेष प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके जवानों को बड़ी संख्या में सेवा से बाहर करना व्यावहारिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आधुनिक सैन्य अभियानों में अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों, तकनीकी उपकरणों और विशेष युद्धक क्षमताओं का महत्व लगातार बढ़ा है। ऐसे में प्रशिक्षित और अनुभवी जवानों को अधिक समय तक सेवा में बनाए रखने से सेना की परिचालन क्षमता मजबूत होगी। इसके साथ ही प्रशिक्षण पर होने वाले निवेश का भी बेहतर उपयोग किया जा सकेगा। रिपोर्टों के अनुसार सशस्त्र बलों में मानव संसाधन की आवश्यकता भी इस प्रस्ताव के पीछे एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। आने वाले वर्षों में भर्ती प्रक्रिया का दायरा बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित सैनिक उपलब्ध रह सकें। इससे सेना की दीर्घकालिक क्षमता और संचालन व्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। बताया जा रहा है कि पहले संबंधित स्तर पर विस्तृत समीक्षा की जाएगी, जिसके बाद ही सरकार अंतिम फैसला ले सकती है। इसलिए फिलहाल स्थायी सेवा में शामिल किए जाने की नई व्यवस्था लागू होने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अग्निपथ योजना की शुरुआत वर्ष 2022 में युवाओं को चार वर्ष के लिए सेना, नौसेना और वायुसेना में भर्ती करने के उद्देश्य से की गई थी। इस योजना के तहत चयनित युवाओं को अग्निवीर कहा जाता है। सेवा अवधि पूरी होने के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार सीमित संख्या में अभ्यर्थियों को नियमित सेवा का अवसर मिलता है, जबकि अन्य अग्निवीरों को सेवा निधि, कौशल प्रमाणपत्र और विभिन्न रोजगार सहायता सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। योजना लागू होने के बाद नौकरी की स्थिरता, पेंशन और चार वर्ष बाद भविष्य की संभावनाओं को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। यदि स्थायी सेवा में शामिल किए जाने का प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव स्वीकृत होता है तो इससे बड़ी संख्या में अग्निवीरों के लिए सैन्य करियर के अवसर बढ़ सकते हैं। साथ ही योजना को लेकर युवाओं के बीच विश्वास भी और मजबूत होने की संभावना है। फिलहाल सभी की नजरें सरकार के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।
ऑस्ट्रेलिया का दबदबा बरकरार, इंग्लैंड को हराकर रिकॉर्ड सातवीं बार बना विमेंस टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन

नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित करते हुए इंग्लैंड को 7 विकेट से हराकर रिकॉर्ड सातवीं बार खिताब जीत लिया। लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए मुकाबले में बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड की शानदार बल्लेबाजी ने ऑस्ट्रेलिया को आसान जीत दिला दी। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया 2010, 2012, 2014, 2018, 2020 और 2023 में भी विश्व विजेता रह चुका है। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी नहीं रही और टीम ने महज 7 रन पर पहला विकेट गंवा दिया। इसके बाद कप्तान नेट साइवर-ब्रंट ने पारी को संभालते हुए संयमित बल्लेबाजी की। उन्होंने फ्रेया कैंप के साथ अहम साझेदारी निभाई और टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया। साइवर-ब्रंट ने 53 गेंदों में 58 रन की नाबाद पारी खेली, जबकि फ्रेया कैंप ने 28 गेंदों पर 44 रन बनाकर इंग्लैंड का स्कोर 20 ओवर में 4 विकेट पर 150 रन तक पहुंचाया। ऑस्ट्रेलिया की ओर से किम गार्थ, लूसी हैमिल्टन, सोफी मोलिनेक्स और एनाबेल सदरलैंड ने एक-एक विकेट लिया। 151 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत भी साधारण रही और जॉर्जिया वोल सिर्फ 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। इसके बाद बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड ने दूसरे विकेट के लिए 100 रन की शानदार साझेदारी कर मैच पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में कर दिया। लिचफील्ड ने 35 गेंदों में 48 रन बनाए, जबकि बेथ मूनी ने 49 गेंदों पर 64 रन की बेहतरीन पारी खेली। एलिस पेरी ने नाबाद 13 रन बनाकर टीम को 17.1 ओवर में जीत की मंजिल तक पहुंचा दिया। इंग्लैंड की ओर से शार्लेट डीन, लॉरेन बेल और सोफी एक्लेस्टोन को एक-एक विकेट मिला, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के सामने उनकी गेंदबाजी बेअसर साबित हुई। फाइनल में मैच जिताऊ पारी खेलने वाली बेथ मूनी को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। पूरे टूर्नामेंट में 7 मैचों में 238 रन बनाने और लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार भी मिला। खिताबी जीत के बाद मूनी ने कहा कि टीम ने पूरे टूर्नामेंट में आत्मविश्वास और निडर क्रिकेट खेली। उन्होंने कोचिंग स्टाफ, साथी खिलाड़ियों और कप्तान सोफी मोलिनेक्स की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि पूरी टीम ने एक-दूसरे का हर परिस्थिति में साथ दिया और इसी एकजुटता का परिणाम विश्व कप ट्रॉफी के रूप में मिला। कप्तान मोलिनेक्स के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उनके शांत स्वभाव और बेहतर फैसलों ने टीम को पूरे अभियान में मजबूती दी। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने महिला टी20 विश्व कप में अपना दबदबा एक बार फिर साबित कर दिया और रिकॉर्ड सातवीं बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।
राम जन्मभूमि ट्रस्ट की अहम बैठक आज, चंपत राय के इस्तीफे से लेकर सुरक्षा और प्रशासनिक सुधार तक कई बड़े मुद्दों पर होगी चर्चा

नई दिल्ली। अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को आयोजित होने जा रही है। हाल के दिनों में मंदिर के चढ़ावे से जुड़े विवाद और प्रशासनिक मुद्दों के बीच बुलाई गई इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य की प्रशासनिक योजनाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार होने की संभावना है। बैठक को देखते हुए राम जन्मभूमि परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पहले से अधिक सख्त कर दी गई है। जानकारी के अनुसार बैठक दोपहर बाद आयोजित होगी। सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए इस बार बैठक का स्थान बदला गया है और इसे राम जन्मभूमि परिसर स्थित गेस्ट हाउस में आयोजित किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास करेंगे। ट्रस्ट के अधिकांश सदस्य प्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहेंगे, जबकि कुछ सदस्य ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल होंगे। बैठक के एजेंडे में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं। इनमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों से जुड़े मामलों पर चर्चा प्रमुख मानी जा रही है। इसके अलावा मंदिर के दानपात्र से कथित चढ़ावे की चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल की प्रारंभिक रिपोर्ट पर भी विचार किया जाएगा। ट्रस्ट इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े निर्णय ले सकता है। बैठक में मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उपायों पर भी चर्चा होगी। हाल के वर्षों में राम मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है, जिसके चलते भीड़ प्रबंधन, दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ट्रस्ट भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्थाओं और संसाधनों पर भी विचार करेगा। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2025-26 के आय-व्यय, लेखा-जोखा और विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा भी बैठक का हिस्सा होगी। ट्रस्ट प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने, वित्तीय प्रबंधन को और मजबूत बनाने तथा मंदिर संचालन से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों को मंजूरी दे सकता है। इन फैसलों का असर आने वाले समय में मंदिर की व्यवस्थाओं और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर दिखाई दे सकता है। बैठक के मद्देनजर अयोध्या में सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक इंतजाम किए हैं। राम जन्मभूमि परिसर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। सभी प्रवेश मार्गों पर सघन जांच अभियान चलाया जा रहा है, जबकि संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाया गया है ताकि बैठक के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था की संभावना न रहे। धार्मिक और प्रशासनिक दृष्टि से इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इसमें लिए जाने वाले फैसले ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था और राम मंदिर के भविष्य के संचालन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। बैठक समाप्त होने के बाद ट्रस्ट की ओर से लिए गए निर्णयों की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक किए जाने की संभावना है।
विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026: मूनी के तूफान से ऑस्ट्रेलिया चैंपियन, 'प्लेयर ऑफ द मैच' और 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' दोनों अवॉर्ड जीते

नई दिल्ली । लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए विमेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित करते हुए इंग्लैंड को हराकर खिताब अपने नाम कर लिया। इस जीत की सबसे बड़ी नायिका सलामी बल्लेबाज बेथ मूनी रहीं, जिन्होंने शानदार अर्धशतक जड़ते हुए टीम को आसान जीत दिलाई। उनकी शानदार बल्लेबाजी के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ और पूरे टूर्नामेंट में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ चुना गया। इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 150 रन बनाए। जवाब में ऑस्ट्रेलिया ने सिर्फ 17.1 ओवर में लक्ष्य हासिल कर छह विकेट से मुकाबला जीत लिया। ऑस्ट्रेलिया की जीत की नींव बेथ मूनी और फोएबे लिचफील्ड की शानदार साझेदारी ने रखी। दोनों बल्लेबाजों ने दूसरे विकेट के लिए 67 गेंदों में 100 रन जोड़कर मैच पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया के पक्ष में कर दिया। बेथ मूनी ने 49 गेंदों पर 64 रनों की शानदार पारी खेली, जिसमें 10 चौके शामिल रहे। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने सात मैचों में 238 रन बनाए और 47.60 की औसत से बल्लेबाजी की। बल्लेबाजी के अलावा उन्होंने फील्डिंग में भी पांच कैच लेकर अहम योगदान दिया। वह टूर्नामेंट में दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज रहीं। खिताबी जीत के बाद मूनी ने कहा कि यह टूर्नामेंट टीम के लिए लंबे समय से सबसे बड़ा लक्ष्य था और इस सफर का अंत विश्व कप जीत के साथ होना बेहद संतोषजनक है। उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में टीम में कई बदलाव हुए, लेकिन खिलाड़ियों ने एक-दूसरे का पूरा साथ दिया और आत्मविश्वास के साथ क्रिकेट खेला। उनके मुताबिक टीम ने पूरे अभियान में निडर और सकारात्मक सोच के साथ प्रदर्शन किया। मूनी ने टीम के सपोर्ट स्टाफ और कोचिंग ग्रुप की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि लंबे दौरे और खिलाड़ियों की छोटी-मोटी चोटों के बावजूद पूरे स्टाफ ने बेहतरीन काम किया, जिसकी बदौलत फाइनल में ऑस्ट्रेलिया अपनी सर्वश्रेष्ठ टीम के साथ उतर सका। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान सोफी मोलिनक्स की नेतृत्व क्षमता की सराहना करते हुए मूनी ने कहा कि वह बेहद शांत स्वभाव की कप्तान हैं और दबाव की परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखती हैं। उनके नेतृत्व में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और विश्व कप जीतकर उनके नेतृत्व को यादगार सम्मान दिया। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने एक बार फिर महिला टी20 क्रिकेट में अपना दबदबा कायम रखा, जबकि बेथ मूनी ने अपने दमदार प्रदर्शन से साबित कर दिया कि बड़े मुकाबलों में वह टीम की सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में से एक हैं।
राज्यसभा उपचुनाव में दिलचस्प हुआ बंगाल का सियासी गणित, टीएमसी में टूट के बावजूद ममता बनर्जी के समर्थन के बिना मुश्किल में ऋतब्रता गुट

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। निर्वाचन कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही सभी दलों ने अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। मौजूदा विधानसभा संख्या बल को देखते हुए दो सीटों का परिणाम अपेक्षाकृत स्पष्ट माना जा रहा है, जबकि तीसरी सीट पर राजनीतिक समीकरण और संभावित क्रॉस वोटिंग चुनाव को बेहद रोचक बना सकती है। राज्य की 294 सदस्यीय विधानसभा के आधार पर राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए लगभग 74 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी। विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास 207 विधायक हैं, जिससे वह दो उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने की स्थिति में दिखाई देती है। हालांकि तीसरी सीट पर जीत के लिए आवश्यक अतिरिक्त समर्थन जुटाना उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के पास कुल 80 विधायक हैं, लेकिन पार्टी के भीतर सामने आए राजनीतिक मतभेदों ने समीकरण को जटिल बना दिया है। इसके बावजूद माना जा रहा है कि राज्यसभा चुनाव में ममता बनर्जी का प्रभाव अभी भी निर्णायक बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके समर्थन के बिना अलग गुट के लिए राज्यसभा तक पहुंच बनाना आसान नहीं होगा। ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से पर्याप्त विधायकों के समर्थन का दावा किया गया है। यदि इन दावों को सही माना जाए तो भी ममता बनर्जी के साथ मौजूद विधायकों की संख्या ऐसी स्थिति बना सकती है, जिससे अलग गुट के उम्मीदवार की जीत की संभावनाएं प्रभावित हों। यही कारण है कि राज्यसभा चुनाव केवल संख्या का नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति का भी मुकाबला बन गया है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि क्या भारतीय जनता पार्टी तीसरी सीट के लिए अपने अतिरिक्त मतों का उपयोग किसी अन्य गुट के उम्मीदवार के पक्ष में करेगी। दो उम्मीदवारों की संभावित जीत के बाद भाजपा के पास कुछ मत शेष रह सकते हैं, जिनका इस्तेमाल चुनावी रणनीति के तहत किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अभी किसी दल की ओर से आधिकारिक संकेत सामने नहीं आए हैं। तीसरी सीट का परिणाम संभावित क्रॉस वोटिंग पर भी निर्भर माना जा रहा है। यदि किसी भी दल के विधायक पार्टी लाइन से हटकर मतदान करते हैं तो चुनावी गणित पूरी तरह बदल सकता है। ऐसे में सभी राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुट गए हैं और मतदान तक अंदरूनी गतिविधियां तेज रहने की संभावना है। विधानसभा में भाजपा के अलावा तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायक हैं। कांग्रेस के पास दो विधायक हैं, जबकि हुमायूं कबीर की पार्टी के भी दो विधायक मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त सीपीआई और एआईएसएफ के पास एक-एक विधायक है। इन छोटी राजनीतिक ताकतों की भूमिका भी करीबी मुकाबले की स्थिति में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। राज्यसभा उपचुनाव केवल रिक्त सीटों को भरने की प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक तस्वीर का भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। चुनाव परिणाम यह स्पष्ट करेंगे कि टीएमसी के भीतर उभरे नए समीकरणों का वास्तविक असर कितना है और विपक्ष किस हद तक इस स्थिति का राजनीतिक लाभ उठा पाता है। आगामी मतदान और मतगणना पर पूरे राज्य के साथ राष्ट्रीय राजनीति की भी नजर बनी हुई है।
विंबलडन में बड़ा उलटफेर: ओसाका ने नंबर-1 सबालेंका को हराया, पहली बार क्वार्टर फाइनल में पहुंचीं

नई दिल्ली । विंबलडन 2026 में सोमवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। जापान की स्टार टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका ने दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी आर्यना सबालेंका को सीधे सेटों में 6-2, 7-6 (7-2) से हराकर पहली बार विंबलडन के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। सेंटर कोर्ट पर खेला गया यह मुकाबला 1 घंटे 28 मिनट तक चला, जिसमें ओसाका ने शुरुआत से अंत तक दमदार प्रदर्शन किया। चार बार की ग्रैंड स्लैम चैंपियन ओसाका के लिए यह जीत बेहद खास रही। 2026 में दोनों खिलाड़ियों के बीच हुए तीनों मुकाबलों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वहीं, 2018 यूएस ओपन के बाद यह पहला अवसर है जब उन्होंने सबालेंका को मात दी है। ओसाका ने मैच की शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाया और सटीक सर्विस व तेज ग्राउंडस्ट्रोक्स के दम पर पहले सेट को आसानी से 6-2 से अपने नाम कर लिया। दूसरे सेट में सबालेंका ने जोरदार वापसी की और मुकाबले को टाई-ब्रेक तक पहुंचाया, लेकिन निर्णायक क्षणों में ओसाका ने शानदार नियंत्रण बनाए रखते हुए टाई-ब्रेक 7-2 से जीत लिया और मैच अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ ओसाका ने पहली बार विंबलडन के अंतिम-8 में प्रवेश किया। इससे पहले वह कभी भी इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल तक नहीं पहुंच सकी थीं। मां बनने के बाद उनकी यह उपलब्धि शानदार वापसी का बड़ा संकेत मानी जा रही है और अब उन्हें खिताब की प्रमुख दावेदारों में भी गिना जा रहा है। दूसरी ओर, सबालेंका का लगातार 14 ग्रैंड स्लैम क्वार्टर फाइनल में पहुंचने का सिलसिला टूट गया। उनका यह रिकॉर्ड 2022 यूएस ओपन से चला आ रहा था। साथ ही, 2020 यूएस ओपन के बाद पहली बार उन्हें किसी ग्रैंड स्लैम मुकाबले में सीधे सेटों में हार का सामना करना पड़ा।
जंतर-मंतर आंदोलन के बीच अभिजीत दीपके की छात्रों से अपील, बोले- लंबी लड़ाई के लिए सेहत बचाना जरूरी, अनशन का जिम्मा सोनम वांगचुक संभालें

नई दिल्ली। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े कथित पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर राजधानी के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन के बीच आंदोलन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। प्रदर्शन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लगातार नौ दिनों से अनशन पर हैं, जबकि उनके समर्थन में कुछ छात्र भी भूख हड़ताल कर रहे हैं। इसी बीच आंदोलन से जुड़े अभिजीत दीपके ने छात्रों से अनशन समाप्त कर अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की अपील की है। अभिजीत दीपके का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है, जिसमें वह छात्रों और समर्थकों को संबोधित करते हुए कहते हैं कि यह आंदोलन जल्द समाप्त होने वाला नहीं है। ऐसे में सभी लोगों का लंबे समय तक सक्रिय और स्वस्थ रहना आवश्यक है। उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में छात्र लगातार अनशन करते रहेंगे तो आंदोलन की संगठनात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है। दीपके ने अपने संदेश में कहा कि सोनम वांगचुक को लंबे समय तक शांतिपूर्ण आंदोलनों और अनशन का अनुभव है, इसलिए वह इस जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से निभा सकते हैं। वहीं छात्रों और अन्य समर्थकों को अपनी ऊर्जा आंदोलन के संचालन, जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में लगानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी आंदोलन की सफलता केवल अनशन पर नहीं, बल्कि लगातार सक्रिय जनभागीदारी और समन्वित प्रयासों पर भी निर्भर करती है। प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक ने भी आंदोलन का समर्थन करने वाले लोगों से संयमित जीवनशैली अपनाने और प्रतीकात्मक रूप से एक दिन का उपवास रखने की अपील की। उनका कहना है कि यदि समर्थक बारी-बारी से एक दिन का उपवास करें तो आंदोलन के प्रति एकजुटता का संदेश भी जाएगा और प्रदर्शन स्थल पर भोजन की व्यवस्था का दबाव भी कम होगा। उन्होंने भोजन में संतुलन और अनुशासन को अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बताया। जानकारी के अनुसार, लंबे समय से जारी अनशन के कारण सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा है और उनका वजन कम हुआ है। इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली में सुधार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। जंतर-मंतर पर जारी यह आंदोलन लगातार लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। प्रदर्शन में शामिल छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता शिक्षा व्यवस्था से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। वहीं आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधि लगातार यह भी प्रयास कर रहे हैं कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण बना रहे और इसमें शामिल लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। इसी उद्देश्य से अभिजीत दीपके ने छात्रों से अपील की है कि वे अपनी जान जोखिम में डालने के बजाय आंदोलन को अन्य माध्यमों से मजबूत करें। उनका मानना है कि किसी भी जनआंदोलन की सबसे बड़ी ताकत उसके सक्रिय और स्वस्थ कार्यकर्ता होते हैं। ऐसे में लंबी अवधि के संघर्ष के लिए संयम, संगठन और सतत भागीदारी सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।