इंदौर में साइबर ठगों का कहर, पेंशन कार्ड और सस्ती बाइक के झांसे में तीन लोगों से 4.57 लाख की ठगी

इंदौर । इंदौर में साइबर अपराधियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। शहर में सामने आए तीन अलग-अलग मामलों में ठगों ने पेंशन कार्ड बनवाने, मोबाइल हैक करने और सस्ती बाइक दिलाने का झांसा देकर तीन लोगों से कुल 4.57 लाख रुपए से अधिक की ठगी कर ली। सभी मामलों में लसूडिया थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस लोगों से किसी भी अनजान कॉल, लिंक या सोशल मीडिया विज्ञापन पर भरोसा नहीं करने की अपील कर रही है। पहले मामले में लसूडिया थाना क्षेत्र की सेटेलाइट टाउनशिप निवासी 75 वर्षीय अखिलेश गायकवाड़ को ठगों ने निशाना बनाया। 15 जून की शाम एक व्यक्ति ने खुद को बैंक ऑफ इंडिया का अधिकारी बताते हुए उन्हें फोन किया और पेंशनधारकों के लिए नया पेंशन कार्ड जारी होने की जानकारी दी। चूंकि अखिलेश पहले इस कार्ड के लिए आवेदन कर चुके थे इसलिए उन्होंने कॉल करने वाले पर विश्वास कर लिया। आरोपी ने बैंक खाते, एटीएम कार्ड और अन्य व्यक्तिगत जानकारी लेने के साथ ऑनलाइन फोटो भी प्राप्त कर लिया। इसके कुछ ही देर बाद उनका मोबाइल ठग के नियंत्रण में चला गया और खाते से तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 1.39 लाख रुपए निकाल लिए गए। घटना का पता चलते ही उन्होंने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। दूसरे मामले में स्लाइस-सी सेक्टर निवासी गोपाल वाकड़े साइबर ठगी का शिकार बने। 17 जून को उनका मोबाइल अचानक बंद हो गया। मोबाइल दोबारा चालू होने पर उन्हें खाते से 44 हजार रुपए निकलने का संदेश मिला। बैंक पहुंचने पर पता चला कि 98 हजार रुपए का एक और ट्रांजेक्शन भी हो चुका है। इस तरह उनके खाते से कुल करीब 1.42 लाख रुपए निकाल लिए गए। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। तीसरा मामला एक छात्रा से जुड़ा है जिसे इंस्टाग्राम पर सस्ती बाइक खरीदने का विज्ञापन भारी पड़ गया। राजाबाग कॉलोनी में किराये से रहने वाली और मूल रूप से गंधवानी की निवासी पूजा झमेले ने 25 हजार रुपए में दोपहिया वाहन मिलने का विज्ञापन देखा। संपर्क करने पर आरोपी ने पहले दो हजार रुपए बुकिंग राशि के रूप में जमा कराए और बाद में ट्रांसपोर्ट चार्ज समेत अलग-अलग बहानों से कई किश्तों में पैसे मांगता रहा। गाड़ी की फोटो भेजकर भरोसा भी दिलाया गया। आखिरकार छात्रा से करीब 1.76 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। जब लंबे समय तक वाहन नहीं मिला तब उसे ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस तीनों मामलों में बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर बैंक संबंधी जानकारी साझा न करें, सोशल मीडिया पर दिखने वाले आकर्षक ऑफरों की सत्यता जांचे बिना भुगतान न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी थाने में शिकायत करें।
E20, XP95 या XP100… आपकी गाड़ी के लिए कौन-सा पेट्रोल है सबसे सही? जानिए ऑक्टेन, इथेनॉल और परफॉर्मेंस का पूरा गणित

नई दिल्ली। देश में इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दिए जाने के बाद E20 पेट्रोल अब अधिकांश पेट्रोल पंपों पर सामान्य ईंधन के रूप में उपलब्ध है। वहीं दूसरी ओर हाई-ऑक्टेन फ्यूल XP95 और XP100 को लेकर भी वाहन चालकों के बीच रुचि बढ़ी है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि इन तीनों प्रकार के पेट्रोल में वास्तविक अंतर क्या है और उनकी कार या बाइक के लिए कौन-सा विकल्प सबसे उपयुक्त रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल महंगा या अधिक ऑक्टेन वाला पेट्रोल हर वाहन के लिए बेहतर नहीं होता, बल्कि सही ईंधन का चुनाव वाहन निर्माता की तकनीकी सिफारिश के आधार पर किया जाना चाहिए। E20 पेट्रोल वर्तमान समय में सबसे अधिक उपयोग होने वाला ईंधन है। इसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है। इसकी ऑक्टेन रेटिंग 91 RON होती है, जो सामान्य उपयोग वाले पेट्रोल इंजन के लिए पर्याप्त मानी जाती है। सरकार का उद्देश्य इथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और पर्यावरणीय प्रभाव घटाना है। जिन वाहनों को E20 के अनुरूप तैयार किया गया है, उनके लिए यह ईंधन सामान्य परिस्थितियों में उपयुक्त माना जाता है। हाल के समय में कुछ वाहन मालिकों ने E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद माइलेज में कमी आने और इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित होने जैसी बातें सामने रखी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे अनुभव वाहन की तकनीक, इंजन की स्थिति और ड्राइविंग पैटर्न पर भी निर्भर करते हैं। यदि वाहन E20 के अनुकूल नहीं है, तो लंबे समय में कुछ तकनीकी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। इसलिए वाहन निर्माता द्वारा सुझाए गए ईंधन का ही उपयोग करना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। XP95 प्रीमियम श्रेणी का हाई-ऑक्टेन पेट्रोल है, जिसकी ऑक्टेन रेटिंग 95 RON होती है। इसमें लगभग 15 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित रहता है। यह विशेष रूप से हाई-कंप्रेशन, टर्बोचार्ज्ड और आधुनिक पेट्रोल इंजनों के लिए विकसित किया गया है। अधिक ऑक्टेन रेटिंग के कारण इंजन में नॉकिंग की संभावना कम होती है, जिससे इंजन अधिक स्मूद तरीके से कार्य करता है। इसके उपयोग से बेहतर एक्सेलरेशन, संतुलित प्रदर्शन और इंजन के भीतर कार्बन जमा होने में कमी जैसी विशेषताएं देखने को मिल सकती हैं। हालांकि इसका वास्तविक लाभ उन्हीं वाहनों में मिलता है जिनके इंजन की डिजाइन इस प्रकार के ईंधन के अनुरूप होती है। XP100 सबसे प्रीमियम श्रेणी का पेट्रोल माना जाता है। इसकी ऑक्टेन रेटिंग 100 RON होती है और इसमें इथेनॉल का मिश्रण नहीं किया जाता। यह मुख्य रूप से हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स कारों, सुपरकारों और सुपरबाइक्स के लिए तैयार किया गया ईंधन है। इसमें विशेष एडिटिव्स मिलाए जाते हैं जो इंजन को साफ रखने, कार्बन जमाव कम करने और अधिकतम प्रदर्शन बनाए रखने में मदद करते हैं। इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल की तुलना में काफी अधिक होती है, इसलिए इसका उपयोग केवल उन वाहनों में व्यावहारिक माना जाता है जिन्हें वास्तव में इतने उच्च ऑक्टेन ईंधन की आवश्यकता होती है। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी सामान्य कार या बाइक के निर्माता ने 91 RON ईंधन की सिफारिश की है, तो केवल अधिक महंगा पेट्रोल भरवाने से इंजन की शक्ति या माइलेज में उल्लेखनीय सुधार नहीं होता। वहीं जिन वाहनों के लिए 95 RON या उससे अधिक ऑक्टेन वाला ईंधन निर्धारित किया गया है, उनमें XP95 या XP100 बेहतर परिणाम दे सकते हैं। इसलिए ईंधन का चुनाव हमेशा वाहन के इंजन की जरूरत, निर्माता की सलाह और वास्तविक उपयोग के आधार पर करना चाहिए। सही पेट्रोल का चयन न केवल इंजन की कार्यक्षमता बनाए रखता है, बल्कि लंबे समय तक वाहन की विश्वसनीयता और प्रदर्शन को भी बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एमपी में लोकसभा सीटों का बड़ा विस्तार संभव, भोपाल-इंदौर समेत 15 नई सीटों का प्रस्ताव, बदल सकता है चुनावी गणित

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश की राजनीति आने वाले वर्षों में बड़े बदलाव के दौर से गुजर सकती है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की एक अध्ययन रिपोर्ट में भविष्य के परिसीमन के दौरान राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या 29 से बढ़ाकर 44 किए जाने का सुझाव दिया गया है। यानी मध्य प्रदेश को 15 नई लोकसभा सीटें मिल सकती हैं। हालांकि परिषद ने स्पष्ट किया है कि यह अंतिम परिसीमन प्रस्ताव नहीं बल्कि प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया एक अध्ययन मॉडल है। रिपोर्ट में देशभर में मौजूदा 543 लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 824 करने और बड़े संसदीय क्षेत्रों को दो या तीन हिस्सों में विभाजित करने की सिफारिश की गई है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश में लगभग 52 प्रतिशत सीटें बढ़ने की संभावना जताई गई है। यदि भविष्य में इस दिशा में फैसला होता है तो राज्य के चुनावी और राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार भविष्य का परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए मतदाताओं की संख्या, भौगोलिक क्षेत्रफल, शहरीकरण, अनुसूचित जाति और जनजाति की आबादी, सामाजिक और भाषाई विविधता तथा मतदान प्रतिशत जैसे कई मानकों को भी महत्व देने का सुझाव दिया गया है। परिषद का मानना है कि इससे सांसद और मतदाताओं के बीच संपर्क बेहतर होगा तथा निर्वाचन क्षेत्रों का संतुलित विकास संभव हो सकेगा। सबसे अधिक असर भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर, रीवा और छिंदवाड़ा जैसे बड़े संसदीय क्षेत्रों पर पड़ सकता है। इन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और शहरी विस्तार भी तेजी से हो रहा है। वहीं नए जिले मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा भी भविष्य के परिसीमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। रिपोर्ट में मालवा-निमाड़ और महाकौशल क्षेत्रों में सबसे अधिक बदलाव की संभावना जताई गई है। मालवा-निमाड़ की मौजूदा नौ लोकसभा सीटों में इंदौर, उज्जैन, धार और खरगोन जैसे बड़े क्षेत्रों का विभाजन कर सीटों की संख्या 13 तक पहुंच सकती है। इसी तरह महाकौशल क्षेत्र की छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला और बालाघाट जैसी सीटों का पुनर्गठन कर यहां लोकसभा सीटों की संख्या चार से बढ़ाकर आठ किए जाने की संभावना बताई गई है। यदि मध्य प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 44 होती है तो राष्ट्रीय राजनीति में राज्य की भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। संसद में अधिक प्रतिनिधित्व मिलने के साथ केंद्र सरकार में राज्य की भागीदारी भी मजबूत हो सकती है। वहीं राजनीतिक दलों को नए परिसीमन के अनुसार संगठनात्मक ढांचे और चुनावी रणनीति में व्यापक बदलाव करने पड़ सकते हैं क्योंकि कई संसदीय क्षेत्रों की सीमाएं बदल जाएंगी। रिपोर्ट के विश्लेषण के अनुसार नए परिसीमन की स्थिति में भोपाल, इंदौर, नागदा, बीना, ग्वालियर शहर, सीहोर, मऊगंज और लांजी जैसे क्षेत्रों में भाजपा की स्थिति मजबूत रह सकती है। वहीं पांढुर्णा, सरदारपुर, बड़वानी, डिंडौरी और उमरिया जैसे क्षेत्रों में कांग्रेस को नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि यह केवल अध्ययन आधारित आकलन है और अंतिम निर्णय भविष्य में होने वाले आधिकारिक परिसीमन पर निर्भर करेगा।
कच्चा तेल 71 डॉलर के करीब, फिर भी नहीं मिली राहत; जानिए 6 जुलाई को आपके शहर में पेट्रोल-डीजल के ताजा दाम और कीमतें घटने की पूरी तस्वीर

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी आने के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। सोमवार 6 जुलाई को भी सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन के दाम स्थिर रखे हैं। इससे वाहन चालकों को बढ़ोतरी से राहत तो मिली है, लेकिन सस्ते कच्चे तेल का सीधा लाभ अभी उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पाया है। पिछले कई दिनों से पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक ही स्तर पर बनी हुई हैं और बाजार की नजर अब आगे होने वाले संभावित बदलाव पर टिकी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। उत्पादन बढ़ाने के फैसलों और वैश्विक आपूर्ति में सुधार की उम्मीद के चलते ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों प्रमुख बेंचमार्क नीचे आए हैं। इससे यह उम्मीद जगी कि भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि घरेलू स्तर पर फिलहाल कीमतों में किसी प्रकार की कटौती नहीं की गई है। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर उपलब्ध है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये तथा डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है। चेन्नई में पेट्रोल 107.76 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है। इसके अलावा नोएडा, गुरुग्राम, लखनऊ, जयपुर, पटना, बेंगलुरु, हैदराबाद और चंडीगढ़ सहित अन्य शहरों में भी निर्धारित दरों पर ईंधन की बिक्री जारी है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई हालिया गिरावट का असर घरेलू कीमतों पर तुरंत दिखाई देना संभव नहीं है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि तेल कंपनियां अभी भी कुछ समय पहले ऊंची कीमतों पर खरीदे गए कच्चे तेल को रिफाइन कर रही हैं। इसके अलावा परिवहन, बीमा और अन्य परिचालन लागत भी ईंधन की अंतिम कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में कच्चे तेल के सस्ता होने का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में कुछ समय लग सकता है। सरकार का यह भी मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं या और नीचे आती हैं, तभी पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा की जा सकती है। फिलहाल तेल कंपनियां पूर्व में हुए अतिरिक्त खर्च और लागत की भरपाई करने की प्रक्रिया में हैं, इसलिए तत्काल राहत की संभावना सीमित मानी जा रही है। गौरतलब है कि मई 2026 के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई चरणों में बढ़ोतरी की गई थी। उसके बाद से अब तक किसी प्रकार का संशोधन नहीं हुआ है। यही कारण है कि उपभोक्ता अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई गिरावट के बाद घरेलू कीमतों में कटौती की उम्मीद लगाए हुए हैं। जो उपभोक्ता अपने शहर के ताजा पेट्रोल और डीजल के दाम जानना चाहते हैं, वे संबंधित तेल कंपनियों की आधिकारिक डिजिटल सेवाओं या एसएमएस सुविधा के माध्यम से रोजाना अपडेट प्राप्त कर सकते हैं। चूंकि विभिन्न राज्यों में लगने वाले वैट और स्थानीय कर अलग-अलग होते हैं, इसलिए शहरों के अनुसार ईंधन की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। फिलहाल देशभर में कीमतें स्थिर हैं, जबकि बाजार की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की मौजूदा नरमी घरेलू ईंधन दरों में राहत का रास्ता कब खोलती है।
नैनीताल घूमने गया था परिवार, तीसरी मंजिल से गिरने से 3 साल के मासूम की मौत, झाबुआ में पसरा मातम

नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के राणापुर निवासी सराफा कारोबारी विशाल सोनी के तीन वर्षीय बेटे गौरांश सोनी की नैनीताल में हुए एक दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। परिवार के साथ छुट्टियां मनाने गया मासूम होटल की तीसरी मंजिल की खिड़की से नीचे गिर गया। गंभीर रूप से घायल बच्चे को पहले नैनीताल और फिर हल्द्वानी के अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर उसे दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना से परिवार के साथ पूरे राणापुर में शोक की लहर दौड़ गई है। परिजनों के अनुसार परिवार एक जुलाई को इंदौर से 22 सदस्यों के साथ नैनीताल घूमने गया था। सभी लोग मल्लीताल क्षेत्र के एक होटल में ठहरे हुए थे। रविवार सुबह गौरांश कमरे में खेल रहा था। इसी दौरान कुछ क्षण के लिए परिजनों का ध्यान उससे हट गया और वह होटल की तीसरी मंजिल की खिड़की से नीचे गिर पड़ा। करीब 20 फीट की ऊंचाई से गिरने के कारण उसके सिर और गर्दन में गंभीर चोटें आईं। हादसे के तुरंत बाद होटल में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों और होटल कर्मचारियों ने बिना देर किए बच्चे को बीडी पांडे जिला चिकित्सालय पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे हल्द्वानी के हायर सेंटर रेफर कर दिया। जांच में पता चला कि उसके सिर की हड्डियां टूट गई थीं और गर्दन में भी गंभीर चोट लगी थी। बच्चे की हालत लगातार नाजुक बनी रहने पर डॉक्टरों ने उसे बेहतर उपचार के लिए दिल्ली भेजने का निर्णय लिया। परिजनों ने बताया कि दिल्ली ले जाते समय रास्ते में गौरांश की धड़कन भी बंद हो गई थी। चिकित्सकों ने उसे दोबारा जीवित करने का प्रयास किया और फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन गंभीर सिर की चोटों के कारण डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। गौरांश परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी मौत की खबर सामने आते ही झाबुआ जिले के राणापुर कस्बे में शोक की लहर फैल गई। रिश्तेदारों और परिचितों ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। दिल्ली में आवश्यक कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद परिजन रविवार शाम एंबुलेंस से गौरांश के पार्थिव शरीर को लेकर राणापुर के लिए रवाना हो गए।
OPEC+ ने बढ़ाया तेल उत्पादन, अब सबसे बड़ा सवाल खरीदारों का; भारत-चीन की मांग पर टिकी वैश्विक बाजार की दिशा

नई दिल्ली । वैश्विक ऊर्जा बाजार एक बार फिर महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। OPEC+ देशों ने अगस्त से कच्चे तेल के उत्पादन में बढ़ोतरी का फैसला लेकर यह संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता और बढ़ सकती है। हालांकि उत्पादन बढ़ाने के इस निर्णय के साथ सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि अतिरिक्त तेल की खपत आखिर कौन करेगा और क्या वैश्विक मांग इतनी मजबूत है कि बढ़ी हुई सप्लाई को आसानी से समाहित किया जा सके। OPEC+ के प्रमुख सदस्य देशों ने अगस्त से प्रतिदिन लगभग 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन पर सहमति बनाई है। अप्रैल से शुरू हुई उत्पादन वृद्धि को मिलाकर अब कुल बढ़ोतरी करीब आठ लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच चुकी है। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और ऊर्जा बाजार को स्थिरता देना माना जा रहा है। उत्पादन बढ़ाने की योजना की सफलता काफी हद तक पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगी। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार का सबसे अहम समुद्री मार्ग माना जाता है। हाल के महीनों में क्षेत्रीय तनाव के कारण इस मार्ग से तेल परिवहन प्रभावित हुआ था, जिससे निर्यात में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। हालांकि हालात में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं और यदि यह मार्ग पूरी तरह सामान्य बना रहता है तो तेल निर्यात भी पहले की तुलना में तेज हो सकता है। बाजार में बढ़ती सप्लाई की संभावना का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दे रहा है। हाल के सप्ताहों में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी आई है और दरें युद्ध-पूर्व स्तर के आसपास पहुंच गई हैं। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों को भविष्य में पर्याप्त आपूर्ति मिलने का भरोसा है। यदि आने वाले समय में अतिरिक्त उत्पादन लगातार बाजार में पहुंचता है तो कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। अब सबसे अधिक ध्यान दुनिया के दो बड़े तेल आयातक देशों भारत और चीन पर है। चीन लंबे समय से अपनी खरीद रणनीति के लिए जाना जाता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है तो वहां आयात की गति धीमी कर दी जाती है, जबकि कीमतों में गिरावट आने पर बड़े पैमाने पर खरीद कर रणनीतिक भंडार बढ़ाया जाता है। हाल के महीनों में चीन का आयात अपेक्षाकृत कमजोर रहा है, लेकिन यदि कीमतें कम बनी रहती हैं तो उसकी रिफाइनरियां दोबारा सक्रिय होकर खरीद बढ़ा सकती हैं। भारत के लिए भी यह फैसला राहत देने वाला माना जा रहा है। देश अपनी कुल कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 90 प्रतिशत आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में सप्लाई बढ़ने और कीमतों में नरमी आने से आयात लागत कम हो सकती है। इससे पेट्रोलियम कंपनियों के खर्च पर सकारात्मक असर पड़ सकता है और ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में तेल बाजार की दिशा केवल उत्पादन बढ़ने से तय नहीं होगी, बल्कि वास्तविक मांग, वैश्विक आर्थिक गतिविधियों, समुद्री व्यापार की स्थिति और प्रमुख आयातक देशों की खरीद रणनीति भी अहम भूमिका निभाएगी। यदि भारत और चीन अपेक्षित स्तर पर खरीद बढ़ाते हैं तो अतिरिक्त उत्पादन को आसानी से बाजार मिल सकता है। वहीं मांग कमजोर रहने की स्थिति में वैश्विक तेल बाजार में अधिक आपूर्ति का दबाव बढ़ सकता है, जिससे कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।
इंदौर में दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष, लाठी-डंडे चले, महिलाओं की शिकायत पर दोनों ओर से एफआईआर

नई दिल्ली । इंदौर के गांधी नगर थाना क्षेत्र में रविवार रात दो पक्षों के बीच हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। पहले हुई कहासुनी के बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और लाठी-डंडों से मारपीट शुरू हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर पुलिस ने क्रॉस एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार वैष्णवी अग्रवाल की शिकायत पर नया बेसरा निवासी सादिक उस्मान गनी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में कहा गया है कि सादिक अक्सर क्षेत्र में विवाद करता है। रविवार रात करीब नौ बजे वह घर के बाहर पहुंचा और गाली-गलौज करने लगा। शोर सुनकर वैष्णवी के पति और अन्य लोग बाहर आए तथा उसे समझाने का प्रयास किया लेकिन विवाद बढ़ गया। आरोप है कि सादिक ने वैष्णवी के पति के साथ मारपीट कर दी। इसके बाद दंपती गांधी नगर थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। दूसरी ओर सादिक गनी की पत्नी ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि वैष्णवी अग्रवाल और उनके पति कालूसिंह अग्रवाल ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। शिकायत के अनुसार कालूसिंह ने डंडे से हमला किया जिससे उनके हाथ में चोट आई। महिला का यह भी आरोप है कि जब उनके पति सादिक बीच-बचाव के लिए पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट की गई। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए। हालात को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा ताकि स्थिति सामान्य हो सके। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर अलग-अलग प्रकरण दर्ज कर लिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बाजार में लौटा निवेशकों का भरोसा, चौथे दिन भी जारी रही तेजी; बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार उछाल

नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। लगातार चौथे सत्र में बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की, जिससे निवेशकों का विश्वास और मजबूत होता नजर आया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 300 अंकों से अधिक की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी 24,350 के स्तर के पार पहुंच गया। बाजार की इस तेजी में सबसे बड़ा योगदान बैंकिंग शेयरों का रहा, जहां निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के कई प्रमुख बैंकों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। कारोबार की शुरुआत से ही निवेशकों का रुझान मजबूत बना रहा। बेहतर मानसून की संभावनाओं, घरेलू आर्थिक गतिविधियों में सुधार और विदेशी निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी ने बाजार के माहौल को सकारात्मक बनाए रखा। शुरुआती सत्र में प्रमुख सूचकांकों में बढ़त दर्ज होने से यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है। बैंकिंग सेक्टर ने बाजार की तेजी में अहम भूमिका निभाई। कई प्रमुख निजी बैंकों के शेयरों में उल्लेखनीय खरीदारी देखने को मिली, जिससे बैंकिंग सूचकांक में अच्छी मजबूती आई। वित्तीय क्षेत्र के अलावा रक्षा, दूरसंचार, इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक क्षेत्र की कुछ कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। इन क्षेत्रों में आई मजबूती ने बाजार को ऊंचे स्तर पर बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हालांकि सभी क्षेत्रों में तेजी का माहौल नहीं रहा। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कुछ प्रमुख शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे आईटी सूचकांक पर दबाव बना। इसके अलावा कुछ ऑटो, पेंट और एविएशन कंपनियों के शेयर भी शुरुआती कारोबार में कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। इसके बावजूद बाजार की समग्र दिशा सकारात्मक बनी रही और प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते रहे। व्यापक बाजार में भी सकारात्मक संकेत देखने को मिले। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों के शेयरों में सीमित लेकिन स्थिर बढ़त दर्ज की गई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि केवल बड़ी कंपनियों तक ही खरीदारी सीमित नहीं रही, बल्कि निवेशकों ने मध्यम और छोटी कंपनियों में भी निवेश करना जारी रखा। व्यापक भागीदारी को बाजार की मजबूती का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगभग स्थिर स्तर पर खुला। मुद्रा बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव की अनुपस्थिति ने भी निवेशकों को राहत दी। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखने को मिली, जिसे आयात पर निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। ऊर्जा लागत में कमी का प्रभाव आने वाले समय में कई उद्योगों के परिचालन खर्च पर भी पड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक संकेत अनुकूल बने रहते हैं और विदेशी निवेशकों का निवेश जारी रहता है, तो घरेलू शेयर बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी कायम रह सकता है। हालांकि निवेशकों को वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और कंपनियों के आगामी तिमाही नतीजों पर भी नजर बनाए रखनी होगी। लगातार चौथे दिन दर्ज हुई यह तेजी इस बात का संकेत है कि बाजार में फिलहाल निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है। आने वाले कारोबारी सत्रों में आर्थिक आंकड़ों, वैश्विक संकेतों और कॉरपोरेट प्रदर्शन के आधार पर बाजार की आगे की दिशा तय होगी, लेकिन फिलहाल शुरुआती रुझान निवेशकों के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती पर बड़ा ऐलान, इंदौर में इस प्रमुख सड़क का नाम होगा उनके नाम पर

नई दिल्ली । भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी विचारक और देश की एकता एवं अखंडता के प्रबल समर्थक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर इंदौर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। विजय नगर चौराहे पर स्थापित उनकी प्रतिमा पर जनप्रतिनिधियों ने माल्यार्पण कर उनके राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को नमन किया और उनके आदर्शों को स्मरण किया। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने डॉ. मुखर्जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र सेवा, सांस्कृतिक गौरव, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी के विचार आज भी देश को मजबूत और संगठित बनाने की प्रेरणा देते हैं। इस अवसर पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि एमआर-4 मास्टर प्लान के तहत शास्त्री ब्रिज के नीचे से बाणगंगा रेलवे क्रॉसिंग तक जाने वाली सड़क का नामकरण डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राष्ट्र के प्रति उनके योगदान और बलिदान को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। कार्यक्रम के दौरान मौजूद जनप्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया और उनका त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में विधायक रमेश मेंदोला, पूर्व महापौर कृष्ण मुरारी मोघे, भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, स्वास्थ्य प्रभारी अश्विनी शुक्ल, पार्षद कमल वाघेला सहित कई जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी, पार्षद और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने पुष्प अर्पित कर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्र निर्माण में दिए गए योगदान को श्रद्धापूर्वक याद किया और उनके आदर्शों को समाज तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।
खजराना गणेश मंदिर में तेज़ी से विकास कार्य, डेढ़ फीट नीचे होगा सभामंडप, लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा होगी दोगुनी

इंदौर । इंदौर का विश्व प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर आगामी सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए बड़े बदलावों से गुजर रहा है। लाखों श्रद्धालुओं की आस्था के इस प्रमुख केंद्र पर दर्शन व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए मंदिर परिसर में व्यापक विकास कार्य तेज़ी से किए जा रहे हैं। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य यह है कि भविष्य में बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की संख्या के बावजूद दर्शन व्यवस्था सुचारु और व्यवस्थित बनी रहे। मंदिर के गर्भगृह का प्रवेश द्वार पहले ही चौड़ा किया जा चुका है। अब गर्भगृह के बाहर स्थित सभामंडप को लगभग डेढ़ फीट नीचे किया जा रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ सामान्य श्रद्धालुओं को मिलेगा। अभी तक सभामंडप में विशेष पूजन, वीआईपी दर्शन या नवविवाहित दंपतियों के धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान पीछे खड़े श्रद्धालुओं का दृश्य बाधित हो जाता था, जिससे भगवान के दर्शन करने में कठिनाई होती थी। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट के अनुसार सभामंडप का स्तर नीचे किए जाने से लाइन में खड़े श्रद्धालुओं को बिना किसी अवरोध के सीधे भगवान गणेश के दर्शन हो सकेंगे। इससे मंदिर में आने वाले प्रत्येक भक्त को बेहतर धार्मिक अनुभव मिलेगा और भीड़ प्रबंधन भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। मंदिर परिसर के लिए तैयार मास्टर प्लान के तहत केवल सभामंडप ही नहीं बल्कि कई अन्य विकास कार्य भी प्रस्तावित हैं। आने वाले समय में यहां आधुनिक दर्शन हॉल का निर्माण भी किया जाएगा। इस हॉल के बनने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ व्यवस्थित तरीके से कतारबद्ध होकर भगवान के दर्शन कर सकेंगे। इससे त्योहारों और विशेष अवसरों पर लगने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में भी आसानी होगी। सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के इंदौर स्थित खजराना गणेश मंदिर पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन अभी से सभी आवश्यक तैयारियों में जुटा हुआ है। यही कारण है कि मंदिर की आधारभूत सुविधाओं को आधुनिक स्वरूप देने के साथ श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है। खजराना गणेश मंदिर देशभर के प्रमुख गणेश मंदिरों में शामिल है और यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष पर्वों और बुधवार के दिन यहां भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे में मंदिर परिसर में किए जा रहे ये विकास कार्य भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मंदिर प्रशासन का मानना है कि इन सुधारों के पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं को पहले से कहीं अधिक सहज, सुरक्षित और व्यवस्थित दर्शन का अनुभव मिलेगा।