सिर्फ 5 रुपए भेजे और गंवा दिए ₹1.08 लाख, ओटीटी सब्सक्रिप्शन बंद कराने के बहाने साइबर ठगों का नया खेल

नई दिल्ली । इंदौर में साइबर अपराधियों ने ऑनलाइन ठगी का नया तरीका अपनाते हुए एक दवा व्यापारी और उनकी पत्नी को एक लाख आठ हजार रुपए का चूना लगा दिया। ठगों ने ओटीटी सब्सक्रिप्शन बंद कराने के बहाने पहले महज 5 रुपए ट्रांसफर करवाए और इसके कुछ ही मिनटों बाद दोनों के बैंक खातों से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए पूरी रकम निकाल ली। मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित निर्मल नवलानी गोपाल कॉलोनी के निवासी हैं और दवा व्यवसाय से जुड़े हैं। उन्होंने विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म की सदस्यता ले रखी थी। चार जून को उन्होंने जियो हॉटस्टार का सब्सक्रिप्शन बंद कराने के लिए गूगल पर कस्टमर केयर नंबर खोजा। सर्च में मिले नंबर पर कॉल करने पर सामने वाले व्यक्ति ने खुद को कंपनी का कस्टमर सपोर्ट अधिकारी बताया और सदस्यता बंद कराने की प्रक्रिया शुरू करने का दावा किया। बातचीत के दौरान आरोपी ने प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर 5 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करने को कहा। व्यापारी ने अपने गूगल पे के माध्यम से यह राशि भेज दी। इसके कुछ ही समय बाद उनका मोबाइल असामान्य तरीके से काम करने लगा और स्क्रीन बंद हो गई। जब मोबाइल दोबारा चालू किया तो बैंक खाते से लगातार रकम निकलने के संदेश आने लगे। सबसे पहले उनके बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से 8 हजार और फिर 50 हजार रुपए निकाल लिए गए। इसके बाद उनकी पत्नी शारदा के खाते से भी 20 हजार और 30 हजार रुपए के दो अलग-अलग ट्रांजेक्शन कर दिए गए। इस तरह कुल 1 लाख 8 हजार रुपए साइबर ठगों के खाते में पहुंच गए। ठगी का अहसास होते ही व्यापारी ने तुरंत बैंक से संपर्क कर दोनों खातों को फ्रीज कराया और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। बाद में मामले को जूनी इंदौर थाने भेजा गया जहां पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। जांच एजेंसियां बैंक खातों ट्रांजेक्शन और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। यह मामला एक बार फिर बताता है कि गूगल पर दिखाई देने वाला हर कस्टमर केयर नंबर असली नहीं होता। साइबर अपराधी फर्जी नंबर और नकली वेबसाइट बनाकर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। किसी भी सेवा से जुड़ी सहायता लेने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या मोबाइल ऐप से ही कस्टमर सपोर्ट नंबर की पुष्टि करनी चाहिए। साथ ही किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई ऐप डाउनलोड करने बैंक विवरण साझा करने या छोटी से छोटी राशि ट्रांसफर करने से भी बचना चाहिए क्योंकि यही साइबर ठगी की शुरुआत बन सकती है।
महिला की मर्जी सर्वोपरि, गर्भ रखना या गिराना उसका अधिकार; इंदौर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने महिलाओं के प्रजनन अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि कानून में निर्धारित समय सीमा के भीतर गर्भावस्था को जारी रखना है या समाप्त करना इसका अंतिम निर्णय महिला का होगा। अदालत ने कहा कि गर्भपात के लिए पति की सहमति आवश्यक नहीं है क्योंकि महिला की शारीरिक स्वायत्तता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान के तहत संरक्षित मौलिक अधिकार हैं। यह मामला इंदौर संभाग के एक विवाहित दंपती से जुड़ा है जिनकी शादी को करीब दो वर्ष हुए थे। वैवाहिक जीवन के दौरान दोनों के बीच लगातार विवाद बढ़ते गए और इसी दौरान महिला गर्भवती हो गई। जब गर्भावस्था लगभग 13 सप्ताह की थी तब दंपती अलग रहने लगे। महिला ने अदालत को बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में वह गर्भ जारी नहीं रखना चाहती क्योंकि इससे उसके मानसिक स्वास्थ्य और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। महिला ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गर्भपात की अनुमति मांगी। याचिका में कहा गया कि पति के साथ वैवाहिक संबंध समाप्त करने का निर्णय लगभग तय हो चुका था लेकिन बाद में पति अपने रुख से पीछे हट गया। ऐसे में गर्भावस्था को जारी रखना उसके लिए मानसिक तनाव और भावनात्मक पीड़ा का कारण बन रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पति को नोटिस जारी किया था लेकिन वह न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ। राज्य सरकार की ओर से भी याचिका का विरोध नहीं किया गया। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया। अपने आदेश में हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले एक्स बनाम प्रिंसिपल सेक्रेटरी हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर का उल्लेख करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक महिला को अपनी शारीरिक स्वायत्तता और प्रजनन संबंधी निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है। अदालत ने कहा कि अवांछित गर्भावस्था का मानसिक और शारीरिक प्रभाव सबसे अधिक महिला पर पड़ता है इसलिए अंतिम निर्णय भी उसी का होना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला की गर्भावस्था मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट 1971 में निर्धारित समय सीमा के भीतर थी। इसलिए अधिकृत चिकित्सक कानून के अनुसार गर्भसमापन की प्रक्रिया कर सकते हैं। न्यायालय ने यह भी माना कि पति पत्नी का अलग रहना वैवाहिक संबंधों में गंभीर विवाद या तलाक जैसी परिस्थितियां गर्भपात की अनुमति देने के लिए वैध आधार हो सकती हैं। फैसले में अदालत ने कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। महिला की गरिमा मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही न्यायालय ने चिकित्सकों को निर्देश दिए कि गर्भपात की पूरी प्रक्रिया स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा निर्देशों और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप पूरी संवेदनशीलता और सावधानी के साथ की जाए।
एमपी में अगले 24 घंटे भारी, 23 जिलों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी; नदियां उफान पर, प्रशासन अलर्ट

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मानसून अब पूरे शबाब पर है। लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों में जनजीवन प्रभावित हो गया है। मौसम विभाग ने सोमवार को प्रदेश के 23 जिलों में भारी और अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और नदी नालों के आसपास जाने से बचने की अपील की है क्योंकि कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बनने लगे हैं। मौसम विभाग के अनुसार सागर दमोह बैतूल देवास आलीराजपुर उमरिया सिवनी छिंदवाड़ा और अनूपपुर में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। वहीं रतलाम उज्जैन धार शाजापुर सीहोर विदिशा गुना नर्मदापुरम नरसिंहपुर जबलपुर मंडला बालाघाट डिंडौरी और पन्ना में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा भोपाल ग्वालियर मुरैना दतिया शिवपुरी रीवा सतना सीधी सिंगरौली खंडवा खरगोन हरदा और अन्य कई जिलों में भी तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। बालाघाट जिले से सोमवार सुबह सामने आए वीडियो ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। किरनापुर और लांजी के बीच बहने वाली बाघ नदी में तेज बहाव के कारण कार जेसीबी और लोडर जैसी मशीनें पानी में बहती दिखाई दीं। बताया जा रहा है कि यहां प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत करीब 150 मीटर लंबे पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। हालांकि निर्माण कंपनी की ओर से घटना की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है। बीते 24 घंटों के दौरान भी प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। छिंदवाड़ा में लगभग 3 इंच बारिश हुई जबकि उज्जैन और बालाघाट में सवा दो इंच तथा उमरिया और खजुराहो में करीब 2 इंच वर्षा रिकॉर्ड की गई। टीकमगढ़ सिवनी श्योपुर ग्वालियर भोपाल मंडला और कई अन्य जिलों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। बारिश के बीच पांढुर्णा जिले में आकाशीय बिजली गिरने से एक महिला की मौत हो गई। वहीं सीहोर में घने बादलों के कारण दिन में ही अंधेरा छा गया। कई शहरों में बाजारों और सड़कों पर पानी भरने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अब तक 163.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है जो सामान्य से लगभग 6 प्रतिशत कम है। हालांकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में सामान्य से अधिक बारिश हुई है जबकि पूर्वी हिस्से में अब भी बारिश का आंकड़ा औसत से कम बना हुआ है। विभाग का मानना है कि जुलाई में मानसून और अधिक सक्रिय रहेगा तथा इसी महीने प्रदेश में कुल मानसूनी बारिश का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा दर्ज होने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि तेज बारिश के दौरान नदी नालों को पार करने का प्रयास न करें और मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें। अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने के आसार हैं।
गरुड़ पुराण के अनुसार इन तीन विशेष आदतों वाले लोगों के पास नहीं आते यमदूत, सीधे विष्णुदूत कराते हैं उत्तम लोकों की यात्रा

नई दिल्ली । सनातन धर्म ग्रंथों और पौराणिक शास्त्रों में मृत्यु तथा उसके बाद आत्मा की यात्रा को लेकर बेहद गूढ़ और विस्तृत नियम बताए गए हैं। विशेषकर ‘गरुड़ पुराण’ में इंसानी जीवन के अंतिम समय और कर्मों के आधार पर मिलने वाली गतियों का गहन विश्लेषण मिलता है। सामान्य मान्यताओं के अनुसार, जब किसी भी जीवित प्राणी का अंत समय निकट आता है, तो यमराज के दूत अर्थात यमदूत उसकी आत्मा को लेने के लिए पृथ्वी लोक पर आते हैं। गरुड़ पुराण में यमदूतों के स्वरूप को अत्यंत भयानक और पाप कर्म करने वालों के प्रति बेहद क्रूर बताया गया है। परंतु, इसी महापुराण में कुछ ऐसे गोपनीय नियमों का भी उल्लेख मिलता है, जो यह स्पष्ट करते हैं कि तीन विशेष श्रेणी के मनुष्यों के समीप आने की हिम्मत स्वयं यमदूत भी नहीं कर पाते हैं। इन पुण्य आत्माओं को कभी भी यमलोक की यातनाएं नहीं सहनी पड़तीं, बल्कि उनके स्वागत के लिए साक्षात वैकुंठ धाम से भगवान विष्णु के दिव्य पार्षद अवतरित होते हैं। मध्य प्रदेश । पौराणिक गरुड़ पुराण के आधिकारिक सिद्धांतों के अनुसार, इस विशिष्ट सूची में पहला स्थान उन परम भक्तों का आता है जो अपना संपूर्ण जीवन ईश्वर की आराधना, नाम सिमरन और आध्यात्मिक चेतना में व्यतीत करते हैं। ऐसे जातकों के मन से मृत्यु का भय पूरी तरह समाप्त हो जाता है। जब इन सांसारिक सासों का अंतिम दौर आता है, तो यमदूत दूर ही रहते हैं और वैकुंठ से आए शांत व चतुर्भुज रूप धारी विष्णुदूत अत्यंत आदरपूर्वक इन पवित्र आत्माओं को अपने दिव्य विमान में बैठाकर परमधाम ले जाते हैं। दूसरी श्रेणी में उन उदारवादी लोगों को रखा गया है जो सदैव निस्वार्थ भाव से दीन-दुखियों, बेसहारा पशु-पक्षियों और बीमारों की सेवा में तत्पर रहते हैं। शास्त्रों के मुताबिक, भूखे को अन्न और प्यासे को पानी देना सबसे बड़ा मानवीय धर्म है। इस प्रकार निरंतर संचित होने वाले पुण्यों के कारण यमराज के दूत ऐसे परोपकारी इंसानों को स्पर्श तक नहीं करते, क्योंकि उनका अधिकार क्षेत्र केवल दूसरों को प्रताड़ित करने वाले अपराधियों तक ही सीमित होता है। इसके अतिरिक्त, तीसरी श्रेणी में उन धर्मनिष्ठ मनुष्यों का विस्तार से वर्णन किया गया है जो जीवन की अत्यंत विषम परिस्थितियों में भी सत्य, ईमानदारी और न्याय का मार्ग कभी नहीं छोड़ते। अपने माता-पिता की निश्छल सेवा करने वाले और किसी भी जीव का दिल न दुखाने वाले साफ दिल के इंसानों को तपस्वियों के समतुल्य माना गया है। ऐसे सदाचारी लोगों को मृत्यु काल के दौरान तनिक भी शारीरिक या मानसिक कष्ट की अनुभूति नहीं होती है। यमदूत ऐसे महापुरुषों को दूर से ही नमन करते हैं और उनके प्राण बिना किसी पीड़ा के स्वतः ही शरीर त्याग देते हैं, जिसके पश्चात उन्हें सीधे मोक्ष अथवा उत्तम लोकों की प्राप्ति होती है। गरुड़ पुराण की ये अमूल्य और कल्याणकारी बातें आधुनिक मानव समाज को अपने आचरण व कर्मों को सुधारने का एक बड़ा संदेश देती हैं। शास्त्र यह प्रमाणित करते हैं कि मृत्यु अपरिवर्तनीय सत्य है, परंतु उससे भयभीत होने के स्थान पर यदि मनुष्य लोभ, मोह, ईर्ष्या और छल-कपट से दूरी बना ले, तो उसका अंत समय स्वतः ही सुधर जाता है। बुरे कर्मों में लिप्त रहने वालों के लिए जहां यमदूतों की कठोर यातनाएं निश्चित हैं, वहीं सात्विक और धार्मिक जीवन जीने वाले पुण्यात्माओं को अंततः ईश्वर के चरणों में शाश्वत स्थान प्राप्त होता है।
राहु-केतु के बीच बना बंधक योग! 18 जुलाई तक मौसम राजनीति और वैश्विक घटनाओं में उथल-पुथल के संकेत

नई दिल्ली । राहु और केतु के बीच एक बार फिर सभी प्रमुख ग्रहों के आ जाने से ज्योतिष में वर्णित बंधक योग सक्रिय हो गया है। ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम के अनुसार यह योग 18 जुलाई तक प्रभावी रहेगा। उनका कहना है कि इस अवधि में देश और दुनिया के कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम प्रभावित हो सकते हैं। मौसम में असंतुलन राजनीतिक गतिविधियों में तेजी व्यापारिक उतार-चढ़ाव और न्याय व्यवस्था से जुड़े मामलों में हलचल देखने को मिल सकती है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार शुक्रवार को चंद्रमा के कुंभ राशि में प्रवेश करने के साथ ही यह योग दोबारा सक्रिय हुआ। इससे पहले 24 जून को इसका प्रभाव समाप्त हुआ था। वर्तमान ग्रह स्थिति में सूर्य चंद्रमा मंगल बुध गुरु शुक्र और शनि सभी राहु और केतु के बीच स्थित हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार ऐसी स्थिति में ग्रहों की शुभ ऊर्जा कमजोर पड़ती है और कई क्षेत्रों में अस्थिरता का वातावरण बन सकता है। मौसम के संबंध में उनका कहना है कि इस अवधि में खंडवृष्टि के योग बन रहे हैं। इसका अर्थ है कि कुछ इलाकों में अत्यधिक बारिश से बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है जबकि कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना रहेगी। इससे कृषि और जनजीवन दोनों प्रभावित हो सकते हैं। मौसम के इस असंतुलन का असर कई राज्यों में अलग-अलग रूप में दिखाई देने की संभावना जताई गई है। राजनीतिक दृष्टि से भी यह समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रहों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए मध्य प्रदेश राजस्थान और दिल्ली सहित कुछ राज्यों में राजनीतिक हलचल बढ़ने के संकेत बताए गए हैं। सत्ता और संगठन स्तर पर फेरबदल विस्तार या नए राजनीतिक समीकरण बनने जैसी परिस्थितियां सामने आ सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तनावपूर्ण घटनाओं या कूटनीतिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना व्यक्त की गई है। व्यापार और आर्थिक गतिविधियों पर भी इस योग का असर पड़ने की बात कही गई है। बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है और निवेश से जुड़े फैसलों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण निर्णय या चर्चित घटनाएं सामने आ सकती हैं। ज्योतिषाचार्य का यह भी दावा है कि 18 जुलाई तक जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं की कुंडली में कालसर्प दोष बनने की स्थिति रह सकती है। उनके अनुसार जब चंद्रमा कन्या राशि में प्रवेश करेगा तब यह बंधक योग समाप्त हो जाएगा और ग्रहों की स्थिति सामान्य होने लगेगी। हालांकि यह सभी आकलन पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इनकी वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है और इन्हें भविष्यवाणी के बजाय ज्योतिषीय दृष्टिकोण के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर जनता में उबाल, भोपालवासियों ने कहा- यह सिर्फ पैसे नहीं आस्था की चोरी, दोषियों को मिले उम्रकैद

नई दिल्ली । अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से कथित रूप से रकम गायब किए जाने के मामले ने पूरे देश में नाराजगी पैदा कर दी है। पुलिस जांच के अनुसार दानपात्रों से निकाली गई नकदी में 42 दिनों के दौरान कई बार हेराफेरी किए जाने के आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियां मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं और अब तक कई कर्मचारियों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। इस घटना के बाद लोगों में गहरा आक्रोश है और इसे केवल धन की चोरी नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट माना जा रहा है। इसी मुद्दे पर भोपाल में लोगों की राय भी सामने आई। अधिकांश लोगों ने कहा कि मंदिर में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ दान करते हैं। ऐसे में यदि कोई उस चढ़ावे में हेराफेरी करता है तो वह केवल कानून नहीं बल्कि धार्मिक विश्वास का भी अपराधी है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। कई लोगों ने मांग की कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों को आजीवन कारावास जैसी सख्त सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई भी धार्मिक संस्थानों की पवित्रता से खिलवाड़ करने का साहस न कर सके। कुछ लोगों ने कहा कि ऐसे कृत्य करने वालों को समाज में कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए क्योंकि उन्होंने लाखों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। कुछ नागरिकों ने भरोसा जताया कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों की पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। वहीं कुछ लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर मिलीभगत हुई है तो उससे जुड़े सभी लोगों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इस बीच जांच एजेंसियां पूरे मामले के दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़ी किसी भी तरह की कथित अनियमितता को लोग बेहद गंभीरता से देख रहे हैं। आम लोगों का मानना है कि मंदिरों में आने वाले दान की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास हमेशा कायम रहे।
रतन टाटा की भतीजी माया टाटा को मिली बड़ी जिम्मेदारी, वेस्टसाइड के ग्लोबल विस्तार की कमान संभालेंगी

नई दिल्ली । टाटा समूह में नई पीढ़ी की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। इसी क्रम में रतन टाटा की भतीजी और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की बेटी माया टाटा को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार माया अब ट्रेंट लिमिटेड के प्रमुख रिटेल ब्रांड वेस्टसाइड के ओवरसीज ई कॉमर्स और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग विस्तार का नेतृत्व करेंगी। यह जिम्मेदारी ऐसे समय दी जा रही है जब कंपनी घरेलू बाजार के साथ विदेशों में भी अपनी मजबूत मौजूदगी बनाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है। माया टाटा इससे पहले टाटा डिजिटल में अहम भूमिका निभा चुकी हैं और डिजिटल रिटेल तथा ऑनलाइन बिजनेस से जुड़ा अनुभव रखती हैं। माना जा रहा है कि अब उनका मुख्य फोकस वेस्टसाइड के ऑनलाइन कारोबार को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने और नए बाजारों में ब्रांड की पहुंच बढ़ाने पर रहेगा। कंपनी अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत करने के साथ ऑफलाइन स्टोर नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार कर रही है। ट्रेंट लिमिटेड के लिए वेस्टसाइड सबसे अहम ब्रांड माना जाता है और कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा इसी से आता है। हाल के वर्षों में ट्रेंट ने अपने विस्तार की रफ्तार तेज की है। कंपनी ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात में नया स्टोर शुरू किया है और हर साल करीब 50 नए वेस्टसाइड स्टोर खोलने का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने 53 नए स्टोर शुरू किए जबकि उसका कुल रिटेल नेटवर्क बढ़कर 321 शहरों में 1286 स्टोर तक पहुंच गया। बीते वित्त वर्ष में कंपनी का कुल राजस्व लगभग 19700 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। माया टाटा ने अपनी पढ़ाई यूनाइटेड किंगडम से की है जहां उन्होंने बिजनेस और फाइनेंस की शिक्षा हासिल की। करियर की शुरुआत उन्होंने टाटा कैपिटल के टाटा अपॉर्च्युनिटीज फंड से की और बाद में टाटा डिजिटल का हिस्सा बनीं। वहां उन्होंने डिजिटल रिटेल और उपभोक्ता कारोबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम किया। माया टाटा लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन और मीडिया की सुर्खियों से दूर रही हैं। पहली बार वह उस समय चर्चा में आईं जब अपने पिता नोएल टाटा के साथ जमशेदपुर में टाटा समूह के स्थापना दिवस समारोह में दिखाई दीं। इसके बाद से समूह में उनकी भविष्य की भूमिका को लेकर लगातार अटकलें लगाई जाती रही हैं। माया टाटा का संबंध केवल टाटा परिवार ही नहीं बल्कि मिस्त्री परिवार से भी है। उनकी मां आलू मिस्त्री उद्योगपति पालोनजी मिस्त्री की बेटी हैं। इस तरह माया दो प्रमुख कारोबारी परिवारों की विरासत से जुड़ी हुई हैं। वहीं उनकी दादी सिमोन टाटा ने लैक्मे जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड को नई पहचान दिलाने के साथ ट्रेंट के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि माया टाटा की नई जिम्मेदारी केवल एक प्रबंधन बदलाव नहीं बल्कि टाटा समूह की अगली पीढ़ी को वैश्विक नेतृत्व देने की रणनीति का अहम हिस्सा है। आने वाले वर्षों में वेस्टसाइड के अंतरराष्ट्रीय विस्तार और डिजिटल कारोबार को नई दिशा देने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से होगी जसप्रीत बुमराह की वापसी, लाल गेंद से अभ्यास करते हुए तेज गेंदबाज ने दिए संकेत

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे प्रमुख और घातक तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह नौ महीने के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर सफेद जर्सी में बल्लेबाजों के होश उड़ाने के लिए तैयार हैं। भारत और श्रीलंका के बीच आगामी अगस्त महीने में दो मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जानी है, जो आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 साइकल के तहत आयोजित की जाएगी। इस महत्वपूर्ण सीरीज के लिए जसप्रीत बुमराह की टेस्ट टीम में वापसी लगभग तय मानी जा रही है। अपनी सटीक यॉर्कर और तूफानी गति से विपक्षी टीमों की गिल्लियां बिखेरने वाले बुमराह के आने से भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की ताकत दोगुनी होना तय है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक 504 विकेट चटका चुके इस मैच विनर गेंदबाज की मौजूदगी दुनिया के किसी भी मैदान पर भारतीय टीम का पलड़ा भारी कर देती है। मध्य प्रदेश । जसप्रीत बुमराह ने नवंबर 2025 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ गुवाहाटी में अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था, जिसके बाद से उन्होंने खेल के इस सबसे लंबे प्रारूप में हिस्सा नहीं लिया है। हाल ही में समाप्त हुए टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बाद से भी वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर थे। बुमराह अब सीधे 14 जुलाई से इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज के जरिए मैदान पर वापसी करेंगे और इसके ठीक बाद अगस्त में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज में अपनी धार दिखाएंगे। हाल ही में इस दिग्गज तेज गेंदबाज ने सोशल मीडिया पर लाल गेंद से अभ्यास करते हुए अपनी तस्वीरें साझा की हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि उन्होंने आगामी टेस्ट असाइनमेंट के लिए अपनी तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू कर दी हैं। वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत एशियन गेम्स के बाद बुमराह को टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप से आराम दिया जा सकता है, ताकि वह आगामी वनडे विश्व कप 2027 तक पूरी तरह टेस्ट और वनडे प्रारूप पर अपना ध्यान केंद्रित रख सकें। आगामी दौरा वर्ष 2017 के बाद श्रीलंका की धरती पर भारत की पहली टेस्ट सीरीज होगी। दोनों देशों के बीच पहला टेस्ट मैच 15 से 19 अगस्त तक गॉल इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा, जबकि दूसरा टेस्ट मुकाबला 23 से 27 अगस्त के बीच कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब में आयोजित होगा। वर्तमान वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप चक्र की अंक तालिका में शुभमन गिल की कप्तानी वाली भारतीय टीम नौ मैचों के बाद 48.15 के अंक प्रतिशत (पीसीटी) के साथ पांचवें स्थान पर मौजूद है, जबकि श्रीलंकाई टीम 44.44 पीसीटी के साथ छठे पायदान पर है। ऐसे में फाइनल की रेस में शीर्ष दो स्थानों पर जगह बनाने के लिहाज से दोनों टीमों के लिए यह सीरीज बेहद निर्णायक साबित होने वाली है। यदि 32 वर्षीय जसप्रीत बुमराह के टेस्ट करियर के आंकड़ों पर नजर डालें, तो उन्होंने अब तक खेले 52 टेस्ट मैचों में शानदार गेंदबाजी करते हुए 234 विकेट अपने नाम किए हैं। इस दौरान उन्होंने 16 बार एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट लेने का कारनामा किया है, जिसमें 86 रन देकर 9 विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा है। इसके अलावा उन्होंने 89 वनडे मैचों में 149 विकेट और 95 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 121 विकेट चटकाए हैं। भारतीय समयानुसार सुबह 10 बजे से शुरू होने वाले इन टेस्ट मैचों में बुमराह की वापसी न केवल भारतीय टीम के हौसलों को बढ़ाएगी, बल्कि श्रीलंकाई बल्लेबाजों के लिए भी एक बड़ी चुनौती पेश करेगी।
बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा विवाद पर तेज हुई जांच, कांग्रेस का सत्याग्रह ऐलान, CCTV फुटेज पर टिकी नजर

नई दिल्ली । अयोध्या राम मंदिर के बाद अब उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर प्रशासन ने पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है जिसे एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में सबसे अहम पहलू यह सामने आया है कि मंदिर परिसर में एक जून से नए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे जबकि कथित घटना दो जुलाई की बताई जा रही है। ऐसे में जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि फुटेज से पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकेगी। मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि जांच समिति सभी साक्ष्यों वैज्ञानिक तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है। उन्होंने चढ़ावा गणना में लगे कर्मचारियों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी तरह के दस्तावेज सीसीटीवी फुटेज या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सके। मंदिर प्रशासन के अनुसार सीसीटीवी प्रणाली में लगभग 45 दिनों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। चूंकि नए कैमरे एक जून से सक्रिय हैं इसलिए दो जुलाई की कथित घटना से जुड़ा पूरा वीडियो रिकॉर्ड उपलब्ध होने की संभावना है। जांच टीम इन्हीं फुटेज और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है। मामले की जांच के लिए गठित समिति में वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल विधि अधिकारी एसएस वर्त्वाल मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डीएस भुजवाण को शामिल किया गया है। समिति सभी संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ करने के साथ चढ़ावा गणना की पूरी प्रक्रिया की भी समीक्षा कर रही है। इस बीच मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। उत्तराखंड कांग्रेस ने आठ जुलाई को पूरे प्रदेश में उपवास और सत्याग्रह करने की घोषणा की है। कांग्रेस का आरोप है कि मंदिरों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी ने यह भी मांग की है कि पूरे मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक स्तर पर कराई जाए ताकि किसी तरह का संदेह न रहे। उधर श्री बदरीश पंडा पंचायत ने भी मंदिर की गरिमा से जुड़े इस मामले पर चिंता जताई है। पंचायत का कहना है कि यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है तो दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी उच्च अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। तीर्थपुरोहितों और पुजारियों ने भी इस पूरे घटनाक्रम को धाम की प्रतिष्ठा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। अब पूरे मामले में सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज पर टिकी हुई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी बड़ा संदेश देगा।
जेल के कड़े नियमों और भूख के आगे टूटी हिम्मत, 'लॉकअप' के सेट पर फूट-फूटकर रोईं गोविंदा की पत्नी

नई दिल्ली । ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के बहुचर्चित रियलिटी शो ‘लॉकअप’ के हालिया एपिसोड में उस समय जबरदस्त हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब जेल के कड़े नियमों और परिस्थितियों के आगे मशहूर अभिनेता गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा की हिम्मत पूरी तरह जवाब दे गई। शो के दौरान जेल में बंद तमाम प्रतियोगियों ने रणनीतिक चूक और बजट की कमी के चलते खाना न मिलने पर कड़ा विरोध जताया। पूरे घर में फैले इस तनावपूर्ण माहौल के बीच सुनीता आहूजा मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद परेशान नजर आईं। उन्होंने न केवल शो के प्रति अपनी तीव्र नाराजगी जाहिर की, बल्कि बीच में ही खेल छोड़कर अपने घर वापस लौटने की इच्छा भी जता दी। इस दौरान वह अपने आंसुओं पर काबू नहीं रख सकीं और फूट-फूटकर रोने लगीं। मध्य प्रदेश । घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब कैदियों के पास पूरे हफ्ते के राशन का प्रबंधन करने के लिए पर्याप्त बजट नहीं बचा। इस वित्तीय संकट के कारण घरवालों ने आपसी सहमति से तय किया कि एकजुटता दिखाने के लिए कोई भी सदस्य खाना नहीं खाएगा। सुबह सोकर उठने के बाद जब अन्य प्रतियोगी बाहर बैठे थे, तब सुनीता ने भोजन की अनुपलब्धता पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने निराशा में कहा कि किसी भी व्यक्ति को इतना मजबूर नहीं किया जाना चाहिए कि वह अपनी सीमाओं को लांघने पर विवश हो जाए। इसी बातचीत के दौरान वह बेहद भावुक हो गईं और उन्होंने अपने पति व अभिनेता गोविंदा (चीची) को याद करते हुए कहा कि उनके पति ने उन्हें इस शो में आने से साफ मना किया था। सुनीता ने अफसोस जताते हुए स्वीकार किया कि जब भी उन्होंने अपने पति की बात की अनदेखी की है, उन्हें हमेशा नुकसान और पछतावे का सामना करना पड़ा है। इसके बाद जब शो के नियमों के मुताबिक भोजन हासिल करने के लिए एक क्विज टास्क आयोजित किया गया, तो सुनीता ने किसी भी सवाल का जवाब देने से पूरी तरह इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अब इस प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं बने रहना चाहतीं और जल्द से जल्द बाहर जाना चाहती हैं। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों और दवाओं के सेवन के बावजूद उन्होंने सुबह केवल चाय पी और नाश्ता करने से मना कर दिया। सह-प्रतियोगियों द्वारा दवाइयां लेने के आग्रह पर उन्होंने कहा कि यदि वह बीमार पड़ेंगी, तभी मेकर्स उन्हें वापस घर भेजेंगे। इस संवेदनशील स्थिति को संभालने और साप्ताहिक टास्क को पूरा कराने के लिए जब अभिनेता रितेश सेट पर पहुंचे, तो उन्होंने बजट का सही इस्तेमाल न करने को लेकर सभी प्रतियोगियों को जमकर फटकार लगाई। सुनीता ने रितेश के सामने अपनी बात रखते हुए शिकायत की कि वह मधुमेह (डायबिटीज) से पीड़ित हैं और रात का भोजन न मिलने की वजह से उन्हें घबराहट और मनोवैज्ञानिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। जब रितेश ने उनसे पूछा कि बजट उपलब्ध होने के बाद भी उन्होंने अपने लिए भोजन क्यों नहीं मंगाया, तो सुनीता ने एक सीनियर सदस्य होने के नाते अकेले खाना खाने को अनुचित बताया। सुनीता के इस गंभीर भावनात्मक ब्रेकडाउन को देखते हुए रितेश ने खुद आगे बढ़कर उन्हें गले लगाया और सांत्वना देते हुए इस विषय पर अलग से व्यक्तिगत बातचीत करने का आश्वासन दिया।