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1948 में जब पूर्वी पंजाब ने रोका था पाकिस्तान जाने वाला सिंधु तंत्र का पानी, नेहरू ने फैसले को बताया था अमानवीय, बातचीत से निकला समाधान

नई दिल्ली । भारत और पाकिस्तान के विभाजन के कुछ ही महीनों बाद वर्ष 1948 में दोनों देशों के बीच सिंधु नदी तंत्र को लेकर पहला बड़ा जल विवाद सामने आया। उस समय पूर्वी पंजाब सरकार ने अपने क्षेत्र में स्थित प्रमुख हेडवर्क्स से पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी थी। इस निर्णय का तत्काल प्रभाव पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था पर पड़ा और दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन का मुद्दा गंभीर कूटनीतिक विषय बन गया। हालांकि बाद में बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला गया और पानी की आपूर्ति फिर से बहाल कर दी गई। विभाजन के बाद सीमा निर्धारण के कारण माधोपुर और फिरोजपुर जैसे महत्वपूर्ण हेडवर्क्स भारत के हिस्से में आए। इन संरचनाओं से उन नहरों का संचालन होता था जिनके माध्यम से पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र के बड़े हिस्से में सिंचाई होती थी। अंतरिम व्यवस्था की अवधि समाप्त होने और नया समझौता नहीं होने के बाद पूर्वी पंजाब सरकार ने 1 अप्रैल 1948 से पानी की आपूर्ति रोकने का निर्णय लिया। उस समय यह कदम राज्य स्तर पर उठाया गया था और इसका उद्देश्य अपने अधिकार क्षेत्र में उपलब्ध जल संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करना बताया गया। इतिहासकारों और जल नीति विशेषज्ञों के अनुसार, इस निर्णय के बाद पाकिस्तान के सामने गंभीर चुनौती उत्पन्न हुई क्योंकि उसकी कृषि भूमि का एक हिस्सा इन नहरों पर निर्भर था। उस समय दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंध पहले से ही तनावपूर्ण थे, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए सैन्य विकल्प के बजाय वार्ता को प्राथमिकता दी गई। इसी कारण दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हुई और समाधान तलाशने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का दृष्टिकोण इस विषय पर पूर्वी पंजाब सरकार से अलग माना जाता है। उपलब्ध ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, नेहरू ने इस कदम के मानवीय और अंतरराष्ट्रीय प्रभावों पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने माना कि कृषि के लिए पानी रोकना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता और ऐसे कदम केवल असाधारण परिस्थितियों, जैसे युद्ध, में ही विचारणीय हो सकते हैं। साथ ही उन्होंने यह भी आशंका जताई थी कि इस प्रकार की कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, पूर्वी पंजाब के नेतृत्व का तर्क था कि विभाजन के बाद नई परिस्थितियों में राज्य को अपने क्षेत्र से बहने वाले जल पर कानूनी अधिकार प्राप्त था और बिना किसी नए समझौते के पूर्व व्यवस्था को जारी रखना आवश्यक नहीं था। इस प्रकार केंद्र और राज्य के दृष्टिकोण में प्राथमिकताओं का अंतर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। जहां राज्य सरकार स्थानीय परिस्थितियों और संसाधनों के नियंत्रण पर जोर दे रही थी, वहीं केंद्र सरकार व्यापक कूटनीतिक और मानवीय पहलुओं को भी समान महत्व दे रही थी। करीब पांच सप्ताह तक चले इस विवाद का समाधान मई 1948 में नई दिल्ली में आयोजित अंतर-डोमिनियन सम्मेलन के दौरान निकला। बातचीत के बाद भारत ने पाकिस्तान की ओर पानी की आपूर्ति दोबारा शुरू कर दी। इसी प्रक्रिया ने भविष्य में दोनों देशों के बीच स्थायी जल व्यवस्था विकसित करने की दिशा में आधार तैयार किया। विशेषज्ञों का मानना है कि 1948 का यह विवाद दक्षिण एशिया के जल इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। बाद के वर्षों में दोनों देशों के बीच नदी जल प्रबंधन को लेकर जो संस्थागत व्यवस्था विकसित हुई, उसकी प्रारंभिक पृष्ठभूमि इसी घटनाक्रम से जुड़ी मानी जाती है। यह प्रकरण आज भी सीमा-पार जल संसाधनों के प्रबंधन, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक उदाहरण के रूप में देखा जाता है।

मुझे गिरफ्तार किया जा सकता है मेरी हत्या भी हो सकती है', फिर भी दिसंबर में बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना; अदालत में आत्मसमर्पण का ऐलान

नई दिल्ली । बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि वह दिसंबर 2026 में भारत से बांग्लादेश लौटेंगी और वहां की अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी गिरफ्तारी और यहां तक कि हत्या का भी खतरा है, लेकिन इसके बावजूद वह अपने देश लौटने के फैसले से पीछे नहीं हटेंगी। उनका कहना है कि यदि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना है तो वह अपनी मातृभूमि की धरती पर ही करना चाहेंगी। शेख हसीना लंबे समय से भारत में रह रही हैं। वर्ष 2024 में बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसक छात्र आंदोलन के बाद उन्हें देश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने भारत में शरण ली और तब से यहीं रह रही हैं। इस दौरान बांग्लादेश में उनके खिलाफ कई कानूनी कार्रवाइयां शुरू हुईं और राजनीतिक परिस्थितियां भी लगातार बदलती रहीं। पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके साथ अवामी लीग के कई वरिष्ठ नेता भी बांग्लादेश लौटने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे सभी अदालत की प्रक्रिया में शामिल होंगे और कानून के अनुसार अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है तथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। ऐसे माहौल के बावजूद उन्होंने वापसी का निर्णय लिया है। शेख हसीना ने कहा कि उन्हें इस बात का पूरा अंदेशा है कि स्वदेश लौटते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि उनकी जान को गंभीर खतरा हो सकता है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि यदि जीवन का अंत होना ही है तो वह अपने देश की मिट्टी पर होना चाहिए, जहां उनके परिवार की यादें जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि अपने देश और न्यायिक व्यवस्था का सामना करना उनका कर्तव्य है। बांग्लादेश की अदालत पहले ही वर्ष 2024 के राजनीतिक घटनाक्रम और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में शेख हसीना को दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ मौत की सजा का फैसला सुना चुकी है। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री लगातार इन आरोपों को निराधार बताती रही हैं और उनका कहना है कि उनके खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक कारणों से प्रेरित है। उनका दावा है कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए। इस बीच बांग्लादेश की सरकार लगातार भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करती रही है। दोनों देशों के बीच इस मुद्दे को लेकर कूटनीतिक स्तर पर भी चर्चा होती रही है। भारत ने अब तक यह स्पष्ट किया है कि वह प्रत्यर्पण से जुड़े अनुरोधों की प्रक्रिया के अनुसार समीक्षा कर रहा है और दोनों देशों के बीच रचनात्मक संवाद बनाए रखने का पक्षधर है। शेख हसीना ने यह भी कहा कि उनकी वापसी किसी बाहरी दबाव या किसी विदेशी सरकार की पहल का परिणाम नहीं होगी। उन्होंने दोहराया कि वह स्वयं अपने निर्णय के आधार पर बांग्लादेश लौटेंगी और अदालत के समक्ष उपस्थित होकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगी। उनके इस ऐलान के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि उनकी वापसी से देश के राजनीतिक समीकरणों और आगामी घटनाक्रम पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

स्मार्ट बॉर्डर से घुसपैठ पर कड़ा प्रहार, अमित शाह ने तकनीक आधारित सुरक्षा ग्रिड और एआई निगरानी की व्यापक रणनीति बताई

नई दिल्ली । देश की सीमा सुरक्षा को अधिक मजबूत, आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में सीमा प्रबंधन को पूरी तरह स्मार्ट तकनीक से लैस किया जाएगा, जिससे अवैध घुसपैठ, ड्रोन गतिविधियों, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए पारंपरिक व्यवस्था के साथ अत्याधुनिक तकनीक का समन्वय अब समय की आवश्यकता बन गया है। नई दिल्ली में आयोजित बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट सुपरिंटेंडेंट्स ऑफ पुलिस कॉन्फ्रेंस-2026 को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों और सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उनका कहना था कि सभी संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से ही प्रभावी और मजबूत सुरक्षा व्यवस्था विकसित की जा सकती है। उन्होंने बताया कि सरकार “स्मार्ट बॉर्डर” की अवधारणा पर तेजी से काम कर रही है। इस व्यवस्था के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली, डिजिटल सर्विलांस, स्मार्ट सेंसर, एंटी-ड्रोन तकनीक तथा इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर जैसी आधुनिक प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। इन तकनीकों की मदद से सीमा पर होने वाली गतिविधियों की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। गृह मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि सरकार एक “क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी ग्रिड” विकसित कर रही है, जिसके माध्यम से विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा की जाएगी। उनका कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल किसी घटना के बाद प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि संभावित खतरों की पहले से पहचान कर उन्हें समय रहते रोकना है। इस दिशा में आधुनिक तकनीक और सूचनाओं के बेहतर समन्वय को प्राथमिकता दी जा रही है। अमित शाह ने कहा कि सरकार की सीमा सुरक्षा नीति तीन प्रमुख आधारों पर केंद्रित है, जिनमें सुरक्षित सीमाएं, समृद्ध सीमावर्ती क्षेत्र और जागरूक समाज शामिल हैं। उन्होंने बताया कि सीमावर्ती इलाकों में सड़क, पुल, सुरंग, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों से पलायन कम होगा और स्थानीय नागरिक भी राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के सक्रिय भागीदार बन सकेंगे। उन्होंने कहा कि संगठित अपराध, नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध घुसपैठ के खिलाफ अगले तीन वर्षों के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। सरकार का लक्ष्य केवल घुसपैठियों की पहचान करना नहीं, बल्कि ऐसी स्थायी व्यवस्था विकसित करना है जिससे अवैध प्रवेश की संभावनाओं को ही न्यूनतम किया जा सके। गृह मंत्री ने बताया कि हाल के वर्षों में सीमावर्ती क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे पर निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के माध्यम से सीमावर्ती गांवों में विकास कार्यों को गति दी जा रही है। साथ ही भारत-म्यांमार सीमा पर लगभग 1,610 किलोमीटर लंबी फेंसिंग परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। उनका कहना था कि यह परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र में अवैध घुसपैठ, हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी, कट्टरपंथ तथा संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सरकार का उद्देश्य आधुनिक तकनीक और मजबूत बुनियादी ढांचे के माध्यम से देश की सीमाओं को अधिक सुरक्षित और सक्षम बनाना है।

कुछ सेकंड की जल्दबाजी बनी जानलेवा: इंदौर स्टेशन पर ट्रेन की चपेट में आने से ग्वालियर के युवक की मौत

इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में ग्वालियर निवासी युवक की जान चली गई। चलती ट्रेन में चढ़ने की कोशिश के दौरान उसका पैर फिसल गया और वह ट्रेन की चपेट में आ गया। हादसा इतना भीषण था कि युवक की मौके पर ही मौत हो गई। रेलवे पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है और परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। रेलवे पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान ग्वालियर के सुनार मोहल्ला निवासी हर्ष गुप्ता के रूप में हुई है। वह व्यापारिक कार्य से इंदौर आया था। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे वह ग्वालियर से आई ओवरनाइट एक्सप्रेस से इंदौर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-4 पर उतरा था। हर्ष को आगे रतलाम जाना था, जिसके लिए उसे प्लेटफॉर्म नंबर-1 से डेमू ट्रेन पकड़नी थी। प्लेटफॉर्म बदलने के दौरान उसने चलती ट्रेन में चढ़ने का प्रयास किया, लेकिन संतुलन बिगड़ने से उसका पैर फिसल गया और वह ट्रेन के नीचे आ गया। हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस और स्टेशन स्टाफ मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। इंदौर में रहने वाले उसके रिश्तेदार भी रेलवे स्टेशन पहुंच गए, जबकि ग्वालियर में रहने वाले परिजनों को सूचना देकर इंदौर बुलाया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हर्ष गुप्ता व्यापारिक काम से इंदौर आए थे और आगे रतलाम जाने की तैयारी में थे। रेलवे पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है और स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि कभी भी चलती ट्रेन में चढ़ने या उतरने का प्रयास न करें। कुछ क्षणों की जल्दबाजी जानलेवा साबित हो सकती है। यदि ट्रेन छूट जाए तो अगली ट्रेन का इंतजार करना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है।

Gwalior crime news: शादी का झांसा देकर रिश्तेदार ने ही किया दुष्कर्म, फिर पति को छोड़ने का बनाया दबाव!

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Gwalior crime news: मध्यप्रदेश। ग्वालियर के पुरानी छावनी इलाके से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर दिया है। यहां एक विवाहिता से शादी का झांसा देकर उसके रिश्तेदार ने दुष्कर्म किया। आरोप है कि महिला के दूर के रिश्तेदार ने पहले उसे पति को छोड़ने के लिए दबाव बनाया, फिर शादी का भरोसा देकर कार में ले जाकर उसके साथ गलत काम किया। बाद में उसने शादी से इनकार कर दिया। पुलिस में शिकायत करने पर आरोपी ने महिला के दोनों भाइयों को हत्या की धमकी दी। जिसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। Cheetah CCB 3 Rescued: 20 दिनों से ग्वालियर के जंगलों में घूम रही थी मादा चीता CCB-3; रेस्क्यू कर भेजा कूनो शादी के बाद भी करता था कॉल 25 वर्षीय विवाहिता ने शिकायत में बताया कि आरोपी मंगल सिंह उर्फ विक्की उसका दूर का रिश्तेदार है। दोनों की शादी से पहले करीब आठ साल से पहचान थी। महिला की शादी करीब तीन साल पहले हो गई थी, लेकिन इसके बाद भी आरोपी लगातार उससे संपर्क करता रहा। महिला का कहना है कि आरोपी उसे पति को छोड़ने के लिए कहता था और शादी कर साथ रखने का भरोसा देता था। घुमाने के बहाने सुनसान जगह ले गया महिला ने बताया कि 19 मई को आरोपी कार से उसे घुमाने के बहाने अपने साथ ले गया। वह पुरानी छावनी क्षेत्र के एक ईंट भट्टे के पास पहुंचा, जहां कार के शीशे बंद कर शादी का भरोसा देते हुए उसकी इच्छा के विरुद्ध दुष्कर्म किया। पति ने घर से निकाला महिला का कहना है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद उसके पति ने उसे घर से बहार निकाल दिया। इसके बाद जब उसने आरोपी से शादी करने के लिए कहा तो उसने साफ इनकार कर दिया। नाना पटवारी ने मानी पुरानी ड्रग्स की लत, बोले- रिहैब के बाद छोड़ा नशा; कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को बताया राजनीतिक प्रतिशोध शिकायत करने पर भाइयों को गोली मारने की धमकी पीड़िता का आरोप है कि जब उसने पुलिस में शिकायत की बात कही तो आरोपी ने उसके दोनों भाइयों को गोली मारने की धमकी दी। इसके बाद महिला ने अपने परिजनों के साथ पुरानी छावनी थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने दर्ज किया केस पुलिस ने महिला की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुरानी छावनी थाना प्रभारी डॉ. संतोष यादव ने बताया कि आरोपी घटना के बाद से फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

Cheetah CCB 3 Rescued: 20 दिनों से ग्वालियर के जंगलों में घूम रही थी मादा चीता CCB-3; रेस्क्यू कर भेजा कूनो

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Cheetah CCB 3 Rescued: ग्वालियर। जंगलों में 20 दिनों से घूम रही कूनो नेशनल पार्क की मादा चीता CCB-3 का गुरुवार को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया। कूनो की विशेषज्ञ टीम और ग्वालियर वन विभाग ने बरी-पनिहार के जंगलों मेंसंयुक्त अभियान चलाकर कई घंटे की मशक्कत के बाद चीते को सुरक्षित पकड़कर वापस कूनो भेज दिया। सैटेलाइट कॉलर से रखी जा रही थी नजर वन विभाग के मुताबिक, चीते के गले में लगे सैटेलाइट कॉलर की मदद से उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। इसके अलावा वन अमले की ग्राउंड ट्रैकिंग टीम भी लगातार जंगल में उसकी लोकेशन ट्रैक कर रही थी। पिछले कुछ दिनों से मादा चीता शिकार की तलाश में जंगल से निकलकर रिहायशी इलाकों के करीब पहुंचने लगी थी। इसे देखते हुए वन विभाग ने लोगों और चीते दोनों की सुरक्षा के लिए रेस्क्यू का फैसला लिया। इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक: इंडियामार्ट से एसी गैस खरीदने और बेटे की गिरफ्तारी का झांसा देकर 1.72 लाख उड़ाए लोकेशन मिलते ही शुरू हुआ ऑपरेशन गुरुवार दोपहर बरी-पनिहार के जंगल में चीते की सटीक लोकेशन मिलने के बाद विशेषज्ञ टीम ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर रेस्क्यू अभियान शुरू किया। सुरक्षित दूरी से चीते को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) किया गया। इसके बाद पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसे पिंजरे में रखा गया और विशेष वाहन से सुरक्षित कूनो नेशनल पार्क रवाना कर दिया गया। पहले भी ग्वालियर तक पहुंच चुके हैं चीते वन विभाग के अनुसार, पिछले करीब 10 महीनों में कूनो नेशनल पार्क से कई चीते प्राकृतिक विचरण करते हुए श्योपुर और शिवपुरी के जंगलों से होते हुए ग्वालियर वन मंडल के घाटीगांव, तिघरा और पनिहार क्षेत्र तक पहुंच चुके हैं। यहां पर्याप्त शिकार और अनुकूल वातावरण होने के कारण कई चीते कुछ समय तक इन जंगलों में रुके भी हैं। नाना पटवारी ने मानी पुरानी ड्रग्स की लत, बोले- रिहैब के बाद छोड़ा नशा; कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को बताया राजनीतिक प्रतिशोध DFO ने बताया पूरी तरह सुरक्षित है चीता ग्वालियर वन मंडल के डीएफओ मुकेश पटेल ने बताया कि मादा चीता CCB-3 का रेस्क्यू पूरी तरह सफल रहा। पूरे अभियान के दौरान वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की टीम मौजूद रही। सभी जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए चीते को सुरक्षित हालत में कूनो नेशनल पार्क भेज दिया गया। ग्रामीणों से की अपील वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि जंगल या आसपास किसी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई दे तो उसके पास जाने या उसे घेरने की कोशिश न करें। इसकी जानकारी तुरंत वन विभाग को दें, ताकि विशेषज्ञ टीम समय रहते सुरक्षित कार्रवाई कर सके।

धर्मांतरण मामले में विशेष अदालत का मानवीय दृष्टिकोण, गर्भावस्था के आधार पर नीदा खान को जमानत, आदेश की कानूनी टिप्पणी चर्चा में

नई दिल्ली । महाराष्ट्र के नासिक में धर्मांतरण से जुड़े एक मामले में विशेष अदालत ने आरोपी नीदा खान को जमानत प्रदान की है। अदालत का यह आदेश कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। न्यायालय ने अपने निर्णय में आरोपी की गर्भावस्था और अजन्मे बच्चे के हितों को महत्वपूर्ण आधार माना। साथ ही आदेश में भगवान कृष्ण के जन्म का संदर्भ देते हुए कहा गया कि किसी भी बच्चे को जेल में जन्म लेने से जुड़ी परिस्थितियों और उससे उत्पन्न सामाजिक प्रभावों का सामना नहीं करना चाहिए। विशेष अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी लगभग पांच माह की गर्भवती है और इस तथ्य को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं है। न्यायालय ने कहा कि जमानत पर विचार करते समय केवल आरोपी की स्थिति ही नहीं, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के अधिकारों और भविष्य को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। इसी आधार पर न्यायिक विवेक का उपयोग करते हुए जमानत मंजूर की गई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश में भगवान कृष्ण के जन्म का उल्लेख केवल एक मानवीय और सांस्कृतिक संदर्भ के रूप में किया गया है। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस टिप्पणी का मामले के आरोपों की सत्यता या असत्यता से कोई संबंध नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत का निर्णय आरोपों के गुण-दोष पर आधारित अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। मामले में नीदा खान पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला सहकर्मी पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया और धार्मिक भावनाओं से जुड़े कथित आपत्तिजनक बयान दिए। जांच एजेंसियों के अनुसार, उन पर धार्मिक साहित्य वितरित करने, बुर्का उपलब्ध कराने और मोबाइल फोन में धार्मिक एप्लिकेशन इंस्टॉल कराने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण न्यायालय में सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा। विशेष अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस द्वारा आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। न्यायालय ने माना कि जांच पूरी होने के बाद आरोपी की निरंतर न्यायिक हिरासत की आवश्यकता का मूल्यांकन अलग दृष्टिकोण से किया जा सकता है। साथ ही मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के विरुद्ध दर्ज विभिन्न मामलों की जांच अभी भी जारी है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आपराधिक मामले में जमानत दिए जाने का अर्थ आरोपी को दोषमुक्त घोषित करना नहीं होता। जमानत केवल एक अंतरिम कानूनी राहत होती है, जिसे न्यायालय उपलब्ध परिस्थितियों, जांच की स्थिति, आरोपी की व्यक्तिगत परिस्थितियों, साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना और अन्य कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रदान करता है। अंतिम निर्णय मुकदमे की पूरी सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही दिया जाता है। इस मामले में भी अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उसके आदेश को आरोपों की वैधता पर टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मुकदमे की सुनवाई नियमानुसार आगे जारी रहेगी और अभियोजन तथा बचाव पक्ष को अपने-अपने साक्ष्य और तर्क प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलेगा। अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक: इंडियामार्ट से एसी गैस खरीदने और बेटे की गिरफ्तारी का झांसा देकर 1.72 लाख उड़ाए

इंदौर । इंदौर में साइबर अपराधियों ने एक ही दिन में दो अलग-अलग वारदातों को अंजाम देकर दो लोगों से कुल 1.72 लाख रुपए की ठगी कर ली। एक मामले में इंडियामार्ट पर एसी गैस बेचने के नाम पर ऑटो पार्ट्स कारोबारी से 82 हजार रुपए हड़प लिए गए, जबकि दूसरे मामले में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को उसके बेटे की रेप केस में गिरफ्तारी का डर दिखाया गया और जमानत के नाम पर 90 हजार रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। दोनों मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पहला मामला छोटी ग्वालटोली थाना क्षेत्र का है। रानी बाग निवासी ऑटो पार्ट्स व्यापारी पवनदीप सिंह खनूजा ने एसी गैस खरीदने के लिए इंडियामार्ट पर सप्लायर का नंबर तलाशा। वहां उन्हें श्रुति इंटरप्राइजेज के नाम से कुलदीप अग्रवाल का मोबाइल नंबर मिला। बातचीत के बाद आरोपी ने व्हाट्सएप पर एसी गैस के 220 टिन का इनवॉइस और फोटो भेजकर 82 हजार रुपए ऑनलाइन जमा कराने को कहा। व्यापारी ने भरोसा कर मुंबई स्थित बैंक खाते में भुगतान कर दिया। इसके बाद आरोपी ने गति इंटरप्राइजेज के नाम से एक बिल्टी भी भेजी, लेकिन काफी समय तक सामान नहीं पहुंचा। जांच करने पर पता चला कि भेजी गई बिल्टी एआई तकनीक से तैयार की गई फर्जी दस्तावेज थी। जब आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया, तब व्यापारी को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने बैंक में भुगतान रोकने का प्रयास किया और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। दूसरी घटना कनाड़िया थाना क्षेत्र की है। राज वर्मा के पास व्हाट्सएप कॉल कर खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि उनके बेटे को रेप के आरोप में तीन अन्य युवकों के साथ गिरफ्तार किया गया है। ठग ने बेटे को जेल से बचाने के लिए तत्काल तीन लाख रुपए की मांग की और डर का माहौल बनाकर पैसे भेजने का दबाव बनाया। घबराए राज वर्मा ने अपने पास केवल 90 हजार रुपए होने की बात कही। इसके बाद ठगों ने बताए गए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करा ली। कुछ देर बाद जब उन्होंने अपने बेटे से संपर्क किया तो पता चला कि वह पूरी तरह सुरक्षित है और उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। दोनों मामलों में साइबर हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों के आधार पर संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर आरोपियों की पहचान में जुटी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान केवल सत्यापित विक्रेताओं से ही लेनदेन करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अग्रिम भुगतान न करें और यदि कोई पुलिस, सीबीआई या अन्य अधिकारी बनकर फोन पर गिरफ्तारी या जमानत के नाम पर पैसे मांगे तो पहले संबंधित व्यक्ति या स्थानीय पुलिस से पुष्टि जरूर करें। ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन धोखाधड़ी की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में दें।

मतदाता सूची शुद्धीकरण अभियान का व्यापक असर, ओडिशा सहित चार राज्यों से लाखों नाम हटे, निर्वाचन प्रक्रिया पर बढ़ी राजनीतिक हलचल

नई दिल्ली । देश के चार राज्यों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान के बाद मतदाता सूचियों में बड़े स्तर पर बदलाव दर्ज किए गए हैं। ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम में अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद 22 लाख से अधिक नाम सूची से हटाए गए हैं। संशोधित सूची जारी होने के साथ ही राजनीतिक दलों के बीच इस विषय को लेकर चर्चा तेज हो गई है, जबकि निर्वाचन प्राधिकरण का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों और सत्यापन के आधार पर पूरी की गई है। इस अभियान का सबसे अधिक प्रभाव ओडिशा में देखने को मिला, जहां मतदाता सूची से 21 लाख से अधिक नाम हटाए गए। संशोधन के बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 3.25 करोड़ रह गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इनमें पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग संतुलित बनी हुई है तथा मतदाता लिंगानुपात में भी सुधार दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सूची से वे नाम हटाए गए हैं जो सत्यापन के दौरान मृत, स्थानांतरित या दोहराव वाले पाए गए। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी विशेष पुनरीक्षण का असर दिखाई दिया। मणिपुर में हजारों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जिसके बाद राज्य की संशोधित मतदाता संख्या 20 लाख से अधिक दर्ज की गई। इसी प्रकार मिजोरम में भी व्यापक सत्यापन के बाद हजारों नाम हटाए गए। राज्य की नई मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नए युवा मतदाताओं को भी शामिल किया गया है, जिससे चुनावी भागीदारी में नई पीढ़ी की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। देश के सबसे कम आबादी वाले राज्य सिक्किम में भी पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत हजारों नाम सूची से हटाए गए। हालांकि कुल संख्या अन्य राज्यों की तुलना में कम रही, लेकिन निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य सभी राज्यों में मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना था। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सत्यापन अभियान चलाया गया और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आवश्यक संशोधन किए गए। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद राजनीतिक दलों के बीच विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ विपक्षी दलों ने प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापन के मानकों को लेकर सवाल उठाए हैं तथा प्रभावित मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक संशोधन विधिक प्रावधानों के अनुरूप किया गया है और केवल उन्हीं नामों को हटाया गया है जो निर्धारित मानकों पर पात्र नहीं पाए गए। निर्वाचन प्राधिकरण का मानना है कि समय-समय पर मतदाता सूची का अद्यतन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे मृत, स्थानांतरित और डुप्लिकेट नामों को हटाकर वास्तविक और पात्र मतदाताओं की सूची तैयार की जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य किसी भी पात्र मतदाता को वंचित करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता बनाए रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि संशोधित मतदाता सूची का प्रभाव आगामी चुनावों की रणनीतियों पर भी पड़ सकता है। राजनीतिक दल अब नई मतदाता संरचना के आधार पर अपनी चुनावी तैयारियों और बूथ स्तर की रणनीति की समीक्षा कर सकते हैं। आने वाले समय में इस पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा जारी रहने की संभावना है, जबकि अंतिम उद्देश्य निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय चुनावी प्रक्रिया सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।

चारधाम से लौटते वक्त मौत ने घेरा: 'बस छूट जाती तो पत्नी आज जिंदा होती', दौसा हादसे के पीड़ित की भावुक कहानी

मध्यप्रदेश । चारधाम यात्रा पूरी कर खुशियों के साथ घर लौट रहे इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार चंद्रप्रकाश (चंदू) गुप्ता ने कभी नहीं सोचा था कि यह सफर उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन जाएगा। 30 जून की रात राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर हुए भीषण बस हादसे में उनकी पत्नी निर्मला गुप्ता की मौत हो गई। हादसे से कुछ घंटे पहले ही निर्मला ने मुस्कुराते हुए सोशल मीडिया पर ‘यात्रा पूरी’ लिखकर स्टेटस लगाया था। परिवार से बात हुई, भविष्य की योजनाएं बनीं, लेकिन घर पहुंचने से पहले ही जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया जिसने पूरा परिवार बिखेर दिया। चंद्रप्रकाश गुप्ता बताते हैं कि उनकी पत्नी पिछले तीन वर्षों से दोबारा चारधाम यात्रा पर जाने की जिद कर रही थीं। पहले भी दोनों यात्रा कर चुके थे, लेकिन निर्मला का कहना था कि अब वहां काफी बदलाव हो चुके हैं और एक बार फिर दर्शन करना चाहती हैं। यात्रा की तैयारी पूरी थी और ट्रेन की कन्फर्म टिकट भी मिल चुकी थी, लेकिन सुविधा को देखते हुए बस से जाने का फैसला किया गया। आज उन्हें सबसे ज्यादा यही बात सालती है कि अगर उस दिन बस नहीं पकड़ी होती तो शायद उनकी पत्नी आज उनके साथ होती। हरिद्वार से लौटते समय बस पकड़ने के लिए दोनों ने काफी मशक्कत की। पहले गलत बस स्टैंड पहुंचे, फिर सामान उठाकर कई सौ मीटर पैदल चलना पड़ा। कई बार बस संचालक से संपर्क किया और आखिरकार इंदौर जाने वाली बस मिल गई। उस समय उन्हें लगा कि बस छूटने से बच गए, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यही बस निर्मला की आखिरी यात्रा साबित होगी। बस में बैठने के बाद निर्मला बेहद खुश थीं। उन्होंने बच्चों से फोन पर बात की और सोशल मीडिया पर ‘यात्रा पूरी’ का स्टेटस लगाया। इंदौर लौटने के बाद विदिशा, वृंदावन, सांवरिया सेठ और कुलदेवी के दर्शन की भी योजना बना ली गई थी। परिवार के साथ आने वाले दिनों की बातें हो रही थीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। रात करीब ढाई बजे तेज धमाके के साथ बस आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऊपर की बर्थ पर सो रहे यात्री नीचे गिर पड़े और कुछ ही पलों में बस में अफरा-तफरी मच गई। चंद्रप्रकाश बताते हैं कि उनकी पत्नी खिड़की की तरफ सो रही थीं और उसी दिशा से ट्रेलर बस के अंदर तक घुस आया। उन्होंने कई बार पत्नी को आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने किसी तरह पत्नी का फंसा हुआ पैर निकाला और उन्हें बाहर लाने की कोशिश की, लेकिन तभी किसी ने उन्हें जबरदस्ती बस से बाहर खींच लिया। कुछ ही क्षणों में बस आग की लपटों में घिर गई। वे दोबारा पत्नी को बचाने दौड़े, लेकिन आग इतनी तेजी से फैल चुकी थी कि अंदर जाना असंभव हो गया। उनकी आंखों के सामने ड्राइवर भी स्टीयरिंग में फंसा रह गया और जिंदा जल गया। चंद्रप्रकाश कहते हैं कि हादसे के बाद के वे सात-आठ मिनट उनकी पूरी जिंदगी बदल देने वाले थे। मोबाइल, सामान और जीवनसाथी—सब कुछ एक साथ छिन गया। सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात की रही कि आसपास मौजूद कई लोग वीडियो बनाते रहे, लेकिन मदद के लिए बहुत कम लोग आगे आए। आखिरकार एक युवक ने उन्हें अपना मोबाइल दिया, जिससे उन्होंने बेटे को फोन कर सिर्फ इतना कहा—”बहुत बड़ा हादसा हो गया है।” करीब 44 वर्षों तक साथ निभाने वाली निर्मला गुप्ता को याद करते हुए उनकी आंखें भर आती हैं। वे बताते हैं कि बच्चों की पढ़ाई से लेकर परिवार की हर जिम्मेदारी उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाई। तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने और जीवन में आगे बढ़ाने में उनका सबसे बड़ा योगदान था। सरल स्वभाव, सादगी और परिवार के प्रति समर्पण ही उनकी पहचान थी। आज चंद्रप्रकाश गुप्ता के लिए चारधाम यात्रा की यादें आस्था से ज्यादा एक ऐसे दर्द की कहानी बन चुकी हैं, जिसने कुछ ही मिनटों में उनका पूरा संसार बदल दिया। उनके शब्दों में, “हम घर लौट रहे थे… लेकिन एक पल में सब खत्म हो गया।”